परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर के कार्य को जानना | अंश 172
पवित्र आत्मा की मुख्य धारा में जो कार्य है वह पवित्र आत्मा का कार्य है, चाहे यह परमेश्वर का अपना कार्य हो या उपयोग किए जा रहे मनुष्यों का...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
जब से सर्वशक्तिमान परमेश्वर—राज्य के राजा—की गवाही दी गई है, तब से पूरे ब्रह्मांड में परमेश्वर के प्रबंधन का दायरा पूरी तरह खुलकर सामने आ गया है। परमेश्वर के प्रकटन की गवाही न केवल चीन में दी गई है, बल्कि सभी राष्ट्रों और सभी स्थानों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम की गवाही दी गई है। वे सभी इस पवित्र नाम को पुकार रहे हैं, किसी भी तरह से परमेश्वर के साथ सहभागिता करने का प्रयास कर रहे हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की इच्छा को समझ रहे हैं और कलीसिया में मिल कर सेवा कर रहे हैं। पवित्र आत्मा इसी अद्भुत तरीके से काम करता है।
विभिन्न राष्ट्रों की भाषाएँ एक दूसरे से अलग हैं लेकिन आत्मा एक ही है। यह आत्मा संसार भर की कलीसियाओं को जोड़ता है और बिना किसी भेदभाव के, परमेश्वर के साथ एक है, और इसमें कोई शक नहीं है। पवित्र आत्मा अब उन्हें पुकारता है और उसकी वाणी उन्हें जगाती है। यह परमेश्वर की दया की वाणी है। वे सब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पवित्र नाम को पुकार रहे हैं! वे स्तुति भी करते हैं और गाते भी हैं। पवित्र आत्मा के कार्य में कभी भी कोई चूक नहीं हो सकती : और सही मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए ये लोग किसी भी हद तक जाते हैं, वे पीछे नहीं हटते हैं—चमत्कारों पर चमत्कार होते रहते हैं। लोगों के लिए इसकी कल्पना करना भी मुश्किल होता है और इसका अनुमान लगाना उन्हें असंभव लगता है।
सर्वशक्तिमान परमेश्वर सारे ब्रह्मांड में जीवन का राजा है! वह महिमामय सिंहासन पर बैठता है और दुनिया का न्याय करता है, सभी पर वर्चस्व रखता है, और सभी राष्ट्रों पर शासन करता है; सभी लोग उसके सामने घुटने टेकते हैं, उससे प्रार्थना करते हैं, उसके करीब आते हैं और उसके साथ संवाद करते हैं। चाहे तुमने परमेश्वर में कितने भी लम्बे समय से विश्वास रखा हो, चाहे तुम्हारा रुतबा कितना भी ऊंचा हो या तुम्हारी वरिष्ठता कितनी भी अधिक हो, यदि तुम अपने दिल में परमेश्वर का विरोध करते हो तो तुम्हारा न्याय किया जाना चाहिए और तुम्हें परमेश्वर के सामने दंडवत होकर दर्द भरा अनुनय-विनय करना चाहिए; यह वास्तव में तुम्हारा अपने कर्मों के फल को भुगतना है। यह विलाप का स्वर अग्नि और गंध की झील में पीड़ा सहने का स्वर है, और यह परमेश्वर की लोहे की छड़ी से प्रताड़ित होने का क्रंदन है; यह मसीह के आसन के सामने किया गया न्याय है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, आरंभ में मसीह के कथन, अध्याय 8
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
पवित्र आत्मा की मुख्य धारा में जो कार्य है वह पवित्र आत्मा का कार्य है, चाहे यह परमेश्वर का अपना कार्य हो या उपयोग किए जा रहे मनुष्यों का...
मनुष्य की पारंपरिक धारणाओं में, परमेश्वर का प्रेम मनुष्य की निर्बलता के लिए उसका अनुग्रह, दया और सहानुभूति है। यद्यपि ये बातें भी...
परमेश्वर का भय मानने का आरंभिक बिन्दु उसके साथ परमेश्वर के समान व्यवहार करना है अभी थोड़ी देर पहले, किसी ने एक प्रश्न उठाया था : ऐसा कैसे...
कई हज़ारों सालों से, मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता के आगमन को देखने में सक्षम होने की लालसा की है। मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता यीशु को एक सफेद बादल पर...