सत्य का अनुसरण कैसे करें (4) भाग तीन

उदाहरण 5 : जानबूझकर विपरीत लिंग को आकर्षित करने की कोशिश करना

एक और तरह का व्यक्ति होता है जो विपरीत लिंग के सदस्यों के आसपास होने पर दिखावा करने का हर संभव प्रयास करता है, ज्यादा मोहक दिखने के लिए ज्यादा खास तरीके से कपड़े पहनने और मेकअप करने की कोशिश करता है। उदाहरण के लिए, जब वह उन भाई-बहनों के साथ होता है जिनसे वह विशेष रूप से परिचित होता है, तब उसका व्यवहार और रूप-रंग फिर भी सामान्य रहता है, लेकिन जैसे ही विपरीत लिंग का कोई हमउम्र व्यक्ति उसके सामने आता है, वैसे ही वह अंदर से उत्साहित हो जाता है और एक विशेष परिधान और रूप-रंग अपनाने के लिए बाध्य महसूस करता है। कुछ महिलाएँ अपने होंठों को ज्यादा चमकदार बनाने के लिए तुरंत लिपस्टिक लगाती हैं, अपनी भौंहें सँवारती हैं और अगर समय मिले तो थोड़ी लाली भी लगा लेती हैं। आम तौर पर वे अपने बालों की पोनीटेल बनाती हैं, लेकिन जब उन्हें विपरीत लिंग का कोई ऐसा व्यक्ति मिलता है जो उन्हें पसंद आता है या आकर्षक लगता है, तो वे अपने बाल नीचे कंधों तक आने देकर अपनी छवि सँवारती हैं। इस बीच, कुछ पुरुष अपने बाल ज्यादा चमकीले बनाते हैं, उन्हें कोरियाई, हांगकांग या पश्चिमी हेयरकट-स्टाइल दे देते हैं, अपनी दाढ़ी-मूँछ ट्रिम कर लेते हैं, चश्मा लगा लेते हैं, अच्छे कपड़े पहन लेते हैं और अगर परिस्थितियाँ अनुकूल हों तो कुछ इत्र छिड़क लेते हैं, यह सब वे विपरीत लिंग के व्यक्तियों को आकर्षित करने के लिए करते हैं। विपरीत लिंग के सदस्यों से बात करते समय दिखावा करने के लिए अक्सर वे कुछ आकर्षक शब्द बोलते हैं, जिसका उद्देश्य अपना सांस्कृतिक परिष्कार, सुरुचि, हाजिरजवाबी और हास्य-बोध प्रदर्शित करना होता है। इन तमाम क्रियाकलापों के पीछे उनका इरादा बहुत ही सुविचारित होता है—वे ऐसा सिर्फ विपरीत लिंग के व्यक्तियों को आकर्षित करने के लिए करते हैं। कुछ लोग जब विपरीत लिंग के अपने किसी पसंदीदा व्यक्ति के या विपरीत लिंग के किसी हमउम्र व्यक्ति के आसपास होते हैं, तो वे और भी ज्यादा जीवंत हो जाते हैं, और ज्यादा बात करते हैं और खुद को बेहतर ढंग से व्यक्त करते हैं, और उनकी आँखें ज्यादा सजीव हो उठती हैं और निस्तेज और चमकहीन नहीं रहतीं, और उनके चेहरे के भाव भी विशेष रूप से विविधतापूर्ण हो जाते हैं। यहाँ क्या हो रहा है? विपरीत लिंग के व्यक्तियों को देखकर वे विशेष रूप से प्रभावित और अप्राकृतिक क्यों दिखाई देते हैं? जब विपरीत लिंग के सदस्य पहली बार मिलते हैं तो वे आम तौर पर थोड़े शर्मीले होते हैं, लेकिन कुछ मुलाकातों के बाद वे ज्यादा परिचित हो जाते हैं और ज्यादा प्राकृतिक रूप से व्यवहार करते हैं। लेकिन कुछ लोग विपरीत लिंग के व्यक्तियों को देखकर विशेष रूप से जीवंत और उत्तेजित हो उठते हैं। यह किस तरह का मुद्दा है? (यह फुसलाने से संबंधित है, जो भ्रष्ट स्वभाव के स्तर तक बढ़ जाता है।) यह किस तरह का भ्रष्ट स्वभाव है? (यह दुष्टता है।) क्या उनकी मानवता के साथ कोई समस्या नहीं है? (हाँ, है।) सख्ती से कहें तो, ऐसे लोगों की मानवता के साथ यह एक समस्या है। यहाँ उनकी मानवता का कौन-सा पहलू समस्याग्रस्त है? यह विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ बातचीत की समस्या है। गैर-विश्वासी इसका कैसे वर्णन करते हैं? वे इसे व्यक्ति के पारस्परिक आचरण की समस्या कहते हैं, है न? (हाँ।) अगर इसमें भ्रष्ट स्वभाव शामिल है तो इसे कुछ हद तक दुष्टता के रूप में सारांशित किया जा सकता है; लेकिन ज्यादा सटीक रूप से कहें तो, यह व्यक्ति की मानवता के संबंध में पुरुष और महिला के बीच पारस्परिक आचरण की एक समस्या है। विपरीत लिंग के व्यक्तियों से सामना होने पर कुछ लोग विशेष रूप से जीवंत और विशेष रूप से सकारात्मक और अग्रसक्रिय हो जाते हैं। ये “विशेष रूप से” व्यक्ति की मानवता से संबंधित पारस्परिक आचरण की समस्या को अभिव्यक्त करते हैं। यह पारस्परिक आचरण सामान्य है या असामान्य? (असामान्य।) तो फिर, क्या इसे दुष्ट कहा जा सकता है? क्या यह कहना उचित है कि यह दुष्ट है? क्या यह कहना ठीक है कि यह थोड़ा नीच है? (हाँ।) ऐसे लोग थोड़े नीच होते हैं। जहाँ कहीं भी विपरीत लिंग का कोई ऐसा व्यक्ति होता है जिसे वे पसंद करते हैं, वे उस व्यक्ति के समूह की ओर आकर्षित होते हैं, उसकी बगल में बैठने पर जोर देते हैं, शारीरिक संपर्क में संलग्न होते हैं और उसे वासना भरी नजरों से देखते हैं। यह उनके चरित्र के साथ समस्या दर्शाता है—वे उच्छृंखल, बदतमीज और नीच होते हैं। अगर कोई व्यक्ति सतही है तो वह चाहे समान लिंग के व्यक्तियों की उपस्थिति में हो या विपरीत लिंग के व्यक्तियों की उपस्थिति में, उसकी अभिव्यक्तियाँ समान होनी चाहिए—वह बस अच्छा दिखना चाहता है और यह भी चाहता है कि दूसरे उसे पसंद करें, उससे ईर्ष्या करें और उसकी प्रशंसा करें। यह उसकी मानवता में सतहीपन की समस्या है। लेकिन अगर उसका इरादा विपरीत लिंग के व्यक्तियों को आकर्षित कर उनके साथ छेड़खानी करना है, तो यह विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ उनकी पारस्परिक आचरण की समस्या बन जाता है। अगर कोई व्यक्ति अत्यधिक सतही है, इतना कि उससे उसका सामान्य जीवन प्रभावित होता है, तो यह उसकी मानवता के एक पहलू में दोष या समस्या है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति विशेष रूप से विपरीत लिंग के सदस्यों को आकर्षित करने के लिए कपड़े पहनता है, सेक्सी, मोहक दिखने और लोगों का ध्यान आकर्षित करने का लक्ष्य रखता है, तो यह दुष्ट, नीच और खराब पारस्परिक आचरण का संकेत है। कुछ लोग, जितने ज्यादा लोग उपस्थित होते हैं उतने ही ज्यादा नीच हो जाते हैं, हमेशा विपरीत लिंग के लोगों से संपर्क बनाने और उनके सामने दिखावा करने की कोशिश करते हैं। जो भी गैर-विश्वासियों के बीच चलन में होता है, वे उसी तरह के कपड़े पहनेंगे। खास तौर पर सभाओं में भाग लेते समय या कैमरे पर दिखते समय, जितने ज्यादा विपरीत लिंग के लोग होते हैं उतना ही ज्यादा वे सजना-धजना चाहते हैं। कुछ महिलाएँ कैमिसोल टॉप्स पहनती हैं, अपने बाल खुले रखती हैं, चटक लिपस्टिक और लाली लगाती हैं। कुछ तो अपनी नाक को भी कंटूर करती हैं, आई-शैडो लगाती हैं और हर तरह के गहने पहनती हैं। वे ऐसे कपड़े पहनती हैं जो विपरीत लिंग के व्यक्तियों को आकर्षित करें। यह सतही होने से ज्यादा गंभीर है। अगर सतहीपन व्यक्ति की मानवता के एक पहलू में दोष या खामी है और एक छोटी समस्या है तो विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ संबंधों के दुष्ट और नीच पहलू एक बड़ी समस्या हैं। किसी सतही व्यक्ति का अनैतिक गतिविधियों में लिप्त होना जरूरी नहीं, लेकिन जो लोग दुष्ट और नीच दोनों होते हैं उनमें से नब्बे प्रतिशत से ज्यादा लोगों के अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने की संभावना होती है। मैं ऐसा क्यों कहता हूँ? अगर कोई व्यक्ति विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ अपने मिलने-जुलने को बहुत महत्व देता है और विपरीत लिंग के सदस्यों के सामने दिखावा करना और अपना प्रदर्शन करना विशेष रूप से पसंद करता है तो ऐसे व्यक्ति के विपरीत लिंग के सदस्यों को अपने प्रेम-जाल में फँसाने की बहुत संभावना है। विपरीत लिंग के सदस्यों को अपने प्रेम-जाल में फँसाने का क्या उद्देश्य है? इसका उद्देश्य अनुचित संबंधों में लिप्त होना है। अगर वह विपरीत लिंग के किसी व्यक्ति को यूँ ही फुसला सकता है, तो क्या यह ये संकेत नहीं देता कि वह विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ संबंधों के मामले में बहुत लापरवाह है? (हाँ।) ऐसे लोगों में कोई गरिमा नहीं होती; वे लापरवाही से दूसरों पर डोरे डालते हैं, यहाँ तक कि पहल भी वे ही करते हैं। वे जितने ज्यादा लोगों पर डोरे डालते हैं, उतने ही ज्यादा खुश होते हैं, और जब तक वे किसी को पसंद करते हैं तब तक उसे कभी मना नहीं करते। यह किस तरह का व्यक्ति है? फिलहाल इस बात को अलग रखते हुए कि उनमें कौन-से भ्रष्ट स्वभाव हैं, क्या ऐसी मानवता अच्छी है? (नहीं।) अपनी मानवता के अन्य पहलुओं में उनमें चाहे जो भी खूबियाँ या कमियाँ हों, अगर वे विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ अपने पारस्परिक आचरण के संदर्भ में विशेष रूप से लापरवाह, छिछोरे और असंयमी हैं, तो यह अकेला ही यह दिखाने के लिए पर्याप्त है कि उनकी मानवता अच्छी नहीं है। अगर वे किसी समय या स्थान पर गलती कर सकते हैं या हद लाँघ सकते हैं तो क्या यह एक गंभीर समस्या नहीं है? (हाँ, है।) क्या ऐसे व्यक्ति विश्वसनीय हैं? (नहीं।) उनकी अविश्वसनीयता का मूल क्या है? यह उनकी दुष्ट प्रकृति में निहित है। वे किसी भी समय और स्थान पर कामुक विचार मन में ला सकते हैं और किसी भी समय और स्थान पर विपरीत लिंग के व्यक्ति को फुसला सकते हैं—उनका दिमाग सिर्फ इन्हीं विचारों से भरा रहता है। अगर परिवेश या परिस्थितियाँ अनुमति न दें या उनके पास सजने-सँवरने के लिए पर्याप्त समय न हो, तो भी वे कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेते हैं; वे चुलबुली नजरों से काम लेते हैं और अपने नैन-नक्श या हाव-भावों का दिखावा करते हैं, दूसरों को फुसलाने के लिए उन्हें वासना भरी निगाहों से देखते हैं। ऐसे लोग बेकार होते हैं; वे बहुत अविश्वसनीय होते हैं! वे छिछोरे, लंपट और लापरवाह होते हैं और किसी भी समय और स्थान पर वे दूसरों को पाप और अपराध करने के लिए फुसला सकते हैं; ऐसे लोगों की मानवता में शर्म की कोई भावना नहीं होती, वे कभी नहीं सुधर सकते। क्या ऐसे लोग भयावह होते हैं? (हाँ।) और उन्हें नहीं लगता कि ये शर्मनाक चीजें हैं; चाहे कितने भी लोग आसपास हों, वे खुलेआम इस तरह सज-धजकर दिखावा करते हैं, आसक्तिपूर्ण व्यवहार करते हैं और इस तरीके से दूसरों को फुसलाते हैं। दूसरों को पता तक नहीं चलता कि क्या हो रहा है—जबकि दूसरे लोग अभी भी मिलकर अपने सामान्य काम, गपशप या बातचीत पर ध्यान केंद्रित कर रहे होते हैं, ये जनाब पहले ही किसी को चुलबुली नजरों से देखकर उस पर डोरे डालना शुरू कर चुके होते हैं। देखो ऐसे लोग कितने घिनौने और भयावह होते हैं! उनमें कोई शर्म नहीं होती, है न? बेशर्म लोग लगातार अपराध करते हैं, और उनका अंतिम परिणाम क्या होता है? (वे अंततः नरक में दंडित होंगे।) परमेश्वर के वचन क्या कहते हैं? “अपराध मनुष्य को नरक में ले जाएँगे।” इसलिए अगर तुम्हारी मानवता के साथ बहुत गंभीर समस्याएँ हैं तो तुम बहुत खतरे में हो। अगर व्यक्ति की खराब मानवता किसी मामले में एक दोष है, तो उसे सुधारने के अवसर हो सकते हैं। लेकिन अगर उसकी मानवता का कोई पहलू इसलिए खराब है क्योंकि उसमें प्राकृतिक रूप से शर्म की भावना नहीं है और वह किसी भी समय और स्थान पर दूसरों को फुसलाने में सक्षम है और—भले ही उसने स्पष्ट रूप से भ्रष्ट स्वभाव प्रकट न किया हो फिर भी—वह गंभीर अपराध कर सकता है जिसके गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं, तो इस बात की कोई सीमा नहीं होती कि ऐसे लोग किस तरह आचरण करते हैं, उनका चरित्र विशेष रूप से खराब होता है, और अगर वे कुछ अपराध करते हैं तो यह उन्हें बरबाद कर सकता है। मानवता की समस्याओं के संबंध में, उन्होंने अपना आगे का मार्ग अवरुद्ध कर लिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनकी मानवता इतनी खराब है और उनके अपराध इतने ज्यादा हैं कि यह उन्हें नरक भेजने के लिए पर्याप्त है और सत्य का अनुसरण कर उद्धार प्राप्त करने के मार्ग पर चलने का कोई अवसर मिलने से पहले ही उनके लिए सब कुछ खत्म हो जाएगा। शर्म की भावना का अभाव व्यक्ति की मानवता से संबंधित एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है। ठीक‑ठीक कहूँ तो, यह भ्रष्ट स्वभाव के स्तर तक नहीं बढ़ता; यह बस एक तरीका, एक रवैया है, जिसे व्यक्ति आचरण करने और कुछ मामलों से निपटने में अपनाता है। यह रवैया उनकी मानवता से संबंधित है और अपराधों की ओर ले जा सकता है, जिससे समस्या गंभीर हो जाती है।

उदाहरण 6 : अपनी खूबियों को पूँजी मानना

कुछ लोगों को नृत्य करना बहुत पसंद होता है और वे नृत्य-चर्याएँ बहुत जल्दी सीख लेते हैं। शिक्षक द्वारा तीन बार प्रदर्शन करने के बाद वे मूल रूप से नृत्य की लय और चेष्टाओं में महारत हासिल कर लेते हैं और उसे सटीक रूप से प्रस्तुत कर सकते हैं। वे बहुत अच्छा नृत्य भी करते हैं, पुरस्कार जीत चुके होते हैं और नृत्य से संबंधित करियर बनाने की आशा रखते हैं, शायद नृत्य-शिक्षक या कलाकार के रूप में। यह किस पहलू से संबंधित है? (यह उनकी रुचियों और शौकों से संबंधित है।) यह उनकी खूबी है; यह उनकी रुचि और शौक है। वे नृत्य करना बहुत जल्दी सीख लेते हैं, जो दर्शाता है कि वे नृत्य करने में बहुत अच्छे होते हैं; वे प्राकृतिक रूप से इस तरह की चीज सटीकता से समझ लेते हैं और उसे आसानी से सीख लेते हैं। यह एक खूबी है, है न? (हाँ।) इस संबंध में उनमें एक खूबी होती है। नृत्य सीखने के बाद वे नृत्य करने का भी आनंद लेते हैं, नृत्य करने के लिए उत्सुक रहते हैं; और इतना ही नहीं, वे भविष्य में नृत्य से संबंधित करियर बनाने की योजना बनाते हैं और नृत्य को अपने भावी जीवन और भविष्य की यात्रा का साथी बनाने का इरादा रखते हैं—यह उनकी रुचियों और शौकों से संबंधित है। नृत्य उनकी खूबी और उनकी रुचि और शौक दोनों होता है—यह उनकी एक जन्मजात स्थिति होती है। कुछ लोगों में यह जन्मजात स्थिति होती है और परमेश्वर में विश्वास करना शुरू करने के बाद वे नृत्य के वीडियो देखने में भी आनंद लेते हैं। इसलिए वे इस उम्मीद से परमेश्वर के घर में नृत्य करने का कर्तव्य लेते हैं कि उन्होंने जो सीखा है, उसका लाभ अपना कर्तव्य निभाने में उठाया जा सकता है और परमेश्वर के घर में वह उपयोगी हो सकता है और वे परमेश्वर द्वारा याद किए जाने के लिए अपने अच्छे कर्म तैयार कर सकते हैं। नृत्य में उनका एक ठोस आधार होता है और वे विभिन्न प्रकार के नृत्य भी जल्दी से सीख लेते हैं। परमेश्वर के घर की अपेक्षाओं के अनुसार नृत्य-कार्यक्रम बनाते समय वे पूरी तरह से खुलकर दूसरों को वह सब सिखाने के लिए तैयार रहते हैं जो उन्होंने सीखा होता है। हालाँकि उन्होंने दूसरों की तुलना में ज्यादा तरह के नृत्य सीखे होते हैं और अपने पेशे में वे ज्यादा कुशल होते हैं, फिर भी वे खुद को दूसरों से श्रेष्ठ नहीं समझते। वे दूसरों के साथ सौहार्दपूर्ण ढंग से मिलजुलकर रहते हैं और भाई-बहनों को बहुत धैर्यपूर्वक वह सिखाते हैं जो उन्होंने सीखा होता है। यह किस चीज की अभिव्यक्ति है? (यह उनकी मानवता की अभिव्यक्ति है।) उनकी मानवता अच्छी है या नहीं? (उनकी मानवता अच्छी है।) वह किस तरह से अच्छी है? (वे पूरी तरह से खुलकर दूसरों को वह सब सिखाने में सक्षम होते हैं जो वे जानते हैं, दूसरों को भी वह प्राप्त करने देते हैं जो उनके पास होता है—यह अच्छी मानवता है।) वे पूरी तरह से खुलकर दूसरों को वह सब सिखाने में सक्षम होते हैं जो उन्होंने सीखा होता है। उनमें और क्या बड़ी बातें हैं? वे वास्तव में दिखावा नहीं करते। ऐसे व्यक्ति की मानवता अच्छी होती है। चूँकि उनमें नृत्य की खूबी होती है, इसलिए वे परमेश्वर के घर में नृत्य से संबंधित कर्तव्य ग्रहण करते हैं। लेकिन कुछ समय बाद कार्य की जरूरतों के कारण परमेश्वर का घर उनके लिए अन्य उपयुक्त कार्य करने की व्यवस्था करता है। वे मन ही मन सोचते हैं, “क्या मैंने नृत्य सीखने में लगाए बीस साल बरबाद कर दिए? अब जब मुझे नृत्य से असंबंधित कार्य करने के लिए कहा गया है, तो मैं बहुत असंतुष्ट महसूस करता हूँ! मुझे टीम अगुआ या पर्यवेक्षक बनाने के बजाय, मुझे अपनी खूबी, अपनी विशेषता का इस्तेमाल क्यों नहीं करने दिया जाता? यह मेरी खूबी नहीं है और मैं नहीं जानता कि इसे कैसे करना है। यह ऐसी चीज है जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।” हालाँकि बाहरी तौर पर वे कहते हैं, “यह सब परमेश्वर की व्यवस्थाओं का हिस्सा है और मैं समर्पण करने का इच्छुक हूँ”, लेकिन वास्तव में, चाहे अगुआ कुछ भी कहें, वे उसे स्वीकारने के इच्छुक नहीं होते और उसे स्वीकार नहीं करते। वे सोचते हैं, “तुम लोगों में पेशेवर ज्ञान की कमी है और फिर भी तुम लोग हमारी अगुआई करने आ जाते हो। तुम बस धर्म-सिद्धांत के बारे में बात करते हो। तुम लोग मुझसे बेहतर नहीं हो!” यह किस चीज की अभिव्यक्ति है? (आंतरिक अवज्ञा की।) यह किस तरह की समस्या है? क्या यह भ्रष्ट स्वभाव का प्रकाशन है? (हाँ।) हालाँकि उनकी मानवता सामान्यतः ठीक-ठाक होती है—वे दूसरों के साथ सहयोग करने, दयालु होने और एक अच्छा इंसान बनने के लिए तैयार रहते हैं, गड़बड़ नहीं करते और बाधा नहीं डालते या नुकसान और मुसीबत पैदा नहीं करते—और अपनी व्यक्तिपरक इच्छा के संदर्भ में वे परमेश्वर के घर की व्यवस्थाओं के प्रति समर्पण करने और अपना कर्तव्य अच्छी तरह से निभाने के लिए तैयार रहते हैं, फिर भी जब उनके रुतबे या उन मामलों की बात आती है जो उनकी धारणाओं और इच्छाओं के अनुरूप नहीं होते, तो क्या उनमें समर्पण होता है? क्या वे सत्य खोजने की कोई अभिव्यक्ति दिखाते हैं? (नहीं।) तो वे क्या अभिव्यक्त करते हैं? (वे जो अभिव्यक्त करते हैं वह है प्रतिरोध, शिकायत और परमेश्वर के घर की व्यवस्थाओं के प्रति समर्पण की कमी।) यह सही है। तो इन अभिव्यक्तियों को किस तरह की समस्या के रूप में सारांशित किया जा सकता है? (एक भ्रष्ट स्वभाव के रूप में।) हालाँकि बाहरी तौर पर उनकी मानवता दयालु लगती है और वे खुले तौर पर विरोध नहीं करते, आपत्ति नहीं जताते या अगुआओं की आलोचना नहीं करते, फिर भी इन मामलों के प्रति उनका रवैया उनके भ्रष्ट स्वभाव का प्रकाशन होता है। वे किस तरह के भ्रष्ट स्वभाव का प्रकाशन करते हैं? (एक अहंकारी स्वभाव का।) सही कहा, अहंकार। उन्हें लगता है कि वे एक निश्चित विधा में कुशल हैं और उनकी मानवता बहुत अच्छी है, इसलिए वे कलीसिया के अगुआओं की व्यवस्थाओं के प्रति समर्पण करने का विरोध करने के लिए इसका इस्तेमाल पूँजी के रूप में करते हैं। वे सत्य नहीं खोजते और अपनी पसंद का कर्तव्य ही निभाना चाहते हैं। यहाँ तक कि जब कलीसिया उन्हें कोई उपयुक्त कर्तव्य सौंपती है तो भी वे उसे स्वीकार नहीं कर पाते और अगर कोई चीज उनकी धारणाओं और कल्पनाओं के अनुरूप नहीं होती, भले ही वह परमेश्वर के घर की व्यवस्था ही क्यों न हो, तो वे समर्पण करने से इनकार कर देते हैं। ये विद्रोहीपन और अहंकारी स्वभाव के प्रकाशन हैं। उनके द्वारा प्रदर्शित अभिव्यक्तियों की यह शृंखला देखो : उनकी जन्मजात स्थितियों की खूबियों से लेकर उनकी मानवता तक और अंत में उनके भ्रष्ट स्वभाव तक—उनकी अभिव्यक्तियों में ये तीन अलग-अलग पहलू शामिल होते हैं। उनकी जन्मजात स्थितियों की खूबी ऐसी चीज है जिसके साथ वे पैदा हुए थे और इसमें आलोचना करने लायक कुछ नहीं है। वे जिस भी चीज में कुशल हों, इसका मतलब यह नहीं कि उनमें भ्रष्ट स्वभाव नहीं है, न ही यह ये दिखा सकता है कि उनका चरित्र अच्छा है या बुरा। लेकिन कुछ जन्मजात स्थितियों से पैदा हुई श्रेष्ठता की भावना या सांसारिक जनमत द्वारा थोपी गई स्थिति और निरूपण व्यक्ति की मानवता को विकृत कर सकते हैं। इस विकृतीकरण का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है कि चूँकि किसी व्यक्ति में कुछ ऐसी जन्मजात स्थितियाँ हैं जिन्हें दूसरे लोग अपेक्षाकृत प्रशंसात्मक ढंग से देखते हैं और उन्हें समाज में कुछ लोगों से सराहना और सम्मान मिलता है, इसलिए वे अपने मूल्य और स्थिति का गलत निरूपण विकसित कर लेते हैं। उन्हें लगता है कि वे बहुत अच्छे हैं, दूसरों से श्रेष्ठ हैं, और वे लोगों को नीची निगाह से देखना शुरू कर देते हैं, हमेशा यह मानते हैं कि वे सही हैं और उनका सब कुछ अच्छा है, और वे चाहते हैं कि दूसरे उनकी बात सुनें और उनका अनुसरण करें। उस हालत में चीजों पर उनके तमाम विचार और रुख गलत होते हैं। इन गलत विचारों और रुखों के साथ व्यक्ति दुनिया और बुरी मानवजाति का अनुसरण करेगा। बुरी मानवजाति और बुरी दुनिया का अनुसरण करने का क्या निहितार्थ है? निहितार्थ यह है कि तुम इस बुरी दुनिया और बुरी मानवजाति से आने वाले भ्रामक विचारों और दृष्टिकोणों के अनुसार जिओगे और इन भ्रामक विचारों, दृष्टिकोणों और कथनों का इस्तेमाल हर चीज को पहचानने और उसका निरूपण करने के लिए करोगे। उदाहरण के लिए, मान लो तुम काफी अच्छे दिखते हो, तुम्हारा चेहरा-मोहरा और शरीर अच्छा है—ये जन्मजात स्थितियाँ हैं, जो ईश्वर-प्रदत्त हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है; यह बस एक तथ्य है। लेकिन इस समाज और इस दुष्ट मानवजाति द्वारा गलत स्थिति-निर्धारण के तहत यह तथ्य तुम्हें ढीठ और भोगी, सतही और घमंडी बना सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि जन्मजात, श्रेष्ठ स्थितियाँ होने के साथ-साथ इस समाज और मानव जाति के विभिन्न भ्रामक विचारों और दृष्टिकोणों द्वारा दी गई शिक्षा, प्रलोभन और आकार के कारण तुम्हारी मानवता विकृत हो जाती है। “विकृत” का क्या मतलब है? तुम्हारे पास ये जन्मजात स्थितियाँ होना अपने आप में पूरी तरह से सामान्य है—अच्छा दिखना कोई असाधारण बात नहीं है; इसका यह मतलब नहीं कि तुम सत्य समझते हो, न ही इसका यह मतलब है कि तुम उदात्त हो। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि तुम अच्छे दिखते हो, आकर्षक लगते हो और लोग तुम पर थोड़ी ज्यादा नजर डालने को तैयार हो सकते हैं; तुम दूसरों के लिए चिढ़ पैदा करने वाले या अप्रिय नहीं हो, बस। लेकिन ऐसे सामाजिक परिवेश में जहाँ सुंदरता, आकर्षण और उत्कृष्ट, उच्च-स्तरीय ग्लैमर के विचारों को आदर्श माना जाता है, यह प्रवृत्ति तुम्हें चरम सीमा पर धकेलती है, जिससे तुम्हारी मानवता घमंडी, भोगी और सतही हो जाती है। चेहरा-मोहरा अच्छा होना एक जन्मजात स्थिति है। परमेश्वर ने तुम्हें यह जन्मजात स्थिति इसलिए नहीं दी कि तुम घमंडी, भोगी या सतही बनो, बल्कि वह चाहता है कि तुम इसे सामान्य रूप से देखो : “मुझे यह जन्मजात स्थिति, यह रूप-रंग देने के लिए परमेश्वर का शुक्रिया। यह परमेश्वर का अनुग्रह और देन है। मुझे परमेश्वर का शुक्रगुजार होना चाहिए। मेरे पास शेखी बघारने लायक कुछ नहीं है।” ऐसी जन्मजात स्थिति के साथ व्यक्ति को जो करना चाहिए, वह यह है कि परमेश्वर की शिक्षाओं के अनुसार लोगों और चीजों को देखे और आचरण और क्रियाकलाप करे। लेकिन समाज और शैतान से विभिन्न विचार और दृष्टिकोण स्वीकारने के बाद वह सुंदरता और आकर्षण को पूँजी के एक रूप की तरह देखने लगता है। फिर वह इस पूँजी का इस्तेमाल हर समूह में हर व्यक्ति को खुश करने के लिए करता है, जो वह चाहता है उसे प्राप्त करने के लिए इस जन्मजात, मूलभूत स्थिति का लाभ उठाता है। कुछ लोग तो इस जन्मजात स्थिति का इस्तेमाल ऐसे काम करने के लिए भी करते हैं जो कानून तोड़ते हैं, नैतिक सीमाओं का उल्लंघन करते हैं या मानवता के खिलाफ जाते हैं। किसी व्यक्ति की मानवता में कुछ विकृत और चरम चीजें होने का कारण समाज और दुष्ट मानवजाति से आने वाले कुछ पाखंडों, भ्रांतियों और गलत सार्वजनिक मतों का बढ़ता प्रभाव है। चूँकि लोगों में जन्मजात रूप से सत्य और भेद पहचानने की क्षमता का अभाव होता है, इसलिए वे प्राकृतिक रूप से ये सार्वजनिक मत, कथन और सिद्धांत स्वीकार लेते हैं, जो समाज और दुष्ट मानवजाति से आते हैं। वे इन नकारात्मक चीजों को ऐसे लेते हैं जैसे वे सही हों और इन भ्रामक और बुरे विचारों और दृष्टिकोणों के मार्गदर्शन में उनका जमीर और विवेक उच्च या शुद्ध नहीं होता, बल्कि विकृत और क्षतिग्रस्त होता है। अगर यह समाज सुंदर स्त्री-पुरुषों की प्रशंसा या गुणगान न करे और अगर कोई बाहरी विचार तुम्हें लुभाएँ नहीं या आकार न दें—अगर जहाँ तुम जाओ वहाँ कोई तुम्हारी सुंदरता के लिए तुम्हारी प्रशंसा न करे, तुम्हारे साथ विशेष व्यवहार न करे या तुम्हें विभिन्न चीजें करने के लिए ललचाए नहीं या दबाव न डाले—तो तुम देखोगे कि प्राकृतिक रूप से अच्छा चेहरा-मोहरा होना पूरी तरह से सामान्य है और शेखी बघारने लायक नहीं है। इसका मतलब यह है कि तुम अपनी अंतर्निहित, मूलभूत स्थिति के आधार पर वे काम करोगे जो तुम्हें करने चाहिए और वे काम नहीं करोगे जो तुम्हें नहीं करने चाहिए सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम्हारी जन्मजात स्थिति इतनी श्रेष्ठ है। लेकिन बाहरी परिवेश के प्रलोभन और भ्रष्टता के कारण तुम यह मानने लगते हो कि प्राकृतिक रूप से अच्छा चेहरा-मोहरा होना असाधारण चीज है और यह तुम्हें बाकी सबसे बेहतर बनाती है। कोई आत्म-संयम न होने के कारण तुम अपने आकर्षक चहरे-मोहरे का इस्तेमाल दूसरों को फुसलाने के लिए करते हो, जमीर और विवेक का संयम तोड़ देते हो और स्व-आचरण की सीमाएँ लाँघ जाते हो। अपने इच्छित लाभ प्राप्त करने के लिए विभिन्न परिवेशों में तुम विभिन्न भ्रष्ट स्वभाव प्रकट कर सकते हो, अपनी श्रेष्ठ जन्मजात स्थिति का दोहन कर सकते हो और विभिन्न तरकीबें इस्तेमाल कर सकते हो। यह जन्मजात स्थितियों, मानवता और भ्रष्ट स्वभावों के बीच का संबंध है। कभी-कभी इन तीन पहलुओं के बीच एक निश्चित संबंध होता है और बेशक, कभी-कभी पहले दो या आखिरी दो पहलुओं के बीच एक आवश्यक संबंध होता है। क्या तुम समझते हो? (अब हम थोड़ा और समझते हैं।) तुम्हें कम से कम क्या पता होना चाहिए? कोई भी जन्मजात स्थिति अपने आप में गलत नहीं होती; यह बस व्यक्ति की मानवता की एक मूलभूत स्थिति होती है। जब लोगों की मानवता की बात आती है तो अच्छी और बुरी, सकारात्मक और नकारात्मक मानवता होती है। तो भ्रष्ट स्वभाव कैसे पैदा होता है? यह तब पैदा होता है जब अपनी अंतर्निहित, जन्मजात स्थितियों के आधार पर व्यक्ति शैतान के विभिन्न विचारों और फलसफों से प्रभावित होता है और यही प्रभाव विभिन्न गलत दृष्टिकोणों के निर्माण की ओर ले जाता है, जो तब एक तरह का जीवन सार बन जाता है जिस पर व्यक्ति जीवित रहने के लिए निर्भर करता है। यही होता है भ्रष्ट स्वभाव।

अभी-अभी हमने जन्मजात स्थितियों, मानवता और भ्रष्ट स्वभावों की विभिन्न अभिव्यक्तियों के बारे में संगति की। हमने दस जन्मजात स्थितियाँ सूचीबद्ध कीं और हमने मानवता से संबंधित विभिन्न अभिव्यक्तियों के बारे में भी संगति की। आओ, अब सारांश प्रस्तुत करते हैं : हमने मानवता की किन विभिन्न अभिव्यक्तियों के बारे में संगति की? (मानवता के संबंध में, अच्छी मानवता की अभिव्यक्तियाँ होती हैं और बुरी मानवता की अभिव्यक्तियाँ होती हैं। परमेश्वर ने अभी कुछ उदाहरण दिए थे। कुछ लोगों में प्राकृतिक रूप से किसी निश्चित क्षेत्र में कोई विशेष खूबी होती है और वे किसी निश्चित तकनीकी पेशे में कुशल होते हैं और वे पूरी तरह से खुलकर दूसरों को सिखाने में सक्षम होते हैं। कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो दूसरों का फायदा नहीं उठाते। ये अपेक्षाकृत अच्छी मानवता की अभिव्यक्तियाँ हैं। परमेश्वर ने बुरी मानवता की अभिव्यक्तियों के उदाहरण भी दिए। मसलन, नीच और घटिया मानवता होना और लगातार दूसरों की पीठ पीछे गपशप के लिए ताक-झाँक करना; और विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ अपने पारस्परिक आचरण के संबंध में लापरवाह होना और गरिमा और निष्ठा न होना; और स्वार्थी, नीच होना और दूसरों का फायदा उठाना पसंद करना, साथ ही दूसरों के साथ बातचीत में बिना जमीर और विवेक के अत्यधिक मतलबी होना—ये सब बुरी मानवता की अभिव्यक्तियाँ हैं।) बुरी मानवता की अभिव्यक्तियों में से सबसे बुरी अभिव्यक्ति कौन-सी होती है? कैसा व्यक्ति तुम लोगों को सबसे अप्रिय लगता है? (जिसमें शर्म की कोई भावना नहीं होती और जो विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ अपनी बातचीत में विशेष रूप से लापरवाह होता है।) लापरवाह, लंपट और शर्म की भावना से रहित। इसे कहने का एक ज्यादा सुसंस्कृत तरीका यह है कि ये लोग “कोई शर्म नहीं जानते।” सरल भाषा में, वे “बेशर्म” होते हैं या ज्यादा सटीक रूप से कहें तो, “बिलकुल निर्लज्ज।” ऐसे लोगों को कोई पसंद नहीं करता।

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