परमेश्वर का देहधारण परमेश्वर के कार्य के तीन चरण अंत के दिनों का न्याय परमेश्वर के नाम से संबंधित अनुग्रह का युग और राज्य का युग उद्धार और पूर्ण उद्धार शाश्वत जीवन का मार्ग परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य मसीह को जानना परमेश्वर को जानना बाइबल और परमेश्वर परमेश्वर की आवाज को जानना परमेश्वर चीन में उतर गया है परमेश्वर की कलीसिया और धर्म फरीसियों का भेद जानना त्रित्व की व्याख्या सत्य और सिद्धांत परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करना प्राचीन काल से ही सच्चा मार्ग उत्पीड़न के अधीन रहा है स्वर्गारोहण का सही अर्थ
  • 20 प्रकार के सुसमाचार के सत्य
    • परमेश्वर का देहधारण
    • परमेश्वर के कार्य के तीन चरण
    • अंत के दिनों का न्याय
    • परमेश्वर के नाम से संबंधित
    • अनुग्रह का युग और राज्य का युग
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    • प्राचीन काल से ही सच्चा मार्ग उत्पीड़न के अधीन रहा है
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मानव जाति के उद्धार के लिए परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों से संबन्धित सत्य

मानव जाति के प्रबंधन से सम्बंधित परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों के उद्देश्य

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन: मेरी सम्पूर्ण प्रबन्धन योजना, ऐसी योजना जो छः हज़ार सालों तक फैली हुई है, तीन चरणों या तीन युगों को शामिल करती हैः आरंभ में…

परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों में से प्रत्येक के उद्देश्य और महत्व

(1) व्यवस्था के युग में परमेश्वर के कार्य का उद्देश्य और महत्व परमेश्वर के प्रासंगिक वचन: वह कार्य जो यहोवा ने इस्राएलियों पर किया, उसने मानवजाति के…

परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों के बीच का पारस्परिक संबंध

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन: यहोवा के कार्य से ले कर यीशु के कार्य तक, और यीशु के कार्य से लेकर इस वर्तमान चरण तक, ये तीन चरण परमेश्वर के प्रबंधन की पू…

परमेश्वर के कार्य के तीन चरण किस तरह क्रमशः गहनतर होते जाते हैं ताकि लोगों को बचाया जा सके और उन्हें परिपूर्ण किया जा सके?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन: परमेश्वर के सम्पूर्ण प्रबंधन को तीन चरणों में विभाजित किया जाता है, और प्रत्येक चरण में, मनुष्य से यथोचित अपेक्षाएँ की जात…

परमेश्वर मानवजाति को क्यों बचाना चाहता है?

परमेश्वर के अति-उत्कृष्ट वचन: आरंभ में परमेश्वर विश्राम कर रहा था। उस समय पृथ्वी पर कोई मनुष्य या अन्य कुछ भी नहीं था, और परमेश्वर ने किसी भी तरह…

मानवजाति के परमेश्वर के प्रबंधन के कार्य के तीन चरणों के प्रयोजन को जानें।

परमेश्वर के अति-उत्कृष्ट वचन: मेरी सम्पूर्ण प्रबन्धन योजना, ऐसी योजना जो छः हज़ार सालों तक फैली हुई है, तीन चरणों या तीन युगों को शामिल करती हैः आ…

व्यवस्था का युग: परमेश्वर के कार्य का लक्ष्य और महत्व

परमेश्वर के अति-उत्कृष्ट वचन: इस्राएल में यहोवा के कार्य का महत्व, उद्देश्य, और चरण, पूरी पृथ्वी पर उसके कार्य का सूत्रपात करने के लिए थे, जो, इस…

व्यवस्था का युग: परमेश्वर के कार्य की सामग्री और परिणाम

परमेश्वर के अति-उत्कृष्ट वचन: आरंभ में मानवजाति के सृजन के बाद, ये इस्राएली ही थे जिन्होंने कार्य के आधार के रूप में काम किया, और सम्पूर्ण इस्राएल पृ…

व्यवस्था के युग में परमेश्वर के कार्य की आवश्यक समझ

यदि हम व्यवस्था के युग में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य के महत्व और सार को प्रकट करने वाले उसके वचनों पर ईमानदारी से चिंतन कर सकें, तो हम पूरी तरह स…

परमेश्वर ने प्रथम युग को व्यवस्था का युग का नाम क्यों दिया?

व्यवस्था के युग के दौरान, यहोवा ने मूसा के लिए अनेक आज्ञाएँ निर्धारित की कि वह उन्हें उन इस्राएलियों के लिए आगे बढ़ा दे जिन्होंने मिस्र से बाहर उसका अ…

व्यवस्था के युग में परमेश्वर का नाम यहोवा था

"यहोवा" वह नाम है जिसे मैंने इस्राएल में अपने कार्य के दौरान अपनाया था, और इसका अर्थ है इस्राएलियों (परमेश्वर के चुने हुए लोग) का परमेश्वर जो मनुष…

व्यवस्था के युग में परमेश्वर ने इस्राएइल में क्यों कार्य किया?

वह कार्य जो यहोवा ने इस्राएलियों पर किया, उसने मानवजाति के बीच पृथ्वी पर परमेश्वर के मूल स्थान को स्थापित किया जो कि वह पवित्र स्थान भी था जहाँ वह…

व्यवस्था के युग में परमेश्वर ने पवमत्रात्मा के माध्यम से क्यों कार्य किया?

परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों के शुरूआती कार्य को सीधे तौर पर आत्मा के द्वारा किया गया था, और देह के द्वारा नहीं। फिर भी, परमेश्वर के कार्य के ती…

अनुग्रह का युग: परमेश्वर के कार्य का लक्ष्य और महत्व

परमेश्वर के अति-उत्कृष्ट वचन: अनुग्रह के युग में, मनुष्य पहले से ही शैतान की भ्रष्टता से गुज़र चुका था, और इसलिए समस्त मानवजाति को छुटकारा देने क…

अनुग्रह का युग: परमेश्वर के कार्य की सामग्री और परिणाम

परमेश्वर के अति-उत्कृष्ट वचन: अनुग्रह के युग में, यीशु संपूर्ण पतित मानवजाति (सिर्फ इस्राएलियों को नहीं) को छुटकारा दिलाने के लिए आया। उसने मनुष्…

अनुग्रह के युग में परमेश्वर के कार्य का आवश्यक ज्ञान

धर्मोपदेश और संगति यदि हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर के उन वचनों पर ईमानदारी से विचार कर पाएँ जो अनुग्रह के युग में परमेश्वर के कार्य के महत्व और सार …

परमेश्वर ने द्वितीय युग को अनुग्रह का युग का नाम क्यों दिया?

यीशु अनुग्रह के युग के समस्त कार्य का प्रतिनिधित्व करता है; वह देह में देहधारी हुआ और उसे सलीब पर चढ़ाया गया, और उसने भी अनुग्रह के युग का उद्घाटन किया…