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सूचीपत्र

एक ईमानदार व्यक्ति क्या होता है? परमेश्वर ईमानदार लोगों को क्यों पसंद करता है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

तुम लोगों को जानना चाहिए कि परमेश्वर एक ईमानदार मनुष्य को पसंद करता है। परमेश्वर के पास निष्ठा का सार है, और इसलिए उसके वचन पर हमेशा भरोसा किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, उसका कार्य दोषरहित और निर्विवाद है। यही कारण है कि परमेश्वर उन लोगों को पसंद करता है जो उसके साथ पूरी तरह से ईमानदार हैं। ईमानदारी का अर्थ है अपना हृदय परमेश्वर को अर्पित करना; किसी भी चीज़ में उससे ढकोसला नहीं करना; सभी चीजों में उसके प्रति निष्कपट होना, सत्य को कभी भी नहीं छुपाना; कभी भी ऐसा कार्य नहीं करना जो उन लोगों को धोखा देता हो जो ऊँचे हैं और उन लोगों को भ्रम में डालता हो जो नीचे हैं; और कभी भी ऐसा काम नहीं करना जो केवल परमेश्वर की चापलूसी करने के लिए किया जाता है। संक्षेप में, ईमानदार होने का अर्थ है अपने कार्यों और वचनों में अशुद्धता से परहेज करना, और न तो परमेश्वर को और न ही मनुष्य को धोखा देना। ...कुछ लोग परमेश्वर की उपस्थिति में नियम-निष्ठ और उचित शैली में व्यवहार करते हैं और विशेष रूप से "शिष्ट" व्यवहार करते हैं, मगर पवित्रात्मा की उपस्थिति में वे अवज्ञाकारी हो जाते हैं और सभी संयम खो देते हैं। क्या तुम लोग ऐसे मनुष्य की गिनती ईमानदार लोगों की श्रेणी में करोगे? यदि तुम एक पाखंडी हो और ऐसे व्यक्ति हो जो लोगों से घुलने-मिलने में दक्ष है, तो मैं कहता हूँ कि तुम निश्चित रूप से ऐसे व्यक्ति हो जो परमेश्वर को तुच्छ समझता है। यदि तुम्हारे वचन बहानों और अपने महत्वहीन तर्कों से भरे हुए हैं, तो मैं कहता हूँ कि तुम ऐसे व्यक्ति हो जो सत्य का अभ्यास करने का अत्यधिक अनिच्छुक है। यदि तुममें ऐसे बहुत से आत्मविश्वास हैं जिन्हें साझा करने के लिए तुम अनिच्छुक हो, और यदि तुम अपने रहस्यों को—कहने का अर्थ है, अपनी कठिनाइयों को—दूसरों के सामने प्रकट करने के अत्यधिक अनिच्छुक हो ताकि प्रकाश का मार्ग खोजा जा सके, तो मैं कहता हूँ कि तुम ऐसे व्यक्ति हो जिसे आसानी से उद्धार प्राप्त नहीं होगा और जो आसानी से अंधकार से नहीं निकलेगा। यदि सत्य का मार्ग खोजने से तुम लोगों को प्रसन्नता मिलती है, तो तुम उसके समान हो जो सदैव प्रकाश में जीवन व्यतीत करता है। यदि तुम परमेश्वर के घर में सेवा करने वाला और काम करने वाला बन कर प्रसन्न हो, गुमनामी में कर्मठतापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण के साथ काम करते हो, हमेशा अर्पित करते हो और कभी भी लेते नहीं हो, तो मैं कहता हूँ कि तुम एक वफादार संत हो, क्योंकि तुम किसी प्रतिफल की खोज नहीं करते हो और तुम मात्र एक ईमानदार मनुष्य बने रहते हो। यदि तुम निष्कपट बनने के इच्छुक हो, यदि तुम अपना सर्वस्व खर्च करने के इच्छुक हो, यदि तुम परमेश्वर के लिए अपना जीवन बलिदान करने और उसका गवाह बनने में समर्थ हो, यदि तुम इस स्तर तक ईमानदार हो जहाँ तुम केवल परमेश्वर को प्रसन्न करना जानते हो, और अपने बारे में विचार नहीं करते हो या अपने लिए कुछ नहीं लेते हो, तो मैं कहता हूँ कि तुम ऐसे लोगों में से हो जो प्रकाश में पोषित हैं और सदा के लिए राज्य में रहेंगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "तीन चेतावनियाँ" से उद्धृत

सामान्य लोगों के व्यवहारों में कोई कुटिलता या धोखेबाज़ी नहीं होती है, लोगों का एक-दूसरे के साथ एक सामान्य संबंध होता है, वे अकेले नहीं खड़े होते हैं, और उनका जीवन न तो मामूली और न ही पतनोन्मुख होता है। इसलिए भी, परमेश्वर सभी के बीच ऊँचा है, उसके वचन मनुष्यों के बीच व्याप्त हैं, लोग एक-दूसरे के साथ शांति से और परमेश्वर की देखभाल और संरक्षण में रहते हैं, पृथ्वी, शैतान के हस्तक्षेप के बिना, सद्भाव से भरी है, और परमेश्वर की महिमा मनुष्यों के बीच अत्यंत महत्व रखती है। ऐसे लोग स्वर्गदूतों की तरह हैं: शुद्ध, जोशपूर्ण, परमेश्वर के बारे में कभी भी शिकायत नहीं करने वाले, और पृथ्वी पर पूरी तरह से परमेश्वर की महिमा के लिए अपने सभी प्रयासों को समर्पित करने वाले।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचनों के रहस्य की व्याख्या के "अध्याय 16" से उद्धृत

मैं उन लोगों की बहुत अधिक सराहना करता हूँ जो दूसरों के बारे में संदेह को आश्रय नहीं देते हैं और उन्हें भी बहुत पसंद करता हूँ जो सहजता से सत्य को स्वीकार करते हैं; इन दो तरह के मनुष्यों के लिए मैं बहुत अधिक परवाह दिखाता हूँ, क्योंकि मेरी दृष्टि में वे ईमानदार मनुष्य हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें" से उद्धृत

मेरे राज्य को उन लोगों की ज़रुरत है जो ईमानदार हैं, पाखंडी और धोखेबाज़ नहीं हैं। क्या सच्चे और ईमानदार लोग दुनिया में अलोकप्रिय नहीं हैं? मैं ठीक विपरीत हूँ। ईमानदार लोगों का मेरे पास आना स्वीकार्य है; इस तरह के व्यक्ति से मुझे प्रसन्नता होती है, मुझे इस तरह के व्यक्ति की ज़रुरत भी है। ठीक यही तो मेरी धार्मिकता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में आरम्भ में मसीह के कथन के "अध्याय 33" से उद्धृत

यह कि परमेश्वर लोगों से ईमानदार बनने का आग्रह करता है यह साबित करता है कि वो वाकई उन लोगों से घृणा करता है जो बेईमान हैं, परमेश्वर बेईमान लोगों को पसंद नहीं करता, वो कपटी लोगों को पसंद नहीं करता इस तथ्य का अर्थ है कि वो उनके कार्यों, स्वभाव, और यहाँ तक कि उनके प्रयोजनों से भी घृणा करता है; अर्थात, परमेश्वर उनके कार्य करने के तरीके को पसंद नहीं करता। और इसलिए, अगर हमें परमेश्वर को प्रसन्न करना है, तो हमें सबसे पहले अपने कार्यों और अस्तित्व का ढंग बदलना होगा। इससे पहले, हमने लोगों के बीच रहने के लिए झूठ, दिखावे, और बेईमानी पर भरोसा किया। यह हमारी पूंजी थी, और अस्तित्व संबंधी आधार, जीवन, बुनियाद थी जिसके अनुसार हम जीवन जीते थे। और परमेश्वर इन सबसे घृणा करता था। संसार के अविश्वासियों में यदि तू चालाकी या बेईमानी करना नहीं जानता तो तेरे लिए दृढ़ रहना कठिन हो सकता है। एक बेहतर जीवन पाने के लिए, तू केवल झूठ बोल पाएगा, धोखाधड़ी कर पाएगा, स्वयं को बचाने और छिपाने के लिए कपटी और धूर्त तरीकों का उपयोग करने में सक्षम होगा। परमेश्वर के घर में, ठीक इसका उल्टा होता है: तू जितना अधिक बेईमान होगा, उतना ही अधिक तू दिखावा करने और स्वयं को आकर्षक बनाने के लिए परिष्कृत हेरफेर का उपयोग करेगा, तब तू दृढ़ रहने में उतना ही असमर्थ होगा, परमेश्वर ऐसे लोगों को और अधिक खारिज करता और उनसे नफ़रत करता है। परमेश्वर ने पहले से तय किया है कि स्वर्ग के राज्य में केवल ईमानदार व्यक्ति ही भूमिका निभाएंगे। अगर तू ईमानदार नहीं है और अगर, तेरे जीवन में, तेरा व्यवहार ईमानदार बनने की दिशा में नहीं है और तू अपना वास्तविक चेहरा उजागर नहीं करता है, तब तुझे परमेश्वर के कार्य को प्राप्त करने या परमेश्वर की प्रशंसा हासिल करने का मौका कभी भी नहीं मिलेगा।

— "मसीह की बातचीतों के अभिलेख" में "एक ईमानदार व्यक्ति होने का सबसे बुनियादी अभ्यास" से उद्धृत

संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरण:

एक ईमानदार व्यक्ति होने का वास्तव में क्या अर्थ है? सबसे पहले, हम निश्चित रूप से यह कह सकते हैं कि एक ईमानदार व्यक्ति में अंतःकरण और समझ होती है, ऐसे लोग अपने हृदय में परमेश्वर का उत्कर्ष करते हैं, और वे परमेश्वर के प्यार का ऋण चुकाने में सक्षम हैं। दूसरा, एक ईमानदार व्यक्ति व्यावहारिक और यथार्थवादी तरीके से बोलता है। वह तथ्यों को विकृत नहीं करता है, वह निष्पक्ष रूप से बोलता है, और वह लोगों के साथ निष्पक्षता से व्यवहार करता है। ऐसा मनुष्य एक ईमानदार व्यक्ति है। तीसरा, एक ईमानदार व्यक्ति परमेश्वर का सम्मान करता है, वह सत्य का अभ्यास करता है और परमेश्वर का आज्ञापालन करता है। ऐसे व्यक्ति अपने हृदय में परमेश्वर का सम्मान करते हैं और वे सच्चाई का अभ्यास करने और परमेश्वर का आज्ञापालन करने में सक्षम होते हैं। इस तरह का व्यक्ति एक ईमानदार व्यक्ति है। चौथा, एक ईमानदार व्यक्ति निष्ठापूर्वक अपने कर्तव्यों को करता है। वह जो कुछ भी करता है उसमें वह परमेश्वर के प्रति वफादार होता हैं। पाँचवाँ, एक ईमानदार व्यक्ति अपने हृदय में परमेश्वर से प्रेम करता है। वह सभी चीजों में परमेश्वर की इच्छा पर विचार करने में सक्षम होता है। छठा, एक ईमानदार व्यक्ति परमेश्वर के वचन के अनुसार जीवन जीता है। वह वास्तव में परमेश्वर की आराधना करने में सक्षम होता है। कोई भी व्यक्ति जो इन उपरोक्त अभिलक्षणों को धारण करने में सक्षम है, वह एक ईमानदार व्यक्ति है। परमेश्वर अपनी उपस्थिति में ऐसे लोग के रहने से संतुष्ट होता है क्योंकि वह ठीक इसी प्रकार के व्यक्ति को चाहता है। यह ठीक उसी प्रकार का व्यक्ति है जिसे कि परमेश्वर पूर्ण बनाना चाहता है। इसी प्रकार के व्यक्ति को परमेश्वर देखना चाहता है। इस प्रकार का मनुष्य एक ईमानदार व्यक्ति है।

— जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति (V) में "एक ईमानदार व्यक्ति होना: एक सारांश" से उद्धृत

परमेश्वर ईमानदार लोगों को क्यों पसंद करता है? पहले तो, ईमानदार लोग दूसरों के साथ सद्भाव से ताल-मेल रख सकते हैं, वे दूसरों के अंतरंग मित्र हो सकते हैं। वे तुम्हें धोखा नहीं देते हैं, वे सच बोलते हैं; जब तुम इस प्रकार के लोगों से व्यवहार करते हो, तो तुम्हारा मन स्पष्ट, चिंतामुक्त और शांत होता है। दूसरा, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईमानदार लोग भरोसेमंद और विश्वसनीय होते हैं; जब तुम उन्हें कुछ करने के लिए कहते हो, या जब वे तुम्हारी मदद करते हैं, तो तुम उन पर भरोसा कर सकते हो। यही कारण है कि किसी ईमानदार व्यक्ति के साथ काम करते समय, तुम बेफ़िक्र, निश्चिंत, चिंतामुक्त और शांत महसूस करते हो, तुम्हें राहत और खुशी का अनुभव होता है। केवल जब तुम ईमानदार व्यक्ति होते हो, तभी तुम दूसरों के अन्तरंग मित्र बन सकते हो और लोगों का विश्वास प्राप्त कर सकते हो, इस प्रकार केवल एक ईमानदार व्यक्ति ही एक सच्चे इंसान के सदृश होता है।

— जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति (VII) में "केवल सत्य को समझना और शैतान के प्रभाव को त्याग देना ही उद्धार है" से उद्धृत

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