परमेश्वर के दैनिक वचन : इंसान की भ्रष्टता का खुलासा | अंश 316
अब, तुम्हारा प्रयास प्रभावी रहा है या नहीं, यह इस बात से मापा जाता है कि इस समय तुम लोगों के अंदर क्या है। तुम लोगों के परिणाम का निर्धारण...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
मैं मानवजाति को जीत लूँगा क्योंकि वे मनुष्य कभी मेरे द्वारा बनाये गए थे और इसके अलावा, उन्होंने मेरी सृष्टि की बहुतायत में दी गयी सभी वस्तुओं का आनंद लिया है। किन्तु मनुष्यों ने मुझे अस्वीकार भी कर दिया है, और उनके हृदय मेरे बिना ही हैं, और वे मुझे अपने अस्तित्व में एक बोझ के रूप में देखते हैं, इस स्थिति तक भी कि, जहाँ वास्तव में मुझे देख कर भी, मनुष्य मुझे अस्वीकार करते हैं और मुझे हराने के हर सम्भव तरीके पर विचार करते हुए अपने मन को एकाग्र करते हैं। लोग मुझे उनके साथ गंभीर रूप से व्यवहार करने या उन पर सख्त माँगों को नहीं डालने देते हैं, न ही वे अपनी अधार्मिकता का निर्णय करने या उसके लिए ताड़ना देने की मुझे अनुमति देते हैं। इसे रुचिकर पाने से दूर वे इससे नाराज़ होते हैं। इसलिए मेरा कार्य उस मानवजाति को लेना है जो खाती, पीती और मुझमें मौज-मस्ती करती है किन्तु मुझे नहीं जानती है, और उन्हें परास्त करना है। मैं मानवजाति को निरस्त्र कर दूँगा, और फिर, अपने स्वर्गदूतों को लेकर और अपनी महिमा को लेकर, मैं अपने निवास स्थान में लौट जाऊँगा। क्योंकि लोगों ने जो किया है उसने मेरे हृदय को पूरी तरह से तोड़ दिया है और मेरे कार्य को बहुत पहले ही टुकड़ों में ध्वस्त कर दिया है। मैं हँसते-हँसते जाने से पहले अपनी उस महिमा को वापिस लेना चाहता हूँ जिसे शैतान ने दूर कर दिया है, और मानवजाति को उनका जीवन जीते रहने देना, "शांति और तुष्टि में रहने और कार्य करते रहने", "अपनी स्वयं के खेतों की खेती करते रहने" देना चाहता हूँ, और मैं उनके जीवन में अब और हस्तक्षेप नहीं करूँगा। किन्तु अब मैं अपनी महिमा को दुष्ट के हाथ से पूरी तरह से वापिस लेना चाहता हूँ, उस महिमा की सम्पूर्णता को वापस लेना चाहता हूँ जिसे मैंने संसार के सृजन के समय मनुष्य में गढ़ा था, और फिर दोबारा कभी भी इसे पृथ्वी पर मानवजाति को प्रदान नहीं करूँगा। क्योंकि, लोग न केवल मेरी महिमा को संरक्षित करने में ही असफल हुए हैं, बल्कि इसके बजाय उन्होंने इसे शैतान की छवि के लिए अदला-बदली कर दिया है। लोग मेरे आने को बहुमूल्य नहीं समझते हैं, न ही वे मेरी महिमा के दिनों को महत्त्व देते हैं। वे मेरी ताड़ना प्राप्त करके आनंदित नहीं होते हैं, मेरी महिमा मुझे वापिस लौटाने के इच्छुक तो बिल्कुल भी नहीं होते हैं। न ही वे दुष्ट के ज़हर को निकाल फेंकने के इच्छुक हैं। मानवजाति अभी भी उसी पुराने तरीके से निरंतर मुझे धोखा दे रही है, अभी भी उसी पुराने तरीके से उज्ज्वल मुस्कुराहट और ख़ुशनुमा चेहरों को दिखा रही है। वे अंधकार की उस गहरायी से अनजान हैं जो मानव जाति पर उस समय उतरेगी जब मेरी महिमा उन्हें छोड़ देगी, और विशेषरूप से उस बात से अनजान हैं कि जब समस्त मानव जाति के लिये मेरा दिन आएगा, तब वे नूह के समय के लोगों की अपेक्षा और भी अधिक कठिन समय का सामना करेंगे। क्योंकि वे नहीं जानते हैं कि जब इस्राएल से मेरी महिमा चली गई तो वह कितना अंधकारमय बन गया था, क्योंकि मनुष्य भोर होने पर भूल जाता है कि अंधकार की गहरी रात को गुज़ारना कितना मुश्किल था। जब सूर्य वापिस छुप जाएगा और मनुष्य पर अंधकार उतरेगा, तो वह फिर दोबारा विलाप करेगा और अंधकार में अपने दाँतों को पीसेगा। क्या तुम लोग भूल गए हो, जब मेरी महिमा इस्राएल से चली गई, तो वहाँ के लोगों के लिए अपने दुःखों के दिनों को गुज़ारना कितना मुश्किल हो गया था? अब वह समय है जब तुम लोग मेरी महिमा को देखते हो, और यही वह समय भी है जब तुम लोग मेरी महिमा के दिन को साझा करते हो। जब मेरी महिमा गंदी धरती को छोड़ देगी तब मनुष्य अंधकार के बीच विलाप करेगा। अब महिमा का वह दिन है जब मैं अपना कार्य कर रहा हूँ, और यही वह दिन भी है जब मैं मानवजाति को दुःख से मुक्त करता हूँ, क्योंकि मैं उनके साथ यातना और क्लेश के समयों को साझा नहीं करूँगा। मैं सिर्फ़ मानव जाति को पूरी तरह से जीतना और मानवजाति की सारी बुराई को पूरी तरह से परास्त करना चाहता हूँ।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, एक वास्तविक व्यक्ति होने का क्या अर्थ है
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
अब, तुम्हारा प्रयास प्रभावी रहा है या नहीं, यह इस बात से मापा जाता है कि इस समय तुम लोगों के अंदर क्या है। तुम लोगों के परिणाम का निर्धारण...
तुम सत्य को जितना अधिक अभ्यास में लाते हो, उतना ही अधिक सत्य तुम्हारे पास होता है; तुम सत्य को जितना अधिक अभ्यास में लाते हो, उतना ही अधिक...
मैं तुम लोगों से किसी चीज़ के विषय में बात करना चाहता हूँ जिसे तुम लोगों ने किया था जिसने आज हमारी सभा के आरम्भ में मुझे आश्चर्य में डाल...
तुम लोगों पर किया गया विजय का कार्य गहनतम अर्थ रखता है : एक ओर, इस कार्य का उद्देश्य लोगों के एक समूह को पूर्ण करना है, और इसलिए पूर्ण करना...