Hindi Christian Testimony Video, एपिसोड 653: क्या "दूसरों के प्रति सहिष्णु होना" सचमुच अच्छी मानवता है?
31 मार्च, 2026
वह एक कलीसिया अगुआ है। अपने सहकर्मियों और भाई-बहनों को यह सोचवाने के लिए कि उसकी मानवता अच्छी है, वह अपने मेलजोल में इस नैतिक मानक का अनुसरण करती थी कि "अपने प्रति सख्त और दूसरों के प्रति सहिष्णु बनो"। जब वह सहकर्मियों को बोझ की भावना के बिना अपना कर्तव्य निभाते देखती थी, तो वह इसे इंगित नहीं करती थी और न ही मदद की पेशकश करती थी, बल्कि जो उनकी जिम्मेदारी का कार्य होना चाहिए था उसे खुद आगे बढ़कर संभाल लेती थी। नतीजतन, उसके अपने मुख्य कर्तव्यों में देरी हो जाती थी। "अपने प्रति सख्त और दूसरों के प्रति सहिष्णु बनो" क्या सचमुच एक अच्छी मानवता का मानक है?
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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