प्रकरण चार : मसीह-विरोधियों के चरित्र और उनके स्वभाव सार का सारांश (भाग एक) खंड पाँच
ङ. ताकतवरों से चिपकना और कमजोरों को दबाना
मसीह-विरोधियों की मानवता में एक ऐसी चीज भी होती है जो घृणित और वीभत्स दोनों होती है—यानी वे ताकतवरों से चिपकते हैं और कमजोरों को दबाते हैं। अगर कलीसिया या दुनिया में कुछ मशहूर हस्तियाँ या शक्तिशाली या रुतबेदार लोग हैं तो चाहे वे कोई भी हों, मसीह-विरोधी उनके लिए अपने दिल में असीम ईर्ष्या और प्रशंसा रखते हैं, यहाँ तक कि वे उनकी चापलूसी भी करते हैं। जब वे ईसाई धर्म में विश्वास करते हैं तो वे दावा करते हैं कि कुछ राजनीतिक प्रमुख हैं जो विश्वासी हैं और जब वे अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य के इस चरण को स्वीकारते हैं तो वे दावा करते हैं कि प्रमुख संप्रदायों के कुछ पादरी भी इसे स्वीकार चुके हैं। जो कुछ भी वे करते हैं, उसे हमेशा एक प्रभावशाली शीर्षक देते हैं, वे हमेशा मशहूर हस्तियों का सम्मान और अनुकरण करते हैं और सिर्फ तभी संतुष्ट महसूस करते हैं जब वे कम से कम किसी मशहूर हस्ती या रुतबेदार व्यक्ति से चिपकने में कामयाब हो जाते हैं। जब रुतबेदार लोगों की बात आती है तो चाहे वे अच्छे हों या बुरे, मसीह-विरोधी बिना थके उनकी खुशामद, चापलूसी और ठकुरसुहाती करते हैं। यहाँ तक कि वे उन्हें चाय बनाकर पिलाने और उनका मल-मूत्र उठाने के लिए भी तैयार रहते हैं। दूसरी ओर, बिना रुतबे वाले लोग चाहे कितने भी सच्चे, ईमानदार और दयालु क्यों न हों, उनके साथ व्यवहार करते समय मसीह-विरोधी उन्हें जब भी संभव हो, धमकाते और रौंद देते हैं। वे अक्सर इस बात की डींग हाँकते हैं कि फलाँ व्यक्ति समाज में कितना बड़ा बिजनेस कार्यकारी है, फलाँ व्यक्ति का पिता कितना अमीर है, फलाँ व्यक्ति के पास कितना पैसा है और फलाँ व्यक्ति का परिवार या कंपनी कितनी बड़ी है और वे समाज में उनकी प्रमुखता पर जोर देते हैं। जहाँ तक कलीसिया में नकली अगुआओं और मसीह-विरोधियों की बात है तो चाहे वे कितने भी बुरे कर्म क्यों न करें, मसीह-विरोधी कभी उनकी रिपोर्ट नहीं करते, उन्हें उजागर नहीं करते या उनका भेद नहीं पहचानते। इसके बजाय, वे उनका घनिष्ठता से अनुगमन करते हैं और जो कुछ भी उनसे करने के लिए कहा जाता है, वही करते हैं। वे जिस भी स्तर के अगुआ का अनुगमन करते हैं, उसी के अनुयायी, प्यादे और गुलाम बन जाते हैं। शक्ति, प्रभाव, धन और रुतबे वाले लोगों के साथ व्यवहार करते समय वे असाधारण रूप से आज्ञाकारी, विनम्र और अनाड़ी दिखते हैं। वे अत्यंत आज्ञाकारी और विनम्र हो जाते हैं और उन लोगों की हर बात का सिर हिलाकर पालन करते हैं। लेकिन बिना रुतबे वाले आम लोगों से व्यवहार करते समय वे एक अलग ही शान बघारते हैं, लोगों पर हावी होने के लिए बोलते समय एक रोबदार तरीका अपनाते हैं, श्रेष्ठ बनना चाहते हैं, मानो वे अपराजेय, औरों से ज्यादा शक्तिशाली और ऊँचे हों, जिससे उनमें किसी भी समस्या, दोष या कमजोरी को पहचानना मुश्किल हो जाता है। यह किस तरह का चरित्र है? क्या इसके और कपटी, निर्दयी और शर्म से बेपरवाह होने के बीच कोई संबंध है? (बिल्कुल है।) ताकतवरों से चिपकना और कमजोरों को दबाना—क्या यह मसीह-विरोधियों की मानवता का कुरूप और बुरा पक्ष नहीं है? क्या तुम लोगों को लगता है कि ऐसी मानवता वाले लोग ईमानदार होते हैं? (नहीं।) क्या वे रुतबेदार और शक्तिशाली लोगों से जो कहते हैं, वह सच होता है? क्या वे कमजोरों से जो कहते हैं, वह सच होता है? (उसमें से कुछ भी सच नहीं होता।) इसलिए इस मद का आदतन झूठ बोलने से कुछ संबंध है। इस मद से आँकें तो, मसीह-विरोधियों का चरित्र बेहद घिनौना होता है और उनके दो बिल्कुल अलग चेहरे होते हैं। ऐसे व्यक्ति का एक उपनाम होता है—“गिरगिट।” वे लोगों के साथ कभी सत्य-सिद्धांतों, मानवता या इस आधार पर व्यवहार नहीं करते कि वे लोग परमेश्वर के घर में सत्य का अनुसरण कर रहे हैं या नहीं। इसके बजाय, वे लोगों के साथ सिर्फ उनके रुतबे और प्रभाव के आधार पर अलग-अलग तरह से व्यवहार करते हैं। रुतबे और योग्यताओं वाले लोगों के साथ व्यवहार करते समय वे उनकी खुशामद करने, उनकी चापलूसी करने और उनके करीब जाने की हर संभव कोशिश करते हैं। अगर वे इन लोगों द्वारा पीटे या डाँटे भी जाएँ तो भी वे बिना किसी शिकायत के इसे सह लेते हैं। यहाँ तक कि वे लगातार अपनी अनुपयोगिता भी स्वीकारते हैं और दास बन जाते हैं, हालाँकि वे अंदर से जो सोचते हैं वह उनके बाहरी व्यवहार से बिल्कुल अलग होता है। अगर कोई रुतबे और प्रतिष्ठा वाला व्यक्ति बोलता है, भले ही वह शैतान की भ्रांति और पाखंड ही हो जो सत्य से पूरी तरह से असंबंधित हो तो वे इसे सुनेंगे, सहमति में सिर हिलाएँगे और ऊपरी तौर पर इसे स्वीकारेंगे। दूसरी ओर, अगर किसी में योग्यता या रुतबे की कमी होती है तो चाहे उसके शब्द कितने भी सही क्यों न हों, मसीह-विरोधी उसे अनदेखा कर नीची निगाह से देखेंगे। भले ही वह जो कहता है वह सिद्धांतों और सत्य के अनुरूप हो, वे इसे नहीं सुनेंगे, बल्कि उसका खंडन करेंगे, मजाक उड़ाएँगे और उपहास करेंगे। यह मसीह-विरोधियों के चरित्र में पाया जाने वाला एक और लक्षण है। आचरण करने और दुनिया से व्यवहार करने के उनके तरीकों और सिद्धांतों से आँकें तो, इन व्यक्तियों को निर्णायक ढंग से स्पष्ट छद्म-विश्वासियों के रूप में निरूपित किया जा सकता है। उनके चरित्र की अभिव्यक्तियाँ नीच, घिनौनी और अधम होती हैं।
ताकतवरों से चिपकना और कमजोरों को दबाना मसीह-विरोधियों जैसे लोगों के लिए सामाजिक मेलजोल का एक सामान्य तरीका है। वे अविश्वासियों के साथ जीवंत बातचीत में शामिल होते हैं और उनके साथ घुलमिल जाते हैं, लेकिन जब वे मुड़कर भाई-बहनों को देखते हैं तो उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं होता न कोई समान आधार होता है। ये मसीह-विरोधी हैं। परमेश्वर में आस्था, कर्तव्य-पालन, जीवन-प्रवेश या स्वभाव में बदलाव से संबंधित मामलों पर चर्चा करते समय उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं होता और इसमें उनकी कोई दिलचस्पी नहीं होती। लेकिन अविश्वासियों, खासकर धनी और प्रभावशाली लोगों, राजनीतिक हस्तियों, सामाजिक अभिजात वर्ग, संगीत और फिल्म की मशहूर हस्तियों, सामाजिक रुझानों और भोजन और मनोरंजन से संबंधित मामलों के बारे में बात करते समय वे बेहद बातूनी हो जाते हैं और उन्हें रोका नहीं जा सकता। ऐसा लगता है कि वे ऐसे जीवन और सामाजिक रुतबे के लिए खास तौर से लालायित रहते हैं। हालाँकि ऐसे व्यक्ति परमेश्वर में विश्वास करते हैं, लेकिन यह सिर्फ उनकी अपनी कठिनाइयों और छिपे हुए इरादों और लक्ष्यों के कारण होता है। वे सिर्फ आशीषों के लिए परमेश्वर में विश्वास करते हैं और परमेश्वर में विश्वास करने के बाद भी वे ऐसी चीजें नहीं छोड़ सकते। इसलिए, भोजन और मनोरंजन के मामलों पर चर्चा करते समय वे उत्साही हो जाते हैं। लेकिन भाई-बहनों से बात करते समय अलग ही कहानी होती है। अपने दिल और आत्मा की गहराइयों से वे उन लोगों को नीची निगाह से देखते हैं जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं, सत्य का अनुसरण करते हैं और ईमानदार और सच्चे होते हैं। वे ऐसे व्यक्तियों के साथ भेदभाव करते हैं और उनका तिरस्कार करते हैं। मसीह-विरोधी जब कलीसिया में अगुआओं को देखते हैं तो सोचते हैं, “ये अगुआओं जैसे नहीं दिखते; ये अधिकारियों जैसे बिल्कुल नहीं दिखते। सांसारिक अधिकारियों की तुलना में ये बहुत हीन हैं, इनके आचरण और चाल-ढाल में काफी कमी है!” अगर उन्हें पता चलता है कि कुछ अगुआओं ने उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त नहीं की है तो वे अपने दिल में उनके साथ भेदभाव करते हैं। तुम लोगों को क्या लगता है कि जब वे मुझे देखते हैं तो वे कैसा महसूस करते हैं? एक नजर देखने पर वे सोचते हैं, “मसीह, देहधारी परमेश्वर, उच्च शिक्षा से रहित एक नाचीज है, जो उतना लंबा नहीं है, जिसका रूप आकर्षक नहीं है, जिसकी चाल-ढाल में कमी है और जिसका पहनावा सामान्य है। हर कोई कहता है कि उसके पास सत्य है; यह एकमात्र ऐसी चीज है जो ध्यान देने लायक है, उसकी और कोई चीज प्रभावशाली नहीं है। देखो, समाज के वे शक्तिशाली लोग क्या पहनते हैं! तुम्हारे कपड़े और जूते किस ब्रांड के हैं? तुम्हारा हेयरस्टाइल कैसा है? क्या तुमने किसी मशहूर सैलून में बाल कटवाए हैं? एक बार बाल कटवाने में कितना खर्चा आया?” मैं कहता हूँ, “मैं बाल कटवाने पर एक पैसा भी खर्च नहीं करता; मैं घर पर खुद ही बाल काट लेता हूँ।” वे कहते हैं, “क्या तुम सौंदर्य-उपचार के लिए जाते हो? क्या तुम होटलों में ठहरते हो? कितने सितारों वाले होटलों में ठहरते हो? क्या तुम कभी लग्जरी क्रूज पर गए हो?” मैं कहता हूँ, “मैं इन चीजों के बारे में नहीं जानता।” वे कहते हैं, “तो तुम वाकई बहुत अनभिज्ञ हो। अपनी कुलीन पहचान और रुतबे के बावजूद तुम्हें दुनिया की इन शानदार और उच्च-स्तरीय चीजों की जानकारी या समझ क्यों नहीं है? जैसी तुम्हारी परिस्थितियाँ हैं, तुम्हें खुद ही थोड़ा अनुभव करना चाहिए। कम से कम, तुम्हें एक उच्च-स्तरीय ब्यूटी-सैलून में जाना चाहिए, पाँच-सितारा होटल में ठहरना चाहिए और एक लग्जरी क्रूज पर जाना चाहिए। कम से कम, हवाई यात्रा करते हुए तुम्हें प्रथम श्रेणी में बैठना चाहिए।” जब वे मुझे देखते हैं तो मुझे तुच्छ समझते हैं, लेकिन उन्हें एक बात स्वीकारनी होगी और वह यह कि, “सभाओं के दौरान तुम्हारे द्वारा कही गई कोई बात मैंने पहले कभी नहीं सुनी है : मुझे तुम्हारी बातें सुननी चाहिए।” लेकिन सभाओं के बाद वे मुझे पहचानते ही नहीं। ठीक भेड़िये की तरह : जब तुम उसे खाना खिला देते हो तो वह पलटकर तुम्हें काट लेता है। यही है भेड़िये की प्रकृति। जब मसीह-विरोधी साधारण भाई-बहनों को देखते हैं जिनके पास पैसा या प्रभाव नहीं होता, जो सिर्फ सत्य से प्रेम करते हैं और उसका अनुसरण करने में सक्षम हैं और जो स्वेच्छा से अपने कर्तव्य निभाते हैं तो वे उनका तिरस्कार कर उन्हें अलग कर देते हैं। जब वे मसीह को देखते हैं और उन्हें एक साधारण व्यक्ति दिखाई पड़ता है, जो हर पहलू में, आकृति, रूप और चाल-ढाल में, एक सीधा-सादा और साधारण व्यक्ति है तो क्या वे तुरंत अपना आंतरिक स्वभाव और दृष्टिकोण बदल सकते हैं? (नहीं, वे नहीं बदल सकते।) चीजों के प्रति उनका रवैया उनके चरित्र पर आधारित होता है। सामान्य मानवता के अभाव में मसीह के प्रति उनका रवैया निस्संदेह एक साधारण व्यक्ति के प्रति उनके रवैये जैसा ही होता है। उसमें जरा-सा भी सम्मान नहीं होता; यह उनके सार और चरित्र से निर्धारित होता है। मसीह-विरोधी की मानवता के इस पहलू की अभिव्यक्ति अन्य पहलुओं की तरह ही घृणित और वीभत्स है।
हमने अभी-अभी मसीह-विरोधी के चरित्र के बारे में जिन विभिन्न लक्षणों पर संगति की, वे अलग-अलग रूप से उसके चरित्र की अच्छाई या बुराई, श्रेष्ठता या हीनता प्रकट कर सकते हैं। आदतन झूठ बोलने वाले व्यक्ति का चरित्र श्रेष्ठ होता है या हीन? (हीन।) स्वार्थी और नीच व्यक्ति की मानवता अच्छी होती है या बुरी? (बुरी।) शर्म से बेपरवाह व्यक्ति की मानवता अच्छी होती है या बुरी? (बुरी।) कपटी और निर्दयी व्यक्ति का चरित्र श्रेष्ठ होता है या हीन? (हीन।) ऐसे व्यक्ति का चरित्र कैसा होता है, जो सिर्फ ताकतवरों से चिपकना और कमजोरों को दबाना जानता है, जो सिर्फ ऐसे सिद्धांतों का पालन करता है? (घटिया।) ऐसे व्यक्ति चरम सीमा तक घटिया होते हैं, उनमें न सिर्फ सामान्य मानवता का अभाव होता है, बल्कि सटीक रूप से कहा जा सकता है कि वे मनुष्य नहीं हैं—वे मैल हैं, दानव हैं। जिस किसी में भी जरा सा भी जमीर और विवेक नहीं होता, वह दानव होता है, मनुष्य नहीं।
च. सामान्य लोगों से ज्यादा भौतिक चीजों का अभिलाषी होना
मसीह-विरोधियों की मानवता में एक और अभिव्यक्ति होती है : वे सामान्य लोगों से ज्यादा भौतिक चीजों के अभिलाषी होते हैं। यानी भौतिक चीजों के लिए उनकी इच्छा और माँग विशेष रूप से बड़ी होती है—वह असीमित होती है। वे एक असाधारण जीवनशैली की आकांक्षाओं से भरे होते हैं और अतृप्त रूप से लालची होते हैं। कुछ लोग कह सकते हैं : “अधिकांश मसीह-विरोधियों में यह अभिव्यक्ति नहीं होती।” इसके न होने का मतलब यह नहीं है कि यह उनकी मानवता में अनुपस्थित है। जब ऐसे लोग रुतबा प्राप्त कर लेते हैं तो वे क्या खाते हैं, कैसे कपड़े पहनते हैं और कैसे दिखते हैं, इसके लिए उनके क्या सिद्धांत होते हैं? जैसे ही वे रुतबा प्राप्त करते हैं, उन्हें अपनी मर्जी से काम करना होता है, उन्हें अवसर मिलते हैं, कुछ स्थितियाँ मिलती हैं और उनका जीवन अलग होता है। वे अपने खाने के बारे में तुनकमिजाज हो जाते हैं, आडंबर और विलासिता पर बल देते हैं। वे ब्रांडेड चीजें पहनने और इस्तेमाल करने पर जोर देते हैं और वे जिस घर में रहते हैं और जो कार चलाते हैं, वह उच्च-स्तरीय और शानदार होनी चाहिए। यहाँ तक कि जब वे कोई यूटिलिटी वाहन खरीदते हैं तो उसके अंदर भी शानदार सामान लगा होना चाहिए। कुछ लोग पूछ सकते हैं : “अगर उनके पास पैसे नहीं होते तो वे इन चीजों पर इतना जोर क्यों देते हैं?” सिर्फ इसलिए कि उनके पास पैसे नहीं हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि वे ऐसी चीजों के पीछे नहीं भागते या यह इच्छा उनकी मानवता में अनुपस्थित होती है। इसलिए, जब मसीह-विरोधी परमेश्वर के घर में चढ़ावों पर पकड़ बना लेते हैं तो वे उन्हें लापरवाही से उड़ाते हैं। वे हर चीज खरीदना और उसका आनंद लेना चाहते हैं, वे ऐसा बेशर्मी की हद तक और इस हद तक करते हैं कि इसे नियंत्रित करना मुश्किल होता है। उन्हें सोने की परत चढ़ी प्यालियों में परोसी गई उच्च गुणवत्ता वाली चाय पीनी होती है, उनका भोजन शानदार दावत होना चाहिए, वे विशेष ग्रेड की जिनसेंग का सेवन करने पर जोर देते हैं और सिर्फ विश्वस्तरीय ब्रांडों के कंप्यूटरों और फोनों का उपयोग करते हैं जो हमेशा नवीनतम मॉडलों के होते हैं। वे हजारों युआन के चश्मे पहनते हैं, हेयरस्टाइल पर सैकड़ों युआन खर्च करते हैं और मालिश और सॉना सत्रों के लिए एक हजार युआन या उससे भी ज्यादा का भुगतान करते हैं। संक्षेप में, वे हर चीज के सर्वश्रेष्ठ और ब्रांडेड होने की माँग करते हैं और उसी चीज का आनंद लेना चाहते हैं जिसका मशहूर हस्तियाँ और शक्तिशाली लोग आनंद लेते हैं। जब मसीह-विरोधी रुतबा प्राप्त कर लेते हैं तो ये तमाम बदसूरत चीजें जाहिर हो जाती हैं। सभाओं के दौरान अगर सिर्फ तीन से पाँच लोग उनके उपदेश सुनते हैं तो वे इसे अपर्याप्त पाते हैं और तीन सौ से पाँच सौ लोगों के होने पर जोर देते हैं। जब दूसरे कहते हैं कि बाहरी परिस्थितियाँ प्रतिकूल हैं, इसलिए तीन से पाँच लोगों की सभा भी काफी अच्छी है तो वे जवाब देते हैं : “यह नहीं चलेगा—मेरा उपदेश सुनने वाले इतने कम लोग क्यों हैं? यह इस लायक नहीं है कि मैं इसके लिए समय दूँ। हमें कलीसिया के लिए एक बड़ा भवन खरीदना चाहिए, जिसमें ज्यादा सम्मानजनक उपदेश के लिए हजारों लोग आ सकें।” क्या वे मौत को बुलावा नहीं दे रहे? यह वैसी ही चीज है, जैसी मसीह-विरोधी करते हैं। क्या वे शर्म से बेपरवाह भी नहीं हैं? उनमें आलीशान जीवन और भौतिक चीजों के लिए एक बेहद अनियंत्रित इच्छा और रुचि होती है, जो मसीह-विरोधियों के चरित्र का एक और लक्षण है। जैसे ही कोई स्वादिष्ट भोजन, लग्जरी कारों, ब्रांडेड कपड़ों और उच्च-स्तरीय और महँगी वस्तुओं का उल्लेख करता है, उनकी आँखें चमक उठती हैं और लालच से हरी हो जाती हैं और उनकी इच्छा सतह पर आ जाती है। यह इच्छा कैसे पैदा होती है? यह स्पष्ट रूप से उनकी राक्षसी प्रकृति का प्रकाशन है। कुछ मसीह-विरोधियों के पास पैसे कम हो सकते हैं और जब वे किसी को महँगे गहने या दो-तीन कैरेट की हीरे की अँगूठी पहने देखते हैं तो उनकी आँखें चमक उठती हैं और वे सोचते हैं, “अगर मैं परमेश्वर में विश्वास न करता तो पाँच कैरेट की अँगूठी पहन सकता था।” वे इस तथ्य पर विचार करते हैं कि उनके पास एक कैरेट की भी अँगूठी नहीं है और वे परेशान हो जाते हैं और सोचने लगते हैं कि परमेश्वर में विश्वास करना किसी लायक नहीं है। फिर भी, आगे विचार करने पर वे सोचते हैं, “परमेश्वर में विश्वास रखने के कारण मुझे भविष्य में बड़े आशीष प्राप्त होंगे। मेरे पास पाँच सौ कैरेट का हीरा हो सकता है और मैं उसे अपने सिर पर पहन सकता हूँ।” क्या उनमें इच्छाएँ नहीं हैं? टीवी पर धनी व्यक्तियों को डिजाइनर कपड़े पहने और समुद्र में आलीशान क्रूज जहाजों पर देख उन्हें लगता है कि यह बेहद आनंदमय, रोमांटिक, शानदार और ईर्ष्या योग्य है। वे इस पर लार टपकाते हुए कहते हैं, “मैं कब उस तरह का व्यक्ति, लोगों के बीच असाधारण व्यक्ति बन सकता हूँ? मैं कब ऐसी जिंदगी का आनंद लूँगा?” वे इसे तब तक बार-बार देखते हैं, जब तक कि उन्हें नहीं लगता कि परमेश्वर में विश्वास करना वास्तव में नीरस है। लेकिन फिर वे दोबारा चिंतन करते हुए सोचते हैं, “मैं इस तरह नहीं सोच सकता। मैं परमेश्वर में विश्वास क्यों करता हूँ? ‘सबसे महान इंसान बनने के लिए व्यक्ति को सबसे बड़ी कठिनाइयाँ सहनी होंगी।’ भविष्य में मेरा जीवन उनसे बहुत बेहतर होगा। वे एक आलीशान क्रूज पर जाते हैं, लेकिन मैं एक आलीशान विमान या आलीशान उड़न-तश्तरी पर उड़ूँगा—मैं चाँद पर जाऊँगा!” क्या ये विचार थोड़े भी समझदारी भरे हैं? क्या ये सामान्य मानवता के अनुरूप हैं? (नहीं, ये सामान्य मानवता के अनुरूप नहीं हैं।) यह मसीह-विरोधियों की मानवता का एक और तत्त्व है—भौतिक चीजों और एक शानदार जीवन-शैली के लिए एक बेहद अनियंत्रित अभिलाषा। जब वे इन्हें प्राप्त कर लेते हैं तो वे एक लोलुप नजर और प्रकृति के साथ अतृप्त रूप से लालची हो जाते हैं और हमेशा के लिए ये चीजें पाना चाहते हैं। मसीह-विरोधियों की मानवता में शक्तिशाली लोगों से ईर्ष्या करना भर शामिल नहीं है; वे भौतिक चीजें और उच्च गुणवत्ता वाला जीवन भी चाहते हैं। सामान्य मानवता में जीवन और भौतिक चीजों के लिए जरूरतों की एक उचित सीमा होती है : उनकी दैनिक जरूरतें, कार्य और जीवन-परिवेशों की जरूरतें और साथ ही उनकी शारीरिक जरूरतें भी होती हैं। इतना ही काफी है कि ये जरूरतें पूरी हो जाएँ और अपनी क्षमता और आर्थिक स्थितियों के आधार पर उन्हें नियंत्रित करना अपेक्षाकृत सामान्य माना जाता है। लेकिन मसीह-विरोधियों की भौतिक चीजों की जरूरत और उनमें उनकी लिप्तता असामान्य और अतृप्त होने वाली होती है। कुछ मसीह-विरोधी खास तौर पर उच्च गुणवत्ता वाले जीवन के पीछे दौड़ते हैं—जब वे ऐसे मेजबान परिवार में रहते हैं जहाँ सिर्फ सादा खाना होता है तो वे थोड़ा चिढ़ जाते हैं। इसके अलावा, अगर इस परिवार के लोग सत्य का अनुसरण कर रहे होते हैं, काफी ईमानदार होते हैं और उनकी चापलूसी नहीं करते, लल्लो-चप्पो नहीं करते या वे जो सुनना चाहते हैं वह नहीं कहते तो वे और भी ज्यादा चिढ़ जाते हैं और सोचते हैं, “मुझे अच्छा खाना और बड़े घर में रहना कहाँ मिल सकता है? किसके पास अच्छी जीवन-स्थितियाँ हैं? किसके पास कार है जिसमें वह मुझे विभिन्न स्थानों पर ले जा सकता हो और वहाँ से मुझे ला सकता हो, ताकि मुझे पैदल न चलना पड़े?” वे हमेशा ऐसे ही मामलों की चिंता करते रहते हैं। क्या तुम लोगों के आसपास ऐसे लोग हैं? क्या तुम लोग ऐसे व्यक्ति हो? (ये चीजें हमारी मानवता में भी मौजूद हैं।) तो क्या तुम लोग उन्हें नियंत्रित रख सकते हो? सुख-सुविधाओं का आनंद लेना अतृप्त लालच के समान नहीं है; इसे संयमित रखना चाहिए और अपने कर्तव्य-प्रदर्शन के आड़े नहीं आने देना चाहिए। सामान्य भ्रष्ट लोगों में यह मानवता होती है। लेकिन मसीह-विरोधी संयम का अभ्यास नहीं करते; वे अतृप्त और आदतन लालची होते हैं। इस अभिव्यक्ति के बारे में क्या तुम लोगों के पास कुछ और जोड़ने के लिए है? (परमेश्वर, मैंने पहले एक मसीह-विरोधी देखी है। उस समय एक बहन ने अपने लिए दस से ज्यादा डाउन-जैकेटें खरीदी थीं जो सभी प्रसिद्ध ब्रांडों की थीं और यह मसीह-विरोधी उन्हें एक-एक करके पहनती थी, जब भी बाहर जाती थी एक नई जैकेट पहनती थी। बाद में वह एक अगुआ बन गई और उसने परमेश्वर के चढ़ावों का उपयोग एक बड़ी कार खरीदने के लिए किया। किसी ने विशेष रूप से उसकी मेजबानी करने के लिए एक अच्छा घर तक खरीद लिया और जब वह खरीदारी करने जाती तो यह मेजबान बहन उसके पीछे-पीछे जाती। अगर उसे कोई कपड़ा पसंद आता तो वह बस उसकी ओर इशारा कर देती और उसकी मेजबान जल्दी ही उसे खरीदकर दे देती। घर लौटते हुए वह मेजबान परिवार को पहले ही कॉल करके कह देती कि वह मोमो खाना चाहती है। मोमो उबालने के समय का हिसाब ठीक से रखना होता था—न तो बहुत जल्दी जिससे वे ठंडे न हो जाएँ और न बहुत देर से जिससे उसे घर पहुँचने पर भूखे इंतजार न करना पड़े। वह एक विधवा महारानी की तरह थी; उसकी जीवनशैली बेहद विलासितापूर्ण थी। बाद में इस मसीह-विरोधी को निष्कासित कर दिया गया।) देखो, ये लोग कितने अज्ञानी और मूर्ख थे, एक मसीह-विरोधी के लिए घर और बड़ी कार खरीद रहे थे! मसीह-विरोधी मानते हैं कि लोग इस दुनिया में चीजों का आनंद लेने के लिए आते हैं, कि अगर कोई इन चीजों का आनंद नहीं लेता है तो उसका जीवन व्यर्थ है। यह उनका सिद्धांत और मत है। क्या यह सिद्धांत सही है? यह विशुद्ध रूप से अविश्वासियों, क्रूर पशुओं और आत्माविहीन मृत लोगों का दृष्टिकोण है। जो लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं और फिर भी ऐसे दृष्टिकोण रखते हैं, वे निरे छद्म-विश्वासी और गैर-विश्वासी हैं। जब ऐसे लोग रुतबा प्राप्त कर लेते हैं तो वे पूरी तरह से मसीह-विरोधी बन जाते हैं और बिना रुतबे के वे बुरे लोग होते हैं।
आदतन झूठे होना, कपट और निर्दयता, मर्यादा की भावना से रहित और शर्म से बेपरवाह होना, स्वार्थी और नीच होना, ताकतवरों से चिपकना और कमजोरों को दबाना और सामान्य लोगों से ज्यादा भौतिक चीजों का अभिलाषी होना—मसीह-विरोधियों के चरित्र के ये लक्षण विशिष्ट, अत्यधिक प्रतिनिधिक और स्पष्ट हैं। हालाँकि इनमें से कुछ अभिव्यक्तियाँ कुछ हद तक सामान्य लोगों में दिखाई दे सकती हैं, लेकिन उनकी अभिव्यक्तियाँ सिर्फ एक भ्रष्ट स्वभाव या असामान्य मानवता की अभिव्यक्तियाँ या मानवता की कमी होती हैं, जो शैतान की भ्रष्टता से उत्पन्न होती हैं। परमेश्वर के वचन पढ़कर ये लोग जमीर की जागरूकता और इन चीजों को छोड़ने और इनके खिलाफ विद्रोह कर पश्चात्ताप करने की क्षमता विकसित कर लेते हैं। ये लक्षण उनमें प्रभावी भूमिका नहीं निभाते और ये सत्य के उनके अनुसरण या उनके कर्तव्यों के प्रदर्शन को प्रभावित नहीं करेंगे। सिर्फ मसीह-विरोधी कितने ही उपदेश सुनकर भी सत्य स्वीकारने से इनकार करते हैं। उनकी मानवता में निहित गुण और लक्षण नहीं बदलेंगे और यही कारण है कि ऐसे लोगों की परमेश्वर के घर में निंदा की जाती है और उन्हें कभी बचाया नहीं जा सकता। उन्हें क्यों नहीं बचाया जा सकता? ऐसे चरित्र वाले लोगों को इसलिए नहीं बचाया जा सकता कि वे सत्य स्वीकारने से इनकार करते हैं और इसलिए भी कि वे सत्य, परमेश्वर और सभी सकारात्मक चीजों के प्रति शत्रुता रखते हैं। उनमें उद्धार के लिए अपेक्षित स्थितियाँ और मानवता नहीं होती, इसलिए इन व्यक्तियों का हटाया जाना और नरक में डाला जाना नियत है।
12 दिसंबर 2020
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?