Hindi Christian Song | सृष्टिकर्ता मनुष्य के गंतव्य और परिणाम का संप्रभु है और इनकी व्यवस्था करता है
21 अगस्त, 2026
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किसी व्यक्ति का परिणाम या गंतव्य उसकी अपनी इच्छा से तय नहीं होता है, न ही वह उसकी अपनी पसंदगियों या कल्पनाओं से तय होता है। इसमें सृष्टिकर्ता, परमेश्वर का निर्णय अंतिम होता है। इस मामले में लोगों के पास केवल एक मार्ग है जिसे वे चुन सकते हैं : अगर वे सत्य खोजते हैं, सत्य को समझते हैं, परमेश्वर के वचनों का पालन करते हैं, परमेश्वर के प्रति समर्पण हासिल कर पाते हैं और उद्धार प्राप्त करते हैं, केवल तभी अंततः उन्हें एक अच्छा अंत और एक अच्छी नियति प्राप्त होगी। अगर लोग इसके विपरीत करते हैं, तो उनकी संभावनाओं और नियति की कल्पना करना मुश्किल नहीं है।
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यह मत देखो कि परमेश्वर ने मनुष्य से क्या वादा किया है, मानवजाति के परिणाम के बारे में परमेश्वर क्या कहता है, परमेश्वर ने मानवजाति के लिए क्या कुछ तैयार किया है। इनका तुमसे कोई लेना-देना नहीं है, ये परमेश्वर के काम हैं, इन्हें छीनकर, माँगकर या किसी चीज की अदला-बदली के जरिए हासिल नहीं कर सकते हो। एक सृजित प्राणी के रूप में तुम्हें जो करना चाहिए वह है अपना कर्तव्य अच्छे से निभाना, तुम्हें जो कार्य करना चाहिए उसे अपने पूरे दिल, मन और ताकत के साथ करना। बाकी चीजें जिनका संबंध संभावनाओं और नियति और मानवजाति के भावी गंतव्य से है—ऐसी चीजें नहीं हैं जिन्हें तुम तय कर सको, वे परमेश्वर के हाथ में हैं; यह सब सृष्टिकर्ता की संप्रभुता के अधीन आता है, इसकी व्यवस्था वही करता है और इसका किसी भी सृजित प्राणी से कुछ लेना-देना नहीं है।
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तुम्हें एक तथ्य को स्वीकार करना चाहिए : चाहे वह किसी भी तरह का वादा हो, चाहे वह अच्छा हो या साधारण, चाहे वह लोगों की पसंद का हो या कुछ ऐसा जिसमें लोगों की बहुत रुचि न हो, सब कुछ सृष्टिकर्ता की संप्रभुता, व्यवस्थाओं और निर्धारणों के अधीन होता है। सृष्टिकर्ता द्वारा दिखाई गई सही दिशा और राह के अनुसार ही चलना और अनुसरण करना एक सृजित प्राणी का कर्तव्य और दायित्व है। जहाँ तक इस बात का संबंध है कि अंततः तुम्हें क्या प्राप्त होता है और परमेश्वर के वादों में से किस वादे में तुम्हारी हिस्सेदारी है, यह सब तुम्हारे अनुसरण पर, तुम्हारे द्वारा अपनाए मार्ग पर और सृष्टिकर्ता की संप्रभुता पर आधारित है।
—वचन, खंड 4, मसीह-विरोधियों को उजागर करना, मद नौ (भाग नौ)
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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