सत्य का अनुसरण कैसे करें (10) भाग दो

6. जन्मजात स्थितियों, मानवता और भ्रष्ट स्वभावों की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ

घटियापन

इससे पहले हमने ऐसी कई विशिष्ट अभिव्यक्तियों के बारे में संगति की थी जिनमें मानवता, जन्मजात स्थितियाँ और भ्रष्ट स्वभाव शामिल हैं। आज हम कुछ ऐसी विशिष्ट अभिव्यक्तियों के बारे में संगति करना जारी रखेंगे जिनमें ये तीन पहलू शामिल हैं। हम पहली अभिव्यक्ति से शुरू करेंगे : घटियापन। इस शब्द का क्या मतलब है? (इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति संतुलित नहीं है, ईमानदार और उचित नहीं है और वह गुपचुप और चोरी-छिपे रहता है।) (इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति का व्यवहार और चाल-ढाल अपेक्षाकृत दुष्ट लगते हैं।) अपेक्षाकृत दुष्ट—यह जरा-सा अमूर्त लगता है। ज्यादातर लोग यह कल्पना नहीं कर सकते हैं कि यह दुष्टता आखिर किस रूप में अभिव्यक्त होती है। क्या और भी हैं? (घटियापन का मतलब है कि व्यक्ति का व्यवहार और चाल-ढाल अपेक्षाकृत निम्न दर्जे के हैं।) तुमने कितने पहलुओं का जिक्र किया है? गुपचुप और चोरी-छिपे रहने वाला, दुष्ट, निम्न दर्जे का, घिनौना, शर्मनाक होना—क्या यही अभिव्यक्तियाँ नहीं हैं? (हाँ।) तो क्या घटियापन की अवधारणा को घिनौना और निम्न दर्जे के होने से प्रतिस्थापित किया जा सकता है? (हाँ।) घटियापन की इन अभिव्यक्तियों को किस पहलू के तहत श्रेणीबद्ध किया जाता है? (नीच चरित्र।) क्या यह मानवता की एक कमी है? (नहीं।) यह अभिव्यक्ति मानवता की कमी से कहीं ज्यादा गंभीर प्रकृति की है, इसलिए इसे मानवता की कमी के रूप में श्रेणीबद्ध नहीं किया जा सकता है। घटियापन नीच चरित्र की अभिव्यक्ति है। अगर कोई घटिया ढंग से कार्य करता है, वैसे तो यह नहीं कहा जा सकता है कि वह व्यक्ति कुकर्मी है, लेकिन घटियापन की अभिव्यक्तियों से इसे देखा जाए तो वह हमेशा लोगों को विमुख और घिनौना अनुभव करवाता है। ऐसे लोग जो घटियापन प्रदर्शित करते हैं, निश्चित रूप से पाजी और चोरी-छिपे ढंग से चीजें करते हैं, बिल्कुल भी पारदर्शी और ईमानदार नहीं होते हैं, अपेक्षाकृत नीच तरीके से व्यवहार करते हैं और हमेशा घिनौनी चीजें करते हैं। यानी वे चीजें करने में घिनौने, बेशर्म और शर्मनाक तरीकों का उपयोग करते हैं, ऐसे तरीके जो ईमानदार या खुले नहीं होते हैं। ज्यादातर लोग जब यह देखते हैं तब घिनौनापन और नफरत महसूस करते हैं। इससे पता चलता है कि वे घिनौने और अधम हैं। उनका सबसे प्रधान लक्षण विशेष रूप से अधम, नीच और घिनौना होना है। वे चाहे जो कुछ भी करें या कहें, उसमें वे ईमानदार और खुले नहीं हो सकते हैं; वे हमेशा कुछ चालें चलते रहते हैं और कुछ शर्मनाक चीजें करते रहते हैं। उदाहरण के लिए, परमेश्वर में विश्वास रखने को सार्वभौमिक रूप से एक बहुत उचित मामला माना जाता है, कुछ ऐसा जिसे लोग समझ सकते हैं और स्वीकार सकते हैं। लेकिन जब ये लोग परमेश्वर में विश्वास रखते हैं तब वे इस तरह से कार्य करते हैं जैसे उन्होंने गलत मार्ग अपना लिया हो, मानो यह कोई शर्मनाक बात हो। ये उस प्रकार के लोग हैं जो घिनौने और घटिया होते हैं। आमतौर पर घटिया लोग दूसरों के बीच क्या भूमिका निभाते हैं? (वे नकारात्मक चरित्र वाले, तिरस्कार किए जाने लायक लोग होते हैं।) वे नकारात्मक भूमिका निभाते हैं। ऐसे लोगों में क्या लक्षण होते हैं? ऐसा हो सकता है कि उनके रूप-रंग से तुम यह न बता सको कि वे बहुत बुरे हैं या तुम यह न देख सको कि वे जो करते हैं उसमें उनका कोई बुरा इरादा होता है। हालाँकि, कुछ समय तक उनसे मेल-जोल रखने के बाद तुम्हें लगता है कि वे हमेशा ऐसे तरीके से बोलते और कार्य करते हैं जो ईमानदार और खुला नहीं होता है। वे जो कहते हैं वह सुनने में अच्छा लगता है लेकिन पर्दे के पीछे वे जो करते हैं वह कुछ और ही चीज होती है। तुम्हें हमेशा लगता है कि उनके इरादे सही नहीं हैं या वे उन चीजों के बारे में बात नहीं करते हैं जिन्हें करने का वे इरादा रखते हैं जिससे तुम हैरान रह जाते हो। अंत में तुम्हें लगने लगता है कि ऐसे लोग बेहद गैर-भरोसेमंद हैं और वे सिर्फ घिनौनी, कपटी चीजें करते हैं और हमेशा तुम्हारे मामले बिगाड़ते हैं। ये घटिया लोग हैं। तुम इन लोगों को खुलेआम अपने अलग-अलग विचार व्यक्त करते या खुलेआम अपनी आपत्तियाँ प्रकट करते नहीं देखोगे। हो सकता है कि दूसरों के सामने वे कुछ ऐसा तक कह दें जो सुनने में अच्छा लगे, जैसे, “हम ऐसा नहीं कर सकते; हमें जमीर से कार्य करना चाहिए।” हालाँकि, पर्दे के पीछे वे चीजों में हेरफेर करते हैं, कुछ भेद नहीं पहचानने वाले, बेवकूफ और अज्ञानी लोगों को अपने इरादों के अनुसार कार्य करने के लिए उकसाते हैं। अंत में वे जो मामला पूरा करना चाहते थे वह पूरा हो जाता है, वे इस उपलब्धि का आनंद लेते हैं और फिर भी किसी को समझ नहीं आता कि यह उनकी कारस्तानी थी। तुम देखो कि वे दूसरों की मौजूदगी में कुछ कहते या करते नहीं हैं, फिर भी अंत में घटनाक्रम उसी दिशा में आगे बढ़ता है जिसमें उन्होंने हेरफेर की। इस परिप्रेक्ष्य से ऐसे लोग कुछ हद तक धूर्त भी होते हैं। क्या तुम लोगों के आस-पास घटिया लोग हैं? क्या आमतौर पर दूसरों के लिए घटिया लोगों का भेद पहचानना या उनकी असलियत देखना आसान होता है? (नहीं।) ये लोग खुद को बहुत गहराई से छिपा लेते हैं। उनके साथ जो मुद्दा है वह चरित्र की समस्या है; उनमें खराब मानवता सार होता है। क्या तुम लोगों के सामने घटिया लोग आए हैं? क्या तुम ऐसे लोगों की मुख्य अभिव्यक्तियों के बारे में स्पष्ट हो? (ज्यादा नहीं।) अब से तुम्हें ध्यान देने और यह देखने की जरूरत है कि तुम्हारे आस-पास किस तरह के लोग अक्सर घटियापन की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ प्रकट करते हैं। क्या इस लिहाज से ये अभिव्यक्तियाँ अपेक्षाकृत अमूर्त और छिपी हुई होती हैं? (हाँ।) भले ही तुम्हारे आस-पास ऐसे लोग हों, फिर भी तुम्हारे लिए उन्हें देखना आसान नहीं होगा क्योंकि उनका भेद पहचानना मुश्किल है। जब किसी दिन तुम लोग इसी तरह के किसी व्यक्ति को पहचान लोगे तब तुम उसे देख सकते हो और उसकी अभिव्यक्तियों को शुरू से अंत तक दर्ज कर सकते हो ताकि यह पता लगा सको कि सच में उसके लक्षण और सार क्या हैं, और फिर उसका सारांश प्रस्तुत कर सकते हो। घटियापन की अभिव्यक्ति के विषय पर हम अभी के लिए यहीं रुक जाएँगे।

अश्लीलता

अगली अभिव्यक्ति अश्लीलता है। सबसे पहले जरा एक नजर डालो—अश्लीलता किस पहलू के तहत आती है? (नीच चरित्र।) यह नीच चरित्र के तहत आती है। तो फिर आमतौर पर अश्लीलता का मतलब किस तरह की समस्याएँ हैं? (व्यक्ति के अंतर्वैयक्तिक आचरण की समस्याएँ।) यह बिल्कुल सटीक है—आमतौर पर अश्लीलता में पुरुषों और महिलाओं के बीच अंतर्वैयक्तिक आचरण की समस्याएँ शामिल होती हैं। तो क्या अश्लीलता पुरुषों पर लागू होती है या महिलाओं पर? (पुरुषों और महिलाओं दोनों पर।) यह सिर्फ एक लिंग पर लागू नहीं होती है। ऐसे पुरुष हैं, और ऐसी महिलाएँ हैं। इसलिए, ऐसा नहीं है कि सिर्फ पुरुष ही अश्लील हो सकते हैं। अगर महिलाओं में अंतर्वैयक्तिक आचरण की समस्या है, तो यह भी अश्लीलता है। तो अश्लीलता की विशिष्ट अभिव्यक्तियाँ क्या हैं? हमेशा विपरीत लिंग के साथ घुलना-मिलना और दिखावा करना पसंद करना—यह किस तरह की समस्या है? क्या यह कुछ हद तक अश्लील नहीं है? (हाँ।) विपरीत लिंग को देखकर वे उत्तेजित हो जाते हैं। जितने ज्यादा विपरीत लिंग के लोग होते हैं, उतने ही ज्यादा वे उत्तेजित हो जाते हैं और उतना ही ज्यादा दिखावा करना चाहते हैं। खासकर कुछ लोगों के लिए वे किस हद तक दिखावा करते हैं? अपनी छाती उघाड़ना और अपनी पीठ दिखाना, उत्तेजक इशारे करना, उत्तेजक शब्द कहना—क्या ये अश्लीलता की अभिव्यक्तियाँ नहीं हैं? (हाँ।) जब तक विपरीत लिंग के लोग, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो या चाहे उन्हें वे पसंद करते हों या नहीं, उनके आस-पास होते हैं, तब तक वे उन्हें आकर्षित करने के लिए भड़कीले, कामोत्तेजक या आकर्षक ढंग से कपड़े पहनते हैं। क्या यह अश्लीलता की अभिव्यक्ति नहीं है? (हाँ।) यह सबसे आम अभिव्यक्ति है। ये परिघटनाएँ पहले से ही आम हो चुकी हैं और अविश्वासियों के बीच इन्हें किसी असामान्य चीज के रूप में नहीं देखा जाता है। वे इसे अश्लीलता नहीं मानते हैं, बल्कि इसके बजाय इसे बहुत सामान्य और उचित मानते हैं। उनका मानना है कि महिला और पुरुष दोनों को खुद को विपरीत लिंग के व्यक्ति के लिए आकर्षक बनाने और उसके द्वारा सराहे जाने के लिए सुंदर ढंग से कपड़े पहनने चाहिए ताकि विपरीत लिंग के सदस्य उनका पीछा करने के लिए ललचा जाएँ। क्या ऐसे विचार और दृष्टिकोण अश्लील विचार और दृष्टिकोण हैं? (हाँ।) वे हमेशा विपरीत लिंग के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनना चाहते हैं, हमेशा उन्हें आकर्षित करना चाहते हैं और अपने लिए उनमें दिलचस्पी जगाना चाहते हैं; उनकी वैवाहिक स्थिति या उम्र चाहे जो भी हो, उनके पास हमेशा ये विचार और ये कार्य होते हैं और उनका जीवन ऐसे ख्यालों से भरा रहता है—क्या यह अश्लीलता नहीं है? (हाँ।) ये कुछ ऐसी अभिव्यक्तियाँ हैं जो ज्यादातर लोगों को अपेक्षाकृत स्वीकार्य लगती हैं और वे इन्हें अत्यधिक अश्लील नहीं समझते हैं—यह बस खुद को विपरीत लिंग के व्यक्ति के सामने पेश करना और दिखावा करना पसंद करना है। उदाहरण के लिए, अच्छे कपड़े पहनना, थोड़ा-सा इत्र छिड़कना, जरा-सा लुभावने कपड़े पहनना, उत्तेजक शब्द कहना या अपने आकर्षण की नुमाइश करना—ये अश्लील अभिव्यक्तियाँ ऐसी चीजें हैं जो ज्यादातर लोगों को सहनीय लगती हैं। अश्लीलता की एक और गंभीर अभिव्यक्ति यह है कि ऐसे लोग चाहे किसी भी परिवेश में विपरीत लिंग के सदस्यों को देखें, वे धृष्टता करने और उन्हें छूने की हिम्मत करते हैं। वे बिना यह विचार किए कि दूसरा व्यक्ति सहमत है या नहीं, यूँ ही उसके करीब आ जाते हैं और उसे छू लेते हैं, ऐसे पेश आते हैं जैसे वे हमेशा से एक-दूसरे से परिचित रहे हों। वे दूसरों के भावों और प्रतिक्रियाओं को देखने में विशेष रूप से कुशल होते हैं। अगर वे देखते हैं कि कोई व्यक्ति दूर नहीं भागता है और अपेक्षाकृत दब्बू है, तो वे यूँ ही उसके सिर या पीठ को छू लेने की हिम्मत करते हैं या यहाँ तक कि उसके करीब बैठ जाते हैं, या अगर दूसरा व्यक्ति प्रतिरोध नहीं करता है तो वे उसका हाथ पकड़ लेते हैं। कुछ महिलाएँ सीधे पुरुषों की गोद में बैठ सकती हैं, इस बात की परवाह किए बिना कि जब दूसरे इसे देखेंगे, तो उन्हें कैसा लगेगा। यह आम दिखावे से आगे बढ़कर कुछ ज्यादा ठोस बात हो गई है। क्या यह अश्लील होना नहीं है? (हाँ।) क्या ज्यादातर लोग इस तरह की अश्लीलता स्वीकार सकते हैं? (वे इसे स्वीकार नहीं सकते हैं।) कुछ लोग इसे कोई बड़ी बात नहीं मानते हैं और यहाँ तक कहते हैं, “यह अश्लीलता नहीं है। पुरुष और महिला का एक-दूसरे के प्रति स्नेह दिखाना बहुत सामान्य बात है। नहीं तो जीने का क्या मतलब है? पुरुषों को महिलाओं में मजा लेना चाहिए और महिलाओं को पुरुषों में—सिर्फ तभी जीवन दिलचस्प बनता है।” अगर विपरीत लिंग का कोई भी व्यक्ति उनके प्रति ऐसे अश्लील इशारे नहीं करता है, तो वे सोचते हैं, “कहीं ऐसा तो नहीं कि मुझमें कोई आकर्षण नहीं है? विपरीत लिंग के लोग मेरी ओर आकर्षित क्यों नहीं होते?” फिर वे निराश हो जाते हैं। जब ऐसे लोगों के सामने कोई ऐसा अश्लील व्यक्ति आता है जो उनके साथ कामुक रिश्ते बनाने का प्रयास करता है, तो वे बहुत संतुष्ट और अंदर से खुश महसूस करते हैं। कम-से-कम वे शारीरिक और मानसिक रूप से तृप्त महसूस तो करते ही हैं, सोचते हैं कि किसी का उनमें दिलचस्पी लेना उनके जीवन को सार्थक बनाता है। इसलिए, कुछ लोग इस तरह की अश्लीलता को स्वीकार सकते हैं। उदाहरण के लिए, मान लो कि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को पसंद करता है और उसके प्रति भावनाएँ रखता है; अगर दूसरा व्यक्ति हमेशा उसे नजरअंदाज करता है और उसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाता है, तो उसे बहुत निराशा होती है। लेकिन अगर वह व्यक्ति कभी-कभार उसे छू लेता है, छेड़ता है, उसके हाथों को सहलाता है या उसके करीब बैठ जाता है ताकि वह उसके शरीर की गर्माहट महसूस कर सके—या इससे भी आगे जाकर, अगर वह कोई पुरुष है जिसने किसी महिला के साथ धृष्टता की है, तो वह सोचती है, “वाह, यह अच्छा है, वह मुझे पसंद करता है। भले ही हम इस दुनिया में हमेशा के लिए एक न हो सकें, उसका मेरे साथ इस तरह से अश्लील व्यवहार करना कम-से-कम मेरे जीवन को सार्थक तो बनाता ही है!” देखो, कुछ लोग इस तरह की अश्लीलता से नफरत करने के बजाय इसे अपने दिलों की गहराइयों से स्वीकार लेते हैं। उनका रवैया इस बात पर निर्भर करता है कि ऐसी चीजें करने वाला विपरीत लिंग का व्यक्ति उनकी पसंद का व्यक्ति है या नहीं। अगर वे उसे पसंद करते हैं और उससे विकर्षित महसूस नहीं करते हैं या यहाँ तक कि अपने दिलों में उसकी लालसा भी करते हैं, तो वे ऐसे अश्लील लोगों या अश्लील हरकतों से नफरत नहीं करते हैं। इसके बजाय वे उसे स्वीकार सकते हैं और अपने दिलों में उसका स्वागत कर सकते हैं, अपने दिलों में उसे जगह दे सकते हैं। इस प्रकार कुछ लोग भीतर से ऐसे अश्लील व्यक्तियों को स्वीकार लेते हैं। चूँकि अश्लील लोग अच्छे नहीं होते हैं, तो क्या इसका मतलब यह नहीं है कि जो लोग इस तरह का अश्लील व्यवहार स्वीकार सकते हैं, वे भी अश्लील होते हैं? (हाँ।) वे भी अश्लील होते हैं। ऐसी कुछ अभिव्यक्तियाँ हैं जो इस तरह की अश्लीलता से ज्यादा गंभीर हैं—सिर्फ थोड़ा-सा दिखावा करना नहीं, सिर्फ नजरों में बात करना नहीं या थोड़ा-सा शारीरिक स्पर्श करना नहीं, बल्कि इससे भी आगे बढ़ना। इन लोगों के मनों में ऐसी अश्लील चीजें ही भरी रहती हैं। अगर ऐसा तब होता है जब कोई डेटिंग कर रहा है, तो यह सामान्य अभिव्यक्ति है। लेकिन अगर किसी की उम्र और वास्तविक हालात इसकी अनुमति नहीं देते हैं और फिर भी वह जब भी विपरीत लिंग के व्यक्ति को देखता है, तब पूरी तरह से ऐसी बातें सोचता है, तो इस अभिव्यक्ति का सार क्या है? इसका मतलब है कि विपरीत लिंग के व्यक्ति से सामना होने पर उसके मन में हमेशा एक तरह की इच्छा और लालसा होती है या उसके मन में कोई लक्ष्य होता है—ऐसा नहीं है कि वह बस अपनी कोई मानसिक जरूरत पूरी करना चाहता है और बस हो गया; बल्कि वह ठोस कार्य करना और ठोस प्रगति करना चाहता है। अपने दिल में वह इन चीजों के पीछे लगातार भागता रहता है; अपने मन में अश्लील चीजों के बारे में सोचने के अलावा, अपने व्यवहार के लिहाज से वह अपनी कामुक इच्छा को तुष्ट करने और उसे बाहर निकालने के लिए विपरीत लिंग के उपयुक्त सदस्यों से संपर्क बनाने का प्रयास करना शुरू कर देता है। क्या ऐसे लोग अश्लील नहीं होते हैं? (हाँ।) पिछले दो प्रकार के अश्लील लोगों की तुलना में क्या इस प्रकार का अश्लील व्यक्ति बहुत खतरनाक और डरावना नहीं है? (हाँ।) ऐसे अश्लील लोग किसी भी समय हरकत कर सकते हैं—यह पहले से ही यह दिखा देता है कि वे बहुत दुष्ट और अश्लील हैं। जहाँ तक इससे आगे के स्तरों की बात है, हम उन पर आगे चर्चा नहीं करेंगे।

तो इन तीन प्रकार की अश्लीलताओं में से तुम लोग किसे स्वीकार सकते हो? यानी इनमें से कौन-सा प्रकार तुम लोगों को यह महसूस करवाता है कि किसी का इस तरीके से कार्य करना सामान्य है, कोई बड़ी समस्या नहीं है और वह ऐसा व्यक्ति है जिसके प्रति तुम बहुत घिन या तिरस्कार महसूस नहीं करते हो और जिसे कुछ हद तक स्वीकार सकते हो? तुम लोग अश्लीलता के किस स्तर को स्वीकार सकते हो? (हम किसी भी स्तर को स्वीकार नहीं कर सकते हैं।) तुम लोग अश्लीलता के किसी भी स्तर को क्यों स्वीकार नहीं कर सकते? (अश्लीलता के अंतिम प्रकार की प्रकृति काफी नीच है और वैसे तो अश्लीलता के पहले प्रकार में विपरीत लिंग के लोगों के सामने सिर्फ दिखावा करना शामिल है, लेकिन यह उनके आस-पास के लोगों के लिए विघ्न उत्पन्न करता है।) पहले प्रकार के व्यक्ति के दिल में लिंग भेद का स्पष्ट बोध नहीं होता है। ज्यादातर लोग विपरीत लिंग के लोगों से मेलजोल रखते समय पुरुषों और महिलाओं के बीच की सीमाओं का ध्यान रखते हैं। विशेष रूप से जब महिलाओं की पुरुषों से मेलजोल रखने की बात आती है, तो उन्हें पुरुषों के सामने संयमी होना चाहिए और कुछ सीमाएँ बनाकर रखनी चाहिए। हालाँकि कुछ महिलाओं को विपरीत लिंग के लोगों से मेलजोल रखने में मजा आता है और जब उन्हें ऐसा कोई नजर आता है जिसे वे पसंद करती हैं, तो वे उत्तेजित हो जाती हैं। उन्हें जैसे ही मौका मिलता है, वे संपर्क बनाने का बहाना ढूँढ़ती हैं। जो कोई भी जानबूझकर विपरीत लिंग के लोगों से मेलजोल रखने का प्रयास करता है, उसके दिल में कुछ असामान्य बात होती है। वैसे तो अश्लीलता के पहले प्रकार में कार्य करने के ठोस अश्लील तरीके शामिल नहीं होते हैं या यह किसी ठोस घटना की तरफ नहीं ले जाता है और न ही इसमें यौन उत्पीड़न शामिल होता है, लेकिन इन लोगों की अभिव्यक्तियों के आधार पर, अंतर्वैयक्तिक आचरण के लिहाज से, इनमें पुरुषों और महिलाओं के बीच स्पष्ट सीमाओं की कमी होती है। यानी अपने दिलों में वे कोई स्पष्ट सीमा नहीं रखते हैं और वे यह नहीं समझते हैं कि सामान्य लोगों में शर्म की भावना होनी चाहिए और उन्हें दूसरों को खुद को नीचा दिखाए जाने का मौका नहीं देना चाहिए। अगर कोई इस बारे में कुछ महसूस किए बिना अश्लील अभिव्यक्तियाँ प्रदर्शित करता है तो वह सामान्य व्यक्ति नहीं है और कम-से-कम उसमें सामान्य लोगों के जमीर और विवेक नहीं हैं। चाहे व्यक्ति पुरुष हो या महिला, उसे महिला और पुरुष के बीच की सीमाओं का पालन करना चाहिए और उसके दिल में यह स्पष्ट होना चाहिए कि इन सीमाओं को पार नहीं किया जा सकता है। परमेश्वर ने पुरुषों और महिलाओं को अंतर्निहित अंतरों के साथ बनाया है; उनके बीच की रेखा को धुँधला करना संभव नहीं है। अगर किसी व्यक्ति में हमेशा पुरुषों और महिलाओं के बीच स्पष्ट सीमाओं की कमी रहती है और वह विपरीत लिंग के लोगों के सामने लगातार दिखावा करता रहता है, तो यह सिर्फ सामान्य स्वच्छंदता या संयम की कमी नहीं है—इसमें अंतर्वैयक्तिक आचरण के मामले शामिल हैं। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह जो चीजें करता है उसमें ठोस समस्याएँ शामिल हैं या नहीं, जब तक इन अभिव्यक्तियों में अंतर्वैयक्तिक आचरण के मुद्दे शामिल हैं, वे मानवीय शर्म की भावना से असंगत हैं। खासकर पुरुषों और महिलाओं के बीच के मामलों में अगर कोई व्यक्ति शर्म से अनजान है या उसमें शर्म की भावना नहीं है, तो वह बहुत खतरे में है। अगर तुम जानबूझकर विपरीत लिंग के लोगों के सामने अपने आकर्षण की नुमाइश कर सकते हो और उन्हें आकर्षित करने का प्रयास करते हो, तो इस बात की बहुत संभावना है कि तुम अश्लीलता के अगले स्तर पर पहुँच जाओगे। हो सकता है कि तुम दिखावा करने से शुरुआत करो, लेकिन यह आसानी से छेड़छाड़ करने में बदल सकता है और छेड़छाड़ करने से यह आसानी से किसी और ठोस चीज में बदल सकता है और अंत में यह तुम्हारे लिए नियंत्रण से बाहर हो सकता है। देखो, चाहे अश्लीलता का स्तर कोई भी हो, जब तक यह अश्लीलता के दायरे में आता है, इसमें अंतर्वैयक्तिक आचरण की समस्या शामिल होती है। एक बार जब इसमें अंतर्वैयक्तिक आचरण की कोई समस्या शामिल हो जाती है, तब गंभीरता के स्तरों के बीच कोई अंतर नहीं रह जाता है। वह इसलिए क्योंकि ऐसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं—दिखावा करने और शर्म की भावना के अभाव से शुरू होकर यह आसानी से शारीरिक संपर्क, लगाव होने और फिर एक दूसरे से अलग नहीं किए जा सकने की तरफ बढ़ सकती है। वहाँ से यह चीज आगे बढ़ सकती है और नियंत्रण से बाहर हो सकती है जिससे पछतावे के लिए बहुत देर हो जाती है। एक बार जब यह हकीकत बन जाती है, तो इसे उचित अंत तक लाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम अश्लीलता की अभिव्यक्तियों का कौन-सा प्रकार प्रदर्शित करते हो, जब तक इसमें अंतर्वैयक्तिक आचरण की एक समस्या शामिल है, अगर तुम खुद को नहीं रोकते हो और तुममें शर्म की भावना नहीं है—अगर तुम इस बात से पूरी तरह से उदासीन हो कि दूसरे लोग तुम्हारे बारे में क्या कहते हैं, लोग तुम्हारा मूल्यांकन कैसे करते हैं या परमेश्वर तुम्हें कैसे देखता है—तब तक तुम बहुत बड़े खतरे में हो। बहुत बड़े खतरे में होने का क्या मतलब है? इसका मतलब है कि सामान्य अश्लील हरकतों और अभिव्यक्तियों से शुरू होकर पतन की ओर अग्रसर होना और ऐसी बेतुकी चीजें करना बहुत आसान है जो तुम्हें जीवन भर का पछतावा दे जाती हैं। तुम समझ रहे हो? (हाँ।) इसलिए, अगर तुम अश्लीलता की समस्या के सार की असलियत नहीं देख सकते हो और उसे समय पर हल करने में विफल होते हो, तो तुम भारी मुसीबत में हो। अगर तुम ऐसी अभिव्यक्तियाँ प्रदर्शित करते हो या तुम्हें ऐसी चीजों का अनुसरण करने में मजा आता है, तो यह साबित करता है कि तुम्हारी मानवता में एक गंभीर समस्या है। क्या समस्या है? शर्म की भावना का अभाव है। अंतर्वैयक्तिक आचरण का मुद्दा व्यक्ति की शर्म की भावना से संबंधित है। अगर तुममें शर्म की भावना का अभाव है, तो इसका मतलब है कि ऐसी चीजें करते समय तुम्हारी कोई सीमा नहीं होती है। तुम जो भी सोचते हो, उस पर कार्य कर सकते हो। तुम्हारे विचार और इच्छाएँ न तो नियंत्रित होंगी और न ही सीमित होंगी। जब तक परिवेश उपयुक्त है, तब तक तुम्हारे विचार और इच्छाएँ खुद को सक्रिय करने के मौके का उपयोग करेंगी, उनमें धीरे-धीरे उभार आएगा और वे फटने की हद तक पहुँच जाएँगी। इसके भयानक नतीजे सामने आएँगे।

अगर तुम्हारे आस-पास ऐसे अश्लील लोग हैं जिनकी अश्लीलता की समस्या सिर्फ कभी-कभार कोई अकेली उत्तेजक टिप्पणी करना नहीं है और जिनकी अश्लीलता सिर्फ कुछ विशिष्ट व्यक्तियों की तरफ निर्देशित नहीं है—बल्कि वे अक्सर इस तरह से व्यवहार करते हैं, उनमें शर्म की किसी भी तरह की कोई भावना नहीं है और जब दूसरे लोग उनसे नफरत करते हैं, उन्हें याद दिलाते हैं या चेतावनी देते हैं तब भी समस्या अनसुलझी रह जाती है और वे अश्लील ही बने रहते हैं और उनकी अश्लीलता उत्तरोत्तर गंभीर होती चली जाती है—और अगर तुम लोगों के सामने ऐसे लोग आ जाते हैं तो तुम्हें उनसे बचना चाहिए। तुम्हें उनसे क्यों बचना चाहिए? क्योंकि अश्लील लोगों में कोई शर्म नहीं होती है। क्या बेशर्म लोग अपनी हरकतों में कोई संयम रखते हैं? क्या वे खुद पर संयम रख सकते हैं? (नहीं।) वे खुद पर संयम नहीं रख सकते, इसलिए तुम्हें ऐसे लोगों से बचना चाहिए; उनके साथ मेलजोल रखने से बचने का भरसक प्रयास करो। अगर कार्य की वजह से तुमसे उनसे संपर्क रखना अपेक्षित है और इससे बचा नहीं जा सकता है, तो इसे पूरी तरह से व्यावसायिक संपर्क बनाए रखो, लेकिन जब तुम उनसे बातचीत करो, तो सबसे अच्छा यह होगा कि कई दूसरे लोग वहाँ मौजूद रहें। उनके साथ अकेले में मेलजोल मत रखो और उन्हें शोषण करने का कोई मौका मत दो। उनके साथ अकेले रहने से बचने का पूरा प्रयास करो ताकि तुम प्रलोभन में न पड़ो और शैतान को शोषण करने का कोई मौका न दो। चाहे यह किसी भी तरह का अश्लील व्यवहार क्यों न हो, जब तक तुम यह पहचान लेते हो कि ऐसे लोगों को अपने अंतर्वैयक्तिक आचरण में कोई शर्म नहीं है, वे विपरीत लिंग के किसी भी सदस्य के साथ इश्कबाजी कर सकते हैं और वे इतने अश्लील भी हैं कि विपरीत लिंग के कई सदस्यों की मौजूदगी में फूहड़ चुटकुले भी सुना सकते हैं, ऐसे बोल सकते हैं जैसे यह बिल्कुल सामान्य बात हो, जिससे सुनने वालों के गाल लाल हो जाते हैं, वे झेंप जाते हैं और इसे सुनना बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं, जबकि उन्हें खुद कुछ भी महसूस नहीं होता है, वे अनजान होते हैं और उन्हें कोई परवाह नहीं होती है, तो ऐसे लोगों से बचना चाहिए। तुम समझ रहे हो? (हाँ।) खासकर तब जब अकेले में उनसे बातचीत करते समय वे तुम्हारे लिए विशेष चिंता और ध्यान दिखाते हैं और तुम्हारे दोषों और कमियों के प्रति और भी ज्यादा सहनशील होते हैं और फिर अक्सर तुम्हारे साथ छेड़छाड़ करते हैं या बाहर से तो खुद को सज्जन और सभ्य दिखाते हैं, लेकिन उनके शब्दों में हमेशा फूहड़पन का हल्का इशारा होता है—ऐसे लोग बहुत खतरनाक होते हैं और तुम लोगों को उनसे सावधान रहना चाहिए। कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो, जिन मामलों के लिए स्पष्ट रूप से समान लिंग के किसी व्यक्ति के साथ संगति की जा सकती है या उनके बारे में उससे पूछताछ की जा सकती है उन मामलों के लिए या जिस कार्य को समान लिंग के किसी व्यक्ति के साथ सँभाला जा सकता है उस कार्य के लिए, ऐसा नहीं करते हैं बल्कि विपरीत लिंग के किसी व्यक्ति को ढूँढ़ने पर जोर देते हैं। विपरीत लिंग के जिस भी व्यक्ति पर उनकी नजर पड़ती है, उससे वे लगातार सवाल पूछते रहते हैं, उसे तंग करते रहते हैं, उससे बेकार की बातचीत शुरू कर देते हैं और उसे परेशान करने के लिए कहानियाँ बनाते हैं, हमेशा उससे ऐसे बेकार प्रश्न पूछते रहते हैं जिन्हें पूछने की जरूरत नहीं होती है और इस व्यक्ति से अकेले में मेलजोल रखने के मौके पैदा करने का बेहद प्रयास करते हैं। मौके तलाशने का उनका मकसद अपनी खुद की इच्छाएँ पूरी करना होता है। चाहे तुम पुरुष हो या महिला, ऐसे लोगों से सामना होने पर तुम्हें क्या करना चाहिए? (उनसे दूर रहना चाहिए।) तुम्हें उन्हें मना करने का कोई तरीका सोचना चाहिए; उन्हें बात साफ-साफ समझा दो। यूँ ही चुपचाप उनसे दूर रहकर यह मत सोच लेना कि बस इतना ही काफी है। अगर वे कभी-कभार तुम्हें एक बार तंग करें, तो हो सकता है कि तुम यह तय नहीं कर पाओ कि वे अश्लील व्यवहार कर रहे हैं या नहीं। लेकिन अगर वे बार-बार तुम्हें तंग करते हैं, तो तुम्हें उन्हें यह बात स्पष्ट कर देनी चाहिए। तुम्हें क्या कहना चाहिए? तुम उनसे कह सकते हो : “तुम मुझे एक-दो बार से ज्यादा परेशान कर चुके हो—तुम कहना क्या चाहते हो? अपनी बात साफ-साफ कहो! क्या हमारे बीच सच में उस तरह का कामकाजी रिश्ता है? यहाँ ऐसे बहुत-से लोग हैं जिनसे तुम पूछ सकते हो, फिर भी तुम मुझसे पूछने और मेरे पास आने पर अड़े रहते हो—क्या हम वाकई इतने करीब हैं? ऐसा मत करो। मुझे दिलचस्पी नहीं है और मुझे इस तरीके से लोगों से मेलजोल रखना पसंद नहीं है। कृपया भविष्य में मुझे फिर से परेशान मत करना। मुझे तुममें किसी भी तरह की कोई दिलचस्पी नहीं है। अगर तुम भविष्य में मुझे इसी तरह से परेशान करते रहे, तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा!” ऐसे लोगों से पेश आने का क्या तरीका अपनाना चाहिए? (उनसे दूर रहना और उन्हें मना करना।) अगर ऐसे लोग बार-बार फटकारे जाने पर भी ढीठ बने रहते हैं, तो उनसे कैसे निपटा जाना चाहिए? उन्हें फिर कलीसिया के प्रशासनिक विनियमों के अनुसार अलग-थलग करके या हटाकर उनसे निपटा जाना चाहिए। कुछ लोग खुशामदी होते हैं, जो दूसरों को नाराज करने की हिम्मत नहीं करते हैं और अंदर ही अंदर इस तरह के अश्लील व्यक्ति से डरते हैं। यह परेशानी वाली बात है। वे उनके द्वारा सिर्फ खिलवाड़ ही किए जा सकते हैं। ऐसे अश्लील लोगों के साथ सख्ती से पेश आना चाहिए। उनके प्रति तुम्हारा व्यवहार ठंडा होना चाहिए, लेकिन झुंझलाने की जरूरत नहीं है—बस शांति से बोल दो : “चलो, हम ये बचकाने खेल नहीं खेलें। मुझे तुम्हारी असलियत भली-भाँति समझ आ रही है कि तुम क्या चाहते हो। मेरे साथ यह खेल खेलने से तुम्हारी दाल नहीं गलेगी। तुम मुझे पसंद नहीं हो, इसलिए कृपया मुझे फिर से परेशान मत करना! अगर तुम मुझे बार-बार परेशान करोगे, तो मेरे पास तुमसे निपटने के बहुत-से तरीके हैं!” क्या यह उन्हें मना करना नहीं है? (हाँ।) क्या तुम लोग उन्हें इस तरीके से मना कर पाओगे? (परमेश्वर के वचन सुनने के बाद, हाँ। परमेश्वर के बोलने से पहले हम उन्हें इस तरह से मना करने की हिम्मत नहीं करते थे।) यकीनन यह सिर्फ एक उदाहरण है। ऐसी परिस्थितियाँ सिर्फ पुरुषों द्वारा महिलाओं को परेशान किए जाने तक ही सीमित नहीं हैं; इनमें महिलाओं द्वारा पुरुषों को परेशान किया जाना भी शामिल है। संक्षेप में, चाहे तुम कोई पुरुष हो या महिला जिसे परेशान किया जा रहा हो, अगर तुम यह स्पष्ट रूप से देख सकते हो कि ऐसे अश्लील लोग मेलजोल रखने में, दिल खोलकर बातचीत करने में या तुमसे परामर्श करते समय सचमुच सामान्य रूप से शामिल नहीं हो रहे हैं, तो तुम उन्हें मना कर सकते हो। ऐसे लोगों से मेलजोल रखते समय उनका इरादा भाँपना बहुत आसान है और तुम्हें सावधान रहना चाहिए। तुम्हें उनसे कहना चाहिए : “हम एक-दूसरे से परिचित नहीं हैं, इसलिए बेहतर होगा कि तुम मुझे परेशान न करो!” अगर वे बार-बार तुम्हें परेशान करते हैं और फिर भी तुम्हें उन्हें मना करने में शर्म आती है, यह फिक्र होती है कि कहीं तुम उनकी भावनाओं को ठेस न पहुँचा दो, यह सोचते हो कि भाई-बहन होने के नाते तुम्हें उनके प्रति सहनशील होना चाहिए तो तुम्हें उन नतीजों को समझना चाहिए जो इस सहनशीलता के कारण हो सकते हैं। अगर तुम उन्हें पसंद करते हो और उनके साथ मेलजोल रखने को तैयार हो, तो यह तुम्हारी आजादी है। यकीनन, क्या किसी अश्लील व्यक्ति से सहानुभूति रखना या यहाँ तक कि उसे पसंद करना बेवकूफी नहीं है? अगर वे तुम्हारे साथ अश्लील ढंग से व्यवहार कर सकते हैं, तो वे दूसरों के साथ भी ऐसा कर सकते हैं। ऐसे लोगों से मेलजोल रखना अपनी ही कब्र खोदना है—मौत को दावत देना है। इसलिए, ऐसे लोगों के मामले में तुम्हें सीधे मना कर देना चाहिए; उन्हें सब कुछ स्पष्ट कर दो और उनसे दूरी बनाए रखने के लिए कह दो। क्या यह बहुत आसान नहीं है? (हाँ।) सच में अश्लील लोगों का मतलब है वे लोग जिनकी मानवता में शर्म नहीं होती है। यकीनन, लोग, चाहे वे पुरुष हों या महिलाएँ, विपरीत लिंग के लोगों से मिलते समय कभी-कभार जरा-सी असामान्य अभिव्यक्तियाँ प्रदर्शित कर सकते हैं। जब तक यह आदतन न हो, इसके कारण क्रियाकलाप या दुष्परिणाम न हों और कुछ समय की अवधि के बाद जब व्यक्ति को यह अनुचित लगे तो वह इसे सुधार सके, तब तक इसे अश्लीलता के रूप में श्रेणीबद्ध नहीं किया जा सकता है। इन कुछ हद तक असामान्य अभिव्यक्तियों का सामान्यकरण नहीं किया जाना चाहिए। अश्लील होना व्यक्ति की मानवता में शर्म की कमी की अभिव्यक्ति है। ऐसे लोगों की प्राथमिक अभिव्यक्ति यह है कि अपने अंतर्वैयक्तिक आचरण में उनमें कोई शर्म नहीं होती है—वे बेलगाम, असंयमित और विशेष रूप से स्वच्छंद होते हैं। इसे व्यक्ति की मानवता में अश्लीलता की अभिव्यक्ति के रूप में श्रेणीबद्ध किया जाता है। अब क्या तुम्हें मालूम है कि ऐसे लोगों से कैसे निपटना है और उन्हें कैसे सँभालना है? (हाँ।) अश्लीलता के विषय पर हमारी चर्चा यहीं समाप्त होती है।

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