Christian Song | लोगों को परमेश्वर के बारे में अपनी गलतफहमियों का समाधान कैसे करना चाहिए | 2026 प्रशंसा की आवाजें
18 जनवरी, 2026
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अगर लोग परमेश्वर के बारे में अपनी गलतफहमियों का समाधान करना चाहते हैं तो उन्हें अपने भ्रष्ट स्वभावों को जान लेना होगा और उन्होंने जो गलतियाँ की हैं उनका, जो घुमावदार रास्ते पकड़े हैं उनका और अपने अपराधों और लापरवाही का गहन-विश्लेषण करना चाहिए और इन्हें जान लेना चाहिए। सिर्फ इस तरह वे अपनी प्रकृति को साफ तौर पर देख पाएँगे और इसका ज्ञान प्राप्त कर पाएँगे। साथ ही उन्हें स्पष्ट रूप से यह देखना चाहिए कि वे क्यों गलत राह पकड़ते हैं और ऐसी बहुत-सी चीजें करते हैं जो सत्य सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं और इन क्रियाकलापों की प्रकृति क्या है। इसके अलावा उन्हें समझना चाहिए कि उनके लिए परमेश्वर के इरादे और माँगें ठीक-ठीक क्या हैं, वे क्यों परमेश्वर की माँगों के अनुरूप कार्य करने में हमेशा अक्षम रहते हैं और क्यों वे हमेशा उसके इरादों के विरुद्ध जाते हैं और जो जी में आए वह करते हैं।
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चूँकि तुमने ये अपराध किए हैं, तुम्हें अपने हृदय में स्पष्ट होना चाहिए कि तुम्हें अब क्या रवैया अपनाना है, परमेश्वर के समक्ष तुम्हें क्या हिसाब देना है और वह क्या देखना चाहता है। तुम्हें ये चीजें प्रार्थना और खोज के माध्यम से पता लगानी चाहिए; तब तुम जान पाओगे कि तुम्हें भविष्य में कैसे अनुसरण करना चाहिए और तब तुम अतीत में की गईं अपनी गलतियों से प्रभावित या बाधित नहीं होगे। तुम्हें आगे के मार्ग पर बढ़ना चाहिए और उचित रूप से अपना कर्तव्य करना चाहिए और अब खुद को निराशा के हवाले नहीं करना चाहिए; तुम्हें नकारात्मकता और गलतफहमी से पूरी तरह उबर जाना चाहिए।
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एक मायने में, अब अपना कर्तव्य निभाना अपने पिछले अपराधों और लापरवाही की भरपाई के लिए है; कम-से-कम यही वह मानसिकता है जो तुम्हारे पास होनी चाहिए। दूसरे मायने में, तुम्हें सकारात्मक और सक्रिय रूप से सहयोग करना होगा, तुम्हें जो कर्तव्य निभाना है उसे ठीक से निभाने के लिए और अपनी जिम्मेदारियों और दायित्वों को पूरा करने के लिए भरसक प्रयास करना होगा। यही वह चीज है जो एक सृजित प्राणी को करनी चाहिए। चाहे तुम परमेश्वर के बारे में कोई धारणा रखते हो या भ्रष्टता प्रकट करते हो या उसके स्वभाव को नाराज करते हो, तुम्हें इन सबका समाधान आत्म-चिंतन करके और सत्य खोजकर करना होगा। तुम्हें अपनी विफलताओं से सीखना चाहिए और नकारात्मकता की छाया से पूरी तरह उबर जाना चाहिए। एक बार जब तुम सत्य को समझ जाते हो और मुक्त हो जाते हो, किसी व्यक्ति, घटना या चीज से अब और बाधित नहीं होते हो तो तुम्हारे पास अपने आगे के मार्ग पर चलने की आस्था होगी।
—वचन, खंड 3, अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन, केवल सत्य का अनुसरण करने से ही परमेश्वर के बारे में अपनी धारणाओं और गलतफहमियों को दूर किया जा सकता है
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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