परमेश्वर के दैनिक वचन : जीवन में प्रवेश | अंश 394
परमेश्वर के प्रति अपने विश्वास में लोगों का सबसे बड़ा दोष यह है कि उनका विश्वास केवल शाब्दिक होता है, और परमेश्वर उनके रोजमर्रा के जीवन से...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
मेरी दया उन पर अभिव्यक्त होती है, जो मुझसे प्रेम करते हैं और स्वयं को नकारते हैं। इस बीच, दुष्टों को मिला दंड निश्चित रूप से मेरे धार्मिक स्वभाव का प्रमाण है, और उससे भी बढ़कर, मेरे क्रोध की गवाही है। जब आपदा आएगी, तो मेरा विरोध करने वाले सभी अकाल और महामारी के शिकार हो जाएँगे और विलाप करेंगे। जिन्होंने सभी तरह के दुष्टतापूर्ण कर्म किए हैं किंतु कई वर्षों तक मेरा अनुसरण किया है, वे अपने पापों का फल भुगतने से नहीं बचेंगे; वे भी लाखों वर्षों में कभी-कभार ही दिखने वाली आपदा में डुबा दिए जाएँगे, और वे लगातार आंतक और भय की स्थिति में जिएँगे। और मेरे वे अनुयायी, जिन्होंने मेरे प्रति निष्ठा दर्शाई है, मेरी शक्ति का आनंद लेंगे और उसका गुणगान करेंगे। वे अवर्णनीय तृप्ति का अनुभव करेंगे और ऐसे आनंद में रहेंगे, जो मैंने मानवजाति को पहले कभी प्रदान नहीं किया है। क्योंकि मैं मनुष्यों के अच्छे कर्मों को सँजोकर रखता हूँ और उनके बुरे कर्मों से घृणा करता हूँ। जबसे मैंने पहली बार मानवजाति की अगुआई करनी आरंभ की, तबसे मैं उत्सुकतापूर्वक मनुष्यों के ऐसे समूह को पाने की आशा करता रहा हूँ, जो मेरे साथ एकचित्त हों। इस बीच मैं उन लोगों को कभी नहीं भूलता, जो मेरे साथ एकचित्त नहीं हैं; अपने हृदय में मैं हमेशा उनसे घृणा करता हूँ, उन्हें प्रतिफल देने के अवसर की प्रतीक्षा करता हूँ, जिसे देखकर मुझे खुशी होगी। अब अंततः मेरा दिन आ गया है, और मुझे अब और प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है!
मेरा अंतिम कार्य केवल मनुष्यों को दंड देने के लिए ही नहीं है, बल्कि मनुष्य की मंजिल की व्यवस्था करने के लिए भी है। इससे भी अधिक, यह इसलिए है कि सभी लोग मेरे कर्म और कार्य स्वीकार करें। मैं चाहता हूँ कि हर एक मनुष्य देखे कि जो कुछ मैंने किया है, वह सही है, और जो कुछ मैंने किया है, वह मेरे स्वभाव की अभिव्यक्ति है। यह मनुष्य का कार्य नहीं है, और उसकी प्रकृति तो बिलकुल भी नहीं है, जिसने मानवजाति की रचना की है, यह तो मैं हूँ जो सृष्टि में हर जीव का पोषण करता है। मेरे अस्तित्व के बिना मानवजाति केवल नष्ट होगी और आपदा का दंड भोगेगी। कोई भी मानव फिर कभी सुंदर सूर्य और चंद्रमा या हरे-भरे संसार को नहीं देखेगा; मानवजाति केवल शीत रात्रि और मृत्यु की छाया की निर्मम घाटी देखेगी। मैं ही मानवजाति का एकमात्र उद्धार हूँ। मैं ही मानवजाति की एकमात्र आशा हूँ, और इससे भी बढ़कर, मैं ही वह हूँ जिस पर संपूर्ण मानवजाति का अस्तित्व निर्भर करता है। मेरे बिना मानवजाति तुरंत अवरुद्ध हो जाएगी। मेरे बिना मानवजाति तबाही झेलेगी और सभी प्रकार के भूतों द्वारा कुचली जाएगी, इसके बावजूद कोई मुझ पर ध्यान नहीं देता। मैंने वह काम किया है जो किसी दूसरे के द्वारा नहीं किया जा सकता, और मैं केवल यह आशा करता हूँ कि मनुष्य कुछ अच्छे कर्मों से मुझे प्रतिफल दे सके। यद्यपि कुछ ही लोग मुझे प्रतिफल दे पाए हैं, फिर भी मैं मनुष्यों के संसार में अपनी यात्रा पूरी करूँगा और प्रकटन के अपने कार्य का अगला कदम आरंभ करूँगा, क्योंकि इन अनेक वर्षों में मनुष्यों के बीच मेरे आने-जाने की सारी भागदौड़ फलदायक रही है, और मैं अति प्रसन्न हूँ। मैं जिस चीज की परवाह करता हूँ, वह मनुष्यों की संख्या नहीं, बल्कि उनके अच्छे कर्म हैं। किसी भी स्थिति में, मैं आशा करता हूँ कि तुम लोग अपनी मंजिल के लिए पर्याप्त अच्छे कर्म तैयार करोगे। तब मुझे संतुष्टि होगी; अन्यथा तुम लोगों में से कोई भी उस आपदा से नहीं बचेगा, जो तुम लोगों पर पड़ेगी। आपदा मेरे साथ उत्पन्न होती है और निश्चित रूप से मेरे द्वारा ही आयोजित की जाती है। यदि तुम लोग मेरी नजरों में अच्छे दिखाई नहीं दे सकते, तो तुम लोग आपदा भुगतने से नहीं बच सकते। गहरी पीड़ा के बीच तुम लोगों के कार्य और कर्म पूरी तरह से उचित नहीं माने गए, क्योंकि तुम लोगों का विश्वास और प्रेम खोखला था, और तुम लोगों ने स्वयं को केवल डरपोक या कठोर दिखाया। इस संबंध में, मैं केवल भले या बुरे का ही न्याय करूँगा। मेरी चिंता तुम लोगों में से प्रत्येक व्यक्ति के कार्य करने और अपने आप को व्यक्त करने के तरीके को लेकर बनी रहती है, जिसके आधार पर मैं तुम लोगों का अंत निर्धारित करूँगा। हालाँकि, मुझे यह स्पष्ट कर देना चाहिए : मैं उन लोगों पर अब और दया नहीं करूँगा, जिन्होंने गहरी पीड़ा के समय में मेरे प्रति रत्ती भर भी निष्ठा नहीं दिखाई, क्योंकि मेरी दया का विस्तार केवल इतनी दूर तक ही है। इसके अतिरिक्त, मुझे ऐसा कोई इंसान पसंद नहीं, जिसने कभी मेरे साथ विश्वासघात किया हो, और ऐसे लोगों के साथ जुड़ना तो मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं, जो अपने मित्रों के हितों को बेच देते हैं। चाहे जो भी व्यक्ति हो, मेरा यही स्वभाव है। मुझे तुम लोगों को बता देना चाहिए : जो कोई मेरा दिल तोड़ता है, उसे दूसरी बार मुझसे क्षमा प्राप्त नहीं होगी, और जो कोई मेरे प्रति निष्ठावान रहा है, वह सदैव मेरे हृदय में बना रहेगा।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, अपनी मंजिल के लिए पर्याप्त अच्छे कर्म तैयार करो
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