सत्य का अनुसरण कैसे करें (6) भाग चार
नंबर 7 : चीजों को पहचानने की क्षमता
अब जबकि हमने आकलन करने की क्षमता पर चर्चा पूरी कर ली है तो चलो, अब चीजों को पहचानने की क्षमता के बारे में बात करते हैं। चीजों को पहचानने की क्षमता का क्या मतलब है? इसका मतलब मुख्य रूप से यह पहचानना है कि लोग, घटनाएँ और चीजें सकारात्मक हैं या नकारात्मक, सही हैं या गलत और उचित हैं या अनुचित; इसका मतलब है लोगों, घटनाओं और चीजों का निरूपण करना या वर्गीकरण करना—अपने सामने आने वाले लोगों, घटनाओं और चीजों को विभिन्न श्रेणियों में श्रेणीबद्ध करना। पहचानने का इरादा और उद्देश्य लोगों को उनके प्रकार के अनुसार छाँटना और सकारात्मक और नकारात्मक चीजों को उनके प्रकार के अनुसार छाँटना है। बेशक, वर्गीकरण का मतलब पक्षियों को पक्षियों की श्रेणी में, जानवरों को जानवरों की श्रेणी में या पौधों को पौधों की श्रेणी में रखना नहीं है। चीजों को पहचानने की क्षमता का मतलब इन्हें पहचानने की क्षमता नहीं है, बल्कि विभिन्न लोगों, घटनाओं और चीजों के गुणधर्म पहचानने की क्षमता है। उदाहरण के लिए, क्या तुम विभिन्न लोगों की अभिव्यक्तियों, प्रकाशनों और सार को श्रेणीबद्ध कर सकते हो? क्या तुम अपने सामने आने वाले विभिन्न लोगों, घटनाओं और चीजों के गुणधर्म परिभाषित कर सकते हो? उदाहरण के लिए, छद्म-विश्वासियों की पहचान करने में, क्या तुम छद्म-विश्वासियों के उन प्रकाशनों की पहचान कर सकते हो जो तुम्हें स्पष्ट रूप से यह पहचानने में सक्षम बनाते हैं कि वे छद्म-विश्वासी हैं? अगर तुम जानते हो कि छद्म-विश्वासियों की क्या विशेषताएँ और लक्षण होते हैं, वे मानवता के कौन-से प्रकाशन प्रदर्शित करते हैं, वे क्या शब्द कहते हैं, वे क्या कार्रवाइयाँ करते हैं और उनके क्या विचार और दृष्टिकोण हैं, तो तुम्हें छद्म-विश्वासियों की पहचान करने में सक्षम होना चाहिए। अच्छी काबिलियत वाला व्यक्ति विभिन्न लोगों, घटनाओं और चीजों के दिखने पर यह पहचान सकता है कि वे सकारात्मक चीजें हैं या नकारात्मक चीजें, सकारात्मक लोग हैं या नकारात्मक लोग, वे न्यायसंगत हैं या बुरे, और वे सही हैं या गलत। वे विभिन्न लोगों, घटनाओं और चीजों के गुणधर्म परिभाषित कर सकते हैं और पहचान सकते हैं कि वे मानवता और सत्य के अनुरूप हैं या नहीं। यह अच्छी काबिलियत वाला व्यक्ति है। फिर औसत काबिलियत वाले लोगों के बारे में क्या? वे स्पष्ट गुणधर्मों वाले विभिन्न लोगों, घटनाओं और चीजों की पहचान कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ लोग कहते हैं, “परमेश्वर कैसे हो सकता है? वह कहाँ है? मैं पुष्टि क्यों नहीं कर सकता कि वह मौजूद है?” उनमें परमेश्वर को स्पष्ट रूप से नकारने वाले ऐसे शब्दों के प्रति कुछ विवेकशीलता होती है और वे पहचान सकते हैं कि ऐसे लोग छद्म-विश्वासी और नकारात्मक चरित्र वाले हैं। वे स्पष्ट बुराई और स्पष्ट रूप से नकारात्मक, अन्यायपूर्ण, दुष्ट चीजों की पहचान कर सकते हैं, लेकिन कुछ चीजें जो सत्याभासी होती हैं और जिनके बारे में शायद ही किसी ने सुना होता है और जो मध्यवर्ती क्षेत्र या धूसर क्षेत्र में पड़ती हैं, वे उनमें अंतर नहीं कर सकते, न ही वे उनके साथ अलग व्यवहार करने में सक्षम होते हैं। उनमें स्पष्ट दुष्कर्म करने वाले बुरे लोगों का भेद पहचानने की क्षमता होती है। वे जानते हैं कि ऐसा व्यक्ति बुरा है और अगर कोई उस जैसा बुरा व्यक्ति अगुआ बनकर रुतबा हासिल कर लेता है तो वह मसीह-विरोधी होगा। लेकिन अगर इस व्यक्ति का चरित्र खराब है और फिर भी उसने बुरे कर्म नहीं किए हैं तो वे यह नहीं पहचान पाएँगे कि उसे बुरे व्यक्ति के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है या नहीं और वह कौन-से बुरे कर्म कर सकता है, न ही वे इस व्यक्ति के गुणधर्म परिभाषित कर पाएँगे। यह औसत काबिलियत वाला होना है। कुछ लोगों का व्यवहार बिलकुल स्पष्ट होता है, जैसे अनैतिकता में लिप्त होना, मूर्तियों की पूजा करना, सांसारिक चीजों का अनुसरण करना, गपशप पसंद करना, अक्सर दूसरों को दबाना और धौंस देना या हत्या और आगजनी करना, और वे कहेंगे कि ये अच्छे लोग नहीं हैं और ये वे लोग हैं जिनसे परमेश्वर घृणा करता है; वे यह भेद कर सकते हैं। लेकिन ऐसे कुछ लोगों के बारे में, जिनका बाहरी व्यवहार काफी अच्छा दिखाई देता है—अक्सर दान देना और दूसरों की मदद करना, लोगों के प्रति धैर्य दिखाना, दूसरों के साथ काफी अच्छी तरह मिलजुलकर रहना—जिनकी मानवता बाहर से काफी अच्छी दिखाई देती है, फिर भी जिनके शब्द और क्रियाकलाप ज्यादातर समय सत्य के अनुरूप नहीं होते और जिनके क्रियाकलाप अक्सर सत्य सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं, वे यह भेद नहीं कर पाएँगे कि ऐसे लोग सत्य का अनुसरण करने वाले लोग हैं या नहीं, या वे वास्तव में किस श्रेणी में आते हैं। जो लोग, घटनाएँ और चीजें स्पष्ट होती हैं और जिन पर आसानी से लेबल चस्पा किए जा सकते हैं, उनका भेद वे पहचान सकते हैं कि वे सही हैं या गलत, उचित हैं या अनुचित, न्यायी हैं या दुष्ट, और वे सकारात्मक चीजें हैं या नकारात्मक चीजें। वे ऐसे बाहरी मामलों में अंतर कर सकते हैं, लेकिन जब उन लोगों, घटनाओं और चीजों की बात आती है जिनमें वास्तव में सिद्धांत शामिल होते हैं और जो सत्य से संबंधित हैं तो वे अंतर नहीं कर सकते। वे यह भेद नहीं पहचान सकते कि कौन-सी चीजें स्पष्ट रूप से सत्य के अनुरूप हैं और कौन-सी सत्य का उल्लंघन करती हैं। यह औसत काबिलियत वाला होना है। उदाहरण के लिए, कुछ लोग अपेक्षाकृत अच्छे वस्त्र से बने कपड़े पहनते हैं जो सुरुचिपूर्ण और उच्च-गुणवत्ता वाले दिखते हैं और उन्हें दुनिया की उच्च-स्तरीय हस्तियों या सफेदपोश अभिजात वर्ग जैसा दिखाते हैं। यह देखकर औसत काबिलियत वाले लोग कहते हैं, “ये कपड़े गैर-विश्वासियों को पसंद आते हैं। परमेश्वर में विश्वास करने वाले लोगों के रूप में हमें इन्हें पसंद नहीं करना चाहिए; ये सकारात्मक चीजें नहीं हैं।” यह कहना गलत है। ये कपड़े लुभावने या मोहक नहीं लगते, बल्कि सुरुचिपूर्ण, गरिमामय और शालीन दिखते हैं जिससे पहनने वाला कुलीन दिखाई देता है। लेकिन ये लोग ऐसे कपड़ों को—जो पहनने वाले को कुलीन और सुरुचिपूर्ण दिखाते हैं और जो वर्तमान में फैशनेबल भी हैं—नकारात्मक चीज मानते हैं और कहते हैं कि वे दुष्ट हैं। यह इन चीजों को पहचानने में असमर्थ होना है, है ना? (हाँ।) तो ऐसे लोगों की चीजों को पहचानने की क्षमता कैसी है? ज्यादा से ज्यादा, यह औसत है। यह औसत काबिलियत होना है। ऐसे लोग उन कुछ चीजों में अंतर करने में भी सक्षम नहीं होते जिनमें गैर-विश्वासी अंतर कर सकते हैं—अच्छी काबिलियत वाले गैर-विश्वासी अच्छी और बुरी मानवता का भेद पहचान सकते हैं लेकिन ये लोग नहीं पहचान सकते। परमेश्वर में विश्वास करने के बाद कुछ धर्म-सिद्धांत समझने के बावजूद ऐसे लोग सकारात्मक और नकारात्मक चीजों में अंतर नहीं कर सकते। वे उन चीजों का भेद पहचान सकते हैं जो स्पष्ट होती हैं, लेकिन वे उन चीजों का भेद नहीं पहचान सकते जो स्पष्ट नहीं होतीं। वे स्पष्ट रूप से बुरे लोगों, विघ्न-बाधाएँ पैदा किए जाने की स्पष्ट घटनाओं और सिद्धांतों के उल्लंघन किए जाने की स्पष्ट घटनाओं का भेद पहचानने में सक्षम होते हैं, लेकिन जब उन कुछ लोगों, घटनाओं और चीजों की बात आती है जो अपेक्षाकृत विशेष, भयावह और विचित्र होती हैं और छाया में छिपी होती हैं तो वे उन्हें नहीं पहचान सकते। दूसरों की संगति और अनुबोधनों के जरिये या लोगों के द्वारा खुद कुछ स्पष्ट रूप से किए जाने पर ही वे उन्हें पहचान सकते हैं। वरना वे नहीं पहचान सकते। यह दर्शाता है कि उनकी चीजों को पहचानने की क्षमता औसत है। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, किसी व्यक्ति, घटना या चीज को नहीं पहचान सकते, न ही उसके गुणधर्म परिभाषित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब यह आकलन करने की बात आती है कि एक निश्चित श्रेणी के लोगों के गुणधर्म वास्तव में क्या हैं—वे सच्चे विश्वासी हैं या छद्म-विश्वासी, क्या वे सत्य का अनुसरण करने वाले लोग हैं या क्या वे विकसित किए जाने के लिए उपयुक्त हैं—तो वे इन चीजों को नहीं जानते और नहीं देख सकते। यहाँ तक कि जब ऐसे लोग अनेक अभिव्यक्तियाँ प्रदर्शित करते हैं और उनमें बहुत स्पष्ट समस्याएँ होती हैं, तब भी वे उन लोगों को नहीं पहचान सकते या उनके गुणधर्म परिभाषित नहीं कर सकते। यह चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होना है। यहाँ तक कि अगर कुछ सामान्य और आसानी से भेद पहचाने जाने लायक लोग, घटनाएँ और चीजें सामने आती हैं, तो भी वे स्पष्ट रूप से नहीं कह सकते कि ये लोग अच्छे हैं या बुरे, या ये न्यायपूर्ण मामले हैं या दुष्टतापूर्ण। वे नहीं जानते कि उन्हें कैसे विभेदित या श्रेणीबद्ध किया जाए, न ही वे उन्हें वर्गीकृत करना जानते हैं। यहाँ तक कि परमेश्वर के वचन पढ़ने और दूसरों के साथ संगति करने के बाद भी वे उन्हें पहचान नहीं सकते। अंत में वे यह कहते हुए दूसरों से अपने लिए निर्णय लेने को कहते हैं, “तुम उनका जैसा चरित्र चित्रण करते हो, वे वैसे ही हैं। अगर तुम उनका न्यायपूर्ण के रूप में चरित्र चित्रण करते हो तो वे न्यायपूर्ण हैं; अगर तुम उनका दुष्ट के रूप में चरित्र चित्रण करते हो तो वे दुष्ट हैं।” संक्षेप में, वे खुद परिभाषाएँ नहीं बना सकते या निष्कर्ष नहीं निकाल सकते। परिस्थिति चाहे जो भी हो, जब निष्कर्ष निकालने की बात आती है तब वे हक्के-बक्के रह जाते हैं और उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं होता। क्या यह चीजों को पहचानने की क्षमता का अभाव होना नहीं है? (हाँ, है।) यहाँ तक कि सबसे सरल बाहरी परिघटना के मामले में भी, अगर तुम उनसे यह पहचानने के लिए कहो कि इसकी प्रकृति क्या है और इसके गुणधर्म क्या हैं, तो वे नहीं जानते। हालाँकि उनके पास एक तरकीब होती है : वे किसी व्यक्ति ने क्या कहा और क्या किया है, यह दोहराते हुए बड़बड़ाते रह सकते हैं। लेकिन अगर तुम उनसे पूछो, “यह व्यक्ति वास्तव में सच्चा विश्वासी है या नहीं? क्या यह ऐसा व्यक्ति है जिसकी परमेश्वर के प्रति तीव्र अभिलाषा है?” तो वे जवाब देते हैं, “अरे, यह दस साल से ज्यादा समय से परमेश्वर में विश्वास करता आया है और इसने अपना परिवार और करियर त्याग दिया है। जब इसकी बच्ची तीन-चार साल की थी तब इसने उसे भाई-बहनों को सौंपकर अपना कर्तव्य निभाने के लिए घर छोड़ दिया था।” उनके पास अपने हिसाब-किताब होते हैं; वे खुद निष्कर्ष निकालने से बचते हैं, इसके बजाय वे तुम्हें निर्णय करने देते हैं। अगर तुम उनसे पूछो, “तो क्या यह व्यक्ति सत्य स्वीकारता है?” तो वे जवाब देते हैं, “अरे, जब से यह कलीसिया का अगुआ बना है तब से यह बहुत जल्दी जाग जाता है और बहुत देर से सोता है। जहाँ तक इस बात का सवाल है कि यह सत्य स्वीकारता है या नहीं, तो जब एक बार भाई-बहनों ने उसे उसकी कुछ समस्याओं के बारे में बताया तो वह वहीं रो पड़ा और कहने लगा कि वह परमेश्वर का ऋणी है और उसने अच्छा नहीं किया।” “और क्या उसने बाद में पश्चात्ताप किया?” “अरे, उस समय उसका रवैया बहुत अच्छा था।” वे तुम पर जानकारी लादना पसंद करते हैं, तुम्हें दिखाते हैं कि उनमें कुछ बात है, कि वे सब-कुछ जानते हैं और यह जानते हैं कि लोगों को कैसे देखना है, और तुम्हें उन्हें कमतर आँकने से रोकते हैं। असल में वे लोगों का भेद नहीं पहचान सकते, न ही वे निष्कर्ष निकाल सकते हैं। वे बस तुम्हें बहुत-सी प्रघटनाएँ और जानकारियाँ बताते हैं, और वह किस तरह का व्यक्ति है यह पहचानने और उस व्यक्ति के बारे में निष्कर्ष निकालने और उसके गुणधर्म परिभाषित करने का काम तुम पर छोड़ देते हैं। तुम कहते हो, “इस व्यक्ति को मूल रूप से ऐसा व्यक्ति माना जा सकता है जो सत्य को स्वीकार करता है। उसमें परमेश्वर में विश्वास करने की प्रेरणा है और वह एक सच्चा विश्वासी है। बस, चूँकि उसमें कम काबिलियत है और बोध क्षमता नहीं है, इसलिए इस तथ्य के बावजूद कि वह सत्य को स्वीकार करने का इच्छुक है, वह कभी भी अभ्यास के सिद्धांत खोज पाने में समर्थ नहीं होता और सत्य का अभ्यास नहीं कर सकता है।” वे जवाब देते हैं, “मुझे तो यह बोध क्षमता वाला व्यक्ति नहीं लगता। जब भी यह किसी अप्रिय चीज के बारे में बात करता है तो रो पड़ता है—इसका रवैया हमेशा एक जैसा ही रहता है।” देखा? उनमें खुद चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होती, फिर भी वे दूसरों की टिप्पणियों पर हाँ में हाँ मिलाने में काफी अच्छे होते हैं। क्या यह तकलीफदेह नहीं है? जिन लोगों में चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होती, उनकी सबसे आम अभिव्यक्ति यह होती है कि वे तुम्हें बहुत-सी परिघटनाओं, जानकारियों, कठिन समस्याओं, घटना-क्रमों, या किसी स्थिति के बारे में जो कुछ भी उन्होंने देखा होता है उसके बारे में बताना पसंद करते हैं, फिर वे तुम्हारे द्वारा उसे परिभाषित किए जाने का इंतजार करते हैं और तुम्हारे द्वारा उसे परिभाषित कर दिए जाने के बाद उन्हें लगता है कि तुम्हारी परिभाषा अच्छी है और वे उसे स्वीकार सकते हैं। उसे स्वीकारने के बाद भी वे यह नहीं जानते कि तुमने उसे उस तरह से परिभाषित क्यों किया। वे तुम्हारे निष्कर्ष के पीछे के आधार या सिद्धांत नहीं जानते, न ही यह जानते हैं कि इस व्यक्ति से कैसे पेश आना है या उसे कैसे सँभालना है। वे इनमें से किसी भी चीज के बारे में कुछ नहीं जानते। संगति और अध्ययन के बाद भी वे नहीं समझते। यह दर्शाता है कि उनमें चीजों को पहचानने की कोई क्षमता नहीं होती; यह कोई काबिलियत नहीं होने की अभिव्यक्ति है। वे अक्सर तथ्यों को विकृत करने और एक चीज को दूसरी चीज समझ लेने की गलती भी करते हैं। चाहे वे किसी भी मुद्दे पर टिप्पणी करें, वे मामले की जड़ या सार समझने में विफल रहते हैं और इसके बजाय सिर्फ बाहरी प्रघटनाओं के आधार पर निष्कर्ष निकाल लेते हैं। उदाहरण के लिए, वे मसीह-विरोधी के बुरे कर्म को अपराध बताते हैं और मानते हैं कि जब तक मसीह-विरोधी इसे पहचानता है तब तक वह खुद में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। अगर वे किसी ईमानदार व्यक्ति को झूठ बोलते हुए देखते हैं तो वे उसका धोखेबाज व्यक्ति के रूप में निरूपण करते हैं। अगर वे किसी को अहंकारी और आत्मतुष्ट देखते हैं तो उसका बुरे व्यक्ति के रूप में निरूपण करते हैं। ये वे गलतियाँ हैं जो आम तौर पर उन लोगों द्वारा की जाती हैं जिनमें चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होती। हर व्यक्ति के लिए चीजों को पहचानने की क्षमता एक तरह की काबिलियत होती है जो जीवन में विभिन्न लोगों, घटनाओं और चीजों का सामना करते समय उसमें होनी चाहिए। चीजों को पहचानने की क्षमता में विभिन्न लोगों, घटनाओं और चीजों का सार पहचानना ही शामिल नहीं है, बल्कि उनके गुणधर्म निर्धारित करना भी शामिल है। तुम जितनी ज्यादा सटीकता से ये विशेषताएँ निर्धारित कर सकते हो, तुममें चीजों को पहचानने की उतनी ही ऊँची क्षमता होना साबित होता है। अगर तुम्हारे निर्धारण बहुत सटीक नहीं होते और तुम्हारे निर्धारणों और मामले के सार और जड़ के बीच अंतर रहता है तो इससे साबित होता है कि तुम्हारी चीजों को पहचानने की क्षमता औसत है। अगर तुम लोगों, घटनाओं और चीजों के गुणधर्म निर्धारित नहीं कर सकते, न ही इन विशेषताओं की असलियत देख सकते हो तो इससे साबित होता है कि तुममें चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं है। उदाहरण के लिए, मान लो कि जब किसी व्यक्ति की बात आती है तो तुम केवल उसकी अनेक अभिव्यक्तियों और प्रकाशनों का वर्णन कर सकते हो लेकिन उसके सार की असलियत नहीं देख सकते। यानी तुम सिर्फ इस बारे में बात कर सकते हो कि इस व्यक्ति में किस तरह से नकारात्मक होने की प्रवृत्ति है या उसमें क्या विशेष कौशल हैं, तुम सिर्फ उस व्यक्ति के साथ हुई बहुत-सी चीजों के बारे में बात कर सकते हो, लेकिन तुम उसके चरित्र, उसकी काबिलियत या सत्य के प्रति उसके रवैये को नहीं जानते, तुम इन सारभूत मुद्दों की असलियत नहीं देख सकते और तुम्हारे पास उन लोगों, घटनाओं और उनके आस-पास दिखने या घटित होने वाली चीजों के लिए कोई परिभाषा नहीं होती। चाहे वे चीजें सही हों या गलत, न्यायसंगत हों या दुष्ट, सकारात्मक चीजें हों या नकारात्मक, अच्छी मानवता की अभिव्यक्तियाँ हों या बुरी मानवता की, तुम इनमें से किसी भी चीज की असलियत नहीं देख सकते या उसका भेद नहीं पहचान सकते। चाहे तुमने कितने भी सत्य सुने हों या कितनी भी अनुभवजन्य गवाहियाँ सुनी हों, फिर भी तुम विभिन्न लोगों, घटनाओं और चीजों की पहचान या उनमें अंतर नहीं कर सकते; तुम्हारे दिल में लोगों, घटनाओं या चीजों की किसी भी श्रेणी के लिए कोई परिभाषा नहीं है। यह चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होना है और यह काबिलियत नहीं होने की अभिव्यक्ति भी है।
जिन लोगों में चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होती, अगर उनमें आत्म-जागरूकता न हो और वे अहंकारी और आत्मतुष्ट भी हों तो उनके सबसे अधिक कौन-सी गलती करने की संभावना है? यही कि वे दूसरे लोगों द्वारा प्रदर्शित कुछ अभिव्यक्तियों को लपक लेते हैं और फिर मनमाने ढंग से उन पर लेबल चस्पा कर उन्हें परिभाषित कर देते हैं। उदाहरण के लिए, वे देखते हैं कि कुछ लोग थोड़े मनमौजी हैं और फिर कहते हैं कि वे बुरे लोगों जैसे हैं, वे शैतान हैं—क्या यह एक बड़ी गलती नहीं है? वे लोग बस थोड़े मनमौजी हैं और पारिवारिक स्थितियों या जिस परिवेश में वे पले-बढ़े उसके कारण उन्होंने कुछ खराब जीवन-आदतें बना लीं या कुछ बुरी आदतें और खामियाँ विकसित कर लीं। कुल मिलाकर, इन लोगों का चरित्र दयालु नहीं होता लेकिन वह बुरा भी नहीं होता, इसलिए उन्हें बुरे लोग नहीं कहा जा सकता। फिर भी, जिन लोगों में चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होती, वे इनमें से किसी एक व्यक्ति द्वारा कही गई कुछ बातों या उसके द्वारा की गई एक-दो चीजों को लपक लेते हैं और फिर आँख मूँदकर उन्हें परिभाषित करते हुए कहते हैं, “इस व्यक्ति का व्यक्तित्व अजीब, नामिलनसार और जिद्दी है। यह एक बुरा व्यक्ति है।” यह परिभाषा गलत है। सचमुच बुरे लोग मधुर शब्द बोलेंगे और लोगों को बहलाएँगे; उनके पास चालें होती हैं, वे तथ्य छुपाएँगे और धोखा देंगे और लोगों के साथ खिलवाड़ करेंगे। यहाँ तक कि कुछ बुरे लोग दान भी दे सकते हैं, दूसरों की मदद भी कर सकते हैं और धैर्य भी दिखा सकते हैं। जिन लोगों में चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होती वे ऐसे व्यक्ति के बारे में कहेंगे, “यह व्यक्ति बहुत अच्छा है, यह एक सच्चा विश्वासी है,” लेकिन असल में वह व्यक्ति एक पाखंडी फरीसी होता है। जिन लोगों में चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होती, वे लोगों के सार की असलियत नहीं देख सकते—यहाँ तक कि चुनावों के दौरान वे बुरे लोगों को अगुआ बनने के लिए वोट तक दे देते हैं। यह किसके बराबर है? यह बुराई में सहायता करने और उसे बढ़ावा देने के बराबर है। कुछ बुरे लोग अपने व्यवहार में अपनी बुराई प्रदर्शित नहीं करते और वे उसे प्रकट नहीं करते। उनकी बुराई उनके दिलों में होती है। वे जो कुछ भी करते हैं वह सब उद्देश्यपूर्ण होता है और उनके तमाम इरादों में एक गुप्त गुण होता है। वे जो कुछ भी करते हैं जिसे कि तुम देख सकते हो, वह वास्तव में उनके वास्तविक इरादे नहीं दर्शाता। उनके सच्चे इरादे, उद्देश्य और उनकी दुष्टता सब उनके दिलों में छिपे होते हैं। अगर किसी व्यक्ति में चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं है और वह ऐसे लोगों का भेद नहीं पहचान सकता तो उसके द्वारा उन्हें अच्छे लोग, ऐसे लोग जो सत्य का अनुसरण करते हैं, समझे जाने की संभावना है। कुछ लोगों का स्पष्टवादी व्यक्तित्व होता है और दूसरों से जुड़ने पर वे कोई चालें नहीं चलते। वे सीधे तरीके से बात करते हैं और व्यक्तित्व और मिजाज की दृष्टि से कुछ हद तक चिड़चिड़े होते हैं। वास्तव में उनकी मानवता के साथ कोई बड़ी समस्या नहीं होती, बस कभी-कभी उनके बोलने का लहज़ा रूखा होता है। लेकिन वे जो प्रकट करते हैं वह ठीक वही होता है जो वे आंतरिक रूप से सोचते हैं—वे जो आंतरिक रूप से सोचते हैं वही वे बाहरी तौर पर प्रकट करते हैं। दूसरे लोग अक्सर सोचते हैं कि ये लोग नहीं जानते कि हर व्यक्ति के साथ कैसे बातचीत करनी है या समाज में कैसे घुलना-मिलना है और वे उन लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बोलने के तरीके के अनभ्यस्त होते हैं। ऐसे लोग बहुत ही बेबाकी से और सीधे मुँह पर बोलते हैं और हमेशा अनजाने में दूसरों को चोट पहुँचा देते हैं। समय के साथ वे सभी को चोट पहुँचा बैठते हैं और लोग उनके प्रति अच्छी भावनाएँ नहीं रखते। कुछ लोग जिनमें भेद पहचानने की क्षमता की कमी होती है, कहते हैं कि ऐसा व्यक्ति बुरा होता है लेकिन वास्तव में वे बुरे नहीं होते। तुम कहते हो कि वे बुरे हैं—तो फिर इस बात के तथ्य सामने लाओ कि उन्होंने दूसरों को कैसे सताया है : उन्होंने किसे सताया या दबाया है? उन्होंने किसे नुकसान पहुँचाया है या धोखा दिया है? अगर वास्तव में कोई तथ्यात्मक आधार है जो साबित करता है कि यह व्यक्ति एक बुरा व्यक्ति है—कि वह सिर्फ अपने शब्दों से ही दूसरों को नुकसान नहीं पहुँचाता, कि उसके दिल की गहराइयों में भी बुराई है और वह वास्तव में दूसरों के लिए हानिकारक है—तो उसका एक बुरे व्यक्ति के रूप में निरूपण किया जा सकता है। अगर उसका दूसरों को नुकसान पहुँचाने का कोई इरादा नहीं है तो वह बुरा व्यक्ति नहीं है। उसका बस एक सीधा-सादा व्यक्तित्व है और वह बेबाक तरीके से बोलता है—यह जन्मजात है। बेबाकी से बोलना ज्यादा से ज्यादा उसकी मानवता का एक दोष और कमी है। वह नहीं जानता कि बोलते समय व्यवहार कुशल कैसे बनें और खुद को दूसरों के साथ बराबरी के पायदान पर कैसे रखें, वह नहीं जानता कि दूसरे लोगों के प्रति सहिष्णुता कैसे दिखाएँ, दूसरों के प्रति समंजनशील और धैर्यवान कैसे बनें, दूसरों की भावनाओं का ध्यान कैसे रखें। वह इनमें से कुछ नहीं जानता। उसकी मानवता से कुछ चीजें गायब होती हैं। फिर भी कुछ लोग जिनमें भेद पहचानने की क्षमता की कमी होती है, ऐसे व्यक्तियों को बुरे लोग मानते हैं। वास्तव में, जब ये व्यक्ति चीजें करते हैं तो ज्यादातर समय परमेश्वर के घर के हितों की रक्षा करते हैं। हालाँकि दूसरों से बात करते हुए उनका लहज़ा थोड़ा रूखा होता है, लेकिन उन्होंने किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया होता, न ही उनका लोगों को नुकसान पहुँचाने का इरादा होता है। बात बस इतनी है कि उनके बोलने में चातुर्य की कमी होती है और बोलते समय वे स्थिति पर विचार नहीं करते। ऐसे व्यक्तियों की मानवता में कुछ दोषों और खामियों के कारण कई अन्य लोग गलती से यह सोच लेते हैं कि वे दुष्ट लोग हैं लेकिन उनके द्वारा बुरे काम किए जाने का कोई सबूत नहीं दे सकते। यह एक गलत आकलन है, ऐसे व्यक्तियों का गलत चरित्र-चित्रण है। सचमुच बुरे व्यक्ति बाहरी तौर पर भले ही दूसरों को नुकसान नहीं पहुँचाते, भले ही वे दान देते हों और दूसरों की मदद करते हों और उनके शब्दों में समझदारी, सरपरस्ती, देखभाल और समायोजन दिखाई दे, यहाँ तक कि ये व्यक्ति दूसरों के प्रति सहिष्णुता और प्रेम भी दिखाएँ—उनके शब्द और क्रियाकलाप काफी अच्छे लगते हों—लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों या विशेष मामलों में और ऐसे मामलों में जिनमें उनके हित शामिल होते हैं, वे दूसरों को दबा सकते हैं, नुकसान पहुँचा सकते हैं और दूसरों के खिलाफ गुप्त रूप से षड्यंत्र कर सकते हैं, यहाँ तक कि वे परमेश्वर के घर के हितों की भी रक्षा बिल्कुल नहीं करेंगे। भले ही किसी चीज में उनके हित शामिल न हों, भले ही उन्हें बस एक तिनका ही तोड़ना पड़े तो भी वे परमेश्वर के घर के हितों की रक्षा नहीं करेंगे। ऐसे व्यक्ति जिसे बाहरी तौर पर जीते हैं वह असाधारण रूप से अच्छा लगता है और बाहर से उनकी मानवता में कोई दोष या खामियाँ नहीं देखी जा सकतीं, लेकिन वे वास्तव में पूर्णतया बुरे लोग होते हैं। बहुत-से लोग ऐसे व्यक्तियों का भेद पहचानने में विफल रहते हैं और उनकी चालों, सांसारिक आचरण के उनके फलसफों और उनकी साजिशों और षड्यंत्रों से अंधे हो जाते हैं। अगर इस प्रकार के व्यक्ति का प्रकृति सार और उसके बुरे कर्मों के तथ्य उजागर हो जाते हैं तो ये लोग न सिर्फ उसे स्वीकारते नहीं, बल्कि उस व्यक्ति को अच्छा भी मानते हैं, ऐसा व्यक्ति जिसे परमेश्वर के घर को विकसित करना चाहिए और कोई महत्वपूर्ण भूमिका देनी चाहिए। वे ऐसे व्यक्तियों का भेद पहचानने की क्षमता नहीं रखते। चलो, हम इस बारे में बात नहीं करते कि ये लोग परमेश्वर के वचनों या सत्य सिद्धांतों के अनुसार किसी व्यक्ति का मूल्यांकन कर सकते हैं या नहीं, और सिर्फ उनकी काबिलियत देखते हैं—वे इन स्पष्ट रूप से बुरे व्यक्तियों को भी अच्छे लोग मानते हैं और इन व्यक्तियों के बुरे कर्मों के तथ्य होने पर भी वे उन्हें अच्छे लोग ही मानते हैं—इसका मतलब है कि वे पूरी तरह से भ्रमित हैं। जिन लोगों में चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होती, वे न सिर्फ मानसिक रूप से कमजोर और मूर्ख होते हैं, बल्कि भ्रमित भी होते हैं। इन बुरे व्यक्तियों ने दूसरों को दबाया और सताया है और लोगों के साथ खिलवाड़ करने के लिए विभिन्न हथकंडे अपनाए हैं, फिर भी ये लोग इसे बुरा नहीं समझते और यह नहीं देख पाते कि यह बुरा है। इसके अलावा, बुरे लोगों की एक स्पष्ट अभिव्यक्ति होती है और वह यह है कि वे कभी परमेश्वर के घर के हितों की रक्षा नहीं करते—एक बार भी नहीं। अगर उन्हें सिर्फ एक शब्द ही कहना पड़े या एक तिनका ही तोड़ना पड़े तो भी वे उनकी रक्षा नहीं करेंगे, अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा या अपने रुतबे और प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों की तो बात ही छोड़ो—ऐसे मामलों में तो वे परमेश्वर के घर के हितों की रक्षा और भी ज्यादा नहीं करेंगे। कुछ लोग इन स्पष्ट रूप से बुरे व्यक्तियों की असलियत नहीं देख सकते। मुझे बताओ, क्या ऐसे लोगों में काबिलियत होती है? बुरे लोगों में बुरा सार होता है; वे किसी को भी दबा देंगे। चाहे वह कोई भी हो, अगर कोई व्यक्ति उनके रुतबे या हितों को प्रभावित करता है तो वह उनके दमन का लक्ष्य बन जाता है। जिन लोगों में भेद पहचानने की क्षमता की कमी होती है, वे इन मामलों की असलियत नहीं देख सकते। क्या भेद पहचानने की क्षमता की कमी वाले लोग भ्रमित नहीं होते? (हाँ, होते हैं।) वे यह तक नहीं जानते कि बुरे लोग उनका दमन करेंगे या नहीं—मुझे बताओ, ऐसे लोग किस हद तक भ्रमित होते हैं? क्या वे पूरी तरह से भ्रमित नहीं होते? (हाँ, होते हैं।) कुछ बुरे व्यक्तियों को बर्खास्त किए जाने पर कुछ लोग जिनमें चीजों को पहचानने की क्षमता बिलकुल नहीं होती, उनके पक्ष में बोलने, उनका बचाव करने और उनके साथ हुए अन्याय के बारे में चिल्लाने के लिए आगे तक आ जाते हैं, सिर्फ इसलिए कि उन बुरे व्यक्तियों ने कई सालों तक परमेश्वर में विश्वास किया होता है, उनमें कुछ गुण होते हैं, वे वाक्पटु होते हैं, उनके पास युक्तियाँ होती हैं और वे बाहरी तौर पर चीजें त्याग देते हैं, खुद को खपाते और कष्ट सहते हैं। ये लोग इस बारे में बात नहीं करते कि इन बुरे व्यक्तियों ने कितने बुरे कर्म किए हैं। इसके बजाय, वे कहते हैं, “वे कई सालों से परमेश्वर में विश्वास करते आए हैं, एकचित्त भक्ति के साथ परमेश्वर का अनुसरण करते आए हैं और उन्होंने बहुत कष्ट झेला है। वे बड़े लाल अजगर द्वारा गिरफ्तार भी किए गए और उन्होंने यातना सही और जेल में समय बिताया और फलाने भाई या बहन की मदद भी की।” वे सिर्फ इन चीजों को देखते हैं और उन व्यक्तियों के बुरे कर्मों को अनदेखा करते हैं, यह जिक्र नहीं करते कि उन्होंने कितने बुरे कर्म किए हैं। क्या वे बहुत भ्रमित नहीं हैं? (हाँ, हैं।) जो लोग पूरी तरह से भ्रमित हैं, उनका उद्धार नहीं हो सकता, वे लाइलाज हैं। जिन लोगों में चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होती, वे बिना काबिलियत वाले लोग होते हैं—उनमें कोई भी क्षमता नहीं होती। ऐसे लोग नहीं जानते और नहीं पहचान सकते कि कोई चीज सही है या गलत, या कोई व्यक्ति सकारात्मक है या नकारात्मक। वे व्यक्ति का सार और प्रकृति स्पष्ट रूप से नहीं देख सकते, या उसके व्यवहार, अभिव्यक्तियों, भ्रष्टता के प्रकाशनों और उसके बुरे कामों के कई तथ्यों के जरिये उस व्यक्ति के गुणधर्मों का सारांश नहीं निकाल सकते। जब तक वह व्यक्ति कलीसिया में है तब तक ये लोग उसके साथ भाई या बहन की तरह व्यवहार करते रहेंगे और उसके साथ हार्दिक प्रेम से पेश आते रहेंगे। उनमें किसी का भी भेद पहचानने की क्षमता नहीं होती और वे किसी के साथ सिद्धांतों के अनुसार व्यवहार नहीं कर सकते। ऐसे लोगों में चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होती। वे नहीं जानते और नहीं पहचान सकते कि विभिन्न मामले न्यायसंगत हैं या दुष्टतापूर्ण, उनका लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है या नकारात्मक, और उन्हें सही मानकर स्वीकारना चाहिए या गलत मानकर उनका भेद पहचानना, उन्हें अस्वीकार करना और उनका विरोध करना चाहिए। जब तुम उन्हें किसी मामले को समझाने के लिए उदाहरण देते हो तो वे जानते हैं कि ऐसे मामले अच्छे नहीं हैं, कि वे सत्य सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं और वे परमेश्वर के घर में लागू नहीं होते। लेकिन अगली बार जब ऐसा ही कोई मामला उठता है तो वे फिर भी नहीं जानते कि उससे पेश आने का तरीका क्या है और वे सिद्धांतों को लागू नहीं कर सकते—वे तभी समझते हैं जब तुम उन्हें दूसरा उदाहरण देते हो। तुम्हें उन्हें एक-एक करके मामले समझाने पड़ते हैं और इसके लिए बच्चों को सिखाने का तरीका इस्तेमाल करना पड़ता है, ताकि वे समझ सकें। यह चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होना है। चाहे यह कोई व्यक्ति हो या कोई वस्तु, वे नहीं जानते कि यह न्यायपूर्ण है या दुष्टतापूर्ण, सही है या गलत, सकारात्मक चीज है या नकारात्मक चीज, यह सत्य और मानवता की जरूरतों के अनुरूप है या नहीं, न ही यह जानते कि परमेश्वर के विश्वासियों को इसे कैसे देखना चाहिए—वे इनमें से कुछ नहीं जानते। यह चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं होना है। तो व्यक्ति की चीजों को पहचानने की क्षमता के स्तर का आकलन करने का क्या आधार है? यह इस पर आधारित है कि विभिन्न चीजों के गुणधर्मों के बारे में तुम्हारी परिभाषाएँ सटीक हैं या नहीं। अगर तुम्हारी परिभाषाएँ सटीक हैं तो तुममें चीजों को पहचानने की क्षमता है। अगर विभिन्न चीजों के गुणधर्मों की तुम्हारी परिभाषाओं की सटीकता पचास प्रतिशत से ज्यादा है तो तुम्हारी चीजों को पहचानने की क्षमता औसत या औसत से ऊपर है। अगर वह पचास प्रतिशत तक नहीं पहुँचती तो तुम्हारी चीजों को पहचानने की क्षमता खराब है। अगर सटीकता एक प्रतिशत भी नहीं है तो तुममें चीजों को पहचानने की क्षमता नहीं है और तुम एक ऐसे व्यक्ति हो जिसमें कोई काबिलियत नहीं है। व्यक्ति में चीजों को पहचानने की क्षमता है या नहीं, इसका भेद इसी तरह पहचाना जाता है। मैं इस क्षमता के बारे में और कोई उदाहरण नहीं दूँगा। तुम लोग खुद इस बारे में संगति कर सकते हो, मैं यह विषय तुम लोगों पर छोड़ता हूँ।
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?