Hindi Christian Song | देखने में इतनी भद्दी लगती है परमेश्वर में मनुष्य की आस्था
14 मई, 2026
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परमेश्वर का अनुसरण करने वाले बहुत सारे लोग केवल इस बात से मतलब रखते हैं कि आशीष कैसे प्राप्त किए जाएँ या आपदा को कैसे टाला जाए। जैसे ही परमेश्वर के कार्य और प्रबंधन का उल्लेख किया जाता है, वे चुप हो जाते हैं और सारी रुचि खो देते हैं। उन्हें लगता है कि इस प्रकार के उबाऊ मुद्दों को समझने से उनके जीवन की प्रगति में कोई मदद नहीं मिलेगी और न ही कोई लाभ प्राप्त होगा। परिणामस्वरूप, भले ही उन्होंने परमेश्वर के प्रबंधन के बारे में जानकारी सुनी हो, वे इसके साथ अगंभीर तरीके से पेश आते हैं। वे इसे स्वीकारने योग्य कोई खजाना नहीं मानते, न ही इसे समझने के लिए अपने जीवन का हिस्सा बनाते हैं। परमेश्वर का अनुसरण करने में इन लोगों का उद्देश्य बहुत सरल होता है और यह एक ही लक्ष्य के लिए होता है : आशीषित होना। ये लोग ऐसी किसी भी दूसरी चीज पर ध्यान देने की परवाह नहीं कर सकते जो इस उद्देश्य से संबंध नहीं रखती।
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परमेश्वर के साथ मनुष्य का संबंध केवल नग्न स्वार्थ का संबंध है। यह आशीष लेने वाले और देने वाले के मध्य का संबंध है। यह एक कर्मचारी और एक नियोक्ता के बीच का संबंध है। कर्मचारी केवल नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाले प्रतिफल प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करता है। इस प्रकार के स्वार्थ आधारित संबंध में कोई आत्मीय स्नेह नहीं होता, केवल लेन-देन होता है। प्रेम करने या प्रेम पाने जैसी कोई बात नहीं होती, केवल दान और दया होती है। कोई समझ नहीं होती, केवल असहाय दबा हुआ आक्रोश और धोखा होता है। कोई अंतरंगता नहीं होती, केवल एक अगम खाई होती है। अब जबकि चीजें इस बिंदु तक आ गई हैं तो ऐसी राह को कौन उलट सकता है? और कितने लोग इस बात को वास्तव में समझने में सक्षम हैं कि यह संबंध कितना गंभीर बन चुका है? जब लोग आशीष प्राप्त होने के आनंदपूर्ण वातावरण में निमग्न हो जाते हैं तो कोई यह कल्पना नहीं कर सकता कि परमेश्वर के साथ ऐसा संबंध कितना अटपटा और भद्दा है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परिशिष्ट 3 : मनुष्य को केवल परमेश्वर के प्रबंधन के बीच ही बचाया जा सकता है
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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