Hindi Christian Video | खोलें दिल की ज़ंजीरें | It's Such a Joy to Obey God's Arrangements

24 अक्टूबर, 2018

चन ज़ी एक बेहद गरीब किसान परिवार में पैदा हुए थे। स्कूल में पढ़ाये गये "ज्ञान आपकी नियति को बदल सकता है" और "आपकी नियति आपके अपने हाथ में है" के चलते, स्कूल में ये उनके आदर्श-वाक्य बन गये। उन्हें यकीन था कि जब तक वे लगातार कड़ी मेहनत करेंगे, वे दूसरे लोगों से एक कदम आगे रहेंगे, योग्यता और शोहरत हासिल करेंगे। विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद, चन ज़ी को विदेश व्यापार में एक अच्छे वेतनवाली नौकरी मिल गयी। लेकिन वे अपने मौजूदा हालातों से बिल्कुल भी खुश नहीं थे। दूसरों से एक कदम आगे रहने के अपने आदर्श को पाने के लिए, उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और खुद की ट्रेडिंग कंपनी खड़ी की। लेकिन अच्छा वक्त ज़्यादा दिन नहीं चला। परिचालन अच्छा न होने के कारण, ग्राहक कम हो गये, और कंपनी का व्यवसाय धीमा हो गया। अंत में, कंपनी चल नहीं पायी। कंपनी का व्यवसाय बंद हो जाने के बाद भी, चन ज़ी हार स्वीकार करने को बिल्कुल तैयार नहीं थे। उन्हें यकीन था कि अपनी खुद की अक्ल और काबिलियत के भरोसे जब तक वे मेहनत का पसीना बहायेंगे, वे अपना व्यवसाय फिर से खड़ा कर लेंगे। बाद में, चन ज़ी ने एक डिजिटल मार्केटिंग वेबसाइट चालू की और इंटरनेट पर सामान बेचने का कारोबार शुरू किया। कई सालों तक व्यस्तता के साथ खूब भाग-दौड़ करने के बाद भी वे फिर से कुछ हासिल नहीं कर पाये। चन ज़ी जबरदस्त हताशा और मायूसी में डूब गये....

2016 में, चन ज़ी का परिवार अमेरिका रहने चला गया। अपनी पत्नी की मदद से, उन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार कर लिया। परमेश्वर के वचनों को पढ़कर चन ज़ी आखिर यह समझ सके कि परमेश्वर मानवजाति की नियति पर नियंत्रण करते हैं, और मनुष्य अपनी खुद की काबिलियत के भरोसे अपने मुकद्दर को नहीं बदल सकता। उन्होंने मनुष्य के जीवनकाल में उसकी मुसीबतों के स्रोत के बारे में जाना, और यह भी समझा कि शैतान ने किस तरह से मानवजाति को भ्रष्ट कर दिया है। वे यह जान पाये कि अगर मनुष्य को एक सार्थक जीवन जीना है, तो उसे परमेश्वर की शरण में आना होगा, उसे परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना को स्वीकार करना होगा, ताकि शुद्धिकरण पा सके, और परमेश्वर के वचनों पर भरोसा करते हुए जीना होगा, तभी वह परमेश्वर की सराहना पा सकेगा। चन ज़ी ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में निहित कुछ सत्यों को समझ लिया, जीवन के बारे में सही नज़रिया अपनाया, अपनी पूरी ज़िंदगी परमेश्वर को सौंप दी, परमेश्वर के नियंत्रण और उनकी व्यवस्थाओं का पालन किया, और अंत में “किसी की नियति उसके खुद के हाथ में होती है” की ज़ंजीर से छूट गये, इस तरह उन्होंने सुकून और आज़ादी हासिल की। तब से वे जीवन के बेदाग़ और सही रास्ते पर चल पड़े।

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