अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ (11) खंड दो
समझदारी से आवंटन करना
परमेश्वर के घर की भौतिक वस्तुओं के मामले में उनकी सुरक्षा के अलावा एक और महत्वपूर्ण कार्य है : उन्हें समझदारी से आवंटित करना। ये सभी वस्तुएँ लोगों के उपयोग के लिए हैं—ये सभी उपयोगी वस्तुएँ हैं—इसलिए इन्हें सुरक्षित रखने के पीछे मुख्य लक्ष्य यह है कि इनका समझदारी से उपयोग किया जा सके। इन वस्तुओं का समझदारी से उपयोग करने से पहले इन्हें समझदारी से आवंटित करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं पर निर्भर है। समझदारी से आवंटन करना क्या है? ये वस्तुएँ किसे उपयोग के लिए दी जानी चाहिए, इसके लिए परमेश्वर के घर के पास सिद्धांत और नियम हैं। चाहे ये वस्तुएँ भाई-बहनों द्वारा दी गई हों या परमेश्वर के घर द्वारा खरीदी गई हों, इनका मुख्य उद्देश्य राहत कार्यों के लिए या कल्याण कार्यों में दान देने के लिए भंडारण करना नहीं है; इसके बजाय वे उन सभी भाई-बहनों के उपयोग के लिए हैं जो अपना कर्तव्य पूर्णकालिक रूप से निभाते हैं। इसलिए, उन्हें कैसे आवंटित किया जाना चाहिए—उनके आवंटन के क्या सिद्धांत हैं—यह एक और जिम्मेदारी है जिसे अगुआओं और कार्यकर्ताओं को परमेश्वर के घर की विभिन्न भौतिक वस्तुओं के प्रबंधन में निभाना चाहिए। हमने यहाँ समझदारी से आवंटन करने का उल्लेख किया है; इस मामले में “समझदार” होना परमेश्वर के घर द्वारा अपेक्षित सिद्धांत है।
I. परमेश्वर के वचनों की पुस्तकों का समझदारी से आवंटन करना
हम परमेश्वर के वचनों की पुस्तकों से शुरू करेंगे। हर बार जब नई पुस्तकें जारी की जाती हैं तो इस संबंध में कि वे पुस्तकें किसे जारी की जानी चाहिए, परमेश्वर के घर की सैद्धांतिक अपेक्षाएँ और नियम हैं। कलीसिया में ऐसे लोग होते हैं जो परमेश्वर के वचन पढ़ते हैं और ऐसे लोग भी होते हैं जो परमेश्वर के वचन नहीं पढ़ते, ऐसे लोग होते हैं जो सत्य से प्रेम करते हैं और ऐसे लोग भी होते हैं जो सत्य से प्रेम नहीं करते, और ऐसे लोग होते हैं जो कर्तव्य निभाते हैं और ऐसे लोग भी होते हैं जो कर्तव्य नहीं निभाते—ऐसे लोगों के बीच अंतर किया जाना चाहिए। पाठ्यपुस्तकों की श्रेणी में कुछ विशेष पुस्तकें भी होती हैं—व्याकरण, शब्दकोश और ऐसी अन्य सहायक पुस्तकें। ये सभी पुस्तकें सख्ती से सिद्धांतों के अनुसार वितरित की जानी चाहिए। उन्हें उन लोगों को दिया जाना चाहिए जिन्हें उनकी जरूरत हो, न कि उन लोगों को जिन्हें उनकी जरूरत नहीं हो। और फिर कुछ सहायक पुस्तकें होती हैं जिनकी अपेक्षाकृत कम प्रतियाँ मुद्रित की जाती हैं—अगर वे किसी व्यक्ति को जारी की जाती हैं तो उस व्यक्ति से क्या अपेक्षित है? तुम उन्हें पढ़ सकते हो, लेकिन उन्हें नुकसान मत पहुँचाओ; उन्हें इधर-उधर मत छोड़ो या उनमें से मनमाने ढंग से पन्ने मत फाड़ो। और जब तुम उन्हें पढ़ लो तो उन्हें उनके मूल स्थान पर लौटा दो। परमेश्वर में विश्वास की पुस्तकों के मामले में, अगुआओं और कार्यकर्ताओं को उन्हें सख्ती से परमेश्वर के घर की कार्य-व्यवस्थाओं के अनुसार वितरित करना चाहिए, और उन्हें परमेश्वर के चुने हुए लोगों को सिद्धांत समझने और उनके अनुसार कार्य करने देना चाहिए।
II. विभिन्न प्रकार के उपकरणों का समझदारी से आवंटन करना
अगला चरण यह है कि विभिन्न प्रकार के उपकरणों का आवंटन कैसे किया जाए। यह अपेक्षाकृत महत्वपूर्ण कार्य है। विभिन्न प्रकार के उपकरणों का आवंटन करने में कुछ हद तक सख्ती बरतनी होती है। ऐसे उपकरणों में इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ-साथ विभिन्न व्यवसायों के लिए आवश्यक उपकरण भी शामिल हैं। जब अगुआ और कार्यकर्ता इन्हें वितरित करते हैं, तो इसके लिए भी कुछ सिद्धांत होने चाहिए। जिन लोगों को ये उपकरण जारी किए जाएँ, वे ऐसे लोग होने चाहिए जो उन्हें अच्छी तरह से संचालित करने में सक्षम हों और उनका सही, समझदारीपूर्ण उपयोग कर सकें। अगर कोई नौसिखिया है या उसे यह नहीं पता कि इस उपकरण का उपयोग कैसे करना है, तो उसे यह उपकरण जारी नहीं किया जाना चाहिए। यह विशेष रूप से अच्छे, उच्च-स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक्स, जैसे कि उच्च-स्तरीय कैमरे और महँगे कंप्यूटर, साथ ही रिकॉर्डिंग के उपकरण, फोटोग्राफी के उपकरण या वीडियो के निर्माण के बाद के लिए आवश्यक उपकरण पर लागू होता है—ऐसे व्यक्ति को इस तरह के उपकरण बिल्कुल भी जारी नहीं किए जा सकते, ताकि नुकसान से बचा जा सके। अगुआओं और कार्यकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे उपकरणों का उपयोग करने वाले लोग पहले तो मशीनरी की कद्र करने में सक्षम हों और दूसरे, उसका सही तरीके से उपयोग और रख-रखाव कर सकें। उदाहरण के लिए, कुछ मशीनों को उनके नियमों के अनुसार दो घंटे के उपयोग के बाद ठंडा होने के लिए दस मिनट आराम दिया जाना चाहिए। अगर उन्हें ठंडा नहीं किया जाता तो इससे मशीनों को नुकसान पहुँचेगा और उनका उपयोगी जीवन कम हो जाएगा। जो लोग मशीन की कद्र करते हैं, वे उसकी रख-रखाव संबंधी सावधानियों के अनुसार ही उसका उपयोग करेंगे; वे तुम्हारे कहे बिना ही अपने आप इन सावधानियों का पालन करेंगे, और अगर तुम उनसे आग्रह करोगे तो वे और भी ज्यादा सख्त और सटीक हो जाएँगे। ऐसे लोग मशीनरी का उपयोग करने के लिए उपयुक्त होते हैं; वे उच्च-स्तरीय चीजों का उपयोग करने के लिए उपयुक्त होते हैं, क्योंकि वे मशीनरी की कद्र करना जानते हैं और उसके रख-रखाव और मरम्मत संबंधी सावधानियों को गंभीरता से लेते हैं। ऐसे लोग, जो मशीनरी को सँजोकर रख सकते हैं और उसका सामान्य रूप से उपयोग कर सकते हैं, उच्च श्रेणी की मशीनरी के आवंटन और वितरण के लिए सबसे उपयुक्त होते हैं। अगुआओं और कार्यकर्ताओं को इस संबंध में उचित जाँच करनी चाहिए। अगर कोई उच्च-स्तरीय कंप्यूटर है और उसे किसी भी ऐसे व्यक्ति के उपयोग के लिए जारी किया जाता है जो उसकी जरूरत बताकर आवेदन करता है, तो क्या वहाँ सिद्धांत सही है? (नहीं।) इसमें क्या सही नहीं है? अगुआओं और कार्यकर्ताओं का ऐसी चीजों को वितरित और आवंटित करने का निर्णय उस व्यक्ति की व्यावसायिक योग्यता पर आधारित होना चाहिए जिसे कार्य सौंपा गया है; दूसरा उन्हें यह निर्णय इस बात पर आधारित करना चाहिए कि वह व्यक्ति मशीनरी को किस हद तक सँजोता है, क्या उसमें मानवता है, क्या वह मशीनरी का उपयोग करते समय उसकी कद्र करता है। अगर व्यक्ति मशीनरी की देखभाल करना नहीं जानता और व्यावसायिक कौशलों से अपरिचित है, और सिर्फ जिज्ञासावश मशीन के साथ खेलना चाहता है तो उसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए और उसे उसका उपयोग करने से मना किया जाना चाहिए। वह उच्च श्रेणी की मशीनरी का उपयोग और उसकी देखभाल करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। साधारण कार्य करने वालों को साधारण मशीनरी देना ही पर्याप्त है। जो लोग किसी पेशे को जानते हैं; अच्छी मानवता वाले हैं; और मशीनरी का उपयोग करना, उसका रख-रखाव करना और उसकी कद्र करना जानते हैं, वे उच्च श्रेणी की चीजों का उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि वे उस पेशे में पारंगत होते हैं और उच्च श्रेणी की मशीनरी का उपयोग करने में सक्षम होते हैं। अगर तुम किसी भ्रमित या असभ्य व्यक्ति को कोई उच्च-स्तरीय चीज इस्तेमाल करने के लिए देते हो, तो वह कुछ ही दिनों में मशीन को बर्बाद कर देगा। दूसरे लोग उसका उपयोग नहीं कर पाएँगे और उसे ठीक करना आसान नहीं होगा। यह न सिर्फ कलीसिया के कार्य में बाधा डालता है, बल्कि परमेश्वर के घर की एक भौतिक वस्तु बर्बाद भी करता है। इसमें निहितार्थ क्या है? यही कि ऐसे लोग अच्छी मशीनों का इस्तेमाल करने के लायक नहीं हैं। अच्छी मशीनें इस्तेमाल के लिए उन लोगों को दी जानी चाहिए जिनमें मानवता है, जो किसी पेशे से अच्छी तरह परिचित हैं। जो लोग किसी पेशे के विशेषज्ञ नहीं हैं और जिनकी मानवता कमजोर है, उनके लिए साधारण चीजों का इस्तेमाल करना ही काफी है। क्या इस तरह से चीजों का आवंटन समझदारी भरा है? (हाँ, यह समझदारी भरा है।)
सभी तरह की भौतिक चीजों के साथ विभिन्न लोग विभिन्न प्रकार से पेश आते हैं। कुछ लोग उच्च-स्तरीय कंप्यूटर खरीदते हैं और दो साल के इस्तेमाल के बाद भी वह नया दिखता है; उसके स्क्रीन पर कभी उँगली की छाप नहीं दिखती और उसका कीबोर्ड हमेशा बहुत साफ रहता है, धूल का एक कण भी उस पर नहीं रहता। डेस्कटॉप अच्छा और साफ-सुथरा रहता है और कंप्यूटर में जो कुछ भी संगृहीत किया जाता है, वह सब काफी व्यवस्थित और स्पष्ट होता है। अगर कोई उनसे कहता है कि लंबे समय तक इस्तेमाल करना स्क्रीन के लिए खराब होता है, तो वे तुरंत पूछेंगे कि स्क्रीन को कैसे सुरक्षित रखा जाए—जो भी तरीका सबसे अच्छा होता है वे उसे ही अपनाते हैं। अगर कोई उनसे कहता है कि लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद कंप्यूटर को निष्क्रिय रखने की जरूरत होती है, बहुत गर्म हो जाने पर वह खराब तरीके से काम करेगा, जिससे मशीन की लंबी उम्र प्रभावित होगी, तो जब उन्हें एहसास होता है कि वे अपने कंप्यूटर को दो घंटे से ज्यादा समय से इस्तेमाल कर रहे हैं, तो वे उसे ठंडा करने के लिए तुरंत बंद कर देंगे। अगर मौसम बहुत गर्म होने के कारण वह धीरे-धीरे ठंडा होता है, तो वे उसे हवा देने के लिए पंखा चला देंगे। वे मशीन का ऐसे ही विशेष ध्यान रखते हैं, जैसे कि वह उनका बच्चा हो। जब वे उसे बैग में रखते हैं तो विशेष रूप से चौकस और सावधान रहते हैं और जब वे उसे मेज पर रखते हैं तो मेज की सतह साफ करने के बाद उस पर मशीन ठीक से रखते हैं। क्या यह उनकी खूबी नहीं है? (हाँ, है।) ऐसे लोग न सिर्फ खुद मशीनरी को सँजोते हैं बल्कि जब वे दूसरों को मशीनरी को बर्बाद करते हुए और नुकसान पहुँचाते हुए देखते हैं तो उनसे यह बर्दाश्त नहीं होता। ऐसे लोग अच्छी मशीनरी का उपयोग करने के लिए उपयुक्त होते हैं। कुछ पैसे वाले लोग भी उच्च-स्तरीय कंप्यूटर खरीद लेते हैं, जिन्हें वे घर ले जाने के बाद बिल्कुल भी सँजोकर नहीं रखते। वे उन्हें साफ नहीं करते, चाहे उन पर कितनी भी धूल जम जाए, और उन्हें काफी गंदा कर देते हैं। दूसरे लोग मशीन दो साल इस्तेमाल करेंगे और वह फिर भी नई दिखेगी; ये लोग मशीन दो महीने ही इस्तेमाल करेंगे और वह ऐसी दिखेगी जैसे दस साल इस्तेमाल कर ली गई हो। उनसे कहो कि मशीनों को रख-रखाव की जरूरत होती है और वे कहेंगे, “उस चीज के रख-रखाव का क्या मतलब है? मशीनें लोगों की सेवा के लिए होती हैं, लोगों की सेवा करती हैं। अगर वह खराब हो जाए, तो नई खरीद लो!” नतीजतन, गलत इस्तेमाल के कारण मशीन छह महीने से भी कम समय में खराब हो जाती है। ऐसे लोगों के बारे में तुम्हारी क्या राय है? क्या वे उच्च-स्तरीय मशीनरी का उपयोग करने के योग्य हैं? (नहीं।) वे कितने भी अच्छे कंप्यूटर खरीद लें, उन्हें सँजोने के बारे में नहीं सोचते, बल्कि उन्हें इधर-उधर फेंक देते हैं और लापरवाही से रख देते हैं। उनके कुछ कंप्यूटरों पर खरोंचें आ जाती हैं; कुछ पानी से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं; कुछ जमीन पर गिरकर टूट जाते हैं। वे उनका बहुत बेदर्दी से इस्तेमाल करते हैं। ऐसे लोगों की मानवता में किसी चीज की कमी होती है। क्या तुम लोग ऐसे लोगों के उपयोग के लिए अच्छी मशीनरी आवंटित करने को तैयार हो? (नहीं।) कुछ लोग चश्मा पहनते हैं और उसके लेंस हमेशा साफ रहते हैं, जबकि दूसरे लोगों के लेंसों की सतहें गंदी रहती है, जिन पर धूल और उँगलियों के निशान आदि रहते हैं। वे उनका इस तरह इस्तेमाल कैसे कर पाते हैं? जो लोग अपने चश्मे का खयाल रखते हैं, वे उन्हें नीचे रखते समय विशेष ध्यान रखते हैं; वे लेंस का स्पर्श मेज की सतह या किसी अन्य वस्तु से बिल्कुल नहीं होने देंगे, न ही वे लेंस पर खरोंच या रगड़ लगने देंगे। चश्मा विशेष रूप से निकट दृष्टि दोष वाले लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है—लेंसों पर खरोंच लगने पर तुम उनका इस्तेमाल कैसे करोगे? कुछ लोग अपने चश्मे के साथ बहुत रुखाई से पेश आते हैं और उसे थोड़ी देर पहनने के बाद ही उनके लेंस धुँधले हो जाते हैं। उन्हें पहनकर वे कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं देख पाते—इससे तो अच्छा है कि वे उन्हें पहने ही नहीं। फिर भी उन्हें लगता है कि उन्हें ऐसे ही पहने रहना ठीक है, मानो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता हो। मैं इस बात से हैरान हूँ : क्या चश्मा पहनने के पीछे उनका उद्देश्य यह नहीं होता कि चीजें ज्यादा स्पष्ट रूप से देख पाएँ? पूरी तरह से घिसे हुए लेंसों से वे स्पष्ट रूप से क्या देख सकते हैं? क्या ये लोग असभ्य नहीं हैं? बेशक असभ्य हैं! अत्यधिक असभ्य लोगों की मानवता में कुछ कमी होती है—वे चीजों का खयाल रखना नहीं जानते, उन्हें सँजोना तो दूर की बात है।
जब परमेश्वर के घर के महत्वपूर्ण उपकरणों और औजारों की बात आती है, तो अगुआओं और कार्यकर्ताओं की क्या जिम्मेदारी होती है? ऐसे उपकरण आवंटित करते समय उचित लोगों को दिए जाने चाहिए। ऐसे महत्वपूर्ण, उच्च श्रेणी के उपकरणों का इस्तेमाल करने वाले लोग निश्चित रूप से ऐसे होने चाहिए जो चीजों को सँजोना जानते हों। वे उन्हें सँजोएँगे, उनकी देखभाल करेंगे और उनका रख-रखाव करेंगे; जब वे उनके कब्जे में होंगे तो तुम आश्वस्त हो सकते हो कि वे उन्हें जानबूझकर या स्व-निर्मित कारकों से कभी नष्ट नहीं करेंगे या नुकसान नहीं पहुँचाएँगे, सिवाय इसके कि किसी क्षणिक लापरवाही या सामान्य ज्ञान के किसी तत्त्व की कमी के कारण ऐसा हो। ऐसे लोग इन उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं; उन्हें उच्च-स्तरीय, अच्छे उपकरण आवंटित किए जा सकते हैं। जो लोग चीजों का इस्तेमाल स्वाभाविक रूप से रुखाई से करते हैं, उन्हें इस्तेमाल करने के लिए साधारण सामान देना ही काफी होगा। साथ ही, ऐसे उपकरणों और औजारों के अभिरक्षक उनके इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखने के लिए जिम्मेदार होते हैं : किसने क्या लिया है और उसने उसे कितने समय तक इस्तेमाल किया है, या कौन-सी वस्तु किसी के अनन्य उपयोग के लिए है, अगर वह क्षतिग्रस्त हो जाती है तो उसके मूल्य की भरपाई किसे करनी चाहिए। दोनों पक्षों की इन बातों पर सहमति होनी चाहिए, ताकि सभी के लिए चीजें निष्पक्ष और समझदारीपूर्ण हों। मशीनों और उपकरणों का अच्छी तरह से ध्यान रखा जाना चाहिए, चाहे उनका उपयोग अल्पकालिक हो या दीर्घकालिक; उपयोगकर्ता को उनका सही तरीके से उपयोग करना सीखना चाहिए और अगर वे खराब हो जाएँ तो उनकी तुरंत मरम्मत करवानी चाहिए। यह कार्य जितना ज्यादा सावधानी से किया जाएगा, उतना ही बेहतर होगा। अगर ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाए, जिसमें शैतान का शासन लोगों को गिरफ्तार कर रहा हो, तो अगुआओं और कार्यकर्ताओं की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी यह है कि वे महत्वपूर्ण उपकरण और औजारों को विश्वसनीय, भरोसेमंद लोगों को आवंटित करें। जब वे उन्हें भेज दें तो उन्हें संबंधित व्यक्तियों को यह कहते हुए कुछ सलाह देनी चाहिए, “ये परमेश्वर के घर की चीजें हैं, जिनका इस्तेमाल तुम अपना कर्तव्य निभाने में कर सकते हो। इनके साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। तुम्हें इनका समझदारी से इस्तेमाल करना चाहिए और इनकी अच्छी तरह से देखभाल करनी चाहिए। इन्हें नुकसान मत पहुँचाना। चूँकि ये उपकरण और औजार कर्तव्य निभाने के लिए आवश्यक हैं, इसलिए अगर इन्हें कोई नुकसान होता है, तो इनके मूल्य के अनुसार क्षतिपूर्ति की जानी चाहिए। अगर क्षतिग्रस्त उपकरणों के कारण कार्य में देरी होती है, तो यह ज्यादा गंभीर प्रकृति का मुद्दा है, जिसका अर्थ है कि उनमें कुछ गड़बड़ी और टूट-फूट है। इसलिए तुम्हें यह जानना चाहिए कि कर्तव्य निभाने में तमाम तरह के उपकरणों और औजारों का सही तरीके से उपयोग कैसे किया जाए—तुम्हें परमेश्वर के घर की संपत्ति को नुकसान बिल्कुल नहीं पहुँचाना चाहिए। ये सिद्धांत अवश्य याद रखो : समझदारी से उपयोग और नियमित निरीक्षण, मरम्मत और रखरखाव—अगर कोई चीज खराब हो जाए तो उसकी तुरंत रिपोर्ट करके मरम्मत के लिए आवेदन करो।” इस कार्य को अच्छी तरह से करने के लिए अगुआओं और कार्यकर्ताओं को जहाँ एक ओर आवंटन और उपयोग के सिद्धांत जानने चाहिए; वहीं दूसरी ओर, उन्हें उपयोगकर्ताओं को यह बताना चाहिए कि रख-रखाव और मरम्मत कैसे की जाए और अगर कोई खराबी आ जाए तो उन्हें ठीक कैसे किया जाए, इत्यादि। यह मानक ज्ञान है जो लोगों को तमाम तरह के उपकरणों और औजारों की देखभाल और उपयोग करने के मामले में समझना और रखना चाहिए।
अगुआओं और कार्यकर्ताओं को परमेश्वर के घर के विभिन्न उपकरण समझदारी से आवंटित करने चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी को ऐसे कंप्यूटर की जरूरत है जिसमें ज्यादा फीचर्स हों, तो तुम्हें उन्हें वह आवंटित कर देना चाहिए। अगर वे कहें कि एक काफी नहीं है, तो तुम्हें उनसे पूछना चाहिए कि ऐसा क्यों है, और तुम्हें पूछताछ करके देखना चाहिए कि वे जो कह रहे हैं वह तथ्यपरक है या नहीं। सिर्फ उनके आवेदन के अनुसार चलते हुए उन्हें उतने कंप्यूटर मत दो जितने वे माँगते हैं, ऐसा न हो कि अगर वे कहें कि एक काफी नहीं है तो दो दे दो, और अगर वे कहें कि दो काफी नहीं है तो तीन दे दो। तब क्या तुम कंप्यूटरों को खिलौनों की तरह वितरित नहीं कर रहे होगे? क्या यह लापरवाही नहीं होगी? तुम्हें पहले स्थिति की जाँच करनी चाहिए और परमेश्वर के घर के सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। यदि कुछ लोग कर्तव्य निभाने की आड़ में अंधाधुंध आवेदन कर रहे हैं तो तुम्हें तमाम तरह के आवेदन मनमाने ढंग से स्वीकृत बिल्कुल नहीं करने चाहिए। इसके अलावा, महत्वपूर्ण कार्य करने वाले कुछ लोगों को उच्च श्रेणी के कंप्यूटरों की जरूरत हो सकती है, फिर भी उनके व्यक्तिगत कंप्यूटरों में निम्न श्रेणी के कॉन्फिगरेशन होते हैं। अगुआओं और कार्यकर्ताओं को इस पर भी तुरंत गौर करना चाहिए और उपकरणों का आवंटन समझदारी से करना चाहिए। कंप्यूटरों का प्रावधान व्यक्ति के कार्य की प्रकृति और कंप्यूटर के ग्रेड की जरूरतों के आधार पर तय किया जाना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति सिर्फ एक साधारण अगुआ या कार्यकर्ता है और वह कंप्यूटर-तकनीक या वीडियो-निर्माण-कार्य में शामिल नहीं है और सिर्फ इंटरनेट खोलने, संसाधन खोजने और कॉल करने जैसे कामों के लिए ही कंप्यूटरों का उपयोग करता है और उसे अपने कंप्यूटर की विशिष्टताओं के संदर्भ में ज्यादा कुछ नहीं चाहिए, तो उसके लिए एक साधारण कंप्यूटर का उपयोग करना ठीक रहेगा। कुछ बुजुर्ग लोग सिर्फ टाइपिंग, ऑनलाइन जाने और कॉल करने जैसे सरल कार्य करना ही जानते हैं, फिर भी जब वे अगुआ या कार्यकर्ता बन जाते हैं तो उन्हें बहुत उच्च-स्तरीय कंप्यूटर जारी कर दिए जाते हैं। क्या यह समझदारी है? क्या वे विशेषाधिकार नहीं चाह रहे हैं? क्या वे अपने रुतबे के फायदे नहीं उठा रहे हैं? (उठा रहे हैं।) इस तरह के उच्च-स्तरीय, उच्च श्रेणी के उपकरणों का इस्तेमाल किस काम के लिए किया जाना चाहिए? उन्हें संबंधित कर्मचारियों और पेशेवर कर्मियों को इस्तेमाल करने के लिए दिया जाना चाहिए। उनका किसी व्यक्ति के रुतबे से मिलान करने की जरूरत नहीं है। कुछ अगुआ और कार्यकर्ता गलती से यह मानते हैं कि उन्हें अपने विशेषाधिकारों का प्रयोग करते हुए परमेश्वर के घर की विभिन्न वस्तुओं के उपयोग का आनंद लेना चाहिए। क्या परमेश्वर के घर में ऐसा नियम है? नहीं। जब कुछ लोग अगुआ और कार्यकर्ता बन जाते हैं तो उन्हें तुरंत उच्च श्रेणी के कंप्यूटर, सेलफोन और हेडफोन जारी किए जाते हैं, उन्हें तमाम तरह के उच्च श्रेणी के उपकरण प्रदान किए जाते हैं। इसका परिणाम क्या होता है? क्या यह वास्तव में कार्य में अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए किया जाता है? क्या वे लोग दैहिक आनंद के लिए लालायित नहीं हो रहे? वैसे भी, तुम उच्च श्रेणी के कंप्यूटरों का उपयोग किस लिए कर रहे हो? क्या तुम सिर्फ ऑनलाइन सभाएँ आयोजित कर शब्दों और धर्म-सिद्धांतों का प्रचार नहीं कर रहे हो? क्या तुम वीडियो अपलोड करना जानते हो या वीडियो बनाने में सक्षम हो? क्या तुम नेटवर्क सुरक्षा बनाए रखना जानते हो या वेबसाइट बना सकते हो? क्या तुम इन पेशों को जानते हो? अगर नहीं, तो तुम्हारे लिए उच्च श्रेणी के कंप्यूटर का क्या उपयोग है? क्या ऐसा करना घृणित चीज नहीं है? (हाँ, है।) अगर तुम्हारे पास अपना पैसा है तो कोई परवाह नहीं करता कि तुम उससे कितने कंप्यूटर खरीदते हो और कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा, चाहे वे कितने भी उच्च श्रेणी के हों। हम अब इस बारे में बात कर रहे हैं कि परमेश्वर के घर की भौतिक वस्तुओं को किस तरह से समझदारी से आवंटित किया जाना चाहिए। “समझदारी से” का क्या अर्थ है? जब अगुआ और कार्यकर्ता परमेश्वर के घर के इस उच्च श्रेणी के उपकरण का इस्तेमाल करते हैं तो क्या इसे “समझदारी से” इस्तेमाल करना माना जाता है? (नहीं।) वे न तो इस पेशे के बारे में जानते हैं और न ही यह जानते हैं कि कोई काम कैसे करना है। क्या उच्च श्रेणी का कंप्यूटर रखना उन्हें उच्च श्रेणी का बना देता है? वे किस बात का दिखावा कर रहे हैं? परमेश्वर के घर में ऐसा कोई नियम नहीं है जो अगुआओं और कार्यकर्ताओं को अपनी भौतिक वस्तुओं के इस्तेमाल और आवंटन का विशेषाधिकार देता हो; उनके पास वह विशेषाधिकार नहीं है, और यह परमेश्वर के घर द्वारा वस्तुओं के आवंटन के लिए समझदारी भरा सिद्धांत नहीं है—यह बिल्कुल भी समझदारी भरा नहीं है। अगर कोई व्यक्ति इन चीजों को खुद खरीदने की स्थिति में है तो वह ऐसा कर सकता है; अगर वह ऐसा करने की स्थिति में नहीं है और उसे ये चीजें परमेश्वर के घर से आवंटित की जानी है, तो उसके लिए साधारण चीजों का इस्तेमाल करना ही पर्याप्त है। यह उचित और समझदारी भरा है। जो लोग वास्तव में इस उच्च श्रेणी के उपकरण का इस्तेमाल करना जानते हैं वे इस कार्य में शामिल पेशेवर कर्मचारी हैं, इसलिए परमेश्वर के घर को यह उपकरण उन्हें आवंटित कर देना चाहिए। ये कुछ सिद्धांत हैं, जिन्हें अगुआओं और कार्यकर्ताओं को परमेश्वर के घर की भौतिक वस्तुओं के आवंटन के संबंध में समझना-बूझना चाहिए। इन सिद्धांतों के आधार पर फिर से जाँच करके देखो कि इन चीजों को कहीं बिना समझदारी के आवंटित तो नहीं किया गया है। अगर किया गया है, तो जल्दी से इसे सुधारो। कुछ लोग अगुआ या कार्यकर्ता बनने के बाद देखते हैं कि परमेश्वर के घर में कोई उनकी चापलूसी नहीं कर रहा है, कोई उन्हें उच्च श्रेणी की वस्तुएँ जारी नहीं कर रहा है, और वे अभी भी अपने पुराने कपड़े ही पहन रहे हैं, अभी भी अपना बेहद साधारण छोटा कंप्यूटर ही इस्तेमाल कर रहे हैं और परमेश्वर के घर ने उन्हें अच्छा कंप्यूटर नहीं दिया है। तो वे वित्तीय टीम के पास जाते हैं और एक कंप्यूटर खरीदने के लिए आवेदन करते हैं। क्या यह समझदारी की बात है? (नहीं।) वे कहते हैं, “अगर तुम इसे मुझे जारी नहीं करोगे, तो मैं अपना कर्तव्य नहीं निभाऊँगा—मैं परमेश्वर के घर द्वारा अपने लिए इससे भी नए मॉडल का ज्यादा तेज चलने वाला उच्च श्रेणी का कंप्यूटर खरीदवाने का अवसर ढूँढ़ूँगा!” वे बहुत साहसी हैं—ऐसा कुछ नहीं जिसे वे करने की हिम्मत न करें। अगुआ बनने के बाद ये लोग परमेश्वर के घर को अपना मान लेते हैं और सोचते हैं, “परमेश्वर के घर का पैसा मेरा भी है—मैं इसे अपनी मर्जी से खर्च करूँगा!” यह ऐसी चीज है जिसे करने में मसीह-विरोधी सक्षम हैं।
III. विभिन्न दैनिक आपूर्तियों और भोजन का समझदारी से आवंटन करना
अब हम विभिन्न भौतिक वस्तुओं और उपकरणों के समझदारी भरे आवंटन के बारे में बात पूरी कर चुके हैं। इसके बाद हम रोजमर्रा की जिंदगी के सामान के बारे में बात करेंगे, जैसे कि अनाज, सब्जियाँ और सूखा भोजन और साथ ही खाना पकाने के लिए आवश्यक सामग्री, विभिन्न पूरक खाद्य पदार्थ, इत्यादि। ये वस्तुएँ न सिर्फ समझदारी से सुरक्षित रखनी होती हैं, बल्कि समझदारी से आवंटित भी करनी होती हैं। तो ये विभिन्न वस्तुएँ समझदारी से कैसे आवंटित की जाएँ? परमेश्वर के घर में अपने भोजन के लिए मानक हैं और जो लोग ऐसी वस्तुओं का प्रबंधन करते हैं, उन्हें वे वस्तुएँ उन मानकों का सख्ती से पालन करते हुए समझदारी से आवंटित करनी चाहिए। उन्हें अपने करीबी लोगों को ज्यादा मात्रा में अच्छा भोजन नहीं देना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर कुछ स्वादिष्ट, अच्छी गुणवत्ता वाला चावल खरीदा जाता है या अगर कुछ फल या मांस कभी-कभार ही खरीदा जाता है और तुम उसे उन लोगों को ज्यादा दे देते हो जिनके साथ तुम्हारे अच्छे संबंध हैं या सभी अच्छी चीजें उन्हें दे देते हो और दूसरों को खराब चीजें देते हो—तो क्या इसे समझदारी भरा आवंटन माना जाता है? (नहीं।) तो फिर यहाँ “समझदारी” कैसे मापी जाए? चीजें आवंटित करने का कौन-सा तरीका समझदारी भरा माना जा सकता है? परमेश्वर के घर द्वारा खाद्य पदार्थों के लिए निर्धारित सिद्धांतों और अपेक्षित मानकों के अनुसार समान आवंटन, जिसमें उतना ही जारी किया जाए जितना किया जाना चाहिए। अगर तुम्हें लगता है कि तुम किसी के करीब हो, तो तुम उन्हें अपना हिस्सा दे सकते हो। दूसरों की चीजों के मामले में उदार मत बनो और परमेश्वर के घर की भौतिक वस्तुओं का इस्तेमाल दूसरों के प्रति उदारता दिखाने के लिए मत करो; अगर तुम उदार होना चाहते हो, तो अपनी चीजों के मामले में होओ। परमेश्वर के घर में उदारता कोई सिद्धांत नहीं है—परमेश्वर के घर का सिद्धांत समझदारी से आवंटन करना है। रोजमर्रा की जिंदगी की जरूरतों और विभिन्न खाद्य पदार्थों का वितरण परमेश्वर के घर द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए, न कि मनमाने तरीके से। स्वाभाविक रूप से, अगुआ और कार्यकर्ता निरीक्षण करके देख सकते हैं कि क्या ऐसी चीजों के वितरण के लिए जिम्मेदार लोगों के इरादे सही हैं, क्या उनका वितरण समझदारी भरा है, क्या वितरण परमेश्वर के घर के सिद्धांतों के अनुसार किया जाता है, ज्यादातर लोग इसके कैसे होने की रिपोर्ट करते हैं, क्या उन्हें कोई शिकायत है और क्या सभी का खयाल रखा जाता है। अगर कभी चीजें कम हैं तो क्या करना चाहिए? क्या अगुआओं और कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें सिर्फ अपने ही खाने के लिए रखना ठीक है? कुछ लोग कह सकते हैं, “अगुआओं और कार्यकर्ताओं का रुतबा और प्रतिष्ठा सबसे ज्यादा होती है और वे आम तौर पर हमसे सबसे ज्यादा बात करते हैं जिससे उनका मुँह सूख जाता है। अगर कोई अच्छा खाद्य पदार्थ है तो हमें उसे उनके खाने के लिए छोड़ देना चाहिए।” क्या इस तरह से चीजों का आवंटन करना ठीक है? (नहीं; चीजें उन लोगों के लिए छोड़ी जानी चाहिए जिन्हें वास्तव में उनकी जरूरत है।) अगर कुछ अपेक्षाकृत महँगे हेल्थकेयर उत्पादों की आपूर्ति कम हो तो उन्हें कैसे आवंटित करना चाहिए? उन्हें उन लोगों को आवंटित करना चाहिए जिन्होंने कई सालों से खुद को परमेश्वर के लिए खपाकर योगदान दिया है। अपनी उम्र के कारण इन लोगों का स्वास्थ्य खराब है, फिर भी वे अभी भी निष्ठापूर्वक अपने कर्तव्य निभा रहे हैं और भाई-बहन उनसे काफी लाभान्वित हुए हैं। इन लोगों को अपने शरीर को थोड़ा स्वस्थ रखने और उसकी देखभाल करने की जरूरत है और यह सही ही है कि उन्हें वे हेल्थकेयर उत्पाद खाने और इस्तेमाल करने दिए जाएँ। कम आपूर्ति की वजह से किसी को झगड़ना नहीं चाहिए। अगुआओं और कार्यकर्ताओं को ये चीजें इसी तरह आवंटित करनी चाहिए। क्या यह समझदारी की बात है? (हाँ।) तो क्या ज्यादातर लोगों को इस तरह के आवंटन पर आपत्ति होगी? क्या कोई ऐसा व्यक्ति है जो कहता हो, “हो सकता है मैं उतना बूढ़ा न होऊँ, लेकिन मेरे पास करने के लिए बहुत काम है—मैं रोज आठ घंटे से ज्यादा काम करता हूँ। हो सकता है मेरा काम उतना दक्षतापूर्ण न हो और हो सकता है मैं इसे बहुत सालों से न कर रहा होऊँ, लेकिन मेरा स्वास्थ्य भी कभी-कभी ज्यादा अच्छा नहीं रहता। कोई मेरा खयाल क्यों नहीं रखता? जब अच्छी चीजें होती हैं, तो उन्हें पाने की मेरी बारी कभी नहीं आती, लेकिन जब काम करना होता है तो हमेशा मुझे ही ढूँढ़ा जाता है”? क्या ऐसे व्यक्ति को हिस्सा दिया जाना चाहिए? चूँकि उसने यह माँगने की हिम्मत दिखाई, इसलिए उसके लिए कुछ छोड़ दो—क्या यह समझदारी की बात है? क्या तुम लोग ऐसा करने के लिए सहमत होगे? (नहीं।) अगर मैं होता, तो मैं सहमत होता। ऐसी चीजों के बारे में इतना परेशान क्यों होना? लोग अपना जीवन आनंद के लिए नहीं जीते; वे खाने, पीने और मौज-मस्ती करने के लिए नहीं जीते। ऐसी चीजों के लिए क्यों लड़ना? अगर कोई वास्तव में उनके लिए लड़ना चाहता है और उसकी परिस्थितियाँ कुछ हद तक उपयुक्त हैं तो उन्हें उन चीजों का थोड़ा आनंद लेने दो। उन पर कुछ विशेष अनुग्रह जरूर हो जाएगा, लेकिन तुम्हें इसका नुकसान नहीं होगा; इतना परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। तो मान लो कोई कहे, “तुम थोड़ा मुझे क्यों नहीं दे देते? मेरा स्वास्थ्य भी अच्छा नहीं है; अगर मुझे वास्तव में कुछ अच्छा खाने को मिले तो मैं अपने बेहतर स्वास्थ्य के साथ परमेश्वर के घर के लिए ज्यादा काम करने और ज्यादा मेहनत करने में सक्षम होऊँगा और मेरा काम ज्यादा दक्षतापूर्ण होगा।” चूँकि उसने यह अनुरोध किया है, इसलिए इसे अस्वीकार करके उसे शर्मिंदा मत करो, उसे कुछ वितरित कर दो। अन्य लोगों को इस बारे में ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए—थोड़ा और उदार बनो। क्या तुम्हारा जीवन उन चीजों के बिना वैसे ही नहीं चलेगा, जैसा अब तक चलता आया है? परमेश्वर लोगों को जो देता है वह कम नहीं है; वह भरपूर और प्रचुर है—चीजों के लिए लड़ने की कोई जरूरत नहीं। अगर कोई विशेष वस्तु है और किसी को उसे लेने या उसका आनंद लेने की जरूरत महसूस नहीं होती, तो अंततः जिस भी तरह के व्यक्ति को बहुमत सबसे उपयुक्त माने, उसे ही वह वस्तु खाने के लिए दे देनी चाहिए। हम मानवता पर और समझदारी से चीजें आवंटित करने पर जोर देते हैं। जो लोग ये चीजें प्राप्त करते हैं, उन्हें इन चीजों को परमेश्वर से स्वीकारना चाहिए और उसके अनुग्रह के लिए उसे धन्यवाद देना चाहिए। दूसरों को इनके लिए झगड़ना नहीं चाहिए। अगर तुम ऐसा करते हो, तो तुम अविवेकी हो, जानबूझकर परेशानी पैदा करते हो और गलत हो। ऐसी विशेष परिस्थितियों से इसी तरह निपटना चाहिए। विशेष परिस्थितियों और सामान्य परिस्थितियों के लिए एक-जैसे सिद्धांत हैं; उनके साथ मनमाना व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए, मानवीय संबंधों की जरूरतों के आधार पर तो बिल्कुल भी नहीं। जब ये चीजें समझदारी से आवंटित की जाती हैं तो अगुआ और कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं।
दैनिक आपूर्ति और भोजन का आवंटन करते समय, अगुआओं और कार्यकर्ताओं को वास्तविक परिस्थितियों, व्यक्तियों की वास्तविक संख्या और वास्तविक अपेक्षित मात्रा के आधार पर ही ऐसा करना चाहिए, ताकि सही मायने में समझदारी से आवंटन किया जा सके और बर्बादी या नुकसान न हो। अगुआओं और कार्यकर्ताओं को यह जिम्मेदारी निभानी चाहिए। कभी-कभी जब उन्हें विशिष्ट परिस्थितियों की समझ न हो, तो वे कुछ चीजें एक बुनियादी सिद्धांत के अनुसार आवंटित कर सकते हैं और बाद में सभी लोगों की प्रतिक्रियाओं के जरिये और निगरानी करके यह जान सकते हैं कि आवंटन समझदारी से नहीं किया गया था, वह थोड़ा विनियमों से बँधा हुआ था। उस हालत में उन्हें अगली बार सुधार करना चाहिए, ताकि वह समस्या दोबारा पैदा न हो और बर्बादी और नुकसान कम किया जा सके। यह अपनी जिम्मेदारी निभाना है। बेशक, नुकसान और बर्बादी से बचने के लिए उन्हें चीजें आवंटित करते समय कुछ हद तक और ज्यादा परामर्श करना चाहिए; उन्हें सिद्धांतों का सख्ती से पालन भी करना चाहिए। यह आवश्यक है। चीजें अविवेकपूर्ण तरीके से जारी मत करो, उनको उन्हें न देकर जिन्हें वास्तव में उनकी जरूरत है, जो ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभा रहे हैं, जिनके पास सत्य वास्तविकता है, बल्कि खास तौर से आध्यात्मिक समझ न रखने वाले चापलूसों को देकर चीजें अविवेकपूर्ण तरीके से जारी मत करो। क्या ऐसा करना सिद्धांतों के अनुसार कार्य करना है? (नहीं।) क्या ऐसा करना अत्यधिक लापरवाही नहीं है? सिद्धांतों के अनुसार कार्य नहीं करना अपनी जिम्मेदारियाँ नहीं निभाना है। अपनी जिम्मेदारियाँ निभाने का क्या मतलब है? यह बेमन से कार्य करना और विनियमों का पालन करना नहीं है और यह निर्धारित चरणों की एक शृंखला अपनाने से पूरा नहीं होता—बल्कि यह परमेश्वर के घर द्वारा अपेक्षित सिद्धांतों का वास्तव में कड़ाई से पालन करते हुए कार्य करना है और साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि परमेश्वर के घर की किसी भी चीज की कोई बर्बादी या क्षति न हो। यही वास्तव में अपनी जिम्मेदारी निभाना है। उदाहरण के लिए, पाँच लोगों को अंडे देने हों तो तुम्हें हर व्यक्ति को प्रतिदिन एक अंडा देना चाहिए और उन्हें हर दस दिन में जारी करना चाहिए, तो तुम ठीक पचास अंडे भेजोगे। तुम्हें उन्हें इसी तरह से जारी करना चाहिए, अलग-अलग हिस्सों में, क्योंकि यह कम संख्या में होता है और इसका ध्यान रखना आसान होता है; इसके अलावा, यह उनके खाने के लिए बिल्कुल सही मात्रा है। परमेश्वर के घर द्वारा अपेक्षित मानकों और विनिर्देशों के अनुसार इस तरह से अभ्यास करना बिल्कुल सही है—यह सिद्धांतों के अनुसार कार्य करना है। अगर कोई अगुआ या कार्यकर्ता परेशानी के डर से उन्हें एक बार में सौ दिनों के अंडे—पाँच सौ अंडे—जारी कर दे तो क्या यह उचित होगा? मुझे बताओ, पचास अंडे लाने-ले जाने और देखभाल करने में आसान हैं या पाँच सौ अंडे? (पचास अंडे।) कम संख्या में लाना-ले जाना और देखभाल करना आसान होता है। कुछ लोग सौ दिनों के अंडे भेजते हैं और नतीजतन कुछ रास्ते में टूट जाते हैं और कुछ गंतव्य पर ले जाने पर कुचले जाते हैं। एक के बाद एक छोटी टूट-फूट से एक पूरा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाता है। इसके अलावा, जब लोग बहुत सारे अंडे जारी होते देखते हैं, तो वे लापरवाही से उन्हें बर्बाद कर देते हैं, इसलिए अगली खेप आने के पहले दिन उनके पास खाने के लिए अंडे नहीं होते। तो जब ये अंडे टूटकर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं तो क्या इसका कारण अगुआओं और कार्यकर्ताओं की लापरवाही नहीं होती? (होती है।) अगर वे और अंडे माँगते हैं, तो क्या तुम उन्हें दे सकते हो? सिद्धांतों के अनुसार तुम उन्हें नियत तिथि से पहले और अंडे नहीं दे सकते, लेकिन जब उनके पास खाने के लिए अंडे नहीं बचते तो वे व्यथित हो जाते हैं। यहाँ क्या किया जाना चाहिए? (उन्हें समय पर और सही मात्रा में अंडे दिए जाने चाहिए।) उन्हें समय पर और सही मात्रा में अंडे देना सिद्धांतों के अनुसार कार्य करना है—यह समझदारी से किया गया आवंटन है। ये चीजें आवंटित करते समय अगुआओं और कार्यकर्ताओं को समझदारी से आवंटन करने के सिद्धांत और परमेश्वर के घर द्वारा अपेक्षित मानक का पालन करना चाहिए, उन्हें समय पर और नियमित रूप से चीजें जारी करनी चाहिए। इसके अलावा, उन्हें इस बात की त्वरित समझ होनी चाहिए कि क्या बर्बादी के मामले सामने आए हैं, क्या उन चीजों के लिए दोबारा आवेदन या अनुरोध किए गए हैं जो बर्बादी के कारण घट गई हैं और क्या जारी की गई ऐसी चीजों की बर्बादी के मामले सामने आए हैं जो लोगों को पसंद नहीं आईं। उदाहरण के लिए, मांस और सब्जियाँ दोनों ही जारी की जाती हैं और ज्यादातर लोग मांस पसंद करते हैं, इसलिए वे उसे तीन या पाँच दिनों में खा सकते हैं और सब्जियाँ बच जाती हैं। सब्जियाँ लंबे समय तक नहीं टिकतीं; उनमें से कुछ सब्जियाँ थोड़े समय बाद खराब होकर सड़ जाती हैं, इसलिए वे अगली खेप जारी होने से पहले ही खत्म हो जाती हैं। तब कोई फिर से आवेदन करके और सब्जियाँ माँग सकता है। क्या ऐसे मामले में और सब्जियाँ दी जानी चाहिए? क्या उन्हें और सब्जियाँ देना समझदारी है? (नहीं।) दूसरे लोग चुपके से मांस और अंडे खा लेंगे और वे तमाम सब्जियाँ खा लेंगे जो उन्हें पसंद हैं, जबकि जो सब्जियाँ उन्हें पसंद नहीं हैं उन्हें नहीं खाने के तरह-तरह के कारण देंगे और बहाने बनाएँगे। जब सब्जियाँ पीली पड़कर खराब हो जाती हैं तो वे कहते हैं कि वे खाने लायक नहीं हैं और उन्हें सूअरों और मुर्गियों को खिला देते हैं या फेंक देते हैं, फिर और माँगते हैं। जब अगुआओं और कार्यकर्ताओं के सामने इस तरह के मामले आते हैं तो उन्हें इन मामलों को कैसे सँभालना है? अगर वे कहते हैं, “यह देखते हुए कि यह पर्याप्त नहीं है, मैं अगली बार तुम लोगों को और सब्जियाँ दूँगा—मैं तुम्हें और ज्यादा दूँगा क्योंकि तुम लोग बहुत ज्यादा सब्जियाँ खाते हो,” तो क्या इसे सँभालने का यह उचित तरीका है? क्या वे अंधे नहीं है? (हाँ, हैं।) ऐसा कैसे है कि वे अंधे हैं? (वे नहीं समझते कि वास्तव में क्या चल रहा है : उनके द्वारा जारी किया गया भोजन पर्याप्त नहीं होने का मुख्य कारण यह है कि वह बर्बाद हो गया था।) वे बिना यह समझे कि वास्तव में क्या चल रहा है, निष्कर्ष पर पहुँच जाते हैं। ज्यादातर स्थानों पर खाने के लिए पर्याप्त भोजन होता है जो परमेश्वर के घर के विनिर्देशों के अनुसार जारी किया जाता है। वह सिर्फ एक ही जगह पर कम क्यों पड़ जाता है? क्या इसकी विशिष्ट जाँच नहीं की जानी चाहिए? उन्हें साइट पर जाना चाहिए और स्थिति के बारे में ध्यानपूर्वक और विस्तार से पूछना चाहिए, ताकि यह समझा जा सके कि क्या चल रहा है। अंत में अपनी जाँच और समझ के जरिये वे पाते हैं कि उस जगह का रसोइया एक बुरा और अनैतिक व्यक्ति है, जिसने लोगों का खाना मुर्गियों को खिलाकर परमेश्वर के घर का खाना जानबूझकर बर्बाद कर दिया। वह जो खाता है उसके बारे में बहुत नखरे करता है और सिर्फ स्वादिष्ट भोजन खाना पसंद करता है। जब मांस नहीं होता तब वह सब्जियाँ नहीं खाता और जब मांस होता है तो टोफू तक नहीं खाता। जब उसे अंडे मिलते हैं तो वह उन्हें हर समय खाता है। वह सिर्फ स्वादिष्ट भोजन चुनता है और कोई साधारण सब्जियाँ नहीं खाता, न ही वह उनके खराब होने की परवाह करता है। समझ से पता चला कि रसोइया एक बुरा व्यक्ति है—तो क्या उसे अगली बार चीजें जारी करते समय सब्जियाँ बढ़ाकर दी जानी चाहिए? (नहीं।) क्या उसे और सब्जियाँ न देना ही पर्याप्त है? एक बार पता चलने के बाद यह समस्या कैसे सँभाली जाए? उसे तुरंत बदल दो; यह कार्य सँभालने के लिए उसकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को लाओ जिसमें थोड़ी मानवता हो। समस्या का तुरंत पता लगाकर उसका समाधान करो और ऐसे बुरे, भ्रष्ट लोगों को हटा दो। कुछ लोग पूछ सकते हैं, “चूँकि वह अब खाना नहीं बनाता, तो क्या उसे मुर्गियों को चुगा डालने देना ठीक रहेगा?” (नहीं।) अगर वह मुर्गियों को चुगा डालेगा तो मुर्गियाँ अंडे नहीं देंगी; अगर वह सूअरों को खाना देगा तो सूअर दुबले हो जाएँगे। उन्हें किसी को भी खाना खिलाने देना ठीक नहीं होगा। ऐसे लोगों को चलता कर देना चाहिए—वे परमेश्वर के घर में कोई भी कर्तव्य निभाने के लिए अयोग्य हैं। अगर परमेश्वर के घर की भौतिक वस्तुएँ आवंटित करते समय कोई अन्य समस्याएँ दिखें तो उन्हें भी तुरंत हल करना चाहिए। इन समस्याओं को हल करने का क्या उद्देश्य है? परमेश्वर के घर की भौतिक वस्तुओं की बर्बादी और क्षति कम करना। कुछ लोग कह सकते हैं, “उन समस्याओं को हल करने के लिए रसोई की जाँच करनी होगी। क्या तुम्हीं ने नहीं कहा है कि अगुआओं और कार्यकर्ताओं को रसोई में जाने की अनुमति नहीं है? उन्हें अब क्यों अनुमति दी जा रही है?” ये दो अलग-अलग मुद्दे हैं। मैंने यह नहीं कहा कि उन्हें जाने की अनुमति नहीं है—वह अगुआओं और कार्यकर्ताओं के कार्य करने का तरीका न जानने, आलस्य से इधर-उधर घूमने का, पद के लाभों का लालच करने और हमेशा खाने के लिए अच्छी चीजें खोजने रसोई में जाने का गहन-विश्लेषण था। वर्तमान मामले में वे समस्याएँ हल करने के लिए रसोई में जा रहे हैं, न कि खाने के लिए अच्छी चीजें खोजने। जब जाना अपेक्षित हो तब जाओ और जब अपेक्षित न हो तब मत जाओ। अगुआओं और कार्यकर्ताओं के पास करने के लिए बहुत कार्य होता है और यह उनके कार्यों में से एक है, एक ऐसा कार्य जिसकी विशेष समस्याएँ सिर्फ रसोई के भीतर जाकर और उसकी बारीकियाँ समझकर ही जानी जा सकती हैं। अगर कोई रसोइया अनुपयुक्त पाया जाए, तो उसे तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए और उसके स्थान पर कोई उपयुक्त व्यक्ति रखना चाहिए। ऐसा करने से यह सुनिश्चित होता है कि परमेश्वर के घर द्वारा जारी की गई वस्तुएँ बर्बाद और खराब नहीं होतीं। मैं इसे जिस भी तरह से कहूँ, अगुआओं और कार्यकर्ताओं से यह अपेक्षित है कि वे अपनी जिम्मेदारियाँ निभाएँ—अगर यह तुम्हारी चिंता का विषय है और तुम्हें करना है तो तुम्हें निश्चित रूप से इसकी चिंता करनी चाहिए और इसके बारे में जो करना जरूरी है वह करना चाहिए। तुम्हें खुद निरीक्षण करना चाहिए और अपने दोनों कानों से ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए कि हर तरह का व्यक्ति इसके बारे में क्या कहता है—और निश्चित रूप से तुम्हें सभी तरह की चीजों के बारे में राय, विचार और विवेक रखना भी दिल से सीखना चाहिए; दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि परमेश्वर के घर द्वारा पालन किए जाने वाले सिद्धांत दिल से अपनाने चाहिए और किसी भी समय उनसे हटना नहीं चाहिए। तुम जो भी कार्य कर रहे हो, तुम्हें पहले यह समझना चाहिए कि परमेश्वर के घर द्वारा अपेक्षित सिद्धांत और नियम क्या हैं; कार्य शुरू करने से पहले तुम्हें खुद से कुछ और बार ऐसे प्रश्न पूछने चाहिए : क्या मैं परमेश्वर के घर द्वारा अपेक्षित सिद्धांतों के बारे में स्पष्ट हूँ? अगर इसे परमेश्वर के घर के सिद्धांतों के अनुसार करना है, तो इसे कैसे करना चाहिए? विशेष परिस्थितियों में इसे सिद्धांतों के अनुसार कैसे करना चाहिए? सामान्य परिस्थितियों में इसे कैसे सँभालना चाहिए? कार्य शुरू करने से पहले तुम्हें खुद से ये और ऐसे अन्य सवाल अवश्य पूछने चाहिए और परमेश्वर के सामने ज्यादा प्रार्थना करनी चाहिए। इसका एक हिस्सा आत्म-परीक्षण है; दूसरा हिस्सा परमेश्वर की जाँच स्वीकारना है। ऐसा करने से अगुआओं और कार्यकर्ताओं को कम गलतियाँ करने और अपने कार्य में कम भटकने, परमेश्वर के घर की भौतिक वस्तुओं की बर्बादी कम करने और उसके घर को होने वाला नुकसान घटाने में मदद मिलती है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसा करने से अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ कायम रहती हैं और वे उन जिम्मेदारियों को पूरा करते हैं। अगुआओं और कार्यकर्ताओं को वास्तव में यही करना चाहिए। यह अगुआओं और कार्यकर्ताओं से की जाने वाली अपेक्षा है। परमेश्वर के घर की विभिन्न भौतिक वस्तुओं की सुरक्षा और आवंटन करना कोई जटिल कार्य नहीं है। इसका एक हिस्सा अगुआओं और कार्यकर्ताओं के सिद्धांतों से परिचित होने का मामला है; इसका दूसरा हिस्सा यह है कि अगुआओं और कार्यकर्ताओं को विभिन्न भौतिक वस्तुओं के प्रबंधन के प्रभारियों के साथ इन सिद्धांतों के बारे में ज्यादा से ज्यादा संगति करनी चाहिए, चीजों की प्रगति के बारे में ज्यादा जानना चाहिए, चीजों को ज्यादा समझने की कोशिश करनी चाहिए और उनके प्रबंधन की स्थिति की ज्यादा जाँच करनी चाहिए, साथ ही परमेश्वर के घर की विभिन्न भौतिक वस्तुओं के आवंटन पर पर्यवेक्षकों के साथ ज्यादा संगति करनी चाहिए ताकि उन्हें इन सिद्धांतों की ज्यादा गहन समझ मिल सके। बेशक अगुआओं और कार्यकर्ताओं को लगातार पूछताछ कर यह पता करते रहना चाहिए कि वे लोग वस्तुओं का आवंटन और वितरण कैसे कर रहे हैं और कोई विशेष परिस्थितियाँ तो नहीं हैं—उदाहरण के लिए, क्या पर्यवेक्षक विभिन्न ऋतुओं में, विभिन्न समयों पर और ऐसे मामलों में जहाँ विभिन्न प्रकार के लोगों की अलग-अलग जरूरतें हों, परमेश्वर के घर द्वारा अपेक्षित सिद्धांतों के अनुसार वस्तुओं का आवंटन कर रहे हैं। ऐसा करने का उद्देश्य परमेश्वर के घर की विभिन्न वस्तुओं को अपने कार्य प्रभावी ढंग से करने में सक्षम बनाना, उनका यथासंभव अधिकतम सीमा तक समझदारी से इस्तेमाल किया जाना और यथासंभव सर्वोत्तम देखभाल और यथासंभव सर्वोत्तम रखरखाव के साथ उनकी सुरक्षा करना है। यह अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है।
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?