परमेश्वर के दैनिक वचन : धर्म-संबंधी धारणाओं का खुलासा | अंश 293
परमेश्वर के कार्य का उद्देश्य, मनुष्यों में उसका कार्य जो प्रभाव प्राप्त करता है, और मनुष्य के प्रति परमेश्वर की जो इच्छा है : इन्हीं...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
सभी लोगों को पृथ्वी पर मेरे कार्य के उद्देश्य को समझने की आवश्यकता है, अर्थात्, मेरे कार्य का अंतिम उद्देश्य और इससे पहले कि इसे पूरा किया जा सके कौन सा स्तर मुझे इस कार्य में अवश्य प्राप्त कर लेना चाहिए। यदि, आज के दिन तक मेरे साथ चलते रहे लोग यह नहीं समझते हैं कि मेरा समस्त कार्य किस बारे में है, तो क्या वे मेरे साथ व्यर्थ में नहीं चल रहे हैं? जो लोग मेरा अनुसरण करते हैं उन्हें मेरी इच्छा जाननी चाहिए। मैं हज़ारों सालों से पृथ्वी पर कार्य करता आ रहा हूँ, और आज के दिन तक अभी भी मैं अपना कार्य इसी तरह से कर रहा हूँ। यद्यपि मेरे कार्य में असाधारण रूप से अनगिनत चीजें शामिल हैं फिर भी इस कार्य का उद्देश्य अपरिवर्तित बना रहता है, ठीक जैसे कि, उदाहरण के लिए, भले ही मैं मनुष्य के प्रति न्याय और ताड़ना से भरा हुआ हूँ, फिर भी जो मैं करता हूँ वह अभी भी उसे बचाने के वास्ते है, अपने सुसमाचार को बेहतर ढंग से फैलाने के वास्ते है और एक बार मुनष्य को पूर्ण बना दिए जाने पर अन्यजाति देशों के बीच अपने कार्य को आगे विस्तारित करने के लिए है। इसलिए आज, एक ऐसे समय में जब कई लोग लंबे समय से अपनी आशा में अत्यधिक निराश हो चुके हैं, मैं अभी भी निरन्तर अपना कार्य कर रहा हूँ, और निरन्तर उस कार्य को कर रहा हूँ जो मनुष्य को न्याय और ताड़ना देने के लिए मुझे अवश्य करना चाहिए। इस तथ्य के बावजूद कि जो कुछ मैं कहता हूँ मनुष्य उस से उकता गया है और इस तथ्य की परवाह किए बिना कि उसे मेरे कार्य के साथ स्वयं को चिंतित करने की कोई इच्छा नहीं है, मैं तब भी अपना कर्तव्य कर रहा हूँ क्योंकि मेरे कार्य का उद्देश्य अपरिवर्तित रहता है और मेरी मूल योजना तोड़ी नहीं जाएगी। मेरे न्याय का प्रकार्य मनुष्य को मेरी आज्ञाओं का बेहतर ढंग से पालन करने में सक्षम बनाना है, और मेरी ताड़ना का प्रकार्य मनुष्य को एक अधिक प्रभावी ढंग से बदलना है। यद्यपि जो मैं करता हूँ वह मेरे प्रबन्धन के वास्ते है, किन्तु मैंने कभी भी कुछ ऐसा नहीं किया है जो मनुष्य के लाभ के बिना हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं इस्राएल से बाहर के सभी देशों को ठीक इस्राएलियों के समान ही आज्ञाकारी बनाना चाहता हूँ और उन्हें एक वास्तविक मनुष्य बनाना चाहता हूँ, ताकि इस्राएल के बाहर की भूमियों पर मेरे लिए पैर रखने की जगह हो। यह मेरा प्रबन्धन है; यही वह कार्य है जिसे मैं अन्यजाति देशों पर निष्पादित कर रहा हूँ। अभी भी, बहुत से लोग मेरे प्रबन्धन को नहीं समझते हैं क्योंकि उन्हें इन चीज़ों में कोई रुचि नहीं है, बल्कि केवल अपने स्वयं के भविष्य और मंज़िलों के बारे में परवाह करते हैं। इस बात की परवाह किए बिना कि मैं क्या कहता हूँ, लोग उस कार्य के प्रति उदासीन हैं जो मैं करता हूँ, इसके बजाय वे अनन्य रूप से अपनी भविष्य की मंज़िलों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं। चीज़ें इसी तरह से चलती रहें, तो मेरा कार्य कैसे फैलाया जा सकता है? मेरा सुसमाचार सारे संसार तक कैसे फैलाया जा सकता है? तुम लोगों को जान लेना चाहिए कि जब मेरा कार्य फैलाया जाता है, तो मैं तुम्हें तितर-बितर करूँगा, और तुम लोगों को उसी तरह मारूँगा ठीक जैसे यहोवा ने इस्राएल के प्रत्येक कबीले को मारा था। यह सब कुछ मेरे सुसमाचार को समस्त पृथ्वी पर फैलाने, और मेरे कार्य को अन्यजाति देशों तक फैलाने के लिए किया जाएगा, ताकि वयस्कों और बच्चों के द्वारा एक समान रूप से मेरे नाम को बढ़ाया जा सके और मेरा पवित्र नाम सभी कबीलों और देशों के लोगों के मुँह में बुलंद हो सकता है। इस अंतिम युग में, मैं अपने नाम को अन्यजातियों के बीच गौरवान्वित करवाऊँगा, और अपने कर्मों को अन्यजाति देशों के सामने दिखवाऊँगा जिससे वे मुझे मेरे कर्मों के कारण सर्वशक्तिमान कह सकते हैं, और इसे इतना बना सकते हैं कि मेरे वचन शीघ्र ही घटित हो जाएँ। मैं सभी लोगों को ज्ञात करवाऊँगा कि मैं केवल इस्राएलियों का ही परमेश्वर नहीं हूँ, बल्कि अन्यजातियों का भी हूँ, यहाँ तक कि उनका भी हूँ जिन्हें मैंने शाप दिया है। मैं सभी लोगों को यह देखने दूँगा कि मैं समस्त सृष्टि का परमेश्वर हूँ। यह मेरा सबसे बड़ा कार्य है, अंत के दिनों के लिए मेरी कार्य योजना का उद्देश्य है, और अंत के दिनों में पूरा किया जाने वाला एकमात्र कार्य है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्य को बचाने का कार्य भी है
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