परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर के कार्य को जानना | अंश 192
पुरुषों के बीच में शायद ही कोई परमेश्वर के हृदय की तीव्र इच्छा को समझता है क्योंकि लोगों की क्षमता बहुत कम है और उनकी आध्यात्मिक...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
मैंने तुम लोगों को कई चेतावनियाँ दी हैं और तुम लोगों को जीतने के लिए कई सत्य दिए हैं। पहले के मुकाबले आज तुम लोग अधिक समझदार हो, बहुत से सिद्धांतों को समझते हो कि किसी व्यक्ति को कैसे होना चाहिए, और आस्थावान लोगों में जो सामान्य ज्ञान होना चाहिए, वह तुम लोगों में है। अनेक वर्षों में तुम लोगों ने यही सब अर्जित किया है। मैं तुम्हारी उपलब्धियों से इंकार नहीं करता हूं, लेकिन मुझे यह भी स्पष्ट कहना है कि मैं इन कई वर्षों में तुम्हारी अवज्ञा और विद्रोहों को भी नकार नहीं सकता, क्योंकि तुम में से कोई संत तो है नहीं, बिना किसी अपवाद के तुम लोगों को भी शैतान ने भ्रष्ट किया है, और तुम भी मसीह के शत्रु रहे हो। अब तक तुम लोगों के उल्लंघनों और तुम्हारी आज्ञालंघनों की संख्या अनगिनत है, यही वजह है कि मैं हमेशा तुम्हारे सामने अपने आपको दोहराता रहा हूं। मैं तुम्हारे साथ इस तरह पेश नहीं आना चाहता, लेकिन तुम्हारे भविष्यों की खातिर, तुम्हारी मंज़िलों की खातिर मैंने जो कुछ कहा है, उसके बारे में एक बार फिर से कहूंगा। मुझे आशा है कि तुम लोग मुझे ध्यान से सुनोगे, और मेरे हर शब्द पर विश्वास करोगे, इसके अलावा, मेरे शब्दों की गहराई और महत्व को समझोगे। मैं जो कुछ भी कहूँ उस पर संदेह न करो, या मेरे शब्दों को तुम लोग जैसे लेना चाहो लो और उन्हें दरकिनार कर दो, जो मेरे लिये असहनीय होगा। मेरे शब्दों को परखो मत, न उन्हें हल्के में लो, न ऐसा कुछ कहो कि मैं हमेशा तुम लोगों को फुसलाता हूँ, और न ही ऐसा कुछ कहो कि मैंने तुमसे जो कुछ कहा है वह सही नहीं है। ये सब मुझे सहन नहीं होता। क्योंकि तुम लोग मुझे और मेरी कही गई बातों को संदेह की नज़र से देखते हो, मेरे वचनों को कभी स्वीकार नहीं करते और मेरी उपेक्षा करते हो, मैं तुम सब लोगों से पूरी गंभीरता से कहता हूँ : मेरी कही बातों को दर्शन-शास्त्र से जोड़कर मत देखो, न उन्हें कपटी लोगों के झूठ के साथ जोड़ो, और न ही मेरे शब्दों की अवहेलना करो। भविष्य में शायद मेरी तरह बताने वाला, या इतनी उदारता से बोलने वाला, या एक-एक बात को इतने धैर्य से समझाने वाला तुम लोगों को और कोई नहीं मिलेगा। इन अच्छे दिनों को तुम लोग केवल याद करते रह जाओगे, ज़ोर-ज़ोर से सुबकोगे, अथवा दर्द से कराहोगे, या फिर उन अंधेरी रातों में जीवन-यापन कर रहे होगे जहाँ सत्य या व्यवस्थित जीवन का अंश-मात्र भी नहीं होगा, या नाउम्मीदी में बस इंतज़ार कर रहे होगे, या फिर ऐसा भयंकर पश्चाताप कर रहे होगे कि जिसका तुम लोगों के पास कोई उत्तर नहीं होगा...। ये जितनी अलग-अलग संभावनाएँ मैंने तुम लोगों को बताई हैं, इनसे वस्तुत: तुम में से कोई नहीं बच पाएगा। उसकी वजह है कि तुम में से कोई भी परमेश्वर की सच्ची आराधना नहीं करता। तुम लोग व्यभिचार और बुराई में डूब चुके हो। ये चीज़ें तुम्हारी आस्था, तुम्हारे अंतर्मन, आत्मा, तन-मन में घुल-मिल गई हैं। इनका जीवन और सत्य से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि ये चीज़ें इनके विरुद्ध जाती हैं। मुझे तुम लोगों को लेकर बस यही आशा है कि तुम लोगों को प्रकाश-पथ पर लाया जाए। मेरी एक मात्र यही कामना है कि तुम लोग अपना ख्याल रख पाओ, अपने गंतव्य पर इतना अधिक बल न दो कि अपने व्यवहार तथा आज्ञालंघन को देखते हुए उसकी ओर से उदासीन हो जाओ।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, अपराध मनुष्य को नरक में ले जाएँगे
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
पुरुषों के बीच में शायद ही कोई परमेश्वर के हृदय की तीव्र इच्छा को समझता है क्योंकि लोगों की क्षमता बहुत कम है और उनकी आध्यात्मिक...
चूँकि तुम परमेश्वर पर विश्वास करते हो, इसलिए तुम्हें परमेश्वर के सभी वचनों और उसके सभी कार्यों में विश्वास अवश्य रखना चाहिए। अर्थात्, चूँकि...
परमेश्वर द्वारा शुद्धिकरण जितना बड़ा होता है, लोगों के हृदय उतने ही अधिक परमेश्वर से प्रेम करने में सक्षम हो जाते हैं। उनके हृदय की यातना...
"मनुष्य का पुत्र तो सब्त के दिन का भी प्रभु है" वाक्य लोगों को बताता है कि परमेश्वर से संबंधित हर चीज़ भौतिक प्रकृति की नहीं है, और यद्यपि...