Hindi Christian Song | परमेश्वर का न्याय उसकी धार्मिकता और पवित्रता को प्रकट करता है
29 अप्रैल, 2026
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मैं आज जो वचन बोलता हूँ, वे मनुष्य के पापों का न्याय करने के लिए हैं, मनुष्य की अधार्मिकता का न्याय करने के लिए और मनुष्य के विद्रोहीपन को शाप देने के लिए हैं। मनुष्य की कुटिलता और धोखेबाजी, उसके शब्द और कर्म—जो भी परमेश्वर के इरादों के विपरीत हैं उन सबका न्याय होना चाहिए और मनुष्य का समस्त विद्रोहीपन पाप के रूप में ठहराया जाता है। उसके वचन न्याय के सिद्धांतों के इर्द-गिर्द घूमते हैं; वह मनुष्य की अधार्मिकता का न्याय करता है, मनुष्य की विद्रोहशीलता को श्राप देता है और मनुष्य के सभी कुरूप चेहरों को उजागर करता है, ताकि अपने धार्मिक स्वभाव को प्रकट करे। पवित्रता उसके धार्मिक स्वभाव का निरूपण है और दरअसल उसकी पवित्रता उसका धार्मिक स्वभाव है। तुम लोगों के भ्रष्ट स्वभाव आज के वचनों के प्रसंग हैं—मैं उनके अनुसार बोलता हूँ, न्याय करता हूँ और विजय के कार्य को कार्यान्वित करता हूँ। मात्र यही व्यावहारिक कार्य है और केवल इसी तरह से परमेश्वर की पवित्रता पूरी तरह से रेखांकित हो सकती है।
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यह ठीक इन्हीं वचनों के न्याय के कारण है कि तुम यह देख पाए हो कि परमेश्वर धार्मिक और पवित्र परमेश्वर है; ठीक अपनी पवित्रता और धार्मिकता की वजह से ही वह तुम लोगों का न्याय करता है और तुम लोगों पर अपना क्रोध बरसाता है; ठीक मानवजाति की विद्रोहशीलता को देखने की वजह से ही वह अपना धार्मिक स्वभाव प्रकट करता है। मानवजाति की मलिनता और भ्रष्टता उसकी पवित्रता को प्रकट करती है। यह दिखाने के लिए यह पर्याप्त है कि वह स्वयं परमेश्वर है, जो पवित्र और निष्कलंक है और फिर भी मलिनता की धरती पर रहता है। यदि कोई व्यक्ति दूसरों के साथ कीचड़ में लोटता है और उसके बारे में कुछ भी पवित्र नहीं है, और उसके पास कोई धार्मिक स्वभाव नहीं है तो वह मनुष्य की अधार्मिकता का न्याय करने के योग्य नहीं है, न ही वह मनुष्य पर न्याय को कार्यान्वित करने के योग्य है। जो लोग एक-दूसरे के समान ही बराबर मलिन हैं, वे अपने ही जैसे लोगों का न्याय करने के योग्य कैसे हो सकते हैं? केवल स्वयं पवित्र परमेश्वर ही पूरी मलिन मानवजाति का न्याय कर सकता है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, विजय-कार्य के दूसरे चरण के प्रभावों को कैसे प्राप्त किया जाता है
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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