सत्य का अनुसरण कैसे करें (14) भाग तीन
ख. देह की यौन इच्छाओं में लिप्त होना
पिछली बार दानवों से पुनर्जन्म लिए हुए लोगों के विकृत प्रकृति सार पर चर्चा करते समय हमने उनकी “लम्पटता” और “यौन उत्तेजकता” का जिक्र किया था, जो देह की यौन इच्छा की दो प्रकार की अभिव्यक्तियाँ हैं। इन दोनों के अलावा “लम्पटता” और “यौन उत्तेजकता” से संबंधित एक और पहलू है, एक प्रकार का बाहरी व्यवहार है या मानवता को अभिव्यक्त करना है, जो कि “व्यभिचारिता” है। “लम्पटता” और “व्यभिचारिता” आमतौर पर एक साथ प्रयुक्त होते हैं। क्या तुम्हें “व्यभिचारिता” का मतलब पता है? (ऐसा व्यवहार और आचरण जो स्वच्छंद और असंयमित हो और छिछोरेपन से दूसरों पर डोरे डालना।) “व्यभिचारिता” का मतलब है अतिभोग—इसका मतलब है स्वच्छंद और असंयमित होना। ये तीन पहलू देह की यौन इच्छा के लिहाज से इस प्रकार के व्यक्ति की दुष्ट अभिव्यक्तियों का गहन-विश्लेषण करने के लिए पर्याप्त होने चाहिए। वयस्कों को लम्पटता, यौन उत्तेजकता और व्यभिचारिता की अभिव्यक्तियों को समझने में समर्थ होना चाहिए। यह अमूर्त नहीं है क्योंकि ऐसे मामले और ऐसे लोग रोजमर्रा के जीवन में आमतौर पर देखे जाते हैं और सुनने में आते हैं। तो ऐसे लोगों की मुख्य अभिव्यक्तियाँ क्या हैं? जब स्त्री और पुरुष में रिश्तों की बात आती है तो वे असंयमित होते हैं, उनकी कोई सीमा नहीं होती है और उनमें शर्मिंदगी की कोई भावना नहीं होती है। अपनी यौन इच्छा की बात आने पर वे विशेष रूप से भोग विलासी होते हैं, उस पर लगाम नहीं लगाते हैं और उनमें कोई संयम नहीं होता है। साथ ही अपनी यौन इच्छा को तुष्ट करने के बारे में उन्हें जरा भी शर्म महसूस नहीं होती है। चाहे उनकी उम्र कितनी भी हो, उनका लिंग कुछ भी हो या उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो, उन्हें विपरीत लिंग के व्यक्तियों में विशेष रूप से दिलचस्पी होती है और वे उन पर विशेष ध्यान देते हैं। जब उनकी मुलाकात लोगों के किसी समूह से होती है तो वे विपरीत लिंग के उन सदस्यों पर ध्यान देते हैं जिनमें उनकी दिलचस्पी होती है। यह ध्यान सिर्फ उन पर सामान्य से ज्यादा देर तक नजर डालना, उनसे गपशप करना या उनसे सामान्य रूप से मिलना-जुलना नहीं है—यह ऐसा है कि वे स्त्री और पुरुष के बीच यौन इच्छा में फँस जाते हैं और रूमानी रिश्ते बना लेते हैं। जब उस व्यक्ति की बात आती है जिसे वे पसंद करते हैं, चाहे उस व्यक्ति की उम्र कितनी भी हो और चाहे दूसरा पक्ष सहमति दे या न दे, जब तक वह व्यक्ति उन्हें आकर्षक लगेगा, तब तक वे उस पर डोरे डालने की पहल करते रहेंगे, यहाँ तक कि दूसरे पक्ष का ध्यान आकर्षित करने के लिए कुछ असामान्य क्रियाकलाप या व्यवहार करने की हद तक पहुँच जाएँगे। उदाहरण के लिए, वे समय-समय पर दूसरे व्यक्ति के लिए कुछ बढ़िया पकवान बनाएँगे; छुट्टियों में उसे तोहफे देंगे; चाहे कोई कारण हो या न हो, वे दूसरे व्यक्ति को संदेश भेजेंगे—सुबह पूछेंगे, “क्या तुम उठ गई?” और रात को पूछेंगे, “क्या तुमने शावर ले लिया है?” कुछ दिनों बाद वे कहेंगे, “कुछ दिनों से मौसम ठंडा चल रहा है—ध्यान से कपड़ों की कई परतें पहनना और ठंड मत लगा लेना। अगर तुम्हें किसी भी चीज की जरूरत हो तो तुम मुझसे मदद माँग सकती हो!” वे अक्सर चिंता व्यक्त करते हैं और दूसरे व्यक्ति को परेशान करने के लिए इसका बहाना बनाते हैं। इस तरह के लोग कभी भी सिर्फ एक-दो या दो-तीन लोगों पर डोरे नहीं डालते हैं—जो भी उन्हें आकर्षक लगता है उसी पर वे डोरे डालने लगते हैं। वे जिसे भी देखते हैं उसे अपना दिल दे बैठते हैं; जैसे ही उन्हें कोई दिलकश लगता है या किसी के बारे में उन्हें अच्छा महसूस होता है, उनमें तुरंत कामुक विचार पैदा होने लगते हैं और वे उस व्यक्ति को पटाने का प्रयास करते हैं। चाहे वे किसी भी समूह में या किसी भी परिवेश में हों, वे इस मामले को कभी नहीं भूलते हैं। वे जहाँ भी जाते हैं, हमेशा तीन या पाँच, एक दर्जन या उससे भी ज्यादा विपरीत लिंग के उन दोस्तों या विश्वासपात्रों को अपना निशाना बनाते हैं जिन्हें वे पसंद करते हैं। अगर वे शारीरिक संपर्क बना पाते हैं तो वे इसे एक रूमानी रिश्ता शुरू करने का लक्ष्य हासिल करना मानते हैं। और अगर यह अभी तक रूमानी रिश्ते के स्तर तक नहीं पहुँचा है तो बस इस तरह से दूसरों पर डोरे डालना ही उन्हें बहुत शानदार महसूस करवाता है—उन्हें अपने दिन मधुर और संतोषजनक लगते हैं। अगर परिवेश इसकी अनुमति नहीं देता है और वे विपरीत लिंग के लोगों पर डोरे नहीं डाल पाते हैं तो वे परेशान हो जाते हैं। अगर कोई उन्हें याद दिलाता है कि ऐसा व्यवहार अनुचित है तो वे अपने दिलों में रंजिश रखते हैं। अगर कोई उन्हें लोगों पर बेतहाशा डोरे डालने से रोक देता है तो वे अपने दिलों में प्रतिरोधी और विरोधी हो जाते हैं और यह तक सोचते हैं, “यह मेरा हक है—किस कारण से तुम मुझे रोकने के काबिल हो? मैं जो कर रहा हूँ वह मेरी आजादी है! मैं न तो कानून तोड़ रहा हूँ और न ही कोई गुनाह कर रहा हूँ, तो तुम कौन होते हो मुझे काबू में रखने का प्रयास करने वाले?” चाहे परिवेश कैसा भी हो, इस तरह के व्यक्ति को अपना मन लगाए रखने के लिए हमेशा किसी न किसी तरह के मनोरंजन की जरूरत महसूस होती है—उसे समय बिताने के लिए, अपने जीवन को भरने और उसे और सुखद बनाने के लिए हमेशा कुछ विपरीत लिंग के दोस्तों या यौन साथियों की जरूरत महसूस होती है। नहीं तो उसे लगता है कि उसका जीवन खाली और उबाऊ है और उसमें कोई रोचकता नहीं है। कुछ लोग लगातार डोरे डालने के बाद खुद को रोक नहीं पाते हैं और अश्लील सामग्री देखने ऑनलाइन चले जाते हैं, अपने देह की यौन इच्छा में स्वच्छंद और असंयमित होकर जीते हैं और जब तक स्थितियाँ अनुमति देती हैं, तब तक वे कुछ भी करने में सक्षम होते हैं। दानवों से पुनर्जन्म लिए हुए लोग, चाहे अवसर या परिवेश कोई भी हो, चाहे उनका जीवन कितना भी कठिन हो, चाहे उन पर काम का कितना भी बड़ा बोझ हो और चाहे परिवेश इसकी अनुमति दे या न दे, हमेशा यौन इच्छा को तुष्ट करने और विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ संपर्क बनाने और उन पर डोरे डालने के अवसर तलाशते रहते हुए अपनी यौन इच्छा को पूरी तरह से संतुष्ट करते हैं। अगर उनके देह की यौन इच्छा संतुष्ट नहीं की जा सकती है तो उनके मन की इच्छा को संतुष्ट करने से भी काम चल जाएगा। इसे ही विकृत होना कहते हैं—वे बहुत ही विकृत होते हैं। कुछ लोग अब तक बूढ़े हो चुके हैं, उनके बच्चे हैं जो शादीशुदा हैं और उनके अपने परिवार हैं, लेकिन ये लोग अब भी अपनी यौन इच्छा के मामले में बेहद भोग विलासी हैं और असंयमित हैं, उनमें शर्मिंदगी की भावना बिल्कुल नहीं है। जब वे विपरीत लिंग के किसी ऐसे व्यक्ति को देखते हैं जो उन्हें पसंद है तो वे उसके साथ अकेले रहने के अवसर पैदा करने का हर संभव तरीका सोचते हैं—फिर वे दूसरे व्यक्ति का हाथ पकड़ते हैं, उसे गले लगाते हैं या उसे छूते हैं और कुछ इश्कबाजी वाली, चुलबुली टिप्पणियाँ करते हैं या कुछ उत्तेजक बातें कहते हैं। ऐसा करने से वे धीरे-धीरे अंत में विपरीत लिंग के कुछ लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाते हैं। यह लम्पट होना है। इस तरह का व्यक्ति किस हद तक लम्पट होता है? जब वह विपरीत लिंग के किसी ऐसे व्यक्ति को देखता है जो आकर्षक है या जिसका शारीरिक गठन अच्छा है तो उसके मन में कामुक विचार पैदा होने लगते हैं। यहाँ तक कि विपरीत लिंग के किसी व्यक्ति को सिर्फ मुलायम, दिलकश और अपेक्षाकृत मधुर आवाज में बोलते हुए सुनकर भी उसके मन में कामुक विचार हिलोरें मार सकते हैं। एक बार जब ये कामुक विचार हिलोरें मारने लगते हैं तो ऐसा नहीं है कि वह कभी-कभार ही इन चीजों के बारे में सोचता है—बल्कि वह इनके बारे में अक्सर सोचता है। वह खाते हुए, कार्य करते हुए, यहाँ तक कि सपने देखते हुए भी उसके बारे में सोचता रहता है, हर रोज उसका मन इन कामुक विचारों से लबालब भरा रहता है। क्योंकि उसमें लम्पटता का दुष्ट सार है, इसलिए वह किसी भी संयम के बिना अपनी देह की यौन इच्छा को तुष्ट करेगा ही। यहाँ तक कि जब वह दौलत और रुतबे वाले किसी अच्छे परिवार के किसी व्यक्ति—कोई अमीर जवान महिला या दौलतमंद पत्नी या कोई लंबा, अमीर और सुंदर पुरुष या कोई दौलतमंद व्यापारी—को देखता है तो भी उसके मन में कामुक विचार पैदा होने लगते हैं। जरा देखो कि ऐसे लोग कितनी बुरी तरह से लम्पट होते हैं! और इससे भी बदतर मामले हैं। कलीसिया में एक भाई था जो अच्छा गाता था। वह किसी किस्म का “सितारा-स्तर” का गायक नहीं था—बस उसकी आवाज कुछ हद तक सुरीली थी। जाहिर तौर पर, उसका गाना सुनने के बाद कुछ महिलाओं के मन में उसके लिए अच्छी भावनाएँ पैदा हो गईं और वे उससे शादी करना चाहने लगीं। इन महिलाओं ने कभी यह तक नहीं देखा था कि यह भाई कैसा दिखता है। उन्हें नहीं पता था कि उसकी उम्र कितनी है, उसका व्यक्तित्व कैसा है, उसने किस स्तर तक शिक्षा प्राप्त की है, उसकी काबिलियत कैसी है या परमेश्वर में उसका विश्वास कैसा है। उन्होंने इनमें से किसी भी चीज पर विचार नहीं किया, लेकिन फिर भी वे उससे शादी करना चाहती थीं, उसकी बस आवाज सुनकर ही उनके मन में कामुक विचार हिलोरें मारने लगते थे। मुझे बताओ, क्या ऐसे दानव विकृत प्रकृति के नहीं हैं? सामान्य व्यक्ति किसी को अच्छा गाते हुए सुनकर ज्यादा-से-ज्यादा जरा-सी ईर्ष्या महसूस करेगा, लेकिन वह उससे शादी करने के बारे में कभी नहीं सोचेगा। अगर वह सचमुच किसी से शादी करना चाहती तो वह ऐसा फैसला लेने से पहले उस व्यक्ति के चरित्र और उसकी पारिवारिक स्थिति के बारे में जान लेती, जैसे कि उसकी उम्र कितनी है, वह कैसा दिखता है, उसका चरित्र कैसा है, उसका परिवार कैसा है—अगर सभी पहलू संतोषजनक होते, सिर्फ तभी वह उससे शादी करने पर विचार करती। लेकिन जो लोग दानव होते हैं वे अलग होते हैं—कुछ महिलाएँ किसी पुरुष को अच्छा गाते हुए सुनने के बाद जाकर उससे शादी करना चाहती हैं; कुछ पुरुष किसी आकर्षक महिला को देखकर जाकर उससे शादी करना चाहते हैं। क्या ऐसे लोग डरावने नहीं हैं? वे डरावने भी हैं और घिनौने भी! जब भी वे किसी रुतबे वाले, ज्ञानी, वाक्पटु या किसी विशेष खूबी वाले व्यक्ति को देखते हैं या किसी सुंदर या सजीले व्यक्ति को देखते हैं तो उनके मन में कामुक विचार पैदा होने लगते हैं। जब वे ऐसे लोगों को देखते हैं तो वे उन्हें बिना पलकें झपकाए आशिक नजर से देखते रहते हैं; उनकी आँखें स्थिर रहती हैं, लेकिन उनके मन बहुत सक्रिय होते हैं और उनकी यौन इच्छा हिलोरें मार रही होती है—यह मन में कामुक विचार होना है। जब भी कोई व्यक्ति विपरीत लिंग के लोगों को बिना नजरें हटाए आशिक नजर से लगातार देखता रहता है—और कुछ तो ऐसे भी होते हैं जिनकी आँखों से एक दुष्ट भाव प्रकट हो जाता है या वे मुँह खोले हुए लार टपकाते रहते हैं—यह मन में कामुक विचार होना है। एक बार जब उनके कामुक विचार हिलोरें मारने लगते हैं तो वे दूसरों को किसी न किसी बहाने से छूने लगते हैं। इसे विकृत होना कहते हैं। चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, जब तक उनकी दृश्य वासना, श्रवण वासना या देह की यौन इच्छा जगी रहेगी तब तक उनके मन में कामुक विचार आते रहेंगे—ऐसे लोग दानव होते हैं। क्या दानवों की यौन इच्छा मानवता के जमीर और विवेक द्वारा सीमित या संयमित होती है? यह संयमित नहीं होती, इसलिए उनकी यौन इच्छा लगातार उमड़ती रहती है और वे लगातार व्यभिचारिता की अभिव्यक्तियों का प्रदर्शन करते रहते हैं—वे विशेष रूप से भोग विलासी होते हैं। उन्हें इस बात की परवाह नहीं होती कि उनके आस-पास कितने लोग हैं, उनकी अपनी उम्र क्या है या दूसरा पक्ष उन्हें पसंद करता है या उससे घृणा और नफरत करता है—जब तक यह कोई ऐसा व्यक्ति है जिसे वे पसंद करते हैं तब तक उनके मन में कामुक विचार आते रहेंगे और वे फंतासी में लिप्त रहेंगे, अपनी यौन इच्छा को आखिरी हद तक संतुष्ट करते रहेंगे। क्या यह घिनौना नहीं है? ऐसे लोग बेहद लम्पट होते हैं। भले ही उन्हें विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ संबंध बनाने का मौका न भी मिले, तो भी वे दूसरों पर डोरे डालना चाहते हैं। इस व्यवहार की अभिव्यक्तियाँ ऐसी हैं कि वे बार-बार तुम्हें आँखों से इशारे करके इश्कबाजी के संकेत भेजते हैं, तुमसे संपर्क बनाने और तुम्हारे करीब आने का हर संभव तरीका सोचते हैं—वे जानबूझकर तुम्हारे पास से गुजरते हैं और तुम्हारे हाथ, कंधे या पीठ को धीरे से छू लेते हैं—और चुलबुली चीजें कहते हैं, ये सब जानबूझकर किया जाता है। इससे पता चलता है कि उनके दिल पहले से ही वासना से भरे हुए हैं। सामान्य वयस्क विपरीत लिंग के सदस्यों से मिलते-जुलते समय सीमाओं, संयम और मर्यादाओं का पालन करते हैं। चाहे यौन इच्छा, विचार, बोली, शारीरिक संपर्क या लोगों के बीच शारीरिक दूरी जैसी चीजों का मामला हो, ये सब उनके जमीर और विवेक द्वारा शासित और संयमित होता है। लेकिन लम्पट और व्यभिचारी लोग ऐसे नहीं होते हैं। चाहे कोई भी अवसर हो, आस-पास कितने भी लोग हों या उस समय परिस्थिति कैसी भी हो और उनकी अपनी उम्र और वैवाहिक स्थिति चाहे जो भी हो, चाहे दूसरा पक्ष इच्छुक हो या न हो, चाहे दूसरा पक्ष उनके प्रति विकर्षित महसूस करता हो, वे फिर भी वही करते हैं जो वे चाहते हैं, बेहूदगी से अपनी यौन इच्छा को तुष्ट करते रहते हैं। इसे ही व्यभिचारी होना कहते हैं। ऐसे लोग किसी भी चीज से संयमित नहीं होते हैं—यहाँ तक कि वे नैतिक सीमाओं का भी पालन नहीं करते हैं; वे पूरी तरह से भोग विलासी होते हैं। और तो और, कुछ लोग अपने भोग विलास में कितनी दूर चले जाते हैं? इतनी दूर कि वे विपरीत लिंग के व्यक्तियों के अंतरंग अंगों को खुलेआम आशिक नजर से देखते रहते हैं। अगर विपरीत लिंग के किसी व्यक्ति की आँखें चमकदार और सुंदर हों तो वे अपने दिल की बात बताने का, उनसे गपशप करने या कार्य पर चर्चा करने का कोई भी मौका पैदा कर लेंगे, उनकी आँखों में एकटक घूरते रहेंगे। अगर विपरीत लिंग के किसी व्यक्ति की त्वचा गोरी, चिकनी और नाजुक हो तो वे अक्सर उसे घूरते रहते हैं, चाहे जानबूझकर या अनजाने में। अगर विपरीत लिंग का कोई व्यक्ति लंबा और छरहरे बदन वाला है तो वे चुपके से पीछे से देखते रहते हैं, बिना नजरें हटाए उसे आशिक नजर से देखते रहते हैं। यह यौन इच्छा से भरा होना है। क्या ऐसे लोग विकृत हैं? (हाँ।) ऐसे कुछ नाबालिग या शादीशुदा वयस्क भी हैं, जो अक्सर अश्लील सामग्री या मिस वर्ल्ड जैसी सौंदर्य प्रतियोगिताएँ देखते हैं जिनमें महिलाएँ बहुत अंग प्रदर्शक कपड़े पहनती हैं—जो उनकी दृश्य वासना को संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त होता है। जितना ज्यादा वे इस तरह से लिप्त रहते हैं, उनकी यौन इच्छा और कामुक विचारों पर लगाम लगाना और उन्हें काबू में रखना उतना ही मुश्किल होता जाता है। क्या यह दानवों की अभिव्यक्ति है? (हाँ।) क्या सामान्य लोग इस तरीके से जीएँगे? क्या वे इस तरीके से आचरण करेंगे? (नहीं।) कुछ पूर्वी पुरुष अपेक्षाकृत रूढ़िवादी होते हैं और जब वे पश्चिम आते हैं और कई महिलाओं को अंग प्रदर्शक कपड़े पहने देखते हैं तो वे जिज्ञासु हो जाते हैं और कुछ ज्यादा बार नजर डालना चाहते हैं, लेकिन कुछ समय बाद जब उन्हें इसकी आदत हो जाती है तो वे अब और जिज्ञासु नहीं रहते हैं—यह एक सामान्य अभिव्यक्ति है। ऐसे कुछ अविवाहित लोग भी हैं जो यौन इच्छा के मामलों में थोड़े जिज्ञासु होते हैं या जिनमें कभी-कभी किसी वस्तुनिष्ठ परिवेश के कारण कुछ दुष्ट वासना पैदा हो जाती है। ये सभी सामान्य शारीरिक प्रतिक्रियाएँ हैं—इसे विकृत होना नहीं कहा जा सकता। लेकिन जो लोग दानव होते हैं वे आम लोगों जैसे नहीं होते हैं। उनकी विकृति सामान्य लोगों से ज्यादा होती है—यह विशेष रूप से असामान्य है। ऐसा नहीं है कि वे यौन इच्छा के बारे में सिर्फ जिज्ञासु होते हैं या उनमें सामान्य शारीरिक प्रतिक्रियाएँ या जरूरतें होती हैं—वे स्वच्छंद और कामासक्त होते हैं। जब वे दुष्ट वासना में लिप्त होते हैं तो उन्हें बिल्कुल शर्म नहीं आती है। इसे ही विकृत होना कहते हैं। वे किस हद तक विकृत होते हैं? विपरीत लिंग के व्यक्ति की बस त्वचा, आँखें, शारीरिक गठन या रूप-रंग देखकर—या सिर्फ उसकी आवाज सुनकर भी—उनके मन में कामुक विचार पैदा होने लगते हैं और फिर वे दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने या उसके करीब आने का हर संभव मौका पैदा करते हैं और अपनी यौन इच्छा को संतुष्ट करने के लिए क्रियाकलाप करने के लिए इससे भी आगे चले जाते हैं। इसे ही विकृत होना कहते हैं।
विकृत होने की एक और अभिव्यक्ति यह है कि ये लोग, चाहे वे किसी भी परिवेश में हों, हमेशा विपरीत लिंग के विभिन्न लोगों से घिरे रहते हैं। इस तरह का व्यक्ति एक ही समय में विपरीत लिंग के कई सदस्यों पर डोरे डालेगा और अक्सर एक से ज्यादा लोगों के साथ संदिग्ध रिश्ते बनाए रखेगा। संदिग्ध रिश्ते का क्या मतलब है? यह एक ऐसा रिश्ता है जो दोस्ती जैसा है, लेकिन रूमानी रिश्ते जैसा भी है—कोई भी स्पष्ट रूप से नहीं बता सकता कि वास्तव में उनमें किस तरह का रिश्ता है। वह विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ कोई स्पष्ट सीमाएँ नहीं रखता है; उसके रिश्ते विशेष रूप से संदिग्ध होते हैं—लगातार इश्कबाजी चलती रहती है और चीजें संदेहास्पद और अस्पष्ट होती हैं। क्या ये अभिव्यक्तियाँ लम्पट प्रकृति से नियंत्रित होती हैं? (हाँ।) मानव संबंधों की नैतिकता और आचारनीति के लिहाज से आज की दुनिया की दुष्ट प्रवृत्तियाँ इस तरह की घटनाओं की अब आलोचना भी नहीं करती हैं। लोग इसे सक्षम होना, आधुनिक होना कहते हैं—वे इसे यौन रूप से मुक्त होना कहते हैं। इसलिए कुछ लोग इस तरह के विचारों और दृष्टिकोणों को कलीसिया में ले आते हैं। वे मानते हैं, “मैं विपरीत लिंग के चाहे कितने भी लोगों के साथ रूमानी रूप से जुड़ा रहूँ, यह मेरी आजादी है। अब तो कानून भी इसकी निंदा नहीं करता है, इसलिए मुझे यह चुनने का हक है कि मैं विपरीत लिंग के कितने दोस्तों के साथ रूमानी रूप से जुड़ता हूँ, मुझे यह चुनने का हक है कि मैं अपनी यौन इच्छा को कैसे सँभालता हूँ। मुझे अपने साथ बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए—मुझे अपनी यौन इच्छा को पूरी तरह से मुक्त करने की जरूरत है।” क्या यह एक दुष्ट दलील नहीं है? (हाँ।) चाहे कितने भी लोग समाज के चलन द्वारा प्रचारित राय से सहमत हों या उनकी हिमायत करते हों, चाहे कितने भी लोग उनका अभ्यास करते हों, परमेश्वर के घर में इस तरह के विधर्मों और भ्रांतियों को “विकृति” के रूप में निरूपित किया जाता है और जो लोग इस तरह के विधर्मों और भ्रांतियों को पकड़े रहते हैं, उन्हें भी “विकृत” के रूप में निरूपित किया जाता है—विशिष्ट रूप से कहें तो वे “लम्पट” और “व्यभिचारी” हैं। क्या यह निरूपण सटीक है? (हाँ।) लोगों के शरीर के हर प्रकार्य और सहज प्रवृत्ति के लिए मानवता पर आधारित स्व-नियंत्रण के मूलभूत स्तर की जरूरत होती है। और यह स्व-नियंत्रण किस पर निर्भर करता है? यह लोगों के जमीर और विवेक पर निर्भर करता है। जमीर और विवेक के भीतर शर्म की भावना को किसी व्यक्ति की शारीरिक जरूरतों और उसकी यौन इच्छा को उचित रूप से नियंत्रित करना चाहिए। अगर तुम इसे नियंत्रित या संयमित नहीं करते हो, बल्कि यौन इच्छा में लिप्त रहते हो तो इसे व्यभिचारी होना कहा जाता है, इसे लम्पट होना कहा जाता है। अगर तुममें ऐसी अभिव्यक्तियाँ हैं तो फिर तुम विकृत हो। विकृति नकारात्मक चीज है—यह सकारात्मक चीज बिल्कुल नहीं है। वह इसलिए क्योंकि यह लोगों की मानवता में निहित शर्म की भावना की सीमाओं से परे चली जाती है, परमेश्वर द्वारा लोगों से अपेक्षित सामान्य तर्क शक्ति की सीमाओं से परे चली जाती है; यह मानवता की सीमाओं को लाँघ जाती है और भाई-बहनों के सामान्य जीवन में बाधा डालती है और नुकसान पहुँचाती है। इसलिए विकृति को पूरी तरह से किसी दुष्ट चीज, एक नकारात्मक चीज के रूप में निरूपित किया गया है; यह बिल्कुल भी सकारात्मक चीज नहीं है। कलीसिया, जो परमेश्वर का घर है, यौन स्वतंत्रता को बिल्कुल भी बढ़ावा नहीं देती है। परमेश्वर का घर किस चीज को बढ़ावा देता है? (गरिमापूर्ण और सभ्य होना और सामान्य मानवता का जीवन यापन करना) परमेश्वर का घर संतों की मर्यादा होने और जमीर और विवेक से आचरण करने को बढ़ावा देता है। कम-से-कम जब यौन इच्छा और शारीरिक जरूरतों की बात आती है, तो व्यक्ति में शर्म की भावना होनी ही चाहिए। यानी अगर तुम शादी के रिश्ते में प्रवेश करना चाहते हो, अगर तुम एक सामान्य रूमानी रिश्ता रखना चाहते हो तो यह शादी के उन सिद्धांतों के अनुसार होना चाहिए जो परमेश्वर ने लोगों के लिए विहित किए हैं—इसमें कौटुंबिक व्यभिचार, व्यभिचार या लम्पटता शामिल नहीं हो सकते हैं। तुम समझ रहे हो? (हाँ।)
अभी-अभी हमने उन लोगों की विकृति की कुछ अभिव्यक्तियों पर संगति की जो दानव हैं। क्या यह अच्छा है कि हमने इस तरह के विषय पर संगति की है ताकि तुम्हें भेद पहचानने की कुछ क्षमता प्राप्त करने में मदद मिले? (हाँ।) चाहे अभिव्यक्ति कुछ भी हो, अगर यह सामान्य लोगों के भ्रष्ट स्वभावों के दायरे से बढ़ जाती है या लोगों की जन्मजात प्रकृति और प्रवृत्तियों के दायरे से परे चली जाती है तो यह असामान्य है—यह दानवों की एक अभिव्यक्ति है। हमने अभी-अभी जिन चीजों पर संगति की है उनमें, उन लोगों के अलावा जिनके विचार और व्यवहार विशेष रूप से कुटिल हैं, एक और तरह का व्यक्ति है जो हो सकता है कि उन स्पष्ट रूप से कुटिल अभिव्यक्तियों को प्रदर्शित न करे, लेकिन जिसकी स्पष्ट अभिव्यक्ति विशेष रूप से लम्पट और व्यभिचारी होना है। इन स्पष्ट अभिव्यक्तियों का होना यह भी साबित करता है कि उसमें दानवों के विकृत सार का एक पहलू है। तो क्या यह निश्चितता से कहा जा सकता है कि जिन लोगों में ये स्पष्ट अभिव्यक्तियाँ होती हैं वे दानव होते हैं? (हाँ।) वे किसी भी समय अपनी यौन इच्छा को तुष्ट करते हैं, उनके दिल दुष्ट वासना से लबालब भरे होते हैं और उन्हें विशेष रूप से देह की यौन इच्छा से संबंधित मामलों में दिलचस्पी होती है—उनकी दिलचस्पी सामान्य लोगों की शारीरिक जरूरतों से परे चली जाती है। यानी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनकी उम्र क्या है, वे किस लिंग के हैं या उनकी वैवाहिक स्थिति क्या है, उनके देह की यौन इच्छा की अभिव्यक्तियाँ सामान्य लोगों की अभिव्यक्तियों से कहीं ज्यादा होती हैं और ये सामान्य लोगों की जरूरतों से भी कहीं ज्यादा होती हैं। इसके लिए यह कहना ही काफी है कि इस क्षेत्र में उनकी अभिव्यक्तियाँ सामान्य नहीं होती हैं। उन्हें निरूपित करने के लिए दो शब्दों का उपयोग करें तो वे विशेष रूप से “लम्पट” और “व्यभिचारी” होते हैं। यानी उनकी शारीरिक जरूरतें बेहद असामान्य होती हैं। जब भी वे विपरीत लिंग के किसी ऐसे व्यक्ति को देखते हैं जिसके पास किसी क्षेत्र में एक निश्चित खूबी या अनुकूल जन्मजात स्थिति है तो उनके मन में कामुक विचार पैदा हो सकते हैं और वे यौन इच्छा अभिव्यक्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब वे विपरीत लिंग के किसी ऐसे व्यक्ति को देखते हैं जिसके दाँत चमकदार और सीधे हैं और जिसकी मुस्कान विशेष रूप से सुंदर और मधुर है या जिसके बाल या आँखें विशेष रूप से सुंदर हैं तो उनके मन में कामुक विचार पैदा हो सकते हैं। विपरीत लिंग के व्यक्तियों की चाहे कोई भी विशेषता उन्हें देखने में अच्छी या सुंदर लगे, उनके मन में कामुक विचार पैदा हो सकते हैं—और वे यौन इच्छा की अभिव्यक्ति का उपयोग दूसरे व्यक्ति के प्रति अपना लगाव और सराहना व्यक्त करने के तरीके के रूप में करते हैं। क्या यह घिनौना नहीं है? यह बेहद घिनौना है! कुछ दुष्ट लोग जब भी विपरीत लिंग के किसी व्यक्ति को चेहरे पर कोई विशेष भाव बनाते हुए देखते हैं, जैसे बोलते समय उसका अपनी भौंहें थोड़ी ऊपर उठाना या मुस्कुराते समय उसके गालों पर गड्ढे पड़ना या विशेष रूप से मोहक निगाह प्रदर्शित करना, तो उनके मन में कामुक विचार पैदा हो जाते हैं। उनके मन में कामुक विचारों के हिलोरें मारने की आवृत्ति और बारंबारता समझ से परे और कल्पना से परे है। सामान्य लोगों को यह बात चकरा देती है : “अगर कोई अच्छा दिखता है तो उस पर एक-दो बार ज्यादा नजर डालना ठीक है—लेकिन इसके कारण कामुक विचार कैसे पैदा हो सकते हैं और यौन इच्छा कैसे अभिव्यक्त हो सकती है? क्या यह टेढ़ी बात नहीं है?” जिन चीजों के बारे में सामान्य लोग सोचते हैं कि वे कामुक विचार नहीं उकसाएँगी, उनसे दुष्ट लोगों में कामुक विचार पैदा हो सकते हैं और उनकी वासना अभिव्यक्त हो सकती है और सामान्य लोग इसे समझ नहीं पाते हैं। इसे विकृत होना कहते हैं। सादे शब्दों में, इसे विकृत होना, कामविकृत होना कहते हैं। यहाँ तक कि कुछ स्त्रियाँ जब किसी सुविकसित माँसपेशियों, सुस्पष्ट नैन-नक्श और लंबे कदकाठी वाले पुरुष को देखती हैं, तब उनके भी मन में कामुक विचार पैदा हो सकते हैं। या जब वे किसी ऐसे पुरुष को देखती हैं जिसके पास कुछ कौशल हैं, कुछ क्षमता है और इसके अलावा दौलत और रुतबा भी है तो उनके मन में कामुक विचार लगातार हिलोरें मारने लगते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं है कि वे उसकी सराहना करती हैं या यह सोचती हैं कि वह सभ्य है, उसके लिए जरा-सा लगाव महसूस करती हैं और उसके साथ रूमानी रूप से जुड़ना या उसके साथ रिश्ता बनाना चाहती हैं—बल्कि उनके मन में उसके बारे में कामुक विचार लगातार हिलोरें मारते रहते हैं। मुझे बताओ, क्या यह घिनौना नहीं है? क्या यह विकृति नहीं है? (हाँ।) कामुक विचारों का बार-बार हिलोरें मारना असामान्य है—यह विकृति है।
हम दानवों से पुनर्जन्म लेने वाले लोगों में लम्पटता और व्यभिचार की अभिव्यक्तियों पर अपनी संगति यहीं समाप्त करेंगे। अब चलो हम “यौन उत्तेजकता” के बारे में बात करें। यौन उत्तेजकता वास्तव में लम्पटता और व्यभिचार दोनों से संबंधित है; यह बस उसी चीज के बारे में अलग परिप्रेक्ष्य से बात करने का एक तरीका है। इसका मतलब है कि किस तरह से कुछ लोग विपरीत लिंग के सदस्यों का मन मोहने और उनके मन में सकारात्मक छवि बनाने के लिए अक्सर उनके सामने अपने मोहक आकर्षण का प्रदर्शन करते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ महिलाएँ चटक लाल और कामोत्तेजक लिपस्टिक लगाना पसंद करती हैं, मेकअप से अपनी आँखों को बहुत मनमोहक बनाती हैं और यहाँ तक कि काफी बूढ़ी होने के बावजूद लाली तक लगाती हैं। पोशाक चुनते समय वे हमेशा कामुक, दिलकश और मंत्रमुग्ध करने लायक बनने पर ध्यान देती हैं; बोलते समय वे सुनिश्चित करती हैं कि वे ऐसी चुलबुली या प्यारी बातें करें जो विपरीत लिंग के व्यक्ति को मोहित कर सकें वगैरह-वगैरह। कुछ पुरुष अक्सर खुद को ऐसे मजबूत बाँहों वाले हीरो के रूप में पेश करते हैं जिन पर महिलाएँ भरोसा कर सकें। वे अक्सर महिलाओं के सामने अपनी माँसपेशियों को दिखाते हैं, खुशी-खुशी अपनी कमीज उतारकर अपने पेट की माँसपेशियाँ दिखाते हैं, विपरीत लिंग के व्यक्तियों को आकर्षित करने के लिए इन उपायों का उपयोग करते हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ विपरीत लिंग के सदस्यों पर अपनी अच्छी छाप छोड़ना या किसी को डेट पर ले जाने के लिए ढूँढ़ना नहीं है, बल्कि विपरीत लिंग के सदस्यों का मन मोहना, उनकी दिलचस्पी जगाना और फिर उन्हें यौन इच्छा के जाल में फँसाना है। यही उनका मकसद है। क्या यह यौन रूप से उत्तेजक होना नहीं है? (हाँ।) यह उत्तेजक होना है। अविश्वासी लोग ऐसे लोगों को “फूहड़” कहते हैं। ये “फूहड़” लोग किस तरह की चीजें करते हैं? अगर यह कोई महिला है तो वह अपनी लिपस्टिक के चुनाव तक को लेकर बहुत सतर्क रहती है। वह आम लिप बाम का उपयोग नहीं करती है और वह प्रतिष्ठित और सभ्य लोगों द्वारा उपयोग की जाने वाली लिपस्टिक को भी तुच्छ समझती है क्योंकि उसे वह पर्याप्त रूप से ऊँचे स्तर की नहीं लगती। वह विशेष रूप से ऐसे कामोत्तेजक रंगों का चुनाव करती है जो उसके होंठों को विशेष रूप से कामुक और मनमोहक बनाते हैं जिसका मकसद पुरुषों के दिलों में हलचल पैदा करना, उन्हें मोहित करना और उन्हें पूरी तरह से मुग्ध करके उसके प्रेम में पागल करना है। पुरुषों के साथ अपनी बातचीत में वह अक्सर उत्तेजक व्यवहार प्रकट करती है, यौन इच्छा अभिव्यक्त करती है और यह सब उनका मन मोहने के मकसद से होता है। जितने ज्यादा पुरुष मौजूद होते हैं, विशेष रूप से उस प्रकार के पुरुष जिन्हें वह पसंद करती है, वह उतनी ही ज्यादा जोशपूर्ण और सक्रिय हो जाती है और खुद को प्रदर्शित करने का उतना ही ज्यादा भरसक प्रयास करती है, अपनी वाक्पटुता का दिखावा करती है, ज्यादा परिष्कृत शब्दावली का उपयोग करती है, अपने चेहरे के भावों पर विशेष ध्यान देती है और विशेष रूप से लुभाने वाले ढंग से कपड़े पहनती है। इसे उत्तेजक होना कहा जाता है। क्या उत्तेजक लोगों और लम्पट लोगों में कोई अंतर है? क्या वे एक ही प्रकार के होते हैं? (हाँ।) वे एक ही गंदी मिट्टी के बने होते हैं। एक सक्रियता से मन मोहता है, दूसरा सक्रियता से लम्पटता में लिप्त रहता है। ये दोनों ही यौन इच्छा को संतुष्ट करने की अभिव्यक्तियाँ हैं, उमड़ती हुई यौन इच्छा और स्वच्छंदता की अभिव्यक्तियाँ हैं, ये सभी विकृत प्रकृति सार द्वारा शासित होती हैं। इस उत्तेजक प्रकार के लोग, चाहे पुरुष हों या महिला, उनकी उम्र या वैवाहिक स्थिति चाहे कुछ भी हो, किसी भी परिस्थिति में अपने व्यवहार पर संयम नहीं रखते हैं और न ही वे अपनी यौन इच्छा पर लगाम लगाते हैं या उसका प्रबंध करते हैं। इसके बजाय वे स्वच्छंद और लापरवाह होते हैं, यहाँ तक कि सक्रियता से यौन संबंधों की पहल करते हैं—वे विशेष कपड़े पहनते हैं, विशेष हाव-भावों, विशेष भाषा, बोलने के विशेष तरीकों का उपयोग करते हैं और विपरीत लिंग के व्यक्तियों का ध्यान आकर्षित करने, उन्हें बातचीत करने के लिए ललचाने, उन्हें बहकावे में लाने वगैरह के लिए कुछ विशेष चीजें करते हैं। इसलिए ऐसे लोग न सिर्फ लम्पट होते हैं, बल्कि उत्तेजक भी होते हैं। “उत्तेजक” शब्द सचमुच काफी घिनौना है। संक्षेप में, चाहे ऐसे लोग लम्पटता दिखाएँ या उत्तेजकता, जिस तरह से वे यौन इच्छा अभिव्यक्त करते हैं वह व्यभिचारी होता है, उनकी यौन इच्छा अभिव्यक्त करने की प्रकृति व्यभिचारी है और उनका सार विकृति है। ऐसे लोगों की अभिव्यक्तियाँ, चाहे लम्पट हों या उत्तेजक, सामान्य लोगों की शारीरिक जरूरतों से ज्यादा होती हैं और उनमें जमीर और विवेक का संयम नहीं होता है। इसलिए ऐसे लोग पूरी तरह से दुष्ट लोग होते हैं। तुम चाहे इसे किसी भी तरह से देखो, वे अच्छे लोग नहीं बल्कि दानव होते हैं। किसी भी समूह में ऐसे एक भी दानव की मौजूदगी विघ्न-बाधा उत्पन्न कर देगी। इज्जतदार और सभ्य लोगों को वे घिनौने लगते हैं, जबकि छोटे आध्यात्मिक कद के लोग या जिन लोगों में भेद पहचानने की किसी भी तरह की कोई क्षमता या रुख नहीं होता है—विशेष रूप से वे लोग जो पशुओं से पुनर्जन्म लिए हुए हैं—अक्सर उनके द्वारा गुमराह हो जाते हैं और उनका उत्पीड़न सहते हैं। संक्षेप में, ये दुष्ट अभिव्यक्तियाँ प्रदर्शित करने वाले दानव जिस भी समूह में होते हैं वहाँ के लिए संकट होते हैं जिनसे किसी को कोई लाभ या मदद नहीं मिलती है क्योंकि उनकी यौन इच्छा अक्सर उमड़ पड़ती है जो कुछ लोगों के दैनिक जीवन और सामान्य विचारों में अक्सर व्यवधान डालती है।
मुझे बताओ, क्या इस लम्पट, व्यभिचारी और उत्तेजक प्रकार के दुष्ट लोगों का भेद पहचानना आसान है? (हाँ।) वयस्क उनका भेद पहचान सकते हैं और आजकल तो शायद नाबालिग बच्चे भी ऐसा कर सकते हैं। इसलिए दानवों के दुष्ट सार वाले लोगों का सामना करते समय ज्यादातर लोगों में कुछ एहसास, भेद पहचानने की कुछ क्षमता होनी चाहिए; वे इतने बेवकूफ नहीं होंगे कि वे यह भेद नहीं पहचान सकते। तो क्या तुम लोगों को पता है कि जब तुम्हारे सामने ऐसे लोग आते हैं, तो तुम्हें उनसे कैसे पेश आना चाहिए? क्या तुम उन्हें अस्वीकार कर दोगे? अगर तुम किसी ऐसे व्यक्ति से मिलते हो जो तुम्हारी पसंद के मुताबिक नहीं है, तो हो सकता है कि तुम उसे अस्वीकार कर दो। लेकिन अगर यह कोई ऐसा व्यक्ति हो जो वाकई तुम्हारी पसंद के मुताबिक है—तुम्हारे सपनों का प्रेमी, तुम्हारा आदर्श जीवनसाथी है—तो क्या उसे अस्वीकार करना तुम्हारे लिए आसान होगा? तुम स्पष्ट रूप से जानते हो कि वह इस प्रकार का व्यक्ति है, लेकिन क्योंकि उसका रंग-रूप बहुत ही दिलकश है या उसकी कोई खूबी तुम्हें बहुत ही ज्यादा गहराई से प्रभावित कर देती है, वह तुम्हारा दिल चुरा लेता है और तुम्हें मोहित कर लेता है—इस तरह की स्थिति में उसे अस्वीकार करना तुम्हारे लिए मुश्किल हो जाता है। अगर तुम उसे अस्वीकार नहीं करते हो तो क्या तुम्हें खतरा नहीं है? (हाँ, यह प्रलोभन में पड़ना है।) क्या यह सिर्फ प्रलोभन में पड़ना है? यह यौन इच्छा के भँवर में पड़ना है। क्या यौन इच्छा के भँवर में फँसे किसी व्यक्ति के लिए खुद को बाहर निकालना आसान है? (नहीं, यह आसान नहीं है।) वह तुम्हारे प्रति चिंता और विचारशीलता, प्रेम और परवाह दिखाता है और साथ ही वह लगातार तुम पर छोटे-छोटे एहसान करता रहता है। तुम अंदर से बेहद गर्मजोशी महसूस करते हो, सोचते हो, “दुनिया में ऐसा और कोई नहीं है जो मेरे साथ इतना अच्छा व्यवहार करता हो; यह मेरा मनमोहक राजकुमार है, मेरे सपनों का प्रेमी है।” तुम यह समझने में विफल हो जाते हो कि अगर वह एक लम्पट और व्यभिचारी व्यक्ति है तो वह दूसरों के साथ भी वैसे ही पेश आता है। तुम सिर्फ उसके विपरीत लिंग के सभी दोस्तों में से एक हो; उसके लिए तुम उसके जीवन के लंबे-सफर में बस एक ऐसे व्यक्ति हो जिसके पास से वह गुजर जाता है—बस एक पड़ाव भर हो। जब उसने तुम्हारे साथ काफी मजे कर लिए होते हैं और तुम अब उसके लिए कोई आकर्षण नहीं रखते हो, तो तुम उसके लिए त्याग की वस्तु बन जाते हो। वह तुम्हें उतनी ही बेरहमी से त्याग देता है जितनी बेरहमी से कोई कपड़ा या चीथड़ा कचरे में फेंक दिया जाता है और तब जाकर तुम्हें दर्द का एहसास होता है। जब वह तुम्हें छोड़ने का फैसला करता है, तब तुम्हारा रोना-धोना बेकार है, तुम्हारा उससे मिन्नतें करना बेकार है, यहाँ तक कि तुम्हारा उसके सामने घुटने टेककर बैठना भी बेकार है; कुछ लोग तो आत्महत्या तक कर लेते हैं, लेकिन वह भी बेकार है—कुछ भी उसे झकझोर नहीं सकता। एक बार जब तुमसे उसकी यौन जरूरतें और नहीं रहेंगी, तो वह कहेगा कि अब उसके मन में तुम्हारे लिए कोई भावना नहीं है, वह अब तुमसे प्रेम नहीं करता है और वह तुम्हारी जगह किसी और को देने के लिए अगले शिकार की तलाश में निकल पड़ेगा। तब जाकर तुम्हें पता चलेगा कि ऐसे लोग शादी के लिए उपयुक्त साथी नहीं होते हैं, किसी मनमोहक राजकुमार, हमसफर या सपनों के प्रेमी का विचार सिर्फ एक धोखे से भरी हुई चाल है और सिर्फ तब तुम्हें यह एहसास होगा कि यौन इच्छा सच्चा प्रेम नहीं है। ऐसे लम्पट और व्यभिचारी लोग चाहे किसी के साथ भी डेट पर जाएँ, उनमें सिर्फ यौन इच्छा ही होती है, सच्चा प्रेम नहीं। उनका तुम्हारे साथ हमेशा-हमेशा के लिए रहने या कोई जिम्मेदारी पूरी करने का कभी कोई इरादा नहीं होता है। वे बस यौन इच्छा के खेल में लिप्त रहते हैं। एक बार जब वे काफी मजे कर लेंगे और उनकी यौन इच्छा तृप्त हो जाएगी, तो वे तुम्हें दोबारा मुड़कर देखना भी नहीं चाहेंगे और तुम पर तरस खाने की जहमत तक नहीं उठाएँगे। एक बार जब उन्हें अपना नया प्रेम-पात्र मिल जाता है, तो तुम पुराना प्रेम बन जाते हो और फिर तुम सिर्फ गला फाड़कर रो ही सकते हो। इसलिए, चाहे पुरुष हो या महिला, डेट पर जाते समय या साथी की तलाश करते समय कभी-कभी ऐसे दुष्ट लोग सामने आ जाते हैं। उनमें तुम्हारे प्रति कामुक विचार पैदा हो जाते हैं और तुम्हें अपने जाल में फँसाने के लिए वे तुम्हारा मन मोहते हैं, फिर भी तुम यही मानते हो कि वे तुमसे सही मायने में प्रेम करते हैं और ऐसे व्यक्ति को अपने जीवन की खुशियाँ सौंप देते हो। सिर्फ जब तुम्हें लात मारकर एक तरफ फेंक दिया जाता है और त्याग दिया जाता है, तब जाकर तुम्हें एहसास होता है कि तुमने उसके बारे में गलत राय बनाई थी, यह कोई मानवता वाला व्यक्ति नहीं है जो जिम्मेदारियाँ पूरी कर सके, बल्कि एक लम्पट और व्यभिचारी व्यक्ति है। तब तक पछतावे के लिए बहुत देर हो चुकी होती है; जब शादी की बात आती है, तो यह एक पथरीला घुमावदार रास्ता होता है। सामान्य मानवता वाले व्यक्ति के लिए खिलवाड़ किए जाने का अनुभव जीवन भर के दर्द का कारण बन सकता है, लेकिन दानव चाहे कितने भी लोगों के साथ खिलवाड़ करें, वे उदासीन ही रहते हैं; यहाँ तक कि वे खुद को खुशकिस्मत, खुश और संतुष्ट भी महसूस करते हैं, बेसब्री से इच्छा करते हैं कि वे विपरीत लिंग के और भी लोगों पर डोरे डाल सकें और उनके साथ खिलवाड़ कर सकें। वे इसे जीवन भर की खुशी मानते हैं, इसे अपना हुनर और क्षमता कहते हैं। सामान्य लोग उनसे मेल-जोल रखने का कष्ट वहन नहीं कर सकते हैं। इसलिए, अगर तुम किसी रिश्ते में रहना चाहते हो तो अपनी आँखें खुली रखो और चीजों को स्पष्ट रूप से देखो; तुम चाहे कुछ भी करो, किसी दानव को कभी मत चुनना। अगर तुम किसी सामान्य व्यक्ति के साथ डेट पर जाते हो, तो अगर तुम रिश्ता तोड़ भी देते हो तो भी वह तुम्हें बहुत ज्यादा गहरी चोट नहीं पहुँचाएगा; कम-से-कम तुम आम दोस्त तो बने ही रह सकते हो। लेकिन अगर तुम किसी दानव से रिश्ता बनाते हो, तो तुम्हारा पूरा जीवन उसके हाथों बरबाद हो जाएगा। मुझे बताओ, एक सामान्य व्यक्ति में कितनी सच्चाई और सच्चा स्नेह होता है? इस जीवनकाल में उसके पास कितनी ऊर्जा होती है? अगर हर बार किसी के साथ रिश्ता बनाने पर तुम ठगे जाते हो जिससे धोखा दिए जाने और खिलवाड़ किए जाने से तुम्हें गहरा दुख पहुँचता है, तो तुम इसी साये तले अपने जीवन का पूरा मार्ग तय करोगे जिससे तुम्हारा अस्तित्व बहुत ही दर्दनाक हो जाएगा। इसलिए, तुम चाहे डेटिंग पर जा रहे हो या विपरीत लिंग के लोगों के साथ मेल-जोल रख रहे हो, तुम्हें सबसे ज्यादा इन लम्पट और व्यभिचारी लोगों से चौकस रहना चाहिए। तुम चाहे पुरुष हो या महिला, अगर तुम लोगों की असलियत नहीं पहचान सकते हो और यह नहीं जानते हो कि कोई और व्यक्ति लम्पट और व्यभिचारी है या नहीं, तो उसके साथ बेपरवाही से मेल-जोल मत रखो ताकि तुम ठगे जाने और जीवन भर के पछतावे से बच सको। एक बार जब कड़वे नतीजे उत्पन्न हो जाएँ, तो सिर्फ तुम्हें ही उनका सामना करना पड़ेगा; कोई भी तुम्हारी जगह नहीं ले सकता और कोई भी तुम्हारे जख्मी दिल को आराम नहीं पहुँचा सकता। भले ही तुम कहो कि तुम लोगों की असलियत देख सकते हो, लेकिन हो सकता है कि तुम ऐसा सटीक रूप से न कर पाओ। आजकल किसी के भी बारे में यकीन नहीं किया जा सकता। किसी व्यक्ति को उद्धार प्राप्त होने से पहले उसके मन में सत्य का अनुसरण करने की सिर्फ इच्छा होती है; उसे देखकर ऐसा लग सकता है कि उसमें सभ्य मानवता है, लेकिन यह अनिश्चित है कि अगर तुम उसके साथ रहो तो चीजें वास्तव में कैसी होंगी। ऐसा कोई भी व्यक्ति जो सत्य नहीं समझता है और जिसे बचाया नहीं गया है भरोसे के लायक नहीं है। वह भरोसे के लायक क्यों नहीं है? मुझे बताओ, इस बुरी दुनिया में रहते हुए क्या कोई ऐसा है जो सत्य प्राप्त किए बिना किसी भी प्रलोभन का प्रतिरोध कर सके और किसी भी बुरे चलन के बीच डटा रह सके? एक भी नहीं है। इसलिए, यहाँ भरोसेमंद लोग नहीं हैं। यहाँ भरोसेमंद लोग नहीं हैं का क्या मतलब है? इसका मतलब है कि किसी के लिए भी, चाहे वह पुरुष हो या महिला, विवाह में प्रवेश करना त्रासदी की शुरुआत है। रोजमर्रा की जरूरतों का ध्यान रखने और दिन-ब-दिन जीवन की छोटी-छोटी तुच्छताओं और परेशानियों का सामना करने की बाध्यता के कारण यह कहना मुश्किल होता है कि क्या दो लोग अंत तक साथ निभा पाएँगे, क्या वे रास्ते में एक-दूसरे को सहारा देंगे, क्या उनके बीच खुशियाँ होंगी और क्या उनके पास समान आधार और समान लक्ष्य होंगे। इसलिए, एक बार जब कोई शादी के रिश्ते में प्रवेश कर लेता है और वास्तविक जीवन का सामना करता है तो कष्ट शुरू हो जाता है। तुम देखो, जब तुम अकेले रहते हो, तब सब कुछ सँभालना आसान होता है; तुम अपने लिए फैसले खुद ले सकते हो। लेकिन जब दो लोग साथ रहते हैं, तब क्या तुम सारे फैसले सिर्फ खुद ले सकते हो? क्या दूसरा व्यक्ति तुम्हें स्वीकार करेगा? क्या तुम उसे स्वीकार करोगे? क्या वह तुम्हारी परवाह करेगा और तुम्हारे प्रति विचारशील होगा? क्या तुम उसकी परवाह करोगे? ये सब चीजें अज्ञात हैं। भले ही तुम जिस व्यक्ति से मिलते हो वह लम्पट और व्यभिचारी न भी हो और तुम्हें यह भी लगता हो कि तुम लोग एक-दूसरे के लिए सही हो और शादी के रिश्ते में प्रवेश कर सकते हो, तो भी वह शादी के ढाँचे में अपनी जिम्मेदारियाँ पूरा कर पाएगा या नहीं, यह बात अज्ञात है और तुम इस ढाँचे में अंत तक उसके साथ चल सकोगे या नहीं, यह बात भी अज्ञात है। तुम्हारे पास आश्वासन नहीं है और तुम्हें खुद पर भी विश्वास नहीं है, जो साबित करता है कि दूसरे लोग भी ऐसे ही हैं—यह कहने की तो जरूरत ही नहीं है, है ना? (हाँ।)
अगर अपने दैनिक जीवन में तुम इस लम्पट, उत्तेजक और व्यभिचारी प्रकार के लोगों से मिलते हो और वे तुम्हारे करीब आने का प्रयास करते हैं, तो तुम्हें पता होना चाहिए कि ऐसा करने के पीछे उनका क्या मकसद है। अगर तुम उन्हें अस्वीकार नहीं करते हो या अगर तुम अपने दब्बूपन, भोलेपन, बेवकूफी और अज्ञानता या अनुभवजन्य ज्ञान की कमी के कारण उनकी मर्जी चलने देते हो जिससे प्रतिकूल नतीजे सामने आते हैं, तो अंत में सिर्फ तुम्हें ही नतीजे भुगतने पड़ेंगे। लम्पट और व्यभिचारी लोग—दानव—यौन इच्छा अभिव्यक्त करने या अनैतिक चीजें करने के लिए कभी भी कोई अपराधबोध या पछतावा महसूस नहीं करते हैं। उन्हें लगता है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है; उन्हें लगता है कि वे फायदा उठा रहे हैं और लोगों को जीवन में ऐसा ही होना चाहिए। लेकिन अगर तुम एक सामान्य व्यक्ति हो तो तुम्हारी मानवता के भीतर जमीर और विवेक ऐसे आघातों, ऐसी यातना और गंभीर नुकसान को सहन कर ही नहीं सकते हैं। इसलिए, अगर ऐसे लम्पट और व्यभिचारी लोग तुम्हारे सामने आते हैं तो तुम्हें सावधान रहना चाहिए। तुम्हें परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए और उससे तुम्हारी रक्षा करने के लिए कहना चाहिए ताकि तुम प्रलोभन में न पड़ो। विशेष रूप से अगर सामने वाले के पास ढेरों गुप्त चालें हों, वह एक अनुभवी खिलाड़ी हो और तुम्हारे सपनों का प्रेमी भी हो, वह प्रेमी जिसे पाने के तुम सपने देखते रहते हो तो फिर तुम बड़ी आसानी से प्रलोभन में पड़ जाओगे और बड़ी आसानी से एक ऐसी स्थिति में फँस जाओगे जो सुधार से परे है और अंत में तुम एक ऐसा बुरा परिणाम भुगतोगे जिसे कोई भी नहीं देखना चाहता। तब तक तुम्हारा दिल, मन और देह निश्चित तबाही झेल चुके होंगे। इसके बाद जब तुम अपना कर्तव्य करने के लिए आओगे और परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए उसके सामने आओगे तो बहुत-सी चीजें अलग होंगी—वे कभी भी वैसी नहीं होंगी जैसी शुरू में थीं और कभी वापस वैसी नहीं होंगी जैसी पहले थीं। एक बार जब कोई व्यक्ति यौन इच्छा से संबंधित कुछ असामान्य या कठिनाइयों से भरे अनुभवों से गुजर चुका होता है तो यह उसके दिल में कुछ भयानक छाप छोड़ता है जिसे कोई भी सामान्य व्यक्ति जीवन भर आसानी से नहीं भूल पाता है। वैसे तो जैसे-जैसे थोड़ा-थोड़ा करके समय बीतता है, हो सकता है कि ये यादें और यह दर्द धीरे-धीरे हल्का हो जाए, लेकिन अगर इन घटनाओं से तुम्हारा कुछ निश्चित नुकसान और बरबादी हुई है, तो वे तुम्हारे दिल में हमेशा के लिए अमिट दुःस्वप्न बनकर रहेंगे। इस जीवनकाल में तुम कभी भी अपने पिछले जीवन में वापस नहीं लौट पाओगे; तुम्हारी आंतरिक दुनिया पहले की तरह शुद्ध और सरल नहीं रहेगी और तुम्हारे लिए अपनी पिछली स्थिति को वापस प्राप्त करना असंभव होगा। इस समय जब तुम अपना कर्तव्य करने आओगे, तो तुम्हारे दिल में एक अतिरिक्त बोझ होगा जिसे तुम झटकना तो चाहोगे, लेकिन झटक नहीं पाओगे। इस बोझ का क्या मतलब है? इसका मतलब नुकसान पहुँचाए जाने के अनुभव की विभिन्न यादें हैं। इन यादों के बारे में सोचना उबकाई लाएगा और ये यादें बार-बार तुम्हारे दिल और तुम्हारी भावनाओं को भी परेशान करेंगी। इस प्रकार तुम्हारी आंतरिक दुनिया अब पहले जैसी शुद्ध और सरल नहीं रहेगी; तुम्हारी भावनाओं में अब बहुत-सी ऐसी चीजें होंगी जो सामान्य मानवता में नहीं होनी चाहिए। कुछ हद तक यह चीज तुम्हारे जीवन, तुम्हारे कर्तव्य के निर्वहन में दखल देगी और परमेश्वर में तुम्हारे विश्वास और सत्य के अनुसरण में भी दखल देगी। इसे बोझ कहा जाता है। इसलिए, व्यक्ति की उम्र चाहे कुछ भी हो, एक बार जब वह किसी दानव के साथ रूमानी रिश्ते के प्रलोभन में पड़ जाता है तो वह स्वाभाविक रूप से एक अवर्णनीय निराशा में डूब जाता है। एक सामान्य व्यक्ति के लिए यह अच्छी घटना नहीं है।
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?