सत्य को खोजने वाले सभी लोगों का हम से सम्पर्क करने का स्वागत करते हैं
परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 9परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 9 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 44परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 44 परमेश्वर के वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 5परमेश्वर के वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 5 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 53परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 53 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 34परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 34 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 33परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 33 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 29परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 29 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 38परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 38 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 17परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 17 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 20परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 20 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 15परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 15 परमेश्वर के वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 14परमेश्वर के वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 14 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 25परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 25 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 12परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 12 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 18परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 18 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 19परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 19 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 21परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 21 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 27परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 27 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 22परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 22 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 16परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 16 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 13परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 13 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 10परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 10 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 7परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 7 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 6परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 6 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 1परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 1 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 8परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 8 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 3परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 3 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 2परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 2 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 4परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है" | अंश 4 परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 24परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 24

परमेश्वर के वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 14

परमेश्वर के दैनिक वचन   0  

परिचय

परमेश्वर के वचन | "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" | अंश 14

मनुष्य के परिणाम को कौन निर्धारित करता है

एक और अत्यंत महत्वपूर्ण मामला है, और यह परमेश्वर के प्रति तेरी मनोवृत्ति है। यह मनोवृत्ति निर्णायक है! यह निर्धारित करती है कि अन्ततः तुम लोग विनाश की ओर जाओगे, या फिर एक सुन्दर मंज़िल की ओर जाओगे जिसे परमेश्वर ने तुम सब के लिए तैयार किया है। राज्य के युग में, परमेश्वर ने पहले से ही 20 से अधिक वर्षों से कार्य किया है, और इन 20 वर्षों के समयक्रम के दौरान कदाचित् तुम लोगों का हृदय अपने अपने प्रदर्शन को लेकर थोड़ा बहुत अनिश्चित रहा है। फिर भी, परमेश्वर के हृदय में, उसने तुम लोगों में से हर एक एवं प्रत्येक व्यक्ति का एक वास्तविक एवं सच्चा लिखित दस्तावेज़ बनाया है। शुरुआत में उस समय से लेकर जब हर एक व्यक्ति ने परमेश्वर का अनुसरण करना और उसके प्रचार को ध्यान से सुनना शुरू किया था, अधिक से अधिक सच्चाई को समझना शुरू किया था, उस समय तक जब उन्होंने अपने कर्तव्य को निभाया था—परमेश्वर के पास इन प्रदर्शनों में से हर एक एवं प्रत्येक प्रदर्शन का हिसाब है। जब कोई अपने कर्तव्य को निभाता है, जब उनका सामना सभी प्रकार की परिस्थितियों एवं सभी प्रकार की परीक्षाओं से होता है, तो उस व्यक्ति की मनोवृत्ति क्या होती है? वे किस प्रकार प्रदर्शन करते हैं? वे अपने हृदय में परमेश्वर के प्रति कैसा महसूस करते हैं? परमेश्वर के पास इन सभी का लेखा है और इन सबका हिसाब है? कदाचित् तुम लोगों के दृष्टिकोण से, ये मामले भ्रमित करनेवाले हैं। फिर भी, जहाँ परमेश्वर खड़ा है वहाँ से, वे सभी मामले बिलकुल स्पष्ट हैं, और लापरवाही का जरा सा भी संकेत नहीं है। यह ऐसा मामला है जो हर एक एवं प्रत्येक व्यक्ति के परिणाम को, और साथ ही उनकी नियति एवं भविष्य की संभावनाओं को सम्मिलित करता है। इससे भी बढ़कर, यह वह स्थान है जहाँ परमेश्वर अपने सभी श्रमसाध्य प्रयासों को खर्च करता है। इस प्रकार परमेश्वर हिम्मत नहीं करता है कि इसकी जरा सी भी उपेक्षा करे, और वह किसी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। शुरुआत से लेकर बिलकुल अन्त तक परमेश्वर मानवजाति के इस लेख को दर्ज कर रहा है, और मनुष्य जो परमेश्वर का अनुसरण कर रहा है उसके सम्पूर्ण पथक्रम के लेख को दर्ज कर रहा है। इस समय परमेश्वर के प्रति तेरी मनोवृत्ति तेरी नियति को तय करेगी। क्या यह सही नहीं है? अब, क्या तुम लोग विश्वास करते हो कि परमेश्वर धर्मी है? क्या परमेश्वर के कार्य उचित हैं? क्या तुम लोगों के दिमाग में अभी भी परमेश्वर की कोई दूसरी तस्वीर है? (नहीं।) फिर क्या तुम लोग कहते हो कि मनुष्य का परिणाम ऐसा है कि उसे परमेश्वर तय करता है या मनुष्य स्वयं तय करता है? (इसे परमेश्वर तय करता है।) वह कौन है जो उसे तय करता है? (परमेश्वर।) तुम लोग निश्चित नहीं हो, क्या तुम लोग हो? हांग कांग की कलीसियाओं के भाईयों एवं बहनों, बोलो—यह कौन तय करता है? (मनुष्य स्वयं इसे तय करता है।) मनुष्य स्वयं इसे तय करता है? तब क्या इस का अर्थ यह नहीं है कि इसका परमेश्वर के साथ कोई लेना देना नहीं है? कोरिया की कलीसियाओं की ओर से कौन बोलना चाहता है? (परमेश्वर मनुष्य के सभी कामों एवं कार्यों के आधार पर, और उस पथ के आधार पर जिस पर वे चलते हैं उनके परिणाम को निर्धारित करना चाहता है।) यह बिलकुल वस्तुनिष्ठ प्रत्युत्तर है। यहाँ एक तथ्य है जिसे मैं तुम सब को सूचित करना चाहता हूँ: परमेश्वर के उद्धार के कार्य के पथक्रम में, वह मनुष्य के लिए एक मानक (मानदण्ड) निश्चित करता है। यह मानक ऐसा है कि मनुष्य परमेश्वर के वचन का पालन कर सकता है, और परमेश्वर के मार्ग में चल सकता है? यही वह मानक है जिसे मनुष्य के परिणाम को तौलने के लिए उपयोग किया जाता है। यदि तू परमेश्वर के इस मानक के अनुसार अभ्यास करता है, तो तू एक अच्छा परिणाम प्राप्त कर सकता है; यदि तू नहीं करता है, तो तू एक अच्छा परिणाम नहीं प्राप्त कर सकता है। तब वह कौन है जिसके लिए तू कहता है कि वह इस परिणाम को तय करता है? यह केवल परमेश्वर ही नहीं है जो इसे तय करता है, परन्तु इसके बजाय परमेश्वर एवं मनुष्य साथ मिलकर तय करते हैं। क्या यह सही है? (हाँ।) ऐसा क्यों है? क्योंकि यह परमेश्वर ही है जो मानवजाति के उद्धार के कार्य में सक्रियता से शामिल होना चाहता है, और उसके लिए एक खूबसूरत मंज़िल को तैयार करना चाहता है; मनुष्य परमेश्वर के कार्य का लक्ष्य है, और यह परिणाम एवं यह मंज़िल ऐसा है जिसे परमेश्वर ने मनुष्य के लिए तैयार किया है। यदि उसके कार्य का कोई लक्ष्य नहीं होता, तो परमेश्वर को इस कार्य को करने की कोई आवश्यकता नहीं होती; यदि परमेश्वर ने इस कार्य को नहीं किया होता, तो मनुष्य के पास उद्धार पाने के लिए कोई अवसर नहीं होता। मनुष्य ही उद्धार का लक्ष्य है, और यद्यपि इस प्रक्रिया में मनुष्य निष्क्रिय पक्ष है, फिर भी इस पक्ष की मनोवृत्ति ही है जो यह निर्धारित करती है कि मानवजाति का उद्धार करने के अपने कार्य में परमेश्वर सफल होगा या नहीं? यदि वह मार्गदर्शन नहीं होता जिसे परमेश्वर तुझे देता है, तो तू उसके मानक को नहीं जान पाता, और तेरे पास कोई उद्देश्य नहीं होता। यदि तेरे पास यह मानक एवं यह लक्ष्य है, फिर भी तू सहयोग नहीं करता है, तू इसका अभ्यास नहीं करता है, तू वह दाम नहीं चुकाता है, तो तू अभी भी इस परिणाम को प्राप्त नहीं करेगा। इसीलिए हम कहते हैं कि इस परिणाम को परमेश्वर से अलग नहीं किया जा सकता है, और इसे मनुष्य से अलग नहीं किया जा सकता है। और अब तुम लोग जानते हो कि मनुष्य के परिणाम को कौन तय करता है।

— "परमेश्वर के स्वभाव और उसका कार्य जो परिणाम हासिल करेगा, उसे कैसे जानें" से उद्धृत

ऐप को निशुल्क डाउनलोड करें

बेहतरीन वीडियो परमेश्वर के कार्य को समझने में आपकी मदद करेंगे

ऐप को निशुल्क डाउनलोड करें

बेहतरीन वीडियो परमेश्वर के कार्य को समझने में आपकी मदद करेंगे

अन्य श्रृंखलाओं में नवीनतम वीडियो