अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

जब उसे परमेश्वर के द्वारा ताड़ना दिया जा रहा था, पतरस ने प्रार्थना की, "हे परमेश्वर! मेरी देह अनाज्ञाकारी है, और तू मुझे ताड़ना देता है और मेरा न्याय करता है। मैं तेरी ताड़ना और न्याय में आनन्दित होता हूँ, और भले ही तू मुझे न चाहें, फिर भी मैं तेरे न्याय में तेरे पवित्र और धर्मी स्वभाव को देखता हूँ। जब तू मेरा न्याय करता है, ताकि अन्य लोग तेरे न्याय में तेरे धर्मी स्वभाव को देख सकें, तो मैं संतुष्टि का एहसास करता हूँ। भले ही यह तेरे स्वभाव को प्रकट कर सकता है, और सभी प्राणियों के द्वारा तेरे धर्मी स्वभाव को देखने देता है, और यदि यह मेरे प्रेम को तेरे प्रति अधिक शुद्ध कर सकता है, ताकि मैं उसके स्वरूप को प्राप्त कर सकूँ जो धर्मी है, तो तेरा न्याय अच्छा है, क्योंकि तेरी अनुग्रहकारी इच्छा ऐसी ही है। मैं जानता हूँ कि अभी भी मेरे भीतर बहुत कुछ ऐसा है जो विद्रोही है, और मैं तेरे सामने आने के लिए अभी भी योग्य नहीं हूँ। मैं तुझसे चाहता हूँ कि तू और भी अधिक मेरा न्याय करें, चाहे क्रूर वातावरण के जरिए या बड़े क्लेश के जरिए; इस से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि तू मेरा न्याय कैसे करता है, क्योंकि यह मेरे लिए बहुमूल्य है। तेरा प्यार कितना गहरा है, और मैं बिना कोई शिकायत किए तेरी दया के आधार पर अपने आपको देने को तैयार हूँ।" यह पतरस का ज्ञान था जब उसने परमेश्वर के कार्य का अनुभव कर लिया था, और यह साथ ही परमेश्वर के प्रति उसके प्रेम की गवाही है। आज, तुम लोगों को पहले से ही जीत लिया गया है—परन्तु यह जीत तुम लोगों में किस प्रकार प्रकट होती है? कुछ लोग कहते हैं, "मेरी जीत परमेश्वर का सर्वोच्च अनुग्रह और उसकी प्रशंसा है। केवल अब मुझे एहसास होता है कि मनुष्य का जीवन खोखला और महत्वहीन है। जीने की कोई वजह नहीं है, इसके बजाय मेरा मर जाना ही बेहतर है। यद्यपि मनुष्य पीढ़ी दर पीढ़ी सन्तानों को उत्पन्न करने और उनकी परवरिश करने, भागदौड़ करते हुए जीवन बिताता है, अंत में मनुष्य को कुछ भी हासिल नहीं होता है। आज, परमेश्वर के द्वारा जीत लिए जाने के बाद ही मैंने देखा कि सिर्फ इस तरह जीने का कोई मूल्य नहीं है; यह वास्तव में एक अर्थविहीन जीवन ही है। मैं भी मर सकता हूँ और इसके साथ समाप्त हो सकता हूँ!" ऐसे लोग जिन पर विजय पायी जा चुकी है क्या उन्हें परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किया जा सकता है? क्या वे आदर्श और नमूने बन सकते हैं? ऐसे लोग निष्क्रियता की मिसाल हैं, उनके पास आकांक्षाएँ नहीं हैं, और वे स्वयं की उन्नति के लिए संघर्ष नहीं करते हैं! भले ही अपने आपको वे ऐसा समझते हैं कि उन पर विजय पा ली गयी है, ऐसे निष्क्रिय लोग सिद्ध बनाए जाने के काबिल नहीं हैं। उसके जीवन के अंत के निकट, उसे सिद्ध बना दिए जाने के बाद, पतरस ने कहा "हे परमेश्वर! यदि मैं कुछ और वर्ष जीवित रहता, तो तेरे शुद्ध और गहरे प्रेम को हासिल करने की कामना करता।" जब वह क्रूस पर चढ़ाया ही जाने वाला था, उसने अपने हृदय में प्रार्थना की, "हे परमेश्वर! तेरा समय आ गया है, वह समय जो तूने मेरे लिए तैयार किया था वह आ गया है। मुझे तेरे लिए क्रूस पर चढ़ना होगा, मुझे तेरे लिए इस गवाही को देना होगा, और मैं आशा करता हूँ कि मेरा प्रेम तेरी मांगों को सन्तुष्ट करेगा, और यह और अधिक शुद्ध हो सकता है। आज, तेरे लिए मरने, और तेरे लिए क्रूस पर कीलों से ठोंके जाने के योग्य होना मेरे लिए तसल्ली और आश्वासन की बात है, क्योंकि तेरे लिए क्रूस पर चढ़ने और तेरी इच्छाओं को संतुष्ट करने, और स्वयं को तुझे देने, और स्वयं के जीवन को तेरे लिए अर्पित करने से बढ़कर कोई और बात मुझे तृप्त नहीं कर सकती है। हे परमेश्वर! तू कितना प्यारा है! यदि तू मुझे जीने की अनुमति देगा, तो मैं तुझसे और भी अधिक प्रेम करना चाहूँगा। जब तक मैं ज़िन्दा हूँ, मैं तुझसे प्रेम करूँगा। मैं तुझ से और भी अधिक गहराई से प्रेम करना चाहता हूँ। तू मेरा न्याय करता है, और मेरी ताड़ना करता है, और मेरी परीक्षा लेता है क्योंकि मैं धर्मी नहीं हूँ, क्योंकि मैं ने पाप किया है। और तेरा धर्मी स्वभाव मेरे लिए और अधिक स्पष्ट होता जाता है। यह मेरे लिए एक आशीष है, क्योंकि मैं तुझे और भी अधिक गहराई से प्रेम कर सकता हूँ, मैं तुझ से इस रीति से प्रेम करना चाहता हूँ भले ही तू मुझ से प्रेम नहीं करता है। मैं तेरे धर्मी स्वभाव को देखने की इच्छा करता हूँ, क्योंकि यह मुझे अर्थपूर्ण जीवन जीने के और काबिल बनाता है। मुझे लगता है कि मेरा जीवन और भी अधिक अर्थपूर्ण है, क्योंकि मैं तेरे लिए क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ, और तेरे लिए मरना सार्थक है। फिर भी मुझे अब तक संतुष्टि का एहसास नहीं हुआ है, क्योंकि मैं तेरे बारे में बहुत थोड़ा सा ही जानता हूँ, मैं जानता हूँ कि मैं तेरी इच्छाओं को सम्पूर्ण रीति से पूरा नहीं कर सकता हूँ, और मैं ने बदले में तुझे बहुत ही कम अदा किया है। मेरे जीवन में, मैं अपना सब कुछ तुझे वापस लौटाने में असमर्थ रहा हूँ; और मैं उस से बहुत दूर हूँ। इस घड़ी जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो मैं स्वयं को तेरा बहुत आभारी महसूस करता हूँ, और मेरी सभी ग़लतियों को सुधारने और जो प्रेम मैं ने तुझे नहीं दिया उसे अदा करने के लिए मेरे पास यही एक क्षण है।"

मनुष्य को एक अर्थपूर्ण जीवन का अनुसरण करना होगा, और मनुष्य को अपनी वर्तमान परिस्थितियों से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। पतरस के स्वरूप जीवन बिताने के लिए, उसे पतरस के ज्ञान और अनुभवों को धारण करना होगा। मुनष्य को ऐसी चीज़ों का अनुसरण करना चाहिए जो ऊँची और बहुत ज़्यादा गम्भीर हैं। उसे परमेश्वर के गहरे एवं शुद्ध प्रेम, और एक ऐसे जीवन का अनुसरण करना होगा, जिसका मूल्य और अर्थ है। केवल यह ही जीवन है; केवल तब ही मनुष्य पतरस के समान होगा। तुझे सकारात्मक पहलु में प्रवेश करने के लिए सक्रिय होने की ओर ध्यान केन्द्रित करना होगा, और अति गम्भीर, अति विशिष्ट, और अति व्यावहारिक सच्चाईयों को नज़रअंदाज करते हुए क्षणिक आराम के लिए तुझे स्वयं को अधीनतापूर्वक पीछे हटने नहीं देना चाहिए। तेरा प्रेम व्यावहारिक होना चाहिए, और तुझे स्वयं को इस भ्रष्ट, और बेपरवाह जीवन से स्वतंत्र होने के लिए रास्ते ढूँढ़ने होंगे जो किसी जानवर की ज़िन्दगी से अलग नहीं है। तुझे एक अर्थपूर्ण जीवन, एवं एक ऐसा जीवन व्यतीत करना होगा जिसका मूल्य है, और तुझे स्वयं को मूर्ख नहीं बनाना चाहिए, या अपने जीवन के साथ खेले जाने वाले खिलौने की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए। क्योंकि हर किसी के लिए जो परमेश्वर से प्रेम करने की आकांक्षा करता है, कोई सत्य अप्राप्य नहीं है, और कोई न्याय ऐसा नहीं है जिसके लिए वे खडे़ नहीं हो सकते हैं। तुझे अपना जीवन कैसे बिताना चाहिए? तुझे परमेश्वर से प्रेम कैसे करना चाहिए, और इस प्रेम का उपयोग करके उसकी इच्छा को कैसे संतुष्ट करना चाहिए? तेरे जीवन में इस से बड़ा कोई मुद्दा नहीं है? सब से बढ़कर, तेरे पास ऐसी आकांक्षा और दृढ़ता होनी चाहिए, और तुझे उन बेहद कमज़ोर दुर्बल प्राणियों के समान नहीं होना चाहिए। तुझे सीखना होगा कि एक अर्थपूर्ण जीवन को कैसे अनुभव किया जाता है, और तुझे अर्थपूर्ण सच्चाईयों को सीखना होगा, और तुझे अपने आपसे लापरवाही के साथ बर्ताव नहीं करना चाहिए। तू इसका एहसास ही नहीं कर पाता है, और तेरा जीवन यों ही गुज़र जाएगा; और उसके बाद, क्या तेरे पास परमेश्वर से प्रेम करने का दूसरा अवसर होगा? क्या मनुष्य मरने के बाद परमेश्वर से प्रेम कर सकता है? तेरे पास पतरस के समान ही आकांक्षाएँ और विवेक होना चाहिए; तेरा जीवन अर्थपूर्ण होना चाहिए, और तुझे स्वयं के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए! एक मनुष्य के रूप में, और परमेश्वर का अनुसरण करने वाले एक व्यक्ति के रूप में, तुझे इस योग्य होना होगा कि तू सावधानी से विचार कर सके कि तुझे अपने जीवन के साथ कैसा व्यवहार करना है, कि तुझे स्वयं को किस प्रकार परमेश्वर के सामने अर्पण करना चाहिए, कि तुझमें परमेश्वर के प्रति और अधिक अर्थपूर्ण विश्वास कैसे होना चाहिए, और चूँकि तू परमेश्वर से प्रेम करता है, तुझे उससे उस रीति से कैसे प्रेम करना चाहिए जो कहीं ज़्यादा पवित्र, सुन्दर, एवं अच्छा हो। आज, तू केवल इस बात से संतुष्ट नहीं हो सकता है कि तुझ पर किस प्रकार विजय पायी गयी है, बल्कि तुझे उस पथ पर भी विचार करना होगा जिस पर तू भविष्य में चलेगा। तेरे पास आकांक्षाएँ और साहस अवश्य होना चाहिए जिस से तुझे सिद्ध बनाया जा सके, और तुझे हमेशा यह नहीं सोचना चाहिए कि तू असमर्थ है। क्या सत्य की भी अपनी पसंदीदा चीज़ें होती हैं? क्या सत्य जानबूझकर लोगों का विरोध कर सकता है? यदि तू सत्य के पीछे पीछे चलता है, तो क्या यह तुझे अभीभूत कर सकता है? यदि तू न्याय के लिए मज़बूती से खडा होता है, तो क्या यह तुझे मार कर नीचे गिरा देगा? यदि यह सचमुच में तेरी आकांक्षा है कि तू जीवन का अनुसरण करे, तो क्या जीवन तुझसे बच कर निकल जाएगा? यदि तेरे पास सत्य नहीं है, तो यह इसलिए नहीं है क्योंकि सत्य तुझे नहीं पहचानता है, बल्कि इसलिए है क्योंकि तू सत्य से दूर रहता है; यदि तू न्याय के लिए मज़बूती से खड़ा नहीं हो सकता है, तो यह इसलिए नहीं है क्योंकि न्याय के साथ कुछ न कुछ गड़बड़ी है, परन्तु इसलिए है क्योंकि तू विश्वास करता है कि यह प्रमाणित सच्चाई से अलग है; कई सालों तक जीवन का पीछा करते हुए भी यदि तूने जीवन प्राप्त नहीं किया है, तो यह इसलिए नहीं है क्योंकि जीवन के पास तेरे लिए कोई सद्विचार नहीं है, परन्तु इसलिए है क्योंकि तेरे पास जीवन के लिए कोई सद्विचार नहीं है, और तूने जीवन को बाहर निकाल दिया है; यदि तू ज्योति में जीता है, और यदि तू ज्योति को पाने में असमर्थ रहा है, तो यह इसलिए नहीं है क्योंकि ज्योति के लिए तेरे ऊपर चमकना असंभव है, परन्तु इसलिए है क्योंकि तूने ज्योति की उपस्थिति पर कोई ध्यान नहीं दिया, और इस प्रकार ज्योति तेरे पास से खामोशी से चली गई है। यदि तू अनुसरण नहीं करेगा, तो केवल यह कहा जा सकता है कि तू फालतू कचरा है, और तेरे जीवन में कोई साहस नहीं है, और अंधकार की ताकतों को रोकने के लिए तेरे पास आत्मा नहीं है। तू बहुत ही ज़्यादा कमज़ोर है! तू शैतान की उन ताकतों से बचने में असमर्थ है जो तुझे जकड़ लेती हैं, और तू केवल इस प्रकार के सकुशल और सुरक्षित जीवन में आगे बढ़ना और अपनी अज्ञानता में मरना चाहता है। जो तुझे हासिल करना चाहिए वह है विजय पा लिए जाने की तेरी प्रवृत्ति; यह तेरा परम कर्तव्य है। यदि तू इस बात से संतुष्ट है कि तुझ पर विजय पा ली गयी है, तो तू ज्योति की मौजूदगी को दूर हटा देता है। तुझे सत्य के लिए कठिनाई उठानी पड़ेगी, तुझे स्वयं को सत्य के लिए देना होगा, तुझे सत्य के लिए अपमान सहना होगा, और अधिक सत्य प्राप्त करने के लिए तुझे अधिक कष्ट से होकर गुज़रना होगा। तुझे यही करना चाहिए। एक शांतिपूर्ण ज़िन्दगी के लिए तुझे सत्य को दूर नहीं फेंकना चाहिए, और क्षणिक आनन्द के लिए तुझे अपने जीवन की गरिमा और सत्यनिष्ठा को नहीं खोना चाहिए। तुझे उन सब चीज़ों का अनुसरण करना चाहिए जो ख़ूबसूरत और अच्छा है, और तुझे अपने जीवन में एक ऐसे मार्ग का अनुसरण करना चाहिए जो कहीं ज़्यादा अर्थपूर्ण है। यदि तू एक ऐसे घिनौने जीवन में आगे बढ़ता है, और किसी उद्देश्य का पीछा नहीं करता है, तो क्या तू अपने जीवन को बर्बाद नहीं करता है? तू एक ऐसे जीवन से क्या हासिल कर पाएगा? तुझे एक सच्चाई के लिए देह के सारे सुख विलासों को छोड़ देना चाहिए, और तुझे थोड़े से सुख विलास के लिए सारी सच्चाईयों को दूर नहीं फेंकना चाहिए। ऐसे लोगों के पास कोई सत्यनिष्ठा और गरिमा नहीं होती है; उनके अस्तित्व का कोई अर्थ नहीं है!

परमेश्वर मनुष्य का न्याय करता है और उसको ताड़ना देता है क्योंकि यह उसके कार्य की मांग है, और इसके अतिरिक्त, मनुष्य को इसकी आवश्यकता है। मनुष्य को ताड़ना दिए जाने और उसका न्याय किए जाने की आवश्यकता है, और केवल तब ही वह परमेश्वर के प्रेम को प्राप्त कर सकता है। आज, तुम लोग पूरी तरह विश्वस्त हो चुके हो, परन्तु जब तुम लोग जरा सा भी पीछे हटते हो तो तुम लोग परेशानी में आ जाते हो; तुम लोगों की आकृति अभी भी बहुत छोटी है, और एक गहरा ज्ञान प्राप्त करने के लिए तुम लोगों को अभी भी ऐसी ताड़ना और न्याय का और भी अधिक अनुभव करने की आवश्यकता है। आज, तुम लोगों में परमेश्वर के प्रति कुछ आदर है, और तुम लोग परमेश्वर से डरते हो, और तुम लोग जानते हो कि वह सच्चा परमेश्वर है, परन्तु तुम लोगों के पास उसके लिए एक महान प्रेम नहीं है, और सच्चा प्रेम तो तुम लोगों ने बिलकुल भी हासिल नहीं किया है; तुम लोगों का ज्ञान बहुत ही छिछला है, और तुम लोगों की हस्ती अभी भी अपर्याप्त है। जब तुम लोग सचमुच में एक वातावरण का सामना करते हो, तब भी तुम लोग गवाही नहीं देते हो, तुम लोगों का बहुत कम प्रवेश अग्रसक्रिय होता है, और तुम लोगों में कोई समझ नहीं है कि अभ्यास कैसे करें। बहुत से लोग निष्क्रिय और सुस्त होते हैं; वे केवल गुप्त रूप से अपने हृदय में परमेश्वर से प्रेम करते हैं, किन्तु उनके पास अभ्यास का कोई तरीका नहीं है, और न ही वे इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि उनके लक्ष्य क्या हैं। वे जिन्हें सिद्ध बनाया गया है उनके पास न केवल सामान्य मानवीयता है, बल्कि उनके पास ऐसी सच्चाईयाँ हैं जो विवेक के मापदण्डों से बढ़कर हैं, और जो विवेक स्तरों से ऊँचे हैं; वे परमेश्वर के प्रेम का प्रतिफल देने के लिए न केवल अपने विवेक का इस्तेमाल करते हैं, बल्कि, उस से बढ़कर, वे परमेश्वर को जान चुके हैं, और यह देख चुके हैं कि परमेश्वर प्रेमी है, और वह मनुष्य के प्रेम के योग्य है, और यह कि परमेश्वर से प्रेम करने के लिए उस में इतना कुछ है कि मनुष्य उसे प्रेम करने के सिवाय और कुछ नहीं कर सकता है। वे लोग जिन्हें सिद्ध किया गया है उनके लिए परमेश्वर का प्रेम उनकी व्यक्तिगत आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए है। उनका प्रेम स्वैच्छिक है, एक ऐसा प्रेम जो बदले में कुछ भी नहीं मांगता है, और जो एक व्यापार नहीं है। वे परमेश्वर से प्रेम करते हैं क्योंकि वे उसके ज्ञान को छोड़ और कुछ भी नहीं जानते हैं। ऐसे लोग यह परवाह नहीं करते हैं कि परमेश्वर उन पर अनुग्रह करेगा कि नहीं, और परमेश्वर को संतुष्ट करने के सिवाय और किसी भी चीज़ से तृप्त नहीं होते हैं। वे परमेश्वर से मोल भाव नहीं करते हैं, और न ही वे विवेक के द्वारा परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को नापते हैं: तूने मुझ से प्रेम किया है, इस प्रकार उसके बदले मैं तुझसे प्रेम करता हूँ; यदि तू मुझे कुछ नहीं देता है, तो बदले में मेरे पास भी तेरे लिए कुछ नहीं है। वे जिन्हें सिद्ध किया गया है उन्होंने हमेशा विश्वास किया है कि परमेश्वर सृष्टिकर्ता है, यह कि वह उन के लिए अपना कार्य करता है, और यह कि, चूँकि उनके पास सिद्ध किए जाने के लिए यह अवसर, परिस्थिति और योग्यता है, इसीलिए एक अर्थपूर्ण जीवन बिताना ही उनकी प्रवृत्ति होनी चाहिए, और उन्हें परमेश्वर को संतुष्ट करना चाहिए। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे पतरस ने अनुभव किया था: जब वह बेहद कमज़ोर था, तब उसने प्रार्थना की और कहा, "हे परमेश्वर! समय और स्थान की परवाह न करते हुए, तू जानता है कि मैं ने तुझे हमेशा याद किया है। इस से कोई फर्क नहीं पड़ता कि समय और स्थान क्या था, तू जानता है कि मैं तुझसे प्रेम करना चाहता हूँ, परन्तु मेरी हस्ती बहुत छोटी है, मैं बहुत कमज़ोर और निर्बल हूँ, मेरा प्रेम बहुत सीमित है, और तेरे प्रति मेरी सत्य निष्ठा बहुत थोड़ी सी है। तेरे प्रेम की तुलना में, मैं साधारणतः जीने के भी योग्य नहीं हूँ। मैं कामना करता हूँ कि मेरा जीवन व्यर्थ न हो, और यह कि मैं न केवल तेरे प्रेम का प्रतिफल दूँ, बल्कि, इसके अतिरिक्त, यह कि वह सब कुछ जो मेरे पास है उसे तेरे लिए समर्पित कर दूँ। यदि मैं तुझे संतुष्ट कर सकता, तब एक प्राणी होने के नाते, मेरे पास मन की शांति होती, और मैं कुछ और नहीं मांगूंगा। यद्यपि अब मैं कमज़ोर और निर्बल हूँ, फिर भी मैं तेरे प्रोत्साहन को नहीं भूलुंगा, और तेरे प्रेम को नहीं भूलुंगा। अब मैं तेरे प्रेम का प्रतिफल देने के सिवाय कुछ और नहीं कर रहा हूँ। हे परमेश्वर, मैं भंयकर भय का एहसास कर रहा हूँ! मेरे हृदय में तेरे लिए जो प्रेम है उसे मैं वापस कैसे दे सकता हूँ, वह सब कुछ जो मैं कर सकता हूँ उसे मैं कैसे कर सकता हूँ, मैं तेरी इच्छाओं को पूरा करने के योग्य कैसे हो सकता हूँ, और मैं वह सब कुछ भेंट चढ़ाने के योग्य कैसे हो सकता हूँ जिसे मुझे तुझे भेंट चढ़ाना है? तू मनुष्य की कमज़ोरी को जानता है; मैं तेरे प्रेम के काबिल कैसे हो सकता हूँ? हे परमेश्वर! तू जानता है कि मेरी हस्ती छोटी सी है, और यह कि मेरा प्रेम बहुत थोड़ा सा है। इस प्रकार के वातावरण में मैं अपने भरसक सबसे उत्तम कार्य कैसे कर सकता हूँ? मैं जानता हूँ कि मुझे तेरे प्रेम का प्रतिफल देना चाहिए, मैं जानता हूँ कि मुझे वह सब कुछ देना चाहिए जिसे मुझे तुझे देना है, परन्तु आज मेरी हस्ती बहुत छोटी है। मैं तुझसे मांगता हूँ कि तू मुझे सामर्थ दे, और मुझे आत्मविश्वास दे, जिस से तुझे समर्पित करने के लिए मैं और अधिक शुद्ध प्रेम को प्राप्त करने के योग्य हो जाऊँगा, और वह सब कुछ समर्पित करने के लिए और अधिक योग्य हो जाऊँगा जिसे मुझे तुझे समर्पित करना है; न केवल मैं तुझे तेरे प्रेम का प्रतिफल देने के योग्य हो जाऊँगा, बल्कि तेरी ताड़ना, न्याय और परीक्षाओं, और यहाँ तक कि कठिन अभिशापों का भी अनुभव करने के लिए और अधिक योग्य हो जाऊँगा। तूने मुझे अपने शुद्ध प्रेम को देखने दिया है, और तुझसे प्रेम न करने में मैं असमर्थ हूँ, और आज भले ही मैं कमज़ोर और निर्बल हूँ, फिर भी मैं तुझे कैसे भूल सकता हूँ? तेरे प्रेम, ताड़ना और न्याय इन सब से मैं ने तुझे जाना है, फिर भी तेरे प्रेम की पूर्ति करने में मैं असमर्थता महसूस करता हूँ, क्योंकि तू कितना महान है। मैं वह सब कुछ कैसे समर्पित कर सकता हूँ जिसे मुझे सृष्टिकर्ता के लिए समर्पित करना है? "पतरस की विनती ऐसी ही थी, फिर भी उसकी हस्ती बिलकुल ना काफी थी। इस क्षण, उसने महसूस किया कि एक कटार उसके हृदय के आर-पार हो गया था और वह पीड़ा में था; वह नहीं जानता था कि ऐसी स्थिति में क्या करना है। फिर भी वह लगातार प्रार्थना करता रहा: "हे परमेश्वर! मनुष्य की हस्ती बचकानी है, उसका विवेक कमज़ोर है, और तेरे प्रेम का प्रतिफल देना ही वह एक मात्र चीज़ है जिसे मैं हासिल कर सकता हूँ। आज, मैं नहीं जानता हूँ कि तेरी इच्छाओं को कैसे संतुष्ट करूँ, या वह सब कैसे करूँ जिसे मैं कर सकता हूँ, या वह सब कुछ तुझे समर्पित कैसे करूँ जिसे मुझे तुझे समर्पित करना है। तेरे न्याय के बावजूद, तेरी ताड़नाओं के बावजूद, इसके बावजूद कि तू मुझे क्या देता है, इसके बावजूद कि तू मुझ से क्या ले लेता है, मुझे तेरी छोटी सी भी शिकायत से आज़ाद कर। कई बार, जब तूने मेरी ताड़ना की और मेरा न्याय किया, मैं अपने आप में कुड़कुड़ाता था, और मैं शुद्धता प्राप्त करने, या तेरी इच्छाओं की पूर्ति करने में असमर्थ था। मैंने मजबूरी में तेरे प्रेम का प्रतिफल दिया था, और इस घड़ी मैं अपने आप से और भी अधिक नफरत करता हूँ।" यह इसलिए क्योंकि वह परमेश्वर के शुद्ध प्रेम की खोज करता था इसलिए पतरस ने इस प्रकार प्रार्थना की थी। वह खोज रहा था, और विनती कर रहा था, और, उससे बढ़कर, वह अपने आप पर इल्ज़ाम लगा रहा था, और परमेश्वर के सामने अपने पापों को अंगीकार कर रहा था। उसने महसूस किया कि वह परमेश्वर का ऋणी था, और उसने अपने आप से नफरत किया था, फिर भी वह कुछ कुछ उदास और निष्क्रिय भी था। उसने हमेशा ऐसा महसूस किया था, कि मानो वह परमेश्वर की इच्छाओं के प्रति उतना अच्छा नहीं था, और वह अपना बेहतरीन कार्य करने में असमर्थ था। ऐसी स्थितियों के अन्तर्गत, पतरस ने तब भी अय्यूब के विश्वास पर अनुसरण किया था। उसने देखा था कि अय्यूब का विश्वास कितना बड़ा था, क्योंकि अय्यूब ने यह देखा था कि उसका सब कुछ परमेश्वर के द्वारा दिया गया था, और उसका सब कुछ ले लेना परमेश्वर के लिए स्वभाविक था, यह कि परमेश्वर जिसको चाहेगा उसको देगा-परमेश्वर का धर्मी स्वभाव ऐसा ही था। अय्यूब ने कोई शिकायत नहीं की थी, और तब भी परमेश्वर की स्तुति कर रहा था। पतरस भी स्वयं को जानता था, और उसने अपने हृदय में प्रार्थना की, "आज अपने विवेक के इस्तेमाल करके तेरे प्रेम बदला चुका कर मुझे संतुष्ट नहीं होना चाहिए और मैं ने तुझे जितना अधिक प्रेम वापस किया है उस से भी मुझे संतुष्ट नहीं होना चाहिए, क्योंकि मेरे विचार बहुत ही भ्रष्ट हैं, और मैं तुझे सृष्टिकर्ता के रूप में देख पाने में असमर्थ हूँ। क्योंकि मैं अभी भी तुझसे प्रेम करने के योग्य नहीं हूँ, मुझे उस योग्यता को सिद्ध करना होगा जिस से वह सब कुछ समर्पित कर सकूँ जिसे मुझे तुझको समर्पित करना है, और मैं यह खुशी से करूँगा। मुझे वह सब कुछ जानना होगा जो तूने किया है, और मेरे पास कोई विकल्प नहीं है, और मुझे तेरे प्रेम को देखना होगा, और मुझे तेरी स्तुति करना और तेरे पवित्र नाम का गुणगान करना होगा, ताकि तू मेरे जरिए बड़ी महिमा प्राप्त कर सके। मैं तेरी इस गवाही में तेरे साथ मज़बूती के साथ खड़े होने को तैयार हूँ। हे परमेश्वर! तेरा प्रेम कितना बहुमूल्य और सुन्दर है; मैं उस दुष्ट के हाथों में जीने की कामना कैसे कर सकता हूँ? क्या मुझे तेरे द्वारा नहीं बनाया गया था? मैं शैतान के प्रभुत्व के अधीन कैसे जी सकता हूँ? मैं यह ज़्यादा पसंद करता हूँ कि मेरा सारा जीवन तेरी ताड़नाओं के मध्य गुज़रे। मैं उस दुष्ट के शासन के अधीन नहीं जीना चाहता हूँ। यदि मुझे पवित्र बनाया जा सकता है, और यदि मैं अपना सब कुछ तुझे समर्पित कर सकता हूँ, तो मैं आपके न्याय और ताड़ना के लिए अपने शरीर और मन की भेंट चढ़ाने को तैयार हूँ। क्योंकि मैं शैतान से घृणा करता हूँ, और मैं उसके शासन के अधीन जीवन बिताने में इच्छुक नहीं हूँ। मेरा न्याय करने द्वारा तू अपने धर्मी स्वभाव को प्रकट करता है; मैं खुश हूँ, और मेरे पास जरा सी भी शिकायत नहीं है। यदि मैं प्राणी होने के कर्तव्य को निभा सकता हूँ, तो मैं तैयार हूँ कि मेरा सम्पूर्ण जीवन तेरे न्याय के साथ जुड़ जाए, जिसके जरिए मैं तेरे धर्मी स्वभाव को जान पाऊँगा, और उस दुष्ट के प्रभाव से अपने आपको छुड़ा पाऊँगा।" पतरस ने हमेशा इस प्रकार प्रार्थना की, हमेशा इसकी ही खोज की, और वह एक ऊँचे आयाम तक पहुँच गया। वह न केवल परमेश्वर के प्रेम का प्रतिफल देने के योग्य हो पाया, बल्कि, उससे भी अधिक महत्वपूर्ण, उसने एक प्राणी होने के रूप में अपने कर्तव्य को भी निभाया। उस पर न केवल उसके विवेक के द्वारा ही दोष नहीं लगाया गया था, बल्कि वह विवेक के मापदण्डों से परे होने में सक्षम हो गया था। उसकी प्रार्थनाएँ लगातार ऊपर परमेश्वर के सामने पहुँचने लगीं, कुछ इस तरह कि उसकी आकांक्षाएँ हमेशा की तरह और ऊँची हो गईं, और परमेश्वर के प्रति उसका प्रेम हमेशा की तरह विशाल हो गया था। यद्यपि उसने अति पीड़ा देनेवाला दर्द सहा था, फिर भी उसने परमेश्वर के प्रेम को नहीं भूलाया, और फिर भी उसने परमेश्वर की इच्छा को समझने की क्षमता को प्राप्त करने का प्रयास किया। उसकी प्रार्थनाओं में निम्नलिखित वचन कहे गए: तेरे प्रेम का प्रतिफल देने के अलावा मैं ने और कुछ पूर्ण नहीं किया है। मैं ने शैतान के सामने तेरे लिए गवाही नहीं दी है, मैं ने अपने आपको शैतान के प्रभाव से आज़ाद नहीं किया है, और मैं अब भी शरीर में जीता हूँ। मैं कामना करता हूँ कि काश मैं अपने प्रेम का इस्तेमाल कर के शैतान को हरा पाता, और उसे लज्जित कर पाता, और इस प्रकार तेरी इच्छा को संतुष्ट कर पाता। मैं आशा करता हूँ कि काश मैं अपना सर्वस्व तुझे समर्पित कर पाता, और अपना थोड़ा सा भी अंश शैतान को नहीं देता, क्योंकि शैतान तेरा शत्रु है। जितना ज़्यादा उसने इस दिशा में प्रयास किया, उतना ही ज़्यादा वह द्रवित हुआ, और उतना ही ज़्यादा इन विषयों पर उसका ज्ञान बढ़ता गया। इसका एहसास किए बगैर, उसे पता चला कि उसे अपने आपको शैतान के प्रभाव से मुक्त कर देना चाहिए, और उसे पूरी तरह परमेश्वर के पास वापस लौट जाना चाहिए। उसने ऐसा ही आयाम हासिल किया था। वह शैतान के प्रभाव से भी आगे बढ़ गया था, और वह शरीर की अभिलाषाओं और मौज मस्ती से अपने आपको छुड़ा रहा था, और वह परमेश्वर की ताड़ना और न्याय दोनों को और अधिक गम्भीरता से अनुभव करने की इच्छा कर रहा था। उसने कहा, "यद्यपि मैं तेरी ताड़नाओं और तेरे न्याय के बीच रहता हूँ, फिर भी उससे मिली कठिनाई के बावजूद, मैं अभी भी शैतान के प्रभुत्व के अधीन जीवन व्यतीत करना नहीं चाहता हूँ, और मैं शैतान के छल कपट को सहना नहीं चाहता हूँ। मैं तेरे अभिशापों के बीच जी कर आनन्दित हूँ, मैं शैतान की आशीषों के मध्य जी कर नाराज़ हूँ। मैं तुझसे प्रेम करता हूँ क्योंकि मैं तेरे न्याय के बीच जीवन बिताता हूँ, और इस से मुझे बहुत आनन्द प्राप्त होता है। तेरी ताड़ना और न्याय धर्मी और पवित्र है; यह मुझे शुद्ध करने के लिए है, और उस से बढ़कर मुझ बचाने के लिए है। मैं अधिक पसंद करूँगा कि अपना सारा जीवन तेरी देखरेख में तेरे न्याय के बीच बिता दूँ। मैं एक घड़ी भी शैतान के प्रभुत्व में जीवन बिताने को तैयार नहीं हूँ; मैं तेरे द्वारा शुद्ध होना चाहता हूँ, मैं दुख तकलीफ सहना चाहता हूँ, और मैं शैतान के द्वारा शोषित होने और छले जाने को इच्छुक नहीं हूँ। मुझे, इस प्राणी को, तेरे द्वारा इस्तेमाल किया जाना चाहिए, तेरे द्वारा प्राप्त किया जाना चाहिए, और तेरे द्वारा मेरा न्याय किया जाना चाहिए, और तेरे द्वारा मुझे ताड़ना दिया जाना चाहिए। यहाँ तक कि मुझे तेरे द्वारा शापित किया जाना चाहिए। जब तू मुझे आशीष देने की इच्छा करता है तो मेरा हृदय आनन्दित होता है, क्योंकि मैं तेरे प्रेम को देख चुका हूँ। तू सृष्टिकर्ता है, और मैं एक जीवधारी हूँ: मुझे तुझको धोखा देकर शैतान के प्रभुत्व में नहीं जीवन व्यतीत करना चाहिए, और मुझे शैतान के द्वारा शोषित नहीं किया जाना चाहिए। शैतान के लिए जीने के बजाय मुझे तेरा घोड़ा, या बैल होना चाहिए। मैं तेरी ताड़नाओं के मध्य, बिना किसी शारीरिक आनन्द के, जीवन व्यतीत करना ज़्यादा पसंद करूँगा, और इस से मुझे प्रसन्नता होगी भले ही मुझे तेरे अनुग्रह को खोना पड़े। यद्यपि तेरा अनुग्रह मेरे साथ नहीं है, फिर भी मैं तेरे द्वारा ताड़ना दिए जाने और न्याय किए जाने से प्रसन्न हूँ; यह तेरी सब से बेहतरीन आशीष है, और तेरा सब से बड़ा अनुग्रह है। यद्यपि तू हमेशा प्रतापी है और मेरे प्रति क्रोधित है, किन्तु अभी भी मैं तुझको नहीं छोड़ सकता हूँ, और मैं अभी भी तुझ से पर्याप्त प्रेम नहीं कर सकता हूँ। मैं तेरे घर में रहना अधिक पसंद करूँगा, मैं तेरे द्वारा शापित, और प्रताड़ित किया जाना, और मार खाना अधिक पसंद करूँगा, और मैं शैतान के प्रभुत्व के अधीन जीने को तैयार नहीं हूँ, न ही मैं केवल शरीर के लिए हड़बड़ाने और व्यस्त रहने की इच्छा करता हूँ, और शरीर के लिए जीने के लिए तो बिलकुल भी तैयार नहीं हूँ। "पतरस का प्रेम एक पवित्र प्रेम था। यह सिद्ध किए जाने का अनुभव है, और यह सिद्ध किए जाने का सर्वोच्च आयाम है, और इसको छोड़ और कोई जीवन नहीं है जो और भी अधिक सार्थक हो। उसने परमेश्वर की ताड़ना और न्याय को स्वीकार किया था, उसने परमेश्वर के धर्मी स्वभाव को संजोकर रखा था, और इसको छोड़ पतरस के बारे में और कुछ बहुमूल्य नहीं था। उसने कहा, "शैतान मुझे भौतिक आनन्द देता है, परन्तु मैं उनको संजोकर नहीं रखता हूँ। परमेश्वर की ताड़ना और न्याय मुझ पर आ गया है—मैं इस में अनुग्रहित हूँ, और मुझे इस में आनन्द मिलता है, और मैं इस में आशीषित हूँ। यदि यह परमेश्वर के न्याय की बात नहीं होती तो मैं परमेश्वर से कभी प्यार नहीं कर पाता, मैं अभी भी शैतान के प्रभुत्व के अधीन जीवन बिताता, मुझे अभी भी उसके द्वारा नियन्त्रित किया जाता, और आज्ञा दिया जाता। यदि स्थिति ऐसी होती, तो मैं कभी भी एक सच्चा इंसान नहीं बन पाता, क्योंकि मैं परमेश्वर को संतुष्ट करने में असमर्थ हो जाता, और मैं अपने सम्पूर्ण जीवन को परमेश्वर को समर्पित नहीं कर पाता। भले ही परमेश्वर मुझे आशीष न दे, और मुझे बिना किसी भीतरी सुकून के, मानो एक आग मेरे भीतर जल रही हो, और बिना किसी शांति या आनन्द के छोड़ दे, और भले ही परमेश्वर की ताड़ना और अनुशासन कभी मुझ से दूर नहीं हुआ, फिर भी मैं परमेश्वर की ताड़ना और न्याय में उसके धर्मी स्वभाव को देखने में सक्षम हूँ। मैं इस में आनन्दित हूँ; जीवन में इस से बढ़कर कोई मूल्यवान और अर्थपूर्ण बात नहीं है। यद्यपि उसकी सुरक्षा और देखभाल क्रूर ताड़ना, न्याय, अभिशाप और पीड़ा बन चुके हैं, किन्तु मैं अभी भी इन चीज़ों में आनन्दित होता हूँ, क्योंकि वे मेरे भले के लिए मुझे शुद्ध कर सकते हैं, मुझे बदल सकते हैं, मुझे परमेश्वर के नज़दीक ला सकते हैं, मुझे परमेश्वर से और भी अधिक प्रेम करने के योग्य बना सकते हैं, और परमेश्वर के प्रति मेरे प्रेम को और अधिक शुद्ध कर सकते हैं। यह मुझे इस योग्य बनाता है कि मैं एक जीवधारी रूप में अपने कर्तव्य को पूरा करूँ, और यह मुझे परमेश्वर के सामने ले जाता है और शैतान के प्रभाव से दूर कर देता है, ताकि मैं आगे से शैतान की सेवा न करूँ। जब मैं शैतान के प्रभुत्व के अधीन जीवन नहीं बिताता हूँ, और जब मैं, बिना किसी चीज़ को छिपाए, अपना सब कुछ जो मेरे पास है और वह सब कुछ जिसे मैं परमेश्वर के लिए कर सकता हूँ उसे समर्पित करने के योग्य हो जाता हूँ—तो यह तब होगा जब मैं पूरी तरह संतुष्ट हो जाऊँगा। यह परमेश्वर की ताड़ना और न्याय है जिसने मुझे बचाया है, और मेरे जीवन को परमेश्वर की ताड़नाओं और न्याय से अलग नहीं किया जा सकता है। पृथ्वी पर मेरा जीवन शैतान के प्रभुत्व में है, और यदि यह परमेश्वर की ताड़ना और न्याय की देखभाल और सुरक्षा के लिए नहीं होता, तो मैं हमेशा शैतान के प्रभुत्व के अधीन जीवन बिताता, और, इसके अतिरिक्त, मेरे पास एक सार्थक जीवन जीने का अवसर या अभिप्राय नहीं होता। बस परमेश्वर की ताड़ना और न्याय मुझे कभी छोड़कर न जाए, तब ही मैं परमेश्वर के द्वारा शुद्ध किए जाने के योग्य हो सकता हूँ। केवल परमेश्वर के कठोर शब्दों और धार्मिकता, और परमेश्वर के प्रतापी न्याय के कारण ही, मैं ने सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त की है, और ज्योति में रहता हूँ, और मैं ने परमेश्वर की आशीषों को प्राप्त किया है। शुद्ध किए जाने के लिए, और अपने आपको शैतान से मुक्त कराने के लिए, और परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन जीवन बिताने के लिए—यह आज मेरी ज़िन्दगी की सब से बड़ी आशीष है।" यह पतरस के द्वारा अनुभव किया गया सर्वोच्च आयाम है।

अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? तीन चेतावनियाँ परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं पतरस ने यीशु को कैसे जाना परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे क्या आप जाग उठे हैं? एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग दो) परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग एक) भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन

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