परमेश्वर के दैनिक वचन : जीवन में प्रवेश | अंश 554
वह क्या मार्ग है जिसके माध्यम से परमेश्वर लोगों को पूर्ण करता है? कौन-कौन से पहलू उसमें शामिल हैं? क्या तू परमेश्वर के द्वारा पूर्ण होना...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
देशों में बड़ी अराजकता है, क्योंकि परमेश्वर की छड़ी ने पृथ्वी पर अपनी भूमिका निभानी शुरू कर दी है। परमेश्वर का कार्य पृथ्वी की स्थिति में देखा जा सकता है। जब परमेश्वर कहता है "पानी गरजेंगे, पहाड़ गिर जायेंगे, बड़ी-बड़ी नदियाँ विभाजित हो जायेंगी," तो यह पृथ्वी पर छड़ी का आरंभिक कार्य है, जिसके परिणामस्वरूप "पृथ्वी पर सारे घर-परिवार अलग-अलग बिखेर दिए जाएँगे, और पृथ्वी पर सारे राष्ट्र अलग-अलग कर दिए जाएँगे; पति और पत्नी के बीच पुनर्मिलन के वे दिन चले जाएँगे, माँ और बेटा दोबारा आपस में नहीं मिलेंगे, और न ही पिता और बेटी फिर कभी आपस में मिल पाएँगे। जो कुछ भी पृथ्वी पर पाया जाता है वह मेरे द्वारा नष्ट कर दिया जाएगा।" पृथ्वी पर परिवारों की सामान्य स्थिति ऐसी होगी। स्वाभाविक रूप से, संभवत: उन सभी की स्थिति ऐसी नहीं हो सकती है, किन्तु उनमें से अधिकांश की ऐसी ही स्थिति है। दूसरी ओर, यह भविष्य में इस वर्ग के लोगों द्वारा अनुभव की जाने वाली परिस्थितियों का उल्लेख करता है। यह भविष्यवाणी करता है कि, एक बार जब वे वचनों की ताड़ना से गुज़र चुके हों और अविश्वासियों को तबाही के अधीन किया जा चुका हो, तो पृथ्वी पर लोगों के बीच पारिवारिक संबंध अब और नहीं रहेंगे; वे सब सीनियों के लोग होंगे, और सभी परमेश्वर के राज्य में निष्ठावान होंगे। इस प्रकार, पति और पत्नी के बीच पुनर्मिलन के वे दिन चले जाएँगे, माँ और बेटा दोबारा आपस में नहीं मिलेंगे, और न ही पिता और बेटी फिर कभी आपस में मिल पाएँगे। और इसीलिए, धरती के लोगों के परिवारों को अलग-थलग कर दिया जाएगा, फाड़ कर टुकड़े-टुकड़े कर दिया जाएगा, और यह परमेश्वर द्वारा मनुष्य में किया जाने वाला अंतिम कार्य होगा। और क्योंकि परमेश्वर इस कार्य को पूरे विश्व में फैलाएगा, इसलिए वह लोगों के लिए "भावना" शब्द को स्पष्ट करने के लिए अवसर का लाभ उठाता है, इस प्रकार उन्हें यह देखने देता है कि परमेश्वर की इच्छा सभी लोगों के परिवारों को अलग-थलग करना है, और यह दिखाना है कि परमेश्वर मानवजाति के बीच सभी पारिवारिक विवादों को हल करने के लिए ताड़ना का उपयोग करता है। यदि ऐसा न हो, तो पृथ्वी पर परमेश्वर के कार्य के अंतिम हिस्से को समाप्त करने का कोई मार्ग नहीं होगा। परमेश्वर के वचनों का अंतिम भाग मानवजाति की सबसे बड़ी कमजोरी को प्रकट करता है—वे सभी भावनाओं में रहते हैं—और इसीलिए परमेश्वर उनमें से एक को भी नहीं टालता है, और संपूर्ण मानवजाति के हृदयों में छिपे रहस्यों को उजागर करता है। लोगों के लिए स्वयं को भावना से पृथक करना इतना कठिन क्यों है? क्या यह अंतरात्मा के मानकों से अधिक है? क्या अंतरात्मा परमेश्वर की इच्छा को पूरा कर सकती है? क्या भावना विपत्ति में लोगों की सहायता कर सकती है? परमेश्वर की नज़रों में, भावना उसका शत्रु है—क्या यह परमेश्वर के वचनों में स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है?
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, “संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों” के रहस्यों की व्याख्या, अध्याय 28
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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