परमेश्वर सभी चीज़ों की सृष्टि करने के लिए वचनों को प्रयोग करता है परमेश्वर आदम और हव्वा को बनाते हैं नूह अब्राहम परमेश्वर सदोम को नष्ट कर देते हैं परमेश्वर द्वारा नीनवे के उद्धार अय्यूब कार्य करने के लिए परमेश्वर का पहली बार देह बनना परमेश्वर सभी चीज़ों के लिए जीवन का स्रोत है मानव जीवन में छह मोड़ परमेश्वर आध्यात्मिक क्षेत्र पर कैसे शासन करता और उसे चलाता है परमेश्वर के वचनों का अधिकार और सामर्थ्य
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मानव जीवन में छह मोड़

सृष्टिकर्ता की संप्रभुता से मानवजाति का भाग्य और विश्व का भाग्य अविभाज्य हैं

तुम सब वयस्क हो। तुम लोगों में से कुछ अधेड़-उम्र के हैं; कुछ लोग वृद्धावस्था में कदम रख चुके हैं। तुम लोग परमेश्वर पर विश्वास न करने से लेकर, उस पर विश…

पहला मोड़ : जन्म

किसी व्यक्ति का कहाँ जन्म होता है, वह किस परिवार में जन्म लेता या लेती है, उसका लिंग, रंग-रूप, और जन्म का समय : ये किसी व्यक्ति के जीवन के प्रथम मोड़ …

दूसरा मोड़ : बड़ा होना

लोगों ने किस प्रकार के परिवार में जन्म लिया है, इस आधार पर वे भिन्न-भिन्न पारिवारिक परिवेशों में बड़े होते हैं और अपने माता-पिता से भिन्न-भिन्न पाठ सी…

तीसरा मोड़ : स्वावलंबन

बचपन और किशोरावस्था पार करने के बाद जब कोई व्यक्ति धीरे-धीरे तथा परिपक्वता प्राप्त करता है, तो उसके लिए अगला कदम अपनी किशोरावस्था को पूरी तरह से अलविद…

चौथा मोड़ : विवाह

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है और परिपक्वता आती है, तो व्यक्ति अपने माता-पिता से एवं उस परिवेश से और भी अधिक दूर हो जाता है जिसमें वह जन्मा और पला-बढ़ा था। इसक…

पाँचवाँ मोड़ : संतान

विवाह करने के पश्चात्, व्यक्ति अगली पीढ़ी को बड़ा करना आरंभ करता है। इस पर किसी का वश नहीं चलता कि उसकी कितनी और किस प्रकार की संतानें होंगी; यह भी, व्य…

छठा मोड़ : मृत्यु

इतनी हलचल, भाग-दौड़, इतनी कुंठाओं और निराशाओं के पश्चात्, इतने सारे सुख-दुःख और उतार-चढ़ावों के पश्चात्, इतने सारे अविस्मरणीय वर्षों के पश्चात्, बार-बा…

सृजनकर्ता की संप्रभुता को जानने के अवसर को मत छोड़ो

ऊपर वर्णन किए गए छह मोड़ सृजनकर्ता के द्वारा निर्धारित किए गए ऐसे महत्वपूर्ण चरण हैं जिनसे होकर प्रत्येक सामान्य व्यक्ति को अपने जीवन में गुज़रना ही हो…

कोई भी इस सच्चाई को नहीं बदल सकता है कि परमेश्वर मनुष्य के भाग्य पर संप्रभुता रखता है

जो कुछ मैंने अभी-अभी कहा है उसे सुनने के बाद, क्या भाग्य के बारे में तुम लोगों का विचार बदला है? तुम लोग मनुष्य के भाग्य पर परमेश्वर की संप्रभुता के त…

उस व्यक्ति के लिए उचित दृष्टिकोण और अभ्यास जो परमेश्वर के अधिकार के प्रति समर्पण करने की इच्छा रखता है

किस दृष्टिकोण के साथ अब मनुष्य को परमेश्वर के अधिकार, और मनुष्य के भाग्य पर परमेश्वर की संप्रभुता के तथ्य को जानना और मानना चाहिए? यह एक वास्तविक समस्…

परमेश्वर को अपने अद्वितीय संप्रभु के रूप में स्वीकार करना उद्धार पाने का पहला कदम है

परमेश्वर के अधिकार से संबंधित सत्य ऐसे सत्य हैं जिन्हें प्रत्येक व्यक्ति को गंभीरता से लेना चाहिए, अपने हृदय से अनुभव करना और समझना चाहिए; क्योंकि ये …

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