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30. परमेश्वर उन लोगों को क्यों नहीं बचाता जिन पर बुरी आत्माएँ काम करती हैं और जो दुष्टात्माओं के कब्ज़े में आ जाते हैं?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

वे लोग जिन पर दुष्ट आत्माओं ने एक अवधि के लिए (जन्म के बाद से) कब्ज़ा कर रखा था, उन सभी को अब प्रकट किया जाएगा। मैं तुझे लात मारकर बाहर निकाल दूँगा! क्या तुझे अभी भी वह याद है जो मैंने कहा था? मैं—पवित्र और निष्कलंक परमेश्वर—एक कलुषित और गंदे मंदिर में नहीं रहता हूँ। जो लोग दुष्ट आत्माओं के कब्ज़े में थे, वे खुद जानते हैं, और मुझे स्पष्ट करने की आवश्यकता नहीं है। मैंने तुझे पूर्वनियत नहीं किया है! तू पुराना शैतान है, फिर भी तू मेरे राज्य में घुसपैठ करना चाहता है! बिलकुल नहीं!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में आरम्भ में मसीह के कथन के "अध्याय 81" से उद्धृत

मैंने लंबे समय से दुष्ट आत्माओं के विभिन्न दुष्कर्मों को स्पष्ट रूप से देखा है। और बुरी आत्माओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले लोग (गलत इरादों वाले लोग, जो देह-सुख या धन की लालसा करते हैं, जो खुद को ऊंचा उठाते हैं, जो कलीसिया को अस्त-व्यस्त करते हैं, आदि) भी मेरे द्वारा स्पष्ट रूप से समझे गये हैं। यह न मान लो कि दुष्ट आत्माओं को बाहर निकालते ही सब कुछ ठीक हो जाएगा। मैं तुम्हें बता दूँ! अब से, मैं इन लोगों का एक-एक करके निपटारा करूँगा, कभी उनका उपयोग नहीं करूँगा! कहने का तात्पर्य है, दुष्ट आत्माओं द्वारा भ्रष्ट किसी भी व्यक्ति का उपयोग मेरे द्वारा नहीं किया जाएगा, और उसे बाहर धकेल दिया जाएगा! ऐसा मत सोचना कि मैं भावनाविहीन हूँ! जान लो! मैं पवित्र परमेश्वर हूँ, और मैं एक गंदे मंदिर में नहीं रहूँगा! मैं केवल ईमानदार और बुद्धिमान लोगों का उपयोग करता हूँ जो मेरे प्रति पूरी तरह वफ़ादार और मेरे बोझ के प्रति विचारशील हो सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ऐसे लोगों को मेरे द्वारा पूर्वनिर्धारित किया गया था। कोई भी दुष्ट आत्मा उन पर बिलकुल काम नहीं करता है। मुझे यह बात स्पष्ट करने दो: अब से, वे सब जिनके पास पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, उन लोगों के पास दुष्ट आत्माओं का काम है। मैं दोहरा दूँ: मैं एक भी ऐसे व्यक्ति को नहीं चाहता जिस पर दुष्ट आत्माओं का काम होता है। वे सभी अपने शरीर के साथ नरक में डाल दिए जाएँगे!

— "वचन देह में प्रकट होता है" में आरम्भ में मसीह के कथन के "अध्याय 76" से उद्धृत

लोग प्रायः नरक और अधोलोख का उल्लेख करते हैं। किन्तु ये दोनों शब्द किसका संकेत करते हैं, और उनके बीच क्या अंतर है? क्या वे वास्तव में किसी ठंडे, अंधकारमय कोने का उल्लेख करते हैं? मानव मन हमेशा मेरे प्रबंधन में बाधा डालता रहा है, वे अनियत तरीके से चीज़ों पर विचार करते हैं, फिर भी उन्हें लगता है कि यह बहुत अच्छा है! अधोलोक और नरक दोनों गंदगी के मंदिर का संकेत करते हैं जिसमें पहले शैतान या दुष्ट आत्माओं द्वारा निवास किया जाता था। अर्थात्, जिस किसी पर भी शैतान या बुरी आत्माओं द्वारा पहले कब्जा किया गया है, यही वे लोग हैं जो अधोलोक हैं और वे ही हैं जो नरक हैं—इसमें कोई त्रुटि नहीं है! यही कारण है कि मैंने अतीत में बार-बार जोर दिया है कि मैं गंदगी के मंदिर में नहीं रहता हूँ। क्या मैं (स्वयं परमेश्वर) अधोलोक में, या नरक में रह सकता हूँ? क्या यह अनुचित बकवास नहीं होगी? मैंने यह कई बार कहा है लेकिन तुम लोगों की समझ में अभी भी नहीं आता है कि मेरा मतलब क्‍या है। नरक की तुलना में, अधोलोक को शैतान के द्वारा अधिक गंभीर रूप से दूषित किया जाता है। जो लोग अधोलोक के लिए हैं वे सबसे गंभीर मामले हैं, और मैंने इन लोगों को पूर्वनियत किया ही नहीं है; जो लोग नरक के लिए हैं ये वे लोग हैं जिन्हें मैंने पूर्वनियत किया है, किन्तु उन्हें निकाल दिया गया है। आसान भाषा में कहें तो, मैंने इन लोगों में से एक को भी नहीं चुना है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में आरम्भ में मसीह के कथन के "अध्याय 90" से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

जो लोग दुष्टात्माओं के वश में होते हैं, वे अपनी शैतानी प्रकृति में जीते हैं, यह शैतानी स्वभाव उन बुरी आत्माओं से आता है जो उनके भीतर रहती हैं। दुष्ट आत्माओं की प्रकृति शैतानों के वशीभूत व्यक्ति की आंतरिक प्रकृति बन जाती है। किसी व्यक्ति की विशेष प्रकृति उस व्यक्ति के भीतर मौजूद विशेष आत्मा पर निर्भर करती है, और किसी व्यक्ति की प्रकृति उसके भ्रष्ट स्वभाव को निर्धारित करती है, यह बिल्कुल सही है। वे सभी लोग जो परमेश्वर द्वारा पूर्वनिर्धारित और चयनित हैं, सभी मानवीय आत्माओं के साथ हैं। जो मानवीय आत्माओं से रहित हैं, वे ऐसे लोग हैं जो सभी प्रकार की बुरी आत्माओं द्वारा ज़ब्त किए गए हैं। इसलिए, ये लोग वो हैं जिनका संबंध गंदे दुष्टों और बुरी आत्माओं से है, और वे परमेश्वर के उद्धार के लक्ष्य नहीं हैं। परमेश्वर के उद्धार के लक्ष्य वे लोग हैं जिनके पास मानवीय आत्माएँ हैं। भले ही मानवीय आत्माओं वाले ये लोग शैतान की भ्रष्टता से गुज़र चुके हैं, और परमेश्वर का विरोध करनेवाला स्वभाव पैदा कर चुके हैं, लेकिन वे पूरी तरह से शुद्ध हो सकते हैं और बचाए जा सकते हैं। चूँकि उनके भीतर मानवीय आत्मा है, मानवता के प्राकृतिक गुण हैं, उनके साथ उनके सार का एक अच्छा पक्ष है, इसलिए, वे परमेश्वर के उद्धार तक पहुँच सकते हैं। केवल मानवीय आत्मा से विहीन लोग वास्तव में पशु-समान या शैतान हैं, मानव के वेश में दानव हैं, इसलिए परमेश्वर उन्हें नहीं बचाता है; उनका संबंध मानवता से नहीं हैं। जिस मानवता की परमेश्वर बात करता है, वे उनमें शामिल नहीं हैं।

— ऊपर से संगति से उद्धृत

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