राज्य का सुसमाचार वार्तालाप मंच, एपिसोड 14 : इंडोनेशियाई ईसाई एल्डर इमैनुएल सेलन के साथ एक विशेष साक्षात्कार
09 अक्टूबर, 2026
इमैनुएल सेलन इंडोनेशिया के एक ईसाई एल्डर थे जिन्होंने वर्षों तक कलीसिया में सेवा की। उन्होंने कलीसिया को फलते-फूलते देखने की लालसा की थी, लेकिन इसके बजाय, उन्होंने इसे अधिकाधिक वीरान होते देखा। उपदेशों में प्रकाश की कमी थी, विश्वासी धीरे-धीरे ठंडे पड़ रहे थे और उन्होंने खुद को पाप करने और कबूलने के चक्र में फँसा हुआ पाया। वे अब पवित्रात्मा के कार्य को महसूस नहीं कर पा रहे थे और अधिकाधिक भटका हुआ महसूस कर रहे थे। वे खुद से पूछते रहते थे : इतने सालों तक प्रभु में विश्वास करने के बाद भी लोग पाप के बंधन से मुक्त क्यों नहीं हो पाते? कलीसिया ने अपना पहले वाला उत्साह क्यों खो दिया है? वह सच्चा मार्ग कहाँ है जो लोगों को पाप से दूर होने और परमेश्वर का उद्धार पाने में सक्षम बनाता है? 2020 में, कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया और कलीसिया की सभाएँ रोक दी गईं। ठीक जब इमैनुएल तत्काल आगे बढ़ने का रास्ता खोज रहे थे, एक अप्रत्याशित अनुभव ने उनकी आस्था के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया। उन्होंने ठीक-ठीक क्या खोजा? क्या उन्हें आस्था के उन सवालों के जवाब मिल गए जिन्होंने उन्हें सालों से परेशान किया था? और नतीजतन लंबे समय तक सेवा करने वाले ये ईसाई एल्डर आस्था के किस तरह के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे? "राज्य का सुसमाचार वार्तालाप मंच" का यह एपिसोड आपको इमैनुएल सेलन के वास्तविक जीवन की आस्था की यात्रा के अंदर ले जाता है।
00:32 एक ईसाई एल्डर की आस्था की यात्रा
03:57 दिशाहीन महसूस करने से लेकर परमेश्वर की सेवा करने तक
10:00 एक जीवंत कलीसिया, फिर भी आध्यात्मिक रूप से सूखी
16:40 अंधकार में प्रकाश की एक किरण
22:04 वर्षों की आस्था के बाद भी विश्वासी पाप से क्यों बँधे हैं?
35:30 वह पल जब उन्होंने प्रभु का स्वागत किया
38:54 प्रभु की वापसी का समाचार साझा करते हुए विरोध का सामना करना
47:25 आस्था का चुनाव, जीवन में एक नाटकीय बदलाव
57:57 अय्यूब के अनुभव ने उन्हें आस्था की एक नई समझ दी
01:14:16 धार्मिक पादरी और एल्डर प्रभु की वापसी का प्रतिरोध क्यों करते हैं?
01:20:05 प्रभु का स्वागत करते समय विश्वासी पादरियों का आँख मूँदकर अनुसरण क्यों नहीं कर सकते?
01:22:43 सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया और धार्मिक कलीसियाओं के बीच क्या अंतर हैं?
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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