Hindi Christian Song | सत्य का अनुसरण करने वाले ही श्रेष्ठ हैं

30 जुलाई, 2026

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जहाँ तक परमेश्वर का सवाल है, वह लोगों को जो कुछ भी देता है और जितना देता है, यह उसी पर निर्भर करता है और समाज में लोगों का जो रुतबा होता है वह भी परमेश्वर द्वारा नियत किया जाता है और यह किसी व्यक्ति द्वारा रचित बिल्कुल भी नहीं होता है। अगर परमेश्वर किसी को पीड़ा और गरीबी से गुजरने देता है तो क्या इसका यह अर्थ है कि उस व्यक्ति के पास बचाए जाने की कोई आशा नहीं है? अगर वह समाज में तुच्छ समझा जाता है और उसकी सामाजिक स्थिति नीची है तो क्या परमेश्वर उसे नहीं बचाएगा? क्या यह हो सकता है कि वह परमेश्वर की नजर में कम पद का है? यह किस चीज पर निर्भर करता है? यह निर्भर करता है उस पथ पर जिस पर यह व्यक्ति चलता है, उसके अनुसरण पर और सत्य और परमेश्वर के प्रति उसके रवैये पर।

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अगर किसी का सामाजिक रुतबा बहुत कम है, उसका परिवार बहुत गरीब है और उसके पास शिक्षा का स्तर कम है, फिर भी वह व्यावहारिक ढंग से परमेश्वर में विश्वास रखता है, और वह सत्य और सकारात्मक चीजों से प्रेम करता है तो परमेश्वर की नजर में वह बड़े मूल्य का है। किसी व्यक्ति का मूल्य—ऊँचा है या नीचा, कुलीन है या नीच—यह किस पर निर्भर करता है? यह इस बात पर निर्भर करता है कि परमेश्वर तुम्हें कैसे देखता है। अगर परमेश्वर तुम्हें किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में देखता है जो सत्य का अनुसरण करता है तो फिर तुम्हारा मूल्य है और तुम मूल्यवान हो—तुम एक बहुमूल्य पात्र हो। अगर परमेश्वर यह देखता है कि तुम सत्य का अनुसरण नहीं करते हो और तुम खुद को उसके लिए सच्चे दिल से नहीं खपाते हो तो फिर तुम मूल्यहीन हो और मूल्यवान नहीं हो—तुम एक तुच्छ पात्र हो।

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चाहे तुम कितने ही उच्च शिक्षित हो या समाज में तुम्हारा रुतबा कितना ही ऊँचा हो, अगर तुम सत्य का अनुसरण नहीं करते हो या इसे समझते नहीं हो तो तुम्हारा मूल्य कभी भी ऊँचा नहीं हो सकता है; भले ही बहुत से लोग तुम्हारा समर्थन करते हों, तुम्हारा उत्कर्ष करते हों और तुम्हारी पूजा करते हों, फिर भी तुम एक कचरा ही हो। ऐसा इसलिए है कि परमेश्वर सत्य है, परमेश्वर धार्मिकता है, जबकि मनुष्य भ्रष्ट है और उसके पास कोई सत्य या धार्मिकता नहीं है और परमेश्वर मनुष्य को अपने मानक के अनुसार मापता है और उसके मापन का मानक सत्य है।

—वचन, खंड 4, मसीह-विरोधियों को उजागर करना, मद सात : वे दुष्ट, धूर्त और कपटी हैं (भाग एक)

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