परमेश्वर के दैनिक वचन

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परमेश्वर के उत्कृष्ट वचन (अंश)
वचन देह में प्रकट होता है (संकलन)
वचन देह में प्रकट होता है (संकलन)

तुम में से प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर में विश्वास करके नए सिरे से अपने जीवन की जांच करके यह देख सकता है कि क्या परमेश्वर को खोजते समय, तुम सच्चे रूप में समझ पाए हो, सच्चे रूप में पूर्णत: समझ गये हो, और सच्चे रूप में परमेश्वर को जाने हो, और यह कि तुम सच्चे रूप में जान गये हो कि, विभिन्न मनुष्यों के प्रति परमेश्वर का मनोभाव क्या है, और यह कि तुम वास्तव में यह समझ गये हो कि परमेश्वर तुम पर क्या कार्य कर रहा है और परमेश्वर कैसे उसके प्रत्येक कार्य को व्यक्त करता है। यह परमेश्वर जो तुम्हारी ओर है, तुम्हारे विकास को मार्गदर्शन दे रहा है, तुम्हारी नियति को बना रहा है और तुम्हारी सभी आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है—अंतिम विश्लेषण में तुम क्या सोचते और समझते हो और तुम वास्तव में कितना उसके बारे में जानते हो? क्या तुम जानते हो कि प्रत्येक दिन वह तुम्हारे लिए कौन से कार्य करता है? क्या तुम जानते हो कि उसके प्रत्येक कार्य के पीछे क्या नियम और उद्देश्य होते हैं? क्या तुम जानते हो कि वह कैसे तुम्हारा मार्गदर्शन करता है? क्या तुम जानते हो कि किन स्रोतों के द्वारा वह तुम्हारी सभी ज़रुरतों को पूरा करता है? क्या तुम जानते हो कि किन तरीकों से वह तुम्हारी अगुवाई करता है? क्या तुम जानते हो कि वह तुमसे किस बात की अपेक्षा रखता है और तुम में क्या देखना चाहता है? क्या तुम उसके दृष्टिकोण को जानते हो जिस प्रकार से वह तुम्हारे विभिन्न तरह के व्यवहार को लेता है? क्या तुम यह जानते हो कि क्या तुम उसके एक पसंदीदा व्यक्ति हो? क्या तुम उसके आनन्द, क्रोध, दुख और प्रसन्नता के पीछे छिपे विचारों और उद्देश्यों और उसके सार को जानते हो? अंत में, क्या तुम जानते हो कि जिस परमेश्वर पर तुम विश्वास करते हो वह किस प्रकार का परमेश्वर है? क्या ये ऐसे कुछ प्रश्न हो जिनके बारे में तुमने पहले कभी भी न तो समझा और न उन पर विचार किया? परमेश्वर पर अपने विश्वास का अनुगमन करते हुए क्या तुमने कभी वास्तविक मूल्यांकन और परमेश्वर के कार्यों का अनुभव करके उसके प्रति अपनी सभी ग़लतफहमियों को दूर किया है? क्या तुमने कभी भी परमेश्वर का अनुशासन और ताड़ना प्राप्त करने के बाद, सच्चा समर्पण और ध्यान दिया है? क्या तुमने परमेश्वर की ताड़ना और न्याय के मध्य मनुष्य की विद्रोही और शैतानी प्रकृति को जान पाए हो और परमेश्वर की पवित्रता को थोड़ा सा भी प्राप्त किया है? क्या तुमने कभी भी परमेश्वर के वचनों के मार्गदर्शन और प्रकाशन के अधीन अपने जीवन को एक नए प्रकार से देखना प्रारम्भ किया? क्या तुमने कभी परमेश्वर के द्वारा भेजी हुई परख के मध्य मनुष्यों के अपराध पर उसकी असहिष्णुता को महसूस किया है, साथ ही साथ वह तुमसे क्या अपेक्षा रखता है और वह तुम्हें कैसे बचा रहा है, उसे महसूस किया है? यदि तुम यह नहीं जानते कि परमेश्वर को गलत समझना क्या है या यह कि इन ग़लतफहमियों को ठीक कैसे किया जा सकता है, तो यह कहा जा सकता है कि तुम परमेश्वर के साथ कभी भी वास्तविक सहभागिता में नहीं आए हो और परमेश्वर को कभी जाना ही नहीं, या कहा जा सकता है कि तुमने उसे कभी भी समझने की इच्छा तक नहीं की। यदि तुम परमेश्वर के अनुशासन और ताड़ना को नहीं जानते हो, तो निश्चित ही तुमने समर्पण और परवाह को जाना ही नहीं, या फिर तुमने कभी परमेश्वर के प्रति अपने आपको वास्तव में समर्पित नहीं किया और परमेश्वर की परवाह तक नहीं की। यदि तुमने कभी भी परमेश्वर की ताड़ना और न्याय को अनुभव नहीं किया है तो निश्चित तौर पर तुम उसकी पवित्रता को नहीं जानते हो और तुम इतना भी नहीं समझ पाओगे कि मनुष्यों का परमेश्वर के प्रति विद्रोह क्या होता है। यदि जीवन के प्रति तुम्हारा दृष्टिकोण ठीक नहीं है या जीवन में सही उद्देश्य नहीं है, और अपने भविष्य के प्रति दुविधा और अनिर्णय की स्थिति में हो, यहां तक कि आगे बढ़ने में भी हिचकिचाहट की स्थिति में हो, तो यह स्पष्ट है कि तुमने परमेश्वर के प्रकाशन और मार्गदर्शन को कभी भी वास्तव में महसूस ही नहीं किया है और यह भी कहा जा सकता है कि तुम्हें कभी भी परमेश्वर के वचनों का पोषण प्राप्त नहीं हुआ है। यदि तुम अभी तक परमेश्वर की परीक्षा से नहीं गुज़रे हो तो तुम यह नहीं जान पाओगे कि मनुष्य के अपराधों के प्रति परमेश्वर की असहिष्णुता क्या है और न ही यह समझ सकोगे कि आखिरकार परमेश्वर तुमसे चाहता क्या है, और इसकी समझ तो और भी कम होगी कि आखिरकार मनुष्य के प्रबंधन और उसके बचाव का उसका क्या कार्य है। इससे कुछ भी फ़र्क नही पड़ता कि एक व्यक्ति कितने वर्षों से परमेश्वर पर विश्वास कर रहा है, यदि उसने कभी भी उसके वचन का अनुभव या उसमें कुछ भी समझ हासिल नहीं की है, फिर निश्चित तौर पर वह उद्धार के मार्ग पर नहीं चल रहा है, और परमेश्वर पर उसका विश्वास किसी वास्तविक तत्व पर आधारित नहीं है, उसका परमेश्वर के प्रति ज्ञान भी शून्य है और परमेश्वर के प्रति श्रद्धा क्या होती है इसका उसे बिल्कुल भी अनुमान नहीं है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" से उद्धृत

परमेश्वर के दैनिक वचन

  • परमेश्वर को जानना
  • मसीही जीवन
परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 1 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 2 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 3 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 4 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 5 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 6 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 7 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 8 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 9 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 10 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 11 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 12 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 13 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 14 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 15 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 16 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 17 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 18 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 19 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 20 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 21 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 22 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 23 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 24 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 25 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 26 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 27 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 28 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 29 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 30 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 31 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 32 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 33 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 34 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 35 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 36 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 37 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 38 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 39 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 40 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 41 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 42 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 43 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 44 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 45 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 46 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 47 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 48 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 49 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 50 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 51 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 52 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 53 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 54 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 55 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 56 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 57 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 58 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 59 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 60 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 61 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 62 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 63 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 64 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 65 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 66 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 67 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 68 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 69 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 70 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 71 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 72 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 73 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 74 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 75 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 76 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 77 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 78 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 79 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 80 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 81 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 82 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 83 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 84 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 85 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 86 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 87 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 88 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 89 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 90 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 91 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 92 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 93 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 94 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 95 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 96 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 97 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 98 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 99 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 100 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 101 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 102 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 103 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 104 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 105 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 106 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 107 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 108 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 109 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 110 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 111 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 112 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 113 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 114 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 115 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 116 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 117 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 119 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 120 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 121 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 122 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 123 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 124 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 125 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 126 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 127 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 128 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 129 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 130 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 131 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 132 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 133 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 134 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 135 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 136 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 137 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 138 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 139 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 140 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 141 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 142 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 143 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 145 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 146 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 147 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 148 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V" | अंश 150
कार्य के तीन चरण छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी (अंश II) परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है (अंश V) परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3) (अंश II) परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3) (अंश IV) परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3) (अंश VIII) परमेश्वर के दैनिक वचन | "छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी" | अंश 1 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 2 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 3 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 4 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 5 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 6 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 7 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 8 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 9 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 10 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" | अंश 11 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (4)" | अंश 12 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 14 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 15 परमेश्वर के दैनिक वचन | "दो देहधारण पूरा करते हैं देहधारण के मायने" | अंश 16 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 17 परमेश्वर के दैनिक वचन | "व्यवस्था के युग का कार्य" | अंश 18 परमेश्वर के दैनिक वचन | "व्यवस्था के युग का कार्य" | अंश 20 परमेश्वर के दैनिक वचन | "छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी" | अंश 23 परमेश्वर के दैनिक वचन | "प्रस्तावना" | अंश 25 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (4)" | अंश 26 परमेश्वर के दैनिक वचन | "राज्य का युग वचन का युग है" | अंश 28 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" | अंश 32 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (4)" | अंश 33 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" | अंश 34 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" | अंश 35 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" | अंश 36 परमेश्वर के दैनिक वचन | "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक 'सफेद बादल' पर सवार होकर वापस आ चुका है" | अंश 44 परमेश्वर के दैनिक वचन | "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक 'सफेद बादल' पर सवार होकर वापस आ चुका है" | अंश 45 परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर के प्रकटन को उसके न्याय और ताड़ना में देखना (अंश I) परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 26 | अंश 63 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 27 | अंश 64 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 29 | अंश 65 परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 29 | अंश 66 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सात गर्जनाएँ—भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे" | अंश 69 परमेश्वर के दैनिक वचन | "उद्धारकर्त्ता पहले ही एक 'सफेद बादल' पर सवार होकर वापस आ चुका है" | अंश 70 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है" | अंश 71 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है" | अंश 72 परमेश्वर के दैनिक वचन | "प्रस्तावना" | अंश 74 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा" | अंश 75 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा" | अंश 76 अंत के दिनों में न्याय परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3) (अंश III) परमेश्वर के दैनिक वचन | "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" | अंश 77 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" | अंश 78 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" | अंश 79 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" | अंश 80 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 82 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 83 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल वे लोग ही परमेश्वर की गवाही दे सकते हैं जो परमेश्वर को जानते हैं" | अंश 86 देहधारण भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है (अंश I) भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है (अंश IV) भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है (अंश VII) भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की सबसे अधिक आवश्यकता है (अंश IX) तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है (अंश II) केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है (अंश III) स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है (अंश I) देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं (अंश I) मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना (अंश XI) परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (3)" | अंश 114 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" | अंश 99 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" | अंश 100 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" | अंश 101 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" | अंश 102 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" | अंश 103 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार" | अंश 104 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" | अंश 105 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" | अंश 106 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" | अंश 107 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" | अंश 108 परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है" | अंश 109 परमेश्वर के दैनिक वचन | "प्रस्तावना" | अंश 110 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (3)" | अंश 115 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (4)" | अंश 116 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 119 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 120 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 122 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 123 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 124 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 125 परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 126 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है" | अंश 132 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है" | अंश 133 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है" | अंश 134 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है" | अंश 135 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" | अंश 136 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर" | अंश 137 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर" | अंश 139 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है" | अंश 140 परमेश्वर के कार्य को जानना संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 10 (अंश I) देहधारण का रहस्य (4) (अंश I) सहस्राब्दि राज्य आ चुका है (अंश II) देहधारण का रहस्य (2) (अंश I) विजय के कार्यों का आंतरिक सत्य (4) (अंश I) विजय के कार्यों का आंतरिक सत्य (3) (अंश I) परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य (अंश III) परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य (अंश VI) परमेश्वर के दैनिक वचन | "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" | अंश 141 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" | अंश 142 परमेश्वर के दैनिक वचन | "आज परमेश्वर के कार्य को जानना" | अंश 143 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" | अंश 145 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं" | अंश 146 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 147 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 148 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 149 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 150 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई" | अंश 151 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 155 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 157 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का अभ्यास" | अंश 158 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर" | अंश 160 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर" | अंश 161 परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (1)" | अंश 169 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 172 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 173 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 180 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का कार्य" | अंश 181 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या परमेश्वर का कार्य उतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?" | अंश 188 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या परमेश्वर का कार्य उतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?" | अंश 189 परमेश्वर के दैनिक वचन | "कार्य और प्रवेश (4)" | अंश 191 परमेश्वर के दैनिक वचन | "कार्य और प्रवेश (4)" | अंश 192 परमेश्वर के दैनिक वचन | "विजय के कार्यों का आंतरिक सत्य (4)" | अंश 204 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियंता है" | अंश 215 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है" | अंश 216 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" | अंश 217 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" | अंश 218 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है" | अंश 219 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" | अंश 220 परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है (अंश II) परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है (अंश I) परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है (अंश II) परमेश्वर के दैनिक वचन | "नये युग की आज्ञाएँ" | अंश 243 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है" | अंश 244 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है" | अंश 245 परमेश्वर के दैनिक वचन | "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" | अंश 249 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है" | अंश 254 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सर्वशक्तिमान की आह" | अंश 261 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियंता है" | अंश 262 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियंता है" | अंश 263 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है" | अंश 264 बाइबल के बारे में रहस्य बाइबल के विषय में (1) (अंश I) बाइबल के विषय में (2) (अंश I) बाइबल के विषय में (3) (अंश III) परमेश्वर के दैनिक वचन | "बाइबल के विषय में (1)" | अंश 268 परमेश्वर के दैनिक वचन | "बाइबल के विषय में (3)" | अंश 272 परमेश्वर के दैनिक वचन | "बाइबल के विषय में (4)" | अंश 275 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य, जिसने परमेश्वर को अपनी ही धारणाओं में सीमित कर दिया है, वह किस प्रकार उसके प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है?" | अंश 278 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए" | अंश 280 धर्म-संबंधी धारणाओं का खुलासा केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है (अंश II) मनुष्य, जिसने परमेश्वर को अपनी ही धारणाओं में सीमित कर दिया है, वह किस प्रकार उसके प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है? (अंश I) परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं" | अंश 283 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य, जिसने परमेश्वर को अपनी ही धारणाओं में सीमित कर दिया है, वह किस प्रकार उसके प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है?" | अंश 285 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा" | अंश 286 परमेश्वर के दैनिक वचन | "जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा" | अंश 287 परमेश्वर के दैनिक वचन | "विजय के कार्यों का आंतरिक सत्य (3)" | अंश 291 परमेश्वर के दैनिक वचन | "वे सभी लोग जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे वो लोग हैं जो परमेश्वर का विरोध करते हैं" | अंश 293 परमेश्वर के दैनिक वचन | "वे सभी लोग जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे वो लोग हैं जो परमेश्वर का विरोध करते हैं" | अंश 294 परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए" | अंश 295 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या त्रित्व का अस्तित्व है?" | अंश 296 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या त्रित्व का अस्तित्व है?" | अंश 297 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या त्रित्व का अस्तित्व है?" | अंश 298 परमेश्वर के दैनिक वचन | "क्या त्रित्व का अस्तित्व है?" | अंश 299 इंसान की भ्रष्टता का खुलासा संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन: अध्याय 10 (अंश II) बुलाए गए लोग बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं (अंश I) तुम लोगों को अपने कर्मों पर विचार करना चाहिए (अंश II) जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं (अंश II) देह की चिन्ता करने वालों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है (अंश I) परमेश्वर के दैनिक वचन | "कार्य और प्रवेश (7)" | अंश 311 परमेश्वर के दैनिक वचन | "पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें" | अंश 321 परमेश्वर के दैनिक वचन | "सर्वशक्तिमान की आह" | अंश 356 परमेश्वर के दैनिक वचन | "केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है" | अंश 357 जीवन में प्रवेश केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है (अंश I) परमेश्वर के प्रकटन को उसके न्याय और ताड़ना में देखना (अंश II) परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है" | अंश 405 परमेश्वर के दैनिक वचन | "वास्तविकता को कैसे जानें" | अंश 433 मंज़िलें और परिणाम परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे (अंश VIII) अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो (अंश I) परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे (अंश III) परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे (अंश I) मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना (अंश II) मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना (अंश IV) मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना (अंश I) परमेश्वर के दैनिक वचन | "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" | अंश 585 परमेश्वर के दैनिक वचन | "अपनी मंज़िल के लिए पर्याप्त संख्या में अच्छे कर्मों की तैयारी करो" | अंश 586 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है" | अंश 587 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 589 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 591 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" | अंश 595 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" | अंश 597 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" | अंश 598 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" | अंश 599 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे" | अंश 600 परमेश्वर के दैनिक वचन | "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है" | अंश 612

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