परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप | अंश 261
इस दुनिया की हर चीज़ तेज़ी से सर्वशक्तिमान के विचारों और उसकी नज़रों तले बदलती है। मानवजाति ने जिन चीज़ों के बारे में कभी नहीं सुना है वो अचानक...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
तुमने मेरे द्वारा बार-बार दी गई शिक्षाओं को लंबे समय से अपने दिमाग के पीछे रख दिया है। यहाँ तक कि तुम उन्हें अपने खाली समय में खेलने की चीज़ें समझते हो, और हमेशा उन्हें अपना "संरक्षक ताबीज" मानते हो। जब शैतान द्वारा आरोप लगाया जाता है, तो तुम प्रार्थना करते हो; नकारात्मक होने पर तुम ऊँघने लगते हो; जब तुम खुश होते हो, तो तुम दौड़ते हो; जब मैं तुम्हें धिक्कारता हूँ, तो तुम झुक जाते हो और विनम्र बन जाते हो; और जब तुम मुझे छोड़ते हो, तो तुम उन्मादपूर्वक हँसते हो। भीड़ में तुमसे ऊँचा कोई नहीं होता, लेकिन तुम कभी भी खुद को सबसे घमंडी नहीं समझते। तुम हमेशा इतने अभिमानी, आत्म-संतुष्ट और उद्धत होते हो कि शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। ऐसे "सज्जन युवक और युवतियाँ" तथा "उम्रदराज़ सज्जन और देवियाँ", जो कुछ नहीं जानते और कभी नहीं सीखते, मेरे वचनों को अनमोल खजाना कैसे मान सकते हैं? अब मैं तुमसे सवाल करना जारी रखूँगा: इतने लंबे समय में तुमने मेरे वचनों और कार्य से आख़िर क्या सीखा है? क्या तुम धोखा देने में ज्यादा चतुर नहीं हो गए हो? अपनी देह में अधिक परिष्कृत नहीं हो गए हो? मेरे प्रति अपने दृष्टिकोण में अधिक लापरवाह नहीं हो गए हो? मैं तुमसे सीधे कहता हूँ: मैंने बहुत काम किया है, फिर भी इसने तुम्हारा साहस बढ़ाया है, साहस, जो कि एक चूहे के साहस जैसा हुआ करता था। मेरे प्रति तुम्हारे डर की भावना रोज़ाना कम होती जाती है, क्योंकि मैं बहुत दयालु हूँ, और मैंने हिंसा का इस्तेमाल करते हुए तुम्हारी देह को अनुमति नहीं दी; शायद तुम सोचते हो कि मैं केवल अशिष्ट टिप्पणियाँ कर रहा हूँ—लेकिन ज्यादातर मैं तुम पर मुस्कुराता हूँ, और तुम्हारे मुँह पर तुम्हारी निंदा नहीं करता। इसके अलावा, मैं हमेशा तुम्हारी कमजोरी के लिए तुम्हें क्षमा करता हूँ, और केवल इसी वजह से तुम मेरे साथ उस तरह का व्यवहार करते हो, जैसे साँप अच्छे किसान के साथ व्यवहार करता है। मैं मनुष्य के कौशल, उसकी अवलोकन-शक्तियों की उपलब्धि की कितनी प्रशंसा करता हूँ! सच कहूँ, तो आज यह मायने नहीं रखता कि तुम्हारा दिल श्रद्धा से रहित है या नहीं। मैं न तो उत्सुक हूँ और न ही चिंतित। लेकिन मुझे तुमको यह भी अवश्य बताना चाहिए: तुम, "प्रतिभा के धनी", अज्ञानी और सीखने के अनिच्छुक, अंतत: अपनी आत्म-संतुष्ट, क्षुद्र चतुराई द्वारा नीचे गिरा दिए जाओगे—तुम वही होगे, जो दुःख भोगता है और जिसे ताड़ना दी जाती है। मैं इतना बेवकूफ़ नहीं हूँ कि जब तुम नरक में दुःख भुगतो तो मैं तुम्हारा साथ दूँ, क्योंकि मैं तुम्हारे जैसा नहीं हूँ। यह मत भूलो कि तुम मेरे द्वारा सृजित ऐसे प्राणी हो, जिसे मेरे द्वारा श्राप दिया गया है, और फिर भी जिसे मेरे द्वारा सिखाया और बचाया जाता है। मेरे लिए तुम्हारे पास ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसे मैं छोड़ने का अनिच्छुक होऊँ। मैं जब भी काम करता हूँ, तो कोई भी व्यक्ति, घटना या वस्तु मुझे रोक नहीं सकती। मानवजाति के प्रति मेरे दृष्टिकोण और मत हमेशा एक-से रहे हैं: मैं तुम्हें बहुत ज्यादा पसंद नहीं करता, क्योंकि तुम मेरे प्रबंधन के लिए एक संलग्नक हो, और तुम्हारे बारे में कुछ भी किसी अन्य चीज़ से बेहतर नहीं है। तुम्हें मेरी यह सलाह है: हर समय याद रखो कि तुम परमेश्वर द्वारा सृजित प्राणी से अधिक कुछ नहीं हो! तुम मेरे साथ रह सकते हो, लेकिन तुम्हें अपनी पहचान पता होनी चाहिए; अपने बारे में बहुत ऊँची राय मत रखो। अगर मैं तुम्हारी निंदा नहीं भी करता, या तुमसे नहीं निपटता, और मुस्कुराहट के साथ तुम्हारा सामना करता हूँ, तो इससे यह साबित नहीं होता कि तुम मेरे समान ही हो; तुम्हें पता होना चाहिए कि तुम सत्य का अनुसरण करने वालों में से एक हो, न कि स्वयं सत्य हो! तुम्हें कभी मेरे वचनों के साथ-साथ बदलना बंद नहीं करना चाहिए। तुम इससे बच नहीं सकते। मैं तुम्हें इस महान समय के दौरान, यह दुर्लभ अवसर आने पर प्रयास करके कुछ सीखने की सलाह देता हूँ। मुझे मूर्ख मत बनाओ; मुझे तुम्हारी आवश्यकता नहीं कि तुम मुझे धोखा देने हेतु चापलूसी का उपयोग करो। जब तुम मुझे खोजते हो, तो यह सब मेरे लिए नहीं, बल्कि तुम्हारे खुद के लिए है!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जो लोग सीखते नहीं और अज्ञानी बने रहते हैं : क्या वे जानवर नहीं हैं?
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
इस दुनिया की हर चीज़ तेज़ी से सर्वशक्तिमान के विचारों और उसकी नज़रों तले बदलती है। मानवजाति ने जिन चीज़ों के बारे में कभी नहीं सुना है वो अचानक...
पूर्ण बनाए जाने का क्या अर्थ है? जीत लिए जाने का क्या अर्थ है? जीत लिए जाने हेतु लोगों को किन मानदंडों पर खरा उतरना अनिवार्य है? और पूर्ण...
आखिरकार, परमेश्वर का कार्य इंसान के कार्य से अलग है और, इसके अलावा, उसकी अभिव्यक्तियाँ इंसानों की अभिव्यक्तियों के समान कैसे हो सकती हैं?...
जो कोई परमेश्वर की सेवा करता है, उसे न केवल यह पता होना चाहिए कि परमेश्वर के वास्ते कैसे कष्ट सहना है, बल्कि उससे भी ज्यादा, उसे यह समझना...