Hindi Christian Testimony Video, एपिसोड 666: मैं समझती हूँ कि मैं बहुत ही स्वार्थी हूँ

29 अप्रैल, 2026

वह एक अगुआ का कर्तव्य कर रही थी। जब उसने देखा कि उसके सहकर्मियों की जिम्मेदारी वाले काम में समस्याएँ हैं और उन पर चर्चा करने की जरूरत है, तो भले ही उसके पास स्पष्ट दृष्टिकोण और सुझाव थे, उसे डर था कि इन चर्चाओं से उसका कार्यभार बढ़ जाएगा और उसने सोचा कि अगर उसने काम को अच्छी तरह से करने में मदद की, तो भी उसे इसका श्रेय नहीं मिलेगा। इसलिए उसने स्थिति को नजरअंदाज कर दिया। जब उसके एक सहकर्मी ने उसके स्वार्थ को उजागर किया, तो उसे लगा कि वे उसे नहीं समझते और वह पीड़ा और मन के दमन की दशा में डूबने लगी। परमेश्वर के वचनों को खाने और पीने से उसे आखिरकार एहसास हुआ कि एक अगुआ के रूप में कलीसिया के समग्र कार्य पर विचार किए बिना केवल अपने कामों पर ध्यान केंद्रित करना गैर-जिम्मेदाराना था और इससे उसका स्वार्थी भ्रष्ट स्वभाव प्रकट होता था। अंत में, वह अपने हितों को छोड़ने में सक्षम हुई और अपना कर्तव्य करने के लिए अपने सहकर्मियों के साथ सामंजस्यपूर्ण ढंग से कार्य में सहयोग किया।

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