Hindi Christian Song | परमेश्वर के इरादों के प्रति विचारशील कौन है?
10 जुलाई, 2026
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मनुष्य ने मेरी गर्मजोशी महसूस की है, मनुष्य ने सचमुच मेरी सेवा की है और मनुष्य ने सचमुच मेरे सम्मुख समर्पण किया है, मेरी उपस्थिति में मेरे लिए सब कुछ किया है। फिर भी आज के लोगों द्वारा यह अप्राप्य है; वे अपनी आत्मा में रोने के सिवा कुछ नहीं करते, मानो उन्हें भूखे भेड़िये ने झपट लिया हो, और वे लालसाभरी लाचारी से मुझे बस ताक सकते हैं, बिना रुके मुझे पुकारते हैं। परंतु अंत में, वे अपनी दुर्दशा से बच नहीं पाते हैं। अतीत में लोग मेरी उपस्थिति में प्रतिज्ञाएँ करते थे, मेरी उपस्थिति में स्वर्ग और पृथ्वी के नाम पर कसमें खाते थे कि मेरी दयालुता को अपने स्नेह से चुकाएंगे। वे मेरे सम्मुख बिलख-बिलखकर रोते थे, और उनके रोने की चीखें हृदय-विदारक थीं, उन्हें सह पाना कठिन था। उनके संकल्प के कारण, मैं प्रायः लोगों को सहायता प्रदान करता था। अनगिनत बार, लोग मेरे प्रति समर्पण करने के लिए मेरे सम्मुख आए हैं, उनका प्यारा-सा अंदाज भूल पाना कठिन है। अनगिनत बार, उन्होंने मुझसे प्रेम किया है, वे अपनी निष्ठा में अविचल हैं, उनकी सच्ची भावना प्रशंसनीय है। अनगिनत बार, उन्होंने अपने जीवन का बलिदान करने की हद तक मुझसे प्रेम किया है, उन्होंने खुद से अधिक मुझसे प्रेम किया है—और उनकी नेकनीयती देखकर मैंने उनका प्रेम स्वीकार किया है। अनगिनत बार, उन्होंने मेरी उपस्थिति में स्वयं को अर्पित किया है, मेरी खातिर मृत्यु के सामने बेपरवाह रहे हैं, और मैंने उनके ललाट से चिंता मिटाई है और उनके मुखमंडलों को बड़े ध्यान से देखा है। ऐसा अनगिनत बार हुआ है जब मैंने एक संजोए हुए खजाने की तरह उन्हें प्रेम किया है, और ऐसा भी अनगिनत बार हुआ है जब मैंने उनसे अपने शत्रु की तरह नफरत की है। फिर भी, मेरे मन में जो है वह मनुष्य की समझ से बाहर है।
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जब लोग दुखी होते हैं, मैं उन्हें सांत्वना देने आता हूँ, और जब वे कमजोर होते हैं, उनकी सहायता के लिए मैं उनके पास आ जाता हूँ। जब वे भटक जाते हैं, मैं उन्हें दिशा देता हूँ। जब वे बिलख-बिलखकर रोते हैं, मैं उनके आँसू पोंछता हूँ। परंतु जब मैं उदास होता हूँ, तब कौन मुझे अपने हृदय से सांत्वना दे सकता है? जब मैं चिंता से व्यग्र होता हूँ, तब कौन मेरे हृदय के प्रति विचारशील है? जब मैं दुखी होता हूँ, तब कौन मेरे हृदय के घाव ठीक कर सकता है? जब मुझे किसी की आवश्यकता होती है, तब कौन मेरे साथ सहयोग करने के लिए स्वेच्छा से आगे आता है? क्या ऐसा हो सकता है कि मेरे प्रति लोगों का पूर्व रवैया अब हमेशा के लिए समाप्त हो चुका है? ऐसा क्यों है कि इसका लेशमात्र भी उनकी स्मृतियों में नहीं बचा है? ऐसा कैसे है कि लोग इन सब चीजों को भूल गए हैं? क्या यह सब मानवजाति के शत्रु द्वारा उसकी भ्रष्टता की वजह से नहीं है?
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन, अध्याय 27
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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