Hindi Christian Song | सब कुछ परमेश्वर की संप्रभुता के अधीन है
19 जून, 2026
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परमेश्वर की संप्रभुता के अधीन, उसके अधिकार के कारण और उसके प्रबंधन की खातिर सभी चीजें जन्म लेती हैं, जीवित रहती हैं और नष्ट हो जाती हैं। कुछ चीजें चुपचाप आती हैं और चली जाती हैं और मनुष्य नहीं देख सकता कि वे कहाँ से आई हैं, न ही उन नियमों को समझ सकता है जिनका वे अनुसरण करती हैं और वह उन कारणों को तो बिल्कुल नहीं समझ पाता कि वे क्यों आती हैं और क्यों चली जाती हैं। यद्यपि सभी वस्तुओं के बीच जो कुछ भी घटित होता है, वह सब मनुष्य द्वारा अपनी ही आँखों से देखा जा सकता है, अपने ही कानों से सुना जा सकता है या स्वयं अनुभव किया जा सकता है, फिर भी वह इन घटनाओं के पीछे निहित सृष्टिकर्ता के इरादों और विचारों के बारे में कुछ भी नहीं जानता।
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चूँकि मनुष्य भटक कर सृष्टिकर्ता से बहुत दूर चला गया है और चूँकि वह इस तथ्य को स्वीकार नहीं करता कि सृष्टिकर्ता का अधिकार सभी चीजों पर संप्रभु है, इसलिए वह कभी भी वह सब कुछ नहीं जान और समझ सकेगा जो सृष्टिकर्ता के अधिकार की संप्रभुता के अंतर्गत घटित होता है। परमेश्वर का नियंत्रण और संप्रभुता मानव की कल्पना, मानव के ज्ञान और वह सब कुछ जिसकी प्राप्ति मानवीय विज्ञान कर सकता है, इन सबकी सीमाओं से परे है; ये सृजित मानवजाति की क्षमताओं से परे हैं। कुछ लोग कहते हैं, “तुमने परमेश्वर की संप्रभुता नहीं देखी है—तुम कैसे विश्वास कर सकते हो कि यह सब कुछ उसके अधिकार का नतीजा है?” देखने का मतलब जरूरी नहीं कि विश्वास करना या स्वीकार करना और समझना हो।
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तो विश्वास करना कहाँ से आता है? निश्चय के साथ कहा जा सकता है कि विश्वास लोगों द्वारा चीजों के मूल कारणों और वास्तविकता की समझ और अनुभव के स्तर और गहराई से उत्पन्न होता है। यदि तुम विश्वास करते हो कि परमेश्वर का अस्तित्व है, किंतु तुम सभी चीजों के ऊपर परमेश्वर की संप्रभुता और परमेश्वर के नियंत्रण के तथ्य को स्वीकार नहीं करते हो, इसे देखने की बात तो दूर है, तो तुम अपने हृदय में यह कभी स्वीकार नहीं करोगे कि परमेश्वर के पास इस प्रकार का अधिकार है और परमेश्वर का अधिकार अद्वितीय है और तुम सृष्टिकर्ता को कभी भी अपने प्रभु और अपने परमेश्वर के रूप में सचमुच स्वीकार नहीं करोगे।
—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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