परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और उसके चरण-चिन्हों का अनुसरण करो" | अंश 396

आध्यात्मिक जीवन किस तरह का जीवन है? आध्यात्मिक जीवन वह है जिसमें तुम्हारा दिल पूरी तरह से परमेश्वर की ओर मुड़ चुका होता है, और परमेश्वर के प्रेम के प्रति सचेत होने में सक्षम हो जाता है। यह वह है जिसमें तुम परमेश्वर के वचनों में रहते हो, और तुम्हारे दिल में अन्य कुछ भी नहीं होता है, और तुम परमेश्वर की इच्छा को आज समझ सकते हो, और अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए पवित्र आत्मा के प्रकाश से मार्गदर्शन प्राप्त करते हो। मनुष्य और परमेश्वर के बीच एक ऐसा जीवन आध्यात्मिक जीवन है। यदि तुम आज के प्रकाश का अनुसरण करने में असमर्थ हो, तो परमेश्वर के साथ तुम्हारे संबंध में एक दूरी शुरू हो गई है-हो सकता है कि यह संबंध शायद टूट भी चुका हो—और तुम एक सामान्य आध्यात्मिक जीवन से रहित हो गए हो। परमेश्वर के साथ एक सामान्य सम्बन्ध परमेश्वर के वचनों को आज स्वीकार करने की नींव पर निर्मित किया जाता है। क्या तुम्हारे पास एक सामान्य आध्यात्मिक जीवन है? क्या तुम्हारे पास परमेश्वर के साथ एक सामान्य सम्बन्ध है? क्या तुम कोई ऐसे व्यक्ति हो जो पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करता है? अगर तुम आज पवित्र आत्मा की ज्योति का अनुसरण कर सकते हो, और परमेश्वर की इच्छा को उसके वचनों के भीतर समझ सकते हो, और इन वचनों में प्रवेश कर सकते हो, तो तुम कोई ऐसे व्यक्ति हो जो पवित्र आत्मा की धारा का अनुसरण करता है। यदि तुम पवित्र आत्मा की धारा का अनुसरण नहीं करते हो, तो तुम निस्संदेह कोई वैसे हो जो सच्चाई का अनुसरण नहीं करता है। जो खुद को सुधारने की इच्छा नहीं रखते हैं, पवित्र आत्मा के लिए उनके भीतर काम करने का कोई मौका नहीं है, और नतीजतन, ऐसे लोग अपनी ताकत को कभी भी जगा नहीं सकते हैं, और हमेशा निष्क्रिय रहते हैं। आज, क्या तुम पवित्र आत्मा की धारा का अनुसरण करते हो? क्या तुम पवित्र आत्मा की धारा में हो? क्या तुम एक निष्क्रिय स्थिति से बाहर निकल आये हो? वे सभी जो परमेश्वर के वचनों में विश्वास करते हैं, जो परमेश्वर के कार्य को नींव के रूप में लेते हैं, और पवित्र आत्मा के प्रकाश का आज पालन करते हैं—वे सभी पवित्र आत्मा की धारा में हैं। यदि तुम मानते हो कि परमेश्वर के वचन निस्संदेह सच्चे और सही हैं, और यदि तुम परमेश्वर के वचनों को मानते हो, चाहे वह जो भी कहे, तो तुम कोई ऐसे व्यक्ति हो जो परमेश्वर के कार्य में प्रवेश करता है, और इस तरह तुम परमेश्वर की इच्छा पूरी करते हो।

पवित्र आत्मा की धारा में प्रवेश करने के लिए तुम्हारे पास परमेश्वर के साथ एक सामान्य सम्बन्ध होना चाहिए, और तुम्हें सबसे पहले अपनी निष्क्रिय स्थिति से छुटकारा पाना होगा। कुछ लोग हमेशा बहुमत के पीछे चलते हैं, और उनके दिल परमेश्वर से बहुत दूर भटक गए हैं; ऐसे लोगों को खुद को सुधारने की कोई इच्छा नहीं होती है, और जिन मानकों का वे अनुसरण करते है, वे बहुत निम्न हैं। केवल परमेश्वर से प्रेम करना और परमेश्वर द्वारा प्राप्त हो जाने का अनुसरण करना ही परमेश्वर की इच्छा है। कुछ लोग ऐसे हैं जो परमेश्वर के प्रेम का बदला चुकाने के लिए केवल अपने ज़मीर का उपयोग करते हैं, लेकिन यह परमेश्वर की इच्छाओं पर खरा नहीं उतरता है; तुम्हारे अनुसरण के मानक जितने उच्चतर होंगे, परमेश्वर की इच्छा के तुम उतने ही अधिक सामंजस्य में रहोगे। एक ऐसे व्यक्ति की तरह जो सामान्य हो, और जो परमेश्वर के प्रति प्रेम का अनुसरण करता हो, परमेश्वर के लोगों में से एक बनने के लिए राज्य में प्रवेश करना तुम सभी का असली भविष्य है, और यह एक ऐसा जीवन है जो अत्यंत मूल्य और महत्व का है, कोई भी तुम लोगों से अधिक धन्य नहीं है। मैं यह क्यों कहता हूँ? क्योंकि जो लोग परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते हैं वे देह के लिए जीते हैं, और वे शैतान के लिए जीते हैं, लेकिन आज तुम सब परमेश्वर के लिए जीते हो, और परमेश्वर की इच्छा पर चलने के लिए जीवित रहते हो। यही कारण है कि मैं कहता हूँ कि तुम सभी का जीवन अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। केवल इसी समूह के लोग, जिन सभी को परमेश्वर द्वारा चुना गया है, अत्यधिक महत्वपूर्ण जीवन जीने में सक्षम हैं: पृथ्वी पर और कोई भी ऐसे मूल्य और अर्थ वाला जीवन नहीं जी सकता है। क्योंकि तुम सब परमेश्वर द्वारा चुने गए हो, और परमेश्वर द्वारा पाले-पोसे गए हो, और इसके अलावा, तुम सब के लिए परमेश्वर के प्रेम के कारण, तुम लोगों ने सच्चे जीवन को समझ लिया है, और यह जानते हो कि कैसे एक ऐसा जीवन जीना है जो अत्यंत मूल्य का हो। ऐसा इसलिए नहीं है कि तुम सब का अनुसरण उत्तम है, बल्कि यह परमेश्वर की कृपा के कारण है; यह परमेश्वर ही था जिसने तुम आत्माओं की आँखें खोलीं, और यह परमेश्वर का आत्मा ही था जिसने तुम सब के दिलों को छू लिया, तुम सभी को उसके सामने आने का सौभाग्य प्रदान करते हुए। यदि परमेश्वर के आत्मा ने तुम्हें प्रबुद्ध नहीं किया होता, तो तुम परमेश्वर के बारे में क्या सुंदर है यह देखने में असमर्थ होते, न ही तुम्हारे लिए परमेश्वर से प्रेम करना संभव होता। यह पूरी तरह से परमेश्वर के आत्मा के द्वारा लोगों के दिलों को छू लेने के कारण ही है कि उनके दिल परमेश्वर की ओर मुड़ चुके हैं। कभी-कभी, जब तुम परमेश्वर के वचनों का आनंद ले रहे होते हो, तुम्हारी आत्मा द्रवित हो जाती है, और तुम्हें लगता है कि तुम परमेश्वर से प्रेम किये बिना नहीं रह सकते, तुम्हारे भीतर बड़ी ताकत है, और ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे तुम दूर नहीं कर सकते। यदि तुम ऐसा महसूस करते हो, तो परमेश्वर के आत्मा ने तुम्हें स्पर्श कर लिया है, और तुम्हारा दिल पूरी तरह से परमेश्वर की ओर मुड़ चुका है, और तुम परमेश्वर से प्रार्थना करोगे और कहोगे: "हे परमेश्वर! हम वास्तव में तुम्हारे द्वारा पूर्वनिर्धारित किये गए और चुने गए हैं। तुम्हारी महिमा मुझे गौरव देती है, और तुम्हारे अपनों में से एक होना मुझे गौरवशाली लगता है। तुम्हारी इच्छा पर चलने के लिए मैं कुछ भी लगा दूँगा और कुछ भी दे दूँगा, अपने सभी वर्षों को और पूरे जीवन के प्रयासों को तुम्हें समर्पित कर दूँगा।" जब तुम इस तरह प्रार्थना करते हो, तो तुम्हारे दिल में परमेश्वर के प्रति अनंत प्रेम होगा और सच्ची आज्ञाकारिता होगी। क्या तुम्हें कभी भी ऐसा एक अनुभव हुआ है? यदि लोगों को अक्सर परमेश्वर के आत्मा द्वारा छुआ जाता है, तो वे अपनी प्रार्थनाओं में खुद को परमेश्वर के प्रति विशेष रूप से समर्पित करने के लिए तैयार होते हैं: "हे परमेश्वर! मैं तुम्हारी महिमा का दिन देखना चाहता हूँ, और मैं तुम्हारे लिए जीना चाहता हूँ—तुम्हारे लिए जीने के मुकाबले और कुछ भी ज्यादा योग्य या सार्थक नहीं है, और मुझे शैतान और देह के लिए जीने की थोड़ी-सी भी इच्छा नहीं है। तुम मुझे आज अपने लिए जीने की खातिर सक्षम बनाकर जागृत कर लो।" जब तुम इस तरह से प्रार्थना कर लेते हो, तो तुम महसूस करोगे कि तुम परमेश्वर को अपना दिल दिए बिना नहीं रह सकते, कि तुम्हें परमेश्वर को प्राप्त करना ही होगा, और तुम जीते-जी परमेश्वर को पा लेने के बिना ही मर जाने से नफरत करोगे। ऐसी प्रार्थना करने के बाद, तुम्हारे भीतर एक अक्षय ताकत होगी, और तुम नहीं जान पाओगे कि यह कहाँ से आती है; तुम्हारे हृदय के अंदर एक असीम शक्ति होगी, और तुम्हें एक आभास होगा कि परमेश्वर बहुत मनोहर है, और वह प्रेम करने के योग्य है। यह तब होता है जब तुम परमेश्वर द्वारा छू लिए जाओगे। क्योंकि जिन सभी लोगों को इस तरह का अनुभव हुआ है, वे सभी परमेश्वर के द्वारा छू लिए गए हैं। जिन लोगों को परमेश्वर अक्सर छूता है, उनके जीवन में परिवर्तन हो जाते हैं, वे अपने संकल्प को बनाने में सक्षम हो जाते हैं और परमेश्वर को पूरी तरह से प्राप्त करने के लिए तैयार होते हैं, उनके दिल में परमेश्वर के लिए प्रेम अधिक मजबूत होता है, उनके दिल पूरी तरह से परमेश्वर की ओर मुड़ चुके होते हैं, उन्हें परिवार, दुनिया, उलझनों, या अपने भविष्य की कोई परवाह नहीं होती, और वे परमेश्वर के लिए जीवन भर के प्रयासों को समर्पित करने के लिए तैयार होते हैं। वे सभी जिन्हें परमेश्वर के आत्मा ने छुआ है, वे ऐसे लोग होते हैं जो सत्य का अनुसरण करते हैं, और जो परमेश्वर द्वारा परिपूर्ण किये जाने की आशा रखते हैं।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

रमेश्वर की इच्छा पूरी करने के लिए जीना सबसे सार्थक है

परमेश्वर के लिए जीने का है सबसे ज्यादा मोल। परमेश्वर के लिए जीने का है सबसे ज्यादा मोल। यदि तुम लोग करते हो परमेश्वर से प्रेम, तो परमेश्वर के जन होने के लिए राज्य में प्रवेश है तुम लोगों का असली भविष्य और अनमोल व सार्थक जीवन। होगा न कोई और अधिक धन्य। परमेश्वर के लिए जीने का है सबसे ज्यादा मोल। परमेश्वर के लिए जीने का है सबसे ज्यादा मोल। जीते हो तुम लोग आज परमेश्वर के लिए, पूरी करते हो इच्छा परमेश्वर की। इसलिए परमेश्वर का है कहना कि तुम लोगों का जीवन है मोल वाला जीवन। केवल परमेश्वर द्वारा चुने गए लोग जी पाते हैं अर्थ के साथ। दुनिया में न कोई और जी सकता है जीवन इतना अर्थपूर्ण और मूल्यवान। परमेश्वर के लिए जीने का है सबसे ज्यादा मोल। परमेश्वर के लिए जीने का है सबसे ज्यादा मोल।

परमेश्वर द्वारा चुने गए और प्यार किये गए और बढ़ाये गए, तुम लोगों ने समझा है असली जीवन, जाना कैसे जीयें मोल वाला जीवन। परमेश्वर ने खोल दी तुम लोगों की आँखें, उसकी कृपा तुम लोगों को उसके सामने ले आई। परमेश्वर के लिए जीने का है सबसे ज्यादा मोल। परमेश्वर के लिए जीने का है सबसे ज्यादा मोल।

अगर परमेश्वर तुझे प्रेरित न करता, तो तू न कर पाता अनुभव उसकी सुन्दरता का या उसे दे नहीं पाता अपना असली प्रेम। परमेश्वर ने किया तुम्हारे ह्रदय को स्पर्श, ताकि तुम लोग उसे दे पाओ अपना हृदय। परमेश्वर के लिए जीने का है सबसे ज्यादा मोल। परमेश्वर के लिए जीने का है सबसे ज्यादा मोल। परमेश्वर के लिए जीने का है सबसे ज्यादा मोल। परमेश्वर के लिए जीने का है सबसे ज्यादा मोल।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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