सत्य का अनुसरण कैसे करें (11) भाग पाँच

सितारों को आदर्श मानने को पसंद करना

हमने कलाओं से प्रेम करने पर चर्चा पूरी कर ली है। अब, आओ मशहूर हस्तियों के निजी मामलों में दिलचस्पी लेना पसंद करने के बारे में बात करते हैं। कुछ लोग मशहूर हस्तियों, सितारों के निजी मामलों में दिलचस्पी लेना बहुत पसंद करते हैं—जैसे कि मशहूर हस्तियाँ क्या खाती हैं, क्या पहनती हैं, मौज-मस्ती के लिए कहाँ जाती हैं, क्या उन्होंने कॉस्मेटिक सर्जरी करवाई है, वे रूमानी तौर पर किसके साथ जुड़ी हैं, विपरीत लिंग के उनके कौन-से दोस्त हैं, उनके यौन साथी कौन हैं, यहाँ तक कि उनके कितने नाजायज बच्चे हैं और किन बड़े अधिकारियों या अमीर लोगों के साथ उनके करीबी संबंध हैं। ऐसे लोग मशहूर हस्तियों के इन निजी मामलों में बहुत ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। वे न केवल मशहूर हस्तियों के निजी मामलों में दिलचस्पी लेते हैं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जीवनशैली संबंधी पसंद, बोलचाल और व्यवहार और जिंदगी के प्रति उनके रवैये की नकल करना भी विशेष रूप से पसंद करते हैं। साथ ही, वे उनके ठौर-ठिकाने और उनके विभिन्न विचारों और दृष्टिकोणों का अनुसरण करना भी पसंद करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी मशहूर हस्ती को किसी खास तरह का पालतू कुत्ता पालना पसंद है, तो वे भी वैसा ही कुत्ता पालते हैं। अगर कोई मशहूर हस्ती बाजार में विशेष रूप से लोकप्रिय किसी खास ब्रांड के कपड़े पहनती है, तो वे भी वही कपड़े खरीदेंगे। अगर वे उन्हें खरीद नहीं सकते, तो वे इसके बजाय उनकी सस्ती नकल खरीद लेते हैं। अगर कोई मशहूर हस्ती किसी खास कॉस्मेटिक उत्पाद का इस्तेमाल करती है, तो वे भी खुद को सुंदर दिखाने के लिए उसे खरीदेंगे, भले ही वे बहुत तंगहाल हों और उसे खरीदने के लिए उन्हें अपनी किडनी या खून तक बेचना पड़े। वे मशहूर हस्तियों का पीछा करते हुए वहाँ भी पहुँच जाते हैं जहाँ वे परफॉर्म करते हैं, प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं या फिल्म और टीवी रिलीज कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। वे जिस मशहूर हस्ती को फॉलो करते हैं, उसकी हर बात, हर क्रियाकलाप, हर कदम और हर गतिविधि पर ध्यान देंगे और उसकी खोज-खबर रखेंगे और दीवानगी की उस हद तक पहुँच जाएँगे जहाँ उनकी अपनी कोई जिंदगी नहीं रह जाती या उनके अपने सही विचार, दृष्टिकोण और जीवनशैली नहीं रह जाती, जहाँ वे पूरी तरह से उस मशहूर हस्ती के विचारों, दृष्टिकोणों और जीवनशैली से गुमराह और नियंत्रित हो जाते हैं। यह किस तरह की समस्या है? क्या यह जन्मजात स्थिति है? (नहीं।) क्या इसका उस सामाजिक परिवेश से कोई लेना-देना है जिसमें आज लोग रहते हैं? (हाँ।) इसका थोड़ा-बहुत संबंध है। तो इस तथ्य के बावजूद कि सभी लोग एक समान वर्तमान परिवेश में रहते हैं, ऐसा क्यों है कि हमेशा लोगों का एक खास समूह ही सितारों को आदर्श मानता है, हर व्यक्ति नहीं? इसका संबंध किस चीज से है? क्या तुम कहोगे कि जो लोग सितारों को आदर्श मानते हैं, वे कलाओं से प्रेम करते हैं? यह जरूरी नहीं है। क्या वे कलाओं में माहिर होते हैं? यह भी जरूरी नहीं कि सच हो। लेकिन वे जो चीजें करते हैं, वे कला-जगत के लोगों और कलात्मक प्रवृत्तियों से जुड़ी होती हैं। यह किस तरह की समस्या है? क्या यह भ्रष्ट स्वभावों की समस्या है? यह असल में भ्रष्ट स्वभावों का खुलासा ही है। ऐसे लोग बुराई को पूजते हैं और दुष्ट प्रवृत्तियों का अनुसरण करते हैं। तो क्या ऐसे लोगों की मानवता में कोई समस्या होती है? (हाँ।) जब जिंदगी में चुनने के लिए इतने सारे मार्ग हैं, तो वे ऐसा मार्ग क्यों चुनते हैं? क्या इसमें चरित्र का मामला शामिल है? (हाँ।) कुछ लोग कहते हैं : “यह मानवता का दोष है। यह जन्मजात भोला और मूर्ख होना और आसानी से दूसरों के बहकावे में आ जाना है।” क्या यही कारण है? (नहीं।) दूसरे लोग कहते हैं : “क्या ऐसा इसलिए है कि सितारों को आदर्श मानने वाले ज्यादातर लोग युवा, अपरिपक्व और सतही होते हैं, जो इन सामाजिक प्रवृत्तियों के प्रलोभन के सामने टिक नहीं पाते?” क्या ऐसा इसलिए है कि वे युवा हैं? (नहीं।) सितारों को आदर्श मानने वाले कुछ लोग अधेड़ उम्र के या बुजुर्ग भी होते हैं—इस समूह में हर उम्र के लोग शामिल होते हैं। इसे देखते हुए, सितारों को आदर्श मानने वाले ये लोग इन सामाजिक प्रवृत्तियों से इसलिए गुमराह नहीं होते कि वे युवा और अपरिपक्व हैं और अभी जिंदगी के मामले नहीं समझते। इसलिए, यह दावा कि “सितारों को आदर्श मानने वाले सभी लोग युवा और अपरिपक्व होते हैं,” सही नहीं है। चूँकि यह युवा और अपरिपक्व होने की वजह से नहीं है, इसलिए यह मानवता की समस्या है। तो यह मानवता की क्या समस्या है? क्या यह सही कामों में न लगना है? (हाँ।) एक ओर यह सही कामों में न लगना है; दूसरी ओर यह थोड़ा छिछोरा होना और उचित दायरों के भीतर न रहना है। यह और क्या है? (सही मार्ग पर न चलना।) यह सही है—यह सही मार्ग पर न चलना है। इसमें उस मार्ग का मुद्दा शामिल है जिसे कोई व्यक्ति अपनाता है। वयस्क होने के बाद व्यक्ति किस पेशे में लगता है और इस समाज में और लोगों के बीच अनुसरण के लिए किस तरह का मार्ग चुनता है, यह एक जरूरी सबक है जो हर व्यक्ति के सामने होता है। क्या वे अपने स्थान पर बने रहते हैं और सही तरीके से अपना जीवन जीते हैं, क्या वे सही पेशे में लगते हैं और क्या वे सही काम करते हैं और सही मार्ग पर चलते हैं—यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि वे अपनी मानवता के भीतर किस चीज को पसंद करते हैं और किस चीज का अनुसरण करते हैं। सभी क्षेत्रों के लोगों को देखो—कुछ लोग मार्शल आर्ट्स का अभ्यास करते हैं, कुछ स्वस्थ जीवन जीने के बारे में सीखते हैं, कुछ प्रौद्योगिकी उद्योग में काम करते हैं, कुछ फैशन उद्योग में लगे हैं, कुछ फिल्म और टेलीविजन उद्योग में संलग्न हैं, कुछ व्यवसाय करते हैं और कुछ राजनीति में शामिल हो जाते हैं; वहीं कुछ बौद्ध धर्म में विश्वास करते हैं, कुछ ताओवादी धर्म अपनाते हैं और कुछ लोग परमेश्वर में विश्वास करना चुनते हैं। कुछ लोगों के पास कोई सही पेशा नहीं होता, न ही वे जीवन में अपने लक्ष्य तलाशते हैं—वे हर रोज बस सितारों को आदर्श मानने पर ध्यान केंद्रित करते रहते हैं। वे किस हद तक ऐसा करते हैं? इस हद तक कि उन्हें खाने-पीने की भी सुध नहीं रहती। जिस सितारे को वे आदर्श मानते हैं, अगर वह उनके सपनों का प्रेमी या प्रेमिका हो, तो वे किसी भी समय अपने जीवनसाथी को भी छोड़ सकते हैं। अगर ये लोग सितारों को दीवानगी की हद तक आदर्श मानते हों, इस हद तक कि यह उनके जीवन और उनके मार्ग के चुनाव को तय करने लगे और उनके जीवन का एक अटूट हिस्सा बन जाए, तो उनके जीवन अभी किस दशा में हैं? क्या ऐसा व्यक्ति अपनी मर्यादा में रहकर एक उचित जीवन जी सकता है? (नहीं।) अगर सितारों को आदर्श मानने वाला व्यक्ति कोई महिला है, तो क्या वह अपने पति का साथ देने वाली और बच्चों की परवरिश करने वाली एक कर्तव्यपरायण गृहिणी, एक सच्चरित्र पत्नी और प्यारी माँ बन सकती है? (नहीं।) जो व्यक्ति दीवानगी की हद तक सितारों को आदर्श मानता है, वह बस पागल होता है। जहाँ भी उसके सपनों का प्रेमी या प्रेमिका कॉन्सर्ट या प्रेस कॉन्फ्रेंस करता या करती है, वह ऑटोग्राफ लेने के लिए वहाँ जाने को बाध्य महसूस करता है। वह उसका पीछा करने के लिए हवाई जहाज से लंबी यात्राएँ करता है, यहाँ तक कि दूसरे देशों में चला जाता है और उसका परिवार उसे रोक नहीं पाता। वह लगातार मशहूर हस्ती के यात्राक्रम पर ऑनलाइन नजर रखता है और उन जगहों पर डेरा डाले रहता है जहाँ मशहूर हस्ती आने वाली होती है। अगर वह उससे नहीं मिल पाता है, तो वह कई दिनों और रातों तक बिना खाए-सोए रहता है और लगातार रोता रहता है। आम तौर पर, इंटरनेट और टीवी पर वह जिन चीजों में दिलचस्पी लेता है, वे सब मशहूर हस्तियों के बारे में होती हैं। बेशक, कुछ लोग सिर्फ एक मशहूर हस्ती पर नहीं, बल्कि कई मशहूर हस्तियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं—पुरुष और महिला हस्तियाँ, युवा, अधेड़ और बुजुर्ग हस्तियाँ। वे इन मशहूर हस्तियों के रंग-रूप, उनकी शादी की स्थिति, उनके रिश्तों की स्थिति और उनकी निजी जिंदगी में दिलचस्पी लेते हैं और उनके बारे में जानकारी खोजने में बहुत ज्यादा मानसिक ऊर्जा लगाते हैं। वे सितारों को आदर्श मानने को जिंदगी में खुशी और दिलचस्पी का स्रोत मानते हैं और उसमें ऐसे संलग्न होते हैं जैसे यह कोई बहुत गंभीर मामला हो। ऐसे व्यक्तियों की जिंदगी किस दशा में होती है? वे चलती-फिरती लाश की तरह होते हैं—उनके विचार, उनकी जिंदगी की दशा, साथ ही उनका रोजमर्रा का व्यवहार और उनका मिजाज अच्छा है या बुरा, ये सब पूरी तरह से उस मशहूर हस्ती से प्रभावित होते हैं जिसके पीछे वे भागते हैं और जिसकी नकल करते हैं। जिस मशहूर हस्ती का वे पीछा करते हैं, अगर वह किसी रिश्ते में आ जाती है, तो उन्हें इतना दुख होता है कि कई दिनों और रातों तक उन्हें खाने-पीने की सुध नहीं रहती। अगर मशहूर हस्ती का अपने पार्टनर से ब्रेकअप हो जाता है, तो वे बहुत खुश होते हैं, छककर खाते और पीते हैं, शैंपेन खोलते हैं और जश्न मनाने के लिए वीबो पर पोस्ट करते हैं। हर रात वे उस मशहूर हस्ती के साथ होने का सपना देखते हैं जिसका वे पीछा करते हैं और सिर्फ सुनहरे सपने ही देखते रहते हैं! जिस मशहूर हस्ती का वे पीछा करते हैं, वह उनके सपनों का प्रेमी होता है और उन्हें कोई और व्यक्ति उस मशहूर हस्ती जितना अच्छा नहीं लगता। क्या उनकी जिंदगी की दशा असामान्य नहीं होती? (हाँ।) वे दीवानगी के इस स्तर तक पहुँच चुके होते हैं—क्या वे किसी बुरी आत्मा द्वारा नियंत्रित हुए हैं? (हाँ।) तो क्या ऐसे लोगों की मानवता में कोई दोष होता है या कोई खामी या समस्या होती है? (समस्या होती है।) उनकी मानसिक स्थिति थोड़ी असामान्य होती है। सामान्य लोग कभी-कभी कला की दुनिया के लोगों के बारे में कुछ खबरें सुनते हैं और जब वे गपशप कर रहे होते हैं, तो वे यूँ ही इसके बारे में भी कुछ शब्द कह सकते हैं, लेकिन जब वे असल जिंदगी में लौटते हैं, तो वे सामान्य रूप से जीना जारी रखते हैं। अगर वे माँ हैं, तो वे माँ के तौर पर अपनी जिम्मेदारियाँ निभाती हैं; अगर वे पिता हैं, तो वे पिता के तौर पर अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हैं। वे जो काम करते हैं, उस पर जरा भी असर नहीं पड़ता या उसमें कोई रुकावट नहीं आती। जिस सितारे को वे पसंद करते हैं, अगर वह कहीं कॉन्सर्ट आयोजित करता है, तो उन्हें लगता है कि इसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है और वे अभी भी बिना प्रभावित हुए सामान्य तौर पर अपना जीवन जीते रहते हैं। भले ही उनके मन में उस सितारे के लिए कुछ प्रशंसा और उसके प्रति कुछ ईर्ष्या होती है और थोड़ा लगाव होता है, लेकिन जब वे असल जीवन में लौटते हैं, तो उनके पास अपने स्वतंत्र विचार होते हैं; उनका अपना जीवन और करियर होता है और अपनी आस्था होती है; जिन चीजों का उन्हें अनुसरण करना चाहिए और जिस मार्ग पर उन्हें चलना चाहिए, उन पर जरा-सा भी असर नहीं पड़ता। यह मानवता की सामान्य सोच और सामान्य मानसिक स्थिति होना है। लेकिन जो लोग सितारों को आदर्श मानना पसंद करते हैं, वे पहले ही इस प्रक्रिया में खुद को और अपने आपको नियंत्रित करने की क्षमता खो चुके होते हैं; उन्हें पूरी तरह से ये तथाकथित सितारे संचालित करते हैं—वे उनकी हर एक बात मानते हैं। उनके विचार और उनके जीवन की स्थिति पूरी तरह से सितारों के शब्दों, क्रियाकलापों और भावनाओं से नियंत्रित और निर्देशित होती है। यह अब केवल मानवता की समस्या नहीं रहती—उनकी मानसिक स्थिति कुछ हद तक समस्याग्रस्त हो जाती है। उनकी भावनाएँ असामान्य हो जाती हैं, उनके दैनिक जीवन की स्थिति अस्त-व्यस्त हो जाती है और वे पूरी तरह से अपनी दिशा खो चुके होते हैं। उनके पूरे जीवन में केवल सितारों को आदर्श मानना ही शामिल होता है; सितारों को आदर्श मानना उनके अस्तित्व के पथ पर एकमात्र अपरिहार्य चीज होती है। जब तक वे जीवित रहते और साँस लेते हैं, तब तक वे सितारों को आदर्श मानने का आनंद लेते हैं और हर दिन समय गुजारने के लिए इस पर निर्भर रहते हैं। अगर वे सितारों को आदर्श नहीं मानते, तो उन्हें लगता है कि जीवन खोखला और अर्थहीन है और वे बिना किसी लक्ष्य या दिशा के जीते हैं, अपने दिल में खोए हुए महसूस करते हैं। इसलिए, समय-समय पर उन्हें लगता है कि उन्हें अपनी पसंदीदा मशहूर हस्ती के बारे में ताजा जानकारी खोजने के लिए ऑनलाइन जाना चाहिए—वे क्या खा-पी रहे हैं, उनका जीवन वर्तमान में किस स्थिति में है, वे कब कॉन्सर्ट आयोजित करेंगे, उनकी सबसे हालिया फिल्म का प्रदर्शन कैसा था, उनकी शादी की स्थिति क्या है, उनकी पारिवारिक स्थिति क्या है—कभी-कभी वे समय बिताने और अपने खोखले, दिशाहीन, भ्रमित जीवन को भरने के लिए ऐसी जानकारी खोजते हैं। क्या वे इन मशहूर हस्तियों द्वारा पूरी तरह से नियंत्रित नहीं हो गए हैं? क्या वे सितारों को आदर्श मानने की इस मानसिकता या प्रवृत्ति से नियंत्रित नहीं हो गए हैं? (हाँ।) तो फिर, क्या ऐसे लोगों के पास अभी भी जमीर और विवेक है? उन्होंने अपना विवेक खो दिया है, उनकी मानसिक स्थिति असामान्य हो गई है। ऐसी बाहरी प्रवृत्ति या घटना से गुमराह और परेशान होने के बाद उन्होंने अपनी दिशा खो दी है और अब नहीं जानते कि वे जो कर रहे हैं वह सही है या गलत—वे नहीं जानते कि उनके लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा। अगर लोग उन्हें मना करने की कोशिश करते हैं, तो वे बस इसे स्वीकार नहीं कर पाते या समझ नहीं पाते। जिस सितारे की वे पूजा करते हैं, उसके कॉन्सर्ट में भाग लेने के लिए वे तीन से पाँच महीने की पगार खर्च करने के लिए तैयार रहते हैं, यहाँ तक कि वे कुछ मूल्यवान वस्तुएँ गिरवी भी रख देते हैं या पैसे उधार भी ले लेते हैं और लौटने के बाद उन्हें अपने कर्ज चुकाने पड़ते हैं। वे सिर्फ सितारों को आदर्श मानने का अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए ऐसी कीमत चुकाते हैं। क्या ऐसे लोग सामान्य होते हैं? (नहीं।) उनकी दीवानगी और आत्म-नियंत्रण की कमी के स्तर से आँकें, तो ऐसे लोग पहले ही पूरा जमीर और विवेक खो चुके होते हैं और अब खुद को नियंत्रित नहीं कर सकते; वे इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं करते कि सितारों को आदर्श मानने की खातिर वे कितना पैसा खर्च करते हैं और कितनी दूर तक यात्रा करते हैं। इस प्रकार, इन अभिव्यक्तियों से आँकें, तो उन्हें सामान्य लोगों की श्रेणी में रखना बहुत कठिन है। यह कहा जाना चाहिए कि उनकी मानवता में समस्या है—उन्होंने अपनी तर्क-शक्ति खो दी है। तो क्या उनका जमीर अब भी काम करता है? क्या उनमें अब भी जमीर है? (नहीं है।) तो फिर वे किस तरह के लोग हैं? उनके पास न तो जमीर है और न ही विवेक; उनकी मानवता एक खोखले खोल के सिवाय कुछ नहीं रह गई है। सामान्य मानवता का वास्तविक जीवन उनसे उत्तरोत्तर दूर होता गया है। उनके लिए वास्तविक जीवन को अपनाना बहुत कठिन है और उनके लिए अपने मन को शांत करना और वास्तविक जीवन के सामान्य मामलों में संलग्न होना बहुत कठिन है। उनके जीवन में सितारों को आदर्श मानने का ही एकमात्र मामला होता है। तो क्या उनकी आध्यात्मिक दुनिया सितारों को आदर्श मानने के मामले से नियंत्रित नहीं है? (हाँ।) ऐसा व्यक्ति बाहर से एक व्यक्ति प्रतीत होता है, लेकिन सार में, क्या वह पहले ही एक खोखले खोल से ज्यादा कुछ नहीं बन गया है? (हाँ।) वे कैसे लोग हैं, जो खोखले खोल बनकर रह गए हैं? (चलती-फिरती लाशें।) यह सही है—चलती-फिरती लाशें। क्या उनमें आस्था है? (नहीं।) क्या उनके कोई सकारात्मक अनुसरण हैं? (नहीं।) क्या वे समझते हैं कि सकारात्मक चीजें क्या हैं और नकारात्मक चीजें क्या हैं, न्यायोचित क्या है और दुष्टतापूर्ण क्या है? (नहीं।) इसे कैसे देखा जा सकता है कि वे नहीं समझते? वर्तमान में, मंच पर प्रसिद्ध गायक अधिक से अधिक बदन-दिखाऊ और कामोत्तेजक पोशाकें पहन रहे हैं और अधिक से अधिक दुष्टतापूर्ण गतिविधियाँ कर रहे हैं। इन सितारों को आदर्श मानने वाले दर्शक इसे देखकर अधिकाधिक उत्साहित, संतुष्ट और मदमस्त महसूस करते हैं। खास तौर पर, जब कोई पॉप स्टार थोड़ा उत्तेजित हो जाता है और अपने कपड़े उतारकर दर्शकों पर उछाल देता है, तो भीड़ में मौजूद लोग पूरी तरह से पागल हो जाते हैं। कुछ लोग इतने उत्तेजित हो जाते हैं कि उनकी हृदय-गति रुक जाती है और फिर वे बेहोश हो जाते हैं। सितारों को आदर्श मानने के विशाल दृश्य वास्तव में इतने प्रचंड होते हैं! कभी-कभी तो भगदड़ तक मच जाती है और बचाव की कोशिशें नाकाम होने पर कुछ लोग घायल हो जाते हैं और अपनी जान गँवा बैठते हैं। ये सभी त्रासदियाँ सितारों को आदर्श मानने की वजह से होती हैं। किसी सितारे को आदर्श मानने के परिणामस्वरूप घायल होना या जान गँवा देना—मुझे बताओ, क्या ऐसी जिंदगी बेकार नहीं है? क्या इसकी कोई अहमियत है? उनकी भावनाओं, उनकी पसंद की चीजों और उन दृश्यों से आँकें, जो उन्हें इतने जोश से भर देते हैं कि वे चीखने-चिल्लाने लगते हैं, तो क्या ये लोग शर्म-लिहाज जानते हैं? क्या वे जानते हैं कि सकारात्मक और न्यायोचित चीजें क्या हैं, और दुष्टतापूर्ण चीजें क्या हैं? (नहीं।) वे नहीं जानते। सामान्य लोग जब ऐसे दृश्य देखते हैं, तो उन्हें घिन आती है : “दुनिया इतनी बुरी कैसे हो गई है? यह बहुत बुरी है!” लेकिन सितारों को आदर्श मानने वाले ये लोग ऐसे दृश्य देखकर खुश, गर्वित, तृप्त और संतुष्ट महसूस करते हैं, वे मानते हैं कि अब उनकी जिंदगी में कोई मलाल नहीं रहा, और वे इन दृश्यों पर चीखते-चिल्लाते और शोर मचाते हैं। यह दिखाता है कि अपनी आत्मा की गहराई में वे नहीं जानते कि दुष्टतापूर्ण चीजें क्या हैं, न्यायोचित चीजें क्या हैं, सकारात्मक चीजें क्या हैं या नकारात्मक चीजें क्या हैं। गायकों या अभिनेताओं की कुछ महिला प्रशंसक तो अपने पसंदीदा पुरुष सितारे का पीछा करते हुए उसके घर तक पहुँच जाती हैं और खुद को उसे सौंपने को तैयार रहती हैं। जब सितारा मना कर देता है, तो वे नाराज हो जाती हैं और उसे कायर कहती हैं। क्या ऐसे लोगों में जरा भी शर्म-लिहाज होता है? क्या वे “शर्म की भावना” शब्दों का मतलब समझती हैं? क्या वे समझती हैं कि सकारात्मक चीजें क्या हैं या नकारात्मक चीजें क्या हैं? (वे नहीं समझतीं।) यहाँ तक कि वे “शर्म की भावना” शब्दों को भी नहीं समझतीं। जब सितारा मना कर देता है, तो वे उसका अपमान तक करती हैं। क्या वे इंसान भी हैं? ऐसा नहीं है कि उनकी मानवता में किसी चीज की कमी है—वे मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं; वे अशुद्ध आत्माएँ और बुरी आत्माएँ हैं!

लोगों के विभिन्न समूहों में हमेशा एक हिस्सा ऐसे लोगों का होता है जिनमें सितारों को आदर्श मानने की दीवानगी होती है। सटीक रूप से कहें तो ऐसे लोग चलती-फिरती लाशें हैं, और विशिष्ट रूप से कहें तो वे अमानव हैं। वे मंच पर और परदे पर अक्सर दिखने वाले सितारों को पीछा करने की चीज मानते हैं और ऐसा करने को एक वैध करियर तक समझते हैं। वे अपनी जिंदगी इसी तरह बर्बाद कर देते हैं। यह कहना होगा कि पूरे समाज में ऐसे लोगों का एक खास समूह होता है, जो कमोबेश समाज के उन निचले तबके के लोगों जैसे ही होते हैं जो सही कामों में संलग्न नहीं होते—वे सब घटिया और बेकार लोग होते हैं! उनमें कोई आस्था नहीं होती, कोई सकारात्मक अनुसरण नहीं होता और उनकी मानवता में कोई सकारात्मक जरूरत, सकारात्मक चाहत या सकारात्मक चीज नहीं होती। कला-जगत कितना भी दुष्ट या कितना भी काला हो, वे इसकी परवाह नहीं करते और न ही उन्हें यह घिनौना लगता है, वे इसे स्वीकार करते हैं और इसका अनुमोदन करते हैं; इसके अलावा, पूरे जोश के साथ इसका अनुसरण करते हैं। ये व्यक्ति किस तरह के लोग होते हैं? कहा जा सकता है कि वे घटिया हैं। आध्यात्मिक क्षेत्र के परिप्रेक्ष्य से देखें तो ऐसे लोग अशुद्ध आत्माएँ और दुष्ट आत्माएँ हैं। जब अशुद्ध आत्माएँ और दुष्ट आत्माएँ इंसान के रूप में जन्म लेती हैं, तो उन्हें भी सामान्य लोगों की तरह खाना और कामकाज करना पड़ता है, लेकिन वे सही कामों में संलग्न नहीं होतीं और न ही जरा भी सत्य स्वीकार करती हैं; वे बस मजे की तलाश में अपने जैसे लोगों को ढूँढ़ना पसंद करती हैं और मौत का इंतजार करते हुए निरुद्देश्य भटकती रहती हैं। अगर वे कला उद्योग में संलग्न नहीं हो पातीं, तो वे उसके अंदर के लोगों का अनुसरण करती हैं और अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए उसके भीतर की तमाम तरह की बुरी प्रवृत्तियों का अनुसरण करती हैं। इसलिए, चाहे ये लोग किसी भी चीज में माहिर हों, सिर्फ यह तथ्य कि उनके ऐसे अनुसरण हैं और उन्होंने समाज में ऐसा मार्ग और ऐसी जीवनशैली चुनी है, यह दिखाता है कि वे अच्छे लोग नहीं हैं या ऐसे लोग नहीं हैं जो उद्धार प्राप्त कर सकते हैं। मेरे यह कहने का कारण कि ऐसे लोग उद्धार प्राप्त नहीं कर सकते, असल में यह है कि उनकी मानवता के भीतर एक “खालीपन” होता है। इस “खालीपन” को उद्धरण-चिह्नों में रखना जरूरी है। क्यों? क्योंकि उनकी मानवता में सकारात्मक चीजें नहीं होतीं, बल्कि उसमें वे सभी चीजें होती हैं जो अशुद्ध आत्माओं और दुष्ट आत्माओं में होती हैं : बुराई का अनुसरण करना, बुराई की पूजा करना, अँधेरे का अनुसरण करना और अँधेरे की पूजा करना। वे इस पूरे बुरे समाज में दुष्ट प्रवृत्तियों का अनुसरण करने में सबसे आगे रहने वाले और साथ ही इन प्रवृत्तियों को संचारित करने वाले होते हैं। कला-जगत से निकली विभिन्न दुष्ट भ्रांतियाँ और विभिन्न विकृत विचार और दृष्टिकोण जब कंप्यूटर, टीवी, पत्रिकाओं, अखबारों, फिल्म और टीवी शो जैसे माध्यमों से जनता तक संचारित किए जाते हैं, तो वे धीरे-धीरे लोगों के बीच परिचालित होते हैं और फिर व्यापक रूप से फैल जाते हैं। इन लोगों में असल में ये सितारों को आदर्श मानने वाले ही होते हैं जो विभिन्न फिल्मों, टीवी शो और कलात्मक रचनाओं में पाए जाने वाले दुष्ट विचार और दुष्ट प्रवृत्तियाँ और चीजें करने के बुरे तरीके फैलाने में सबसे आगे रहते हैं। वे पहली पंक्ति के प्रसारक होते हैं जो विभिन्न दुष्टतापूर्ण विचार और विभिन्न विकृत विचार और दृष्टिकोण संचारित करते हैं। सितारों को आदर्श मानने वाले इन लोगों के मौखिक प्रचार, इनके ठोस क्रियाकलापों और अभिव्यक्तियों के जरिये आम लोग धीरे-धीरे विभिन्न दुष्टतापूर्ण विचारों और दुष्ट प्रवृत्तियों को स्वीकृत और अनुमोदित करने लगते हैं। फिर, लोग धीरे-धीरे उनसे अनुकूलित और ओतप्रोत हो जाते हैं। अंत में, इससे विभिन्न दुष्ट प्रवृत्तियाँ, दुष्टतापूर्ण विचार और विकृत विचार और दृष्टिकोण धीरे-धीरे विभिन्न सामाजिक व्यवस्थाओं के अंतर्गत और लोगों के विभिन्न समूहों के बीच अपनी पकड़ बना लेते हैं और आकार ग्रहण कर लेते हैं। अतीत पर नजर डालें तो शादी के मामले में, जब लोग शादी की उम्र तक पहुँचते थे, तब एक बिचौलिया उन्हें लोगों से मिलवाता था और रिश्ता तय करवाता था। शादी के लिए दोनों पक्षों के माता-पिता की सहमति भी जरूरी होती थी, जिसके बाद तारीख तय होती थी और जोड़ा शादी के बंधन में बँध जाता था। अतीत के सामाजिक संदर्भ में, ज्यादातर लोग स्त्री-पुरुष के बीच शादी की बात आने पर सम्मान और सावधानी दिखाते थे। वे शादी को एक बहुत बड़ी घटना मानते थे और इसे गंभीरता और ईमानदारी से लेते थे। खासकर अपने बच्चों के मामले में, वे चाहते थे कि बच्चे ऐयाश न बनें, परिवार के सदस्यों के साथ यौन संबंध न बनाएँ और नाजायज यौन संबंधों में लिप्त न हों—इन अपेक्षाओं का पालन करना जरूरी था। कम से कम, ज्यादातर लोगों के दिलों में यह संकल्पना जरूर थी। इस तरह, अपनी मानवता के जमीर के नियंत्रण में, बहुत-से लोग नाजायज यौन संबंधों और स्वच्छंद व्यभिचार जैसे बुरे कर्मों में लिप्त होने से बचते थे, जिससे कुछ हद तक स्त्री-पुरुष दोनों की सुरक्षा होती थी। बेशक, इसका सामाजिक परिवेश पर कुछ सकारात्मक असर और प्रभाव भी पड़ा। लेकिन समय के साथ और विभिन्न कलात्मक रचनाओं के सामने आने के साथ, यौन आजादी, शादी की आजादी वगैरह की वकालत करने वाले तमाम तरह के विचार और दृष्टिकोण लगातार सामने आए हैं और उनका निरंतर समर्थन भी किया जाता रहा है। एक तरफ तो कुछ लोग उनका समर्थन करते हैं; दूसरी तरफ, समाज इन विचारों को और अधिक बढ़ावा देता है और विभिन्न कला रूपों में प्रस्तुतियों और प्रदर्शनों के माध्यम से उन्हें व्यापक रूप से फैलाता है। इन विचारों को सबसे पहले सितारों को आदर्श मानने वाले लोगों का एक हिस्सा मानता और स्वीकार करता है—यानी, इनके लिए पहला दर्शक वर्ग ये सितारों को आदर्श मानने वाले ही होते हैं। चूँकि ये लोग सितारों को आदर्श मानते हैं, इसलिए वे मंच पर, परदे पर या कुछ कलात्मक रूपों में सितारों द्वारा वकालत किए गए इन विचारों को जल्दी से स्वीकृत और अनुमोदित कर लेते हैं। इनका मजबूती से अनुमोदन करने के बाद वे अपने बच्चों को और रोजमर्रा की जिंदगी में अपने आस-पास के लोगों को भी प्रभावित करते हैं। इस तरह, एक व्यक्ति इन विचारों को दस लोगों तक पहुँचाता है, दस लोग उन्हें सौ लोगों तक पहुँचाते हैं, सौ लोग उन्हें हजार लोगों तक पहुँचाते हैं, हजार लोग उन्हें दस हजार लोगों तक पहुँचाते हैं—और इस तरह ये विचार छोटे दायरे से निकलकर बहुत बड़े दायरे में फैल जाते हैं। अगले एक-दो सालों में लोग इन विचारों को आवाज देते हैं और पाँच-दस साल बाद भी वे उन्हें आवाज देते हैं। बीस-तीस साल बाद ऐसे दुष्टतापूर्ण विचार लोगों के बीच उत्तरोत्तर आकार लेते हैं, समाज के हर कोने में अधिकाधिक व्यापक रूप से फैलते हैं और हर व्यक्ति के दिल में गहराई तक बैठ जाते हैं। फिर धीरे-धीरे लोग इन दुष्टतापूर्ण विचारों और दुष्ट प्रवृत्तियों का अनुमोदन करने लगते हैं और धीरे-धीरे आम लोग इन्हें स्वीकार करने लगते हैं और लोग शादी तथा स्त्री-पुरुष के बीच के मामलों में ज्यादा से ज्यादा भोगासक्त, ऐयाश और बेलगाम हो जाते हैं। लोगों को लगता है कि यह खुले विचारों वाला होना और व्यापक सोच रखना है और यह परिपक्व मानवता की निशानी है, वे नकारात्मक चीजों के बारे में ऐसे बात करते हैं जैसे वे सकारात्मक और सही चीजें हों। इस बिंदु तक पूरे समाज की दुष्ट प्रवृत्तियाँ उभार का अनुभव करती हैं, बढ़त हासिल करती हैं और मुख्यधारा बन जाती हैं। ज्यादातर लोग अब स्त्री-पुरुष की शादी और स्त्री-पुरुष संबंधों को लेकर सही विचार और दृष्टिकोण नहीं रखते; उन्हें लगता है कि ये चीजें कोई बड़ी बात नहीं हैं। खासकर, समलैंगिकता अधिकाधिक आम हो गई है; इसके अलावा, विवाहेतर संबंध भी अधिकाधिक आम हो गए हैं और इस वजह से तलाक की दर भी उत्तरोत्तर बढ़ी है। अधिक से अधिक बच्चों को भी माता का या पिता का प्यार नहीं मिल पाता, क्योंकि वे या तो माता-पिता में से किसी एक के साथ वाले परिवार में रहते हैं या ऐसे परिवार में रहते हैं जहाँ सौतेला पिता या सौतेली माँ होती है। बहुत-से लोग शादी से पहले ही विपरीत लिंग को साथी बना लेते हैं और इसे शर्मनाक नहीं मानते, वे यहाँ तक सोचते हैं कि यह सामान्य है, समाज ऐसा ही है और यह कोई बड़ी बात नहीं है। दुष्टता हमेशा दुष्टता ही होती है और सकारात्मक चीजें हमेशा सकारात्मक ही होती हैं। भले ही तुम्हें लगता हो कि यह कोई बड़ी बात नहीं है, तब भी ऐसा इस दुष्ट प्रवृत्ति और इस समाज के पतन की वजह से है—ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शैतान ने इंसानों को भ्रष्ट कर दिया है और वे दुष्टतापूर्ण विचारों और दुष्ट प्रवृत्तियों से ओतप्रोत हो गए हैं और भर गए हैं। ऐसा नहीं है कि सकारात्मक चीजों को नकारात्मक कहा जा सकता है, न ही ऐसा है कि आजकल नकारात्मक चीजें सकारात्मक चीजों में बदली जा सकती हैं। अगर तुम ऐसा सोचते हो, तो वह इसलिए कि तुम सत्य नहीं समझते या यह नहीं समझते कि सकारात्मक चीजें क्या होती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन परिस्थितियों में तुम दुष्ट प्रवृत्तियों और दुष्टतापूर्ण विचारों को अपने आचरण के सिद्धांत और नींव मानकर अपनाने के लिए मजबूर हो जाते हो। यह समाज और यह मानवजाति धीरे-धीरे इसी तरह गहराई तक भ्रष्ट हो गई है। इसलिए दुष्ट प्रवृत्तियों के व्यापक रूप से फैलने और लोगों के दिलों में गहराई तक बैठ जाने के मामले में, ये सितारों को आदर्श मानने वाले लोग दुष्ट प्रवृत्तियों, दुष्टतापूर्ण विचारों और दृष्टिकोणों को फैलाने में अग्र-दल की भूमिका निभाते हैं। वे ही इन चीजों को सीधे फैलाने वाले होते हैं। अगर हम कहें कि शैतान लोगों को भ्रष्ट कर रहा है, तो यह बात थोड़ी अस्पष्ट या अमूर्त लगती है। लेकिन अगर हम कहें कि ये सितारों को आदर्श मानने वाले लोग शैतान के विचारों और शैतान की दुष्ट प्रवृत्तियों को फैलाने वाले असली समर्थक हैं, तो यह बात बिल्कुल सटीक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे लोगों का वह समूह हैं जो कला-जगत या विभिन्न दुष्टतापूर्ण विचारों और दुष्ट प्रवृत्तियों के सबसे करीब होते हैं और वे उन लोगों का हिस्सा हैं जो इन फिल्मी सितारों और मशहूर गायकों के निकट संपर्क में आते हैं। अगर ये लोग उनके पीछे न भागते, उनका इतना दीवानगी भरा समर्थन न करते, तो इन तथाकथित मशहूर गायकों और फिल्मी सितारों का इतना ज्यादा आकर्षण, इतनी ज्यादा शोहरत, इतना ज्यादा प्रभाव और गुमराह करने की इतनी ताकत न होती। यह ठीक सितारों को आदर्श मानने वाले लोगों द्वारा उनकी दीवानगी और अत्यधिक अनुकरण की वजह से ही है कि विभिन्न दुष्ट प्रवृत्तियाँ और दुष्टतापूर्ण विचार लोगों के बीच इतनी असाधारण गति से फैले हैं। अपने ठोस क्रियाकलापों से वे जनता को बताते हैं कि कला-जगत में दिखने वाली विभिन्न दुष्टतापूर्ण चीजें और विभिन्न विकृत, दुष्टतापूर्ण विचार और दृष्टिकोण ऐसी चीजें हैं जिन्हें लोगों को स्वीकार करना चाहिए और यह कि ये चीजें बहुत सामान्य और जायज हैं। अंत में, ज्यादातर लोग धीरे-धीरे चीजें करने के ये दुष्टतापूर्ण तरीके और दुष्टतापूर्ण विचार और दृष्टिकोण स्वीकार कर लेते हैं। नतीजतन, इन तथाकथित मशहूर हस्तियों, मशहूर गायकों और फिल्मी सितारों के विवाहेतर संबंध, स्वच्छंद व्यभिचार या किसी भी तरह के दुष्टतापूर्ण विचार, दृष्टिकोण और चीजें करने के तरीके कम बुरे बताए जाते हैं और कोई भी इन चीजों के बारे में सही राय व्यक्त नहीं करता या सही फैसला नहीं देता। इस तरह, चाहे ये मशहूर हस्तियाँ, मशहूर गायक और फिल्मी सितारे कितने भी व्यभिचारी क्यों न हों, उन्हें हटाया नहीं जाता या दोषी नहीं ठहराया जाता, बल्कि वे मंच पर इतराना जारी रखते हैं। यह समाज की एक लोकप्रिय कहावत से पूरी तरह मेल खाता है : “गरीबों का मजाक उड़ाओ, वेश्याओं का नहीं।” यह मानवजाति के पतन का सच्चा चित्रण है और उसका सबूत भी। देखो, जब तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो और गिरफ्तार होकर जेल जाते हो, तो लोग तुम्हारा मजाक उड़ाते हैं और तुम्हें तुच्छ समझते हैं। असल में, वे यह भी जानते हैं कि तुमने कुछ भी गलत नहीं किया है—परमेश्वर में विश्वास करने का मतलब है आस्था रखना, अच्छा इंसान बनने की इच्छा रखना और स्वर्ग जाने की चाहत रखना; महिला विश्वासी अपना शरीर नहीं बेचतीं और वेश्या का काम नहीं करतीं, और पुरुष विश्वासी डकैती नहीं करते बल्कि नियमों का पालन करने वाला आचरण करते हैं। फिर भी लोग तुम्हें नापसंद करते हैं। अगर कोई महिला बहुत खूबसूरत है और उसके ऊँचे ओहदे वाले अधिकारियों और अमीर लोगों के साथ अनैतिक संबंध हैं और वह रोज महँगी कारों में घूमती है, तो दूसरे लोग उससे जलते हैं और उसकी तारीफ करते हुए कहते हैं : “तुममें सचमुच कुछ खास बात है। तुम अपने माता-पिता के लिए पैसे कमाने में सक्षम हो ताकि वे अच्छा खाना खा सकें और अच्छे कपड़े पहन सकें। तुम्हारा रूप-रंग सच में बहुत कीमती है!” लेकिन अगर तुम खूबसूरत हो और किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करती हो जो परमेश्वर में विश्वास करता है, तो वे तुम पर हँसेंगे। वे न सिर्फ तुम पर हँसेंगे, बल्कि जब वे तुम्हें सताया जाता देखेंगे, तो वे तुम पर धौंस भी जमाएँगे। क्या ऐसा नहीं है? (हाँ।)

इस समूह—सितारों को आदर्श मानने वाले इन लोगों—द्वारा की गई किसी भी चीज का कोई मतलब नहीं है। इसके विपरीत, इन क्रियाकलापों ने शैतान द्वारा दुष्टतापूर्ण विचारों और दुष्ट प्रवृत्तियों के प्रसार को बढ़ावा दिया है। सितारों को आदर्श मानने वाले आज के लोगों को देखो—कुछ औरतें स्टेज पर जाकर बेझिझक गाती-नाचती हैं और जब वे किसी मशहूर गायक को देखती हैं, तो उसकी हद से ज्यादा पूजा करती हैं। यह 1940 और 1950 के दशक की औरतों से बिल्कुल भिन्न है। गैर-विश्वासियों के शब्दों में कहें तो वे स्वतंत्र हो गई हैं—विचार में स्वतंत्र और काम-वासना में स्वतंत्र, वे इन दोनों ही क्षेत्रों में आजाद हैं। कुछ लोग कहते हैं : “यह कौन-सा जमाना है? कौन अपने तमाम दिन सिर्फ एक पति के साथ बिताता है? कौन अपनी जिंदगी हमेशा अपने बच्चों के इर्द-गिर्द रखता है? जब भी संभव हो, कोई नया साथी ढूँढ़ो और जब भी मौका मिले, जिंदगी का मजा लो!” जरा देखो, इन लोगों के कैसे विचार हैं—वे कितने भयानक हैं! अगर परमेश्वर का कोई विश्वासी भी इसी तरह सोचे, तो क्या यह अच्छा संकेत है? अगर किसी विश्वासी के ऐसे विचार और दृष्टिकोण हों, वह ऐसे लोगों से ईर्ष्या करे और उन्हें पूजे, और ऐसा व्यक्ति ही बनना चाहे, तो क्या यह उनके लिए बहुत भयानक और बहुत खतरनाक नहीं है? (हाँ।) अभी हम इस बात पर चर्चा नहीं करते कि यह कितना भयानक या खतरनाक है। बस इन लोगों के सार की बात करें तो अपनी आत्मा की गहराइयों में वे इन सितारों से खास तौर पर ईर्ष्या करते हैं, उनकी सराहना करते हैं और उनसे प्रेम करते हैं। वे सितारों से हर तरह के व्यवहार और हर तरह के विचार और दृष्टिकोण स्वीकार कर सकते हैं। विचार कितने भी दुष्टतापूर्ण हों, वे उन्हें स्वीकार कर सकते हैं। वे मानते हैं, “लोगों को ऐसा ही आचरण करना चाहिए—सिर्फ यही आजाद होना है। सभी विचारों और दृष्टिकोणों को मौजूद रहने देना चाहिए। आखिरकार, दुनिया तमाम तरह के लोगों से बनती है।” उनके विचारों में सकारात्मक और नकारात्मक के बीच कोई फर्क नहीं है, सही और गलत के बीच कोई फर्क नहीं है। क्या यह मानसिक रूप से असामान्य नहीं है? अगर यह कम काबिलियत के कारण है कि किसी व्यक्ति में सही-गलत का भेद पहचानने की क्षमता नहीं है, लेकिन फिर भी उसमें शर्म-लिहाज है, और अगर उसे पता हो कि कोई चीज सही है तो वह उसका पालन कर सकता है, और अगर उसे पता हो कि कोई चीज गलत है, तो वह उसे बिल्कुल नहीं करेगा और अगर उसे पता हो कि कोई चीज दुष्टतापूर्ण है, तो वह अपने दिल में उससे बेइंतहा नफरत कर सकता है, तो वह अभी भी सामान्य व्यक्ति है। लेकिन अगर उसे साफ पता हो कि कोई चीज गलत है, यह दुष्टतापूर्ण है और फिर भी वह न सिर्फ उसका प्रतिरोध नहीं करता है, बल्कि उसे बेहिचक स्वीकार भी कर सकता है, यहाँ तक कि उससे जलता भी है और उसका अनुसरण भी करता है, उसमें गहरे और गहरे धँसता चला जाता है, तो वह कोई व्यक्ति नहीं बल्कि चलती-फिरती लाश है। वह बर्बाद हो गया है और उद्धार प्राप्त नहीं कर सकता। इसलिए, यह नहीं कहा जा सकता कि ऐसे लोगों की मानवता खराब है, उनमें सत्यनिष्ठा कम है, उनका चरित्र नीच है या उनमें जमीर और विवेक अनुपस्थित है—समस्या यह नहीं है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनमें मानवता ही नहीं है। तो ये लोग क्या हैं? अशुद्ध आत्माएँ, बुरी आत्माएँ और चलती-फिरती लाशें। वे विभिन्न दुष्ट प्रवृत्तियों और विभिन्न दुष्टतापूर्ण, विकृत विचारों और दृष्टिकोणों के समर्थक, आगे बढ़ाने वाले और उन्हें फैलाने वाले हैं। यह बिल्कुल महामारी की तरह है—एक व्यक्ति जिसमें वायरस है, जहाँ भी जाता है उसे फैलाता है और जितनी ज्यादा जगहों पर वह जाता है, वायरस उतनी ही व्यापकता से फैलता है। सितारों को आदर्श मानने वाले ये लोग वायरस के वाहकों और उसे फैलाने वालों के बराबर हैं, इसलिए वे मानवजाति के सदस्य बिल्कुल नहीं हैं—वे अमानव हैं। तथाकथित “अमानवों” की परिभाषा क्या होती है? वह यह है कि ये लोग दुष्ट प्रवृत्तियों और दुष्टतापूर्ण विचारों और दृष्टिकोणों के समर्थक और उन्हें फैलाने वाले होते हैं। क्या अब तुम समझते हो? अगर तुम अभी भी अपने दिल में इन सितारों से जलते हो या तुम कभी ऐसा व्यक्ति बनना चाहते थे, तो मैं तुम्हें बता रहा हूँ, यह एक ऐसा मार्ग है जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं है। कभी ऐसा व्यक्ति बनने की कोशिश मत करना! अगर तुमने कभी किसी फिल्म या टेलीविजन शो में कोई भूमिका निभाई है, अगर तुम कभी फिल्म स्टार या मशहूर हस्ती बनना चाहते थे और तुमने इस मार्ग पर चलने की योजना बनाई थी, तो मैं तुमसे कह रहा हूँ—तुरंत ब्रेक लगाओ और रुक जाओ। यह दंडित किए जाने या पुरस्कृत किए जाने का मामला नहीं है। यह अनंत सर्वनाश की ओर ले जाने वाला मार्ग है—इस पर कभी मत चलना! अगर तुम ऐसे व्यक्ति का इसलिए अनुसरण करना चाहते हो क्योंकि तुम अस्थायी रूप से गुमराह हो गए थे या कमजोर पड़ गए थे या फिर किसी अस्थायी जलन और चाहत की वजह से ऐसा करना चाहते हो, तो मेरी चेतावनी सुनो, मेरा प्रोत्साहन सुनो—तुरंत रुक जाओ। उस उद्योग में कभी कदम मत रखो, उन श्रेणियों में कभी कदम मत रखो; कभी उनमें से एक मत बनो। अगर तुम सही मार्ग पर चलने या सार्थक चीजें करने में दृढ़ नहीं रह सकते, तो भी तुम्हें दुष्ट प्रवृत्तियों और दुष्टतापूर्ण विचारों और दृष्टिकोणों को फैलाने वाला नहीं बनना चाहिए—वह परमेश्वर द्वारा शापित मार्ग है। तो चाहे तुमने कभी किसी फिल्म या टेलीविजन शो में कोई भी भूमिका निभाई हो, चाहे तुमने खुद को एक महत्वपूर्ण हस्ती माना हो, एक जानी-मानी हस्ती या कोई ऊँचे दर्जे की हस्ती—चाहे तुमने खुद को किसी भी जगह रखा हो—वह सब अतीत बन चुका है, वह सब गलत था। अगर तुमने अब पहले ही ब्रेक लगा दिया है, तो सिर्फ यही कहा जा सकता है कि उस समय तुम्हारा आध्यात्मिक कद अपरिपक्व था और तुम सत्य नहीं समझते थे। भविष्य में कभी उस तरह मत सोचना और न ही कभी उस मार्ग पर चलना। अगर तुम एक महत्वपूर्ण हस्ती या जानी-मानी हस्ती बनना चाहते हो, अगर तुम चाहते हो कि दूसरे तुम्हारी पूजा करें और तुम्हारा अनुसरण करें, तो तुरंत उन बातों के बारे में सोचना जो मैंने आज बोली हैं। किसी भी व्यक्ति के लिए, अनंत सर्वनाश की खबर पाना दुर्भाग्यपूर्ण है—यह सबसे बुरी संभावित खबर है। वह परमेश्वर द्वारा शापित मार्ग है। इस मार्ग पर कभी मत चलना, इस गंदगी से कभी मैले मत होना। इस मार्ग पर कदम रखने का मतलब है अनंत सर्वनाश! तुम्हें नियमों का पालन करने वाला आचरण करना चाहिए क्योंकि तुम एक सृजित प्राणी हो, सृजित मानवजाति के एक सदस्य हो। चाहे तुमने कोई भी भूमिका निभाई हो, कोई भी काम किया हो या परमेश्वर के घर में कोई भी योगदान दिया हो, अंत में, तुम्हें अपनी सही जगह तय करनी होगी। कौन-सी जगह? तुम एक सृजित प्राणी हो, सृजित मानवजाति के एक सदस्य हो। तुम्हें एक सृजित प्राणी का कर्तव्य पूरा करना होगा। तुम्हारा कर्तव्य-निर्वहन मानक स्तर का होना चाहिए, उसे परमेश्वर की संतुष्टि के लिए किया जाना चाहिए। तुम्हें परमेश्वर के लिए गवाही देनी चाहिए, परमेश्वर के वचनों का प्रसार करना चाहिए, परमेश्वर के लिए गवाह बनना चाहिए और उद्धार प्राप्त करना चाहिए। यह जीवन भर की जिम्मेदारी और दायित्व है जिसे पूरा करने के लिए तुम कर्तव्यबद्ध हो, साथ ही यह वह मार्ग भी है जिसे तुम्हें चुनना चाहिए। तुम्हें शैतान की दुष्ट प्रवृत्तियों का अनुसरण नहीं करना चाहिए और दुष्टतापूर्ण विचारों और दृष्टिकोणों को फैलाने वाला और उन्हें आगे बढ़ाने वाला नहीं बनना चाहिए। वे लोग मानवजाति के पतित लोग हैं, वे बुरी आत्माएँ और अशुद्ध आत्माएँ हैं। वे शापित हैं और अनंत सर्वनाश के लिए भेज दिए गए हैं! अगर कोई व्यक्ति उस रास्ते पर चल पड़ता है और दस जंगली घोड़े भी उसे वापस नहीं खींच सकते, तो उसे उसके किए का फल जरूर मिलेगा—उसका अंत अच्छा नहीं होगा। इसलिए, तुम्हें हमेशा यह पता होना चाहिए कि तुम सृजित मनुष्य हो, तुम्हें पता होना चाहिए कि तुम्हारी जगह क्या है, तुम्हें क्या करना चाहिए और तुम्हें किस तरह का मार्ग चुनना चाहिए। यह सबसे महत्वपूर्ण चीज है। क्या इन चीजों के बारे में संगति करना जरूरी है? (हाँ।) लोगों के जीवन के मार्गों से जुड़े विषय बहुत महत्वपूर्ण हैं। तुम्हें समय-समय पर उन्हें सुनना और उन पर गहराई से विचार करना चाहिए। ऐसा करना तुम लोगों के जीवन प्रवेश के लिए और तुम लोगों के जीवन में सही मार्ग पर चलने के लिए फायदेमंद और मददगार है—इसका इन चीजों पर अच्छा, सकारात्मक और रचनात्मक प्रभाव पड़ता है। इन बातों को भूलना मत।

आज की संगति के लिए बस इतना ही। अलविदा!

30 दिसंबर 2023

परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें