सत्य का अनुसरण कैसे करें (7) भाग चार

लोगों की काबिलियत का व्यापक रूप से मूल्यांकन कैसे करें

अब हमने किसी व्यक्ति की काबिलियत का मूल्यांकन करने के लिए ग्यारह क्षमताओं में से अंतिम क्षमता—नवाचार क्षमता—पर चर्चा समाप्त कर ली है। इन ग्यारह क्षमताओं पर संगति करने के बाद क्या तुम लोग अपनी खुद की काबिलियत के बारे में कुछ हद तक पहले से ज्यादा स्पष्ट हो? (हाँ।) तो क्या तुम लोग इसका मूल्यांकन करने में सक्षम हो? क्या तुम सटीक रूप से यह मूल्यांकन कर सकते हो कि सही मायने में तुम्हारी अपनी काबिलियत क्या है? जब यह निर्धारित करने की बात आती है कि क्या तुम्हारी अपनी काबिलियत अच्छी है, औसत है, खराब है या है ही नहीं, तो मापन का एक मानक है—तुम सिर्फ एक पहलू को नहीं देख सकते; इसका व्यापक रूप से मूल्यांकन करना होगा। तो किसी व्यक्ति की काबिलियत क्या है इसका मूल्यांकन करने के लिए कौन-से पहलू देखने चाहिए? हमने जिन ग्यारह क्षमताओं पर संगति की उनकी अभिव्यक्तियों को देखा जाए तो किसी व्यक्ति का अच्छी काबिलियत वाले व्यक्ति के रूप में मूल्यांकन करने के लिए कम-से-कम उसके पास कई अपेक्षाकृत महत्वपूर्ण क्षमताएँ अवश्य होनी चाहिए। एक पल के लिए विचार करो : इन ग्यारह में से कौन-सी मुख्य क्षमताएँ हैं जो यह प्रदर्शित कर सकती हैं कि किसी व्यक्ति में अच्छी काबिलियत है? क्या तुम इसका अनुमान लगा सकते हो? यह क्रम अंतिम क्षमता से पहली क्षमता की तरफ बढ़ना चाहिए : अच्छी काबिलियत वाले व्यक्ति में कम-से-कम नवाचार क्षमता होनी ही चाहिए; उसके बाद चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता, फैसला लेने की क्षमता और चीजों पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता आती है; फिर चीजों को पहचानने की क्षमता, आकलन करने की क्षमता और संज्ञानात्मक क्षमता आती है; अंत में चीजों को स्वीकारने की क्षमता, बोध क्षमता, चीजों को समझने की क्षमता और सीखने की क्षमता आती है। यह क्रम इसी तरह से है। इस क्रम को उल्टा क्यों किया गया है? हमने शुरू में जो क्रम व्यवस्थित किया था वह निम्न से उच्च था, लेकिन यह मूल्यांकन करने के लिए कि व्यक्ति अच्छी काबिलियत वाला है या नहीं, इसे उच्च से निम्न में व्यवस्थित किया गया है। अच्छी काबिलियत वाले व्यक्ति में कम-से-कम नवाचार क्षमता अवश्य होनी चाहिए। इस पर इस आधार पर पहुँचा गया है कि उसमें फैसला लेने की क्षमता, चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता और चीजों को पहचानने की क्षमता पहले से ही है। अगर तुम चीजों से परिचित होने, उन्हें पहचानने और उनके बारे में राय बनाने में समर्थ हो और तुम्हारे पास चीजों को समझने की क्षमता भी है और फिर तुम नवाचार कर सकते हो तो इससे तुम अच्छी काबिलियत वाले व्यक्ति बन जाते हो। ऐसे लोग अगुआई क्षमता वाले लोग होते हैं, जो फैसले लेने के स्तर में प्रवेश करने में सक्षम होते हैं; वे अगुआ होने में प्रतिभाशाली होते हैं और कार्य के एक विशेष क्षेत्र की अध्यक्षता कर सकते हैं। ये अच्छी काबिलियत वाले लोग हैं। औसत काबिलियत वाले लोग वे हैं जिनकी नवाचार क्षमता से लेकर सीखने की क्षमता तक सभी पहलुओं में क्षमताएँ औसत होती हैं। चीजें करने में उनकी दक्षता और नतीजे दोनों ही औसत होते हैं। ये औसत काबिलियत वाले लोग हैं। औसत काबिलियत वाले लोगों की प्राथमिक अभिव्यक्ति क्या है? वह यह है कि सिद्धांतों की उनकी बूझ और समझ में गहराई नहीं होती है और ये बहुत सटीक नहीं होते हैं। कार्यान्वयन और अभ्यास करते समय हमेशा खामियाँ और विचलन होते हैं। वे हमेशा कोई न कोई चीज खो देते हैं, वे कभी कुछ तो कभी कुछ भूल जाते हैं और व्यापक रूप से सभी चीजों का ध्यान नहीं रख सकते हैं। उदाहरण के लिए, उन्हें कलीसिया का अगुआ बनने के लिए चुना जाता है, लेकिन वे व्यापक रूप से कार्य के सभी पहलुओं का प्रभार लेने में असमर्थ होते हैं। जब वे सुसमाचार कार्य के लिए जिम्मेदार होते हैं तो वे सिर्फ सुसमाचार कार्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं और दूसरे कार्य पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। वे सुसमाचार कार्य शुरू तो कर सकते हैं लेकिन उनके पास पाठ आधारित कार्य या फिल्म निर्माण कार्य के बारे में प्रश्न पूछने का समय नहीं होता है। ऐसा क्यों है? क्योंकि उनकी काबिलियत पूरी तरह से औसत है और वे कार्य के सिर्फ एक पहलू को ही सँभाल सकते हैं; वे मुश्किल से कार्य के एक क्षेत्र में जैसे-तैसे सक्षम हो पाते हैं, लेकिन जब उनसे दूसरे कार्य पर ध्यान देने के लिए कहा जाता है तो वे कटुतापूर्वक शिकायत करते हैं और अभिभूत हो जाते हैं, कोई भी कार्य ठीक से नहीं कर पाते हैं। अपने कार्य में वे जो भी करते हैं, उसका पर्यवेक्षण करने, याद दिलाने, निरीक्षण करने और पुनरीक्षण करने के लिए हमेशा किसी को रहना पड़ता है। उन्हें सहारा देने, सत्य की संगति करने, बार-बार कार्य के सिद्धांतों पर और उन विभिन्न विचलनों और खामियों पर जिनके घटित होने की संभावना है, जोर देने के लिए हमेशा किसी को उनके साथ रहना पड़ता है। उन्हें याद दिलाने के लिए हमेशा किसी को रहना पड़ता है। ऐसा क्यों है कि उन्हें याद दिलाने और निर्देश देने के लिए हमेशा किसी की जरूरत होती है? इसका कारण यह नहीं है कि उनका कार्य अनुभव अपर्याप्त है, बल्कि यह है कि उनकी काबिलियत औसत है। वे उन स्थितियों और समस्याओं का अनुमान नहीं लगा पाते हैं जिनके पैदा होने की संभावना रहती है या वे जो अनुमान लगा सकते हैं वह बहुत सीमित होता है। इसलिए, मार्गदर्शन देने, पुनरीक्षण करने और अनुवर्ती कार्रवाई करने के लिए हमेशा उनके साथ किसी को रहना पड़ता है जिसे बार-बार उनसे पूछताछ करने की जरूरत पड़ती है। पूछताछ करने पर पता चलता है कि उन्होंने या तो कार्य की अमुक मद नहीं की है या वे कार्य की अमुक मद भूल गए हैं; नहीं तो उन्होंने किसी पहलू को नजरअंदाज कर दिया है या वे नहीं जानते हैं कि आगे कैसे बढ़ना है, फिर भी उन्हें नहीं मालूम होता है कि किससे पूछना है या कैसे तलाश करनी है और वे अब भी प्रतीक्षा कर रहे होते हैं। संक्षेप में, कार्य के लिए सक्षम होने की उनकी क्षमता बहुत औसत है। इस “औसत” का इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि उनमें कितना दृढ़ संकल्प है, वे कितने मजबूत हैं, उन्हें कार्य करना कितना पसंद है या वे कितना कष्ट सह सकते हैं और कितनी कीमत चुका सकते हैं—इसका इन बातों से कोई लेना-देना नहीं है। बल्कि, यह सिर्फ इतना सूचित करता है कि उनकी कार्य क्षमता औसत है। दूसरी तरफ, अच्छी काबिलियत वाले लोग ज्यादातर अपने कार्य में बड़ी गलतियाँ नहीं करते हैं। वे जिन सिद्धांतों, दिशा और व्यापक रूपरेखा का पालन करते हैं, वे ज्यादातर सटीक होते हैं। हालाँकि यह हो सकता है कि वे अक्सर कुछ छोटे विवरणों को अनदेखा कर दें, लेकिन ये विवरण समग्र कार्य की दक्षता और नतीजों को प्रभावित नहीं करते हैं। ये अच्छी काबिलियत वाले लोग हैं। यकीनन, कोई भी मनुष्य परिपूर्ण नहीं होता है। यहाँ तक कि अच्छी काबिलियत वाले लोगों के कार्य में भी कुछ छोटी-मोटी खामियाँ हो सकती हैं, कभी-कभी हो सकता है वे पल भर के लिए किसी चीज को अनदेखा कर दें या कार्य की किसी मद के प्रति थोड़ी लापरवाही कर दें, क्योंकि वे हाल ही में किसी दूसरे कार्य में व्यस्त रहे हों। लेकिन बस अपनी काबिलियत के लिहाज से वे शीघ्र स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और इसे प्रबंधित और नियंत्रित कर सकते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि समग्र कार्य अनिवार्यतः त्रुटि-रहित है और समग्र कार्य आमतौर पर सत्य सिद्धांतों के अनुरूप, कार्य व्यवस्थाओं के अनुरूप या प्रशासनिक आदेशों के प्रावधानों के अनुरूप किया जा रहा है और यह व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहा है। क्योंकि उनके पास चीजों पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता होती है इसलिए जब मसीह-विरोधी या कुकर्मी उनके कार्य के दायरे में विघ्न डालने के लिए प्रकट होते हैं तब भी वे शीघ्र स्थिति को सँभाल लेते हैं। वे पहले अवसर पर ही मामले को सँभाल लेंगे और हल कर देंगे, यह सुनिश्चित करते हुए कि कलीसियाई कार्य जल्दी से सही रास्ते पर लौट आए और भाई-बहनों के लिए अपना कर्तव्य करने का परिवेश प्रभावित न हो। यहाँ तक कि जब अप्रत्याशित स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं तब भी अच्छी काबिलियत वाले लोगों को पता होता है कि उन्हें कैसे सँभालना है। अगर उन्होंने ऐसी स्थितियाँ पहले नहीं संभाली हों तो भी उन्हें पता होगा कि सिद्धांतों की तलाश कैसे करनी है। क्योंकि उनमें चीजों को पहचानने, उनका आकलन करने और उनसे परिचित होने की क्षमता होती है इसलिए वे जल्दी से सिद्धांतों के अनुसार समस्याएँ हल करते हैं। उनमें समस्याएँ हल करने की क्षमता बिल्कुल होती है। चीजों को पहचानने, उन पर प्रतिक्रिया करने और आकलन करने की उनकी क्षमताएँ उन्हें अप्रत्याशित स्थितियों को जल्दी से तनावमुक्त और शांत करने में सक्षम बनाती हैं जिससे कलीसिया के कार्य की सामान्य और व्यवस्थित प्रगति का बचाव और परमेश्वर के घर के हितों का बचाव होता है, और यह सुनिश्चित करती हैं कि ऐसी स्थितियाँ दोबारा उत्पन्न न हों या लंबे समय तक अशांत न बनी रहें। साथ ही, वे जिन सिद्धांतों के अनुसार चीजें सँभालते हैं और जो अंतिम नतीजे प्राप्त करते हैं, ये दोनों ही परमेश्वर के घर के हितों का बचाव करने का कार्य करते हैं। अच्छी काबिलियत वाले लोग अपने कार्य में उच्च दक्षता और अच्छे नतीजे प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन जब औसत काबिलियत वाले लोग कलीसियाई कार्य या दैनिक जीवन में होने वाली समस्याएँ सँभालते हैं तब वे कुछ हद तक अभिभूत हो जाते हैं और उन्हें यह थोड़ा कठिन लगता है। उनका समस्याओं को सँभालना अक्सर अकुशल और बहुत धीमा होता है। जिन मुद्दों को एक-दो दिन में हल किया जाना चाहिए, उनके लिए उन्हें प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है और उन्हें तीन से पाँच दिनों तक सोच-विचार करना पड़ सकता है क्योंकि वे उनकी असलियत नहीं देख सकते हैं। वे स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निर्णायक फैसले नहीं ले सकते हैं, बल्कि वे असहाय होते हैं और स्थिति को सिर्फ लगातार बदतर होने दे सकते हैं। वे सिर्फ कुछ सरल कार्य ही सँभाल सकते हैं, जैसे तथ्यों की पुष्टि करना, स्थिति के बारे में संबंधित लोगों से पूछना या समस्याएँ छाँटना और उनकी रिपोर्ट ऊपर करना। जिन समस्याओं को लोग दो दिनों में हल कर सकते हैं, उन्हें हल करने में उन्हें आधा महीना लग सकता है। हालाँकि अंत में समस्याएँ हल हो जाती हैं, लेकिन लंबे समय की देरी से कलीसियाई कार्य को कुछ नुकसान होते हैं। इस दौरान कुछ लोग मसीह-विरोधियों द्वारा गुमराह किए जा सकते हैं, चढ़ावे गुम हो सकते हैं या कार्य की कुछ मदों को नुकसान हो सकते हैं क्योंकि समस्याएँ तुरंत हल नहीं की गईं। हालाँकि बाद में मुआवजा या प्रतिपूर्ति प्रदान की जाती है और जिन लोगों को सँभाला जाना चाहिए उन्हें अंत में सँभाल लिया जाता है, लेकिन नतीजे और दक्षता बहुत औसत होते हैं। यह आग बुझाने जैसा है : अच्छी काबिलियत वाले लोगों में आग बुझाने, अच्छे नतीजे प्राप्त करने और आर्थिक नुकसान रोकने का कौशल होता है। लेकिन औसत काबिलियत वाले लोग अनुचित तरीकों, आपातकालीन उपायों की कमी, धीमी रफ्तार से कार्य करने के कारण, और निर्णायक फैसले लेने में और इस समस्या को हल करने के लिए मुख्य बिंदुओं को गहराई से समझने में असमर्थता के कारण अंत में ज्यादा नुकसान पहुँचा देते हैं। कुछ लोग कहते हैं, “मैं अपने कारण हुए नुकसानों के लिए मुआवजा देने को तैयार हूँ।” अगर यह सिर्फ आर्थिक नुकसान हो तो मुआवजा इस समस्या को हल कर सकता है। लेकिन अगर बड़े लाल अजगर की गिरफ्तारियों का सामना करना पड़े और तुम उसे उचित रूप से सँभालने में विफल हो जाते हो जिससे कलीसिया के कार्य को नुकसान होता है तो क्या तुम उसकी भरपाई कर सकते हो? क्या तुम देर हो चुके कार्य और खोए समय की लागत की भरपाई कर सकते हो? क्योंकि औसत काबिलियत वाले लोगों की चीजों पर प्रतिक्रिया करने, आकलन करने, चीजों को पहचानने की क्षमताएँ और यहाँ तक कि फैसला लेने की क्षमता भी औसत होती है इसलिए जब अप्रत्याशित घटनाएँ होती हैं तब वे समस्याएँ धीरे-धीरे और बेहद कम दक्षता से सँभालते हैं और उनके आपातकालीन उपाय बेअसर होते हैं जिसके कारण अंत में असंतोषजनक कार्य परिणाम और कुछ नुकसान होते हैं। भले ही अंत में समस्याएँ हल कर दी जाती हैं लेकिन यह एक नुकसान है क्योंकि लंबे समय की देरी होती है और दक्षता कम हो जाती है। इसलिए ये लोग औसत काबिलियत वालों के रूप में निरूपित किए जाते हैं। कुछ लोग कहते हैं, “यह उचित नहीं है। उन्होंने भी प्रयास किया, कड़ी मेहनत की और समस्याएँ हल कीं। तुम फिर भी यह कैसे कह सकते हो कि उनकी काबिलियत औसत है?” ऐसे मामलों का मूल्यांकन करना भावनाओं या भावुकताओं पर आधारित नहीं हो सकता है। वस्तुनिष्ठ और उचित रूप से बोला जाए तो, और उस स्तर के लिहाज से जिसे व्यक्ति की काबिलियत हासिल कर सकती है, तुम्हारी काबिलियत औसत है। यह औसत क्यों है? क्योंकि तुमसे ऊँची काबिलियत वाले लोग हैं; ऐसी स्थितियों में जहाँ उनकी और तुम्हारी मानवता लगभग एक जैसी होती है, अच्छी काबिलियत वाले लोग तुम्हारी तुलना में बेहतर दक्षता और नतीजों के साथ समस्याएँ सँभालते हैं और तुम्हारी तुलना में उनके नुकसान छोटे होते हैं। इसलिए तुम्हारी काबिलियत को सिर्फ औसत के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। तुम समझ रहे हो? (हाँ।) ऐसे लोगों को औसत काबिलियत वालों के रूप में निरूपित करने का कारण यह है कि अच्छी काबिलियत वाले ऐसे लोग हैं जो उनकी तुलना में अपने कार्यों में बेहतर दक्षता और नतीजे प्राप्त करते हैं। इसलिए उनकी काबिलियत औसत है। यह स्पष्टीकरण उचित और तर्कसंगत है। कुछ लोग कहते हैं, “उनमें ईमानदारी है और उन्होंने इस कार्य में अपने दिल लगाए; उन्होंने ढेरों कष्ट सहे और कोई छोटी कीमत नहीं चुकाई।” यह कहने का क्या फायदा है? क्या इसका मतलब यह है कि उनमें अच्छी काबिलियत है? उनकी मानवता, भावनाएँ या इच्छाएँ चाहे जैसी भी हों, बस उनकी काबिलियत के लिहाज से ये औसत काबिलियत होने की अभिव्यक्तियाँ हैं।

खराब काबिलियत वाले लोगों की अभिव्यक्तियाँ क्या हैं? विभिन्न क्षमताओं के परिप्रेक्ष्य से देखा जाए तो खराब काबिलियत वाले लोगों के पास अपेक्षाकृत कुछ सीखने की क्षमता और चीजों को समझने की क्षमता होती है। जब वे विशेष ज्ञान, सिद्धांत, पेशेवर कौशल या शैक्षणिक विषय सीखते हैं तब वे उन्हें ठोस और सटीक रूप से याद कर सकते हैं, वे अपनी नोटबुक में मुख्य बिंदुओं को लिख लेते हैं। क्योंकि उन्होंने शिक्षा प्राप्त की है इसलिए उनकी चीजों को समझने की क्षमता बहुत ज्यादा खराब नहीं होती है; यह औसत स्तर तक पहुँच सकती है। लेकिन उनके पास वे क्षमताएँ नहीं हैं जो बोध क्षमता के बाद आती हैं, जैसे कि चीजों को स्वीकारने की क्षमता और चीजों को पहचानने की क्षमता। यानी, उनकी क्षमताएँ पाठ्य-स्तर पर सिद्धांत, ज्ञान, तकनीकी कौशल या पेशे सीखने और समझने तक सीमित रहती हैं। जब वास्तविक जीवन में लोगों को देखने, मामले सँभालने, समस्याएँ हल करने और कार्य व्यवस्थाएँ कार्यान्वित करने की बात आती है, तब वे खरे नहीं उतरते हैं। उनकी क्षमताएँ सीखने की क्षमता और चीजों को समझने की क्षमता तक ही सीमित रहती हैं; वे बोध क्षमता प्राप्त कर सकते हैं लेकिन जब चीजों को स्वीकारने की क्षमता की बात आती है, तो वे खरे नहीं उतरते हैं। जिन लोगों के पास चीजों को स्वीकारने की क्षमता होती है वे जान सकते हैं कि ये सिद्धांत, नियम और मूल तत्व वास्तविक जीवन की किन चीजों से मेल खाते हैं और साथ ही, इनमें से कौन-सी चीजें व्यावहारिक और लागू करने लायक हैं, कौन-सी व्यावहारिक नहीं हैं और कौन-सी उनके अपने लिए उपयुक्त हैं और कौन-सी उपयुक्त नहीं हैं। लेकिन खराब काबिलियत वाले लोग इन चीजों की असलियत नहीं देख पाते हैं। उदाहरण के लिए, स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न जानकारियाँ और तंदुरुस्ती पर प्रशिक्षण सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध है। खराब काबिलियत वाले लोग भी इन संसाधनों से व्यायाम करना और अपनी देखभाल करना सीख सकते हैं। उनके पास सीखने की क्षमता, चीजों को समझने की क्षमता और बोध क्षमता होती है और वे यह ढूँढ़ना भी जानते हैं कि उन्हें क्या पसंद है। लेकिन जब यह बात आती है कि इनमें से कौन-सी चीजें व्यावहारिक और प्रभावी हैं और जिनकी सही मायने में लोगों को जरूरत है, तब खराब काबिलियत वाले लोग इसे पहचान नहीं सकते हैं। जब चीजों को स्वीकारने की क्षमता की बात आती है तब वे खरे नहीं उतरते हैं। आज ऑनलाइन यह कहा जाता है कि टोफू के साथ दम किया हुआ पालक बहुत पौष्टिक होता है, इसलिए वे इसे हर रोज खाते हैं। लेकिन इसे कुछ समय खाने के बाद उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं होता कि इसके क्या प्रभाव हैं या क्या इसके वे प्रभाव हैं जिनका ऑनलाइन दावा किया गया था। बाद में ऑनलाइन यह कहा जाता है कि पालक और टोफू बेमेल हैं और यह सुनने के बाद वे फिर कभी टोफू के साथ दम किया हुआ पालक नहीं बनाते हैं। जहाँ तक यह प्रश्न है कि क्या पालक और टोफू सही मायने में बहुत पौष्टिक हैं या बेमेल हैं, उन्हें यह नहीं पता होता है और वे नहीं पूछेंगे; वे सिर्फ आँख मूंदकर पालन करना जानते हैं। आजकल जानकारियाँ बहुत ही विकसित हैं; विभिन्न खबरें बेहद पेचीदा होती हैं। वे नहीं पहचान पाते हैं कि क्या सही है और क्या गलत या क्या ठीक है और क्या दोषपूर्ण। वे सब कुछ पढ़ते और सुनते हैं, यह मानते हैं कि जो कुछ उन्होंने पहले नहीं सुना है, जो कुछ भी नया या गहरा प्रतीत होता है, वह जरूर अच्छा होगा। उदाहरण के लिए, ऑनलाइन कहा जाता है कि चॉकलेट खाना दिल के लिए अच्छा है, इसलिए वे हर रोज चॉकलेट खाते हैं। नतीजतन, उनके अंदर गर्मी पैदा हो जाती है, मुँह में छाले पड़ जाते हैं, आँखें लाल हो जाती हैं और उनके कानों में झंझनाहट होती है। दरअसल यह कहा गया था कि सीमित मात्रा में चॉकलेट खाना दिल के लिए अच्छा है, लेकिन उन्हें “सीमित मात्रा में” शब्द याद नहीं रहे। वे मुख्य बिंदु को गहराई से समझने में अक्षम हैं और अंत में अपना नुकसान कर बैठते हैं। कुछ दिनों बाद अब ऑनलाइन यह कहा जाता है : “चॉकलेट खाना दिल के लिए बुरा है और इसे बहुत ज्यादा खाने से वजन भी बढ़ सकता है।” जो लोग पहचान सकते हैं उन्हें पता होगा कि इसे बहुत ज्यादा खाना शरीर के लिए बुरा है, लेकिन सीमित मात्रा में खाना ठीक है। लेकिन वे इसे पहचान नहीं पाते हैं; यह सुनने के बाद वे चॉकलेट खाना पूरी तरह से बंद कर देते हैं। वे एक चरम से दूसरे चरम पर झूलते हैं, उनका झुकाव या तो बहुत ज्यादा बाईं तरफ होता है या बहुत ज्यादा दाईं तरफ, फिर भी उन्हें लगता है कि वे अत्यंत आधुनिक हैं : “देखो, इंटरनेट जिसे भी अच्छा कहता है उसे मैं खाता हूँ; वह जिसे भी बुरा कहता है उसे मैं नहीं खाता। मैं ऐसा व्यक्ति हूँ जो जमाने के चलन के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है।” वास्तव में, वे ऐसे लोग हैं जिनमें चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होती है, वे भ्रमित व्यक्ति होते हैं जो आँख मूंदकर भीड़ के पीछे-पीछे चलते हैं। ऑनलाइन सभी प्रकार की जानकारी मौजूद है और ज्यादातर दावे सटीक नहीं होते हैं। यकीनन कुछ ऐसी जानकारियाँ और दावे भी हैं जो सही हैं। तुम्हें उन्हें पहचानने में समर्थ होने की जरूरत है। जहाँ तक यह प्रश्न है कि किस जानकारी को स्वीकारना है, तो तुम्हें इसे अपनी जरूरतों के अनुसार मापना चाहिए, इस आधार पर मापना चाहिए कि क्या वह तुम्हारे लिए फायदेमंद है और क्या यह जानकारी सकारात्मक है। खराब काबिलियत वाले लोगों में ऐसी चीजें पहचानने की क्षमता नहीं होती है। वे चीजों को स्वीकारने की क्षमता के स्तर से आगे की सभी क्षमताओं में खरे नहीं उतरते हैं। वे पाठ्य, सैद्धांतिक और ज्ञान के स्तर पर चीजों को सीखने और समझने तक ही सीमित रहते हैं और उनमें कुछ बोध क्षमता होती है। लेकिन जहाँ तक विभिन्न दावों के सही होने और उनके मूल्यवान और अर्थपूर्ण होने की पहचान करने की बात है, खराब काबिलियत वाले लोगों में इस बारे में राय बनाने और इसे पहचानने की क्षमता नहीं होती है। और फिर चीजों पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता होती है, जो उसी तरह से खराब काबिलियत वाले लोगों के पास नहीं होती है। जब वास्तविक जीवन में या जीवित रहने के मार्ग पर आने वाली विभिन्न समस्याओं की बात आती है, तब वे इन्हें उन सत्य सिद्धांतों के आधार पर नहीं सँभाल पाते हैं जिन्हें वे जानते हैं या जिन्हें उन्होंने गहराई से समझा है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कितने शब्द और धर्म-सिद्धांत बोल सकते हैं, ये खोखले और अव्यावहारिक होते हैं। अपने आस-पास या जीवित बचे रहने के मार्ग पर होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए वे अपनी खुद की ओछी चालों पर भरोसा करते हैं; वे सिर्फ नुकसान उठाने से बचने का प्रयास करते हैं और कुछ नहीं, जबकि वे उन सिद्धांतों का अनुभव करने, आत्मसात करने या सत्यापित करने के स्तर तक पहुँचने में विफल रहते हैं जिन्हें वे गहराई से समझ चुके हैं। इसके अलावा, खराब काबिलियत वाले लोगों में संज्ञानात्मक क्षमता भी नहीं होती है। यानी, जब कोई समस्या उत्पन्न होती है, तब वे कोई निष्कर्ष नहीं निकाल पाते हैं या खुद मामले का सार, इसके पीछे का मूल कारण नहीं पहचान पाते हैं या यह नहीं पहचान पाते हैं कि भविष्य में इसके क्या नतीजे हो सकते हैं। खराब काबिलियत वाले लोग बिल्कुल भी नहीं जानते हैं कि इन चीजों के बारे में कैसे सोचना है, फिर ऐसी समस्याओं का सामना करने और उन्हें सँभालने के लिए उन्होंने जो सत्य या विभिन्न चीजों के सिद्धांत और नियम गहराई से समझे हैं, उन्हें लागू करना तो उन्हें और भी कम आता है। क्योंकि उनकी काबिलियत खराब है, इसलिए उनकी सोच बेहद सरल और सतही होती है और मामलों पर उनके परिप्रेक्ष्य में विचलन होते हैं। इसके अलावा, और भी समस्यात्मक चीज यह है कि उन्हें नहीं पता होता है कि वे किस परिप्रेक्ष्य से चीजों को ठीक तरीके से देख सकते हैं। इसलिए, वे किसी भी चीज के सार की असलियत नहीं देख सकते हैं और न ही वे किसी चीज के ठीक होने या उसके सही और गलत होने के बारे में राय बना सकते हैं। बिना राय बनाए वे पहचान नहीं सकते हैं; यकीनन फिर उनमें चीजों पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता भी नहीं होती है, फैसला लेने की क्षमता की बात तो रहने ही दो। कुछ लोग कहते हैं, “खराब काबिलियत वाले लोग भी जानते हैं कि हर रोज क्या खाना और क्या पहनना है और वे अपने दैनिक जीवन का प्रबंधन कर सकते हैं।” काबिलियत होने का मतलब यह नहीं है। काबिलियत होने का मतलब है जीवन में और जीवित बचे रहने के मार्ग पर सामने आने वाली विभिन्न मूलभूत समस्याओं को उन सत्य सिद्धांतों के अनुसार सँभालने में समर्थ होना जिन्हें व्यक्ति समझता है। जीवन में आने वाली विभिन्न समस्याओं में व्यक्ति का मूल्यांकन करना, मामले सँभालना वगैरह-वगैरह शामिल हैं। जीवित बचे रहने के मार्ग पर आने वाली समस्याओं में सही और गलत के बड़े मुद्दों का सामना करना, परमेश्वर द्वारा तुम्हारे लिए इंतजाम किए गए परिवेशों, परमेश्वर की संप्रभुता, संभावनाओं और गंतव्य से संबंधित मामले, आगे का रास्ता चुनने का तरीका वगैरह-वगैरह शामिल हैं—ये सभी जीवित बचे रहने से संबंधित समस्याओं का हिस्सा हैं। अगर किसी में जीवन में या जीवित बचे रहने के मार्ग पर आने वाली समस्याओं को सँभालने की कोई क्षमता नहीं है तो इसका मतलब है कि उसमें फैसला लेने की क्षमता नहीं है। ऐसे लोग मानसिक रूप से खाली होते हैं, इसलिए उनके लिहाज से चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता के बारे में बात करना कुछ हद तक अनुचित है। यकीनन, अंतिम क्षमता, नवाचार क्षमता, खराब क्षमता वाले लोगों की पहुँच से और भी दूर है। यह इस बात पर चर्चा करने जैसा है कि क्या जानवरों का राजा शेर है या बाघ। कम-से-कम, दोनों ही योग्य उम्मीदवार हैं क्योंकि जानवरों के बीच शेर और बाघ दोनों में ही शासक का तेज और उसकी क्षमताएँ होती हैं। उनमें से हरेक की अपनी-अपनी खूबियाँ होती हैं और जब इनकी एक दूसरे से तुलना की जाती है, तब हो सकता है कि वे टक्कर के निकलें, जो उन्हें जानवरों के राजा के खिताब के लिए मुकाबला करने के योग्य बनाता है। अगर तुम यह तय करने के लिए कि जानवरों का राजा कौन है अफ्रीकी बारहसिंघे, गोजन या याक की तुलना शेरों और बाघों से करते हो तो लोग तुम पर हँसेंगे। वे तुम पर क्यों हँसेंगे? (क्योंकि ये जानवर तुलना करने लायक नहीं हैं।) वे एक ही स्तर पर नहीं हैं, एक ही वजन श्रेणी में नहीं हैं; वे तुलना करने लायक नहीं हैं। इसी तरह, खराब काबिलियत वाले लोगों के पास कोई विचार नहीं होता है और उनमें मानसिक स्तर पर किसी भी व्यक्ति, घटना या चीज का मूल्यांकन करने और उसे परखने की कोई क्षमता नहीं होती है। इसलिए, यह तो बात किए जाने लायक भी नहीं है कि ऐसे लोगों के पास चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता होती है या नहीं। चीजों का मूल्यांकन करने और उनका मूल्य पहचानने की क्षमता अपेक्षाकृत उन्नत है और यह अच्छी काबिलियत वाले लोगों पर लागू होती है। फिर नवाचार क्षमता तो और भी अच्छी काबिलियत वाले लोगों पर लागू होती है। नवाचार क्षमता का निर्धारण वास्तविक जीवन में किसी भी चीज को व्यावहारिक रूप से सँभालने की व्यक्ति की क्षमता से किया जाता है। खराब काबिलियत वाले लोगों में न सिर्फ अपने द्वारा किए जाने वाले हर कार्य में विचारों और चरणों की कमी होती है, बल्कि उनके पास चीजों को पूरा करवाने की कोई क्षमता भी नहीं होती है, इसलिए उनके बारे में यह नहीं कहा जा सकता है कि उनके पास कोई नवाचार क्षमता है। तो बिना काबिलियत वाले लोगों में क्या क्षमताएँ होती हैं? बिना काबिलियत वाले ज्यादातर लोगों में एक आम विशेषता होती है : उनमें कोई खूबी नहीं होती है। अभिव्यंजक क्षमता के लिहाज से उनके पास कुछ भी नहीं होता है; किसी भी तकनीकी या पेशेवर खूबी के लिहाज से भी उनके पास कुछ भी नहीं होता है; यहाँ तक कि सबसे सरल कार्य के निर्वहन में भी, जैसे कि सफाई करना, उनके पास कोई त्वरित और संक्षिप्त समाधान नहीं होता है, कोई चरण नहीं होता है और कोई क्रम नहीं होता है। एक सरल काम का निर्वहन करने से तुम देख सकते हो कि बिना काबिलियत वाले लोगों की क्या विशेषताएँ होती हैं। बिना काबिलियत वाले लोगों की सबसे स्पष्ट विशेषता यह है कि उनमें हर लिहाज से क्षमता की कमी होती है। आसान शब्दों में कहा जाए तो वे अपने मानव जीवन या सबसे मूलभूत जरूरतों का प्रबंधन तक नहीं कर सकते हैं—ये सब पूरी तरह से अव्यवस्थित होते हैं और इनमें कोई सिद्धांत नहीं होता है। बिना काबिलियत वाले लोगों का सबसे सटीक वर्णन यह है कि वे कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकते हैं और सिर्फ अपनी मूलभूत दैनिक जरूरतें पूरी करने के लिए जीते हैं—इससे ज्यादा कुछ नहीं। काबिलियत के विभिन्न स्तरों वाले लोगों की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ और साथ ही उनके पास जो काबिलियत और क्षमताएँ होती हैं उनकी विशेषताएँ ये सभी बातें स्पष्ट रूप से समझा दी गई हैं। अगर तुम लोग समझ गए हो तो तुम यह सीखने में समर्थ होगे कि विभिन्न काबिलियतों वाले लोगों का भेद कैसे पहचानना है और उनके साथ कैसे पेश आना है।

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