परमेश्वर ने मनुष्य के साथ एक वाचा बाँधने के लिए अपने वचनों को उपयोग किया।

(उत्पत्ति 9:11-13) "और मैं तुम्हारे साथ अपनी यह वाचा बाँधता हूँ कि सब प्राणी फिर जल-प्रलय से नाश न होंगे। और पृथ्वी के नाश करने के लिए फिर जलप्रलय न होगा।" फिर परमेश्वर ने कहा, "जो वाचा मैं तुम्हारे साथ, और जितने जीवित प…

2018-08-06 23:09:05

सृष्टिकर्ता के कथनों की अद्वितीय रीति और गुण सृष्टिकर्ता के अधिकार और अद्वितीय पहचान का एक प्रतीक हैं

परमेश्वर की आशीषें 1) (उत्पत्ति 17:4-6) "देख, मेरी वाचा तेरे साथ बन्धी रहेगी, इसलिए तू जातियों के समूह का मूलपिता हो जाएगा। इसलिए अब से तेरा नाम अब्राम न रहेगा परन्तु तेरा नाम अब्राहम होगा क्योंकि मैं ने तुझे जातियों …

2018-08-06 23:17:07

सृष्टिकर्ता के अधिकार को समय, स्थान, या भूगोल द्वारा विवश नहीं किया जा सकता है, और न ही उसके अधिकारों का मूल्यांकन किया जा सकता है

आओ हम उत्पत्ति 22:17-18 को देखें। यह यहोवा परमेश्वर के द्वारा बोला गया एक और अंश है, जिसमें उसने अब्राहम से कहा, "इस कारण मैं निश्चय तुझे आशीष दूँगा; और निश्चय तेरे वंश को आकाश के तारागण, और समुद्र के तीर के बालू के समान…

2018-08-06 23:24:20

सभी चीज़ों व प्राणियों के ऊपर सृष्टिकर्ता के नियन्त्रण और प्रभुत्व की सच्चाई सृष्टिकर्ता के अधिकार के सच्चे अस्तित्व के विषय में बोलते हैं

अय्यूब के ऊपर यहोवा की आशीष अय्यूब की पुस्तक में दर्ज है। परमेश्वर ने अय्यूब को क्या दिया था? "और यहोवा ने अय्यूब के पिछले दिनों में उसको अगले दिनों से अधिक आशीष दी; और उसके चौदह हज़ार भेड़ बकरियाँ, छः हज़ार ऊँट, हज़ार जोड़ी …

2018-08-06 23:42:03

शैतान को परमेश्वर की आज्ञा

(अय्यूब 2:6) यहोवा ने शैतान से कहा, "सुन, वह तेरे हाथ में है, केवल उसका प्राण छोड़ देना।" शैतान ने कभी सृष्टिकर्ता के अधिकार का उल्लंघन करने की हिम्मत नहीं की है, और इसी वजह से, सभी जीवित प्राणी व्यवस्था के अनुसार रहते…

2018-08-06 23:46:57

केवल परमेश्वर ही, जिसके पास सृष्टिकर्ता की पहचान है, अद्वितीय अधिकार रखता है

शैतान की "विशिष्ट" पहचान ने बहुत से लागों से उसके विभिन्न पहलुओं के प्रकटीकरण में गहरी रूचि का प्रदर्शन करवाया है। यहाँ तक कि बहुत से मूर्ख लोग भी हैं जो यह विश्वास करते हैं कि, परमेश्वर के साथ ही साथ, शैतान भी आधिकार रख…

2018-08-07 00:37:32

यद्यपि मानवजाति को भ्रष्ट किया जा चुका है, फिर भी वह सृष्टिकर्ता के अधिकार की संप्रभुता के अधीन रहता है

शैतान हज़ारों सालों से मानवजाति को भ्रष्ट करता आया है। उसने बेहिसाब मात्रा में बुराईयाँ की हैं, पीढ़ियों के बाद पीढ़ियों को धोखा दिया है, और संसार में जघन्य अपराध किए हैं। उसने मनुष्य का ग़लत इस्तेमाल किया है, मनुष्य को धोखा…

2018-08-07 00:43:24