सत्य का अनुसरण कैसे करें (16) भाग दो

II. उचित-अनुचित का भेद पहचानना और यह जानना कि क्या सही है और क्या गलत

हम मानवता के दो महत्वपूर्ण अंशों—जमीर और विवेक—के बारे में और विस्तार से नहीं बताएँगे। आओ, दो दूसरे सबसे विशिष्ट पहलुओं के बारे में बात करें जिन्हें सबसे आसानी से अनदेखा किया जाता है या जिनके बारे में लोगों को कभी जानकारी ही नहीं रही है। अगर हम सिर्फ यह कहें कि किसी व्यक्ति में मानवता का जमीर और विवेक है तो यह लोगों को अपेक्षाकृत सामान्य लगता है और यह निर्धारित करना बहुत मुश्किल होगा कि किसी व्यक्ति ने ऐसी क्या चीजें की हैं या उसमें ऐसी कौन-सी अभिव्यक्तियाँ हैं जो दर्शाती हैं कि उसके पास सही मायने में जमीर और विवेक है और यह आकलन करना मुश्किल होगा कि क्या उसके पास सही मायने में सामान्य मानवता है। इसलिए, हम जमीर और विवेक की विशिष्ट अभिव्यक्तियों के नजरिए से नहीं, बल्कि दो दूसरे पहलुओं से संगति करेंगे। यानी, अगर किसी व्यक्ति में मानवता का सार है तो एक बात तो यह है कि वह उचित-अनुचित का भेद पहचान सकता है और इसके अतिरिक्त, वह यह भी जानता है कि क्या सही है और क्या गलत। किसी व्यक्ति में ये दोनों पहलू हैं या नहीं यह बात यह दर्शाने के लिए पर्याप्त है कि उसमें जमीर और विवेक है या नहीं। यह चीज इस बात का गहन-विश्लेषण करने का एक ज्यादा विशिष्ट तरीका है कि किसी की मानवता में जमीर और विवेक है या नहीं। जब किसी व्यक्ति में ये दोनों पहलू—उचित-अनुचित का भेद पहचानना और जानना कि क्या सही है और क्या गलत—होते हैं, सिर्फ तभी यह सही मायने में दर्शाता है कि उसमें मानवता का जमीर और विवेक है। अगर उसमें ये दोनों पहलू नहीं हैं तो जमीर और विवेक होने का उसका दावा झूठा है और यह तथ्यों के हिसाब से नहीं है। आओ, सबसे पहले उचित-अनुचित का भेद पहचानने में समर्थ होने को देखें। “भेद पहचानने” का मतलब है समझना, जानना, जागरूक होना और बूझना। “उचित-अनुचित” का क्या मतलब है? उचित और अनुचित का मतलब सकारात्मक चीजें और नकारात्मक चीजें हैं। तो फिर यह जानने का क्या मतलब है कि क्या सही है और क्या गलत? उदाहरण के लिए, “मानवजाति को परमेश्वर ने बनाया है।” क्या यह कथन सही है या गलत? (यह सही है।) “मानवजाति वानरों से विकसित हुई है।” क्या यह कथन सही है या गलत? (गलत।) अगर तुम यह भेद पहचान सकते हो और यह फैसला ले सकते हो कि कौन-से विचार सही हैं और कौन-से गलत, तो यह इस बात को जानना है कि क्या सही है और क्या गलत। दानव कहते हैं, “मानवजाति वानरों से विकसित हुई है।” यह सुनकर तुम कहते हो, “यह सही नहीं है। मानवजाति को परमेश्वर ने बनाया है।” तो फिर इस मामले में तुम भ्रमित नहीं हो और तुम जानते हो कि क्या सही है और क्या गलत। तो फिर क्या सही-गलत और उचित-अनुचित में कोई अंतर है? (हाँ।) “परमेश्वर सारी मानवजाति के भाग्य पर संप्रभु है।” क्या यह कथन सही है या गलत? (यह सही है।) “मानवजाति अपने भाग्य का नियंत्रण खुद करती है।” क्या यह कथन सही है या गलत? (गलत।) “कोई व्यक्ति कितना लंबा जीवन जीता है यह इस पर निर्भर करता है कि कैसे वह अपना ध्यान रखता है और स्वस्थ रहता है।” क्या यह कथन सही है या गलत? (गलत।) “किसी व्यक्ति का जीवनकाल परमेश्वर द्वारा नियत होता है।” यह सही है या गलत? (सही है।) अब तुम जानते हो कि यह जानने का क्या मतलब है कि क्या सही है और क्या गलत, है ना? (हाँ।) तो फिर आओ, उचित-अनुचित का भेद पहचानने को देखें। हमने अभी-अभी क्या कहा कि “उचित-अनुचित” का क्या मतलब है? (सकारात्मक चीजें और नकारात्मक चीजें।) उदाहरण के लिए, ईमानदार व्यक्ति होना—क्या यह सकारात्मक चीज है या नकारात्मक चीज है? (सकारात्मक चीज है।) “दुनिया पैसों के इशारों पर नाचती है” के बारे में क्या कहते हो? (वह नकारात्मक चीज है।) दूसरा उदाहरण कौन दे सकता है? (लोगों के लिए परमेश्वर की आराधना करना पूरी तरह से स्वाभाविक और न्यायोचित है। यह सकारात्मक चीज है।) तो फिर अगरबत्ती जलाना और बुद्ध की आराधना करना क्या है? (यह नकारात्मक चीज है।) चीजें करने में सत्य की खोज करना। (यह सकारात्मक चीज है।) व्यक्ति का अपनी खुद की इच्छा का अनुसरण करना और वह जो कुछ भी करता है उसमें एकतरफा फैसले लेना। (यह नकारात्मक चीज है।) तुम जानते हो कि कौन-सी चीज सकारात्मक है और कौन-सी नकारात्मक है, और तुम यह भी फैसला कर सकते हो कि कौन-से विचार सही हैं और कौन-से गलत—इसे उचित-अनुचित का भेद पहचानने में समर्थ होना और यह जानना कहा जाता है कि क्या सही है और क्या गलत। यह अंतर्दृष्टि और समझ होना और अपने दिल में इन चीजों का भेद पहचानने की क्षमता होना—यह दर्शाता है कि तुम मानवता के गुण वाले व्यक्ति हो। उचित-अनुचित का भेद पहचानने और यह जानने में कि क्या सही है और क्या गलत, समर्थ होने का मतलब है कि व्यक्ति की मानवता के भीतर कुछ सकारात्मक और नकारात्मक चीजों की पहचान करने की जन्मजात क्षमता है। इसके अतिरिक्त, उसके दिल में इस बात को लेकर कुछ जागरूकता और भावना भी है कि कुछ चीजें सही हैं या नहीं। यहाँ तक कि सत्य सुने या समझे बिना भी उसकी मानवता में, भेद पहचानने की इस प्रकार की क्षमता होती है। भले ही वह इसे स्पष्ट रूप से नहीं कह सकता हो, फिर भी वह अपने दिल में जानता है कि कौन-सी चीजें सकारात्मक हैं और कौन-सी नकारात्मक हैं और वह जानता है कि नकारात्मक चीजें गलत होती हैं। अगर उसके दिल में नफरत की भावना भी है और वह इन चीजों को अस्वीकार कर सकता है और उसके लिए इनका पालन नहीं करना संभव है तो यह और भी बेहतर है। जब वह सत्य नहीं समझता तब भी, भले ही वह सकारात्मक और नकारात्मक चीजों के बीच का भेद स्पष्ट रूप से न पहचान सके, उसके दिल में सकारात्मक और नकारात्मक चीजों के प्रति अलग-अलग भावनाएँ होती हैं और उनसे पेश आने के अलग-अलग तरीके होते हैं। उदाहरण के लिए, समाज में कुछ बुरी प्रवृत्तियों के संबंध में, जब मानवता वाले लोग इन बुरी प्रवृत्तियों को देखते हैं तब वे अपने दिलों में गहरी नफरत महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि ये चीजें सही मार्ग नहीं हैं, सकारात्मक चीजें नहीं हैं और न ही ऐसी चीजें हैं जिनका लोगों को अनुसरण करना चाहिए या जिन्हें उन्हें करना चाहिए। इस तथ्य के बावजूद कि इस सामाजिक परिवेश में रहने वाले व्यक्ति के रूप में उनके पास बुरी प्रवृत्तियों का अनुसरण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, वे दिल की गहराइयों में उन्हें घटिया समझते हैं। और उन्हें घटिया समझते हुए वे इस परिवेश से भाग निकलने का हर अवसर तलाशते हैं या इन बुरी प्रवृत्तियों से बचने और इन्हें अस्वीकार करने के हर संभव तरीके सोचते हैं।

क. उचित-अनुचित का भेद पहचानना

एक व्यक्ति के लिए उचित-अनुचित का भेद पहचानना बहुत महत्वपूर्ण है। चूँकि उचित-अनुचित में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों चीजें शामिल होती हैं, तो तुम लोगों के विचार से कुछ सकारात्मक चीजें कौन-सी हैं और कुछ नकारात्मक चीजें कौन-सी हैं? (परमेश्वर में विश्वास रखना, परमेश्वर का अनुसरण करना, परमेश्वर की आराधना करना, परमेश्वर के प्रति समर्पण करना और साथ ही अपना कर्तव्य करना और ईमानदार व्यक्ति होना—ये सभी सकारात्मक चीजें हैं। झूठ बोलना और धोखा देना, परमेश्वर का प्रतिरोध करना, परमेश्वर के खिलाफ विद्रोह करना, परमेश्वर से विश्वासघात करना—ये नकारात्मक चीजें हैं।) (सकारात्मक चीजें मुख्य रूप से परमेश्वर से आती हैं और सत्य के अनुरूप होती हैं। उदाहरण के लिए, परमेश्वर के कार्य द्वारा प्राप्त विभिन्न नतीजे और साथ ही लोगों का परमेश्वर के स्वभाव और सार का सच्चा ज्ञान, ये सभी सकारात्मक चीजें हैं और ये सभी सत्य के अनुरूप हैं।) सकारात्मक चीजों को बहुत खोखला या बहुत उदात्त मत समझो। वास्तव में, सकारात्मक चीजें वे विभिन्न सकारात्मक और सही लोग, घटनाएँ और चीजें हैं जो लोगों के लिए फायदेमंद हैं। ऐसी कोई भी चीज जो लोगों के लिए फायदेमंद है, ऐसी कोई भी चीज जो उनके सामान्य जीवन के लिए फायदेमंद है और हानिकारक नहीं है, सकारात्मक चीज है। उदाहरण के लिए, क्या प्राकृतिक नियम और कानून सकारात्मक चीजें हैं? (हाँ।) परमेश्वर के सभी वचन सत्य हैं और सकारात्मक चीजें हैं; ऐसी कोई भी चीज जिसमें सत्य शामिल है, सकारात्मक चीज है। परमेश्वर द्वारा मानवजाति को जीवन और सत्य का प्रावधान, और साथ ही मानवजाति का प्रबंध करने और उसे बचाने के परमेश्वर के कार्य की विषय-वस्तु ऐसी सकारात्मक चीजें हैं जो सत्य से संबंधित हैं। लोगों से परमेश्वर की सभी अपेक्षाएँ, परमेश्वर का हरेक वचन, विभिन्न सत्यों के अभ्यास के सिद्धांत—ये सभी सकारात्मक चीजें हैं। परमेश्वर द्वारा मानवजाति का प्रबंध करने के कार्य के अलावा ऐसी कई दूसरी सकारात्मक चीजें भी हैं जो मानव उत्तरजीविता के लिए फायदेमंद हैं और लोगों के लिए नुकसानदायक नहीं हैं। क्या तुम लोग उन्हें देख सकते हो? क्या तुम उन्हें पहचान सकते हो? क्या तुम उन्हें अपने दिलों की गहराइयों से स्वीकार सकते हो और उनका अनुमोदन कर सकते हो? क्या तुम उनके साथ चल सकते हो, उनके अनुसार खुद को ढाल सकते हो और उनका अनुसरण कर सकते हो? उदाहरण के लिए, क्या चार ऋतुओं के नियम सकारात्मक चीजें हैं? (हाँ।) वसंत ऋतु में मौसम गर्म हो जाता है और फूल खिलते हैं, सभी चीजें उगती हैं और पुनर्जीवित होती हैं, बर्फ और हिम पिघलते हैं। क्या यह एक सकारात्मक चीज है? (हाँ।) गर्मियों में सूरज तेज चमकता है, उसकी किरणें झुलसा देने वाली होती हैं और सभी चीजें तेजी से बढ़ती हैं और धूप सेंकती हैं। क्या यह एक सकारात्मक चीज है? (हाँ।) शरद ऋतु में झुलसा देने वाली गर्मी की जगह धीरे-धीरे साफ आसमान और ठंडी हवा ले लेती है; विभिन्न पौधे धीरे-धीरे परिपक्व होते हैं, उनमें बीज और फल आते हैं, फसल तैयार हो जाती है। क्या यह एक सकारात्मक चीज है? (हाँ।) सर्दियों में तापमान गिर जाता है, मौसम धीरे-धीरे ठंडा हो जाता है और कभी-कभी बर्फ पड़ती है। हालाँकि यह दूसरी ऋतुओं की तरह आनंददायक, आरामदायक या मुक्त नहीं होती, फिर भी सर्दियों में सभी चीजें अपनी ऊर्जा सुरक्षित रख सकती हैं और मानवजाति भी आराम करती है और फिर से स्वस्थ हो उठती है। तो फिर क्या यह नियम एक सकारात्मक चीज है? (हाँ।) सूर्योदय के समय लार्क पक्षी गाते हैं, सुबह-सुबह उठ जाने वाले पक्षी चहचहाते हैं, वे लोगों को याद दिलाते हैं कि सुबह हो गई है और उठ जाने का समय हो गया है, कि उन्हें जीवन के लिए, आजीविका के लिए और मानवजाति की निरंतर उत्तरजीविता के लिए श्रम करना शुरू कर देना चाहिए। क्या यह एक सकारात्मक चीज है? (हाँ।) मानवजाति सुबह-सुबह उठने वाले पक्षियों और लार्क पक्षियों की आवाज सुनकर उठ जाती है और दिन का श्रम शुरू कर देती है। यह एक सकारात्मक चीज है। रात को विभिन्न कीट और जीव अपने-अपने नियमों के अनुसार विभिन्न प्रकार की गतिविधियों में लग जाते हैं—कुछ भोजन के लिए घूमने निकल पड़ते हैं और दूसरे आवाज निकालना शुरू कर देते हैं। इस समय मानवजाति खामोश हो जाती है और धीरे-धीरे नींद में डूब जाती है। झींगुरों की झीं-झीं और उसके साथ विभिन्न जीवों की आवाज और उनकी निशाचर गतिविधियाँ सुनते-सुनते लोग स्वप्नलोक में खो जाते हैं और बहुत आराम से, बहुत आनंदपूर्वक और शांतिपूर्वक सोते हैं। क्या यह एक सकारात्मक चीज है? (हाँ।) लोगों के लिए, ये सकारात्मक चीजें वे चीजें हैं जो बार-बार घटित होती हैं। तुम उनके विभिन्न चिन्ह और संकेत प्राप्त कर सकते हो और तुम उन फायदों को भी महसूस कर सकते हो जो वे तुम्हारे जीवन में लाती हैं और साथ ही उन विभिन्न बदलावों और प्रभावों को भी महसूस कर सकते हो जो वे तुम्हारे लिए लाती हैं जब तुम अपने रोजमर्रा के जीवन में व्यस्त रहते हो। अगर तुम्हारे पास अपने आस-पास की विभिन्न सकारात्मक चीजों के अस्तित्व के प्रति सही अनुक्रिया और उसकी सही समझ है और साथ ही इन सकारात्मक चीजों से पेश आने का सही तरीका भी है तो यह दर्शाता है कि तुम एक ऐसे व्यक्ति हो जिसे उचित-अनुचित की कुछ समझ है, तुम परमेश्वर द्वारा बनाई गई सभी चीजों से बने सजीव पर्यावरण के प्रति अनुक्रियाशील, संवेदनशील और ग्रहणशील हो और अपने आस-पास की इन सभी चीजों के प्रभाव या अपने जीवन में उनके साथ के लिए तुम्हारा हृदय कृतज्ञ है। यह दर्शाता है कि तुम यह महसूस कर सकते हो कि परमेश्वर का अस्तित्व और उसकी बनाई सभी चीजें निर्विवाद रूप से वास्तविक हैं और तुम सभी चीजों से तुम्हें विभिन्न पहलुओं में होने वाले फायदों और अपने ऊपर उनके प्रभाव को महसूस कर सकते हो। अगर तुम ऐसे संदेश प्राप्त कर सकते हो और ऐसी भावनाएँ रख सकते हो तो तुम एक ऐसे व्यक्ति हो जो उचित-अनुचित में अंतर समझ सकता है और उसमें मानवता है। तुम सकारात्मक चीजों को सही ढंग से समझ सकते हो, उनके अनुसार खुद को ढाल सकते हो, उनके साथ चल सकते हो और उनके साथ सह-अस्तित्व में रह सकते हो। और बस यही नहीं है कि तुम्हें ये चीजें घिनौनी नहीं लगती हैं; बल्कि, चूँकि तुम परमेश्वर में विश्वास रखते हो और कुछ सत्य समझते हो, इसलिए तुम और भी ज्यादा आश्वस्त हो कि ये सभी सकारात्मक चीजें परमेश्वर से, सृष्टिकर्ता से आती हैं और तुम इन सकारात्मक चीजों के अस्तित्व के लिए और भी ज्यादा आभारी हो सकते हो। तदनुसार, तुम अपने दिल में नकारात्मक चीजों के प्रति विकर्षण और नफरत महसूस करते हो। तो कुछ नकारात्मक चीजें कौन-सी हैं? (पर्यावरण को प्रदूषित करना, अत्यधिक दोहन।) पर्यावरण को नष्ट और प्रदूषित करना, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, अत्यधिक दोहन और उपयोग—ये सभी नकारात्मक चीजें हैं। इनके अलावा ऐसी और कौन-सी चीजें हैं जो तुम लोगों को नकारात्मक लगती हैं और जिनके लिए तुम्हारे दिलों में स्पष्ट नफरत है? मानवजाति हमेशा प्रकृति पर विजय पाना चाहती है—क्या यह एक सकारात्मक चीज है या नकारात्मक चीज? (नकारात्मक चीज है।) उदाहरण के लिए, कुछ जगहों पर बार-बार चक्रवात आते हैं, इसलिए कुछ लोग हमेशा सोचते हैं, “ये चक्रवात हर जगह धूल उड़ाते फिरते हैं, घरों और खेतों को बरबाद कर देते हैं। उन्हें रोकने के लिए एक दीवार बनाने के लिए हम जो भी चीज आजमा सकते हैं हमें आजमानी होगी, यह दिखाने के लिए कि मानव तकनीक उन्नत है और मानव क्षमताएँ मजबूत हो गई हैं।” क्या यह एक सकारात्मक चीज है या नकारात्मक चीज? (नकारात्मक चीज है।) यह सुनने के बाद तुम लोगों को अपने दिलों में कैसा लगता है? (मुझे लगता है कि लोग अपनी क्षमताओं का वास्तविकता से ज्यादा मूल्यांकन करते हैं।) बिल्कुल यही बात है। कुछ जगहें विशाल घास के मैदानों से ढकी हुई हैं, इसलिए कुछ लोग कहते हैं, “घास के मैदानों में चरवाहे खानाबदोश जीवन जीते हैं और वर्ष भर उन्हें मुश्किल से ही कोई अच्छा भोजन मिलता है। वर्ष का आधा समय वे हमेशा बाहर खुले में रहते हैं, घास के मैदानों में मवेशियाँ और भेड़ें चराते हैं। ये मुश्किल दिन कब समाप्त होंगे? हमें चरवाहों का जीवन बेहतर बनाने के तरीके खोजने होंगे, घास के मैदानों और चरागाहों को भवनों और शहरों में बदलना होगा ताकि चरवाहों को अब और चरवाहे बनकर जीवित न रहना पड़े। तब वे बेहतर जीवन का आनंद ले पाएँगे और देश और सरकार का धन्यवाद करेंगे।” क्या यह एक सकारात्मक चीज है या नकारात्मक चीज? (नकारात्मक चीज है।) क्या तुम लोग यह महसूस कर सकते हो कि ऐसा करना नकारात्मक चीज है? घास के मैदानों को भवनों और शहरों में बदलना—यह एक त्रुटिपूर्ण विचार और दृष्टिकोण है; यह अभ्यास कितना बेतुका है! तुम लोग इस मामले की असलियत नहीं देख सकते, है ना? तुम लोग सोचते हो, “यह सरकार का मामला है, हम इस बारे में कुछ नहीं कर सकते” और तुम लोगों को इस बारे में कुछ भी महसूस नहीं होता। इसके अतिरिक्त, मानवजाति अंतरिक्ष अन्वेषण में हमेशा तरक्की कर रही है, उसे हमेशा चाँद पर जाने, मंगल और बृहस्पति का सर्वेक्षण करने की चाह रहती है। वह सूर्य का भी अन्वेषण करना चाहती है, लेकिन चूँकि सूर्य का तापमान बहुत ही ज्यादा है, इसलिए वह वहाँ नहीं जा सकती। इसलिए वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण पर काबू पाने और चाँद और मंगल तक उड़ान भरने के लिए अंतरिक्ष यान बनाती है। यह एक सकारात्मक चीज है या नकारात्मक चीज? (नकारात्मक चीज है।) यह एक नकारात्मक चीज है। तो क्या ऐसी कोई सकारात्मक चीज है जो विज्ञान से जुड़ी हो? क्या कोई ऐसा दावा है जो सकारात्मक हो और परमेश्वर द्वारा बनाई गई सभी चीजों के प्राकृतिक नियमों के अनुरूप हो? (वैज्ञानिक तरीकों से आविष्कृत और निर्मित कुछ साधन, जैसे कि कंप्यूटर, हमारी कार्यकुशलता में सुधार कर सकते हैं। ये सकारात्मक चीजें हैं।) ये न तो सकारात्मक हैं और न ही नकारात्मक। ये तो बस साधन हैं। इनमें कोई विशेष विचार, सिद्धांत या दलील शामिल नहीं है। हम जिन सकारात्मक और नकारात्मक चीजों के बारे में बात कर रहे हैं, उनमें चीजों का सार और मूलभूत तत्व और साथ ही मानवजाति द्वारा संचालित विभिन्न वैज्ञानिक शोध परियोजनाओं के पीछे के उद्देश्य भी शामिल हैं। इनके आधार पर हम तय करते हैं कि कोई चीज सकारात्मक है या नकारात्मक। तो दूसरी और कौन-सी नकारात्मक चीजें हैं? (फिलहाल मानवजाति सभी चीजों के विकास के नियमों का पालन नहीं करती, बल्कि इन नियमों को बदलने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करती है। उदाहरण के लिए, मुर्गियों को हार्मोन से भरपूर चारा खिलाया जाता है और वे तीस दिनों में बाजार के लिए तैयार हो जाती हैं और बेमौसमी सब्जियाँ और फल उगाए जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे विज्ञान और तकनीक ने उन्नति तो कर ली है, लेकिन इससे सभी चीजों के विकास के नियमों का उल्लंघन होता है और यह लोगों की भोजन की लालसा को संतुष्ट करने के लिए है। यह एक नकारात्मक चीज है।) यह एक नकारात्मक चीज है। कुछ लोग बाघों और शेरों को काबू में करना चाहते हैं। वे देखते हैं कि बाघ भयानक दिखते हैं—बाघ की एक जम्हाई से ही लोग डरकर भाग जाते हैं—इसलिए वे उन्हें काबू में करना और फिर उनके नुकीले दाँत निकालकर अपने आँगन में रखना चाहते हैं जिससे वे कुत्तों की तरह बाघों से अपने घरों की रखवाली करवाएँ। क्या यह एक सकारात्मक चीज है या नकारात्मक चीज? (नकारात्मक चीज है।) यह एक नकारात्मक चीज है। मनुष्य दैहिक सुख की तलाश में विभिन्न वैज्ञानिक उपायों का उपयोग करके और प्राकृतिक नियमों का उल्लंघन करते हुए जो भी करता है और जो भी आविष्कार करता है, वे सभी नकारात्मक चीजें हैं, सकारात्मक नहीं हैं क्योंकि वे मानवजाति को बहुत ज्यादा नुकसान पहुँचाती हैं और वे मानव के जीवन परिवेश को बहुत गंभीर क्षति पहुँचाती हैं। उदाहरण के लिए, कुछ जगहें अत्यधिक शुष्क हैं, इसलिए सरकार वहाँ वर्षा करवाने के लिए बादलों में वर्षा प्रेरक पदार्थों के छिड़काव के लिए हवाई जहाज़ों का उपयोग करती है। क्या यह एक सकारात्मक चीज है या नकारात्मक चीज? (नकारात्मक चीज है।) कुछ जगहों पर बहुत ही ज्यादा वर्षा होती है जिससे बाढ़ आ जाती है, इसलिए सरकार वहाँ हवाई जहाज तैनात करती है ताकि वर्षा को नियंत्रित करने के लिए बादलों को तितर-बितर कर सके। क्या यह प्राकृतिक नियमों का उल्लंघन नहीं करता और उन्हें नष्ट नहीं करता? (हाँ।) प्राकृतिक नियमों को नष्ट करना, प्राकृतिक नियमों का उल्लंघन करना, प्राकृतिक नियमों के अनुरूप नहीं होना, जो भी अच्छा लगे वह करना, उन्नत मानव तकनीक का दिखावा करना—ये नकारात्मक चीजें हैं। इनके अलावा दूसरी और कौन-सी नकारात्मक चीजें हैं? जैविक घटकों और आनुवंशिक संशोधन पर शोध करना एक सकारात्मक चीज है या नकारात्मक? (नकारात्मक चीज है।) आनुवंशिकी पर किए गए वैज्ञानिक शोध के कारण लोग ज्यादा आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य-पदार्थ खा सकते हैं। तो क्या आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य-पदार्थ सकारात्मक चीजें हैं या नकारात्मक? (नकारात्मक चीजें हैं।) तुम यह क्यों कहते हो कि वे नकारात्मक हैं? कुछ लोग कहते हैं, “यह एक वैज्ञानिक उपलब्धि है जिसका लक्ष्य ज्यादा लोगों को खाने के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध करवाना और उन्हें भूखा नहीं रहने देना है। इसके अतिरिक्त, लोग दशकों से आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य-पदार्थ खा रहे हैं और लंबे और सुडौल हो रहे हैं—विशेष रूप से आजकल के युवा लोग पिछली पीढ़ी की तुलना में लंबे हैं। यह सब मानवजाति के लिए विज्ञान के योगदानों की बदौलत है। जब आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य-पदार्थ लोगों के लिए इतने बड़े फायदे लाते हैं तो फिर उन्हें नकारात्मक चीजें क्यों कहा जाता है?” क्या तुम लोग इसे समझा सकते हो? (वैसे तो अब लोग ज्यादा लंबे हैं, लेकिन उनके शारीरिक गठन बिगड़ते जा रहे हैं और उन्हें ज्यादा बीमारियाँ हो रही हैं—यह सब लोगों द्वारा वैज्ञानिक रूप से संसाधित चीजें खाने के कारण है। इसलिए, ये नकारात्मक चीजें हैं।) सतह पर ऐसा लगता है कि आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य-पदार्थ लोगों को फायदा पहुँचाते हैं—लोग ज्यादा लंबे और सुडौल हो गए हैं—लेकिन उनके शारीरिक गठन बिगड़ गए हैं। कुल मिलाकर लोगों पर इनका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, ये उन्हें फायदा पहुँचाने के बजाय नुकसान पहुँचाते हैं। चाहे लोग इन्हें फायदेमंद समझें या नुकसानदेह, ये नकारात्मक चीजें हैं, सकारात्मक चीजें तो बिल्कुल नहीं हैं क्योंकि ये परमेश्वर द्वारा बनाए गए प्राकृतिक नियमों का उल्लंघन करती हैं और उन प्रकार्यों के खिलाफ जाती हैं जो परमेश्वर द्वारा बनाई गई विभिन्न मूल सजीव चीजों द्वारा मानव शरीर में किए जाने थे। हो सकता है कि लोगों पर इनका प्रभाव शुरू में ज्यादा न दिखाई दे, लेकिन बीस साल बाद इसके प्रतिकूल नतीजे प्रकट हो जाते हैं : बहुत-से लोगों को सभी तरह की अजीब बीमारियाँ हो जाती हैं और यहाँ तक कि उनकी प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। यह चीज यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि ऐसे खाद्य-पदार्थ सकारात्मक चीजें नहीं हैं। वैसे तो मानव परिप्रेक्ष्य से आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य-पदार्थ तकनीक के उत्पाद हैं, मानवजाति के लिए विज्ञान का योगदान हैं, लेकिन सकारात्मक और नकारात्मक चीजों के परिप्रेक्ष्य से यह बिल्कुल भी सकारात्मक चीज नहीं है।

मानवजाति हमेशा चंद्रमा पर शोध करने और यह अन्वेषण करने का प्रयास करती रहती है कि क्या कोई दूसरा ग्रह मानव निवास के लिए उपयुक्त है। क्या यह वैज्ञानिक शोध, यह दृष्टिकोण, एक सकारात्मक चीज है या नकारात्मक चीज? (नकारात्मक चीज है।) यह नकारात्मक चीज क्यों है? (परमेश्वर ने मनुष्यों को पृथ्वी पर रहने के लिए बनाया; हमारे लिए उसका यह इरादा कभी नहीं था कि हम दूसरे ग्रहों पर रहें। मनुष्य हमेशा महत्वाकांक्षी होते हैं और हर जगह जाना चाहते हैं। अंततः यह मेहनत की बरबादी है और वे कहीं नहीं जा सकते।) लोगों के परिप्रेक्ष्य से, इन चीजों पर शोध करना काफी सामान्य है; यह मानवजाति के भविष्य के लिए जीवनयापन की स्थितियों को बनाना है, जो कि अच्छी चीज है। परमेश्वर द्वारा पृथ्वी पर स्थापित कई प्रकार्य नष्ट हो चुके हैं; विभिन्न आपदाएँ बार-बार आती हैं, पृथ्वी का जीवन परिवेश क्षतिग्रस्त हो गया है, हवा, पानी और मिट्टी सभी बुरी तरह से प्रदूषित हो चुके हैं और सभी प्रकार के सजीव प्राणी विलुप्ति का सामना कर रहे हैं। पृथ्वी पर रहना मुश्किल हो गया है। इसलिए कुछ वैज्ञानिक शोध संस्थानों ने दूसरे ग्रहों पर शोध करना शुरू कर दिया है, वे उम्मीद करते हैं कि मानवजाति दूसरे ग्रहों पर जा सकेगी और वहाँ बस सकेगी। उनका मानना है कि मानवजाति की भावी पीढ़ियों के जीवित रहने के लिए लोगों को पहले से तैयारी करनी होगी—अगर उन्होंने अभी तैयारी नहीं की और भविष्य में मानवजाति पृथ्वी पर जीवित नहीं रह पाई तो क्या ऐसा नहीं होगा कि मानव प्रजाति के पास बच निकलने का कोई रास्ता ही नहीं बचे? तो क्या यह दृष्टिकोण, यह वैज्ञानिक शोध, अंततः एक नकारात्मक चीज है या सकारात्मक? (नकारात्मक चीज है।) किस आधार पर तुम कहते हो कि यह एक नकारात्मक चीज है? (इस आधार पर कि परमेश्वर ने दूसरे ग्रहों पर मनुष्यों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार की ही नहीं हैं। दूसरे ग्रहों की बात छोड़ो, पृथ्वी पर भी बहुत गर्म और बहुत ठंडी जगहें मनुष्यों के रहने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। लेकिन मनुष्य हमेशा महत्वाकांक्षी होते हैं, हमेशा परमेश्वर की संप्रभुता और परमेश्वर के आयोजनों से अलग होना चाहते हैं, दूसरे ग्रहों पर जाकर रहने की चाह रखते हैं—यह परमेश्वर की व्यवस्थाओं और विधानों के खिलाफ है। इसलिए यह एक नकारात्मक चीज है।) परमेश्वर ने मनुष्यों के लिए पृथ्वी—जो जीवन के लिए एक अद्भुत परिवेश है—बनाई है, लेकिन मनुष्य इसका अच्छी तरह से प्रबंध नहीं करते हैं। वे निरंतर विज्ञान और आधुनिक उद्योग का विकास कर रहे हैं और नतीजतन उन्होंने पृथ्वी के पारिस्थितिक पर्यावरण को नष्ट कर दिया है और हवा, पानी और यहाँ तक कि जमीन को भी प्रदूषित कर दिया है। लोगों के पास जैविक अनाज और सब्जियाँ अब और उपलब्ध नहीं हैं और उन्हें सभी प्रकार की बीमारियाँ हो रही हैं। पृथ्वी पर जीवित रहना मुश्किल हो गया है और अब वे दूसरे ग्रहों पर जाने के बारे में सोच रहे हैं, इस पर विचार नहीं कर रहे हैं कि उनका नश्वर देह वहाँ जाने में समर्थ है भी या नहीं। मनुष्य, ये नश्वर देह वाले प्राणी, सिर्फ पृथ्वी पर रहने के लिए उपयुक्त हैं और सिर्फ पृथ्वी पर ही रह सकते हैं। यह परमेश्वर का विधान है। मनुष्य सिर्फ अपनी विभिन्न जन्मजात स्थितियों पर भरोसा करके जा भी कहाँ सकते हैं? पक्षी अपने पंख फड़फड़ाकर हजारों मीटर ऊँची उड़ान भर सकते हैं, लेकिन मनुष्य खुद उड़ान भरकर वहाँ ऊपर तक नहीं जा सकते; उन्हें हवाई जहाज की मदद की जरूरत होती है। तब भी, हवाई जहाज में उड़ान भरना कभी-कभी खतरनाक होता है। इसलिए मनुष्य पृथ्वी पर रहने के लिए सबसे उपयुक्त हैं। मनुष्य के शारीरिक गुण पृथ्वी की मिट्टी के, और पृथ्वी पर रहन-सहन की स्थितियों के सभी पहलुओं के अनुरूप हैं, जैसे कि सभी चीजें, चारों ऋतुएँ और प्राकृतिक नियम। इसलिए, मानवजाति को सिर्फ पृथ्वीवासी ही कहा जा सकता है। मानव उत्तरजीविता के इन नियमों और रहन-सहन की इन स्थितियों को उस समय मनुष्यों के लिए पूर्वनियत किया गया था जब परमेश्वर ने सभी चीजें बनाईं। इसलिए मानवजाति सिर्फ पृथ्वी पर जीवित रहने के लिए ही उपयुक्त है, दूसरे ग्रहों पर रहने के लिए नहीं। मानवजाति ने पृथ्वी को इस हद तक तबाह और क्षतिग्रस्त कर दिया है कि वह निवास योग्य नहीं है और वे सिर्फ यहाँ से चले जाना चाहते हैं और इससे छुटकारा पाना चाहते हैं, हमेशा दूसरे ग्रहों पर बसने का प्रयास करते रहते हैं। यह एक व्यर्थ संघर्ष है। यह अभ्यास परमेश्वर द्वारा पृथ्वीवासियों के लिए नियत प्राकृतिक नियमों के अनुरूप नहीं है; बल्कि यह पृथ्वीवासियों के लिए भौतिक उत्तरजीविता के नियमों का उल्लंघन करता है और एक बहुत ही अविवेकपूर्ण अभ्यास है। इसलिए यह एक नकारात्मक चीज है। भले ही ऐसे कुछ ग्रह हों जिन पर हवा है और पृथ्वीवासी एक नजर डालने के लिए वहाँ जा सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मानवजाति उन ग्रहों पर जीवित रह सकती है। पृथ्वी पर भी तुम दक्षिणी ध्रुव या उत्तरी ध्रुव पर जाकर एक नजर डाल सकते हो, वहाँ कदम रख सकते हो, लेकिन अगर तुम्हें वहाँ कई सालों तक रहना पड़े तो क्या तुम इसे सह सकते हो? कुछ अपेक्षाकृत गर्म जगहें भी हैं जहाँ वर्ष भर तापमान साठ डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहता है; वे भी मानव उत्तरजीविता के लिए उपयुक्त नहीं हैं। विशेष भौगोलिक पर्यावरणों के कारण पृथ्वी पर मुट्ठीभर जगहों पर लंबे समय तक जीवित रहने के लिए मनुष्य उपयुक्त नहीं हैं, फिर दूसरे ग्रहों पर रहने की तो बात ही छोड़ दो। वह परमेश्वर की व्यवस्थाओं का हिस्सा नहीं है। मानव देह की विशेषताओं के आधार पर यह मानवजाति सिर्फ पृथ्वी पर रहने के लिए ही उपयुक्त है; यह बात प्रमाणित है। परमेश्वर द्वारा पृथ्वी को बनाने का उद्देश्य मानवजाति के लिए एक उपयुक्त जीवन परिवेश की व्यवस्था करना था। अगर तुम ऐसे परिवेश से भागना चाहते हो और कोई दूसरा रास्ता ढूँढ़ना चाहते हो तो इससे सिर्फ विनाश ही होगा। इसलिए यह एक नकारात्मक चीज है। अगर तुम जानते हो कि दूसरे ग्रहों पर रहने के बारे में हमेशा शोध करना एक नकारात्मक चीज है, लेकिन फिर भी तुम अपने दिल में, मानवजाति द्वारा दूसरे ग्रहों पर रहने का तरीका ढूँढ़ने के लिए वैज्ञानिक शोध करने को स्वीकृति देते हो तो यह प्रमाणित करता है कि तुम्हारी मानवता में कोई समस्या है, तुम उचित-अनुचित में अंतर नहीं समझते और तुम सही-गलत का भेद नहीं पहचान सकते। अगर तुम स्पष्ट रूप से जानते हो कि यह मार्ग अव्यावहारिक है, लेकिन फिर भी तुम अगले युग में दूसरे ग्रहों पर बसने में समर्थ होने की लालसा और उम्मीद करते हो तो तुम सामान्य व्यक्ति नहीं हो—तुम विचित्र हो।

वह व्यक्ति जो उचित-अनुचित में अंतर समझता है, एक बात तो यह है कि वह सकारात्मक चीजों से प्रेम कर सकता है, उन्हें स्वीकार सकता है और उनकी स्पष्ट समझ रख सकता है। इसके अतिरिक्त, वह नकारात्मक चीजों का भी भेद पहचान सकता है, और चूँकि उसके पास मानवता और विवेक है, इसलिए वह अपने दिल में नकारात्मक चीजों के प्रति विमुखता और नफरत महसूस करता है। यकीनन वह उनका कुछ सत्यों की समझ के आधार पर तिरस्कार भी कर सकता है, आलोचना भी कर सकता है और उन्हें नकार भी सकता है। अगर तुम ऐसा नहीं कर सकते हो इसका मतलब है कि तुम ऐसे व्यक्ति नहीं हो जो उचित-अनुचित में अंतर समझता है। यह भी कहा जा सकता है कि मानवता के लिहाज से तुममें कमी है। अगर अपनी मानवता में तुममें उचित-अनुचित का भेद पहचानने की क्षमता की कमी है तो फिर तुम्हारी मानवता में एक बहुत महत्वपूर्ण स्थिति, एक बहुत महत्वपूर्ण घटक की कमी है। इसका मतलब है कि तुममें सामान्य मानवता नहीं है और तुम्हें एक सच्चा व्यक्ति नहीं कहा जा सकता। हो सकता है कि कुछ लोग कहें, "अभी-अभी दिए गए उदाहरणों में लोगों के दैनिक जीवन की मूलभूत जरूरतों से संबंधित कुछ चीजें शामिल हैं और इनमें विज्ञान भी शामिल है। अगर वे चीजें नकारात्मक चीजें हैं और उनके लिए हमें उनका भेद पहचानने की जरूरत है तो फिर क्या हमें उन्हें अस्वीकार कर देना चाहिए?" यह जरूरी नहीं है। उचित-अनुचित का भेद पहचानने का मतलब है कि तुम्हारे दिल में सकारात्मक और नकारात्मक चीजों का भेद पहचानने की क्षमता है। अपनी मानवता में तुम्हारे पास फैसले के लिए एक मानक है और तुम जानते हो कि कौन-सी चीजें सकारात्मक हैं और कौन-सी चीजें नकारात्मक हैं। तुम्हारे पास एक स्पष्ट रवैया भी है, तुम जानते हो कि सकारात्मक और नकारात्मक चीजों से कैसे पेश आना है। तुम सकारात्मक चीजों को स्वीकार सकते हो, उनके अनुरूप हो सकते हो और उनके अनुसार खुद को ढाल सकते हो और तुम्हारे दिल में उनके प्रति कोई प्रतिरोध या विमुखता नहीं है। जहाँ तक नकारात्मक चीजों की बात है, तुम अपने दिल की गहराइयों से उनका भेद पहचान सकते हो और तुम उनका तिरस्कार कर सकते हो, उनसे विमुख हो सकते हो, उनसे नफरत कर सकते हो और यहाँ तक कि उनके बारे में तुम्हारे अपने दृष्टिकोण भी हो सकते हैं जिनका उपयोग तुम उनकी आलोचना करने के लिए करते हो। उचित-अनुचित का भेद पहचान सकने वाले व्यक्ति का यही रवैया और अभिव्यक्ति होनी चाहिए। लेकिन मान लो कि तुम अपने अंदर से उन चीजों का तिरस्कार करते हो और उनसे नफरत करते हो जो स्पष्ट रूप से सकारात्मक हैं और यहाँ तक कि नकारात्मक चीजों की तुलना में उन्हें साधारण पाते हो और साथ ही उन्हें बहुत ही ज्यादा आम, बहुत ही ज्यादा मामूली और इतना ज्यादा बेकार पाते हो कि उनका जिक्र तक नहीं करते। तुम अपने अंदर से नकारात्मक चीजों की तारीफ भी करते हो, उनकी लालसा भी करते हो, उनके पीछे भी भागते हो और यहाँ तक कि समाज और दुनिया में उन नकारात्मक चीजों का अनुमोदन भी करते हो। और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सत्य पर या भेद पहचानने की क्षमता के सिद्धांतों पर कैसे संगति की जाती है, तुम उन्हें नहीं अपना सकते या उन्हें स्वीकार नहीं सकते। ऐसे में तुम्हारी मानवता सामान्य नहीं है। जब सकारात्मक और नकारात्मक चीजों की बात आती है तब अगर तुम्हारे पास इसलिए कोई धारणा या स्पष्ट दृष्टिकोण नहीं हैं क्योंकि तुम युवा हो और तुम्हारे पास जीवन में अनुभव या अंतर्दृष्टि की कमी है या क्योंकि इन चीजों ने तुम्हें शामिल नहीं किया है या उन्होंने तुम्हारे जीवन में प्रवेश नहीं किया है तो तब भी यह नहीं कहा जा सकता कि तुम ऐसे व्यक्ति हो जो उचित-अनुचित का भेद नहीं पहचान सकता है। लेकिन सकारात्मक चीजें क्या हैं और नकारात्मक चीजें क्या हैं, इस पर संगति करने के बाद अब भी अगर तुम अपने दिल की गहराइयों से सकारात्मक चीजों को स्वीकार नहीं सकते या उनके अनुरूप नहीं हो सकते, बल्कि तुम उनसे विमुखता महसूस करते हो और उनसे नफरत करते हो, जबकि नकारात्मक चीजों के पीछे जोश से भागते हो और उनकी लालसा करते हो तो तुम ऐसे व्यक्ति नहीं हो जो उचित-अनुचित का भेद पहचान सकता है। इस बिंदु से देखा जाए तो यह अत्यंत स्पष्ट है कि ऐसे व्यक्ति में कोई मानवता नहीं है। उचित-अनुचित का भेद पहचानने का यह मामला सकारात्मक और नकारात्मक चीजों के प्रति व्यक्ति की प्रवृत्ति को प्रकट करता है जिससे हमें यह तय करने में मदद मिलती है कि इस व्यक्ति का सही मायने में क्या वर्गीकरण है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसका किससे सामना होता है, अगर उसका झुकाव सकारात्मक चीजों की बजाय नकारात्मक चीजों की तरफ है तो यह स्पष्ट है कि इस व्यक्ति में कोई मानवता नहीं है और उसमें जमीर और विवेक नहीं हैं। मैं ऐसा क्यों कहता हूँ? वह परमेश्वर से आने वाली सकारात्मक चीजों के मूल नियमों और कानूनों की लालसा करने और उनका पालन करने के बजाय बुरी चीजों की लालसा करता है, विभिन्न उपक्रमों, शोध परियोजनाओं या तकनीक के कुछ ऐसे पहलुओं की लालसा करता है जिनका शैतान और दुष्ट मानवजाति हिमायत करती है, जिनका अनुमोदन करती है और जिनमें शामिल रहती है। तो फिर ऐसे लोग निश्चित रूप से गैर-मानव हैं। क्या यह स्पष्ट है? (हाँ।)

परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें