अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

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वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी
वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

परमेश्वर पर विश्वास करने वाले व्यक्ति के रूप में, तुम को यह समझना चाहिए कि, आज, इन अंतिम दिनों में परमेश्वर का कार्य और तुम में परमेश्वर की योजना के सारे कार्य को पाने में, तुमने परमेश्वर की ओर से उत्कर्ष और उद्धार को वास्तव में पा लिया है। समस्त ब्रम्हांड में परमेश्वर के सारे कार्य ने इसी एक जनसमूह पर ध्यान केंद्रित किया है। उसने अपने सभी प्रयास तुम लोगों के लिये समर्पित किये और तुम्हारे लिये सब कुछ बलिदान किया है, उसने फिर से दावा किया है और समस्त ब्रम्हांड में तुम लोगों के लिये पवित्रा आत्मा के सभी काम दिये हैं। यही कारण है कि मैं कहता हूं, तुम सभी सौभाग्यशाली हो। और यही नहीं, उसने इस्राएल से, अर्थात उसके चुने हुए लोगों से अर्थात उसके चुने हुए लोगों से, और तुम लोगों को दी है, ताकि उसकी योजना के उद्देश्यों को तुम्‍हारे जनसमूह के द्वारा पूर्ण रूप से प्रकट करे। इस कारण तुम सभी वे लोग हो जो परमेश्वर की विरासत को पाएंगे, और इससे भी अधिक परमेश्वर की महिमा के वारिस ठहरेंगे। संभवतः तुम सबको ये वचन स्मरण होंगे: "क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।" अतीत में तुम सबने यह बात सुनी है तो भी किसी ने इन वचनों का सही अर्थ नहीं समझा। आज, तुम सभी अच्छे से जानते हो कि उनका वास्तविक महत्व क्या है। ये वह वचन है जिन्हें परमेश्वर अंतिम दिनों में पूरा करेगा। और ये वचन उन में पूरे होंगे जो विशाल लाल अजगर द्वारा निर्दयतापूर्वक पीड़ित किये गए हैं, उस देश में जहां वह रहता है। यह बड़ा लाल अजगर परमेश्वर को सताता है और परमेश्वर का शत्रु है, इसलिए इस देश में, जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं उन्हें अपमानित किया जाता और सताया जाता है। इस कारण ये शब्द तुम्हारे समूह के लोगों में वास्तविकता बन जाएंगे। जब उस देश में परमेश्वर का कार्य किया जाता है जहाँ परमेश्वर का विरोध होता है, उसके सारे कामों में अत्यधिक बाधा आती है, और उसके बहुत से वचन सही समय पर पूरे नहीं किये जा सकते; अतः, परमेश्वर के वचनों के कारण लोग शुद्ध किये जाते हैं। यह भी पीड़ा का एक तत्व है। परमेश्वर के लिए विशाल लाल अजगर के देश में अपना कार्य करना बहुत कठिन है, परन्तु ऐसी कठिनाईयों के बीच में अपनी बुद्धि और अद्भुत कामों को प्रकट करने के लिए परमेश्वर अपने काम का मंचन करता है। परमेश्वर इस अवसर के द्वारा इस जनसमूह के लोगों को पूर्ण करता है। इस अशुद्ध देश में लोगों के सताये जाने के कारण, उनकी क्षमता और उनके पूरे शैतानी स्वभाव का परमेश्वर शुद्धिकरण करता और जीतता है ताकि, इससे, वह महिमा प्राप्त करे और उन्हें भी जो उसके कामों के गवाह बनते हैं। परमेश्वर ने इस जनसूमह के लोगों के लिए जो बलिदान किये हैं यह उन सभी का संपूर्ण महत्व है। कहने का अभिप्राय है, परमेश्वर विजय कार्य उनके द्वारा करता है जो उसका विरोध करते हैं। इस कारण, ऐसा करने पर ही परमेश्वर की महान सामर्थ का प्रकटीकरण हो सकता है। दूसरे शब्दों में, केवल वे जो अशुद्ध देश में हैं परमेश्वर की महिमा का उत्‍तराधिकार पाने के योग्य हैं, और केवल यह परमेश्वर की महान सामर्थ्‍य को विशिष्टता दे सकती है। इसी कारण मैं कहता हूँ कि परमेश्वर अशुद्ध देश में महिमा पाता है, और उनके द्वारा जो उस देश में रहते हैं। यह परमेश्वर की इच्छा है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा यह यीशु के कार्य के चरण में था; उसे सिर्फ उन फरीसियों के बीच ही महिमा मिल सकती थी जिन्होंने उसे सताया। यदि यीशु को वैसा कष्ट और यहूदा का विश्वासघात नहीं मिलता, तो यीशु का उपहास और निंदा भी नहीं होती, क्रूस पर चढ़ना तो असम्भव होता, और उसे कभी भी महिमा नहीं मिलती। जहां भी परमेश्वर प्रत्येक युग में कार्य करता है, और जहां भी वह शरीर में काम करता है, वो वहाँ महिमा पाता है और उन्हें जीत लेता है जिन्हें वो जीतना चाहता है। यह परमेश्वर के कार्य की योजना है, और यही उसका प्रबंध है।

कई हजार वर्षों की परमेश्वर की योजना में, शरीर में किया गया कार्य दो भागों में हैं: पहला क्रूस पर चढ़ाए जाने का कार्य, जिसके लिए वह महिमामय है; दूसरा कार्य अंतिम दिनों में जीतने और सिद्ध करने का है, जिसके द्वारा वह महिमा प्राप्त करेगा। यह परमेश्वर का प्रबंध है। इस कारण, तुम लोग परमेश्वर के कार्य को या परमेश्वर की तुम लोगों के लिये आज्ञा को बहुत साधारण न समझो। तुम सभी बहुत ज़्यादा बढ़कर और अनंतकाल की परमेश्वर की महिमा के भार के वारिस हो, और यह विशेष रूप में परमेश्वर के द्वारा ठहराया गया है। उसकी महिमा के दो भागों में से, एक तुम लोगों के अन्दर प्रकट होता है; परमेश्वर की महिमा के पहले भाग की संपूर्णता को तुम लोगों को दिया गया है ताकि वह तुम सभी की विरासत बने। यह परमेश्वर की ओर से उत्कर्ष है और उसकी योजना जो बहुत पहले से पूर्व निर्धारित है। परमेश्वर ने यह महान कार्य उस देश में किया है जहां विशाल लाल अजगर निवास करता है, ऐसा कार्य, यदि कहीं और किया जाता, तो वर्षों पहले बड़ा फल लाता, और मनुष्यों के द्वारा बड़ी आसानी से स्वीकार किया जाता। और ऐसा कार्य पश्चिम के पादरियों के लिए स्वीकार करना अत्यन्त आसान होता जो परमेश्वर में विश्वास रखते हैं, क्योंकि यीशु के कार्य का चरण मिसाल का कार्य करता है। यही कारण है कि वह महिमाकरण के कार्य के इस चरण को किसी अन्य स्थान में प्राप्त नहीं कर सका; अर्थात, चूँकि सभी मनुष्यों की ओर से सहयोग और सभी राष्ट्रों की अभिस्वीकृति है, परमेश्वर की महिमा "ठहरने" के लिए कोई स्थान नहीं है। और ठीक रूप से इस देश में इस कार्य के चरण का असाधारण महत्व है। तुम लोगों के बीच में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसे कानून के द्वारा सुरक्षा मिली है, इसके विपरीत, तुम सब कानून के द्वारा दण्डित किये गये हो, और उस से बड़ी कठिनाई यह है कि कोई मनुष्य तुम लोगों को समझता नहीं, चाहे वे तुम्हारे रिश्तेदार हों, तुम्हारे माता-पिता, तुम्हारे मित्र, या तुम्हारे सहकर्मी हों। कोई भी तुम लोगों को नहीं समझता। जब परमेश्वर तुम लोगों का तिरस्कार करते हैं, तब तुम्हारे लिये पृथ्वी पर जीने का कोई रास्ता नहीं बचता है। हालाँकि, फिर भी, लोग परमेश्वर को छोड़ना सह नहीं सकते, यही परमेश्वर द्वारा लोगों पर जीत का महत्व है, और यही परमेश्वर की महिमा है। तुमने आज के दिन जो मीरास पाई है वह पूर्वकाल के सभी प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं से, यहाँ तक कि मूसा और पतरस से भी बढ़कर है। आशीष एक या दो दिन में नहीं मिलती; बहुत कुछ बलिदान कर उन्हें अर्जित करना पड़ता है। अर्थात्, तुम सबों के पास परिष्कृत प्रेम होना चाहिये, बड़ा विश्वास, और वे बहुतेरे सत्य जो परमेश्वर चाहता है कि तुम लोगों के पास हों; इसके साथ-साथ, तुम सभी न्याय की ओर अपने चेहरे को स्थित करने में सक्षम हों और कभी भी न डरो या हार मानों, और परमेश्वर के प्रति तुम लोगों का प्रेम स्थिर और न समाप्त होने वाला हो। तुम लोगों से संकल्प की मांग की जाती है,और साथ ही तुम सबों के जीवन स्वभाव में बदलाव भी; तुम्हारे भ्रष्टाचार का निवारण हो, और तुम लोग परमेश्वर के अधिकतम प्रभाव को पाने के लिए किये गए कार्य को बिना शिकायत किये स्वीकार करो, और यहां तक कि मृत्यु तक आज्ञाकारी रहो| यह वह है जो तुम को प्राप्त करना है। यह परमेश्वर का अंतिम लक्ष्य है और माँगें हैं जो परमेश्वर इस जनसमूह के व्यक्तियों से चाहता है। जबकि वह तुम लोगों को सब कुछ देता है, बदले में अवश्य है कि वह तुम सबों से बदले में कुछ माँगे और तुम सभी से उचित मांग करे। इस कारण, परमेश्वर के सभी काम बिना कारण नहीं हैं, और इससे यह देखा जा सकता है कि परमेश्वर क्यों बार-बार उच्च स्तर के कड़ी आवश्यकताओं वाले कार्य करता है। इसलिये आवश्यक है कि तुम सब परमेश्वर के विश्वास से भर जाओ। संक्षेप में, परमेश्वर के सभी काम तुम लोगों के लिये किये जाते हैं, ताकि तुम उसकी विरासत पाने के योग्य ठहरो। ये सब परमेश्वर की अपनी महिमा के लिये नहीं है परन्तु तुम सबों के उद्धार के लिये है और इस समूह के लोगों को सिद्ध करने के लिये जो इस अशुद्ध देश में बहुत अधिक दुख उठाते हैं। तुम लोगों को परमेश्वर की इच्छा समझनी चाहिये। इसलिए मैं अंतर्दृष्टि या समझ न रखने वाले बहुत से अज्ञानी लोगों को प्रोत्साहित करता हूँ: परमेश्वर की परीक्षा न करें और उसका और अधिक प्रतिरोध न करें। परमेश्वर उन सब दुखों को सह चुका है जिन्हें मनुष्य ने कभी नहीं सहा, और बहुत पहले ही मनुष्य के बदले अत्यधिक अपमान को सहा है। और क्या है जिसे तुम लोग नहीं छोड़ सकते? परमेश्वर की इच्छा से बढ़कर और क्या महत्वपूर्ण हो सकता है? परमेश्वर के प्रेम से बढ़कर और क्या हो सकता है? इस अशुद्ध देश में कार्य करना परमेश्वर के लिए पहले ही दोगुना कठिन है। यदि मनुष्य जानबूझकर और इच्छानुसार अवलेहना करता है, तो परमेश्वर का कार्य और लंबा चलेगा। किसी तरह भी, यह किसी के हित में नहीं है, और किसी को कुछ फायदा नहीं है। परमेश्वर समय से नहीं बंधा हुआ है; उसके काम और उसकी महिमा पहले आती है। इसलिये, यदि यह उसका कार्य है, तो समय कितना भी लगे, वह किसी बलिदान को नहीं रख छोड़ेगा । यह परमेश्वर का स्वभाव है: वह तब तक विश्राम नहीं करेगा जब तक उसका कार्य पूरा नहीं हो जाता। जब समय आयेगा कि वह अपनी महिमा के दूसरे भाग को प्राप्त करेगा केवल तब उसका काम समाप्त हो सकेगा। यदि परमेश्वर समस्त ब्रम्हांड में अपनी महिमा के दूसरे भाग के कार्य को पूरा नहीं कर पाये, उसका दिन कभी नहीं आयेगा, उसका हाथ अपने चुने हुओं पर से कभी न हटेगा, उसकी महिमा इस्राएल पर कभी नहीं आयेगी, और उसकी योजना कभी समाप्त नहीं होगी। तुम सबों को देखना चाहिये कि परमेश्वर की इच्छा और कार्य आकाश और पृथ्वी के सृजन और अन्य सब वस्तुओं के सृजन के समान आसान नहीं हैं। आज का कार्य उन लोगों का रूपांतरण करना है जो भ्रष्ट हो चुके हैं, और अत्यधिक सुन्न हो चुके हैं, और उन्हें शुद्ध करना है जो सृजे जाने के बाद शैतान के अनुसार चले हैं, आदम और हव्वा के सृजन करना नहीं, ज्योति की सृष्टि या अन्य सभी पेड़ पौधों और पशुओं के सृजन की तो बात ही दूर है। अब उसका काम उन सबको शुद्ध करना है जिन्हें शैतान ने भ्रष्ट कर दिया है ताकि उनको फिर से हासिल किया जा सके और वे उसकी संपत्ति और उसकी महिमा बनें। यह कार्य उतना आसान नहीं जितना मनुष्य आकाश और पृथ्वी के सृजन और अन्य वस्तुओं के सृजन के संबंध में कल्पना करता है, और न ही यह शैतान को शाप देकर अथाह कुंड में डालने के समान है जैसा मनुष्य कल्पना करता है। बल्कि, यह तो मनुष्य को रूपांतरित करने के लिए है, वह जो नकारात्मक है उसे सकारात्मक बनाने के लिए है और उन सबको अपने अधिकार में लाने के लिए जो परमेश्वर के नहीं है। परमेश्वर के कार्य के इस चरण की यह भीतरी कहानी है। तुम को यह एहसास होना चाहिये, और मामलों को अतिसरल नहीं समझना चाहिये। परमेश्वर का कार्य किसी साधारण कार्य के समान नहीं है, मनुष्य का मन उसके अद्भुत स्वरूप को आत्मसात नहीं कर सकता, और न उसमें निहित बुद्धि को प्राप्त कर सकता है। परमेश्वर सब चीजों का सृजन नहीं कर रहा, और न ही विनाश कर रहा है। बल्कि, वह अपनी समस्त सृष्टि को बदल रहा है और शैतान के द्वारा अशुद्ध की गई सब चीजों को शुद्ध कर रहा है। इसलिये, परमेश्वर महान परिमाण का काम शुरू करेगा, और यह परमेश्वर के कार्य का कुल महत्व है। इन वचनो से, क्या तुम विश्वास करते हो कि परमेश्वर का कार्य बहुत आसान है?

अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है परमेश्वर के प्रकटन को उनके न्याय और ताड़ना में देखना केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? तीन चेतावनियाँ परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग दो केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग एक केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है भाग दो "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं पतरस ने यीशु को कैसे जाना परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे क्या आप जाग उठे हैं? एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग एक परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "बाइबल के विषय में" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन

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