परमेश्वर के दैनिक वचन : देहधारण | अंश 126
देह में परमेश्वर के कार्य का प्रत्येक चरण संपूर्ण युग के उसके कार्य का प्रतिनिधित्व करता है, मनुष्य के काम की तरह किसी समय-विशेष का...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
परमेश्वर में लोगों का विश्वास परमेश्वर से उन्हें एक उपयुक्त मंज़िल प्रदान करवाने, पृथ्वी पर समस्त अनुग्रह दिलवाने, परमेश्वर को अपना सेवक बनाने, परमेश्वर के साथ उनके शांतिपूर्ण, मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखवाने, और उनके बीच कभी भी कोई संघर्ष नहीं होने देने की चाहत है। अर्थात्, परमेश्वर में उनके विश्वास के लिए आवश्यक है कि परमेश्वर उनकी सभी माँगों को पूरा करने का वादा करे, वे जो कुछ भी प्रार्थना करते हैं उन्हें प्रदान करे, ठीक जैसा कि बाइबल में कहा गया है "मैं तुम्हारी सारी प्रार्थनाओं को सुनूँगा।" उन्हें परमेश्वर से अपेक्षा है कि वे किसी का न्याय या किसी के साथ व्यवहार न करे, क्योंकि परमेश्वर हमेशा दयालु उद्धारकर्ता यीशु है, जो लोगों के साथ हर समय और हर स्थान पर अच्छे संबंध रखता है। जिस तरह से वे विश्वास करते हैं, वह इस तरह से है—वे हमेशा बेशर्मी के साथ परमेश्वर से चीज़ें माँगे, वे मानते हैं कि वे चाहे विद्रोही हों या आज्ञाकारी परमेश्वर उन्हें सब कुछ आँख बंद करके प्रदान करेगा। वे परमेश्वर से लगातार एक "कर्ज़" के पुनर्भुगतान की माँग करते हैं और मानते हैं कि परमेश्वर को किसी भी प्रतिरोध के बिना "अपने कर्ज़ का भुगतान" अवश्य करना चाहिए, और तो और उसे दोगुना देना चाहिए; वे मानते हैं कि चाहे परमेश्वर ने उनसे कुछ भी प्राप्त किया हो या नहीं, वह केवल चालाकी से काम निकलवाये जाने के लिए है; वह मनमाने ढंग से गुप्त रूप से लोगों के लिए योजना नहीं बना सकता है, अपने उस विवेक और धर्मी स्वभाव को जैसा चाहे लोगों पर, उनकी अनुमति के बिना, तो बिल्कुल भी प्रकट नहीं कर सकता है जो कई वर्षों से छुपा हुआ है। वे परमेश्वर के सामने आसानी से अपने पापों की स्वीकारोक्ति करते हैं और मानते हैं कि परमेश्वर बस उन्हें पाप-मुक्त कर देगा, और ऐसा करते रहने से तंग नहीं आएगा, और ऐसा हमेशा चलता रहेगा। वे हमेशा परमेश्वर को सिर्फ आदेश देते रहते हैं और मानते हैं कि वह सिर्फ उनकी आज्ञा का पालन करेगा, जैसा कि बाइबल में अभिलिखित है कि वह इसलिये नहीं आया कि मनुष्य द्वारा उसकी सेवा टहल की जाए, परन्तु सेवा टहल करने आया, कि वह मनुष्य का सेवक बनने के लिए आया। क्या तुम लोगों ने हमेशा इस तरह से विश्वास नहीं किया है? जब तुम लोग परमेश्वर से कुछ प्राप्त नहीं कर सकते हो तो तुम लोग भाग जाना चाहते हो। और जब कोई चीज तुम लोगों की समझ में नहीं आती है तो तुम लोग बहुत क्रोधित हो जाते हो, और इस हद तक भी चले जाते हो कि सभी तरह के दुर्वचन कहने लगते हो। तुम लोग परमेश्वर को अपना विवेक और चमत्कार बस पूरी तरह से व्यक्त नहीं करने दोगे, बल्कि इसके बजाय तुम लोग मात्र अस्थायी सुविधा और आराम का आनंद लेना चाहते हो। अब तक, परमेश्वर में तुम लोगों के विश्वास में तुम लोगों का रवैया वही पुराने विचारों वाला रहा है। यदि परमेश्वर तुम लोगों को थोड़ा सा प्रताप दिखाता है तो तुम लोग अप्रसन्न हो जाते हो; क्या तुम लोग अब देखते हो कि तुम लोगों का स्तर कैसा है? ऐसा मत सोचो कि तुम सभी लोग परमेश्वर के प्रति वफ़ादार हो जबकि वास्तव में तुम लोगों के पुराने विचारों में बदलाव नहीं हुआ है। जब तक तुम्हारे साथ कुछ अशुभ नहीं होता है, तब तक तुम सोचते हो कि हर चीज़ आसानी से चल रही है और तुम परमेश्वर को सर्वोच्च शिखर तक प्यार करते हो। लेकिन जब तुम्हारे साथ ज़रा-सा भी अशुभ हो जाता है तो तुम अधोलोक में गिर जाते हो। क्या यही तुम्हारा परमेश्वर के प्रति वफ़ादार होना है?
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, मनुष्य के उद्धार के लिए तुम्हें सामाजिक प्रतिष्ठा के आशीष से दूर रहकर परमेश्वर की इच्छा को समझना चाहिए
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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