अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

recital-the-word-appears-in-the-flesh
अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

श्रेणियाँ

recital-latest-expression
वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

जब पूर्व से बिजली चमकती है—जो कि निश्चित रूप से वही क्षण भी होता है जब मैं बोलना आरम्भ करता हूँ—जिस क्षण बिजली प्रकट होती है, तो संपूर्ण नभमण्डल जगमगा उठता है, और सभी तारे रूपान्तरित होना शुरू कर देते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरी मानवजाति को उचित प्रकार से शुद्ध करने और काट-छाँट करने के अधीन कर दिया गया हो। पूर्व के प्रकाश की इस किरण के नीचे, समस्त मानवजाति को उसके मूल स्वरूप में प्रकट किया जाता है चुँधियाई आँखें, भ्रम में हक्के बक्के; अभी भी वे अपनी कुरूप मुखाकृति को छिपाने में कम समर्थ हैं। फिर, वे ऐसे पशुओं के समान हैं जो पहाड़ों की गुफाओं में शरण लेने के लिए मेरे प्रकाश से दूर भाग रहे हैं; फिर भी, उन में से एक को भी मेरे प्रकाश के भीतर से मिटाया नहीं जा सकता है। सभी मनुष्य दहशत और भय के शिकंजे में पड़े हैं और सभी प्रतीक्षा कर रहें हैं, सभी देख रहे हैं; मेरे प्रकाश के आगमन के साथ ही, सभी उस दिन का आनन्द मनाते हैं जब वे पैदा हुए थे, और उसी प्रकार सभी उस दिन को कोस रहे हैं जब वे पैदा हुए थे। परस्पर-विरोधी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना असंभव है; आत्म-दण्ड के आँसू नदियों का निर्माण करते हैं और व्यापक जल प्रवाह में बह जाते हैं और पलक झपकते ही बिना किसी निशान के चले जाते हैं। एक बार फिर, मेरा दिन मानवजाति के नज़दीक आ रहा है, एक बार फिर मानवजाति को जाग्रत कर रहा है और मानवता को एक स्थान दे रहा है जहाँ से एक नई शुरूआत की जाए। मेरा हृदय धड़कता है और, मेरे हृदय की धड़कन की लय का अनुसरण करते हुए पहाड़ आनन्द के लिए उछलते हैं और समुद्र खुशी से नृत्य करता है तथा लहरें समय-समय पर चट्टानी भित्तियों से टकराती हैं। जो मेरे हृदय में है उसे व्यक्त करना कठिन है। मैं चाहता हूँ कि सभी अशुद्ध चीज़ें मेरे घूरने से जलकर भस्म हो जाएँ। मैं चाहता हूँ कि अवज्ञा के सभी पुत्र मेरी नज़रों के सामने से ओझल हो जाएँ, और आगे से अस्तित्व में न मँडराते रहें। मैंने न केवल बड़े लाल अजगर के निवास स्थान में एक नई शुरूआत की है, बल्कि मैंने विश्व में एक नए कार्य की शुरूआत की है। शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य मेरा राज्य हो जाएँगे; शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य मेरे राज्य के कारण हमेशा के लिए समाप्त हो जाएँगे, क्योंकि मैंने पहले से ही विजय प्राप्त कर ली है, क्योंकि मैं विजयी लौटा हूँ। पृथ्वी पर मेरे कार्य को मिटा देने की आशा करते हुए, बड़े लाल अजगर ने मेरी योजना में गड़बड़ करने के लिए हर कल्पनीय साधन को समाप्त कर लिया है, लेकिन क्या मैं उसके छलपूर्ण षडयन्त्रों के कारण निराश हो सकता हूँ? क्या उसकी धमकियों के द्वारा मुझे भयभीत किया जा सकता है कि मैं अपना आत्मविश्वास खो दूँ? स्वर्ग या पृथ्वी पर कभी भी ऐसा एक भी प्राणी नहीं हुआ है जिसे मैं अपने हाथ की हथेली पर नहीं रखता हूँ; यह युक्ति जो कि मेरे लिए एक विषमता के रूप में कार्य करती है, बड़े लाल अजगर के बारे में कितनी अधिक सत्य है? क्या यह भी मेरे हाथों से छेड़छाड़ की जाने वाली एक वस्तु नहीं है?

मानव जगत में मेरे देहधारण के समय, मानवजाति मेरे मार्गदर्शन करने वाले हाथ की सहायता से अनिच्छापूर्वक इस दिन तक पहुँची, मुझे जानने के लिए अनिच्छापूर्वक आयी। लेकिन, जहाँ तक इसकी बात है कि जो मार्ग सामने है उस पर कैसे चला जाए, तो किसी को कोई आभास नहीं है, कोई नहीं जानता है, और किसी के पास कोई सुराग तो और भी कम है कि वह मार्ग उसे किस दिशा में ले जाएगा? जिस पर सर्वशक्तिमान निग़रानी रखेगा केवल वही मार्ग पर अंत तक चल पाने में समर्थ होगा; केवल पूर्व की चमकती हुई बिजली के मार्गदर्शन के द्वारा ही कोई मेरे राज्य की ओर ले जाने वाली दहलीज़ को पार करने में समर्थ होगा। मनुष्यों के बीच, ऐसा एक भी नहीं रहा है जिसने मेरे चेहरे को देखा है, ऐसा एक जिसने पूर्व की चमकती हुई बिजली को देखा है; कितना कम कोई एक है जिसने मेरे सिंहासन से निकलती हुई आवाज़ को सुना है? वास्तव में, प्राचीन काल से, एक भी मनुष्य सीधे मेरे व्यक्तित्व के सम्पर्क में नहीं आया है; केवल आज, जब मैं संसार में आ चुका हूँ, मनुष्यों के पास मुझे देखने का अवसर है। किन्तु यहाँ तक कि अब भी, मनुष्य अभी भी मुझे नहीं जानते हैं, बस ऐसे ही वे केवल मेरे चेहरे को देखते हैं और केवल मेरी आवाज़ को सुनते हैं, किन्तु बिना यह समझे हुए कि मेरे कहने का क्या अर्थ है। सभी मनुष्य इसी तरह के हैं। मेरे लोगों में से एक होने के नाते, जब तुम लोग मेरा चेहरा देखते हो, तो क्या तुम लोग बहुत ज़्यादा गर्व महसूस नहीं करते हो? और क्या तुम लोग भयानक शर्मिन्दगी महसूस नहीं करते हो क्योंकि तुम लोग मुझे नहीं जानते हो? मैं मनुष्यों के बीच चलता-फिरता हूँ, और मैं मनुष्यों के बीच रहता हूँ, क्योंकि मैं देह बन गया हूँ और मैं मानव जगत में आ गया हूँ। मेरा उद्देश्य मानवजाति को मात्र मेरी देह की देखभाल करने में सक्षम बनाना नहीं है; अधिक महत्वपूर्ण रूप से, यह मानवजाति को मुझे जानने में सक्षम बनाना है। और अधिक क्या, मैं अपनी देहधारी देह के माध्यम से मानवजाति को उसके पापों के बारे में दोषी ठहराऊँगा; मैं अपनी देहधारी देह के माध्मम से उस बड़े लाल अजगर को परास्त करूँगा और उसकी माँद को कुचल दूँगा।

यद्यपि मनुष्य जो पृथ्वी पर बसे हुए हैं वे तारों के समान अनगिनित हैं, फिर भी मैं उन सब को इतना स्पष्ट रूप से जानता हूँ जैसे मैं अपने हाथ की हथेली को देखता हूँ। और, यद्यपि ऐसे मनुष्य जो मुझ से "प्रेम" करते हैं वे भी समुद्र की रेत के कणों के समान अनगिनित हैं, फिर भी मैं थोड़े से लोगों को ही चुनता हूँ: केवल उन्हें जो चमकते हुए प्रकाश का अनुसरण करते हैं, और जो उन से अलग हैं जो मुझ से "प्रेम" करते हैं। मैं मनुष्य का अधिक आँकलन नहीं करता हूँ और न ही मैं उसे कम आँकता हूँ; बल्कि, मैं मनुष्य के नैसर्गिक गुणों के अनुसार उससे माँग करता हूँ, और इसलिए मैं उस तरह के मनुष्य की माँग करता हूँ जो ईमानदारी से मुझे खोजता है—यह मनुष्य को चुनने के मेरे लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए है। पहाड़ों में असंख्य जंगली जानवर हैं, किन्तु वे सभी मेरे सामने एक भेड़ के समान पालतू हैं; समुद्र की गहराईयों में अथाह रहस्य छिपे हुए हैं, किन्तु वे पृथ्वी की सतह की सभी चीज़ों के समान मेरे सामने स्पष्ट रूप से अपने आपको प्रस्तुत करते हैं; ऊपर नभमण्डल में ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ मनुष्य कभी नहीं पहुँच सकता है, फिर भी मैं उन अगम्य क्षेत्रों में स्वतन्त्र रूप से चलता-फिरता हूँ। मनुष्य ने प्रकाश में मुझे कभी नहीं पहचाना है, किन्तु सिर्फ अन्धकार के संसार में ही मुझे देखा है। क्या आज तुम लोग बिल्कुल इसी स्थिति में नहीं हो? यह बड़े लाल अजगर के हिंसात्मक व्यवहार की चरम सीमा का समय था कि मैंने अपने कार्य को करने के लिए विधिवत देह का वस्त्र धारण किया। यह तब था जब उस बड़े लाल अजगर ने पहली बार अपने असली रूप को प्रकट किया कि मैंने ही अपने नाम की गवाही दी। जब मैं मानवजाति के पथों पर चलता-फिरता था, तब एक भी प्राणी, एक भी व्यक्ति चौंक कर नहीं जागा था, और इसलिए जब मैं मानव जगत में देहधारण करता हूँ, तब किसी ने भी इसे नहीं जाना। किन्तु जब, अपनी देहधारी देह में, मैंने अपना कार्य करना आरम्भ किया, तब मानवजाति जाग उठी और मेरी गरजती हुई आवाज़ से अपने स्वप्नों से चौंक कर बाहर आकर गई, और इस क्षण से मेरे मार्गदर्शन के अधीन जीवन आरम्भ किया। अपने लोगों के बीच, मैंने एक बार फिर से नया कार्य आरम्भ कर दिया। यह कह कर कि मेरा कार्य पृथ्वी पर समाप्त नहीं हुआ, इस बात को साबित करने के लिए यह पर्याप्त है कि जिन लोगों से मैं पहले बातें करता था ये वे लोग नहीं हैं जिनके बारे में मैंने स्वयं महसूस किया था कि आवश्यकता थी, लेकिन तब भी मैं इन लोगों में से चुने हुए लोगों को अभी भी गिन रहा हूँ। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि मैं ऐसा न केवल अपने लोगों को देहधारी परमेश्वर को जानने में सक्षम बनाने के लिए करता हूँ, बल्कि अपने लोगों को शुद्ध करने के लिए भी करता हूँ। मेरी प्रशासनिक आज्ञाओं की कठोरता के कारण, लोगों का एक बहुत बड़ा भाग अभी भी मेरे द्वारा निष्कासित किए जाने के खतरे में है। जब तक तुम लोग स्वयं से निपटने के लिए, अपने शरीर को वश में लाने के लिए हर प्रकार का प्रयास नहीं करते हो, और जब तक तुम लोग ऐसा नहीं करते हो, तब तक तुम लोग निःसन्देह, नरक में फेंके जाने के लिए, एक ऐसी वस्तु बनोगे जिससे मैं घृणा करता हूँ और जिसे मैं अस्वीकार करता हूँ, ठीक वैसे ही जैसे पौलुस ने सीधे मेरे हाथों से ताड़ना प्राप्त की थी, जिससे बचने का कोई रास्ता नहीं था। क्या कदाचित् तुम लोगों ने मेरे वचनों में किसी चीज़ की खोज की है? पहले के समान, यह अभी भी मेरी इच्छा है कि मैं कलीसिया को शुद्ध करूँ, कि मैं उन लोगों को शुद्ध करता रहूँ जिनकी मुझे आवश्यकता है, क्योंकि मैं स्वंय वह परमेश्वर हूँ, जो पवित्र और निष्कलंक है। मैं अपने मन्दिर को न केवल इंद्रधनुष के रंगों से रंगबिरंगा बनाऊँगा, बल्कि इसकी बाहरी सजावट से मेल खाते हुए भीतरी सजावट के साथ, बेदाग ढंग से स्वच्छ बनाऊँगा। मेरी उपस्थिति में, तुम सब लोगों को इस बात पर फिर से विचार करना चाहिए कि तुम लोगों ने अतीत में क्या किया है, और निर्णय लेना चाहिए कि आज तुम लोग आज मेरे हृदय में संतुष्टि प्रदान करने के लिए संकल्प कर सकते हो या नहीं।

यह मात्र ऐसा नहीं है कि मनुष्य मुझे मेरी देह में नहीं जानता है; उस से भी निकृष्टतर यह है, कि वह अपनी स्वंय की अस्मिता को समझने में असफल हो गया है जो एक दैहिक शरीर में निवास करती है। कितने वर्षों से ऐसा रहा है, और इस पूरे समय में, मेरे साथ एक बाहरी मेहमान के रूप में व्यवहार करते हुए, मनुष्य ने मुझे धोखा दिया है। कितनी बार उन्होंने मुझे बाहर करके अपने घरों के दरवाज़ों को बन्द कर किया है? कितनी बार उन्होंने, मेरे सामने खड़े रह कर, मुझ पर कोई ध्यान नहीं दिया है? कितनी बार उन्होंने दूसरे मनुष्यों के बीच में मेरा परित्याग किया है? कितनी बार उन्होंने शैतान के सामने मेरा इनकार किया है? और कितनी बार उन्होंने अपने झगड़ालू मुँह से मुझ पर आक्रमण किया है? फिर भी मैं मनुष्य की कमज़ोरियों का हिसाब नहीं रखता हूँ और न ही मैं उसकी अवज्ञा के कारण उस से दाँत के बदले दाँत माँगता हूँ। मैंने जो कुछ भी किया है वह, उसकी लाइलाज बीमारी के उपचार के लिए, उसकी बीमारी के लिए दवा का प्रयोग करना है, जिससे उसका स्वास्थ्य पुनः बहाल हो जाए, ताकि वह आख़िरकार मुझे जान सके। क्या मैंने जो कुछ भी किया है वह मानवजाति के बचे रहने के वास्ते, मानवजाति को जीवन का एक अवसर देने के वास्ते नहीं रहा है? मैं कई बार मनुष्यों के संसार में आया, किन्तु मनुष्य ने, क्योंकि मैं अपने स्वंय के व्यक्तित्व में संसार में आया था, मुझे कोई सम्मान नहीं दिया; इसके बजाए, अपने स्वयं के लिए तरीका ढूँढ़ते हुए, प्रत्येक अपने अपने मामलों में भटकता रहा। वे बहुत कम जानते हैं कि स्वर्ग के नीचे हर एक मार्ग मेरे हाथों से ही आता है! वे बहुत कम जानते हैं कि स्वर्ग के नीचे हर चीज़ मेरे विधान के अधीन है! तुम लोगों में से कौन अपने हृदय में द्वेष को आश्रय देने का साहस कर सकता है? तुम लोगों में से कौन हल्के में समझौता करने का साहस कर सकता है? मैं मानवता के बीच बस खामोशी से अपना काम कर रहा हूँ, बस इतना ही है। यदि, मेरे देहधारण की अवधि के दौरान, मैंने मनुष्य की कमज़ोरी का ध्यान न रखा होता, तो संपूर्ण मानवजाति, एकमात्र मेरे देहधारण के कारण, भयभीत हो गई होती, और परिणामस्वरूप, अधोलोक में गिर गई होती। यह केवल इसलिए है क्योंकि मैंने अपने आपको विनम्र किया और छिपा लिया जिससे मानवजाति तबाही से बच गई, और मेरी ताड़ना से उसे उद्धार मिला, और इस तरह वह आज के दिन तक पहुँची है। इस बात से सचेत कि आज के दिन तक पहुँचना कितना कठिन था, क्या तुम लोगों को उस कल पर जो अभी आनेवाला है और भी अधिक मन नहीं रखना चाहिए?

8 मार्च 1992

अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है सात गर्जनाएँ – भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य के सुसमाचार पूरे ब्रह्माण्ड में फैल जाएंगे उद्धारकर्त्ता पहले से ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है जब तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा वे जो मसीह से असंगत हैं निश्चय ही परमेश्वर के विरोधी हैं बुलाए हुए बहुत हैं, परन्तु चुने हुए कुछ ही हैं तुम्हें मसीह की अनुकूलता में होने के तरीके की खोज करनी चाहिए मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है क्या तुम जानते हो? परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच एक बहुत बड़ा काम किया है केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है अपनी मंज़िल के लिए तुम्हें अच्छे कर्मों की पर्याप्तता की तैयारी करनी चाहिए तुम किस के प्रति वफादार हो? पृथ्वी के परमेश्वर को कैसे जानें परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है सर्वशक्तिमान का आह भरना तुम लोगों को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करने में अक्षम है विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए प्रतिज्ञाएं उनके लिए जो पूर्ण बनाए जा चुके हैं दुष्ट को दण्ड अवश्य दिया जाना चाहिए वास्तविकता को कैसे जानें परमेश्वर की इच्छा की समरसता में सेवा कैसे करें सहस्राब्दि राज्य आ चुका है तुम्हें पता होना चाहिए कि व्यावहारिक परमेश्वर ही स्वयं परमेश्वर है आज परमेश्वर के कार्य को जानना क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है? तुम्हें सत्य के लिए जीना चाहिए क्योंकि तुम्हें परमेश्वर में विश्वास है परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे राज्य का युग वचन का युग है भाग एक राज्य का युग वचन का युग ह भाग दो "सहस्राब्दि राज्य आ चुका है" के बारे में एक संक्षिप्त वार्ता वे सब जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग एक क्या त्रित्व का अस्तित्व है? भाग दो जब परमेश्वर की बात आती है, तो तुम्हारी समझ क्या होती है एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो? देहधारियों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है व्यवस्था के युग में कार्य छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग एक तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई भाग दो पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग एक पद नामों एवं पहचान के सम्बन्ध में भाग दो वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है? जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग दो देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग एक परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग दो परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम भाग तीन परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग दो) परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है (भाग एक) भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग एक भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग दो भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है भाग तीन परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग एक परमेश्वर द्वारा आवासित देह का सार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग एक परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग दो परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार भाग तीन स्वर्गिक परमपिता की इच्छा के प्रति आज्ञाकारिता ही मसीह का वास्तविक सार है मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग एक मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग दो मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक बेहतरीन मंज़िल पर ले चलना भाग तीन परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग एक परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सातवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - आठवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - नौवाँ कथन नये युग की आज्ञाएँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - ग्यारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेरहवाँ कथन दस प्रशासनिक आज्ञाएँ जिनका परमेश्वर के चयनित लोगों द्वारा राज्य के युग में पालन अवश्य किया जाना चाहिए क्या आप जाग उठे हैं? देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है भाग एक पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग एक क्या तुम परमेश्वर के एक सच्चे विश्वासी हो? केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बारहवाँ कथन तुझे अपने भविष्य मिशन से कैसे निपटना चाहिए "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन देहधारी परमेश्वर और परमेश्वर द्वारा उपयोग किए गए लोगों के बीच महत्वपूर्ण अंतर संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - दसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौदहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग छे: "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग पांच केवल वही जो परमेश्वर को जानते हैं, उसकी गवाही दे सकते हैं संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छठवाँ कथन एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता होना है पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग दो पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पन्द्रहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अठारहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्नीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - अट्ठाइसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्रहवाँ कथन "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग एक सफलता या असफलता उस पथ पर निर्भर होती है जिस पर मनुष्य चलता है भाग दो "कार्य और प्रवेश" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग दो "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग चार तीन चेतावनियाँ संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चौथा कथन परमेश्वर के स्वभाव को समझना अति महत्वपूर्ण है "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग तीन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सत्ताईसवाँ कथन "परमेश्वर के काम का दर्शन" पर परमेश्वर के वचन के तीन अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पाँचवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - पच्चीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - तेइसवाँ कथन "देहधारण का रहस्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - इक्कीसवाँ कथन सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है पतरस ने यीशु को कैसे जाना "जीतने वाले कार्य का भीतरी सत्य" पर परमेश्वर के वचन के चार अंशों से संकलन भाग दो भाग दो संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - चैबीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - छब्बीसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - बाईसवाँ कथन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - उन्तीसवाँ कथन

0खोज परिणाम