परमेश्वर के दैनिक वचन : जीवन में प्रवेश | अंश 529
आदम और हव्वा जिन्हें परमेश्वर के द्वारा आदि में बनाया गया था वे पवित्र थे, दूसरे शब्दों में, जब वे अदन की वाटिका में थे तब वे पवित्र थे, और...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
परमेश्वर स्वयं सत्य है, उसके पास समस्त सत्य हैं। परमेश्वर सत्य का स्रोत है। प्रत्येक सकारात्मक वस्तु और प्रत्येक सत्य परमेश्वर से आता है। वह समस्त चीजों और घटनाओं के औचित्य एवं अनौचित्य के विषय में न्याय कर सकता है; वह उन चीजों का न्याय कर सकता है जो घट चुकी हैं, वे चीजें जो अब घटित हो रही हैं और भावी चीजें जो कि मनुष्य के लिए अभी अज्ञात हैं। परमेश्वर सभी चीजों के औचित्य एवं अनौचित्य के विषय में न्याय करने वाला एकमात्र न्यायाधीश है, और इसका तात्पर्य यह है कि सभी चीजों के औचित्य एवं अनौचित्य के विषय में केवल परमेश्वर द्वारा ही निर्णय किया जा सकता है। वह सभी चीजों की कसौटी जानता है। वह किसी भी समय और स्थान पर सत्य को व्यक्त कर सकता है। परमेश्वर सत्य का प्रतिरूप है, जिसका आशय यह है कि वह स्वयं सत्य के सार से युक्त है। भले ही मनुष्य अनेक सत्यों को समझता हो और परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाया गया हो, फिर भी क्या उसका सत्य के प्रतिरूप से कुछ लेना-देना होता? नहीं। यह सुनिश्चित है। जब मनुष्य को पूर्ण बनाया जाता है, परमेश्वर के वर्तमान कार्य और परमेश्वर द्वारा मनुष्य से अपेक्षित बहुत-से मानकों के बारे में, तो वे अभ्यास की सही परख और अभ्यास के तरीकों के बारे में जान सकेंगे, और वे परमेश्वर के इरादों को पूरी तरह से समझ सकेंगे। वे यह अंतर कर सकते हैं कि कौन-सी चीज परमेश्वर से और कौन-सी चीज मनुष्य से आती है, कि क्या सही है और क्या गलत है। पर फिर भी कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो मनुष्य की पहुँच से दूर और असपष्ट रहती हैं, जिन्हें परमेश्वर द्वारा बताए जाने के बाद ही वह जान सकता है। क्या मनुष्य ऐसी चीजों को जान सकता है या उनके बारे में भविष्यवाणी कर सकता है जो परमेश्वर ने उसे अभी नहीं बताई हैं? बिल्कुल नहीं। इसके अतिरिक्त, यदि मनुष्य परमेश्वर से सत्य को प्राप्त कर भी ले, और उसके पास सत्य वास्तविकता हो और उसे बहुत से सत्यों के सार का ज्ञान हो, और उसके पास गलत सही को पहचानने की क्षमता हो, तब क्या उसमें सभी चीजों पर नियंत्रण व शासन करने की क्षमता आ जाएगी? उनमें यह क्षमता नहीं होगी। परमेश्वर और मनुष्य में यही अंतर है। सृजित प्राणी केवल सत्य के स्रोत से ही सत्य को प्राप्त कर सकते हैं। क्या वे मनुष्य से सत्य प्राप्त कर सकते हैं? क्या मनुष्य सत्य है? क्या मनुष्य सत्य प्रदान कर सकता है? वह ऐसा नहीं कर सकता और बस यहीं पर अंतर है। तुम केवल सत्य ग्रहण कर सकते हो, इसे प्रदान नहीं कर सकते। क्या तुम्हें सत्यधारी व्यक्ति कहा जा सकता है? क्या तुम्हें सत्य का प्रतिरूप कहा जा सकता है? बिल्कुल नहीं। सत्य का प्रतिरूप होने का वास्तव में क्या सार है? यह सत्य प्रदान करने वाला स्रोत है, सभी चीजों पर शासन और प्रभुता का स्रोत, और इसके अलावा यह वह एकमात्र कसौटी और मानक है जिसके अनुसार सभी चीजों और घटनाओं का आकलन किया जाता है। यही सत्य का प्रतिरूप है।
—वचन, खंड 4, मसीह-विरोधियों को उजागर करना, मद आठ : वे दूसरों से केवल अपने प्रति समर्पण करवाएँगे, सत्य या परमेश्वर के प्रति नहीं (भाग तीन)
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
आदम और हव्वा जिन्हें परमेश्वर के द्वारा आदि में बनाया गया था वे पवित्र थे, दूसरे शब्दों में, जब वे अदन की वाटिका में थे तब वे पवित्र थे, और...
मानवजाति की सृष्टि करने के समय से ही परमेश्वर अपना कार्य करता रहा है। शुरूआत में, कार्य बहुत साधारण था, लेकिन फिर भी, इसमें अभी भी परमेश्वर...
सत्य की अपनी अभिव्यक्ति में परमेश्वर अपने स्वभाव और सार को व्यक्त करता है; सत्य की उसकी अभिव्यक्ति लोगों द्वारा विश्वास की जाने वाली उन...
यहाँ तक कि जिस मनुष्य का पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग किया जाता है, वह भी स्वयं परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। इतना ही नहीं कि ऐसा...