परमेश्वर के दैनिक वचन : मंज़िलें और परिणाम | अंश 599
जो अपने सर्वथा अविश्वासी बच्चों और रिश्तेदारों को कलीसिया में खींचकर लाते हैं, वे बेहद स्वार्थी हैं और सिर्फ़ अपनी दयालुता का प्रदर्शन कर...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
अंत के दिन वे होते हैं जब सभी वस्तुएँ जीतने के द्वारा किस्म के अनुसार वर्गीकृत की जाएँगी। जीतना, अंत के दिनों का कार्य है; दूसरे शब्दों में, प्रत्येक व्यक्ति के पापों का न्याय करना, अंत के दिनों का कार्य है। अन्यथा, लोगों का वर्गीकरण किस प्रकार किया जाएगा? तुम सब में किया जाने वाला वर्गीकरण का कार्य सम्पूर्ण ब्रह्मांड में ऐसे कार्य का आरम्भ है। इसके पश्चात, समस्त देशों को और सभी लोगों में भी विजय-कार्य किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि सृष्टि में प्रत्येक व्यक्ति किस्म के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा, वह न्याय किए जाने के लिए न्याय के सिंहासन के समक्ष आएगा। कोई भी व्यक्ति और कोई भी वस्तु इस ताड़ना और न्याय को सहने से बच नहीं सकती और न ही कोई व्यक्ति और वस्तु ऐसी है जिसका किस्म के अनुसार वर्गीकरण नहीं किया जाता; प्रत्येक को वर्गीकृत किया जाएगा, क्योंकि समस्त वस्तुओं का अन्त निकट आ रहा है और जो भी स्वर्ग में और पृथ्वी पर है, वह अपने अंत पर पहुँच गया है। मनुष्य मानवीय अस्तित्व के अंतिम दिनों से कैसे बच सकता है? और इस प्रकार, तुम सब और कितनी देर तक अपनी अनाज्ञाकारिता के कार्य को जारी रख सकते हो? क्या तुम सब नहीं देखते कि तुम्हारे अन्तिम दिन सन्निकट हैं। वे जो परमेश्वर का सम्मान करते हैं और उसके प्रकट होने की प्रतीक्षा करते हैं, वे परमेश्वर की धार्मिकता के प्रकटन के दिन को कैसे नहीं देख सकते? वे नेकी के लिए अन्तिम पुरस्कार कैसे नहीं प्राप्त कर सकते? क्या तुम वह व्यक्ति हो, जो भला करता है या वह जो बुरा करता है? क्या तुम वह हो जो धार्मिक न्याय को स्वीकार करता है और फिर आज्ञापालन करता है या तुम वह हो जो धार्मिक न्याय को स्वीकार करता है फिर शापित किया जाता है? क्या तुम न्याय के सिंहासन के समक्ष प्रकाश में जीते हो या तुम अधोलोक के अन्धकार के बीच जीते हो? क्या तुम्हीं साफ तौर पर नहीं जानते हो कि तुम्हारा अंत पुरस्कार पाने का होगा या दंड? क्या तुम बहुत साफ तौर पर एवं गहराई से नहीं समझते हो कि परमेश्वर धार्मिक है? तो तुम्हारा आचरण और तुम्हारा हृदय किस प्रकार का है? आज जब मैं तुम्हें जीतता हूँ, तो क्या मुझे तुम्हें वास्तव में यह बताने की आवश्यकता है कि तुम्हारा आचरण भला है या बुरा? तुमने मेरे लिए कितना त्याग किया है? तुम मेरी आराधना कितनी गहराई से करते हो? क्या तुम स्वयं अच्छी तरह से नहीं जानते कि तुम मेरे प्रति कैसा व्यवहार करते हो? किसी और से ज़्यादा खुद तुम्हें अच्छी तरह ज्ञात होना चाहिए कि आखिरकार तुम्हारा अन्त क्या होगा! मैं तुम्हें सच कहता हूँ : मैंने ही मनुष्यजाति को सृजा है और मैंने ही तुम्हें सृजा है; परन्तु मैंने तुम लोगों को शैतान के हाथों में नहीं दिया; और न ही मैंने जानबूझकर तुम्हें अपने विरुद्ध किया या मेरा विरोध करने दिया और इस प्रकार तुम्हें दण्डित किया। क्या ये सब विपत्तियाँ और पीड़ाएँ तुमने इसलिए नहीं सहीं हैं, क्योंकि तुम्हारे हृदय अत्यधिक कठोर और तुम्हारा आचरण अत्यधिक घृणित है। अत:, क्या तुम सबने अपना अन्त स्वयं निर्धारित नहीं किया है? क्या तुम अपने हृदय में, इस बात को दूसरों से बेहतर नहीं जानते कि तुम सब का अंत कैसा होगा? मैं लोगों को इसलिए जीतता हूँ, क्योंकि मैं उन्हें प्रकट करना और तुम्हारा उद्धार करना चाहता हूँ। यह तुम से बुरा करवाने या जानबूझकर तुम्हें विनाश के नरक में ले जाने के लिए नहीं है। समय आने पर, तुम्हारी समस्त भयानक पीड़ाएँ, तुम्हारा रोना और दाँत पीसना—क्या यह सब तुम्हारे पापों के कारण नहीं होगा? इस प्रकार, क्या तुम्हारी अपनी भलाई या तुम्हारी अपनी बुराई ही तुम्हारा सर्वोत्तम न्याय नहीं है? क्या यह उसका सर्वोत्तम प्रमाण नहीं है कि तुम्हारा अन्त क्या होगा?
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, विजय के कार्य की आंतरिक सच्चाई (1)
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
जो अपने सर्वथा अविश्वासी बच्चों और रिश्तेदारों को कलीसिया में खींचकर लाते हैं, वे बेहद स्वार्थी हैं और सिर्फ़ अपनी दयालुता का प्रदर्शन कर...
परमेश्वर के वचनों को अपने जीवन के रूप में स्वीकार करने हेतु उसके समक्ष आने के लिए तुम्हें पहले उसके समक्ष शांत होना होगा। जब तुम परमेश्वर...
परमेश्वर का कोप न्याय की समस्त शक्तियों और समस्त सकारात्मक चीज़ों के लिए सुरक्षा-उपाय है (चुने हुए अंश) अपमान के प्रति परमेश्वर की...
अय्यूब अपने जन्म के दिन को कोसता है क्योंकि वह नहीं चाहता था कि उसके द्वारा परमेश्वर को तकलीफ हो मैं अकसर कहता हूँ कि परमेश्वर मनुष्य के...