वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

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अंतिम दिनों के मसीह के कथन – संकलन

परमेश्वर का अधिकार (II)     भाग दो

एक मनुष्य के जीवन में छ: घटनाक्रम

अपने जीवन के पथक्रम में, हर एक व्यक्ति महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की एक श्रृंखला पर पहुँचता है। ये अत्याधिक बुनियादी, और अति महत्वपूर्ण कदम हैं जो जीवन में किसी व्यक्ति की नियति को निर्धारित करते हैं। जो कुछ नीचे दिया गया है वह इन मील के पत्थरों का एक संक्षिप्त विवरण है जिनसे होकर हर एक स्त्री या पुरुष को अपने जीवन के पथक्रम में गुज़रना होगा।

जन्म: पहला घटनाक्रम

जहाँ किसी व्यक्ति का जन्म होता है, जिस परिवार में उस स्त्री या पुरुष का जन्म होता है, उसका लिंग, रंग-रूप, जन्म का समय: ये किसी व्यक्ति के जीवन के प्रथम घटनाक्रम के विवरण हैं।

इस घटनाक्रम में इन भागों के विषय में किसी के भी पास कोई विकल्प नहीं है; उन सभी को सृष्टिकर्ता के द्वारा बहुत पहले से ही निर्धारित कर दिया जाता है। उन्हें किसी भी तरह से बाहरी वातावरण के द्वारा प्रभावित नहीं किया जाता है, और कोई मानव निर्मित कारक इन तथ्यों को बदल नहीं सकते हैं जिन्हें सृष्टिकर्ता ने पहले से निर्धारित किया है। क्योंकि किसी व्यक्ति के पैदा होने का अर्थ है कि सृष्टिकर्ता ने पहले से ही उसकी नियति के पहले कदम को पूरा कर लिया है जिसे उसने उस व्यक्ति के लिए इंतज़ाम किया है। क्योंकि उसने बहुत पहले से ही इन सभी विवरणों को पूर्वनिर्धारित कर दिया है, इसलिए किसी में भी उन में से किसी को भी पलटने की ताकत नहीं है। किसी मनुष्य की आगामी नियति के बावजूद भी, उसके जन्म की स्थितियां पूर्वनिर्धारित होती हैं, और जैसे वे हैं वैसी ही बनी रहती हैं; वे जीवन में उसकी नियति के द्वारा किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होती हैं, और न ही वे किसी भी तरह से सृष्टिकर्ता की संप्रभुता पर असर डालती हैं जो उसके ऊपर है।

1. सृष्टिकर्ता की योजनाओं के फलस्वरूप एक नए जीवन की उत्पत्ति हुई है

प्रथम घटनाक्रम के किन विवरणों को – किसी व्यक्ति के जन्म का स्थान, उसका परिवार, उसका लिंग, उसका रंग-रूप, उसके जन्म का समय – क्या मनुष्य चुनने में समर्थ होता है? स्पष्ट रूप से, किसी मनुष्य का जन्म एक अनिवारक घटना है: वह अनायास ही किसी निश्चित स्थान में, किसी निश्चित समय में, किसी निश्चित परिवार में, और किसी निश्चित शारीरिक रंग-रूप के साथ जन्म लेता है; वह अनायास ही किसी निश्चित घराने का सदस्य बन जाता है, और किसी निश्चित वंश वृक्ष का उत्तराधिकारी होता है। किसी मनुष्य के पास जीवन के इस प्रथम घटनाक्रम में कोई विकल्प नहीं होता है, किन्तु वह एक ऐसे वातावरण में जो सृष्टिकर्ता की योजना के अनुसार निश्चित होता है, एक विशेष परिवार में, एक विशेष लिंग एवं रंग-रूप के साथ, और एक विशेष समय पर जन्म लेता है जो घनिष्ठ रूप से उसकेजीवन के पथक्रम से जुड़ा होता है। कोई व्यक्ति इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम में क्या कर सकता है? सभी ने कहा है, किसी मनुष्य के पास उसके जन्म से सम्बन्धित इन विवरणों में से किसी एक के विषय में भी कोई विकल्प नहीं होता है। यद सृष्टिकर्ता का पूर्वनिर्धारण एवं उसका मार्गदर्शन नहीं होता, तो एक जीवन जिसने नए रूप में इस संसार में जन्म लिया है वह यह नहीं जानता कि कहाँ जाना है या कहाँ रहना है, उसके पास कोई रिश्ते नहीं होते, वह किसी से सम्बन्धित नहीं होता, और उसके पास कोई वास्तविक घर नहीं होता। किन्तु सृष्टिकर्ता के अत्यंत सतर्कता से किए गए इंतज़ामों के कारण, वह रहने के लिए एक स्थान, माता-पिता, एक स्थान जिससे वह सम्बन्धित होता है, और रिश्तेदारों के साथ अपने जीवन की यात्रा का आरम्भ करता है। इस प्रक्रिया के दौरान, इस नए जीवन के आगमन को सृष्टिकर्ता की योजनाओं के द्वारा निर्धारित किया जाता है, और हर एक चीज़ जिसे वह धारण करेगा उसे सृष्टिकर्ता के द्वारा उसे प्रदान किया जाएगा। स्वतन्त्र रूप से तैरती हुई एक देह से जिसका कोई नाम नहीं है वह धीरे धीरे मांस और लहू, दृश्यमान, स्पर्शगम्य मानव, और परमेश्वर की एक सृष्टि बन जाता है, जो सोचता, साँस लेता, और गर्माहट एवं ठण्ड का एहसास करता है, जो भौतिक संसार में सृजे गए प्राणियों की सभी सामान्य क्रियाकलापों में भाग ले सकता है, और जो उन सभी हालातों से होकर गुज़रेगा जिनका अनुभव सृजे गए मानव को जीवन में करना होगा। सृष्टिकर्ता के द्वारा किसी व्यक्ति के जन्म के पूर्वनिर्धारण का अर्थ है कि वह उस व्यक्ति को जीवित बचे रहने के लिए आवश्यक सभी चीज़ें प्रदान करेगा; और उसी प्रकार यह कि किसी व्यक्ति का जन्म हुआ है इसका अर्थ है कि वह सृष्टिकर्ता के द्वारा जीवित बचे रहने के लिए आवश्यक सभी चीज़ों को प्राप्त करेगा या करेगी, यह कि इस बिन्दु के आगे से वह किसी और रूप में जीवन बिताएगा या बिताएगी, जिसे सृष्टिकर्ता के द्वारा प्रदान किया गया है और जो सृष्टिकर्ता की संप्रभुता के अधीन है।

2. विभिन्न मानव विभिन्न परिस्थितियों के अंतर्गत जन्म क्यों लेते हैं

लोग अकसर यह कल्पना करना पसंद करते हैं कि यदि वे फिर से जन्म लेते, तो एक प्रसिद्ध परिवार में होते; यदि वे महिला होते, तो वे राजकुमारी के समान दिखते और हर एक के द्वारा उन्हें प्रेम किया जाता, और यदि वे पुरुष होते, तो वे सुन्दर राजकुमार होते, उन्हें कोई कमी नहीं होती, और पूरा संसार उनके आदेशों का पालन करने के लिए सदा तैयार रहता। प्रायः ऐसे लोग हैं जो अपने जन्म को लेकर बहुत सारे भ्रम के अधीन हैं और वे अक्सर इससे असंतुष्ट रहते हैं, और अपने परिवार, अपने रंग-रूप, अपने लिंग, और यहाँ तक कि अपने जन्म के समय से भी नाराज़ रहते हैं। फिर भी लोग कभी नहीं समझते हैं कि उनका जन्म एक विशिष्ट परिवार में क्यों हुआ है या वे इस प्रकार क्यों दिखते हैं। वे नहीं जानते हैं कि इसके बावजूद कि उन्होंने कहाँ जन्म लिया है या वे कैसे दिखते हैं, उन्हें विभिन्न भूमिकाएं अदा करनी हैं और सृष्टिकर्ता के प्रबंधन में विभिन्न मिशन को पूरा करना है – यह उद्देश्य कभी नहीं बदलेगा। सृष्टिकर्ता की नज़रों में, वह स्थान जहाँ किसी व्यक्ति का जन्म होता है, उसका लिंग, उसका रंग-रूप, वे सभी अल्पकालिक चीज़ें हैं। ये समूची मानवजाति के उसके प्रबंधन के प्रत्येक पहलू में अति सूक्ष्म बिन्दुओं, और छोटे छोटे संकेतों की एक श्रंखला है। और किसी व्यक्ति की वास्तविक मंज़िल और उसके अंत को किसी विशेष चरण में स्त्री या पुरुष के जन्म के द्वारा निर्धारित नहीं किया जाता है, किन्तु उस उद्देश्य के द्वारा निर्धारित किया जाता है जिसे स्त्री या पुरुष प्रत्येक जीवन में पूरा करते हैं, और उन पर किए गए सृष्टिकर्ता के न्याय के द्वारानिर्धारित किया जाता है जब उसकी प्रबंधकीय योजना पूरी हो जाती है।

ऐसा कहा जाता है कि प्रत्येक प्रभाव का एक कारण होता है, यह कि कोई भी प्रभाव बिना कारण के नहीं होता है। और इस प्रकार किसी व्यक्ति का जीवन आवश्यक रूप से उसके वर्तमान जीवन और उसके भूतपूर्व जीवन दोनों से जुड़ा हुआ होता है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु उनके जीवन की वर्तमान अवधि को समाप्त कर देती है, तो किसी व्यक्ति का जन्म एक नए चक्र की शुरुआत है; यदि पुराना चक्र किसी व्यक्ति के भूतपूर्व जीवन को दर्शाता है, तो नया चक्र स्वाभाविक रूप से उनका वर्तमान जीवन है। चूँकि किसी व्यक्ति का जन्म उसके भूतपूर्व जीवन साथ ही साथ उसके वर्तमान जीवन, स्थान, परिवार, लिंग, रंग-रूप, और अन्य ऐसे कारकों से जुड़ा हुआ है, जो उसके जन्म के साथ जुड़े हुए हैं, तो वे सभी आवश्यक रूप से उनसे सम्बन्धित हैं। इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति के जीवन के कारकों को न केवल उसके भूतपूर्व जीवन के द्वारा प्रभावित किया जाता है, बल्कि वर्तमान में उसकी नियति के द्वारा भी निर्धारित किया जाता है। यह विभिन्न प्रकार की अलग अलग परिस्थितियों को स्पष्ट करती है जिसके अंतर्गत लोगों का जन्म होता है; कुछ लोग गरीब परिवारों में जन्म लेते हैं, अन्य अमीर परिवारों में जन्म लेते हैं। अतः कुछ लोग सामान्य कुटुम्ब से हैं, और अन्य लोगों के पास प्रसिद्ध वंशावलियां हैं। कुछ लोगों ने दक्षिण में जन्म लिया है, और अन्य लोगों ने उत्तर में जन्म लिया है। कुछ लोगों ने रेगिस्तान में जन्म लिया है, और अन्य लोगों ने हरी-भरी भूमि में जन्म लिया है। कुछ लोगों के जन्म के साथ उल्लास, हंसी और उत्सव मनाया जाता है, और अन्य लोग आँसू, आपदा और दुःख लेकर आते हैं। कुछ लोगों का जन्म ख़ज़ाने की तरह संजोकर रखे जाने के लिए होता है, और अन्य लोगों को जंगली घास फूस की तरह अलग फेंक दिया जाता है। कुछ लोग सुन्दर नाक नक्शों के साथ जन्म लेते हैं, और अन्य लोग कुरूपता के साथ। कुछ लोग दिखने में सुन्दर होते हैं, और अन्य लोग भद्दे होते हैं। कुछ लोगों ने अर्धरात्रि में जन्म लिया है, और अन्य लोग दोपहर के सूर्य की चिलचिलाती गर्मी के नीचे पैदा हुए हैं। सभी प्रकार के लोगों के जन्म को नियति के द्वारा निर्धारित किया जाता है जिन्हें सृष्टिकर्ता ने उनके लिए सहेजकर रखा है; उनका जन्म वर्तमान जीवन में उनकी नियति को साथ ही साथ उन भूमिकाओं को जिन्हें वे अदा करेंगे और उस उद्देश्य को निर्धारित करता है जिन्हें वे पूरा करेंगे। यह सब कुछ सृष्टिकर्ता की संप्रभुता के अधीन है, और उसके द्वारा पहले से निर्धारित है; कोई भी अपने पूर्वनिर्धारित भाग्य से बच नहीं जा सकता है, कोई भी अपने जन्म की परिस्थितियों को[क] बदल नहीं सकता है, और कोई भी अपनी स्वयं की नियति को चुननहीं सकता है।

बढ़ना: दूसरा घटनाक्रम

यह इस बात पर निर्भर है कि उन्होंने किस प्रकार के परिवार में जन्म लिया है, लोग विभिन्न पारिवारिक वातावरणों में बढ़ते हैं और अपने माता पिता से अलग अलग पाठ सीखते हैं। यह उन स्थितियों को निर्धारित करता है जिसके अधीन कोई व्यक्ति वयस्क होता है, और उसका बड़ा होना[ख] किसी व्यक्ति के जीवन के दूसरे घटनाक्रम को दर्शाता है। यह कहने की कोई आवश्यकता नहीं है, कि लोगों के पास इस घटनाक्रम में भी कोई विकल्प नहीं होता है। यह भी तय, और पूर्वनियोजित है।

1. वे परिस्थितियाँ जिसके अधीन कोई व्यक्ति बढ़ता है उन्हें सृष्टिकर्ता के द्वारा तय किया जाता है

कोई व्यक्ति ऐसे लोगों या कारकों का चुनाव नहीं कर सकता है जिसकी मानसिकउन्नति एवं प्रभाव के अधीन वह बढ़ता है या बढ़ती है। कोई व्यक्ति यह चुनाव नहीं कर सकता है कि वह कौन सा ज्ञान या कुशलता हासिल करता है, और वह कौन सी आदतों को निर्मित करता है। कोई भी यह नहीं कह सकता है कि उसके माता पिता एवं सगे सम्बन्धी कौन होंगे, वह किस प्रकार के वातावरण में बढ़ेगा; लोगों, घटनाओं, और आस पास की चीज़ों के साथ किसी का रिश्ता, और वे किस प्रकार किसी के विकास को प्रभावित करते हैं, ये सब उसके नियन्त्रण से परे है। तो, इन चीज़ों का निर्णय कौन लेता है? कौन इनका इंतज़ाम करता है? चूंकि इस मामले में लोगों के पास कोई विकल्प नहीं है, चूंकि वे अपने आप के लिए इन चीज़ों का चुनाव नहीं कर सकते हैं, और चूंकि वे स्पष्ट रुप से स्वाभविक तौर पर विकसित नहीं होते हैं, तो यह बिलकुल साफ है कि इन सब चीज़ों की संरचना सृष्टिकर्ता के हाथों में होती है। ठीक वैसे ही जैसे सृष्टिकर्ता हर एक व्यक्ति के जन्म की विशेष परिस्थितियों का इंतज़ाम करता है, कहने की कोई आवश्कता नहीं है, वह विशिष्ट परिस्थितियों का भी इंतज़ाम करता है जिसके अधीन कोई व्यक्ति बढ़ता है। यदि किसी व्यक्ति का जन्म लोगों, घटनाओं, और उस स्त्री या पुरुष के आस पास की चीज़ों में परिवर्तन लाता है, तो उस व्यक्ति की वृद्धि एवं विकास आवश्यक रूप से उन्हें भी प्रभवित करेगी। उदाहरण के लिए, कुछ लोगों का जन्म गरीब परिवारों में होता है, किन्तु धन सम्पत्ति के साथ पलते बढ़ते हैं; अन्य लोग समृद्ध परिवारों में जन्म लेते हैं किन्तु अपने परिवारों के सौभाग्य का पतन कर देते हैं, कुछ इस तरह कि वे गरीब वातावरण में पलते बढ़ते हैं। किसी भी व्यक्ति के जन्म को निश्चित नियमों के द्वारा नियन्त्रित नहीं किया जाता है, और कोई भी व्यक्ति अनिवार्य, एवं परिस्थतियों की एक निश्चित श्रृंखला के अधीन बढ़ता नहीं है। ये ऐसी चीजें नहीं हैं जिनका कोई व्यक्ति अनुमान लगा सकता है या नियन्त्रण कर सकता है; ये उसकी नियति के परिणाम हैं, और इन्हें उसकी नियति के द्वारा निर्धारित किया जाता है। हाँ वास्तव में, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें सृष्टिकर्ता के द्वारा किसी व्यक्ति के भाग्य के लिए पूर्वनिर्धारित किया जाता है, उन्हें उस व्यक्ति की नियति के ऊपर सृष्टिकर्ता की संप्रभुता के द्वारा, और उसके लिए उसकी योजनाओं के द्वारा, निर्धारित किया जाता है।

2. ऐसी विभिन्न परिस्थितियाँ जिनके अधीन लोग पलते-बढ़ते हैं वे अलग अलग भूमिकाओं को जन्म देते हैं

किसी व्यक्ति के जन्म की परिस्थितियाँ उस वातावरण एवं उन परिस्थितियाँ को मूल स्तर पर स्थापित करती हैं जिसमें वे पलते-बढ़ते हैं, और वैसे ही ऐसी परिस्थितियाँ जिनमें कोई व्यक्ति बढ़ता है वे उस स्त्री एवं पुरुष के जन्म की परिस्थितियों का परिणाम हैं। इस समय के दौरान कोई व्यक्ति भाषा को सीखना प्रारम्भ कर देता है, और उसका मस्तिष्क अनेक नई चीज़ों का सामना एवं उनको आत्मसात करना प्रारम्भ कर देता है, इस प्रक्रिया में वह लगातार बढ़ता है। ऐसी चीज़ें जिन्हें कोई व्यक्ति अपने कानों से सुनता है, अपनी आँखों से देखता है, और अपने मस्तिष्क में ग्रहण करता है वे आहिस्ता आहिस्ता उसके भीतरी संसार को समृद्ध एवं जीवंत करते हैं। ऐसे लोग, घटनाएं, एवं चीज़ें जिनके सम्पर्क में कोई व्यक्ति आता है, वह सामान्य बुद्धि, ज्ञान, एवं कुशलताएं जिन्हें वह सीखता है, और सोचने के तरीके जिनके द्वारा वह प्रभावित होता है, मन में बैठाता है, या उसे सिखाया जाता है, वे सब जीवन में किसी व्यक्ति की नियति का मार्गदर्शन करते हैं एवं उसे प्रभावित करते हैं। जब कोई व्यक्ति बढ़ता है तो वह भाषा जिसे वह सीखता है और उसेक सोचने का तरीकाउस वातावरण से अविभाज्य होते हैं जिसमें वह अपनी किशोरावस्था को बिताता है, और वह वातावरण माता पिता, भाई बहन, एवं अन्य लोगों, घटनाओं, और उस स्त्री या पुरुष के आस पास की चीज़ों से मिलकर बना होता है। अतः किसी व्यक्ति के विकास के पथक्रम को उस वातावरण के द्वारा निर्धारित किया जाता है जिसमें कोई व्यक्ति पलता-बढ़ता है, और साथ ही लोगों, घटनाओं, और चीज़ों पर भी निर्भर होता है जिनके सम्पर्क में इस समय अवधि के दौरान कोई व्यक्ति आता है। चूँकि ऐसी स्थितियाँ जिनके अधीन कोई व्यक्ति पलता-बढ़ता है वे बहुत पहले से ही पूर्वनिर्धारित हैं, और वह वातावरण जिसमें कोई व्यक्ति इस प्रक्रिया के दौरान जीवन बिताता है वह भी, प्राकृतिक रूप से, पूर्वनिर्धारित है। इसे किसी व्यक्ति के चुनाव एवं प्राथमिकताओं के द्वारा निश्चित नहीं किया जाता है, किन्तु इसे सृष्टिकर्ता की योजनाओं के अनुसार निश्चित किया जाता है, सृष्टिकर्ता के सावधानी से किए गए इंतज़ामों के द्वारा, और जीवन में किसी व्यक्ति की नियति पर सृष्टिकर्ता की संप्रभुता के द्वारा निर्धारित किया जाता है। अतः ऐसे लोग जिनका सामना कोई व्यक्ति बढ़ने के पथक्रम में करता है, और ऐसी चीज़ें जिनके सम्पर्क में कोई व्यक्ति आता है, वे सभी अनिवार्य रूप से सृष्टिकर्ता के आयोजन एवं इंतज़ाम से जुड़े हुए हैं।लोग इस प्रकार के जटिल पारस्परिक सम्बन्धों को पहले से नहीं देख सकते हैं, और न ही वे उन्हें नियन्त्रित कर सकते हैं या उनकी थाह ले सकते हैं। बहुत सी अलग अलग चीज़ों एवं बहुत से अलग अलग लोगों का उस वातावरण पर प्रभाव होता है जिसमें कोई व्यक्ति पलता-बढ़ता है, और कोई मानव ऐसे विशाल सम्बन्धों के जाल का इंतज़ाम एवं आयोजन करने के योग्य नहीं है। सृष्टिकर्ता को छोड़ कोई व्यक्ति या चीज़ सब प्रकार के अलग अलग लोगों, घटनाओं, एवं चीज़ों के रंग-रूप, उपस्थिति, एवं उनके लुप्त होने को नियन्त्रित नहीं कर सकता है, और ये केवल सम्बन्धों के इतने विशाल जाल हैं जो किसी व्यक्ति के विकास को आकार देते हैं जैसा सृष्टिकर्ता के द्वारा पूर्वनिर्धारित किया जाता है, और विभिन्न प्रकार के वातावरण का निर्माण करते हैं जिनमें लोग पलते-बढ़ते हैं, तथा उन विभिन्न भूमिकाओं की रचना करते हैं जो सृष्टिकर्ता के प्रबंधन के कार्य के लिए, और लोगों के लिए ठोस एवं मज़बूत बुनियाद डालने हेतु आवश्यक होता है कि वे सफलतापूर्वक अपने अपने उद्देश्य को पूरा कर सकें।

वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें
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