परमेश्वर के दैनिक वचन

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परमेश्वर के दैनिक वचन

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सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन
सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन (परमेश्वर को जानने का तरीका)
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अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन
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परमेश्वर के उत्कृष्ट वचन (अंश)
वचन देह में प्रकट होता है (संकलन)
वचन देह में प्रकट होता है (संकलन)

पुरुषों के बीच में शायद ही कोई परमेश्वर के हृदय की तीव्र इच्छा को समझता है क्योंकि लोगों की क्षमता बहुत कम है और उनकी आध्यात्मिक संवेदनशीलता काफी सुस्त है, और क्योंकि वे सभी न तो देखते हैं और न ही ध्यान देते हैं कि परमेश्वर क्या कर रहा है। इसलिए परमेश्वर मनुष्य के बारे में चिंता करता रहता है, मानो कि मनुष्य की पाशविक प्रकृति किसी भी क्षण बाहर आ सकती हो। यह आगे दर्शाता है कि परमेश्वर का पृथ्वी पर आना बड़े प्रलोभनों के साथ-साथ है। किन्तु लोगों के एक समूह को पूरा करने के वास्ते, महिमा से लदे हुए, परमेश्वर ने मनुष्य को अपने हर अभिप्राय के बारे में, कुछ भी नहीं छिपाते हुए, बता दिया। उसने लोगों के इस समूह को पूरा करने के लिए दृढ़ता से संकल्प किया है। इसलिए, कठिनाई आए या प्रलोभन, वह नज़र फेर लेता है और इस सभी को अनदेखा करता है। वह केवल चुपचाप अपना स्वयं का कार्य करता है, और दृढ़ता से यह विश्वास करता है कि एक दिन जब परमेश्वर महिमा प्राप्त कर लेगा, तो आदमी परमेश्वर को जान लेगा, और यह विश्वास करता है कि जब मनुष्य परमेश्वर के द्वारा पूरा कर लिया जाएगा, तो वह परमेश्वर के हृदय को पूरी तरह से समझ जाएगा। अभी ऐसे लोग हो सकते हैं जो परमेश्वर को प्रलोभित कर सकते हैं या परमेश्वर को गलत समझ सकते हैं या परमेश्वर को दोष दे सकते हैं; परमेश्वर उसमें से किसी को भी गंभीरता से नहीं लेता है। जब परमेश्वर महिमा में अवरोहण करेगा, तो सभी लोग समझ जाएँगे कि परमेश्वर जो कुछ भी करता है वह मानव जाति के कल्याण के लिए है, और सभी लोग समझ जाएँगे कि परमेश्वर जो कुछ भी करता है वह इसलिए है ताकि मानव जाति बेहतर ढंग से जीवित रह सके। परमेश्वर का आगमन प्रलोभनों के साथ-साथ है, और परमेश्वर प्रताप और कोप के साथ भी आता है। जब तक परमेश्वर मनुष्यों को छोड़ कर जाएगा, तब तक उसने पहले ही महिमा प्राप्त कर ली होगी, और वह पूरी तरह से महिमा से भरा हुआ और वापसी की खुशी के साथ चला जाएगा। इस बात की परवाह किए बिना कि लोग उसे कैसे अस्वीकार करते हैं, पृथ्वी पर कार्य करते हुए परमेश्वर चीजों को गंभीरता से नहीं लेता है। वह केवल अपना कार्य कर रहा है। परमेश्वर का विश्व का सृजन हजारों वर्षों पहले से चल रहा है, वह पृथ्वी पर एक असीमित मात्रा में कार्य करने के लिए आया है, और उसने मानव दुनिया के अस्वीकरण और अपयश का पूरी तरह से अनुभव किया है। कोई भी परमेश्वर के आगमन का स्वागत नहीं करता है; हर कोई मात्र एक भावशून्य नज़र से उसका सम्मान करता है। इन हजारों वर्षों की कठिनाइयों के दौरान, मनुष्य के व्यवहार ने बहुत पहले से ही परमेश्वर के हृदय को चूर-चूर कर दिया है। वह लोगों के विद्रोह पर अब और ध्यान नहीं देता है, बल्कि इसके बजाय मनुष्य को रूपांतरित करने और स्वच्छ बनाने के लिए एक अलग योजना बना रहा है। उपहास, अपयश, उत्पीड़न, दारूण दुःख, सलीब पर चढ़ने की पीड़ा, मनुष्य द्वारा अपवर्जन इत्यादि जिसे परमेश्वर ने देह में अनुभव किया है-परमेश्वर ने इन्हें पर्याप्त रूप से झेला है। परमेश्वर ने देह में मानव दुनिया के दुःखों को पूरी तरह से भुगता है। स्वर्ग के परमपिता परमेश्वर के आत्मा ने बहुत समय पहले ही ऐसे दृश्यों का असहनीय होना जान लिया था और अपने प्यारे पुत्र की वापसी के लिए इंतजार करते हुए, अपना सिर पीछे कर लिया था और अपनी आँखें बंद कर लीं थी। वह केवल इतना ही चाहता है कि सभी लोग सुनें और पालन करें, उसकी देह के सामने अत्यधिक शर्मिंदगी महसूस करने में समर्थ हों, और उसके ख़िलाफ विद्रोह नहीं करें। वह केवल इतनी ही इच्छा करता है कि सभी लोग विश्वास करें कि परमेश्वर मौज़ूद है। उसने बहुत समय पहले ही मनुष्य से अधिक माँगे करनी बंद कर दी क्योंकि परमेश्वर ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई है, फिर भी परमेश्वर के कार्य को गंभीरता से नहीं लेते हुए मनुष्य चैन से सो रहा है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

परमेश्वर की एकमात्र इच्छा है कि इंसान उसकी बात सुने और माने

I

जबसे परमेश्वर ने कई साल पहले बनाया इस दुनिया को, तबसे किया है बहुत काम उसने इस धरती पर, मानवता के सबसे बुरे तिरस्कार को सहा है, सही हैं उसने झूठी निंदा। किसी ने भी पृथ्वी पर परमेश्वर के आगमन का स्वागत नहीं किया। सबने उसे अनादर के साथ ठुकरा दिया। उसने सहीं हैं हज़ारों सालों की कठिनाइयां। मनुष्य के आचरण ने बहुत पहले तोड़ दिया उसका दिल। मनुष्य के विद्रोह पर वो अब ध्यान देता नहीं, बल्कि उन्हें बदलने और शुद्ध करने की योजना है उसकी।

II

देहधारी परमेश्वर ने सहा है काफ़ी उपहास, किया है अनुभव बहिष्कार और सूली पर चढ़ने का। सहा है उसने मनुष्य की दुनिया के सबसे बुरे दुखों को। स्वर्ग में पिता सह न पाए इसे। उसने झटका पीछे अपना सिर, बंद कर ली अपनी आँखें, अपने प्रिय पुत्र की वापसी का इंतज़ार करने के लिए। परमेश्वर की एकमात्र इच्छा है इंसान सुने और माने उसकी बात। उसकी देह के सामने हो शर्मसार और विद्रोह न करे। उसकी है यही एकमात्र इच्छा आज सभी लोगों से, वे करें बस विश्वास कि है परमेश्वर का अस्तित्व।

III

परमेश्वर ने बहुत पहले मनुष्य से मांगना छोड़ दिया। जो कीमत उसने चुकाई, वो है पहले ही बहुत अधिक। फिर भी मनुष्य करता है आराम, मानो देख पाता नहीं वो परमेश्वर के कार्य को। परमेश्वर की एकमात्र इच्छा है इंसान सुने और माने उसकी बात। उसकी देह के सामने हो शर्मसार और विद्रोह न करे। उसकी है यही एकमात्र इच्छा आज सभी लोगों से, वे करें बस विश्वास कि है परमेश्वर का अस्तित्व।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन

  • परमेश्वर को जानना
  • मसीही जीवन
परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 1 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 2 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 3 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 4 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 5 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 6 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 7 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 8 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 9 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 10 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 11 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 12 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 13 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 14 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 15 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 16 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 17 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 18 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 19 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 20 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 21 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 22 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 23 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 24 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 25 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 26 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 27 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 28 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 29 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 30 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 31 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 32 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 33 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 34 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 35 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 36 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 37 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 38 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 39 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 40 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 41 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 42 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 43 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 44 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 45 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 46 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 47 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 48 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 49 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 50 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं 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कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 62 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 63 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 64 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 65 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 66 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 67 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 68 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 69 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 70 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 71 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 72 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 73 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 74 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 75 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 76 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 77 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 78 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 79 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 80 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 81 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 82 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 83 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 84 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 85 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 86 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 87 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 88 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 89 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 90 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 91 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 92 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 93 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 94 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 95 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 96 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 97 परमेश्वर के दैनिक वचन | 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है II" | अंश 112 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 113 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 114 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 115 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 116 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 117 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 118 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 119 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 120 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 121 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 122 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 123 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 124 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 125 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 126 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 127 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 128 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 129 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 130 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 131 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 132 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 133 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 134 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 135 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 136 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 137 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 138 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 139 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 140 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 141 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 142 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 143 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 145 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 146 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 147 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 148 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 149 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V" | अंश 150 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V" | अंश 151 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V" | अंश 152 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V" | अंश 153 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 154 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 155 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 156 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 157 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 158 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 159 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 160 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 161 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 162 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 163 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 164 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI" | अंश 165 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VII" | अंश 166 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VII" | अंश 167 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VII" | अंश 168 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VII" | अंश 169 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VIII" | अंश 170 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VIII" | अंश 171 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VIII" | अंश 172 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VIII" | अंश 173 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VIII" | अंश 174 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VIII" | अंश 175 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VIII" | अंश 176 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VIII" | अंश 177 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VIII" | अंश 178 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" | अंश 179 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" | अंश 180 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" | अंश 181 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" | अंश 182 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" | अंश 183 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" | अंश 184 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" | अंश 185 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IX" | अंश 186 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 187 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 188 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 189 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 190 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 191 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 192 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 193 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 195 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 197 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 198 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 199 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 200
कार्य के तीन चरण परमेश्वर के दैनिक वचन | "छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी" | अंश 1 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 2 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 3 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 4 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 5 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 6 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 7 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 8 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 9 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 10 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 11 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (4)" | अंश 12 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 14 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 15 परमेश्वर के दैनिक वचन | "दो देहधारण पूरा करते हैं देहधारण के मायने" | अंश 16 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 17 परमेश्वर के दैनिक वचन | "व्यवस्था के युग का कार्य" | अंश 18 परमेश्वर के दैनिक वचन | "व्यवस्था के युग का कार्य" | अंश 19 परमेश्वर के दैनिक वचन | "व्यवस्था के युग का कार्य" | अंश 20 परमेश्वर के दैनिक वचन | "छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी" | अंश 23 परमेश्वर के दैनिक वचन | "प्रस्तावना" | अंश 24 परमेश्वर के दैनिक वचन | "प्रस्तावना" | अंश 25 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (4)" | अंश 26 परमेश्वर के दैनिक वचन | "राज्य का युग वचन का युग है" | अंश 28 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" | अंश 32 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (4)" | अंश 33 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" | अंश 34 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" | अंश 35 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" | अंश 36 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" | अंश 37 परमेश्वर के दैनिक वचन | "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक 'सफेद बादल' पर सवार होकर वापस आ चुका है" | अंश 44 परमेश्वर के दैनिक वचन | "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक 'सफेद बादल' पर सवार होकर वापस आ चुका है" | अंश 45 परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के प्रकटन को उसके न्याय और ताड़ना में देखना" | अंश 73 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 1" | अंश 46 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 2" | अंश 47 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 3" | अंश 48 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 34" | अंश 54 परमेश्वर के दैनिक वचन | आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 42" | अंश 57 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 70" | अंश 58 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : राज्य गान" | अंश 59 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 11" | अंश 60 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 12" | अंश 61 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 22" | अंश 62 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 26" | अंश 63 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 27" | अंश 64 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 29" | अंश 65 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 29" | अंश 66 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 43" | अंश 67 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सात गर्जनाएँ—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे" | अंश 69 परमेश्वर के दैनिक वचन | "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक 'सफेद बादल' पर सवार होकर वापस आ चुका है" | अंश 70 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है" | अंश 71 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है" | अंश 72 परमेश्वर के दैनिक वचन | "प्रस्तावना" | अंश 74 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा" | अंश 75 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा" | अंश 76 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम लोगों को हैसियत के आशीषों को अलग रखना चाहिए और मनुष्य के उद्धार के लिए परमेश्वर की इच्छा को समझना चाहिए" | अंश 85 अंत के दिनों में न्याय परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3) (अंश III) परमेश्वर के दैनिक वचन | "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" | अंश 77 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" | अंश 78 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" | अंश 79 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" | अंश 80 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 82 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 83 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम लोगों को हैसियत के आशीषों को अलग रखना चाहिए और मनुष्य के उद्धार के लिए परमेश्वर की इच्छा को समझना चाहिए" | अंश 84 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल वे लोग ही परमेश्वर की गवाही दे सकते हैं जो परमेश्वर को जानते हैं" | अंश 86 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल पीड़ादायक परीक्षाओं का अनुभव करने के द्वारा ही तुम परमेश्वर की मनोहरता को जान सकते हो" | अंश 87 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल पीड़ादायक परीक्षाओं का अनुभव करने के द्वारा ही तुम परमेश्वर की मनोहरता को जान सकते हो" | अंश 88 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल पूर्ण बनाया गया मनुष्य ही सार्थक जीवन जी सकता है" | अंश 89 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" | अंश 93 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 103" | अंश 96 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 26" | अंश 98 परमेश्वर के दैनिक वचन | "दो देहधारण पूरा करते हैं देहधारण के मायने" | अंश 130 देहधारण भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है (अंश VII) भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है (अंश IX) तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है (अंश II) केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है (अंश III) स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है (अंश I) परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (3)" | अंश 114 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" | अंश 99 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" | अंश 100 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" | अंश 101 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" | अंश 102 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" | अंश 103 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" | अंश 104 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" | अंश 105 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" | अंश 106 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" | अंश 107 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" | अंश 108 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" | अंश 109 परमेश्वर के दैनिक वचन | "प्रस्तावना" | अंश 110 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (3)" | अंश 115 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (4)" | अंश 116 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 118 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 119 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 120 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 121 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 122 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 123 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 124 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 125 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 126 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 128 परमेश्वर के दैनिक वचन | "दो देहधारण पूरा करते हैं देहधारण के मायने" | अंश 129 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है" | अंश 132 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है" | अंश 133 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है" | अंश 134 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है" | अंश 135 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" | अंश 136 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर" | अंश 137 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर" | अंश 138 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर" | अंश 139 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है" | अंश 140 परमेश्वर के कार्य को जानना देहधारण का रहस्य (4) (अंश I) देहधारण का रहस्य (2) (अंश I) विजय के कार्यों का आंतरिक सत्य (4) (अंश I) विजय के कार्यों का आंतरिक सत्य (3) (अंश I) परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य (अंश III) परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 17" | अंश 226 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 25" | अंश 53 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" | अंश 141 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" | अंश 142 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" | अंश 143 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" | अंश 144 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" | अंश 145 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" | अंश 146 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 147 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 148 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 149 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 150 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 151 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 152 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 153 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 154 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 155 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 156 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 157 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 158 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर" | अंश 159 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर" | अंश 160 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर" | अंश 161 परमेश्वर के दैनिक वचन | "उपाधियों और पहचान के सम्बन्ध में" | अंश 162 परमेश्वर के दैनिक वचन | "उपाधियों और पहचान के सम्बन्ध में" | अंश 163 परमेश्वर के दैनिक वचन | "उपाधियों और पहचान के सम्बन्ध में" | अंश 164 परमेश्वर के दैनिक वचन | "उपाधियों और पहचान के सम्बन्ध में" | अंश 165 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (1)" | अंश 169 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा मनुष्य को इस्तेमाल करने के विषय में" | अंश 171 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 172 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 173 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 174 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 175 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 176 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 178 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 179 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 180 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 181 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तेरह धर्मपत्रों पर तुम्हारा दृढ़ मत क्या है?" | अंश 182 परमेश्वर के दैनिक वचन | "'सहस्राब्दि राज्य आ चुका है' के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता" | अंश 183 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या परमेश्वर का कार्य उतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?" | अंश 188 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या परमेश्वर का कार्य उतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?" | अंश 189 परमेश्वर के दैनिक वचन | "कार्य और प्रवेश (4)" | अंश 191 परमेश्वर के दैनिक वचन | "कार्य और प्रवेश (4)" | अंश 192 परमेश्वर के दैनिक वचन | "कार्य और प्रवेश (9)" | अंश 196 परमेश्वर के दैनिक वचन | "विजय के कार्यों का आंतरिक सत्य (4)" | अंश 204 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के बारे में तुम्हारी समझ क्या है?" | अंश 205 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर संपूर्ण सृष्टि का प्रभु है" | अंश 206 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर संपूर्ण सृष्टि का प्रभु है" | अंश 207 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मानव जाति के प्रबंधन का उद्देश्य" | अंश 208 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मानव जाति के प्रबंधन का उद्देश्य" | अंश 209 परमेश्वर के दैनिक वचन | "अभ्यास (7)" | अंश 211 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मात्र उन्हें ही पूर्ण बनाया जा सकता है जो अभ्यास पर ध्यान देते हैं" | अंश 212 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल पूर्ण बनाया गया मनुष्य ही सार्थक जीवन जी सकता है" | अंश 213 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल वे लोग ही परमेश्वर की गवाही दे सकते हैं जो परमेश्वर को जानते हैं" | अंश 214 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियंता है" | अंश 215 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है" | अंश 216 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" | अंश 217 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" | अंश 218 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" | अंश 219 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" | अंश 220 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" | अंश 221 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 65" | अंश 222 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 108" | अंश 223 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 10" | अंश 224 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या : अध्याय 10" | अंश 225 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 28" | अंश 227 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 28" | अंश 228 परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 56" | अंश 233 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 88 | अंश 236 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 5" | अंश 238 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 9" | अंश 239 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 11" | अंश 240 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 15" | अंश 241 परमेश्वर के दैनिक वचन | "दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए" | अंश 242 परमेश्वर के दैनिक वचन | "नये युग की आज्ञाएँ" | अंश 243 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है" | अंश 244 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है" | अंश 245 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है" | अंश 246 परमेश्वर के दैनिक वचन | "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" | अंश 249 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मात्र उन्हें ही पूर्ण बनाया जा सकता है जो अभ्यास पर ध्यान देते हैं" | अंश 251 परमेश्वर के दैनिक वचन | "कार्य और प्रवेश (9)" | अंश 252 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है" | अंश 254 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है" | अंश 255 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है" | अंश 258 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है" | अंश 259 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है" | अंश 260 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सर्वशक्तिमान की आह" | अंश 261 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियंता है" | अंश 262 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियंता है" | अंश 263 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है" | अंश 264 बाइबल के बारे में रहस्य बाइबल के विषय में (2) (अंश I) बाइबल के विषय में (3) (अंश III) परमेश्वर के दैनिक वचन | "बाइबल के विषय में (1)" | अंश 265 परमेश्वर के दैनिक वचन | "बाइबल के विषय में (1)" | अंश 268 परमेश्वर के दैनिक वचन | "बाइबल के विषय में (3)" | अंश 272 परमेश्वर के दैनिक वचन | "बाइबल के विषय में (4)" | अंश 275 परमेश्वर के दैनिक वचन | "उपाधियों और पहचान के सम्बन्ध में" | अंश 276 परमेश्वर के दैनिक वचन | "उपाधियों और पहचान के सम्बन्ध में" | अंश 277 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य, जिसने परमेश्वर को अपनी ही धारणाओं में सीमित कर दिया है, वह किस प्रकार उसके प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है?" | अंश 278 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए" | अंश 280 धर्म-संबंधी धारणाओं का खुलासा मनुष्य, जिसने परमेश्वर को अपनी ही धारणाओं में सीमित कर दिया है, वह किस प्रकार उसके प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है? (अंश I) परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं" | अंश 282 परमेश्वर के दैनिक वचन | "प्रस्तावना" | अंश 281 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं" | अंश 283 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य, जिसने परमेश्वर को अपनी ही धारणाओं में सीमित कर दिया है, वह किस प्रकार उसके प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है?" | अंश 284 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य, जिसने परमेश्वर को अपनी ही धारणाओं में सीमित कर दिया है, वह किस प्रकार उसके प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है?" | अंश 285 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा" | अंश 286 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा" | अंश 287 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 290 परमेश्वर के दैनिक वचन | "विजय के कार्यों का आंतरिक सत्य (3)" | अंश 291 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 292 परमेश्वर के दैनिक वचन | "वे सभी लोग जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे वो लोग हैं जो परमेश्वर का विरोध करते हैं" | अंश 293 परमेश्वर के दैनिक वचन | "वे सभी लोग जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे वो लोग हैं जो परमेश्वर का विरोध करते हैं" | अंश 294 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए" | अंश 295 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या त्रित्व का अस्तित्व है?" | अंश 296 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या त्रित्व का अस्तित्व है?" | अंश 297 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या त्रित्व का अस्तित्व है?" | अंश 298 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या त्रित्व का अस्तित्व है?" | अंश 299 परमेश्वर के दैनिक वचन | "एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता में होना है" | अंश 300 परमेश्वर के दैनिक वचन | "एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता में होना है" | अंश 301 परमेश्वर के दैनिक वचन | "एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता में होना है" | अंश 302 परमेश्वर के दैनिक वचन | "एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता में होना है" | अंश 303 परमेश्वर के दैनिक वचन | "वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं" | अंश 304 परमेश्वर के दैनिक वचन | "वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं" | अंश 305 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए" | अंश 306 परमेश्वर के दैनिक वचन | "अभ्यास (7)" | अंश 315 परमेश्वर के दैनिक वचन | "अभ्यास (7)" | अंश 316 इंसान की भ्रष्टता का खुलासा तुम लोगों को अपने कर्मों पर विचार करना चाहिए (अंश II) परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम विश्वास के बारे में क्या जानते हो?" | अंश 322 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम किसके प्रति वफादार हो?" | अंश 332 परमेश्वर के दैनिक वचन | "कार्य और प्रवेश (7)" | अंश 311 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है" | अंश 317 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" | अंश 318 परमेश्वर के दैनिक वचन | "पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें" | अंश 319 परमेश्वर के दैनिक वचन | "पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें" | अंश 320 परमेश्वर के दैनिक वचन | "पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें" | अंश 321 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के बारे में तुम्हारी समझ क्या है?" | अंश 323 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो?" | अंश 324 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो?" | अंश 325 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम लोगों को हैसियत के आशीषों को अलग रखना चाहिए और मनुष्य के उद्धार के लिए परमेश्वर की इच्छा को समझना चाहिए" | अंश 326 परमेश्वर के दैनिक वचन | "दुष्टों को निश्चित ही दंड दिया जाएगा" | अंश 328 परमेश्वर के दैनिक वचन | "दुष्टों को निश्चित ही दंड दिया जाएगा" | अंश 329 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो लोग सीखते नहीं और कुछ नहीं जानते : क्या वे जानवर नहीं हैं?" | अंश 330 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो लोग सीखते नहीं और कुछ नहीं जानते : क्या वे जानवर नहीं हैं?" | अंश 331 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम किसके प्रति वफादार हो?" | अंश 333 परमेश्वर के दैनिक वचन | "गंतव्य के बारे में" | अंश 334 परमेश्वर के दैनिक वचन | "गंतव्य के बारे में" | अंश 335 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देह की चिन्ता करने वालों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है" | अंश 336 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देह की चिन्ता करने वालों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है" | अंश 337 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देह की चिन्ता करने वालों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है" | अंश 338 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम सभी कितने नीच चरित्र के हो!" | अंश 340 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम सभी कितने नीच चरित्र के हो!" | अंश 341 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल पूर्ण बनाया गया मनुष्य ही सार्थक जीवन जी सकता है" | अंश 347 परमेश्वर के दैनिक वचन | "एक वास्तविक व्यक्ति होने का क्या अर्थ है" | अंश 348 परमेश्वर के दैनिक वचन | "एक वास्तविक व्यक्ति होने का क्या अर्थ है" | अंश 349 परमेश्वर के दैनिक वचन | "एक वास्तविक व्यक्ति होने का क्या अर्थ है" | अंश 350 परमेश्वर के दैनिक वचन | "बुलाए गए लोग बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं" | अंश 351 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सर्वशक्तिमान की आह" | अंश 356 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है" | अंश 357 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 10" | अंश 365 जीवन में प्रवेश केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है (अंश I) परमेश्वर के प्रकटन को उसके न्याय और ताड़ना में देखना (अंश II) परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" | अंश 405 परमेश्वर के दैनिक वचन | "वास्तविकता को कैसे जानें" | अंश 433 मंज़िलें और परिणाम परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे (अंश VIII) अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो (अंश I) परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे (अंश III) परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे (अंश I) मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना (अंश II) मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना (अंश IV) मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना (अंश I) परमेश्वर के दैनिक वचन | "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" | अंश 585 परमेश्वर के दैनिक वचन | "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" | अंश 586 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है" | अंश 587 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 589 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 591 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 593 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" | अंश 595 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" | अंश 597 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" | अंश 598 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" | अंश 599 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" | अंश 600 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 602 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" | अंश 612

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