सत्य का अनुसरण कैसे करें (7) भाग एक
किसी व्यक्ति की काबिलियत का मूल्यांकन करने के 11 मानक
पिछली सभा में हमने इस बारे में संगति की थी कि काबिलियत क्या होती है और व्यक्ति की काबिलियत का मूल्यांकन करने का क्या तरीका है। हमने व्यक्ति की काबिलियत का मूल्यांकन करने के लिए कुल कितने मानकों की सूची बनाई थी? (ग्यारह।) इन ग्यारह मानकों को एक बार फिर दोहराओ। (सीखने की क्षमता, चीजों को समझने की क्षमता, बोध क्षमता, चीजों को स्वीकारने की क्षमता, संज्ञानात्मक क्षमता, आकलन करने की क्षमता, चीजों को पहचानने की क्षमता, चीजों पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता, फैसला लेने की क्षमता, चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता और नवाचार क्षमता।) इन ग्यारह क्षमताओं में से हर क्षमता व्यक्ति की व्यापक काबिलियत की माप का एक हिस्सा है। पिछली बार हमने इनमें से दस के बारे में संगति की थी, चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता तक संगति की थी। हर क्षमता के लिए हमने अच्छी काबिलियत, औसत काबिलियत, खराब काबिलियत और कोई काबिलियत न होने की अभिव्यक्तियों के बारे में संगति की थी। बिना काबिलियत वाले लोगों के पास मूल रूप से कोई विशेष क्षमता नहीं होती है, कोई सच्चा शौक या रुचि नहीं होती है। किसी भी चीज का सामना करते समय उनकी कोई राय नहीं होती है और उनमें आकलन करने की क्षमता नहीं होती है। उनमें लोगों, घटनाओं और चीजों को पहचानने की कोई क्षमता नहीं होती है; उनमें कुछ भी स्वीकारने की भी कोई क्षमता नहीं होती है और यकीनन यह तो कहा ही नहीं जा सकता है कि उनमें चीजों पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता या फैसला लेने की क्षमता होती है। क्योंकि ऐसे लोगों में कोई विशेष क्षमता नहीं होती है, इसलिए वे चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता से और भी कम जुड़े होते हैं।
नंबर 10 : चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता
चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता के बारे में हमने पिछली सभा में इसकी विषय-वस्तु के कुछ हिस्से के बारे में संगति की थी। चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता का मुख्य रूप से क्या मतलब है? मूल्यांकन वह चीज है जिसे लोग अंतर पहचानना कहते हैं, जिसका अर्थ है लोगों, घटनाओं और चीजों के विचारों, दृष्टिकोणों, रुखों और समर्थित विषयों को पहचानने की क्षमता। चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता में मुख्य रूप से कुछ मुद्दों के संबंध में व्यक्ति के विचार और दृष्टिकोण शामिल हैं; यानी वे चीजें जो वैचारिक क्षेत्र से संबंधित हैं। अगर तुममें इन चीजों को पहचानने और उनकी सराहना करने की क्षमता है तो तुम चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता वाले व्यक्ति हो। अगर तुम्हें यह नहीं मालूम कि कैसे देखना है और तुम विचारों और दृष्टिकोणों से संबंधित इन मुद्दों को मूल रूप से समझ नहीं सकते हो तो तुम्हें चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता वाला व्यक्ति नहीं माना जा सकता है—इस क्षमता का तुमसे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन जब तुम किसी चीज का सामना करते हो तो अगर तुम उस चीज की उत्पत्ति और उसके पीछे का उद्देश्य पहचान सकते हो और यह पहचान सकते हो कि इस चीज द्वारा व्यक्त और समर्थित विचार और दृष्टिकोण ठीक हैं या नहीं, और यह भी पहचान सकते हो कि क्या ये विचार और दृष्टिकोण टिक सकते हैं, क्या वे सकारात्मक चीजें हैं या नकारात्मक, और क्या वे चीजों के विकास के नियमों के अनुरूप हैं या परमेश्वर द्वारा सृजित सभी चीजों को नियंत्रित करने वाले नियमों के अंतर्गत परिघटनाओं के करीब हैं—अगर तुममें चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की इस प्रकार की क्षमता है तो इससे यह साबित होता है कि तुम्हारी काबिलियत काफी अच्छी है। अगर इस चीज द्वारा समर्थित विचार और दृष्टिकोण में या यह जिस दिशा और लक्ष्य का प्रचार करती है उनमें गलतियाँ, विकृतियाँ हैं या ऐसी चीजें हैं जो मानवता या सोचने-विचारने के तर्क के अनुरूप नहीं हैं या ऐसी चीजें हैं जो परमेश्वर द्वारा सृजित सभी चीजों को नियंत्रित करने वाले वस्तुनिष्ठ नियमों के साथ मौलिक रूप से संगत नहीं हैं—अगर तुम इन सबका पता लगा सकते हो, और तुम क्या सही है और क्या गलत है इन दोनों का पता लगा सकते हो तो यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि तुममें चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता है और तुम्हारी चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता ऊँची है; तुममें यह क्षमता होने का मतलब है कि तुम्हारी काबिलियत बहुत अच्छी है। उदाहरण के लिए, जब तुम कलीसिया के किसी भाई या बहन का लिखा कोई लेख पढ़ते हो, तो तुम पता लगा सकते हो कि चीजों की उनकी समझ, लोगों के प्रकृति सार की उनकी समझ और परमेश्वर के वचनों की उनकी समझ सत्य सिद्धांतों के अनुरूप है या नहीं, लेख में व्यक्त दृष्टिकोण विकृत हैं या नहीं और वे जो दृष्टिकोण और रुख अपनाते हैं वे सही हैं या गलत—तुम इन सभी चीजों का पता लगा सकते हो। अगर तुम लेख में दिए गए उन विचारों और दृष्टिकोणों से सहमत हो सकते हो जो सही हैं; और अगर तुम लेख में भ्रामक विचारों और दृष्टिकोणों को पहचान कर दुरुस्त भी कर सकते हो और तुम्हें पता है कि ऐसे विचार और दृष्टिकोण क्यों गलत हैं और वे सोचने-विचारने के तर्क के किन पहलुओं या सकारात्मक चीजों के किन वस्तुनिष्ठ नियमों का उल्लंघन करते हैं, और एक गहरे स्तर पर तुम यह देख सकते हो कि वे सत्य सिद्धांतों के ऐसे किस पहलू का उल्लंघन करते हैं जिसके बारे में परमेश्वर ने मानवजाति को चेताया है—तो इससे साबित होता है कि तुम्हारी काबिलियत अच्छी है। एक बात यह है कि अगर तुम यह देख सकते हो कि इस लेख में ऐसी कौन-सी सकारात्मक चीजें हैं जो सीखने लायक हैं और तुम यह आकलन भी कर सकते हो कि यह लोगों को कौन-सी सकारात्मक दिशा प्रदान करता है और साथ ही, यह अपने साथ कौन-सा सकारात्मक आध्यात्मिक पोषण, सहायता और समर्थन लाता है—और इसके अलावा, अगर तुम यह जान सकते हो कि इस लेख में कौन-सी प्रतिकूल, नकारात्मक और विकृत बातें हैं; इसमें ऐसे कौन-से भ्रामक विचार और दृष्टिकोण हैं जो लोगों की सोच को गलत दिशा में ले जा सकते हैं और लोगों पर उनका क्या नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है; इन भ्रामक चीजों को कैसे ठीक करना चाहिए; और कैसे कुछ कमियों की भरपाई की जानी चाहिए ताकि यह लोगों को ज्यादा लाभ पहुँचा सके—तो यह चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता होने की अभिव्यक्ति है। उदाहरण के लिए, नृत्य सीखते समय जब तुम कोई नृत्य प्रस्तुति देखते हो तो तुम यह पता लगा सकते हो कि कौन-सी नृत्य की गतियाँ बहुत मानवीय हैं, मानवता के भीतर के विचारों और इच्छाओं को व्यक्त करती हैं, मानवता के परिप्रेक्ष्य से उत्पन्न होती हैं, मानवता पर आधारित हैं और सामान्य मानवता के जमीर और विवेक की जरूरतों के बहुत ही अनुरूप हैं; और तुम यह पता लगा सकते हो कि कौन-सी गतियाँ, चेहरे के भाव और शारीरिक भाषा की अभिव्यक्ति की विधियाँ, और साथ ही उनके द्वारा समर्थित विचार सकारात्मक हैं और व्यक्ति की आध्यात्मिक दुनिया को समृद्ध कर सकते हैं—तुम इन सभी चीजों को देखने में समर्थ हो। तुम सिर्फ नृत्य करने या कुछ आसान गतियाँ करने में समर्थ नहीं हो—बल्कि तुम किसी नृत्य प्रदर्शन द्वारा समर्थित विचार देख सकते हो; तुम इसमें निहित विचारों के अर्थ समझ सकते हो और साथ ही इन विचारों के मार्गदर्शन में प्रयुक्त नृत्य रूपों को भी समझ सकते हो। अगर नृत्य के रूप और शरीर की भाषा लोगों के लिए फायदेमंद हैं और कुछ ऐसी चीजें हैं जो तुम्हें सीखनी चाहिए, स्वीकारनी चाहिए और जिनसे तुम्हें सबक सीखना चाहिए—तुम इन चीजों को देखने और सीखने में समर्थ हो और तुम इसके सकारात्मक तत्वों को स्वीकार सकते हो—तो यह चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता होने की अभिव्यक्ति है। यकीनन, अगर यह नृत्य कुछ ऐसे विकृत विचार प्रस्तुत करता है जो मानवता के अनुरूप नहीं हैं और तुम उन्हें महसूस भी कर सकते हो और तुम यह पहचान सकते हो कि गलतियाँ कहाँ निहित हैं और तुम्हें यह भी पता है कि प्रस्तुति के इस रूप में क्या गलत है और इसके पीछे मार्गदर्शक विचार क्या हैं—अगर तुम यह सब देख और पहचान सकते हो, तो यह भी चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता होने की अभिव्यक्ति है। ये दो उदाहरण देने के बाद क्या अब तुम लोग समझ गए हो कि चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता क्या होती है? क्या यह मापने का मानक स्थापित हो चुका है कि क्या किसी में अच्छी काबिलियत और चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता है? (हाँ।)
अगर तुम कुछ देखते हो और तुम्हें पता है कि यह किन विचारों और दृष्टिकोणों की हिमायत करता है या यह कौन-सा परिप्रेक्ष्य और रुख अपनाता है, लेकिन तुम्हें यह नहीं मालूम कि ये विचार और दृष्टिकोण सही हैं या गलत तो तुममें चीजों को पहचानने की ज्यादा क्षमता नहीं है। हो सकता है कि तुम सिर्फ यह महसूस करो, “यह नृत्य बहुत अच्छा है; यह लेख बहुत अच्छा है; यह फिल्म बहुत अच्छी है; इसका कलात्मक मूल्य है और इसकी अभिव्यंजक तकनीकें बहुत अच्छी हैं,” तुम इस चीज को सिर्फ उद्योग के परिप्रेक्ष्य से या ज्ञान के परिप्रेक्ष्य से देखते और सीखते हो, लेकिन यह तय करने में समर्थ नहीं हो कि यह चीज जिन विचारों और दृष्टिकोणों की हिमायत करती है वे ठीक हैं या दोषपूर्ण, सही हैं या गलत, सकारात्मक हैं या नकारात्मक; और हो सकता है कि तुम ऐसे प्रश्न पूछो, “क्या ये विचार और दृष्टिकोण सत्य के अनुरूप हैं? क्या यह कार्य मानवता के अनुरूप है? क्या यह चीजों के विकास के नियमों के अनुरूप है? क्या ऐसे लोगों का अस्तित्व है? क्या ऐसी घटनाएँ हुई हैं? क्या यह कोई सकारात्मक चीज है?” अगर तुम जो भी वाक्य बोलते हो वह प्रश्न चिह्न से समाप्त होता है तो तुममें चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं है। अगर तुम सिर्फ इनमें शामिल तकनीकी, पेशेवर या ज्ञान-आधारित पहलुओं को ही जानते हो, लेकिन जब वैचारिक स्तर पर चीजों की बात आती है तो तुममें यह राय बनाने की क्षमता नहीं है कि वे ठीक हैं या दोषपूर्ण, सही हैं या गलत, तो यह तुम्हारी काबिलियत के बारे में क्या कहता है? यह बताता है कि तुम औसत काबिलियत वाले हो। वैसे तो तुममें चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की कुछ क्षमता है, लेकिन तुम्हारी क्षमता लेखक के विचारों को तकनीकी और पेशेवर परिप्रेक्ष्य से सराहना करने तक ही सीमित है। तुम सिर्फ यह बात पकड़ सकते हो या समझ सकते हो कि लेखक ने जो किया वह क्यों किया, लेकिन तुम यह मूल्यांकन नहीं कर सकते कि वह जिन विचारों और दृष्टिकोणों की हिमायत करता है वे ठीक हैं या नहीं और क्या वे सकारात्मक चीजें हैं, या एक बार प्रस्तुत किए जाने पर लोगों पर इन विचारों और दृष्टिकोणों का कितना बड़ा प्रभाव पड़ता है, या यह सकारात्मक प्रभाव है या नकारात्मक प्रभाव, या लोगों पर उनके क्या नतीजे आते हैं—तुम्हें इनमें से कुछ भी नहीं पता। इस स्तर के आधार पर ऐसे लोगों की काबिलियत सिर्फ औसत होती है। वे सिर्फ सराहना कर सकते हैं लेकिन मूल्यांकन नहीं कर सकते, और इसलिए वे चीजों का मूल्यांकन और सराहना करने की क्षमता वाला होने की काबिलियत तक नहीं पहुँच पाते हैं। कुछ लोगों में, चाहे वे कोई भी कर्तव्य क्यों न करें, चीजों को पहचानने की खराब क्षमता होती है। उन्हें लगता है कि चीजों को किसी भी तरीके से करना स्वीकार्य है। उनके दृष्टिकोण और रवैये बहुत धुंधले और पूरी तरह से अस्पष्ट होते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई और क्या कहता है, वे इसे स्वीकार सकते हैं, उनके पास सटीक दृष्टिकोण या अभ्यास के सिद्धांत नहीं होते हैं। नतीजतन, वे कोई भी कर्तव्य अच्छी तरह से नहीं करते हैं। चाहे वे कोई भी कार्य स्वीकार करें, जब अपना कार्य करने के दौरान उठने वाले विभिन्न विचारों और दृष्टिकोणों की सकारात्मकता या नकारात्मकता और सही या गलत को परिभाषित करने और उनकी सीमाएँ खींचने की बात आती है तो वे विशेष रूप से धुंधले और अस्पष्ट होते हैं। जब लोग उनसे पूछते हैं, “इस तरह का विचार या दृष्टिकोण उत्पन्न हुआ है—क्या यह ठीक है?” वे कहते हैं, “लोगों के मन आजाद हैं। उन्हें सीमित नहीं करना चाहिए। विविधता होनी चाहिए—किसी भी तरह का विचार प्रस्तुत करने और अभिव्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए।” विभिन्न विचारों के अस्तित्व के बारे में उनका यह दृष्टिकोण है। यानी चाहे कोई भी विचार या दृष्टिकोण क्यों न उत्पन्न हो—चाहे वह सही हो या गलत, ठीक हो या दोषपूर्ण—वे मानते हैं कि उन सभी को अस्तित्व में रहने की अनुमति देनी चाहिए और उन्हें मुक्त भाव से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। वे सोचते हैं कि जब तक व्यक्ति किसी तरह से सोचता है, जब तक व्यक्ति की कोई जरूरत है, जब तक किसी विचार के लिए श्रोता हैं या ऐसे लोग हैं जो उसका समर्थन करते हैं, तब तक उसके अस्तित्व में मूल्य है। उनका यह विचार और दृष्टिकोण बहुत धुंधला है। अविश्वासियों के शब्दों में, इसका अस्तित्व अक्सर बिना सीमाओं के “धूसर क्षेत्र” में होता है। इन लोगों के पास यह राय बनाने के लिए कड़े मानक या कसौटियाँ नहीं होती हैं कि चीजें सही हैं या गलत। यह भी कहा जा सकता है कि ऐसे लोगों का कोई रुख नहीं होता है, उनका कोई वास्तविक विचार या दृष्टिकोण नहीं होता है। यकीनन यह भी कहा जा सकता है कि इन लोगों के पास किसी भी चीज के बारे में कोई सकारात्मक हिमायत नहीं होती है। तो फिर क्या ऐसे लोग सत्य स्वीकार सकते हैं? क्या वे सत्य समझ सकते हैं? यह कहना वाकई कठिन है। खराब काबिलियत होना समस्या वाली बात है। जब खराब काबिलियत वाले लोगों के सामने एक ही समय में दो विचार या दृष्टिकोण आते हैं, तो उनकी अपनी कोई राय नहीं होती है; उन्हें नहीं पता होता है कि कौन-सा सही है और कौन-सा गलत। वे उसी पक्ष का अनुसरण करते हैं जो ज्यादा जोरदार होता है। इसे कोई रुख नहीं होना कहते हैं। ऐसे लोग भ्रमित व्यक्ति होते हैं। हम इस बात पर चर्चा नहीं करेंगे कि उनकी मानवता का अनुसरण कैसा है या उनका चरित्र कैसा है—बस चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की उनकी क्षमता के लिहाज से बात की जाए तो ऐसे लोगों की काबिलियत बस औसत होती है। मैं ऐसा क्यों कहता हूँ? क्योंकि वैसे तो उनकी काबिलियत उन्हें वैचारिक स्तर पर कुछ चीजों की सराहना करने में सक्षम बनाती है, लेकिन उनमें चीजों की सत्यता का मूल्यांकन करने और यह पहचानने की क्षमता नहीं होती है कि चीजें सही हैं या गलत, ठीक हैं या दोषपूर्ण। इसलिए उनकी काबिलियत को औसत के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। क्योंकि जब चीजों का मूल्यांकन करने की बात आती है तो उनके विचार, दृष्टिकोण और रुख बहुत ही धुंधले होते हैं और उनके पास आधार या कसौटी के रूप में सकारात्मक चीजें नहीं होती हैं, वे कुछ अच्छी चीजें कर सकते हैं लेकिन कुछ बुरी चीजें भी कर सकते हैं। वे कुछ अपेक्षाकृत ठीक चीजें कर सकते हैं जो दूसरों को लाभ पहुँचाती हैं और मानवता की सहायता करती हैं, लेकिन साथ ही वे ऐसी चीजें भी कर सकते हैं जो दूसरों को नुकसान पहुँचाती हैं और उन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। इसलिए ऐसे लोगों की काबिलियत बस औसत होती है। उदाहरण के लिए, मान लो कि एक फिल्म है जिसमें निर्देशक द्वारा हिमायत किए गए विचार अपेक्षाकृत सकारात्मक और अपेक्षाकृत मानवीय हैं और वे ऐसी चीजें हैं जो मानवता की जरूरतों के अपेक्षाकृत अनुरूप हैं—ये ऐसी जरूरतें हैं जो आज के समाज में जायज हैं, जैसे कि लोकतंत्र, आजादी, मानवाधिकार और दूसरी सकारात्मक चीजें—और यह निर्देशक फिल्म के जरिये मानवीय विचारों की गहराई में बसी इन चीजों को बाहर लाता है ताकि लोगों को उन्हें जानने में मदद मिले। अगर औसत काबिलियत वाला कोई व्यक्ति यह फिल्म देखता है तो वह पहचान सकता है कि वे विचार अच्छे और ठीक हैं। वे देख सकते हैं कि वे विचार आज के समाज में अपेक्षाकृत लोकप्रिय और सम्मानित हैं; वे निर्देशक द्वारा समर्थित विचारों का सही होना महसूस कर सकते हैं। लेकिन अगर इस फिल्म में निर्देशक कुछ अपेक्षाकृत विशिष्ट विचारों की भी हिमायत करता है—ऐसी चीजें जिनके बारे में ज्यादातर वयस्क और समझने की क्षमता वाले लोग नहीं सोचेंगे, जो बहुत चरम हैं और यह तक कहा जा सकता है कि वे ऐसी चीजें हैं जो शायद ही कभी देखी जाती हैं या चीजों के विकास के सामान्य नियमों के अनुसार जिनका होना लगभग असंभव है—तो चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की औसत क्षमता वाले लोग फिल्म देखते समय उनका भेद नहीं पहचान पाएँगे। वे सोचेंगे, “निर्देशक द्वारा समर्थित ये विशेष विचार गलत नहीं हैं। भले ही ये चीजें सिर्फ थोड़े-से लोगों द्वारा ही पसंद की जाती हों और अपनाई जाती हों, फिर भी आज के समाज में इन विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए; उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि हर कोई उन्हें जान सके और स्वीकार सके।” देखा तुमने, निर्देशक द्वारा उसी फिल्म में समर्थित चीजें चाहे सकारात्मक हों या चाहे लोगों पर उनका नकारात्मक प्रभाव पड़ता हो, वे उन्हें स्वीकार करेंगे और उनकी विशेष रूप से सराहना भी करेंगे। उनके लिए सही और गलत के बीच कोई स्पष्ट या निश्चित अंतर नहीं है। इसलिए वे इस फिल्म में सकारात्मक चीजों को स्वीकार सकते हैं और नकारात्मक चीजों को भी स्वीकार सकते हैं। चूँकि वे इन चीजों को स्वीकार सकते हैं, इसलिए वे उन्हें लागू भी करेंगे। वे इन चीजों को उन कृतियों में शामिल करेंगे जो उनके अपने विचारों और दृष्टिकोणों को व्यक्त करती हैं या उन्हें दैनिक जीवन में दूसरों के मन में बिठाएँगे जिससे दूसरे लोग प्रभावित होंगे। यकीनन सकारात्मक चीजों का लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा जबकि निश्चित रूप से नकारात्मक चीजों का लोगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसलिए ऐसे लोग अच्छी चीजें करते हुए कुछ बुरी चीजें भी करेंगे। यानी जब तुम भूखे हो, तो वे, उदाहरण के लिए, तुम्हें एक कटोरा दलिया देंगे, लेकिन यह साफ-सुथरा नहीं होगा और इसमें कुछ रेत मिली होगी और इसे लंबे समय तक खाने से तुम्हारी सेहत को नुकसान पहुँचेगा। या फिर वे तुम्हें एक कटोरा भोजन देंगे, लेकिन उसमें मक्खी-मच्छर जैसी चीजें गिरी होंगी। तुम्हें यह स्वादिष्ट लग सकता है, लेकिन इसमें कुछ ऐसे जीवाणु हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं। वैसे तो ऐसे लोग तुम्हारी भूख मिटा चुके होंगे और तुम्हारा पेट भर चुके होंगे, लेकिन वे तुम्हारे शरीर पर कुछ प्रतिकूल प्रभाव भी डाल चुके होंगे। इसी तरह, अगर तुममें सूझ-बूझ नहीं है, तो जब तुम कोई कृति देखते हो, तो इस बात की संभावना है कि तुम उसमें से कुछ गलत विचार और दृष्टिकोण स्वीकार करोगे और उसके द्वारा गुमराह हो जाओगे और विषाक्त हो जाओगे। इसलिए चीजों को पहचानने की क्षमता होना भी बहुत महत्वपूर्ण है। ये औसत काबिलियत वाले लोगों की चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता के लिहाज से अभिव्यक्तियाँ हैं।
अगले स्तर पर खराब काबिलियत वाले लोग हैं। खराब काबिलियत वाले लोगों में चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की कोई क्षमता नहीं होती है। यानी जब उन्हें कुछ भी दिखाई देता है तो वे नहीं जानते हैं कि कौन-से विचार और दृष्टिकोण होना ठीक है और न ही उन्हें पता होता है कि कौन-सा नजरिया या रुख अपनाना ठीक है। वे यह भी नहीं जानते हैं कि इस मामले में लोग किस प्रकार के गलत विचार और दृष्टिकोण रखते हैं या ऐसे मामलों का सामना करते समय लोग कौन-से विचारों से नियंत्रित होते हैं—इसमें तार्किक सोच शामिल है और खराब काबिलियत वाले लोग इसमें पीछे रह जाते हैं, इसलिए यह असंभव है कि वे चीजों की सराहना करने में समर्थ हों। सिर्फ जब कोई व्यक्ति चीजों की सराहना करने में समर्थ होता है, उसके बाद ही यह कहा जा सकता है कि उसकी चीजों की सराहना कैसी है या क्या उसमें चीजों का मूल्यांकन करने की क्षमता है। अगर वह चीजों की सराहना तक नहीं कर सकता है तो इस पर चर्चा करने का कोई मतलब नहीं बनता है कि क्या उसमें चीजों का मूल्यांकन करने की क्षमता है। उदाहरण के लिए, एक लेख पढ़ने के बाद कुछ लोग कहते हैं : “इस लेख में अलंकृत भाषा का उपयोग किया गया है, इसे बहुत सहज रूप से व्यक्त किया गया है और यह काफी मजाकिया है। यह लेख शानदार ढंग से लिखा गया है!” कोई पूछता है : “इस लेख में लेखक ने कौन-से विचार और दृष्टिकोण व्यक्त करने का लक्ष्य रखा? इस प्रकार के लोगों, घटनाओं और चीजों के प्रति उसका क्या रवैया है?” “ओह, इसमें कोई रवैया है? इसमें विचार और दृष्टिकोण भी शामिल हैं? मैंने इस पर ध्यान ही नहीं दिया। बहरहाल, मुझे लगता है कि उसका लेख बढ़िया लिखा गया है और मुझे उसे पढ़ने में आनंद आया।” दूसरा पक्ष पूछता है : “तो फिर तुमने उसके द्वारा व्यक्त किन विचारों और दृष्टिकोणों का आनंद लिया? क्या तुम्हें पता है कि कौन-सा अनुच्छेद या कहानी यह व्यक्त करती है कि लेखक के विचार और दृष्टिकोण किस प्रकार के हैं और इस लेख का मुख्य विचार क्या है?” वे कहते हैं : “मैं अभी तक यह नहीं समझ पाया हूँ।” वे इसे दो-तीन बार और पढ़ते हैं और फिर भी उन्हें यही लगता है कि लेख बढ़िया लिखा गया है और वाक्पटु है। जहाँ तक यह प्रश्न है कि यह कौन-से विचार और दृष्टिकोण व्यक्त करता है, तो वे इसे समझ नहीं पाते हैं। इससे उनकी काबिलियत उजागर होती है, है न? अगर वे यह लेख पढ़ते हैं और यह समझ नहीं सकते हैं कि यह लेख कौन-से विचार और दृष्टिकोण समझाता है, तो सिर्फ यही कहा जा सकता है कि उनमें चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता नहीं है और वे कम काबिलियत वाले व्यक्ति हैं। अगर लेख में ऐसी स्पष्ट भाषा है जो पहले से ही ठीक विचार और दृष्टिकोण समझाती है और फिर भी वे इसे समझ नहीं सकते हैं, तो इससे साबित होता है कि उनकी काबिलियत बेहद खराब है। वे सिर्फ इतना ही कह सकते हैं, “यह लेख बढ़िया लिखा गया है, इसकी भाषा सहज है और लेखन शैली अच्छी है,” लेकिन वे यह नहीं जानते या समझते हैं कि क्या इस लेख में चर्चित तथ्य वस्तुनिष्ठ हैं, यह पाठकों को क्या महसूस करवाता है या पाठक इससे क्या सीख सकते हैं और क्या प्राप्त कर सकते हैं—उन्हें अभी भी लेखक से पूछना पड़ेगा। यह पूरी तरह से साबित करता है कि ये लोग खराब काबिलियत वाले हैं। उनकी खराब काबिलियत कैसे दिखाई पड़ती है? उनकी खराब काबिलियत विचारों और दृष्टिकोणों को नहीं समझने में और चीजों की सराहना कैसे करनी है इसे नहीं समझने में दिखाई पड़ती है और यकीनन यह उनके द्वारा चीजों का मूल्यांकन करने में पूरी तरह से असमर्थ होने में और भी ज्यादा दिखाई पड़ती है। सामूहिक रूप से इसे चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता की कमी कहा जाता है। जिन लोगों में चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता नहीं होती है वे औसत काबिलियत वाले लोगों से इस मायने में बदतर हैं कि उनमें न सिर्फ चीजों का मूल्यांकन करने की क्षमता नहीं होती है, बल्कि चीजों की सराहना करने की क्षमता की भी कमी होती है। इसलिए, जब विचारों और दृष्टिकोणों, तार्किक सोच के स्तर पर चीजों की, या कोई चीज मानवता या चीजों के वस्तुनिष्ठ नियमों के अनुरूप है या नहीं इसकी, बात आती है, तो वे उनकी असलियत नहीं देख पाते हैं और उन्हें नहीं पता होता है कि उनकी सराहना कैसे करनी है। वे यह भी नहीं समझ पाते हैं कि क्या यह लेख कोई विचार या दृष्टिकोण समझाता है, फिर यह पहचानना तो दूर की बात है कि ये विचार और दृष्टिकोण सही हैं या गलत। सिर्फ इसी कारण से कि वे स्कूल गए हैं, वे शब्दों, ज्ञान, तकनीकी कौशलों और व्यवसायों से संबंधित चीजें पढ़ सकते हैं, लेकिन वे चीजों की सराहना करने में समर्थ हुए बिना उन्हें पढ़ने, देखने और सुनने में समर्थ होने के स्तर पर ही रह जाते हैं। ऐसे लोग खराब काबिलियत वाले लोग होते हैं। खराब काबिलियत वाले लोग तकनीकी कौशलों और व्यवसायों या ज्ञान के स्तर से संबंधित चीजों के बारे में बात कर सकते हैं, जैसे कि कोई चीज किस मशहूर व्यक्ति की कृति है, किस मशहूर व्यक्ति के मशहूर उद्धरण का उल्लेख किया गया है, अभिव्यक्ति की किस शैली का जिक्र किया गया है या इसे प्राप्त करने के लिए किस तकनीकी कौशल या पेशे का उपयोग किया गया है—वे इन चीजों को महसूस कर सकते हैं। लेकिन वे इन पेशों और तकनीकी कौशलों या ज्ञान के स्तर के आधार पर हिमायत और व्यक्त की जा रही अवधारणाओं को और साथ ही इस बात को नहीं समझते हैं कि इन चीजों की रूपरेखा और प्रस्तुति के पीछे की अवधारणाएँ, आधार या मूलभूत बातें क्या हैं। खराब काबिलियत होने का यही मतलब है। ऐसे लोगों की एक विशेषता होती है : उन्हें नहीं पता होता है कि मुद्दों पर कैसे चिंतन करना है या उनके बारे में कैसे सोचना है। वे यह नहीं जानते हैं कि किसी चीज के कारण होने वाली परिघटनाओं का मूल कारण और सार कैसे पहचानना है, उनके बारे में कैसे राय बनानी है या उन्हें कैसे जानना है या भविष्य में इन परिघटनाओं के विकास की दिशा क्या होगी और उनके कारण लोगों, घटनाओं और चीजों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। ऐसे लोगों में सामान्य सोच नहीं होती है। वे जो चीजें समझ सकते हैं और जीवन के जिन अनुभवों पर पकड़ बना सकते हैं, वे बेहद सीमित हैं। चाहे उनका सामना कितने भी जटिल मामलों से क्यों न हो, वे उन्हें नहीं समझ सकते हैं या उनकी असलियत नहीं देख सकते हैं। यानी वे सिर्फ किसी चीज से संबंधित उन्हीं शब्दों के बारे में सोच सकते हैं जो उन्हें सुनाई पड़ते हैं और उस पाठ के बारे में सोच सकते हैं जो उन्हें ऊपरी तौर पर दिखाई देता है और साथ ही इनमें शामिल बाहरी रूपों और विधियों के बारे में सोच सकते हैं जिससे वे सिर्फ इसी स्तर तक पहुँचते हैं। जहाँ तक ज्यादा गंभीर पहलुओं की बात है, जैसे कि विभिन्न चीजों के बीच रिश्तों, तर्क और आपसी प्रभाव, वे न तो उनके बारे में सोचते हैं और न ही उनके बारे में सोचने में सक्षम होते हैं। कुछ लोग किसी चीज के बारे में इस हद तक सोचते हैं कि उनकी भूख मर जाती है, नींद उड़ जाती है या वे उदास हो जाते हैं और फिर भी वे उसकी असलियत नहीं समझ पाते हैं। खराब काबिलियत होने का यही मतलब है। इस बात की माप कि क्या किसी व्यक्ति में चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता है इस बात पर निर्भर करती है कि क्या किसी मामले का सामना करते समय वह विभिन्न चीजों के बीच जटिल रिश्तों, जुड़ावों या आपसी प्रभावों और उनके द्वारा प्राप्त किए जा सकने वाले बाद के प्रभावों के संबंध में कई संभावनाएँ प्रस्तुत करने के लिए राय बना सकता है या नहीं। अगर कोई व्यक्ति सिर्फ वही कह सकता है जो किसी ने कहा या किया, वह किसी सूझ-बूझ के बिना और किसी भी मुद्दे को महसूस कर पाए बिना सिर्फ जो सुना या देखा उसे बयान करता है, तो इससे पता चलता है कि उसके पास सामान्य सोच नहीं है। जिन लोगों में सोचने की क्षमता नहीं होती है, उनमें चीजों की सराहना करने की क्षमता नहीं होती है और यकीनन उनमें चीजों का मूल्यांकन और सराहना करने की क्षमता भी नहीं होती है और वे नहीं जानते हैं कि कैसे सोचना है। तो हमें इस क्षमता पर चर्चा करने की क्यों जरूरत है? अगर लोगों में भौतिक दुनिया की सराहना करने के लिए विभिन्न क्षमताएँ नहीं हैं तो इन लोगों की काबिलियत खराब है। वे नहीं जानते हैं कि कैसे सोचना है और उनकी सोच में तर्क की कमी होती है, इसलिए ऐसे लोगों में सत्य समझने की क्षमता नहीं होती है। वह इसलिए क्योंकि सत्य में एक लिहाज से लोगों के वास्तविक जीवन के मुद्दों के विभिन्न पहलू शामिल होते हैं; साथ ही इसमें वे विभिन्न सिद्धांत भी शामिल होते हैं जिनका लोगों को अपने भ्रष्ट स्वभाव छोड़ देने के लिए अभ्यास करना चाहिए। यकीनन इसमें लोगों के वास्तविक जीवन में आने वाली विभिन्न प्रकार की एक-आयामी या जटिल, बहुआयामी समस्याएँ और उनके बीच के रिश्ते और भी ज्यादा शामिल होते हैं। चाहे यह किसी अकेले सत्य के बारे में हो या एक से ज्यादा, आपस में जुड़े सत्यों के बारे में, कोई भी सत्य विनियम नहीं है; बल्कि वे चीजों की एक श्रेणी मापने के लिए सिद्धांत या कसौटियाँ हैं। सिद्धांतों और कसौटियों की बात की जाए तो वे एक जमा एक बराबर दो जैसे विनियम या सूत्र नहीं हैं। चूँकि वे सूत्र नहीं हैं, इसलिए वास्तविक जीवन में मामलों का सामना करते समय लोगों को इस बात पर चिंतन करने और यह तलाश करने में समर्थ होना चाहिए कि मानवता की कौन-सी समस्याएँ शामिल हैं, क्या इस पहलू में मानवता के प्रकाशनों में भ्रष्ट स्वभाव के तत्व शामिल हैं और एक ही प्रकार के भ्रष्ट स्वभाव के लिए किन दशाओं और प्रकाशनों का अस्तित्व है और साथ ही लोगों को इसे परिवर्तित करने के लिए सत्य के किन पहलुओं का अभ्यास और पालन करना चाहिए—लोगों को यह सब कुछ समझने की जरूरत है। अगर तुम्हें सत्य के सिर्फ शब्द पता हैं लेकिन तुम्हें यह नहीं पता कि सत्य के इस पहलू में बोले गए सिद्धांत क्या हैं तो तुम यह नहीं जानोगे कि वास्तविक जीवन की चीजों के साथ इसे कैसे जोड़ना है और न ही तुम यह जानोगे कि सत्य का अभ्यास कैसे करना है। अगर तुममें सत्य समझने की क्षमता नहीं है तो तुम इसे खुद में मौजूद समस्याओं के साथ या वास्तविक जीवन में आने वाली समस्याओं के साथ जोड़ नहीं पाओगे। तुम नहीं जानोगे कि सत्य के कितने पहलू शामिल हैं, अभ्यास और प्रवेश का मार्ग क्या है या तुम्हें कौन-सी समस्याएँ हल करनी चाहिए। यकीनन यह असंभव है कि तुम परमेश्वर के वचनों के आधार पर लोगों और चीजों को देख पाओगे या आचरण और कार्य कर पाओगे या तुम सत्य सिद्धांतों का पालन कर पाओगे या सत्य सिद्धांतों के अनुसार अभ्यास कर पाओगे। अगर तुममें मानव जीवन से संबंधित कुछ लोगों, घटनाओं और चीजों की सराहना करने की क्षमता नहीं है, उनके बारे में तुम्हारा कोई विचार या दृष्टिकोण नहीं है और तुम मूल रूप से वैचारिक स्तर से संबंधित चीजें गहराई से समझ नहीं पाते हो, तुममें उनकी सराहना करने की क्षमता नहीं है और उनका मूल्यांकन करने की क्षमता तो और भी नहीं है, तो यह कहा जा सकता है कि तुममें सत्य समझने की क्षमता नहीं है। अगर तुममें सत्य समझने की क्षमता नहीं है और तुम सत्य समझने में असमर्थ हो, तो तुम अपनी मानवता के दोषों को बदलने और अपने भ्रष्ट स्वभाव छोड़ देने के लिए क्या उपयोग करोगे? अगर तुममें सत्य समझने की क्षमता नहीं है तो तुम यह नहीं जानोगे कि तुम्हारे सामने जो मामले हैं उनमें कौन-से सत्य सिद्धांत शामिल हैं। यकीनन तुम यह भी नहीं जानोगे कि तुम्हें किन सत्य सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। ऐसे में तुम आँख मूँदकर कार्य करोगे—या तो विनियमों का पालन करोगे या धारणाओं और कल्पनाओं के आधार पर कार्य करोगे या नहीं तो बेतहाशा गलत कर्म करोगे। सत्य नहीं समझने से ये दुष्परिणाम, ये अभिव्यक्तियाँ होती हैं।
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?