Hindi Christian Testimony Video, एपिसोड 679: मेजबानी का कर्तव्य निभाने का मेरा समय
24 मई, 2026
पाठ आधारित कर्तव्यों से बरखास्त किए जाने के बाद कलीसिया ने उसके लिए मेजबानी करने की व्यवस्था की। उसे यह स्वीकार करना कठिन लगा, उसका मानना था कि मेजबानी का कर्तव्य कुछ खास नहीं है, यह सिर्फ शारीरिक श्रम है, जबकि पाठ आधारित कर्तव्य मानसिक श्रम है जो काबिलियत और प्रतिभा वाले लोगों द्वारा किया जाता है। उसे लगा कि मेजबानी करने से वह हीन हो गई है इसलिए वह प्रतिरोधी, नकारात्मक और लापरवाह हो गई। अपने गलत दृष्टिकोण को सुधारने के लिए उसने सत्य की खोज कैसे की? क्या कर्तव्यों में वाकई कोई ऊँच-नीच, या श्रेष्ठ और तुच्छ का भेद होता है? परमेश्वर किसी व्यक्ति की पहचान और मूल्य को कैसे देखता है?
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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