ईसाइयों पर सीसीपी के क्रूर उत्पीड़न के तथ्य, एपिसोड 26 : सीसीपी से बचकर भागते फिर रहे एक ईसाई के 26 साल
12 सितम्बर, 2026
श्यू मिंग पहले एक गृह कलीसिया में उपदेशक थे। 1998 की पतझड़ में, उन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार किया और सुसमाचार का प्रचार करना शुरू कर दिया। 23 दिसंबर 1999 को, सुसमाचार का प्रचार करने के कारण लोगों ने श्यू मिंग की रिपोर्ट कर दी और सीसीपी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। कलीसिया की जानकारी बताने और उनकी आस्था छोड़ने पर मजबूर करने के लिए, पुलिस ने उन्हें बेरहमी से पीटा और यातनाएँ दीं; कैदियों को 40 दिनों तक उनके साथ दुर्व्यवहार करने और उन्हें तड़पाने का आदेश दिया। उनकी बाईं पिंडली बुरी तरह घायल हो गई थी। बाद में, स्थानीय बाजार में एक मंच पर श्यू मिंग की परेड करवाई गई, जहाँ उनकी निंदा की गई, उन्हें नुमाइश के लिए रखा गया और अपमानित किया गया और श्रम शिविर में उनकी तीन साल की सज़ा की घोषणा की गई। मई 2000 में, श्यू मिंग श्रम शिविर से भाग निकले, जिससे भागते फिरने के उनके जीवन की शुरुआत हुई, जो अब तक 26 सालों से जारी है। जून 2025 में, उन्होंने घर लौटने का जोखिम उठाया। कुछ ही देर बाद, पुलिस घर की तलाशी लेने और उनके ठिकानों के बारे में पूछने आ गई, जिससे उन्हें उसी रात फिर से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। आज भी, श्यू मिंग की घर लौटने की हिम्मत नहीं होती। इस एपिसोड में श्यू मिंग द्वारा सहे गए उत्पीड़न और भागते फिरते हुए बिताए गए 26 सालों का उन पर और उनके परिवार पर पड़े प्रभाव का वृत्तांत सुनाया गया है।
00:20 मुख्य अंश
05:06 पुलिस श्यू मिंग के घर में घुसी और उन्हें गिरफ्तार किया
09:15 हिरासत केंद्र में श्यू मिंग से यातना देकर पूछताछ की गई, कैदियों ने उन्हें पीटा और यहाँ तक कि उन्हें एक निंदा सभा का भी सामना करना पड़ा
19:20 श्यू मिंग श्रम शिविर से भागे, पुलिस से बचने के लिए भागते फिर रहे हैं
42:40 मेज़बान के समापन वचन
44:07 अपराधियों की जानकारी
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