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27. बुरी आत्माओं का क्या काम है? बुरी आत्माओं का काम कैसे प्रकट होता है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

शैतान की ओर से कौन से कार्य आते हैं? उस कार्य में जो शैतान की ओर से आता है, ऐसे लोगों में दर्शन अस्पष्ट और धुंधले होते हैं, और वे सामान्य मनुष्यत्व के बिना होते हैं, उनमें उनके कार्यों के पीछे की प्रेरणाएँ गलत होती हैं, और यद्यपि वे परमेश्वर से प्रेम करना चाहते हैं, फिर भी उनके भीतर सदैव दोषारोपण रहते हैं, और ये दोषारोपण और विचार उनमें सदैव हस्तक्षेप करते रहते हैं, जिससे वे उनके जीवन की बढ़ोतरी को सीमित कर देते हैं और परमेश्वर के समक्ष सामान्य परिस्थितियों को रखने से उन्हें रोक देते हैं। कहने का अर्थ है कि जैसे ही लोगों में शैतान का कार्य आरंभ होता है, तो उनके हृदय परमेश्वर के समक्ष शांत नहीं हो सकते, उन्हें नहीं पता होता कि वे स्वयं के साथ क्या करें, सभा का दृश्य उन्हें वहाँ से भाग जाने को बाध्य करता है, और वे तब अपनी आँखें बंद नहीं रख पाते जब दूसरे प्रार्थना करते हैं। दुष्ट आत्माओं का कार्य मनुष्य और परमेश्वर के बीच के सामान्य संबंध को तोड़ देता है, और लोगों के पहले के दर्शनों या उनके जीवन प्रवेश के पिछले मार्ग को बिगाड़ देता है, अपने हृदयों में वे कभी परमेश्वर के करीब नहीं आ सकते, ऐसी बातें निरंतर होती रहती हैं जो उनमें बाधा उत्पन्न करती हैं और उन्हें बंधन में बाँध देती हैं, और उनके हृदय शांति प्राप्त नहीं कर पाते, जिससे उनमें परमेश्वर से प्रेम करने की कोई शक्ति नहीं बचती, और उनकी आत्माएँ पतन की ओर जाने लगती हैं। शैतान के कार्यों के प्रकटीकरण ऐसे हैं। शैतान का कार्य निम्न रूपों में प्रकट होता है अपने स्थान और गवाही में स्थिर खड़े नहीं रह सकना, तुम्हें ऐसा बना देना जो परमेश्वर के समक्ष दोषी हो, और जिसमें परमेश्वर के प्रति कोई विश्वासयोग्यता न हो। शैतान के हस्तक्षेप के समय तुम अपने भीतर परमेश्वर के प्रति प्रेम और वफ़ादारी को खो देते हो, तुम परमेश्वर के साथ एक सामान्य संबंध से वंचित कर दिए जाते हो, तुम सत्य या स्वयं के सुधार का अनुसरण नहीं करते, तुम पीछे हटने लगते हो, और निष्क्रिय बन जाते हो, तुम स्वयं को आसक्त कर लेते हो, तुम पाप के फैलाव को खुली छूट दे देते हो, और पाप से घृणा भी नहीं करते; इससे बढ़कर, शैतान का हस्तक्षेप तुम्हें स्वच्छंद बना देता है, यह तुम्हारे भीतर से परमेश्वर के स्पर्श को हटा देता है, और तुम्हें परमेश्वर के प्रति शिकायत करने और उसका विरोध करने को प्रेरित करता है, जिससे तुम परमेश्वर पर सवाल उठाते हो, और फिर तुम परमेश्वर को त्यागने तक को तैयार होने लगते हो। यह सब शैतान का कार्य है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "पवित्र आत्मा का कार्य और शैतान का कार्य" से उद्धृत

आज कुछ दुष्ट आत्माएँ हैं जो मनुष्य को धोखा देने के लिए अलौकिक चीजों के माध्यम से कार्य करती हैं; जो उनके द्वारा नक़ल किये जाने के अलावा और कुछ नहीं है, यह ऐसे कार्य के द्वारा मनुष्य को धोखा देने के लिए है जो वर्तमान में पवित्र आत्मा द्वारा नहीं किया जाता है। कई बुरी आत्माएँ चमत्कार के कार्यों और बीमारी को चंगा करने की नक़ल करती हैं; वे बुरी आत्माओं के कार्य के अलावा और कुछ नहीं हैं, क्योंकि पवित्र आत्मा वर्तमान में ऐसा कार्य अब और नहीं करता है। वे सभी जो उस समय के बाद से पवित्र आत्मा के कार्य की नकल करते हैं—वे निश्चय ही बुरी आत्माएँ हैं। उस समय इस्राएल में किया गया समस्त कार्य अलौकिक था। लेकिन, पवित्र आत्मा अब इस तरीके से कार्य नहीं करता है, और ऐसा कोई भी कार्य, शैतान का कार्य और उपद्रव है और बुरी आत्माओं से आता है। लेकिन तुम यह नहीं कह सकते हो कि समस्त अलौकिक चीज़ें बुरी आत्माओं का कार्य है। यह परमेश्वर के कार्य के युग पर निर्भर करता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "देहधारण का रहस्य (1)" से उद्धृत

यदि, वर्तमान समय में, कोई व्यक्ति उभर कर आता है जो चिह्नों और चमत्कारों को प्रदर्शित करने, पिशाचों को निकालने, चंगाई करने में और कई चमत्कारों को करने में समर्थ है, और यदि यह व्यक्ति दावा करता है कि वो यीशु की वापसी है, तो यह दुष्टात्माओं की जालसाजी और उसका यीशु की नकल करना होगा। इस बात को स्मरण रखें! परमेश्वर एक ही कार्य को दोहराता नहीं है। यीशु के कार्य का चरण पहले ही पूर्ण हो चुका है, और परमेश्वर फिर से उस चरण के कार्य को पुनः नहीं दोहराएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" से उद्धृत

जब मनुष्य को परमेश्वर के बारे में कुछ समझ आ जाती है, तो वह उसके लिए कष्ट सहने और उसके लिए जीने को तैयार हो जाता है। हालाँकि, मनुष्य की कमजोरियाँ भी शैतान के नियंत्रण में होती हैं, और यह अभी भी उनके लिए पीड़ा का कारण बन सकता है। दुष्ट आत्माएँ अभी भी लोगों के साथ हस्तक्षेप करने के लिए कार्य कर सकती हैं, जिससे वे उलझन की मनःस्थिति में पड़ सकते हैं, पागल हो सकते हैं, मानसिक रूप से परेशान महसूस कर सकते हैं और सभी चीज़ों में हस्तक्षेप से पीड़ित हो सकते हैं। अभी भी मन या प्राण की कुछ चीज़ें मनुष्य के भीतर होती हैं शैतान द्वारा जिन्हें नियंत्रित और जिनमें हेरफेर किया जा सकता है। यही कारण है कि आपके लिए बीमारियाँ, परेशानियाँ होना और आत्मघाती महसूस करना संभव है, और कभी-कभी दुनिया की वीरानी महसूस करना, या यह महसूस करना भी संभव है कि जीवन का कोई अर्थ नहीं है। कहने का तात्पर्य यह है, कि यह पीड़ा अभी भी शैतान के स्वामित्व के अधीन है; यह मनुष्य की घातक कमज़ोरियों में से एक है। शैतान अभी भी उन चीज़ों का उपयोग करने में सक्षम है जिन्हें इसने भ्रष्ट किया और रौंदा है—ये वे हथियारहैं जिन्हें शैतान मनुष्यों के विरुद्ध उपयोग कर सकता है। ...दुष्‍टात्‍माएँ अपना कार्य करने के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ती हैं। वे तुम्‍हारे भीतर से बोल सकती हैं या तुम्‍हारे कानों में खुसर-फुसर कर सकती हैं, अथवा तुम्‍हारे विचारों और मन को बेतरतीब बना सकती हैं, और वे पवित्र आत्‍मा की गतिविधि को दबा सकती हैं ताकि तुम उसे महसूस न कर सको। उसके बाद वे तुममें दखल देने लगती हैं, तुम्‍हारी सोच को भ्रमित तथा तुम्‍हारे दिमाग को अस्‍तव्‍यस्‍त करने लगती हैं, जिस कारण तुम अशांत और परेशान हो जाते हो। दुष्‍टात्‍माओं का मनुष्‍य पर कार्य इस प्रकार का होता है, जब तक तुम्‍हारे भीतर इसकी समझ नहीं होगी, तुम अपने आप को बड़े खतरे में पाओगे।

— "मसीह की बातचीतों के अभिलेख" में "परमेश्वर के अनुभव करने के मायने" से उद्धृत

कुछ लोग कहते हैं कि पवित्र आत्मा हर समय उनमें कार्य कर रहा है। यह असंभव है। यदि वे कहते कि पवित्र आत्मा हमेशा उनके साथ है, तो यह यथार्थ पर आधारित होता। यदि वे कहते कि उनकी सोच और उनका बोध हर समय सामान्य है, तो यह भी यथार्थ पर आधारित होता और यह दिखाता कि पवित्र आत्मा उनके साथ है। यदि वे कहते हैं कि पवित्र आत्मा हमेशा उनके भीतर कार्य कर रहा है, कि वेपरमेश्वर द्वारा प्रबुद्ध किए गए हैं और हर पल पवित्र आत्मा द्वारा स्पर्श किए जाते हैं, और हर समय नया ज्ञान प्राप्त करते हैं, तो यह सामान्य नहीं है। यह नितान्त अलौकिक है! बिना किसी संदेह के, ऐसे लोग बुरी आत्माएँ हैं! यहाँ तक कि जब परमेश्वर का आत्मा देह में आता है, तब ऐसे समय होते हैं जब उसे भी अवश्य भोजन करना चाहिए और आराम करना चाहिए—मनुष्य की तो बात ही छोड़ो। जो लोग बुरी आत्माओं द्वारा ग्रस्त हो गए हैं, वे भावनाओं और देह की कमजोरी से रहित प्रतीत होते हैं। वे सब कुछ त्यागने और छोड़ने में सक्षम हैं, वे यातना को सहने में सक्षम होते हैं और जरा सी भी थकान महसूस नहीं करते हैं, मानो कि वे देहातीत हैं चुके हों। क्या यह नितान्त अलौकिक नहीं है? दुष्ट आत्मा का कार्य अलौकिक है, और ये चीजें मनुष्य के द्वारा अप्राप्य हैं। जो लोग विभेद नहीं कर सकते हैं वे जब ऐसे लोगों को देखते हैं, तो ईर्ष्या करते हैं, और कहते हैं कि परमेश्वर पर उनका विश्वास बहुत मजबूत है, और बहुत अच्छा है, और कहते हैं कि वे कभी कमजोर नहीं पड़ते हैं। वास्तव में, यह दुष्ट आत्मा के कार्य की अभिव्यक्ति है। इसका कारण यह है कि एक सामान्य अवस्था के लोगों में अनिवार्य रूप से मानवीय कमजोरियाँ होती हैं; यह उन लोगों की सामान्य अवस्था है जिनमें पवित्र आत्मा की उपस्थिति होती है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "अभ्यास (4)" से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

बुरी आत्माओं के काम की सबसे स्पष्ट विशेषता यह है कि यह अलौकिक है, जो शब्द वे बोलतीं हैं या जो लोगों से वे करने को कहतीं हैं वो बातें असामान्य, बेतुकी और सामान्य मानवता और मानवीय संबंधों की मूल नैतिकता से भी विश्वासघात करने वाली होती हैं, और वे केवल लोगों को धोखा देने, उन्हें परेशान करने और भ्रष्ट करने के लिए होतीं हैं। जब दुष्ट आत्माएं लोगों को अपने वश में कर लेतीं हैं, तो कुछ लोग बहुत डर महसूस करते हैं, कुछ असामान्य हो जाते हैं, जबकि अन्य लोग एक धुंध में पड़ जाते हैं, और कुछ खुद को अत्यधिक चिंतित और शांत बैठने में असमर्थ पाते हैं। किसी भी हाल में, जब दुष्ट आत्माएं लोगों को अपने वश में कर लेतीं हैं, तो वे बदल जाते हैं, कुछ ऐसा बन जाते हैं जो न तो मानव है और न ही राक्षस, और अपनी सामान्य मानवता खो देते हैं। यह इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त है कि दुष्ट आत्माओं का सार दुष्ट और बदसूरत है, जो कि बिल्कुल शैतान का सार है। दुष्ट आत्माएं लोगों से घृणा करवातीं हैं और उन्हें तुच्छ बनाती हैं, और लोगों को उनसे बिल्कुल कोई लाभ या मदद नहीं मिलती है। केवल एक चीज़ जो शैतान और सभी प्रकार की बुरी आत्माएं करने में सक्षम हैं, वो है लोगों को भ्रष्ट करना, उन्हें हानि पहुँचाना और निगल जाना।

जिन लोगों में दुष्ट आत्माओं का काम है (जो राक्षसों के वश में हैं) उनकी मुख्य अभिव्यक्तियां इस प्रकार हैं:

पहला प्रकार यह है कि बुरी आत्माएं लोगों को अक्सर ऐसे-वैसे काम करने के लिए कहतीं हैं, या किसी को कुछ बताने को कहतीं हैं, या उन्हें झूठी भविष्यवाणियाँ करने के लिए निर्देशित करती हैं।

दूसरा प्रकार है कि लोग अक्सर प्रार्थना में तथाकथित "भाषाएँ" बोलते हैं जो कोई नहीं समझता है, खुद बोलने वाला भी इसे नहीं समझता है। कुछ वक्ता स्वयं "भाषाओँ की व्याख्या" भी कर सकते हैं।

तीसरा प्रकार यह है एक व्यक्ति अक्सर अत्यधिक बारम्बारता से प्रकाशन ग्रहण करता है, एक क्षण में बुरी आत्माओं द्वारा एक दिशा में तो दूसरे क्षण में दूसरी दिशा में संचालित होता है। वह हर वक्त एक व्याकुलता की स्थिति में रहता है।

चौथा प्रकार यह है कि जिन लोगों में बुरी आत्माओं का काम होता है, वे बड़ी तत्परता से कुछ करना चाहते हैं, उनमें इंतजार कर पाने का धीरज नहीं होता है, वे आधी रात में भी दौड़ पड़ते हैं और उनका व्यवहार विशेष रूप से असामान्य होता है।

पांचवां प्रकार यह है कि जिन लोगों में बुरी आत्माओं का काम होता है वे निरंकुश रूप से घमंडी होते हैं, उनमें विवेक नहीं होता है, उनके सभी कथन दूसरों को नीचा दिखाने वाले होते हैं और आदेश देने वाले पद से आते हैं। वे लोगों को उलझाते हैं और दुष्टात्माओं की तरह उन्हें चीज़ें करने को बाध्य करते हैं।

छटवाँ प्रकार यह है कि जिन लोगों में बुरी आत्माओं का काम होता है वे सत्य के बारे में सहभागिता करने में असमर्थ होते हैं, परमेश्वर के कार्य पर ध्यान देना तो दूर की बात है, वे परमेश्वर के खिलाफ होते हैं और मनमाने ढंग से काम करते हैं, कलीसिया की सामान्य व्यवस्था को भंग करने के लिए सभी प्रकार के उपद्रव करते हैं।

सातवाँ प्रकार यह है कि जिस व्यक्ति में बुरी आत्माओं का काम होता है वह बिना कारण अपने आपको किसी और के रूप में दिखाता है या दावा करता है कि उसे किसी ने भेजा है और लोगों को उसकी बात सुननी चाहिए। कोई नहीं समझ पाता है कि वह कहाँ से आया है।

आँठवा प्रकार यह है कि जिन लोगों में बुरी आत्माओं का काम होता है उनके पास आम तौर पर कोई सामान्य समझ नहीं होती है, न ही वे सत्य समझते हैं; उनमें चीज़ें ग्रहण करने की कोई क्षमता नहीं होती और वे पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्ध भी नहीं किये गये होते हैं, हम देखते हैं कि चीज़ें ग्रहण करने में ये लोग असाधारण रूप से बेढंगे होते हैं और बिल्कुल भी सही नहीं होते हैं।

नौंवा प्रकार यह है कि जिन लोगों में बुरी आत्माओं का काम होता है वे काम के दौरान दूसरों को उपदेश देने पर विशेष ध्यान देते हैं, वे हमेशा निरंकुश ढंग से व्यवहार करते हैं, वे हमेशा बाधा या खलल उत्पन्न करते हैं; हर चीज़ जो वो कहते और करते हैं वो लोगों पर हमला करती है, उन्हें बांधती है और दूसरे लोगों को भ्रष्ट करती है, वे लोगों के संकल्प तोड़ने के हद तक जाते हैं और उन्हें नकरात्मक बनाते हैं जिसकी वजह से लोग अपने आपको फिर उठा नहीं पाते हैं। वे सिर्फ शुद्ध रूप से शैतान हैं, जो दूसरों को हानि पहुंचाते हैं, उनसे खिलवाड़ करते हैं और उन्हें निगल जाते हैं, और अपनी मनमानी कर पाने में वे मन ही मन खुश होते हैं। यह दुष्ट आत्माओं के काम का प्राथमिक उद्देश्य है।

दसवाँ प्रकार यह है कि जिन लोगों में बुरी आत्माओं का काम होता है वे एक बिल्कुल ही असामान्य जीवन जीते हैं। उनकी आँखों में एक हिंसक चमक होती है और उनके कहे शब्द बहुत ही भयानक होते हैं मानो कि एक दुष्टात्मा धरती पर उतर आई हो। इस प्रकार के व्यक्ति के जीवन में कोई ढंग नहीं होता, वो बहुत अस्थिर होते हैं और बिना प्रशिक्षण के एक जंगली जानवर के समान ही उनका भी अनुमान नहीं लगाया जा सकता। वे दूसरों के लिए अत्यंत घिनौने और अप्रिय होते हैं। एक ऐसा वुक्ति जिसे दुष्टात्माओं ने बांध रखा है, ठीक ऐसा ही दिखता है।

ऊपर बताये गये दस प्रकार दुष्ट आत्माओं के काम की मुख्य अभिव्यक्तियाँ हैं। कोई भी व्यक्ति जो इन अभिव्यक्तियों में से किसी एक को भी प्रदर्शित करता है, उसमें निश्चित रूप से दुष्ट आत्माओं का काम होगा। साफ़ तौर पर कहें तो, जो लोग दुष्ट आत्माओं के काम की उपरोक्त अभिव्यक्तियों में से चाहे कोई भी प्रकार प्रदर्शित करते हों, उनके पास बुरी आत्माओं का काम है। एक व्यक्ति जिसमें बुरी आत्माओं का काम होता है वह अक्सर ऐसे लोगों से दूर रहता है और उनसे नफ़रत करता है, जिनमें पवित्रात्मा काम कर रहा होता है और जो सत्य के बारे में संगति कर सकते हैं। अक्सर, कोई जितना अधिक बेहतर होता है, वो उस पर उतना ही हमला करना और उसकी निंदा करना चाहता है। कोई जितना अधिक मूर्ख होता है, वह उतना ही उसे मक्खन लगाता है, वो खासकर ऐसे लोगों के सम्पर्क में आना चाहता है। जब दुष्ट आत्माएं काम करती हैं, वे हमेशा सच और झूठ में भ्रम पैदा करती हैं, सकरात्मक को नकरात्मक बताती हैं और नकरात्मक को सकरात्मक। यह सटीक रूप से दुष्टात्माओं का काम है।

— सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की कार्य-व्यवस्था के चयनित वार्षिकवृतांत में "12 समस्याएँ जिन्हें सभी कलीसियाओं को तत्काल हल करने की आवश्यकता है" से उद्धृत

कोई भी आत्मा जिस का कार्य प्रकट रूप से अलौकिक है वह एक दुष्ट आत्मा है, और किसी भी आत्मा का अलौकिक कार्य और कथन जो लोगों में किया जाता है एक दुष्ट आत्मा का कार्य है; सभी साधन जिनके द्वारा दुष्ट आत्माएँ कार्य करती हैं असामान्य और अलौकिक होते हैं, और मुख्य रूप से निम्नलिखित छह तरीकों से व्यक्त होते हैं:

1. लोगों की बोली पर सीधा नियंत्रण, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि दुष्ट आत्मा बात कर रही है, न कि लोग स्वयं सामान्य रूप से बोल रहे हैं;

2. यह भावना कि दुष्ट आत्मा लोगों को निर्देश दे रही है और उन्हें फलां-फलां काम करने का आदेश दे रही है;

3. लोग जो, जब वे किसी कमरे में होते हैं, बता सकते हैं कि कब कोई व्यक्ति अंदर आने ही वाला है;

4. लोग जो प्रायः खुद से बात करती हुई आवाज़ें सुनते हैं जिसे दूसरे नहीं सुन सकते हैं;

5. लोग जो ऐसी चीजों को देखने और सुनने में समर्थ हैं जो कि दूसरे नहीं देख और सुन सकते हैं;

6. लोग जो हमेशा उत्तेजित रहते हैं, और अपने-आप से बात करते रहते हैं, और लोगों के साथ सामान्य वार्तालाप या बातचीत करने में असमर्थ होते हैं।

जिन सभी में दुष्ट आत्मा कार्य कर रही होती है उनमें अनिवार्य रूप से ये छह अभिव्यक्तियाँ पायी जाती हैं। वे अविवेकी होते हैं, असमंजस में रहते हैं, लोगों के साथ सामान्य बातचीत करने में अक्षम होते हैं, ऐसा लगता है मानो कि वे तर्क द्वारा सुधारे नहीं जा सकते हैं, और उनके बारे में कुछ अनासक्त और पारलौकिक होता है। ऐसे लोग दुष्ट आत्मा के द्वारा ग्रस्त होते हैं या उनमें दुष्ट आत्मा कार्य कर रही होती है, दुष्ट आत्माओं का समस्त कार्य प्रत्यक्ष और अलौकिक होता है। दुष्ट आत्माओं का यह सबसे अधिक आसानी से पहचाना जाने वाला कार्य होता है। जब कोई दुष्ट आत्मा किसी पर कब्जा करती है, तो यह उनके साथ खेलती है ताकि वे पूरी तरह से उलझ जाएँ। वे, एक प्रेत के जैसे, अविवेकी बन जाते हैं, जो साबित करता है कि सार रूप में, दुष्ट आत्माएँ बुरी आत्माएँ होती हैं जो लोगों को भ्रष्ट करती है और निगल जाती हैं। दुष्ट आत्माओं के कथनों को पहचानना आसान है: उनके कथन पूरी तरह से उनके बुरे सार का प्रतीक हैं, वे निष्क्रिय, गंदे और बदबूदार होते हैं, उनसे मृत्यु की दुर्गन्ध टपकती है। उन लोगों के लिए जो अच्छी योग्यता के होते हैं, दुष्ट आत्माओं के वचन खोखले, अरुचिकर और अशोभनीय होते हैं, बस केवल झूठ और खोखली बातें होते हैं, वे निरर्थक वचनो के ढेर के समान अव्यवस्थित और पेचीदा महसूस होते हैं। यह दुष्ट आत्माओं की बकवास में से कुछ सबसे आसानी से पहचाने जाने लायक बकवास है। लोगों को भरमाने के लिए, कुछ अधिक "ऊँचे स्तर" की दुष्ट आत्माएँ जब बोलती हैं तो परमेश्वर या मसीह होने का दिखावा करती हैं, जबकि कुछ अन्य स्वर्गदूत या प्रसिद्ध व्यक्ति होने का दिखावा करती हैं। जब वे बोलती हैं, तो ये दुष्ट आत्माएँ परमेश्वर के कई वचनों और वाक्यांशों की या परमेश्वर की आवाज़ की नकल करने में निपुण होती हैं, और जो लोग सत्य को नहीं समझते हैं वे आसानी से "ऊँचे स्तर" की दुष्ट आत्माओं के झाँसे में आ जाते हैं। परमेश्वर के चुने लोगों को स्पष्ट होना चाहिए कि, सार रूप में, दुष्ट आत्माएँ बुरी और बेशर्म होती हैं, और कि भले ही वे "ऊँचे स्तर" की दुष्ट आत्माएँ हों, वे सत्य से सर्वथा विहीन होती हैं। दुष्ट आत्माएँ, आखिरकार दुष्ट आत्माएँ ही होती हैं, दुष्ट आत्माओं का सार बुरा होता है और शैतान के जैसा होता है।

— सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की कार्य-व्यवस्था के चयनित वार्षिकवृतांत में "दुष्टात्माओं, झूठे मसीहों और मसीह-विरोधियों के राक्षसी व्यक्तव्य और भ्रांतियों को कैसे पहचानें" से उद्धृत

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