परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर को जानना | अंश 200
वह दृष्टिकोण जो परमेश्वर चाहता है कि लोगों में परमेश्वर के प्रति होना चाहिए वास्तव में, परमेश्वर लोगों से ज्यादा अपेक्षा नहीं करता—कम से...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
मैं राज्य में शासन करता हूँ, और, इसके अतिरिक्त, मैं पूरे ब्रह्माण्ड में शासन करता हूँ; मैं राज्य का राजा और ब्रह्माण्ड का मुखिया दोनो हूँ। इस समय से आगे, मैं उन सभी को इकट्ठा करूँगा जो चुने हुए नहीं हैं और अन्यजातियों के बीच अपना कार्य आरम्भ करूँगा, और मैं पूरे ब्रह्माण्ड के लिए अपनी प्रशासनिक आज्ञाओं की घोषणा करूँगा, ताकि मैं अपने कार्य में अगले कदम की शुरूआत कर सकूँ। अन्यजातियों के बीच अपने कार्य को फैलाने के लिए मैं ताड़ना का उपयोग करूँगा, जिसका अर्थ है, कि मैं उन सभी के विरूद्ध बल का उपयोग करूँगा जो अन्यजातियाँ हैं। प्राकृतिक रूप से, यह कार्य उसी समय किया जाएगा जिस समय मेरा कार्य चुने हुओं के बीच किया जाएगा। जब मेरे लोग पृथ्वी पर शासन करेंगे और सामर्थ्य का उपयोग करेंगे तो यही वह दिन भी होगा कि पृथ्वी के सभी लोगों को जीत लिया गया है, और, इसके अतिरिक्त, यही वह समय होगा जब मैं विश्राम करूँगा—और केवल तभी मैं उन सबके सामने प्रकट होऊँगा जिन्हें जीता जा चुका है। मैं पवित्र राज्य पर प्रकट होता हूँ, और अपने आप को अपवित्र भूमि से छिपा लेता हूँ। वे सभी जिन्हें जीता जा चुका है और जो मेरे सामने आज्ञाकारी बन गए हैं अपनी आँखों से मेरे चेहरे को देखने में समर्थ हैं, और अपने कानों से मेरी आवाज़ को सुनने में समर्थ हैं। यह उन लोगों के लिए आशीष है जो अंत के दिनों में पैदा हुए हैं, यह मेरे द्वारा पहले से ही नियत किया गया आशीष है, और यह किसी भी मनुष्य के द्वारा अपरिवर्तनीय है। आज, मैं भविष्य के कार्य के वास्ते इस तरीके से कार्य करता हूँ। मेरा समस्त कार्य परस्पर-सम्बंधित है, इस सब में एक आह्वान और अनुक्रिया हैः कभी भी कोई कदम अचानक नहीं रुका है, और कभी भी किसी भी कदम को किसी भी अन्य कदम से स्वतन्त्र रूप से नहीं किया गया है। क्या यह ऐसा नहीं है? क्या अतीत का कार्य आज के कार्य की नींव नहीं है? क्या अतीत के वचन आज के वचनों के अग्रदूत नहीं हैं? क्या अतीत के कदम आज के कदमों के उद्गम नहीं है? जब मैं औपचारिक रूप से पुस्तक खोलता हूँ तो ऐसा तब होता है जब संपूर्ण ब्रह्माण्ड में लोगों को ताड़ना दी जाती है, जब दुनिया भर के लोगों को परीक्षणों के अधीन किया जाता है, और यह मेरे काम की पराकाष्ठा है; सभी लोग एक भूमि में प्रकाश के बिना रहते हैं, और सभी लोग अपने वातावरण के ख़तरे के बीच रहते हैं। दूसरे शब्दों में, यही वह जीवन है जिसे मनुष्य ने सृष्टि की उत्पत्ति के समय से आज के दिन तक कभी भी अनुभव नहीं किया है, और युगों भर में किसी ने भी इस प्रकार के जीवन का "आनन्द" नहीं लिया है, और इसलिए मैं कहता हूँ कि मैं ऐसा कार्य करता हूँ जैसा पहले कभी नहीं किया गया है। यह मामलों की सही स्थिति है, और यही आंतरिक अर्थ है। क्योंकि मेरा दिन समस्त मानवजाति के नज़दीक आता है, क्योंकि यह दूर प्रतीत नहीं होता है, परन्तु यह मनुष्य की आँखों के बिल्कुल सामने ही है, तो परिणामस्वरूप कौन भयभीत नहीं हो सकता है? और कौन इस में आनन्दित नहीं हो सकता है? बेबिलोन का गंदा शहर अंततः अपने अंत पर आ गया है; मनुष्य की मुलाकात एक बिलकुल नए संसार से हुई है, और स्वर्ग और पृथ्वी बदल दिए गए हैं और वे नवीकृत कर दिए गए हैं।
जब मैं सभी राष्ट्रों और सभी लोगों के सामने प्रकट होता हूँ, तो आसमान में सफेद बादल मन्थन करते हैं और मुझे ढक लेते हैं। इसलिए, पृथ्वी पर वातावरण को विशिष्ट रूप से दर्शाते हुए, पृथ्वी के पक्षी भी मेरे लिए आनन्द के साथ गाते और नृत्य करते हैं, और इस प्रकार पृथ्वी की सभी चीज़ों के लिए जागने, अब और "अवसाद" नहीं बल्कि इसके बजाए जीवन शक्ति से भरे हुए वातावरण के बीच रहने का कारण बनते हैं। जब मैं बादलों के बीच होता हूँ, तो मनुष्य अस्पष्ट रूप से ही मेरे चेहरे और मेरी आँखों को देखता है, और इस समय वह थोड़ा भयभीत महसूस करता है। अतीत में, उसने पौराणिक कथाओं में से मेरे बारे में ऐतिहासिक अभिलेखों को सुना था, और उसके परिणामस्वरूप वह मेरे प्रति केवल आधा विश्वासी और आधा संदिग्ध है। वह नहीं जानता है कि मैं कहाँ हूँ, या केवल मेरा चेहरा कितना बड़ा है—क्या यह समुद्र के समान विशाल है, या हरे चारागाहों जितना असीम है? कोई इन चीज़ों को नहीं जानता है। जब आज मनुष्य मेरा चेहरा बादलों में देखता है केवल तभी मनुष्य महसूस करता है कि पौराणिक कथा का मैं वास्तविक हूँ, और इसलिए वह मेरे प्रति थोडा अधिक अनुकूल हो जाता है, और यह केवल मेरे कर्मों के कारण है कि मेरे लिए उसकी प्रशंसा थोड़ी बढ़ जाती है। परन्तु मनुष्य अभी भी मुझे नहीं जानता है, और बादलों में केवल मेरा एक अंश ही देखता है। उसके बाद, मैं अपनी बाँहों को फैलाता हूँ और उन्हें मनुष्य को दिखाता हूँ। मनुष्य आश्चर्य चकित हो जाता है, और मेरे हाथों मार गिराए जाने से गहराई से भयभीत अचानक अपने हाथों को अपने मुहँ के ऊपर रख लेता है, और इसलिए वह अपनी प्रशंसा में थोड़ा आदर मिला देता है। मनुष्य मेरी हर हलचल के ऊपर अपनी आँखों को गड़ा देता है, और पूर्णतः डरा हुआ कि जब वह मुझ पर ध्यान नहीं दे रहा है तो वह मेरे द्वारा मार गिराया जाएगा—फिर भी मनुष्य के द्वारा देखे जाना मुझे प्रतिबन्धित नहीं करता है, और मैं अपने हाथों के कार्यों को करना जारी रखता हूँ। यह केवल उन सभी कर्मों में है जिन्हें मैं करता हूँ कि मनुष्य मेरे प्रति कुछ अनुकूल है, और इस प्रकार मेरे साथ सम्बद्ध होने के लिए धीरे-धीरे मेरे सामने आता है। जब मेरी सम्पूर्णता मनुष्य के सामने प्रकट होगी, तो मनुष्य मेरा चेहरा देखेगा, और उसके बाद से मैं मनुष्य से अपने आपको अब और नहीं छुपाऊँगा या अस्पष्ट करूँगा। संपूर्ण ब्रह्माण्ड में, मैं सभी लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट होऊँगा, और वे सभी जो लहू और माँस के हैं मेरे सभी कर्मों को देखेंगे। वे सभी जो आत्मा के हैं निश्चय ही मेरे घराने में शान्ति से रहेंगे, और वे निश्चित रूप से मेरे साथ-साथ अद्भुत आशीषों का आनन्द उठाएँगे। वे सभी जिनकी मैं परवाह करता हूँ निश्चित रूप से ताड़ना से बच निकलेंगे, और निश्चित रूप से आत्मा की पीड़ा और देह की यन्त्रणा से दूर रहेंगे। मैं सभी लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट होऊँगा और शासन करूँगा और सामर्थ्य का उपयोग करूँगा, ताकि लाशों की दुर्गन्ध संपूर्ण ब्रह्माण्ड में अब और न फैले; उसके बजाए, मेरी स्पष्ट सुगंध पूरे संसार में फैल जाएगी, क्योंकि मेरा दिन नज़दीक आ रहा है, मनुष्य जाग रहा है, पृथ्वी पर हर चीज़ व्यवस्थित है, और पृथ्वी के बचे रहने के दिन अब और नहीं हैं, क्योंकि मैं पहुँच गया हूँ!
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 29
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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मनुष्य का कार्य उसके अनुभव और उसकी मानवता के तात्पर्य को सूचित करता है। मनुष्य जो कुछ मुहैया कराता है और जो कार्य करता है, वह उसका...
मेरी बहुत-सी इच्छाएं हैं। मैं चाहता हूँ कि तुम लोग अपने आचरण को उपयुक्त और बेहतर बनाओ, अपने दायित्व पूरी निष्ठा से पूरे करो, तुम्हारे अंदर...