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25. पवित्र आत्मा का कार्य क्या है? पवित्र आत्मा का कार्य कैसे प्रकट किया जाता है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

पवित्र आत्मा का कार्य सक्रिय अगुवाई करना और सकारात्मक प्रकाशन है। यह लोगों को निष्क्रिय नहीं बनने देता है। यह उनको राहत पहुँचाता है, उन्हें विश्वास और दृढ़ निश्चय देता है और यह परमेश्वर के द्वारा सिद्ध किए जाने का अनुसरण करने के लिए उन्हें योग्य बनाता है। जब पवित्र आत्मा कार्य करता है, तो लोग सक्रिय रूप से प्रवेश कर सकते हैं; वे निष्क्रिय नहीं होते और उन्हें बाध्य भी नहीं किया जाता, बल्कि वे सक्रिय रहते हैं। जब पवित्र आत्मा कार्य करता है तो लोग प्रसन्न और इच्छापूर्ण होते हैं, और वे आज्ञा मानने के लिए तैयार होते हैं, और स्वयं को दीन करने में प्रसन्न होते हैं, और यद्यपि भीतर से पीड़ित और दुर्बल होते हैं, फिर भी उनमें सहयोग करने का दृढ़ निश्चय होता है, वे ख़ुशी-ख़ुशी दुःख सह लेते हैं, वे आज्ञा मान सकते हैं, और वे मानवीय इच्छा से निष्कलंक रहते हैं, मनुष्य की विचारधारा से निष्कलंक रहते हैं, और निश्चित रूप से मानवीय अभिलाषाओं और अभिप्रेरणाओं से निष्कलंक रहते हैं। जब लोग पवित्र आत्मा के कार्य का अनुभव करते हैं, तो वे भीतर से विशेष रूप से पवित्र हो जाते हैं। जो पवित्र आत्मा के कार्य को अपने अंदर रखते हैं वे परमेश्वर के प्रति प्रेम को और अपने भाइयों और बहनों के प्रति प्रेम को अपने जीवनों से दर्शाते हैं, और ऐसी बातों में आनंदित होते हैं जो परमेश्वर को आनंदित करती हैं, और उन बातों से घृणा करते हैं जिनसे परमेश्वर घृणा करता है। ऐसे लोग जो पवित्र आत्मा के कार्य के द्वारा स्पर्श किए जाते हैं, उनमें सामान्य मनुष्यत्व होता है, और वे निरंतर सत्य का अनुसरण करते हैं और उनके पास मानवता होती है। जब पवित्र आत्मा लोगों के भीतर कार्य करता है, तो उनकी परिस्थितियाँ और अधिक बेहतर हो जाती हैं और उनका मनुष्यत्व और अधिक सामान्य हो जाता है, और यद्यपि उनका कुछ सहयोग मूर्खतापूर्ण हो सकता है, परंतु फिर भी उनकी प्रेरणाएँ सही होती हैं, उनका प्रवेश सकारात्मक होता है, वे रूकावट बनने का प्रयास नहीं करते और उनमें कुछ भी दुर्भाव नहीं होता। पवित्र आत्मा का कार्य सामान्य और वास्तविक होता है, पवित्र आत्मा मनुष्य के भीतर मनुष्य के सामान्य जीवन के नियमों के अनुसार कार्य करता है, और वह सामान्य लोगों के वास्तविक अनुसरण के अनुसार लोगों को प्रकाशित करता है और उन्हें अगुवाई देता है। जब पवित्र आत्मा लोगों में कार्य करता है तो वह सामान्य लोगों की आवश्यकता के अनुसार अगुवाई करता और प्रकाशित करता है, वह उनकी आवश्यकताओं के अनुसार उनकी जरूरतों को पूरा करता है, और वह सकारात्मक रूप से उनकी कमियों और अभावों के आधार पर उनकी अगुवाई करता है और उनको प्रकाशित करता है; जब पवित्र आत्मा कार्य करता है, तो यह कार्य मनुष्य के सामान्य जीवन के नियमों के साथ सांमजस्यपूर्ण होता है, और यह केवल वास्तविक जीवन में ही होता है कि लोग पवित्र आत्मा के कार्य को देख सकते हैं। यदि अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में लोग सकारात्मक अवस्था में हों और उनके पास एक सामान्य आत्मिक जीवन हो, तो उनमें पवित्र आत्मा के कार्य पाए जाते हैं। ऐसी अवस्था में, जब वे परमेश्वर के वचनों को खाते और पीते हैं तो उनमें विश्वास आता है, जब वे प्रार्थना करते हैं, तो वे प्रेरित होते हैं, जब उनके साथ कुछ घटित होता है तो वे निष्क्रिय नहीं होते, और उनके साथ कुछ घटित होते समय वे उन सबकों या सीखों को देख सकते हैं जो परमेश्वर चाहता है कि वे सीखें, और वे निष्क्रिय, या कमजोर नहीं होते, और यद्यपि उनके जीवन में वास्तविक कठिनाइयाँ होती हैं, फिर भी वे परमेश्वर के सभी प्रबंधनों की आज्ञा मानने के लिए तैयार रहते हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "पवित्र आत्मा का कार्य और शैतान का कार्य" से उद्धृत

जब पवित्र आत्मा लोगों की प्रबुद्धता के लिए कार्य करता है, तो वह आम तौर पर उन्हें परमेश्वर के कार्य का, और उनकी सच्ची प्रविष्टि और सच्ची अवस्था का ज्ञान देता है। वह उन्हें परमेश्वर के उत्सुक इरादों और उसकी मनुष्य से वर्तमान अपेक्षाओं के बारे में समझने देता है, ताकि उनके पास परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए सब कुछ बलि कर देने का संकल्प हो, ताकि वे परमेश्वर से अवश्य प्रेम करें भले ही वे उत्पीड़न और प्रतिकूल परिस्थितियों को भुगतें, ताकि वे परमेश्वर की गवाही दें भले ही इसका अर्थ अपना खून बहाना और अपना जीवन अर्पित करना हो; उन्हें कोई अफ़सोस नहीं होगा। यदि तेरा इस तरह का संकल्प है तो यह पवित्र आत्मा की हरकतें है, और पवित्र आत्मा का कार्य है—लेकिन जान वे कि तू हर गुजरते पल में इस तरह की हरकतों से संपन्न नहीं है। कभी-कभी बैठकों में जब तू प्रार्थना करते है और परमेश्वर के वचनों को खाता और पीता है, तो तू बेहद द्रवित और प्रेरित महसूस कर सकता है। जब अन्य लोग परमेश्वर के वचनों के अपने अनुभव और समझ पर कुछ संगति साझा करते हैं तो यह बहुत नया और ताजा महसूस होता है, और तेरा हृदय पूरी तरह से स्पष्ट और उज्ज्वल हो जाता है। यह सब पवित्र आत्मा के कार्य से संबंधित है। यदि तू कोई अगुवा है और पवित्र आत्मा तुझे असाधारण प्रबुद्धता और रोशनी देता है, तो जब तू काम करने के लिए कलीसिया में जाता है, वह उन समस्याओं को देखने देता है जो कलीसिया के भीतर मौज़ूद हैं, और जानने देता है कि उनका समाधान करने के लिए सत्य पर संगति को कैसे साझा करें, तुझे अविश्वसनीय रूप से नेक, जिम्मेदार और अपने कार्य में गंभीर बनाता है, तो यह सब पवित्र आत्मा के कार्य से संबंधित है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "अभ्यास (1)" से उद्धृत

पवित्र आत्मा का कार्य विशेष रूप से सामान्य होता है, और जब वह लोगों में कार्य करता है, तब भी उनके जीवन में कठिनाइयाँ होती हैं, वे तब भी रोते हैं, वे तब भी दुःख उठाते हैं, वे तब भी कमज़ोर होते हैं, और ऐसी बहुत सी बातें होती हैं जो उनके लिए अस्पष्ट हों, फिर भी ऐसी अवस्था में वे पीछे हटने से स्वयं को रोक सकते हैं और परमेश्वर से प्रेम कर सकते हैं, और यद्यपि वे रोते हैं और भीतर से व्याकुल होते हैं, वे फिर भी परमेश्वर की प्रशंसा कर सकते हैं; पवित्र आत्मा का कार्य विशेष रूप से सामान्य होता है, और उसमें थोड़ा सा भी अलौकिक नहीं होता। अधिकाँश लोग सोचते हैं कि जैसे ही पवित्र आत्मा कार्य करना आरंभ करता है, वैसे ही लोगों की दशा में परिवर्तन आ जाता है और उनकी आधारभूत बातें हट जाती हैं। ऐसी धारणाएँ त्रुटिपूर्ण होती हैं। जब पवित्र आत्मा मनुष्य के भीतर कार्य करता है, तो मनुष्य की निष्क्रिय बातें तब भी उसमें होती हैं और उसकी अवस्था वही रहती है, परंतु पवित्र आत्मा का प्रकाशन और प्रज्ज्वलन आ जाता है, और इसलिये उसकी दशा और अधिक सक्रिय हो जाती है, उसके भीतर की परिस्थितियाँ सामान्य हो जाती हैं, और वह शीघ्रता से बदल जाता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "पवित्र आत्मा का कार्य और शैतान का कार्य" से उद्धृत

पवित्र आत्मा का समस्त कार्य सामान्य एवं वास्तविक हैं। जब तुम परमेश्वर के वचनों को पढ़ते हो और प्रार्थना करते हो, तो भीतर से तुम प्रकाशमान और अडिग होते हो, बाहरी संसार तुम्हारे साथ हस्तक्षेप नहीं कर सकता है, अन्दर से तुम परमेश्वर से प्रेम करना चाहते हो, सकारात्मक चीज़ों में शामिल होना चाहते हो, और तुम बुराई की दुनिया से घृणा करते हो; यह परमेश्वर के भीतर जीवन जीना है। यह वैसा नहीं है जैसा कि लोग कहते हैं, उतने आनन्द लेने की बात नहीं है—ऐसी बात वास्तविक नहीं है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "वास्तविकता को कैसे जानें" से उद्धृत

कभी-कभी, जब तुम परमेश्वर के वचनों का आनंद ले रहे होते हो, तुम्हारी आत्मा द्रवित हो जातीहै, और तुम्हें लगता है कि तुम परमेश्वर से प्रेम किये बिना नहीं रह सकते, तुम्हारे भीतर बड़ी ताकत है, और ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे तुम दूर नहीं कर सकते। यदि तुम ऐसा महसूस करते हो, तो परमेश्वर के आत्मा ने तुम्हें स्पर्श कर लिया है, और तुम्हारा दिल पूरी तरह से परमेश्वर की ओर मुड़ चुका है, और तुम परमेश्वर से प्रार्थना करोगे और कहोगे: "हे परमेश्वर! हम वास्तव में तुम्हारे द्वारा पूर्वनिर्धारित किये गए और चुने गए हैं। तुम्हारी महिमा मुझे गौरव देती है, और तुम्हारे अपनों में से एक होना मुझे गौरवशाली लगता है। तुम्हारी इच्छा पूरी करने के लिए मैं कुछ भी लगा दूँगा और कुछ भी दे दूँगा, अपने सभी वर्षों को और पूरे जीवन के प्रयासों को तुम्हें समर्पित कर दूँगा।" जब तुम इस तरह प्रार्थना करते हो, तो तुम्हारे दिल में परमेश्वर के प्रति अनंत प्रेम होगा और सच्ची आज्ञाकारिता होगी। क्या तुम्हें कभी भी ऐसा एक अनुभव हुआ है? यदि लोगों को अक्सर परमेश्वर के आत्मा द्वारा छुआ जाता है, तो वे अपनी प्रार्थनाओं में खुद को परमेश्वर के प्रति विशेष रूप से समर्पित करने के लिए तैयार होते हैं: "हे परमेश्वर! मैं तुम्हारी महिमा का दिन देखना चाहता हूँ, और मैं तुम्हारे लिए जीना चाहता हूँ—तुम्हारे लिए जीने के मुकाबले और कुछ भी ज्यादा योग्य या सार्थक नहीं है, और मुझे शैतान और देह के लिए जीने की थोड़ी-सी भी इच्छा नहीं है। तुम मुझे आज अपने लिए जीने की खातिर सक्षम बनाकर जागृत कर लो।" जब तुम इस तरह से प्रार्थना कर लेते हो, तो तुम महसूस करोगे कि तुम परमेश्वर को अपना दिल दिए बिना नहीं रह सकते, कि तुम्हें परमेश्वर को प्राप्त करना ही होगा, और तुम जीते-जी परमेश्वर को पा लेने के बिना ही मर जाने से नफरत करोगे। ऐसी प्रार्थना करने करने के बाद, तुम्हारे भीतर एक अक्षय ताकत होगी, और तुम नहीं जान पाओगे कि यह कहाँ से आती है; तुम्हारे हृदय के अंदर एक असीम शक्ति होगी, और तुम्हें एक आभास होगा कि परमेश्वर बहुत मनोहर है, और वह प्रेम करने के योग्य है। यह तब होता है जब तुम परमेश्वर द्वारा छू लिए जाओगे। क्योंकि जिन सभी लोगों को इस तरह का अनुभव हुआ है, वे सभी परमेश्वर के द्वारा छू लिए गए हैं। जिन लोगों को परमेश्वर अक्सर छूता है, उनके जीवन में परिवर्तन हो जाते हैं, वे अपने संकल्प को बनाने में सक्षम हो जाते हैं और परमेश्वर को पूरी तरह से प्राप्त करने के लिए तैयार होते हैं, उनके दिल में परमेश्वर के लिए प्रेम अधिक मजबूत होता है, उनके दिल पूरी तरह से परमेश्वर की ओर मुड़ चुके होते हैं, उन्हें परिवार, दुनिया, उलझनों, या अपने भविष्य की कोई परवाह नहीं होती, और वे परमेश्वर के लिए जीवन भर के प्रयासों को समर्पित करने के लिए तैयार होते हैं। वे सभी जिन्हें परमेश्वर के आत्मा ने छुआ है, वे ऐसे लोग होते हैं जो सत्य का अनुसरण करते हैं, और जो परमेश्वर द्वारा परिपूर्ण किये जाने की आशा रखते हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और परमेश्वर के चरण-चिन्हों का अनुसरण करो" से उद्धृत

तुम शायद निर्बुद्धि हो सकते हो और तुम्हारे भीतर कोई अंतर या भेद भी न हो, परंतु पवित्र आत्मा तुम्हारे भीतर कार्य कर सकता है ताकि तुम में विश्वास उत्पन्न हो, और तुम्हें यह अनुभव कराए कि तुम कभी पर्याप्त रूप से परमेश्वर से प्रेम नहीं कर सकते, ताकि तुम सहयोग करने के लिए तैयार हो जाओ, मुश्किलें सामने चाहे जितनी भी हों फिर भी तुम सहयोग करने के लिए तैयार हो। तुम्हारे साथ घटनाएँ घटित होंगी और तुम्हारे समक्ष यह स्पष्ट भी नहीं होगा कि वे परमेश्वर की ओर से हैं या शैतान की ओर से, परंतु तुम प्रतीक्षा कर पाओगे, और न तो निष्क्रिय होगे और न ही लापरवाह। यह पवित्र आत्मा का सामान्य कार्य है। जब पवित्र आत्मा लोगों में कार्य करता है, तब भी लोग वास्तविक कठिनाइयों का सामना करते हैं, कभी-कभी वे रोते भी हैं, और कभी-कभी ऐसी बातें भी होती हैं जिन पर वे विजय प्राप्त नहीं कर सकते, परंतु यह सब पवित्र आत्मा के साधारण कार्य का एक चरण है। यद्यपि वे उन विषयों पर विजय प्राप्त नहीं कर सकते, और यद्यपि कभी-कभी वे कमज़ोर होते हैं और शिकायतें करते हैं, फिर भी बाद में वे सम्पूर्ण भरोसे के साथ परमेश्वर पर विश्वास कर सकते हैं। उनकी निष्क्रियता उन्हें सामान्य अनुभवों को प्राप्त करने से नहीं रोक सकती, और इस बात की परवाह किए बिना भी कि लोग क्या कहते हैं, और वे कैसे हमला करते है, वे परमेश्वर से प्रेम कर सकते हैं। प्रार्थना के दौरान वे हमेशा महसूस करते हैं कि जब वे ऐसी बातों का पुनः सामना करते हैं तो वे परमेश्वर के प्रति ऋणी हो जाते हैं, और वे परमेश्वर को संतुष्ट करने और शरीर के कार्यों को त्याग देने का दृढ़ निश्चय करते हैं। यह सामर्थ्य दिखाता है कि उनके भीतर पवित्र आत्मा का कार्य होता है, और यह पवित्र आत्मा के कार्य की सामान्य अवस्था है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "पवित्र आत्मा का कार्य और शैतान का कार्य" से उद्धृत

परमेश्वर अपने कार्य को दोहराता नहीं है, वह ऐसा कार्य नहीं करता है जो वास्तविक न हो, वह मनुष्यों से अत्याधिक अपेक्षाएँ नहीं रखता है और वह ऐसा कार्य नहीं करता है जो मनुष्यों की समझ से परे हो। वह जो कुछ भी कार्य करता है मनुष्य की सामान्य समझ के दायरे के भीतर है, और सामान्य मानवता की समझ से परे नहीं है, और उसका कार्य मनुष्य की सामान्य अपेक्षाओं के अनुसार है। यदि यह पवित्र आत्मा का कार्य है, तो मनुष्य हमेशा से अधिक सामान्य बन जाता है, और उसकी मानवता हमेशा से अधिक सामान्य बन जाती है। मनुष्य को अपने शैतानी स्वभाव का, और मनुष्य के सार का बढ़ता हुआ ज्ञान होता है, और उसकी सत्य के लिए हमेशा से अधिक ललक होती है। अर्थात्, मनुष्य का जीवन अधिकाधिक बढ़ता जाता है और मनुष्य का भ्रष्ट स्वभाव अधिकाधिक बदलावों में सक्षम हो जाता है—जिस सब का अर्थ है परमेश्वर का मनुष्य का जीवन बनना।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" से उद्धृत

प्रत्येक व्यक्ति में पालन करने के लिए पवित्र आत्मा एक मार्ग है और प्रत्येक व्यक्ति को सिद्ध होने का अवसर प्रदान करता है। तुम्हारी नकारात्मकता के द्वारा ही तुम्हें तुम्हारी भ्रष्टता दिखाई गई है, और फिर नकारात्मकता को उतार फेंकने के द्वारा तुम अभ्यास करने के लिए एक मार्ग प्राप्त करोगे, और यही तुम्हारी सिद्धता है। और निरन्तर मार्गदर्शन और तुम में कुछ सकारात्मक बातों को रोशन करने के द्वारा तुम अपने कार्य को अग्रसक्रियता से पूर्ण करोगे और अंतर्दृष्टि में विकास करोगे और पहचानने की योग्यता प्राप्त करोगे। जब तुम्हारी परिस्थितियाँ अनूकूल होती हैं, तुम विशेषतः परमेश्वर के वचन पढ़ने और परमेश्वर से प्रार्थना करने इच्छुक होते हो, और जो उपदेश तुम सुनते हो, उसे अपनी अवस्था से सम्बद्ध कर सकते हो। ऐसे समयों में परमेश्वर तुम्हें भीतर से प्रबुद्ध और रोशन करता है, और तुम्हें सकारात्मक पहलू वाली कुछ बातें एहसास कराता है। यह सकारात्मक पहलू तुम्हारी सिद्धता है। नकारात्मक परिस्थितियों में, तुम दुर्बल और नकारात्मक होते हो, और तुम्हें महसूस होता है कि तुम्हारे दिल में परमेश्वर नहीं है, फिर भी परमेश्वर तुम्हें रोशन करता और अभ्यास करने के लिए एक मार्ग खोजने में तुम्हारी सहायता करता है। इससे बाहर आ जाना नकारात्मक पहलू में सिद्धता प्राप्त करना है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "मात्र वे लोग जो अभ्यास करने पर केन्द्रित रहते हैं, उन्हें ही सिद्ध बनाया जा सकता है" से उद्धृत

कभी-कभी परमेश्वर तुम्हें एक निश्चित प्रकार की अनुभूति देता है—तुम अपना आंतरिक आनंद खो देते हो और परमेश्वर की उपस्थिति को खो देते हो, और तुम अंधकारमय हो जाते हो। यह एक प्रकार का शुद्धिकरण है। जब कभी भी तुम कुछ करते हो तो गड़बड़ हो जाता है या तुम्हारे सामने कोई अवरोध आ जाता है। यह परमेश्वर का अनुशासन है। किसी कार्य को करने पर शायद तुम्हें इसके बारे में कोई विशेष अनुभूति नहीं होती हो, और दूसरों को भी पता नहीं चलता है, लेकिन परमेश्वर जानता है। वह तुम्हें जाने नहीं देगा, और वह तुम्हें अनुशासित करेगा। पवित्र आत्मा का काम बहुत ही विस्तृत है। वह लोगों के हर वचन और कार्य को, उनकी हर क्रिया और हरकत को, और उनकी हर सोच और विचार को ध्यानपूर्वक देखता है, ताकि लोग इन चीजों के बारे में आंतरिक जागरूकता पा सकें। तुम एक बार कुछ करते हो और यह गड़बड़ हो जाता है, तुम इसे फिर से करते हो और यह तब भी गड़बड़ हो जाता है, और धीरे-धीरे तुम पवित्र आत्मा के काम को समझ जाओगे। कई बार अनुशासित किए जाने के द्वारा, तुम्हें पता चल जाएगा कि परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप होने के लिए क्या किया जाए और उसकी इच्छा के अनुरूप क्या नहीं है। अंत में, तुम्हारे भीतर से पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन का तुम्हें सटीक उत्तर प्राप्त हो जाएगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "पूर्ण बनाए जाने वालों को शुद्धिकरण से अवश्य गुज़रना चाहिए" से उद्धृत

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