प्रकरण पाँच : मसीह-विरोधियों के चरित्र और उनके स्वभाव सार का सारांश (भाग दो) खंड दो
III. मसीह-विरोधियों का स्वभाव सार
आज की संगति का जोर अभी भी मुख्य रूप से इस बात का सारांश प्रस्तुत करने पर है कि मसीह-विरोधियों का स्वभाव सार क्या होता है। मनुष्यों के छह भ्रष्ट स्वभावों में से, जिन पर हमने अभी चर्चा की, कौन-से तीन स्वभावों का उपयोग मसीह-विरोधियों के स्वभाव सार वाले लोगों को निरूपित करने के लिए ज्यादा सटीक रूप से किया जाता है? (सत्य से विमुखता, क्रूरता और दुष्टता।) चूँकि हमने दायरे को इन तीन स्वभावों तक सीमित कर दिया है, इसलिए पहले तीन स्वभाव इस संगति का हिस्सा नहीं होंगे। तो क्या मसीह-विरोधियों के स्वभाव सार वाले लोगों में कट्टरता, अहंकार और धोखेबाजी के भ्रष्ट स्वभावों का अभाव होता है? (नहीं।) तो फिर मसीह-विरोधियों के स्वभाव सार को निरूपित करने के लिए पहले तीन स्वभावों का उपयोग क्यों नहीं किया जाता? (क्योंकि साधारण भ्रष्ट मनुष्यों में भी पहले तीन स्वभाव होते हैं और वे व्यक्ति का सार नहीं दर्शाते।) यह एक बहुत ही सटीक सारांश है। स्वभाव सार के विषय के संबंध में पहले तीन भ्रष्ट स्वभाव अपेक्षाकृत हलके स्तर के होते हैं, जबकि वास्तव में मसीह-विरोधियों के स्वभाव सार का सारांश प्रस्तुत कर सकने वाले स्वभाव बाद के तीन हैं—सत्य से विमुखता, क्रूरता और दुष्टता। ये तीन भ्रष्ट स्वभाव मसीह-विरोधियों के स्वभाव सार को ज्यादा सटीक रूप से निरूपित कर सकते हैं। हालाँकि पहले तीन स्वभावों का उपयोग मसीह-विरोधियों के सार को निरूपित करने के लिए नहीं किया जाता, लेकिन उन तीनों भ्रष्ट स्वभावों में से प्रत्येक स्वभाव मसीह-विरोधियों में मौजूद होता है और वह आम लोगों की तुलना में ज्यादा गंभीर होता है। सत्य से विमुखता, क्रूरता और दुष्टता इन सभी का उपयोग उनकी कट्टरता का सारांश प्रस्तुत करने और उसका निरूपण करने के लिए और उनकी कट्टरता का स्तर वर्णित करने के लिए किया जा सकता है। साथ ही, अंतिम तीन स्वभावों का उपयोग उनके अहंकार और धोखेबाजी का सारांश प्रस्तुत करने और उनका निरूपण करने के लिए भी किया जा सकता है। यह स्पष्ट है कि मसीह-विरोधियों के स्वभाव सार की मुख्य विशेषताएँ सत्य से विमुखता, क्रूरता और दुष्टता हैं।
क. दुष्टता
इन तीन भ्रष्ट स्वभावों—सत्य से विमुखता, क्रूरता और दुष्टता—में से दुष्टता मसीह-विरोधी के स्वभाव सार में स्वभाव का सबसे व्यापक सारांश है और यह मसीह-विरोधी के स्वभाव सार में सबसे सामान्य है। मसीह-विरोधी के स्वभाव सार का वर्णन करने के लिए दुष्टता का उपयोग क्यों किया जाता है? अगर यह कहा जाता है कि मसीह-विरोधी बहुत दुष्ट होते हैं, तो उनके विचारों से आँकने पर वे रोज ऐसा क्या सोचते, कहते और करते हैं जो साबित करता है कि वे दुष्ट सार वाले लोग हैं? क्या इस प्रश्न पर विचार नहीं किया जाना चाहिए? (हाँ, किया जाना चाहिए।) तो हमें अपना विश्लेषण और अवलोकन जो वे सोचते हैं, उनकी बोलचाल और अंदाज, वे कैसा आचरण करते हैं और दुनिया के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, इससे शुरू करना चाहिए, ताकि यह आकलन लिया जा सके कि क्या वास्तव में इन लोगों में दुष्ट सार मौजूद है। आओ, सबसे पहले देखते हैं कि मसीह-विरोधी रोज क्या सोचते हैं। कुछ लोग सोचते हैं : “लोगों के इस समूह में मुझे सबसे योग्य नहीं माना जाता, न ही मुझमें सबसे ज्यादा गुण हैं, तो मैं ज्यादा लोकप्रियता कैसे प्राप्त कर सकता हूँ, सभी का सम्मान कैसे पा सकता हूँ, अपने पूर्वजों को गौरव कैसे दिला सकता हूँ और अपने सिर पर प्रभामंडल कैसे रख सकता हूँ? मैं दूसरों को अपनी बात सुनने और अपनी प्रशंसा करने के लिए कैसे राजी कर सकता हूँ? ऐसा लगता है कि रुतबा होना एक अच्छी बात है। कुछ लोग वास्तव में प्रतिष्ठा के साथ बात करते हैं और जब अन्य लोगों को कोई समस्या होती है, तो वे उनके पास जाते हैं—कोई मेरे पास क्यों नहीं आता? कोई मुझ पर ध्यान क्यों नहीं देता? मुझमें दिमाग है, विचार हैं, अपने कार्यों के प्रति एक व्यवस्थित नजरिया है और मैं मामलों में विवेक का इस्तेमाल करने में सक्षम हूँ—कोई मुझ पर ध्यान क्यों नहीं देता या मेरे बारे में ऊँची राय क्यों नहीं रखता? मैं कब दूसरों से अलग दिखूँगा? कब हर कोई मदद के लिए मेरे पास आएगा और मेरा समर्थन करेगा?” ये लोग किस बारे में सोच रहे हैं? ये सकारात्मक चीजों के बारे में सोच रहे हैं या नकारात्मक चीजों के बारे में? (नकारात्मक चीजों के बारे में।) जब कुछ लोग देखते हैं कि दूसरों का एक-दूसरे के साथ अच्छा रिश्ता है, तो वे सोचते हैं : “इनका रिश्ता इतना अच्छा कैसे है? मुझे इनमें कलह के बीज बोकर इनका रिश्ता खराब करने का कोई तरीका ढूँढ़ना होगा; इस तरह मैं अकेला नहीं पड़ूँगा और मेरे पास एक साथी होगा।” ये लोग क्या कर रहे हैं? ये चाहे कोई भी तरीका इस्तेमाल करें, उसका उद्देश्य कलह के बीज बोना ही होता है। जब वे किसी को अपना कर्तव्य उत्साह और जोश से निभाते हुए देखते हैं और अपना कर्तव्य निभाते हुए वे जो कुछ भी करते हैं उसमें प्रकाश प्राप्त करते हुए देखते हैं, तो वे ईर्ष्यालु हो जाते हैं और सोचते हैं कि इस व्यक्ति का महत्त्व कैसे घटाया जाए, इसका उत्साह भंग कर इसे नकारात्मक कैसे महसूस कराया जाए। ये विचार, चाहे इन पर अमल किया जाए या नहीं, नकारात्मक विचार होते हैं। ऐसे लोग भी हैं जो सोचते हैं : “नवनिर्वाचित अगुआ मुझे कैसे देखता है? मुझे इस अगुआ के करीब जाना चाहिए। हमारे रिश्ते बहुत अच्छे नहीं हैं और हम बहुत करीब भी नहीं हैं, तो मैं उनकी खुशामद कैसे कर सकता हूँ? मेरे पास कुछ पैसे हैं, इसलिए मैं पता लगाऊँगा कि उसे किस चीज की जरूरत है और फिर वह चीज उसके लिए खरीद लूँगा। लेकिन अगर उसे कंप्यूटर की जरूरत हुई, तो मैं उतना पैसा खर्च करने को तैयार नहीं हूँ; अगर वह भविष्य में अगुआ न रहा, तो क्या यह पैसा बरबाद नहीं हो जाएगा? अगर उसे दस्ताने या कपड़े जैसी किसी चीज की जरूरत हो, तो मैं वह खरीद सकता हूँ और यह खर्च करने लायक भी है। पैसा सही चीजों पर खर्च करना चाहिए, बेकार में नहीं। मुझे अगुआ की चापलूसी भी करनी है, लेकिन सिर्फ खोखले शब्दों से नहीं बल्कि उसे वास्तविक कार्यों से खुश करना है—मुझे यह पता लगाते रहना होगा कि अगुआ को क्या पसंद है। इसके अलावा, मैं रोज खाने के समय अगुआ को खाना परोसने में मदद करूँगा और जब वह खाना खा लेगा, तो उसके बर्तन भी धो दूँगा। अगर अगुआ किसी की आलोचना करेगा, तो मैं भी वैसा ही करते हुए उसकी हाँ में हाँ मिलाऊँगा; अगर अगुआ किसी की प्रशंसा करेगा, तो मैं तुरंत उस व्यक्ति की सिफारिश कर उसके गुणों की प्रशंसा करूँगा।” ये लोग किस बारे में सोच रहे हैं? (अगुआ को खुश करने और उसकी चापलूसी करने के बारे में।) ऐसे लोग भी हैं जो परमेश्वर के घर में काम करते हुए सोचते हैं : “दूसरे लोग कड़ी मेहनत और ईमानदारी से काम करते हैं; मुझे चतुर बनना होगा, मैं मूर्ख नहीं बन सकता और मैं बहुत ज्यादा मेहनत भी नहीं कर सकता। अगर भविष्य में परमेश्वर के घर को मेरी जरूरत न रही, तो क्या यह प्रयास व्यर्थ नहीं चला जाएगा? क्या मैं व्यर्थ में कड़ी मेहनत नहीं करूँगा? लेकिन अगर मैं बिल्कुल भी काम नहीं करता, तो मुझे परमेश्वर के घर द्वारा चलता कर दिया जाएगा। मुझे क्या करना चाहिए? जब अगुआ मौजूद होगा, तो मैं पूरी मेहनत से काम करूँगा, खूब पसीना बहाकर अगुआ को दिखाऊँगा; जब वह आसपास नहीं होगा तो मैं शौचालय चला जाऊँगा, पानी पिऊँगा, टहलने के लिए बाहर चला जाऊँगा या आराम करने के लिए कोई एक कोना तलाश लूँगा। अगर दूसरे लोग तीन फावड़े मिट्टी खोदते हैं तो मैं आधा फावड़ा ही खोदूँगा; अगर दूसरे तीन या पाँच बार सामान लेकर आते-जाते हैं तो मैं एक बार ही जाऊँगा। मैं जब भी संभव होगा आराम करूँगा और सुस्ताऊँगा। मुझे ज्यादा गंभीर नहीं होना चाहिए; अगर मैं बहुत ज्यादा काम करने से बीमार हो गया या थक गया, तो मेरे लिए कौन दुखी होगा? बीमारी में मेरी तीमारदारी कौन करेगा? क्या अगुआ मेरा ख्याल रखेगा? क्या परमेश्वर मेरा ख्याल रखेगा? क्या परमेश्वर इन चीजों के लिए जिम्मेदार होगा? इसलिए काम करते समय मुझे यह पता लगाना होगा कि मैं कहाँ काम कर सकता हूँ ताकि साफ तौर पर दिखाई दूँ। जब मैं सुस्ताना चाहूँ, तो मुझे यह पता लगाना होगा कि मुझे खोजे जाने की सबसे कम संभावना कहाँ होगी, मेरे ध्यान आकर्षित करने की सबसे कम संभावना कहाँ होगी।” ये लोग क्या सोच रहे हैं? (काम में ढिलाई बरतना और चालाकी दिखाना।)
1. मसीह-विरोधी लोगों के प्रति क्या करते हैं
दिन भर दुष्ट विचार रखने वाले लोगों का चरित्र कैसा होता है? यह कम सत्यनिष्ठा और कपटपूर्णता वाला चरित्र होता है। उनके स्वभाव से आँकें तो यह क्या है? (दुष्टता।) जिन चीजों के बारे में वे सोचते हैं, क्या उनकी प्रकृति में कुछ भी खरा होता है? क्या उसमें कुछ भी ऐसा होता है जो नेक, खुला और ईमानदार लगता हो? क्या उसमें कुछ भी अच्छा होता है? (नहीं, कुछ नहीं।) तो संक्षेप में, मसीह-विरोधी के सार वाले लोगों के दुष्ट स्वभाव में अभिव्यक्त होने वाली पहली चीज यह है कि वे दिन भर सिर्फ बुराई के बारे में सोचते रहते हैं। चाहे वे किसी बड़ी समस्या का सामना करें या छोटी समस्या का, उनके विचार बुराई से ही भरे होते हैं। विशेष रूप से, वे लोगों के प्रति कुछ खास चीजें करते हैं और परमेश्वर के प्रति उनकी अलग-अलग अभिव्यक्तियाँ और अभ्यास भी होते हैं। तो वे लोगों के प्रति क्या चीजें करते हैं? वे अपने विचारों में किस तरह के अभ्यास विकसित करते हैं? अभी बताए गए कई उदाहरणों में क्या तुम लोग देख सकते हो कि ऐसा व्यक्ति कैसे लगातार दूसरों के खिलाफ साजिश रचता है? वे लगातार साजिश रचते हैं और जिस किसी के साथ उनका व्यवहार या संपर्क होता है, वह उनकी साजिशों का लक्ष्य बन जाता है। दूसरे, हालाँकि कभी-कभी वे कार्य करते समय बोलते नहीं, फिर भी उनके कार्यों के तरीके, पद्धतियाँ और स्रोत ईमानदार नहीं होते और वे सत्य का अभ्यास नहीं करते—यह सिर्फ एक भ्रामक दिखावा होता है। इसकी प्रकृति क्या होती है और यह अभ्यास क्या होता है? यह छल और दिखावा होता है और वे दूसरों को प्रलोभन भी दे रहे होते हैं। चूँकि वे दिखावा कर सकते हैं और लोगों को धोखा दे सकते हैं, तो क्या वे लोगों को फुसला और गुमराह भी कर सकते हैं? (हाँ, कर सकते हैं।) इसके अतिरिक्त, ऐसा व्यक्ति रुतबे, प्रतिष्ठा, इज्जत और अपने हितों को लेकर दूसरों के साथ निरंतर संघर्षरत रहता है। वे प्रसिद्धि के लिए लड़ते हैं और इस बात के लिए भी कि किसका निर्णय अंतिम होगा, किसके पास ज्यादा विचार हैं, किसके मत ज्यादा बुद्धिमत्तापूर्ण और ज्यादा उचित हैं, किसका सभी लोग ज्यादा समर्थन करते हैं और कौन ज्यादा लाभ प्राप्त कर सकता है—वे इन्हीं चीजों की होड़ में लगे रहते हैं। रुतबा न होने पर भी वे लोगों के खिलाफ इस तरह साजिश करते हैं, तो रुतबा होने पर वे क्या करेंगे? तब उनके प्रभुत्व के तहत लोगों को लगातार सताया जाता है; वे सत्य से प्रेम न करने वाले लोगों को अपने पाले में कर लेते और अपना साथ देने को मना लेते हैं, वे उन लोगों पर हमला करते और उन्हें शामिल नहीं करते जो सत्य स्वीकार सकते हैं, जिसका उद्देश्य सभी को अपनी बात सुनवाना और उनसे अपना आज्ञापालन करवाना होता है; वे हमेशा गुट बनाते और समूहों में कलह के बीज बोते हैं और अंत में सभी को अपना बना लेते हैं। ये सभी चीजें उनके सताने के दायरे में आती हैं। मसीह-विरोधी दिन भर बुराई के बारे में सोचते रहते हैं और जो भी स्वभाव वे प्रकट करते हैं वह बुरा होता है। तो क्या यह कहना सही है कि ऐसे लोगों का स्वभाव दुष्ट होता है? (हाँ, यह सही है।) ऐसे समूह में जहाँ हर कोई अपनी जगह जानता है, अपने काम में संलग्न रहता है और वही करता है जो उसे करना चाहिए, जैसे ही कोई मसीह-विरोधी प्रकट होता है, वह भीतर से कलह के बीज बो देता है, क नामक व्यक्ति के सामने ख नामक व्यक्ति की और ख नामक व्यक्ति के सामने क नामक व्यक्ति की बुराई करता है और दोनों को आपस में भिड़ा देता है। क्या यह कलह के बीज बोने का नतीजा नहीं है? तो मसीह-विरोधी के साजिश करने की कुछ अभिव्यक्तियाँ क्या हैं? उदाहरण के लिए, जब कलीसिया में चुनाव होता है, तो महत्वाकांक्षा-रहित साधारण लोग सोच सकते हैं, “जो कोई भी चुना जाएगा, मैं उस फैसले के प्रति समर्पित हो जाऊँगा; जिस किसी को भी परमेश्वर अगुआ बनने देगा, मैं उसका समर्थन करूँगा और कोई उपद्रव नहीं करूँगा या परेशानी पैदा नहीं करूँगा।” लेकिन बुरे इरादे वाले लोग इस तरह से नहीं सोचते। अगर वे देखते हैं कि इस चुनाव में उनके जीतने की कोई उम्मीद नहीं है, तो वे अपने दिल में हिसाब लगाना शुरू कर देते हैं : “मुझे सभी के लिए कुछ अच्छी चीजें खरीदनी होंगी। आजकल कलीसिया में किन चीजों की कमी है? मैं एक एयर-प्यूरीफायर खरीदूँगा और उसे सभा-स्थल में रख दूँगा, ताकि जब सभी लोग ताजी हवा में साँस लें तो मेरे बारे में सोचें। इस तरह जब चुनाव का समय आएगा, तो क्या मैं पहला उम्मीदवार नहीं होऊँगा जिसके बारे में वे सोचेंगे? इसलिए मैं बेकार में कार्य या पैसा खर्च नहीं करूँगा।” यह सोचकर वे जल्दी से सबसे सस्ता और देखने में सबसे आकर्षक एयर-प्यूरीफायर खरीद लेते हैं। इसके अतिरिक्त वे सोचते हैं : “इस दौरान मुझे सावधान रहने की जरूरत है। मुझे गलत बातें नहीं कहनी चाहिए और ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए जो नकारात्मक हों और लोगों के लिए शिक्षाप्रद न हों; जब भी मैं लोगों से मिलूँ, तो मुझे चापलूसी भरी बातें करनी चाहिए और अक्सर ऐसी बातों से दूसरों की तारीफ करनी चाहिए, ‘तुम वाकई बहुत अच्छे लग रहे हो! तुम सत्य का अनुसरण कर रहे हो! हालाँकि तुमने परमेश्वर पर उतने समय से विश्वास नहीं किया है जितने समय से मैंने किया है, फिर भी तुमने मुझसे ज्यादा सत्य का अनुसरण किया है। तुममें अच्छी मानवता है और तुम जैसे अच्छी मानवता वाले लोग बचाए जा सकते हैं—मुझ जैसे नहीं।’ मुझे विनम्र दिखना चाहिए और दूसरों की इस तरह प्रशंसा करनी चाहिए मानो वे सभी पहलुओं में मुझसे बेहतर हों, जिससे उन्हें लगे कि उन्हें पर्याप्त सम्मान मिला है।” क्या यह साजिश करना नहीं है? मसीह-विरोधी ऐसी चीजें आसानी से कर लेते हैं; आम लोग साजिश करने में उनसे आगे नहीं निकल सकते। अविश्वासियों के बीच क्या कहावत चलती है? (तुम्हें किसी ने बेचा है और तुम फिर भी पैसे गिनने में उसकी मदद करते हो।) मसीह-विरोधी ऐसी चीजें करते हैं और ज्यादातर लोग उनके विश्वासघात और उनकी साजिश के लक्ष्य होते हैं।
मुझे बताओ, क्या मसीह-विरोधी काट-छाँट किया जाना स्वीकारते हैं? क्या वे स्वीकारते हैं कि उनमें भ्रष्ट स्वभाव है? (नहीं, वे नहीं स्वीकारते।) वे भ्रष्ट स्वभाव होना नहीं स्वीकारते, लेकिन काट-छाँट किए जाने के बाद भी वे ऐसा दिखावा करते हैं जैसे वे खुद को जानते हों। वे कहते हैं कि वे राक्षस और शैतान हैं, उनमें मानवता नहीं है और उनकी काबिलियत कमजोर है और वे चीजों पर पूरी तरह से विचार करने में असमर्थ हैं, वे कलीसिया द्वारा व्यवस्थित कार्यों के लिए अयोग्य हैं और उन्होंने अपने कर्तव्य ठीक से नहीं निभाए हैं। फिर ज्यादातर लोगों के सामने वे अपना भ्रष्ट स्वभाव स्वीकारते हैं, वे स्वीकारते हैं कि वे राक्षस हैं और अंत में यह भी कहते हैं कि परमेश्वर ही उनका शोधन और बचाव कर रहा है और लोगों को यह दिखाते हैं कि काट-छाँट किए जाने को स्वीकारने में वे कितने सक्षम और सत्य के प्रति कितने समर्पित हैं। वे इस बात का उल्लेख नहीं करते कि उनकी काट-छाँट क्यों की जा रही है या उनके कामों ने कलीसिया के कार्य को क्या हानि और नुकसान पहुँचाया है। वे इन मुद्दों से बचते हैं और लोगों से यह मनवाने के लिए कि उन्हें परमेश्वर के घर से प्राप्त होने वाली काट-छाँट अनुपयुक्त और अनुचित है, वे खोखले शब्द, धर्मसिद्धांत, कुतर्क और व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ बोलते हैं, मानो उन्होंने कोई बहुत बड़ा अन्याय सहा हो। काट-छाँट किए जाने के बाद वे अपने दिलों में अडिग रहते हैं, अपने विभिन्न बुरे कर्मों को जरा भी नहीं स्वीकारते। तो वे तमाम शब्द क्या हैं जिनकी उन्होंने अपना भ्रष्ट स्वभाव स्वीकारने, सत्य स्वीकारने के लिए तैयार होने और काट-छाँट के लिए समर्पण करने में सक्षम होने के बारे में संगति की थी? क्या ये उनकी सच्ची भावनाएँ हैं? बिल्कुल नहीं। ये सब झूठ, दिखावा और शैतानी शब्द हैं, जो लोगों को गुमराह कर फुसलाने के लिए हैं। लोगों को गुमराह करने के पीछे उनका क्या उद्देश्य होता है? (लोगों से अपनी आराधना और अनुसरण करवाना।) बिल्कुल सही, यह लोगों से अपना अनुसरण करवाने और उन्हें अपनी बात सुनने को मजबूर करने के लिए उन्हें गुमराह कर फुसलाने के लिए होता है, जिससे हर कोई यह सोचे कि वे सही और अच्छे हैं। इस तरह कोई उनकी असलियत नहीं देखता या उनका विरोध नहीं करता। इसके विपरीत, लोग मानते हैं कि वे ऐसे व्यक्ति हैं जो सत्य और काट-छाँट स्वीकारते हैं और पश्चात्ताप करते हैं। तो वे अपने बुरे कर्म क्यों नहीं स्वीकारते या परमेश्वर के घर के कार्य में स्वयं द्वारा किए गए नुकसान क्यों नहीं स्वीकारते? वे इन मामलों को संगति के लिए सबके सामने क्यों नहीं लाते? (अगर वे ये बातें कहेंगे, तो लोग उनका भेद पहचान लेंगे।) अगर लोग उनका भेद पहचान लेंगे, उनकी असलियत देख लेंगे और उनकी मानवता और उनके स्वभाव सार की असलियत जान लेंगे, तो वे उन्हें त्याग देंगे। क्या वे फिर भी उनकी चालों में फँसकर उनके द्वारा गुमराह होंगे? क्या वे फिर भी उनका बहुत सम्मान करेंगे? क्या वे फिर भी उनकी बेहद प्रशंसा करेंगे? क्या वे फिर भी उनकी आराधना करेंगे? वे इनमें से कुछ नहीं करेंगे। मसीह-विरोधी खुद को जानने का दिखावा करते हैं, लेकिन वास्तव में यह सब कुतर्क और स्व-स्पष्टीकरण हैं जो लोगों को गुमराह करने और उन्हें अपने लिए खड़ा करवाने के लिए हैं और यही उनका गुप्त उद्देश्य है। वे महत्वपूर्ण मामलों से बचते हैं और लोगों को गुमराह कर उन्हें फुसलाने, लोगों से अपना सम्मान और आराधना करवाने के लिए खुद को जानने और काट-छाँट स्वीकारने के बारे में हलकी बातें करते हैं। क्या यह तरीका काफी दुष्टतापूर्ण नहीं है? कुछ लोग वास्तव में इस झाँसे में आ जाते हैं और मसीह-विरोधियों द्वारा गुमराह किए जाने के बाद कहते हैं, “वह व्यक्ति बहुत अच्छा बोलता है—मैं बहुत प्रेरित हुआ। मैं कई बार रोया!” उस समय ये लोग उनकी बहुत आराधना और सम्मान करते हैं, लेकिन अंत में वे मसीह-विरोधी साबित होते हैं; यह मसीह-विरोधियों द्वारा दूसरों को गुमराह कर उन्हें फुसलाने का नतीजा है। मसीह-विरोधी इस तरह से लोगों को गुमराह कर सकते हैं और निश्चित रूप से ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है जो इस झाँसे में आकर धोखा खा जाते हैं। अगर कोई इस मामले में मसीह-विरोधियों का भेद पहचान सकता है, तो वह ऐसा व्यक्ति है जो सत्य समझता है और जिसमें भेद पहचानने की क्षमता है।
मसीह-विरोधी अक्सर लोगों को सताते हैं। उनकी एक प्रसिद्ध कहावत है : “प्यारे बच्चों, चूँकि तुम मेरे सामने झुकते नहीं, इसलिए मैं तुम्हें दो ही चालों में तुम्हारे हाथों और घुटनों पर गिराकर तुमसे अपनी आराधना करवाऊँगा—अगर तुम मेरे सामने नहीं झुकते तो मैं तुम्हें मौत के घाट उतार दूँगा!” मसीह-विरोधी क्या करना चाहते हैं? वे लोगों को सताना चाहते हैं। वे किस तरह के लोगों को सताना चाहते हैं? अगर तुम उनका आज्ञापालन करते हो, उनकी चापलूसी और आराधना करते हो, तो क्या वे तुम्हें सताएँगे? अगर तुम उनके साथ विनम्र और आज्ञाकारी हो, अगर वे तुम्हें खतरनाक नहीं समझते और तुम सिर्फ आसानी से काबू में आने वाले या गुलाम हो, तो वे तुम्हें सताने की जहमत नहीं उठाएँगे। अगर वे कुछ बुरा करते हैं या बुरे काम करते हैं, अगर उन्हें कोई ऐसा मिल जाता है जो उनका भेद पहचानता है, जो उन्हें उजागर कर उनका पर्दाफाश कर देगा और उन्हें उनके पद से हटा देगा, जो उनकी प्रतिष्ठा नष्ट कर देगा और उनके कार्यों को खराब कर देगा, तो वे सोचेंगे कि उस व्यक्ति को कैसे सताएँ। मसीह-विरोधी लोगों को सनक में आकर नहीं सताते; बल्कि वे लगातार लोगों का निरीक्षण और परीक्षण करते हैं, देखते हैं कि कौन उनकी पीठ पीछे उनके बारे में बुरा-भला कह रहा है, कौन उनके आगे नहीं झुकता, कौन उनके कार्यों का भेद पहचानता है, कौन उन पर ध्यान नहीं देता और कौन उनके साथ घुलने-मिलने से इनकार करता है। कुछ समय तक निरीक्षण कर दो-तीन ऐसे व्यक्तियों को खोजने के बाद वे सभाओं के दौरान इन लोगों के मुद्दों के बारे में संगति करना शुरू कर देते हैं। हालाँकि वे जो कहते हैं वह ऊपर से सही लगता है, लेकिन वास्तव में वह लक्षित होता है, किसी कारण और उद्देश्य के साथ होता है। कारण क्या होता है? उन्होंने पहले ही पूरी तरह से जाँच-पड़ताल कर ली होती है; ये व्यक्ति उनके आगे झुकते नहीं और उनका भेद पहचानते हैं, हमेशा उन्हें उजागर कर उनका पर्दाफाश करने, उन्हें पद से हटाने की कोशिश करते रहते हैं। वे ये बातें उन व्यक्तियों को चेतावनी देने, उन्हें सावधान करने के लिए कहते हैं। अगर ये लोग पीछे हट जाते हैं और आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं करते और सब-कुछ मसीह-विरोधियों की इच्छा के अनुसार होता है, तो मसीह-विरोधी उन्हें अनदेखा कर देते हैं। लेकिन अगर ये लोग पहले की तरह ही करते रहते हैं, उनके साथ घुलने-मिलने से इनकार करते हैं और अभी भी उनका पर्दाफाश करने, ऊपरवाले से उनकी रिपोर्ट करने और उन्हें पद से हटाने का इरादा रखते हैं, तो वे मसीह-विरोधियों के अगले लक्ष्य बन जाते हैं। वे दूसरे हथकंडों के बारे में सोचते हैं और ज्यादा प्रबल और कठोर तरीके अपनाते हैं, उनकी कमजोरी पकड़कर उनका फायदा उठाने के तरीके सोचने की कोशिश करते हैं और उन्हें सताने के अवसर ढूँढ़ते हैं और तब तक नहीं रुकते जब तक कि वे उन्हें कलीसिया से निष्कासित न करवा दें। मसीह-विरोधी असहमति जताने वालों को इस तरह से सताते हैं और तब तक आराम से नहीं बैठते, जब तक कि अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते। लोगों को सताने के लिए जो तरीके मसीह-विरोधी अपनाते हैं, वे क्रूर होते हैं। वे बहाना ढूँढ़कर लोगों पर ठप्पा लगाने से शुरुआत करते हैं और फिर उन्हें सताना शुरू कर देते हैं और तब तक नहीं रुकते जब तक कि लोग उनका आज्ञापालन कर पूरी तरह से उनके सामने झुक नहीं जाते—वरना यह काम खत्म नहीं होता। कलीसिया में मसीह-विरोधी लगातार कलह के बीज बोते और गुट बनाते हैं, जिसका उद्देश्य गुटबंदी करना और कलीसिया पर नियंत्रण करना होता है। क्या यह एक आम बात नहीं है? मसीह-विरोधी गुट बनाते हैं, कलह के बीज बोते हैं, बल जुटाते हैं, अपने लिए लाभदायक लोगों के साथ षड्यंत्र करते हैं जो उनके लिए बोल सकते हैं, उनके बुरे काम छिपा सकते हैं और महत्वपूर्ण क्षणों में उनका बचाव कर सकते हैं। वे इन लोगों से अपने लिए काम करवाते हैं, यहाँ तक कि दूसरों के बारे में रिपोर्ट करवाकर अपने संदेशवाहक के रूप में काम करवाते हैं। अगर उनके पास रुतबा होता है तो यह समूह उनका स्वतंत्र राज्य बन जाता है। अगर उनके पास रुतबा नहीं होता तो वे और उनका समूह कलीसिया के भीतर एक बल बनाते हैं, कलीसिया की सामान्य व्यवस्था में बाधा डालते और हस्तक्षेप करते हैं और सामान्य कलीसियाई जीवन और कार्य को बाधित करते हैं।
मसीह-विरोधियों के दुष्ट सार की सबसे सामान्य अभिव्यक्ति यह है कि वे दिखावे और पाखंड में विशेष रूप से अच्छे होते हैं। अपने विशेष रूप से क्रूर, कपटी, निर्दयी और अहंकारी स्वभाव के बावजूद वे खुद को बाहरी तौर पर विशेष रूप से विनम्र और सौम्य व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करते हैं। क्या यह दिखावा नहीं है? ये लोग अपने दिलों में प्रतिदिन यह सोचते हुए चिंतन करते हैं, “खुद को ज्यादा ईसाई, ज्यादा ईमानदार, ज्यादा आध्यात्मिक, ज्यादा दायित्व उठाने वाला और ज्यादा अगुआ-जैसा दिखाने के लिए मुझे कैसे कपड़े पहनने चाहिए? मुझे कैसे खाना चाहिए, ताकि लोगों को लगे कि मैं काफी परिष्कृत, शिष्ट, प्रतिष्ठित और नेक हूँ? अगुआई और करिश्मे का आभास देने, साधारण व्यक्ति के बजाय एक असाधारण व्यक्ति की तरह दिखने के लिए मुझे चलने की कौन-सी मुद्रा अपनानी चाहिए? दूसरों के साथ बातचीत में कौन-सा लहजा, शब्दावली, रूप और चेहरे के हाव-भाव लोगों को यह महसूस करा सकते हैं कि मैं उच्च वर्ग का हूँ, एक सामाजिक अभिजात वर्ग या उच्च श्रेणी के बुद्धिजीवी जैसा हूँ? मेरा पहनावा, शैली, बोल-चाल और व्यवहार कैसे लोगों से मुझे उच्च सम्मान दिला सकते हैं, कैसे उन पर एक अमिट छाप छोड़ सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि मैं हमेशा उनके दिलों में बना रहूँ? लोगों के दिल जीतने और उनमें गर्मजोशी भरने और एक स्थायी छाप छोड़ने के लिए मुझे क्या कहना चाहिए? मुझे दूसरों की मदद करने और उनके बारे में अच्छी बातें करने का काम और ज्यादा करना चाहिए, लोगों के सामने अक्सर परमेश्वर के वचनों के बारे में बात करनी चाहिए और कुछ आध्यात्मिक शब्दावली का इस्तेमाल करना चाहिए, दूसरों को परमेश्वर के वचन और ज्यादा पढ़कर सुनाने चाहिए, उनके लिए ज्यादा प्रार्थना करनी चाहिए, धीमी आवाज में बोलना चाहिए ताकि लोग उत्सुक होकर मेरी बात सुनें, और उन्हें यह महसूस कराना चाहिए कि मैं कोमल, देखभाल करने वाला, प्रेमपूर्ण, उदार और क्षमाशील हूँ।” क्या यह दिखावा नहीं है? ये वे विचार हैं जो मसीह-विरोधियों के दिलों पर कब्जा किए रहते हैं। उनके विचारों को कुछ और नहीं, बल्कि अविश्वासियों की दुनिया की प्रवृत्तियाँ भरती हैं, जो पूरी तरह से यह दर्शाता है कि उनके विचार और नजरिये दुनिया और शैतान के हैं। कुछ लोग अकेले में वेश्या या बदचलन महिला की तरह कपड़े पहन सकते हैं; उनके कपड़े विशेष रूप से बुरी प्रवृत्तियों के अनुरूप और खास तौर से फैशनेबल होते हैं। लेकिन जब वे कलीसिया में आते हैं, तो भाई-बहनों के बीच वे पूरी तरह से अलग पोशाक पहनते और चाल-ढाल अपनाते हैं। क्या वे दिखावा करने में बेहद माहिर नहीं हैं? (बिल्कुल हैं।) मसीह-विरोधी अपने दिलों में जो सोचते हैं, जो वे करते हैं, उनकी विभिन्न अभिव्यक्तियाँ और जो स्वभाव वे प्रकट करते हैं, वे सभी स्पष्ट करते हैं कि उनका स्वभाव सार दुष्ट है। मसीह-विरोधी सत्य, सकारात्मक चीजों, सही मार्ग या परमेश्वर की अपेक्षाओं पर विचार नहीं करते। उनके विचार और उनके द्वारा चुने जाने वाले व्यवहार, तरीके और लक्ष्य सब दुष्ट होते हैं—वे सब सही मार्ग से भटक जाते हैं और सत्य के साथ असंगत होते हैं। यहाँ तक कि वे सत्य के विरुद्ध भी चले जाते हैं और सामान्य तौर पर उन्हें बुराई के रूप में सारांशित किया जा सकता है; बात यह है कि इस बुराई की प्रकृति दुष्ट होती है—इसलिए इसे सामूहिक रूप से दुष्टता कहा जाता है। वे ईमानदार व्यक्ति होने, शुद्ध और खुले होने या सच्चे दिल वाला और वफादार होने पर विचार नहीं करते; इसके बजाय वे दुष्ट तरीकों के बारे में सोचते हैं। उदाहरण के लिए, एक ऐसे व्यक्ति को लो, जो अपने बारे में शुद्ध तरीके से खुलकर बता सकता हो, जो एक सकारात्मक चीज और सत्य का अभ्यास करना है। क्या मसीह-विरोधी ऐसा करते हैं? (नहीं।) वे क्या करते हैं? वे लगातार दिखावा करते हैं और जब वे कुछ बुरा करके खुद को उजागर करने लगते हैं, तो वे इसे उग्र रूप से छिपाते हैं, खुद को सही ठहराते और अपना बचाव करते हैं और तथ्यों को छिपाते हैं—फिर वे अंततः अपने तर्क देते हैं। क्या इनमें से कोई भी अभ्यास सत्य का अभ्यास करने के बराबर है? (नहीं।) क्या इनमें से कोई भी सत्य-सिद्धांतों के अनुरूप है? बिल्कुल नहीं।
अभी हमने मसीह-विरोधियों के स्वभाव सार के पहले पहलू—दुष्टता पर संगति कर उसका गहन-विश्लेषण किया। हमने इस बात का गहन-विश्लेषण करने से शुरुआत की कि मसीह-विरोधी लोग पूरे दिन क्या सोचते हैं और मसीह-विरोधियों के दुष्ट स्वभाव का गहन-विश्लेषण करने के लिए उनके विचारों, दृष्टिकोणों और विभिन्न मामलों पर प्रतिक्रिया देने के उनके तरीकों और विधियों का इस्तेमाल किया। हमने मसीह-विरोधियों के विचारों में जो कुछ मौजूद होता है, उसके आधार पर उनके द्वारा की जाने वाली विभिन्न चीजों की प्रकृति का भी गहन-विश्लेषण किया। हमने कुछ मिसालें देकर उन उदाहरणों के माध्यम से प्रकट होने वाले उनके स्वभाव सार का गहन-विश्लेषण भी किया। इन उदाहरणों के संबंध में, क्या तुम लोगों ने इन व्यवहारों को प्रदर्शित और इन स्वभावों को प्रकट करने वाले लोगों में अपेक्षाकृत अच्छी मानवता वाले किसी व्यक्ति को देखा है? जब ऐसे व्यक्ति की बात आती है जिसमें ऐसे प्रकाशन और अभिव्यक्तियाँ होती हैं, तो क्या उसके चरित्र में ईमानदारी, दयालुता, सरलता, नेकनीयती, खराई आदि होती हैं? (नहीं होतीं।) स्पष्ट रूप से उसमें ये गुण नहीं होते। इसके विपरीत, उसका चरित्र कपटी, निर्दयी, आदतन झूठ बोलने वाला, स्वार्थी, नीच और गौरव की भावना से रहित होता है। उसके चरित्र की ये विशेषताएँ बिल्कुल स्पष्ट होती हैं। यह सटीक रूप से कहा जा सकता है कि जो लोग दिन भर दुष्ट विचार रखते हैं और जो विभिन्न दुष्ट चीजें कर सकते हैं, उन सभी का चरित्र बहुत खराब होता है। वह किस हद तक खराब होता है? उसमें जमीर, सत्यनिष्ठा और खास तौर पर सामान्य तर्क-शक्ति का अभाव होता है। क्या इन चीजों से रहित लोगों को इंसान माना जा सकता है? यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि जिन लोगों में ये चीजें नहीं होतीं, वे इंसान नहीं हैं; वे सिर्फ इंसान का बाहरी खोल ओढ़े हुए हैं। कुछ लोग पूछ सकते हैं, “क्या यह भेड़ की खाल में भेड़िये जैसा नहीं है?” यह तो सिर्फ एक रूपक है। भेड़ की खाल में भेड़िये क्या होते हैं? वे मूलतः भेड़िये होते हैं। क्या भेड़ियों और दानवों या मसीह-विरोधियों के बीच कोई मूलभूत अंतर होता है? भेड़िये मवेशियों और भेड़ों का शिकार करके खाते हैं, किसी लालच की वजह से नहीं बल्कि अपनी परमेश्वर-निर्धारित प्रकृति के अंश के रूप में। लेकिन भेड़ियों में एक चीज होती है, जो मसीह-विरोधियों में नहीं होती। अगर कोई भेड़िये को गोद लेकर पालता है या उसकी जान बचाता है, तो भेड़िया उस व्यक्ति को कभी नुकसान नहीं पहुँचाएगा और कृतज्ञता दिखाएगा। इसके विपरीत, मसीह-विरोधी परमेश्वर के अनुग्रह, अगुआई और उसके वचनों के पोषण का आनंद लेते हैं, फिर भी वे हर चीज में परमेश्वर के विरुद्ध षड्यंत्र रचते हैं, हमेशा उसके विरोध में रहते हैं और उसके प्रति शत्रुता रखते हैं। वे परमेश्वर द्वारा की जाने वाले किसी भी चीज के प्रति समर्पित नहीं हो सकते; वे उसके लिए आमीन नहीं कह सकते—वे विरोध में खड़े होना चाहते हैं। क्या यह कहना उचित है कि मसीह-विरोधी भेड़ की खाल में भेड़िये होते हैं? क्या यह रूपक सटीक है? (नहीं, यह सटीक नहीं है।) अतीत में, धर्म में जिसे भी मसीह-विरोधी या बुरा व्यक्ति करार दिया जाता था, उसे भेड़ की खाल में भेड़िया माना जाता था। यह सिर्फ एक रूपक था, जिसका इस्तेमाल लोग तब करते थे जब वे सत्य और विभिन्न व्यक्तियों के मानवता-सार और स्वभाव को नहीं समझते थे। लेकिन जब इस स्तर पर सत्य की संगति की जाती है, तो इस रूपक का उपयोग करना कम उपयुक्त हो जाता है। दानव दानव होते हैं और मसीह-विरोधी दानव के बराबर होते हैं और वे परमेश्वर द्वारा सृजित सभी जीवों से तुलना करने के काबिल नहीं होते। क्या परमेश्वर द्वारा सृजित किसी प्राणी, जैसे भेड़िये या अन्य मांसाहारी पशु ने कभी परमेश्वर का प्रतिरोध या उससे विद्रोह किया है? क्या वे परमेश्वर के विरुद्ध शोर मचाएँगे या उसका विरोध करेंगे? क्या वे परमेश्वर द्वारा कही गई किसी चीज की आलोचना, उसकी निंदा या उस पर हमला करेंगे? वे ऐसी हरकतें नहीं करते; वे सिर्फ उन प्रवृत्तियों और जीवन-परिवेश के अनुसार जीते हैं, जो परमेश्वर ने उनके लिए निर्धारित किया है। परमेश्वर ने उन्हें जैसा होने के लिए बनाया है, वे वैसे ही हैं—बिना किसी दिखावे के। लेकिन मसीह-विरोधी अलग होते हैं : उनमें शैतान की प्रकृति होती है और वे सकारात्मक चीजों और सत्य के विरुद्ध कार्य करने में विशेषज्ञता रखते हैं। वे बड़े लाल अजगर जैसे ही होते हैं : वे परमेश्वर के विरुद्ध प्रतिरोध के कार्य करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?